कक्षा 11 इतिहास अध्याय 2 तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य NCERT समाधान (NCERT Solutions) हिंदी में

NCERT की पाठ्यपुस्तक विश्व इतिहास के कुछ विषय के विषय 2 ‘तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य’ के अभ्यास के सभी छह प्रश्न, जैसे वे हिंदी संस्करण में पूछे गए हैं, हर एक के पूरे आदर्श उत्तर के साथ। पाठ के बीच छपे क्रियाकलाप अंत में हल किए गए हैं। पहले ख़ुद उत्तर लिखिए, फिर यहाँ मिलाकर देखिए।

1 नगर या ग्रामीण क्षेत्र?

प्रश्न 1

प्र. यदि आप रोम साम्राज्य में रहे होते तो कहाँ रहना पसंद करते – नगरों में या ग्रामीण क्षेत्र में? कारण बताइये।

उत्तर: मैं नगर में रहना पसंद करता, और अध्याय इस चुनाव के लिए चार ठोस कारण देता है।
1. अनाज की सुरक्षा। अकाल के समय नगर आसपास के गाँवों से कहीं बेहतर सुरक्षित रहता था। चिकित्सक गैलेन बताते हैं कि नगरवासी फ़सल कटते ही पूरे साल भर का अनाज इकट्ठा कर लेते थे, गेहूँ, जौ, सेम और मसूर सब उठा ले जाते थे, और किसानों के लिए बस कुछ दालें बचती थीं, जिससे बसंत तक उन्हें टहनियाँ, कोंपलें और अखाद्य पौधों की जड़ें-कंद खाने पड़ते थे।
2. सुविधाएँ। सार्वजनिक स्नानघर रोमन नगरीय जीवन की ख़ास पहचान थे, और मनोरंजन का पैमाना गाँव में मिल ही नहीं सकता था : एक बचे हुए कैलेंडर के अनुसार साल के 176 दिन तमाशों (स्पेक्टाकुला) से भरे होते थे।
3. अपना शासन और दर्जा। रोमन नगर के अपने दंडनायक और अपनी नगर परिषद होती थी, और किसी गाँव को नगर का दर्जा मिलना शाही कृपा का निशान माना जाता था। नगर में रहने का मतलब था वहाँ रहना जहाँ फ़ैसले होते थे।
4. अवसर। नगर साम्राज्यिक प्रशासन के मूल आधार थे और गाँवों से आने वाला कर इन्हीं से होकर गुज़रता था। इन्हें चलाने वाला स्थानीय अभिजात वर्ग रोम के साथ सहयोग करता था, और दूसरी-तीसरी सदी में इसी प्रांतीय अभिजात वर्ग से साम्राज्य के प्रशासक और सेना-कमांडर आने लगे थे।
दूसरा पक्ष, संक्षेप में। नगरीय जीवन सबके लिए आरामदेह नहीं था। टैसिटस जिसे ‘फूहड़ निम्नतर वर्ग’ (प्लेब्स सोर्डिडा) कहते हैं और सर्कस-नाटकों का दीवाना बताते हैं, वह भी नगरों में ही था, साथ ही बड़ी संख्या में आकस्मिक मज़दूर और हज़ारों दास भी। इसलिए ईमानदार उत्तर यह है कि नगर तभी बेहतर था जब आपके पास कुछ संपत्ति या कोई हुनर हो; सबसे ग़रीबों के लिए फ़र्क़ बहुत कम था।

2 अध्याय में उल्लिखित शहर, नगर, समुद्र और प्रांत

प्रश्न 2

प्र. इस अध्याय में उल्लिखित कुछ छोटे शहरों, बड़े नगरों, समुद्रों और प्रांतों की सूची बनाइये और उन्हें नक़्शों पर खोजने की कोशिश कीजिए। क्या आप अपने द्वारा बनाई गई सूची में संकलित किन्हीं तीन विषयों के बारे में कुछ कह सकते हैं?

उत्तर: अध्याय तीनों महाद्वीपों की जगहों के नाम लेता है। प्रकार के हिसाब से एक कामचलाऊ सूची :

