Class 11 History Chapter 2 An Empire Across Three Continents Notes in Hindi

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रोमईरानऑगस्टससैनेटप्रिंसिपेटदीनारियससॉलिडसएम्फ़ोराह्यूमिलिओरिसकॉन्स्टैनटाइनजस्टीनियनपरवर्ती पुराकाल

1दो साम्राज्य, और हम रोम को कैसे जानते हैं

1.1 साम्राज्य बनने के दो हज़ार साल

यह अध्याय किताब के “साम्राज्य” खंड का दूसरा विषय है। मेसोपोटामिया में साम्राज्य बनने के दो हज़ार साल बाद तक, इस पूरे इलाक़े में एक के बाद एक साम्राज्य बनाने की कोशिशें होती रहीं। छठी सदी ई.पू. तक ईरानियों ने पुराने असीरियन साम्राज्य के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया था, और व्यापार के जाल ज़मीन पर भी और भूमध्यसागर के तटों पर भी फैलने लगे। यूनान में एथेंस और स्पार्टा जैसे नगर-राज्य फल-फूल रहे थे, और चौथी सदी ई.पू. के आख़िर में मेसीडोन के सिकंदर ने उत्तरी अफ्रीका, पश्चिम एशिया और ईरान को जीत लिया, यहाँ तक कि भारत की ब्यास नदी तक पहुँच गया, जब तक उसके अपने सैनिकों ने आगे बढ़ने से इनकार नहीं कर दिया।

सिकंदर की मौत के बाद उसका राजनीतिक साम्राज्य जल्दी ही बिखर गया, लेकिन “हेलेनिस्टिक” संस्कृति, यूनानी भाषा और स्थानीय, ख़ासकर ईरानी, परंपराओं का मेल अगले क़रीब तीन सदियों तक महत्वपूर्ण बना रहा। सिकंदर के साम्राज्य के टूटने के बाद फैली इसी राजनीतिक अफ़रा-तफ़री में एक नई ताक़त उभरी : दूसरी सदी ई.पू. से इतालवी नगर-राज्य रोम की छोटी मगर बेहद संगठित सेनाओं ने उत्तरी अफ्रीका और पूर्वी भूमध्यसागर पर नियंत्रण कर लिया।

क्या आप जानते हैं?

यह विस्तार शुरू होने तक रोम अब भी एक गणतंत्र ही था। जूलियस सीज़र, एक उच्च कुल के सैन्य कमांडर, ने पहली सदी ई.पू. के मध्य में “रोमन साम्राज्य” को आज के ब्रिटेन और जर्मनी तक फैला दिया। साम्राज्य पूरी तरह ईसाई बाद में बना, सम्राट कॉन्स्टैनटाइन के अपने धर्म-परिवर्तन (चौथी सदी ई.) के बाद, और उसी सदी में शासन को आसान बनाने के लिए साम्राज्य को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बाँट दिया गया।

1.2 स्रोत : इतिहासकार रोम के बारे में कैसे जानते हैं

रोमन इतिहासकार असल में बड़े ख़ुशक़िस्मत हैं : उनके पास स्रोतों का एक समृद्ध भंडार है, जो तीन बड़े वर्गों में बँटता है।

स्रोत का प्रकार इसमें क्या शामिल है
पाठ समकालीन लोगों द्वारा लिखे इतिहास, जिन्हें अक्सर “वर्ष-वृत्तांत” कहा जाता है क्योंकि वे साल-दर-साल घटनाएँ बताते हैं, साथ ही पत्र, भाषण, उपदेश और क़ानून
दस्तावेज़ मुख्यतः शिलालेख (पत्थर पर खुदे होने से बहुत-से बच गए, यूनानी और लातिनी दोनों में) और पैपाइरस
भौतिक अवशेष इमारतें, स्मारक, मिट्टी के बर्तन, सिक्के, मोज़ेक, यहाँ तक कि पूरे-के-पूरे परिदृश्य, जो ज़्यादातर पुरातत्वविदों को खुदाई, सर्वेक्षण और हवाई फ़ोटोग्राफ़ी से मिलते हैं
याद रखेंपरिभाषा 1

पैपाइरस मिस्र में नील नदी के किनारे उगने वाला एक सरकंडा जैसा पौधा था, जिसे प्रोसेस करके रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली लेखन सामग्री बनाई जाती थी। हज़ारों अनुबंध, हिसाब-किताब, पत्र और सरकारी दस्तावेज़ “पैपाइरस पर” बचे हैं, और इनका अध्ययन करने वाले विद्वानों को पैपाइरस शास्त्री कहा जाता है।

हर तरह का स्रोत अकेले सिर्फ़ इतना ही बता सकता है, इन्हें मिलाकर पढ़ना फ़ायदेमंद है, लेकिन यह कितनी अच्छी तरह किया जाता है, यह पूरी तरह इतिहासकार के अपने कौशल पर निर्भर करता है।

