कक्षा 11 इतिहास अध्याय 2 तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. प्रिंसिपेट क्या था?

उत्तर: प्रिंसिपेट वह व्यवस्था थी जो ऑगस्टस ने 27 ई.पू. में स्थापित की, जिसमें वह अकेला शासक था पर यह दिखावा बनाए रखा गया कि वह सिर्फ़ प्रिंसेप्स यानी सैनेट का ‘प्रमुख नागरिक’ है।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. पैपाइरस क्या था?

उत्तर: मिस्र में नील नदी के किनारे उगने वाला एक नरकट जैसा पौधा, जिसे प्रोसेस करके पूरे रोमन संसार में इस्तेमाल होने वाली लेखन सामग्री बनाई जाती थी।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. रोमन साम्राज्य की उत्तरी और दक्षिणी सीमा किससे बनती थी?

उत्तर: उत्तर में राइन और डैन्यूब नदियाँ, और दक्षिण में सहारा मरुस्थल।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. दीनार क्या था?

उत्तर: लगभग साढ़े चार ग्राम शुद्ध चाँदी वाला एक रोमन सिक्का, जो साम्राज्य की पहली तीन सदियों की मुद्रा-व्यवस्था की रीढ़ था।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. Transhumance यानी मौसमी चरवाही क्या है?

उत्तर: चरवाहों का हर साल ऊँचे पहाड़ी चरागाहों और नीची ज़मीन के बीच अपने पशुओं के लिए चारे की तलाश में होने वाला नियमित आवागमन।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. ह्यूमिलिओरिस कौन थे?

उत्तर: साम्राज्य के निम्न वर्गों का विशाल समूह : बड़ी जागीरों के ग्रामीण मज़दूर, खनन और औद्योगिक मज़दूर, प्रवासी और आकस्मिक मज़दूर, शिल्पकार और दास।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. सॉलिडस क्या था?

उत्तर: कॉन्स्टैनटाइन द्वारा चलाया गया साढ़े चार ग्राम शुद्ध सोने का सिक्का, जो देर के साम्राज्य की मुद्रा बना और ख़ुद साम्राज्य से भी ज़्यादा टिका।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. ‘देर पुरातनता’ से इतिहासकारों का क्या आशय है?

उत्तर: रोमन साम्राज्य के विकास और विघटन का अंतिम, बदलाव भरा दौर, मोटे तौर पर चौथी से सातवीं सदी तक।

प्रश्न 9 (1 अंक)

प्र. चीनी लोग ‘ता-चिन’ से क्या आशय रखते थे?

उत्तर: ‘बृहत्तर चीन’, यानी वह पूरा पश्चिमी संसार जिसे रोम और ईरान ने आपस में बाँट रखा था।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. रोमन सेना को पेशेवर सेना क्यों कहा जाता है, और वह ईरान की सेना से कैसे अलग थी?

उत्तर: रोमन सैनिकों को राज्य वेतन देता था और वे कम-से-कम 25 साल की सेवा के लिए भर्ती होते थे, इसलिए सैनिक होना एक पेशा था, कोई कर्तव्य भर नहीं। ईरान की सेना ज़बरन भर्ती से बनती थी, इसीलिए वेतनभोगी पेशेवर सेना को एक विशिष्ट रोमन पहचान माना जाता है।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. रोम और ईरान ने दुनिया आपस में कैसे बाँट रखी थी?

उत्तर: मसीह के जन्म से 630 के दशक तक रोम ने भूमध्यसागर के चारों ओर यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के ज़्यादातर हिस्से पर राज किया, जबकि ईरान कैस्पियन सागर के दक्षिण से पूर्वी अरब तक और कभी-कभी अफ़गानिस्तान के बड़े हिस्से तक फैला था। दोनों के क्षेत्र फ़रात नदी के किनारे की एक पतली पट्टी भर से अलग होते थे।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. अध्याय के अनुसार ‘रोमन नगर’ किसे कहते थे?

उत्तर: वह शहरी केंद्र जिसके अपने मजिस्ट्रेट, अपनी नगर परिषद और एक ‘क्षेत्र’ होता था जिसमें उसके अधीन गाँव आते थे। एक नगर कभी दूसरे नगर के क्षेत्र में नहीं आ सकता था, पर गाँव लगभग हमेशा किसी-न-किसी नगर के अधीन होते थे।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. सैनेट रोमन सेना से डरती और नफ़रत क्यों करती थी?