प्रकार अध्याय में आए नाम
शहर और नगर रोम, कार्थेज, सिकंदरिया, एंटिऑक, कुंस्तुनतुनिया (पहले बाइज़ेंटियम), पोम्पेई, रैवेना, दारा, ऐड्रियॉनोपोल, हिप्पो, जेरूसलम, क्तेसिफ़ोन
समुद्र और जलक्षेत्र भूमध्यसागर, काला सागर, कैस्पियन सागर, फ़ारस की खाड़ी
प्रांत और क्षेत्र इटली (कैम्पैनिया और सिसली सहित), स्पेन (दक्षिण में बेटिका), गॉल, ब्रिटेन, उत्तरी अफ्रीका (नुमीडिया, ट्यूनीशिया का बाइजैकियम, त्रिपोलिटानिया, साइरेनाइका), मिस्र, सीरिया, फ़िलिस्तीन और गैलिली, आर्मेनिया, सबसे उत्तर में स्कॉटलैंड, सबसे दक्षिण में सहारा
नदियाँ (हिंदी प्रश्न में नदियाँ नहीं हैं; अंग्रेज़ी संस्करण के प्रश्न में यह वर्ग भी है, इसलिए ये नाम केवल जानकारी के लिए हैं) राइन, डैन्यूब, फ़रात, नील, गुआडलक्विविर, ब्यास

इनमें से तीन के बारे में कुछ और विस्तार से :
(i) कुंस्तुनतुनिया। कॉन्स्टैनटाइन ने बाइज़ेंटियम की जगह (आज के तुर्की में इस्तांबुल) यह दूसरी राजधानी बनाई, जो तीन ओर से समुद्र से घिरी थी, और 324 ई. में इस नगर की स्थापना हुई। नई राजधानी को नई सैनेट चाहिए थी, इसलिए चौथी सदी में शासक वर्गों का तेज़ी से विस्तार हुआ। बाद में यही नगर पूर्वी रोमन साम्राज्य (बाइज़ेंटियम) का केंद्र बना।
(ii) सिकंदरिया। कार्थेज और एंटिऑक के साथ भूमध्यसागर के तीन सबसे बड़े नगरों में से एक। यह दिखाता है कि एक साम्राज्यिक नगर असल में करता क्या था : यह वह केंद्र था जिसके ज़रिए सरकार मिस्र के ग्रामीण इलाक़ों से कर वसूलती थी, और यह एक औद्योगिक नगर भी था, क्योंकि अध्याय श्रमिकों पर कड़ी निगरानी के अपने सबसे तीखे उदाहरण के लिए यहीं की सुगंधित राल (फ्रैंकिन्सेंस) की फ़ैक्ट्रियों की सील लगे एप्रन, मास्क और तलाशी का ज़िक्र करता है।
(iii) बेटिका, दक्षिणी स्पेन। असाधारण उर्वरता के लिए मशहूर प्रांत, जो नदी गुआडलक्विविर के किनारे बसी ‘फ़ुंडी’ नाम की जागीरों से जैतून तेल पैदा करता था। इसका तेल ड्रेसल-20 नाम के पात्र में जाता था और 140-160 ई. में अपने व्यावसायिक चरम पर था; भूमध्यसागर भर में ड्रेसल-20 के व्यापक अवशेष दिखाते हैं कि स्पेनी उत्पादकों ने अपने इतालवी प्रतिद्वंद्वियों से बाज़ार छीन लिया था, लगभग पक्का बेहतर तेल कम क़ीमत पर देकर।

3 रोम की एक गृहिणी की खरीदारी की सूची

प्रश्न 3

प्र. कल्पना कीजिए कि आप रोम की एक गृहिणी हैं जो घर की ज़रूरत की वस्तुओं की खरीदारी की सूची बना रही हैं। अपनी सूची में आप कौन सी वस्तुएँ शामिल करेंगी?

उत्तर: अध्याय ख़ुद बताता है कि भूमध्यसागरीय घर में क्या खपता था, इसलिए यह सूची कल्पना से नहीं, किताब से ही बनाई जा सकती है।
1. तीन मुख्य वस्तुएँ। गेहूँ, शराब और जैतून तेल। ये पूरे साम्राज्य में भारी मात्रा में ख़रीदे-बेचे और खाए-पिए जाते थे, इसलिए किसी भी रोमन सूची में सबसे ऊपर यही आएँगे। गेहूँ सबसे संभवतः सिसली, ट्यूनीशिया के बाइजैकियम या मिस्र से आता, शराब शायद कैम्पैनिया से जो सबसे अच्छी शराब के लिए मशहूर था, और तेल स्पेन से या बाद में उत्तरी अफ्रीका से।
2. बाक़ी खाद्य सामग्री। जौ, सेम, मसूर और दूसरी दालें, जिन सबका नाम गैलेन के उस विवरण में आता है कि नगर के घर फ़सल के बाद क्या-क्या रख लेते थे।
3. पात्र और घरेलू सामान। एम्फ़ोरा, क्योंकि शराब और तेल इन्हीं में आते थे, साथ ही आम मिट्टी के बर्तन, जो इतनी बड़ी मात्रा में बचे हैं कि पुरातत्त्वविद इनसे किसी जगह की तारीख़ और पहचान तय करते हैं।
4. कपड़ा और पहनावा। अध्याय पहनावे को साम्राज्य की सांस्कृतिक विविधता के एक रूप के तौर पर गिनाता है, इसलिए स्थानीय शैली के कपड़े भी सूची में आएँगे।
5. घर के लिए श्रम। आज पढ़ने में यह जितना असहज लगे, रोमन लोग दासों को परिवार का हिस्सा मानते थे, इसलिए किसी संपन्न घर की ख़रीद में दास भी शामिल हो सकते थे, और उन्हें साल भर खिलाना-पिलाना और रखना पड़ता था।
6. भुगतान किससे। दीनारियस, यानी लगभग साढ़े चार ग्राम चाँदी का वह सिक्का जिस पर साम्राज्य की पहली तीन सदियों की अर्थव्यवस्था टिकी थी, और परवर्ती साम्राज्य में सोने का सॉलिडस। चूँकि गणतंत्र के परवर्ती काल की पत्नी अपनी संपत्ति अपने ही मायके के अधिकार में रखती थी और पिता की मृत्यु पर स्वतंत्र संपत्ति-स्वामी बन जाती थी, इसलिए वह अच्छी तरह अपने ही पैसे से यह खरीदारी कर सकती थी।