1.3 रोम और ईरान : दुनिया बाँटने वाली दो महाशक्तियाँ

मसीह के जन्म से लेकर सातवीं सदी के शुरुआती वर्षों (यानी 630 के दशक) तक, दो शक्तिशाली साम्राज्यों, रोम और ईरान, ने यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के ज़्यादातर हिस्से पर राज किया। ये दोनों प्रतिद्वंद्वी थे, और अपने इतिहास के अधिकांश समय एक-दूसरे से लड़ते रहे; इनके क्षेत्र फ़रात नदी के किनारे बनी एक पतली-सी पट्टी से अलग होते थे।

स्पेन से लेकर सीरिया तक फैला भूमध्यसागर, यूरोप और अफ्रीका को अलग करता है, और यही रोम के साम्राज्य का असली दिल था, जिस पर रोम का दबदबा पूरी तरह क़ायम था।

रोमन साम्राज्य की सीमा किससे बनती थी
उत्तर राइन और डैन्यूब नदियाँ
दक्षिण सहारा मरुस्थल का विशाल विस्तार

रोम का प्रतिद्वंद्वी ईरान कैस्पियन सागर के दक्षिण से लेकर पूर्वी अरब तक, और कभी-कभी अफ़गानिस्तान के बड़े हिस्से तक फैला था। इन दोनों महाशक्तियों ने मिलकर उस पूरे इलाक़े को बाँट लिया था जिसे चीनी लोग “ता-चिन” कहते थे, यानी “महान छिन”, मोटे तौर पर पूरा पश्चिमी संसार।

2सम्राट, सैनेट और सेना

2.1 ऑगस्टस और प्रिंसिपेट

रोमन साम्राज्य को आमतौर पर दो बड़े दौर में बाँटा जाता है, “प्रारंभिक” और “परवर्ती”, जिनके बीच तीसरी सदी एक तरह की ऐतिहासिक विभाजन-रेखा है। रोम और ईरान में एक बड़ा सांस्कृतिक अंतर था : ईरान पर शासन करने वाले पार्थियन और बाद के ससानी शासक ज़्यादातर ईरानी आबादी पर राज करते थे, जबकि रोम, किताब के अपने शब्दों में, “क्षेत्रों और संस्कृतियों का एक मोज़ेक” था, जो मुख्यतः एक साझा शासन-व्यवस्था से बँधा था। लातिनी और यूनानी मुख्य प्रशासनिक भाषाएँ थीं, पूर्व के अभिजात वर्ग यूनानी में लिखते-पढ़ते थे और पश्चिम के लातिनी में, और इन दोनों भाषा-क्षेत्रों की सीमा लगभग भूमध्यसागर के बीचोबीच से गुज़रती थी। चाहे कोई भी भाषा बोलें, साम्राज्य में हर कोई एक ही शासक, सम्राट, की प्रजा था।

चित्र 1 : प्रीमा पोर्टा का ऑगस्टस, रोम के पहले सम्राट की संगमरमर की मूर्ति, जिसने 27 ई.पू. में प्रिंसिपेट की स्थापना की, फिर भी ख़ुद को हमेशा सैनेट के "प्रमुख नागरिक" के रूप में ही पेश करता रहा। चित्र: Till Niermann / Wikimedia Commons / Public Domain.
चित्र 1: प्रीमा पोर्टा का ऑगस्टस, रोम के पहले सम्राट की संगमरमर की मूर्ति, जिसने 27 ई.पू. में प्रिंसिपेट की स्थापना की, फिर भी ख़ुद को हमेशा सैनेट के “प्रमुख नागरिक” के रूप में ही पेश करता रहा। चित्र: Till Niermann / Wikimedia Commons / Public Domain.
याद रखेंपरिभाषा 2

27 ई.पू. में ऑगस्टस ने प्रिंसिपेट नाम की व्यवस्था स्थापित की। वह अकेला शासक और सत्ता का इकलौता असली स्रोत था, फिर भी सैनेट के सम्मान में यह दिखावा बनाए रखा गया कि वह सिर्फ़ “प्रमुख नागरिक” (लातिनी में प्रिंसेप्स) है, कोई निरंकुश शासक नहीं।

याद रखेंपरिभाषा 3

गणतंत्र (509 ई.पू.-27 ई.पू.) वह व्यवस्था थी जिसमें असली सत्ता सैनेट के हाथ में थी, जो चंद धनी परिवारों के “कुलीन वर्ग” के प्रभुत्व वाली संस्था थी। सैनेट की सदस्यता आजीवन होती थी, और जन्म से ज़्यादा मायने धन और पद रखते थे। गणतंत्र को ऑक्टेवियन ने उखाड़ फेंका, जो जूलियस सीज़र का गोद लिया उत्तराधिकारी था और बाद में ख़ुद को ऑगस्टस कहलाने लगा।