उत्तर: सेना पूरे साम्राज्य का सबसे बड़ा संगठित समूह थी और सम्राट की क़िस्मत तय कर सकती थी, इसलिए सैनेट सदस्यों को वह अप्रत्याशित हिंसा का स्रोत लगती थी। तीसरी सदी में यह नाराज़गी और बढ़ी, जब सेना का ख़र्च उठाने के लिए भारी कर लगाने पड़े।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. एम्फ़ोरा क्या थे, और पुरातत्त्वविद इन्हें सबूत के रूप में कैसे इस्तेमाल करते हैं?

उत्तर: एम्फ़ोरा वे मटके या पात्र थे जिनमें शराब और जैतून तेल जैसे तरल पदार्थ भूमध्यसागर पार भेजे जाते थे। किसी टुकड़े की मिट्टी को उसकी मूल मिट्टी की खान से मिलाकर पुरातत्त्वविद बता सकते हैं कि वह कहाँ और अक्सर कब बना, और इस तरह पता चलता है कि किस क्षेत्र के उत्पादक किससे बाज़ार छीन रहे थे।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. ‘ड्रेसल-20’ क्या था, और इसके मिलने के स्थान क्या बताते हैं?

उत्तर: ड्रेसल-20 मुख्यतः स्पेनी जैतून तेल ढोने वाला पात्र था, जिसका नाम पुरातत्त्वविद हेनरिक ड्रेसल के नाम पर पड़ा। भूमध्यसागर भर में इसके व्यापक अवशेष दिखाते हैं कि स्पेनी तेल कितनी दूर तक पहुँचा और यह भी कि स्पेनी उत्पादकों ने अपने इतालवी प्रतिद्वंद्वियों से बाज़ार छीन लिया था, लगभग पक्का बेहतर तेल कम क़ीमत पर देकर।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. रोम के सार्वजनिक निर्माण कार्यों में मुक्त श्रम का इतना इस्तेमाल क्यों होता था?

उत्तर: क्योंकि व्यापक दास-श्रम कहीं ज़्यादा महँगा पड़ता। दास को साल भर खिलाना-पिलाना और रखना पड़ता था, जबकि वेतनभोगी मज़दूर ज़रूरत पर रखे और काम ख़त्म होने पर हटाए जा सकते थे, इसलिए बड़े कामों के लिए मुक्त मज़दूरी सस्ती पड़ती थी।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. ईसाईकरण से क्या आशय है?

उत्तर: वह प्रक्रिया जिससे ईसाई धर्म आबादी के अलग-अलग वर्गों में फैला और साम्राज्य का प्रमुख धर्म बन गया। यह धीमा और असमान था : बहुदेववाद लंबे समय तक बना रहा, ख़ासकर पश्चिमी प्रांतों में।

प्रश्न 9 (2 अंक)

प्र. कॉन्स्टैनटाइन ने सॉलिडस क्यों चलाया, और उसने किसकी जगह ली?

उत्तर: साम्राज्य की पहली तीन सदियों की मुद्रा-व्यवस्था चाँदी पर टिकी थी, पर स्पेन की चाँदी की खानें ख़त्म हो जाने से वह व्यवस्था चलाई नहीं जा सकती थी। इसलिए कॉन्स्टैनटाइन ने सोने पर आधारित नई व्यवस्था खड़ी की, जिसके केंद्र में साढ़े चार ग्राम का सॉलिडस था, और यह लाखों की संख्या में ढाला गया।

प्रश्न 10 (2 अंक)

प्र. रोमन क़ानून की परंपरा सबसे डरावने सम्राटों पर भी लगाम कैसे लगा सकती थी?

उत्तर: रोमन राज्य निरंकुश था और विरोध का जवाब आमतौर पर हिंसा से देता था, फिर भी चौथी सदी तक रोमन क़ानून की एक मज़बूत परंपरा बन चुकी थी जिसका सम्मान सम्राटों से भी अपेक्षित था। यह इतनी मज़बूत थी कि एम्ब्रोस जैसे शक्तिशाली बिशप आम लोगों के साथ सख़्त बर्ताव पर सम्राटों से सीधे टकरा सकते थे, और ऊँचे अधिकारियों व प्रांतीय गवर्नरों की ज़बरन वसूली रोकने के लिए बने क़ानून ख़ुद इसी परंपरा का सबूत हैं।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. रोमन साम्राज्य का इतिहास लिखने के लिए इतिहासकार किन तीन प्रकार के स्रोतों का इस्तेमाल करते हैं?