4 रोम ने चाँदी में सिक्के ढालना क्यों बंद किया

प्रश्न 4

प्र. आपको क्या लगता है कि रोमन सरकार ने चाँदी में मुद्रा को ढालना क्यों बंद किया होगा और वह सिक्कों के उत्पादन के लिए कौन-सी धातु का उपयोग करने लगे?

उत्तर:
1. कारण : चाँदी ख़त्म हो गई। साम्राज्य की पहली तीन सदियों की मुद्रा-व्यवस्था दीनारियस पर टिकी थी, यानी लगभग साढ़े चार ग्राम शुद्ध चाँदी वाले सिक्के पर। यह व्यवस्था धातु की लगातार आपूर्ति पर निर्भर थी, और इसका मुख्य स्रोत स्पेन की खानें थीं, जहाँ जल-शक्ति से खुदाई इतने बड़े पैमाने पर हुआ कि उन्नीसवीं सदी तक वैसा फिर नहीं हुआ। जब ये खानें ख़त्म हो गईं, तो सरकार चाँदी पर टिकी मुद्रा-व्यवस्था चला ही नहीं सकती थी, इसलिए चाँदी में ढलाई बंद कर दी गई।
2. जिस धातु की ओर वह मुड़ी : सोना। कॉन्स्टैनटाइन ने सोने पर आधारित नई मुद्रा-व्यवस्था खड़ी की। इसका सिक्का था सॉलिडस, साढ़े चार ग्राम शुद्ध सोने का, जो इतने बड़े पैमाने पर ढाला गया कि लाखों-करोड़ों की संख्या में चलन में रहा।
3. यह बदलाव क्यों काम कर गया। सॉलिडस इतना स्थिर था कि ख़ुद रोमन साम्राज्य से भी ज़्यादा टिका। मुद्रा की स्थिरता और बढ़ती आबादी ने मिलकर परवर्ती पुराकाल में असली आर्थिक विकास को गति दी : पुरातत्व से ग्रामीण इलाक़ों में तेल-प्रेस और काँच के कारख़ानों में निवेश, स्क्रू-प्रेस और कई पहियों वाली पनचक्कियों जैसी नई तकनीकें, और पूर्व के साथ लंबी दूरी के व्यापार का पुनर्जीवन दिखता है। अकेले मिस्र से जस्टीनियन के समय हर साल 25 लाख से ज़्यादा सॉलिडस, यानी लगभग 35,000 पाउंड सोना, कर के रूप में मिलता था, और परवर्ती प्रशासन-तंत्र अपना वेतन ज़्यादातर सोने में पाकर उसे ज़मीन में लगाता था।

5 अगर त्राजान भारत जीत लेता

प्रश्न 5

प्र. अगर सम्राट त्राजान भारत पर विजय प्राप्त करने में वास्तव में सफल रहे होते और रोमवासियों का इस देश पर अनेक सदियों तक क़ब्ज़ा रहा होता, तो क्या आप सोचते हैं कि भारत वर्तमान समय के देश से किस प्रकार भिन्न होता?

उत्तर: यह प्रश्न जानकारी पर टिकी कल्पना माँगता है, इसलिए उत्तर उसी से बनेगा जो अध्याय बताता है कि रोमन शासन ने जिन जगहों पर राज किया, वहाँ असल में किया क्या।
1. असल स्थिति। त्राजान इसके क़रीब भी नहीं पहुँचा। फरगस मिल्लर की दि रोमन नीयर ईस्ट के ज़रिए अध्याय में उद्धृत कैसियस डियो उसे 116 ई. में फ़ारस की खाड़ी के सिरे पर भारत जाने वाले एक व्यापारिक जहाज़ को ललचाई नज़रों से देखते और यह चाहते हुए दिखाता है कि काश वह सिकंदर जितना जवान होता। उसका असली अभियान, 113-17 ई. में फ़रात के पार, उसके उत्तराधिकारियों ने बेकार समझकर छोड़ दिया था।
2. नगर और प्रशासन। रोम नगरों के ज़रिए शासन करता था, आधुनिक अर्थों में किसी सरकार-तंत्र से नहीं। भारतीय नगरों को शायद रोमन नगरों के रूप में गठित किया जाता, हर एक के अपने दंडनायक, अपनी परिषद और अधीन गाँवों का ‘क्षेत्र’ होता, और मौजूदा भारतीय अभिजात वर्ग को रोम के लिए कर वसूलने में शामिल कर लिया जाता, जैसा बाक़ी साम्राज्य में हर जगह हुआ।
3. भाषा और क़ानून। प्रशासन की भाषा लातिनी या यूनानी बनती, जैसी वह पश्चिम और पूर्व में थी। इसका असर अध्याय ख़ुद दिखाता है : लातिनी के फैलने से केल्टिक पहली सदी के बाद लिखा जाना बंद हो गया। रोमन क़ानून, जो चौथी सदी तक सबसे डरावने सम्राटों पर भी लगाम की तरह काम कर सकता था, शायद किसी भी और आयात से ज़्यादा गहरा असर भारतीय क़ानूनी सोच पर छोड़ता।
4. अर्थव्यवस्था। भारत गेहूँ, शराब और जैतून तेल की भूमध्यसागरीय व्यापार-व्यवस्था में खिंच आता, उसकी उपज एम्फ़ोरा में जाती और उसके क्षेत्र ठीक वैसे ही बाज़ार के लिए होड़ करते जैसे बारी-बारी स्पेन, उत्तरी अफ्रीका और पूर्व ने की। रोमन सिक्के, पहले चाँदी के और फिर सोने का सॉलिडस, तथा रोमन बैंकिंग और व्यापारिक नेटवर्क पैसे का इस्तेमाल और फैलाते।
5. समाज। इक्वाइट्स और ह्यूमिलिओरिस जैसे रोमन सामाजिक वर्ग भारतीय वर्गों के ऊपर चढ़ जाते, और रोमन परिवार-क़ानून, जिसमें पत्नी अपनी संपत्ति अपने मायके के अधिकार में रखती थी और पति या पत्नी में से कोई भी सिर्फ़ सूचना देकर विवाह ख़त्म कर सकता था, मौजूदा रीति-रिवाज़ों के साथ बहुत अटपटा बैठता।
6. धर्म। कॉन्स्टैनटाइन के धर्म-परिवर्तन के बाद साम्राज्य काफ़ी हद तक ईसाई हो गया था, इसलिए कई सदियों के रोमन शासन से भारत में शायद कहीं बड़ी और कहीं पुरानी ईसाई आबादी होती।
7. अंत में शायद क्या होता। अध्याय के अपने सबूत बताते हैं कि यह क़ब्ज़ा टिकता नहीं। रोम अपनी सीमाओं के पास के आश्रित राज्यों को ही अपने में मिलाता था और जो क्षेत्र बहुत दूर या बहुत महँगे पड़ते, उन्हें छोड़ देता था; डायोक्लीशियन ने तो जान-बूझकर कम मूल्य के क्षेत्र छोड़े। साम्राज्य के सबसे दूर के छोर पर, उस फ़रात-सीमा के भी पार जो पहले ही रोम के लिए सिरदर्द थी, ऐसा प्रांत ठीक उसी क़िस्म का होता जिसे साम्राज्य संभाल नहीं पाता था।

6 रोमन समाज और अर्थव्यवस्था में क्या ‘आधुनिक’ दिखता है

प्रश्न 6

प्र. अध्याय को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसमें से रोमन समाज और अर्थव्यवस्था को आपकी दृष्टि में आधुनिक दर्शाने वाले आधारभूत अभिलक्षण चुनिए।