उत्तर: 1. पाठ। समकालीन लोगों के लिखे इतिहास, जिन्हें ‘annals’ कहा जाता है क्योंकि वे साल-दर-साल घटनाएँ बताते हैं, साथ ही पत्र, भाषण, उपदेश और क़ानून।
2. दस्तावेज़। मुख्यतः शिलालेख और पैपाइरस। शिलालेख पत्थर पर खुदे होते थे, इसलिए यूनानी और लातिन दोनों में बहुत-से बच गए। पैपाइरस मिस्र के एक नरकट से बनी लेखन सामग्री है, और इसका अध्ययन करने वाले विद्वान papyrologist कहलाते हैं।
3. भौतिक अवशेष। इमारतें, स्मारक, मिट्टी के बर्तन, सिक्के, मोज़ेक और यहाँ तक कि पूरे-के-पूरे परिदृश्य, जो पुरातत्त्वविदों को खुदाई, सर्वेक्षण और हवाई फ़ोटोग्राफ़ी से मिलते हैं।
4. इनकी सीमा। हर तरह का स्रोत अकेले सिर्फ़ इतना ही बता सकता है, इसलिए तीनों को मिलाकर पढ़ा जाता है, और यह कितनी अच्छी तरह होता है, यह इतिहासकार के अपने कौशल पर निर्भर करता है।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. प्रारंभिक रोमन साम्राज्य की राजनीति में सम्राट, सैनेट और सेना की भूमिका समझाइए।

उत्तर: 1. सम्राट। अकेला शासक और सत्ता का असली स्रोत, हालाँकि ऑगस्टस ने इस पद को ‘प्रमुख नागरिक’ का रूप देकर पेश किया। उत्तराधिकार जहाँ तक संभव हो वंश-परंपरा से चलता था, प्राकृतिक या दत्तक, जैसे ऑगस्टस के गोद लिए उत्तराधिकारी टिबेरियस के मामले में।
2. सैनेट। सबसे धनी ज़मींदार परिवारों की आजीवन सदस्यता वाली संस्था, जिसके हाथ में गणतंत्र के दौर में असली सत्ता थी। यह अभिजात वर्ग का प्रतिनिधित्व करती थी, और चूँकि बचे हुए ज़्यादातर इतिहास सैनेट सदस्यों ने लिखे, इसलिए स्रोतों में सम्राटों को इसी कसौटी पर तौला जाता है कि उन्होंने सैनेट के साथ कैसा बर्ताव किया।
3. सेना। वेतनभोगी, पेशेवर, चौथी सदी तक 6,00,000 की, और साम्राज्य का सबसे बड़ा संगठित समूह। यह सम्राट को बना या बिगाड़ सकती थी और बेहतर वेतन के लिए, कभी-कभी विद्रोह करके भी, आंदोलन करती थी।
4. तीनों का संतुलन। सम्राट की सफलता सेना पर नियंत्रण से तय होती थी, और सेना ख़ुद बँट जाए तो नतीजा आमतौर पर गृहयुद्ध होता था।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. आश्रित राज्य रोमन साम्राज्य में कैसे मिलाए गए, और यह तरीक़ा युद्ध से ज़्यादा आम क्यों था?

उत्तर: 1. आश्रित राज्य क्या था। ऐसा ‘अधीन’ राज्य जिसका शासक अपनी सेनाएँ रोम के समर्थन में लगाता था और बदले में अपने अस्तित्व की गारंटी पाता था। मध्य पूर्व में ऐसे राज्यों की भरमार थी।
2. वे कैसे ख़त्म हुए। रोमन शासन इन्हें लड़कर नहीं, बल्कि धीरे-धीरे प्रांतीय क्षेत्र में मिलाकर फैला। दूसरी सदी के शुरू तक फ़रात के पश्चिम में ऐसा एक भी राज्य नहीं बचा था।
3. यही रास्ता क्यों। पहली दो सदियों में बाहरी युद्ध कम ही होते थे, और एकमात्र बड़ा विस्तार-प्रयास, त्राजान का 113-17 ई. का फ़रात-पार अभियान, उसके अपने उत्तराधिकारियों ने बेकार समझकर छोड़ दिया।
4. रोम को क्या मिला। बिना युद्ध के भारी संपत्ति : अकेले हेरॉड के राज्य से हर साल लगभग 54 लाख दीनार मिलते थे, जो 1,25,000 किलोग्राम से ज़्यादा सोने के बराबर था।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. तीसरी सदी के संकट के कारण और लक्षण बताइए।

उत्तर: 1. ईरान। 225 ई. में कहीं ज़्यादा आक्रामक नया ससानी वंश उभरा और सिर्फ़ पंद्रह साल में फ़रात की ओर बढ़ आया। शापुर प्रथम के अपने शिलालेख में, जो तीन भाषाओं में खुदा है, दावा है कि उसने 60,000 की रोमन सेना का सफ़ाया कर दिया और एंटिऑक पर क़ब्ज़ा कर लिया।
2. उत्तरी सीमाएँ। जर्मन क़बायली संघ, ख़ासकर अलामानी, फ़्रैंक और गोथ, 233 से 280 ई. के बीच काला सागर से दक्षिणी जर्मनी तक की प्रांतों की पूरी लाइन पर हमला करते रहे।
3. कई मोर्चों पर लड़ाई। 230 के दशक से साम्राज्य को पूर्व और उत्तर, दोनों तरफ़ एक साथ दबाव झेलना पड़ा, और डैन्यूब के पार का क्षेत्र छोड़ना पड़ा।
4. सबसे साफ़ लक्षण। सिर्फ़ 47 साल में 25 सम्राटों का राज करना, जो बताता है कि राजनीतिक स्थिरता कितनी टूट चुकी थी।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. रोमन समाज में स्त्रियों की क़ानूनी स्थिति क्या थी, और उसके साथ-साथ कौन-सी असमानताएँ बनी रहीं?

उत्तर: 1. संपत्ति। देर के गणतंत्र में पत्नी की संपत्ति उसके अपने मायके के अधिकार में रहती थी, इसलिए वह पिता की मुख्य उत्तराधिकारी बनी रहती और पिता की मृत्यु पर स्वतंत्र संपत्ति-स्वामी बन जाती थी। क़ानूनी तौर पर विवाहित जोड़ा दो अलग वित्तीय इकाइयाँ था और पत्नी को पूरी स्वतंत्रता हासिल थी।
2. दहेज और तलाक़। दहेज पति के पास विवाह चलने तक ही रहता था, और तलाक़ के लिए पति या पत्नी में से किसी एक की इच्छा-सूचना काफ़ी थी।
3. उम्र और चुनाव की असमानता। विवाह आमतौर पर तय किए जाते थे, और पुरुष बीस के आख़िर या तीस में शादी करते थे जबकि स्त्रियाँ किशोरावस्था के आख़िर या बीस की शुरुआत में ब्याह दी जाती थीं, जिससे घर के भीतर असमानता बनी रहती थी।
4. हिंसा और पिता की सत्ता। ऑगस्टीन बताते हैं कि उनकी अपनी माँ को उनके पिता नियमित रूप से पीटते थे, और उनके शहर की बाक़ी ज़्यादातर पत्नियों पर भी ऐसे ही निशान होते थे। पिता को बच्चों पर बहुत व्यापक क़ानूनी अधिकार था, कुछ चौंकाने वाले मामलों में अवांछित नवजातों पर जीवन-मरण तक का।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. रोमन मालिक अपने श्रमिकों पर किन-किन तरीक़ों से नियंत्रण रखते थे?

उत्तर: 1. क़रीबी निगरानी। कोलूमेल्ला ने श्रमिकों को दस-दस के दलों में बाँटने की सलाह दी, ताकि निगरानी आसान हो, और ज़रूरत से दोगुने औज़ार रखने की, ताकि उत्पादन कभी न रुके।
2. तलाशी और बंधन। सिकंदरिया की सुगंधित राल (फ़्रैंककिन्सेंस) की फ़ैक्ट्रियों में मज़दूरों के एप्रन पर सील लगाई जाती, मास्क या घनी जाली पहनाई जाती, और बाहर निकलने से पहले उन्हें उतारकर तलाशा जाता था। वरिष्ठ प्लिनी ने पैरों से बाँधे गए दास-गिरोहों को उत्पादन का सबसे ख़राब तरीक़ा बताकर उनकी निंदा की।
3. दाग़ लगाना। खेती का काम इतना नापसंद था कि तीसरी सदी के शुरू के एक राज्यादेश में मिस्र के किसानों के गाँव छोड़कर भाग जाने का ज़िक्र है, ताकि उन्हें खेती में न लगना पड़े; और 398 ई. के एक क़ानून ने मज़दूरों पर दाग़ लगाने का आदेश दिया, ताकि भागने पर उन्हें पहचाना जा सके।
4. क़र्ज़-बंधन। मालिक मज़दूरों के साथ समझौतों को क़र्ज़-अनुबंध का रूप दे देते थे, जिससे, दूसरी सदी के एक लेखक के शब्दों में, हज़ारों लोग स्वतंत्र होते हुए भी ख़ुद को बंधुआ मज़दूरी में सौंप देते थे। ऑगस्टीन के एक पत्र में माता-पिता द्वारा बच्चों को 25 साल की बंधुआ मज़दूरी में बेचने का ज़िक्र है।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. प्रारंभिक रोमन साम्राज्य का सामाजिक पदानुक्रम बताइए, और यह देर के साम्राज्य तक कैसे बदल गया?