उत्तर: अध्याय ख़ुद चेताता है कि ‘प्राचीन’ का मतलब पिछड़ा हुआ नहीं समझना चाहिए, और इसकी कई विशेषताएँ आज भी अजनबी नहीं लगतीं।
1. एकल परिवार। बालिग़ बेटे आमतौर पर माता-पिता के साथ नहीं रहते थे और बालिग़ भाइयों का एक घर साझा करना अपवाद था, इसलिए आम रोमन घर काफ़ी हद तक आज जैसा दिखता था, बस दास भी उसका हिस्सा माने जाते थे।
2. विवाहित स्त्रियों के संपत्ति-अधिकार। पत्नी की संपत्ति पति के नहीं, उसके अपने मायके के अधिकार में रहती थी। वह पिता की मुख्य उत्तराधिकारी बनी रहती और पिता की मृत्यु पर स्वतंत्र संपत्ति-स्वामी बन जाती थी, यानी क़ानूनी तौर पर जोड़ा दो अलग वित्तीय इकाइयाँ था।
3. सूचना भर से तलाक़। विवाह ख़त्म करने के लिए पति या पत्नी में से किसी एक की इच्छा-सूचना काफ़ी थी, जो ज़्यादातर पुरानी व्यवस्थाओं की तुलना में आज के क़रीब है।
4. वेतनभोगी पेशेवर सेना। सैनिक कम-से-कम 25 साल के लिए भर्ती होते और उन्हें राज्य वेतन देता था, और वे बेहतर वेतन-शर्तों के लिए, कभी-कभी विद्रोह करके भी, आंदोलन करते थे, जो आज के संगठित श्रमिक आंदोलन जैसा ही लगता है।
5. वेतनभोगी प्रशासन-तंत्र। परवर्ती प्रशासन के अधिकारी सोने में वेतन पाते और ज़मीन में निवेश करते थे, और भ्रष्टाचार की शिकायतों का जवाब उसे रोकने वाले क़ानूनों से दिया जाता था।
6. पैसे और बैंकिंग का व्यापक इस्तेमाल। सुव्यवस्थित व्यापारिक और बैंकिंग नेटवर्क थे और पैसा हर जगह चलता था, यानी अर्थव्यवस्था क़ीमतों और सिक्कों से चलती थी।
7. वेतनभोगी मज़दूरी। रोम के सार्वजनिक निर्माण में मुक्त श्रम इसीलिए इतना चला क्योंकि दासों को साल भर रखना पड़ता और वे महँगे पड़ते थे; अनैस्टैसियस ने ऊँची मज़दूरी देकर दारा नगर तीन हफ़्तों से भी कम में बनवा दिया, और छठी सदी तक भूमध्यसागर के कई हिस्सों में वेतनभोगी मज़दूरी व्यापक हो चुकी थी।
8. लंबी दूरी का व्यापार और पहचान वाले पात्र। गेहूँ, शराब और जैतून तेल तीन महाद्वीपों में घूमते थे, और ड्रेसल-20 पात्र लगभग आज के ब्रांड जैसा था : उसके आकार और मिट्टी से उत्पादक पहचाना जाता है, और उसके मिलने की जगहें बताती हैं कि स्पेनी उद्योग इतालवी उद्योग से बाज़ार छीन रहा था।
9. औद्योगिक पैमाने की तकनीक। जल-शक्ति के विविध उपयोग, जल-चालित चक्कियाँ, स्क्रू-प्रेस, और स्पेन की खानों में इतने बड़े पैमाने पर जल-शक्ति से खुदाई कि उन्नीसवीं सदी तक वैसा फिर नहीं हुआ।
10. साधारण साक्षरता और विज्ञापन। पोम्पेई की मुख्य सड़कों की दीवारों पर विज्ञापन लिखे मिलते थे और पूरे नगर में दीवार-लेखन था।
11. नगरीय सार्वजनिक सेवाएँ। सार्वजनिक स्नानघर, शहरों तक पानी लाने वाले विशाल जलसेतु, और साल के 176 दिन तमाशों का कैलेंडर, यह सब मिलकर एक असली नगरीय जीवन बनाते हैं।
12. शासकों को सीमित करने वाली क़ानूनी परंपरा। चौथी सदी तक रोमन क़ानून की परंपरा सबसे डरावने सम्राटों पर भी लगाम की तरह काम कर सकती थी, और ऐम्ब्रोस जैसे बिशप आम लोगों के लिए सम्राटों से सीधे टकरा सकते थे।
एक सावधानी। इससे रोम आधुनिक समाज नहीं बन जाता : वह दास प्रथा, क़र्ज़-बंधन और एक निरंकुश राज्य पर टिका था।

7 पाठ के बीच के क्रियाकलाप

अभ्यास के छह प्रश्नों के अलावा पुस्तक में कालक्रम दो (साम्राज्य वाले खंड का कालक्रम, जो इसी विषय से ठीक पहले छपा है) के साथ एक क्रियाकलाप और अध्याय के बीच चार क्रियाकलाप छपे हैं। नीचे इनके उत्तर उसी क्रम में दिए गए हैं जिस क्रम में ये पुस्तक में आते हैं।

कालक्रम दो का क्रियाकलाप

प्र. ऐसी पाँच घटनाएँ/प्रक्रियाएँ बताइए जिनमें लोगों का विभिन्न क्षेत्रों/महाद्वीपों के आर-पार आवागमन रहा। इन घटनाओं/प्रक्रियाओं का अपने समय में क्या महत्त्व था?