उत्तर: 1. टैसिटस का क्रम। सैनेट सदस्य, जिन्हें patres यानी ‘पिता’ कहा जाता था; घुड़सवार वर्ग यानी इक्वाइट्स के प्रमुख सदस्य; बड़े घरानों से जुड़े ‘सम्मानित’ लोग; ‘अस्त-व्यस्त निचला वर्ग’ (plebs sordida), जिसे वे सर्कस और नाटकों का दीवाना बताते हैं; और सबसे नीचे दास।
2. सैनेट और इक्वाइट्स। तीसरी सदी के शुरू तक सैनेट में लगभग 1,000 सदस्य थे, जिनमें लगभग आधे तब भी इतालवी परिवारों से थे। इक्वाइट्स परंपरागत रूप से दूसरा सबसे धनी वर्ग थे, जो ज़मींदार होने के साथ अक्सर जहाज़-मालिक, व्यापारी और बैंकर भी होते थे।
3. बीच और नीचे के वर्ग। शाही सेवा से जुड़ा एक बड़ा समूह, संपन्न व्यापारी और किसान, ह्यूमिलिओरिस से ऊपर आते थे, यानी ग्रामीण, औद्योगिक, प्रवासी और आकस्मिक श्रम के विशाल समूह और हज़ारों दासों से ऊपर।
4. बदलाव। कॉन्स्टैनटाइन के शासन से सैनेट सदस्य और इक्वाइट्स एक ही विस्तारित अभिजात वर्ग में मिल गए, जिसमें कम-से-कम आधे परिवार अफ़्रीकी या पूर्वी मूल के थे। यह वर्ग बेहद धनी था, पर उन सैन्य अभिजात वर्गों से कम शक्तिशाली, जो लगभग पूरी तरह ग़ैर-अभिजात पृष्ठभूमि से आते थे।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. ‘तीन महाद्वीपों में फैले साम्राज्य को चलाने का जवाब शहरीकरण था।’ इस कथन की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: समस्या क्या थी। दूसरी सदी के अपने चरम पर साम्राज्य स्कॉटलैंड से आर्मेनिया की सीमाओं तक और सहारा से फ़रात तक फैला था, जिसमें लगभग 6 करोड़ लोग रहते थे, और इसे चलाने के लिए आधुनिक अर्थों में कोई सरकार-तंत्र मौजूद ही नहीं था।
नगर ही शासन की मशीन थे। भूमध्यसागर के तटों पर बसे बड़े नगर, जिनमें कार्थेज, सिकंदरिया और एंटिऑक सबसे बड़े थे, पूरी साम्राज्यिक प्रणाली के मूल आधार थे। इन्हीं के ज़रिए ‘सरकार’ उन प्रांतीय ग्रामीण इलाक़ों से कर वसूल पाती थी जो साम्राज्य की ज़्यादातर संपत्ति पैदा करते थे।
नगर था क्या। अपने मजिस्ट्रेट, अपनी परिषद और अधीन गाँवों के ‘क्षेत्र’ वाला शहरी केंद्र। किसी गाँव को नगर का दर्जा मिल भी सकता था और छिन भी सकता था, आमतौर पर शाही कृपा या नाराज़गी के निशान के रूप में।
स्थानीय सहयोग। यह तंत्र इसलिए चला क्योंकि स्थानीय अभिजात वर्ग रोमन राज्य के साथ मिलकर अपने ही क्षेत्रों का प्रशासन चलाता और कर वसूलता था।
नगरीय जीवन के फ़ायदे। अकाल में नगर आसपास के गाँवों से कहीं बेहतर सुरक्षित रहता था, जैसा गैलेन के उस विवरण से दिखता है जिसमें नगरवासी पूरे साल का अनाज रख लेते हैं। नगरों में सार्वजनिक स्नानघर थे और मनोरंजन इतना कि एक कैलेंडर साल के 176 दिन तमाशों के दर्ज करता है।
राजनीतिक नतीजा। दूसरी और तीसरी सदी में सत्ता नाटकीय ढंग से इटली से प्रांतों की ओर खिसकी, क्योंकि प्रशासक और सेना-कमांडर अब ज़्यादातर प्रांतीय अभिजात वर्ग से आने लगे थे।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. रोमन साम्राज्य के तीनों महाद्वीपों में फैले आर्थिक विकास का वर्णन कीजिए।

उत्तर: आर्थिक ढाँचा। साम्राज्य के पास बंदरगाह, खदानें, पत्थर की खानें, ईंट-भट्टे और जैतून-तेल के कारख़ाने जैसा ठोस आर्थिक ढाँचा था।
तीन बड़ी वस्तुएँ। गेहूँ, शराब और जैतून तेल भारी मात्रा में व्यापार और खपत होते थे, मुख्यतः स्पेन, गॉल के प्रांतों, उत्तरी अफ्रीका और मिस्र से, और कुछ कम इटली से।
माल कैसे जाता था। तरल पदार्थ एम्फ़ोरा में जाते थे। अकेले रोम के मोंटी टेस्टैकियो में 5 करोड़ से ज़्यादा टूटे मटकों के अवशेष माने जाते हैं, और मिट्टी को उसकी खान से मिलाकर पुरातत्त्वविद बता सकते हैं कि किसका तेल किस बाज़ार तक पहुँच रहा था।
बदलता दबदबा। ड्रेसल-20 में जाने वाला स्पेनी जैतून तेल 140-160 ई. में चरम पर था, जिसने गुणवत्ता और क़ीमत दोनों में इतालवी उत्पादकों को पीछे छोड़ा। फिर तीसरी-चौथी सदी में उत्तरी अफ़्रीकी जागीरों का दबदबा रहा, और 425 ई. के बाद पूर्वी प्रांत मुख्य निर्यातक बने।
उपजाऊ और कम विकसित क्षेत्र। स्ट्रैबो और प्लिनी जैसे लेखक कई क्षेत्रों को असाधारण उर्वरता वाला बताते हैं। कैम्पैनिया सबसे अच्छी शराब बनाता था, सिसली और बाइजैकियम रोम को गेहूँ भेजते थे, गैलिली की एक-एक इंच ज़मीन जुती थी, और दक्षिणी स्पेन का बेटिका जागीरों से जैतून तेल पैदा करता था। इनके उलट नुमीडिया में मौसमी चरवाही व्यापक थी और उत्तरी स्पेन में सेल्टिक-भाषी किसान पहाड़ी गाँवों (castella) में रहते थे।
तकनीकी परिपक्वता। अध्याय चेताता है कि इस अर्थव्यवस्था को कम मत आँकिए : जल-शक्ति के विविध उपयोग, जल-चालित चक्कियों में प्रगति, स्पेन की सोने-चाँदी की खानों में इतने बड़े पैमाने पर हाइड्रॉलिक खनन कि उन्नीसवीं सदी तक वैसा फिर नहीं हुआ, सुव्यवस्थित व्यापारिक और बैंकिंग नेटवर्क, और पैसे का व्यापक उपयोग।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. डायोक्लीशियन और कॉन्स्टैनटाइन ने रोमन राज्य को कैसे नया रूप दिया, और इसके बाद के दौर को ‘देर पुरातनता’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर: देर पुरातनता का अर्थ। यह इतिहासकारों का वह शब्द है जो साम्राज्य के विकास और विघटन के अंतिम, बदलाव भरे दौर, मोटे तौर पर चौथी से सातवीं सदी, के लिए इस्तेमाल होता है, और यह सिर्फ़ पतन नहीं बल्कि सांस्कृतिक-आर्थिक हलचल का दौर था।
डायोक्लीशियन (284-305 ई.)। उसने सामरिक या आर्थिक रूप से कम मूल्य के क्षेत्र छोड़कर अति-विस्तार को क़ाबू में किया, सीमाओं को मज़बूत किया, प्रांतीय सीमाएँ फिर से तय कीं, और नागरिक व सैन्य कामकाज अलग किए, जिससे सैन्य कमांडरों (duces) को कहीं ज़्यादा ताक़त मिली। 297 ई. में साम्राज्य को 100 प्रांतों में बाँटा गया।
कॉन्स्टैनटाइन का मुद्रा-सुधार। उसने सोने पर आधारित नई व्यवस्था खड़ी की, जिसका सिक्का साढ़े चार ग्राम शुद्ध सोने का सॉलिडस था, लाखों की संख्या में ढाला गया और ख़ुद साम्राज्य से भी ज़्यादा टिका।
कॉन्स्टैनटाइन का राजनीतिक सुधार। उसने बाइज़ेंटियम की जगह कुस्तुनतुनिया नाम की दूसरी राजधानी बसाई, जो तीन तरफ़ से समुद्र से घिरी थी। नई राजधानी को अपनी सैनेट चाहिए थी, इसलिए चौथी सदी शासक वर्ग के तेज़ विस्तार का दौर बनी।
आर्थिक नतीजे। मुद्रा की स्थिरता और बढ़ती आबादी ने विकास को गति दी : ग्रामीण इलाक़ों में तेल-प्रेस और काँच के कारख़ानों में निवेश, स्क्रू-प्रेस और कई पहियों वाली पनचक्कियों जैसी नई तकनीकें, और पूर्व के साथ लंबी दूरी के व्यापार का पुनर्जीवन। अकेले मिस्र से जस्टीनियन के समय हर साल 25 लाख से ज़्यादा सॉलिडस कर के रूप में मिलते थे, और मध्य पूर्व के ग्रामीण इलाक़े पाँचवीं-छठी सदी में इतने विकसित और घनी बसावट वाले थे कि बीसवीं सदी में भी उतने नहीं थे।
धर्म। कॉन्स्टैनटाइन के ईसाई धर्म को राजधर्म बनाने के फ़ैसले से ईसाईकरण की धीमी प्रक्रिया शुरू हुई। बहुदेववाद लंबे समय तक बना रहा, ख़ासकर पश्चिम में, और यहूदी धर्म साम्राज्य की दूसरी बड़ी और भीतर से विविध परंपरा बना रहा।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. पाँचवीं सदी में पश्चिमी रोमन साम्राज्य क्यों बिखर गया जबकि पूर्वी साम्राज्य टिका रहा?