उत्तर: कालक्रम दो (लगभग 100 ई.पू. से 1300 ई.) से पाँच ऐसी घटनाएँ/प्रक्रियाएँ:
1. समुद्री मार्गों द्वारा दक्षिण-पूर्वी एशिया से केले पूर्वी अफ़्रीका लाए गए (100-50 ई.पू.)। नाविकों और व्यापारियों ने हिंद महासागर पार किया और एक नई खाद्य-फ़सल अफ़्रीकी खेती का हिस्सा बन गई।
2. चीन में हान साम्राज्य और एशिया से यूरोप तक रेशम मार्ग का विकास (100-50 ई.पू.)। व्यापारी, रेशम जैसा माल और विचार एशिया पार करके भूमध्यसागर तक पहुँचे, जिससे दूर-दूर की अर्थव्यवस्थाएँ जुड़ गईं।
3. उत्तर और मध्य यूरोप के कबीलों का रोमन साम्राज्य पर आक्रमण (400-450) और यूरोप के वैंडल लोगों द्वारा उत्तर अफ़्रीका में राज्य की स्थापना (429)। पूरी की पूरी जातियाँ साम्राज्य में और भूमध्यसागर के पार गईं, पश्चिमी साम्राज्य बिखर गया और उसकी जगह नए राज्य बने।
4. फा-शियन (399) और जुआंग जांग (600-650) की चीन से भारत की यात्रा। तीर्थयात्री और विद्वान दोनों देशों के बीच बौद्ध ग्रंथ और ज्ञान ले गए, और उनके यात्रा-विवरण इतिहासकारों के लिए महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं।
5. कुछ मुसलमानों का अबीसीनिया की ओर प्रवास (615), हज़रत मोहम्मद का मदीना की ओर प्रस्थान (622) और अरबों की सिंध पर विजय (712)। अनुयायियों और सेनाओं के इस आवागमन से इस्लाम और अरब शासन अरब से अफ़्रीका, स्पेन और दक्षिण एशिया तक फैला।
अन्य उदाहरण भी लिए जा सकते हैं: शक और बाख्त्री यूनानियों द्वारा उत्तर-पश्चिम में राज्यों की स्थापना; पश्चिम यूरोप पर समुद्री दस्युओं के आक्रमण; इंग्लैंड में सेंट ऑगस्टीन द्वारा ईसाई धर्म की शुरुआत। ऐसे आवागमन का महत्त्व यह था कि इनसे फ़सलें, तकनीकें, धर्म और भाषाएँ फैलीं, महाद्वीपों के बीच व्यापार के संबंध बने, और अक्सर राज्यों और साम्राज्यों का उत्थान-पतन हुआ।

क्रियाकलाप 1

प्र. रोमन साम्राज्य के राजनीतिक इतिहास में कौन तीन मुख्य ‘खिलाड़ी’ थे? प्रत्येक के बारे में एक-दो पंक्तियाँ लिखिए। रोमन सम्राट अपने इतने बड़े साम्राज्य पर शासन कैसे कर लेता था? इसके लिए किसका सहयोग महत्त्वपूर्ण था?