उत्तर: दो अलग नियतियाँ। पूर्व में समृद्धि ख़ासतौर पर ज़्यादा थी और 540 के दशक की महामारी के बावजूद वहाँ की आबादी छठी सदी तक बढ़ती रही, जबकि पश्चिम राजनीतिक रूप से बिखर गया।
पश्चिम में जर्मन बसावट। गोथ, वैंडल और लौंबार्ड जैसे समूहों ने बड़े पश्चिमी प्रांतों पर क़ब्ज़ा करके ऐसे राज्य बनाए जिन्हें इतिहासकार ‘उत्तर-रोमन’ कहते हैं : स्पेन में विसिगोथ, जिन्हें अरबों ने 711-720 ई. में ख़त्म किया; गॉल में फ़्रैंक, लगभग 511 से 687 ई. तक; और इटली में लौंबार्ड, 568 से 774 ई. तक।
पूर्व में साम्राज्य एकजुट रहा। वहाँ जस्टीनियन (527-65 ई.) का शासनकाल समृद्धि और शाही महत्वाकांक्षा का शिखर माना जाता है। उसने 533 ई. में वैंडलों से अफ्रीका फिर से जीत ली।
पुनःविजय की क़ीमत। ऑस्ट्रोगोथों से इटली वापस लेने में इटली तबाह हो गया और आगे लौंबार्ड आक्रमण का रास्ता खुल गया, यानी पश्चिम की यह वापसी टिकी नहीं।
पूर्वी साम्राज्य का अपना संघर्ष। सातवीं सदी के शुरू में सासानियों ने मिस्र सहित बड़े पूर्वी प्रांतों पर आक्रमण किया, और बाइज़ेंटियम, जैसा पूर्वी साम्राज्य अब कहलाता था, उन्हें 620 के दशक में ही वापस ले सका।
आख़िरी झटका। इस्लाम के विस्तार को, जिसे प्राचीन इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक क्रांति कहा गया है, पैग़ंबर मुहम्मद की मृत्यु के मुश्किल से दस साल बाद, 642 ई. तक पूर्वी रोमन और ससानी दोनों साम्राज्यों के बड़े हिस्से मिल चुके थे।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
पोम्पेई नगर, जो 79 ई. में विसूवियस ज्वालामुखी फटने से दफ़न हो गया था, वहाँ मुख्य सड़कों की दीवारों पर अक्सर विज्ञापन लिखे मिलते थे और पूरे नगर में जगह-जगह दीवार-लेखन पाया गया। इनमें से एक कहता है : “दीवार, मुझे तुझ पर हैरानी है कि तू अब तक ढही नहीं, जबकि तुझे इतना उबाऊ लेखन ढोना पड़ता है।” मिस्र की कहानी अलग है। बचे हुए सैकड़ों पैपाइरस दिखाते हैं कि ज़्यादातर औपचारिक दस्तावेज़, ख़ासकर अनुबंध, पेशेवर लेखकों द्वारा ही लिखे जाते थे, और अक्सर यह भी दर्ज होता था कि फ़लां व्यक्ति ‘पढ़-लिख नहीं सकता।’ फिर भी मिस्र में भी सैनिकों, सेना-अधिकारियों और संपत्ति-प्रबंधकों में साक्षरता कहीं ज़्यादा आम थी।

(क) 1 अंक पोम्पेई किस वर्ष और किस कारण दफ़न हुआ?
उत्तर: 79 ई. में, विसूवियस ज्वालामुखी फटने से।