उत्तर: तीन मुख्य ‘खिलाड़ी’ थे: सम्राट, अभिजात वर्ग (सैनेट) और सेना।
सम्राट: ऑगस्टस (27 ई.पू.) से सम्राट ही एकछत्र शासक और सत्ता का वास्तविक स्रोत था, यद्यपि यह दिखावा बनाए रखा गया कि वह केवल ‘प्रमुख नागरिक’ (प्रिंसेप्स) है; उत्तराधिकार यथासंभव वंश के आधार पर, स्वाभाविक या दत्तक, चलता था।
सैनेट: अभिजात वर्ग यानी रोम और बाद में इटली के सबसे धनी परिवारों, मुख्यतः ज़मींदारों, का प्रतिनिधि निकाय; रोम के ज़्यादातर बचे हुए इतिहास सैनेटर वर्ग के लोगों ने लिखे, और उनमें सम्राटों को इसी से परखा गया कि वे सैनेट के साथ कैसा बर्ताव करते थे।
सेना: कम से कम 25 वर्ष की सेवा वाली वेतनभोगी पेशेवर सेना, साम्राज्य का सबसे बड़ा संगठित निकाय (चौथी शताब्दी तक 6 लाख), जो सम्राटों का भाग्य तय कर सकती थी; सेना के बँटने का परिणाम प्रायः गृहयुद्ध होता था।
इतने बड़े साम्राज्य का शासन: उस समय आधुनिक अर्थ वाली कोई सरकार नहीं थी, इसलिए इसका उत्तर साम्राज्य के शहरीकरण में था। भूमध्यसागर के तटों पर बसे बड़े नगर (कार्थेज, सिकंदरिया, एंटिऑक) शाही व्यवस्था की असली नींव थे, और इन्हीं नगरों के माध्यम से सरकार प्रांतीय ग्रामीण क्षेत्रों पर कर लगाती थी। इसके लिए स्थानीय उच्च वर्गों का सहयोग सबसे महत्त्वपूर्ण था: वे अपने क्षेत्रों का प्रशासन चलाने और वहाँ से कर वसूलने में रोमन राज्य की सक्रिय मदद करते थे, और दूसरी तथा तीसरी शताब्दियों में प्रांतों के उच्च वर्ग ही ज़्यादातर प्रशासक और सेनापति देते थे।

क्रियाकलाप 2

प्र. रोमन साम्राज्य में स्त्रियाँ कहाँ तक आत्मनिर्भर थीं? रोमन-परिवार की स्थिति की तुलना आज के भारतीय-परिवार की स्थिति से करो।

उत्तर: क़ानूनी रूप से रोमन स्त्रियाँ काफ़ी आत्मनिर्भर थीं। गणतंत्र के अंतिम दौर तक विवाह का आम रूप ऐसा था जिसमें पत्नी अपने पति के अधिकार में नहीं जाती थी, बल्कि अपने पिता के परिवार की संपत्ति में अपने पूरे अधिकार बनाए रखती थी; उसका दहेज विवाह की अवधि तक ही पति के पास रहता था, वह अपने पिता की मुख्य उत्तराधिकारी बनी रहती थी और पिता की मृत्यु पर स्वतंत्र संपत्ति-स्वामिनी बन जाती थी। क़ानून की नज़र में दंपती दो अलग वित्तीय इकाइयाँ थे, और पति या पत्नी में से कोई भी केवल विवाह भंग करने की सूचना देकर तलाक़ ले सकता था। व्यवहार में असमानता थी: पुरुष बीस के आख़िर या तीस की शुरुआत में विवाह करते थे और स्त्रियाँ किशोरावस्था के अंत या बीस की शुरुआत में ब्याह दी जाती थीं, विवाह प्रायः तय किए जाते थे, और पत्नियों पर अक्सर पतियों का दबदबा रहता था; ऑगस्टीन बताते हैं कि उनके पिता उनकी माँ को नियमित रूप से पीटते थे। पिताओं का बच्चों पर बहुत क़ानूनी नियंत्रण था, यहाँ तक कि अवांछित शिशुओं के जीवन-मरण का अधिकार भी।
आज के भारतीय परिवार से तुलना: रोमन परिवार एकल परिवार था, जिसमें वयस्क बेटे अलग रहते थे, जबकि भारत में आज भी बहुत से परिवार संयुक्त हैं, यद्यपि नगरों में एकल परिवार आम हो गए हैं। आज का भारतीय क़ानून बेटियों को माता-पिता की संपत्ति में बराबर अधिकार देता है और तलाक़ की अनुमति देता है, पर केवल सूचना से नहीं, अदालत की प्रक्रिया से। तय किए गए विवाह और पति-पत्नी की उम्र में अंतर भारत में भी आम है, जबकि बच्चों पर पिता के जीवन-मरण जैसे किसी अधिकार की भारतीय क़ानून अनुमति नहीं देता। यानी संपत्ति के अधिकारों में रोमन पत्नी अपने समय से आगे थी, पर रोज़मर्रा के जीवन में उसे अक्सर असमानता झेलनी पड़ती थी, जैसी आज भी बहुत-सी भारतीय स्त्रियाँ झेलती हैं।

क्रियाकलाप 3

प्र. मिट्टी के बर्तनों के अवशेषों पर काम करने वाले पुरातत्त्वविद बहुत-कुछ जासूसों की तरह होते हैं क्यों? स्पष्ट करो। एम्फ़ोरा हमें रोम काल के भूमध्यसागरीय क्षेत्र के आर्थिक जनजीवन के बारे में क्या बताते हैं?