(ख) 2 अंक पोम्पेई का कौन-सा सबूत बताता है कि वहाँ साधारण साक्षरता व्यापक थी?
उत्तर: मुख्य सड़कों की दीवारों पर लिखे विज्ञापन और पूरे नगर में फैला दीवार-लेखन। ये दोनों राह चलते आम लोगों के पढ़ने के लिए ही लिखे जाते थे, जिसका मतलब है कि बड़ी संख्या में आम लोग इन्हें पढ़ सकते थे।

(ग) 3 अंक मिस्र के पैपाइरस साक्षरता की अलग तस्वीर क्यों देते हैं, और इससे पूरे साम्राज्य के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर: पैपाइरस ज़्यादातर औपचारिक दस्तावेज़ हैं, और वे दिखाते हैं कि अनुबंध आमतौर पर पेशेवर लेखक बनाते थे, साथ में यह भी दर्ज रहता था कि कोई पक्ष पढ़-लिख नहीं सकता। पोम्पेई के साथ रखकर देखें तो साफ़ होता है कि साम्राज्य में साक्षरता एक जैसी नहीं बल्कि जगह-जगह अलग थी : क्षेत्र और समूह, दोनों से फ़र्क़ पड़ता था, यहाँ तक कि मिस्र के भीतर भी सैनिक, सेना-अधिकारी और संपत्ति-प्रबंधक बाक़ी आबादी से कहीं ज़्यादा पढ़े-लिखे थे।

केस स्टडी
“इसके बाद जल्द ही नगर-प्रमुख ल्यूसियस पेडानियस सेकुंडस की हत्या उसके ही एक दास ने कर दी। हत्या के बाद, पुरानी परंपरा के अनुसार उसी छत के नीचे रहने वाले हर दास को मार दिया जाना ज़रूरी था। लेकिन इतनी सारी निर्दोष जानें बचाने को उत्सुक भीड़ जमा हो गई, और दंगा भड़क उठा। सैनेट-भवन घेर लिया गया… [सैनेट सदस्यों में से] फांसी के पक्ष वाले जीत गए। फिर भी पत्थर और मशालें लिए बड़ी भीड़ ने आदेश को अमल में आने से रोक दिया। नीरो ने जनता को एक फ़रमान से फटकारा, और जिस पूरे रास्ते से दोषियों को फांसी के लिए ले जाया गया, उस पर सैनिक तैनात कर दिए।” — टैसिटस, On the Treatment of Slaves

(क) 1 अंक मालिक की हत्या उसके अपने दास द्वारा किए जाने पर पुरानी परंपरा क्या माँग करती थी?
उत्तर: कि उसी छत के नीचे रहने वाले हर दास को मार दिया जाए।

(ख) 2 अंक भीड़ की प्रतिक्रिया रोमन समाज में दास प्रथा को लेकर सोच के बारे में क्या बताती है?
उत्तर: आम रोमन जिन दासों को निर्दोष मानते थे, उन्हें बचाने के लिए दंगा करने और सैनिकों के सामने खड़े होने तक को तैयार थे, यानी यह परंपरा सबको मंज़ूर नहीं थी। दूसरी ओर सैनेट ने फांसी के पक्ष में फ़ैसला दिया और राज्य ने उसे लागू किया, जो दिखाता है कि संस्था के रूप में दास प्रथा को कितनी मज़बूती से बचाया जाता था।

(ग) 3 अंक दास प्रथा रोमन दुनिया में ‘गहरी जड़ें जमाए’ थी। फिर भी समय के साथ उसका महत्व क्यों घटता गया, अध्याय के आधार पर समझाइए।
उत्तर: दास एक निवेश थे, और रोमन लेखक उन्हें ठंडे आर्थिक गणित से तौलते थे : कम-से-कम एक कृषि-लेखक ने सलाह दी कि उन्हें वहाँ इस्तेमाल न करें जहाँ एक साथ बहुत सारे चाहिए हों, जैसे फ़सल कटाई, या जहाँ उनकी सेहत को ख़तरा हो, जैसे मलेरिया। पहली सदी की शांति के साथ युद्ध कम हुए तो नए दासों की आपूर्ति घटी, और मालिक दास-प्रजनन या सस्ती वेतनभोगी मज़दूरी की ओर मुड़े। रोम के सार्वजनिक निर्माण कार्यों में मुक्त श्रम इसीलिए इतना इस्तेमाल हुआ क्योंकि दासों को साल भर खिलाना-पिलाना पड़ता था, जिससे वे महँगे पड़ते थे।