उत्तर: जासूसों की तरह वे छोटे-छोटे सुरागों से पूरी कहानी गढ़ लेते हैं। मटकों के टूटे टुकड़ों से वे उनके ठीक-ठीक आकार, उनमें ढोई जाने वाली वस्तु और यह भी बता पाते हैं कि वे ठीक कहाँ बने थे; इसके लिए वे टुकड़ों की मिट्टी की जाँच करके उसका मिलान भूमध्यसागर भर की मिट्टी की खदानों से करते हैं। टुकड़ों की भारी संख्या भी मदद करती है (रोम में मोंटी टेस्टैकियो स्थल पर ऐसे 5 करोड़ से अधिक मटकों के टुकड़े बताए जाते हैं)।
एम्फ़ोरा क्या बताते हैं: अंगूरी शराब और जैतून का तेल बड़ी मात्रा में एम्फ़ोरा में ढोए जाते थे। किसी पात्र-प्रकार के मिलने के स्थानों से पता चलता है कि कोई वस्तु कितनी दूर तक गई: स्पेन का जैतून का तेल, जो 140-160 ई. में चरम पर था, ‘ड्रेसल-20’ नामक पात्र में ढोया जाता था, और उसके दूर-दूर तक मिलने से पता चलता है कि स्पेन के उत्पादकों ने अपने इतालवी प्रतिद्वंद्वियों से तेल का बाज़ार छीन लिया, जो तभी संभव हुआ होगा जब उन्होंने कम क़ीमत पर बेहतर तेल बेचा। एम्फ़ोरा यह भी दिखाते हैं कि तीसरी और चौथी शताब्दियों के अधिकांश भाग में उत्तरी अफ़्रीका के उत्पादकों का बोलबाला रहा, और 425 ई. के बाद एगियन, दक्षिणी एशिया माइनर, सीरिया और फ़िलिस्तीन शराब और जैतून-तेल के प्रमुख निर्यातक बन गए। इस तरह वे एक प्रतिस्पर्धी व्यापारिक अर्थव्यवस्था दिखाते हैं, जिसमें क्षेत्रों की समृद्धि इस पर निर्भर थी कि वे उत्पादन, परिवहन और गुणवत्ता को कितनी अच्छी तरह संभालते थे।

क्रियाकलाप 4

प्र. इस अध्याय में तीन ऐसे लेखकों का उल्लेख किया गया है जिनकी रचनाओं का प्रयोग यह बताने के लिए किया गया है कि रोम के लोग अपने कामगारों के साथ कैसा बर्ताव करते थे। क्या आप उनके नाम बता सकते हैं? उस अनुभाग को स्वयं फिर से पढ़िए और उन दो तरीकों का वर्णन कीजिए जिनकी सहायता से रोम के लोग अपने श्रमिकों पर नियंत्रण रखते थे।

उत्तर: ये लेखक हैं टैसिटस (जिनके विवरण में पेडेनियस सेकंडस की हत्या के बाद दासों के प्रति व्यवहार दिखता है), कोलूमेल्ला और वरिष्ठ प्लिनी। इस अनुभाग में ऑगस्टीन के एक पत्र का भी उपयोग है, जिसमें माता-पिता द्वारा बच्चों को दासता में बेचने का उल्लेख है।
श्रमिकों पर नियंत्रण के दो तरीके:
1. कड़ी निगरानी। मालिक मानते थे कि बिना निगरानी के कोई काम नहीं होगा। कोलूमेल्ला ने सलाह दी कि ज़रूरत से दोगुने औज़ार रखे जाएँ ताकि उत्पादन रुके नहीं, और काम करने वालों को दस-दस के दलों में बाँटा जाए ताकि पता चल सके कि कौन मेहनत कर रहा है और कौन नहीं। सिकंदरिया के फ्रैंकिन्सेंस (लोबान) के कारख़ानों में, जिनका वर्णन वरिष्ठ प्लिनी ने किया है, कामगारों के एप्रन पर मोहर लगा दी जाती थी, उन्हें सिर पर मुखौटा या बारीक जाली पहननी पड़ती थी, और परिसर से निकलने से पहले अपने सारे कपड़े उतारने पड़ते थे।
2. दागना और ऋण-बंधन। 398 के एक कानून में कहा गया है कि कामगारों को दागा जाता था ताकि भागने और छिपने पर उन्हें पहचाना जा सके; और कई निजी मालिक कामगारों के साथ ऋण-संविदा के रूप में करार करते थे, ताकि यह दावा कर सकें कि कामगार उनके कर्ज़दार हैं और इस तरह उन पर कड़ा नियंत्रण रख सकें।
अनुभाग में एक और तरीक़ा भी है: पैरों से एक साथ ज़ंजीर में बँधे दास-दल, जिनकी वरिष्ठ प्लिनी ने निंदा की।