बचे हुए ज़्यादातर रोमन इतिहास सैनेट सदस्य-कुल के लोगों ने ही लिखे, इसलिए इन स्रोतों में सम्राटों को मुख्यतः इसी आधार पर परखा जाता है कि उन्होंने सैनेट के साथ कैसा व्यवहार किया; “सबसे बुरे” सम्राट वे माने गए जो सैनेट सदस्यों के प्रति शत्रुतापूर्ण, संदेहग्रस्त या हिंसक थे। कई सैनेट सदस्य गणतंत्र के पुराने दिनों को याद करते रहे, हालाँकि ज़्यादातर को यह भी पता था कि अब यह लौट नहीं सकता।

2.2 सेना : रोम का तीसरा शक्ति-केंद्र

सम्राट और सैनेट के बाद, शाही शासन का तीसरा मुख्य स्तंभ था : सेना। ईरान की ज़बरन भर्ती सेना के विपरीत, रोम के पास एक वेतनभोगी पेशेवर सेना थी, जिसमें सैनिक कम-से-कम 25 साल की सेवा के लिए भर्ती होते थे, यह वाक़ई एक विशिष्ट रोमन पहचान थी।

6,00,000चौथी सदी तक रोमन सेना में सैनिक
25 वर्षएक रोमन सैनिक की न्यूनतम सेवा-अवधि
69 ई.वह “चार सम्राटों का साल” जिसने शांति भंग की

पूरे साम्राज्य में सेना सबसे बड़ा संगठित समूह थी, और उसमें सम्राट की क़िस्मत तय करने की ताक़त ज़रूर थी; सैनिक बेहतर वेतन और सेवा-शर्तों के लिए लगातार आंदोलन करते थे, कभी-कभी सीधे विद्रोह के ज़रिए। सैनेट, अपनी ओर से, सेना से डरती और नफ़रत करती थी, क्योंकि यह अप्रत्याशित हिंसा का स्रोत थी, ख़ासकर तनावग्रस्त तीसरी सदी में, जब इसे चलाने के लिए भारी कर लगाने पड़े।

चित्र 2: रोमन साम्राज्य की राजनीति के तीन मुख्य "खिलाड़ी" : सम्राट, अभिजात वर्ग (सैनेट) और सेना। अलग-अलग सम्राटों की सफलता इस बात पर निर्भर करती थी कि वे सेना पर कितना नियंत्रण रख पाते हैं, और जब सेनाएँ बँट जाती थीं तो नतीजा आमतौर पर गृहयुद्ध होता था।
चित्र 2: रोमन साम्राज्य की राजनीति के तीन मुख्य “खिलाड़ी” : सम्राट, अभिजात वर्ग (सैनेट) और सेना। अलग-अलग सम्राटों की सफलता इस बात पर निर्भर करती थी कि वे सेना पर कितना नियंत्रण रख पाते हैं, और जब सेनाएँ बँट जाती थीं तो नतीजा आमतौर पर गृहयुद्ध होता था।
आम ग़लती

यह मत लिखिए कि साम्राज्य की पहली दो सदियाँ गृहयुद्धों से भरी थीं। किताब इसका उल्टा कहती है : सिर्फ़ एक अपवाद, “चार सम्राटों का साल” (69 ई.), को छोड़कर पहली दो सदियाँ लगभग गृहयुद्ध-मुक्त और अपेक्षाकृत स्थिर रहीं, यहाँ तक कि बाहरी युद्ध भी कम ही हुए, क्योंकि टिबेरियस को ऑगस्टस से जो साम्राज्य विरासत में मिला वह पहले से ही इतना बड़ा माना जाता था कि उसे और बढ़ाने की ज़रूरत महसूस नहीं होती थी। त्राजान का फ़रात के पार का अभियान (113-17 ई.) ही एकमात्र बड़ा विस्तार-प्रयास था, और इसके अपने ही उत्तराधिकारियों ने इसे बेकार समझकर छोड़ दिया।

उत्तराधिकार जहाँ तक संभव हो, वंश-परंपरा, प्राकृतिक या दत्तक, पर आधारित होता था, और सेना भी इसी सिद्धांत की कट्टर समर्थक थी। टिबेरियस (14-37 ई.), दूसरा रोमन सम्राट, ऑगस्टस का सगा बेटा बिल्कुल नहीं था, बल्कि उसका गोद लिया उत्तराधिकारी था, जिसे सत्ता का सुचारू हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए चुना गया था।

“तत्पश्चात् भयंकर भूकंप से पीड़ित एंटिऑक में सर्दियों के बाद (115/16), 116 में त्राजान फ़रात नदी के रास्ते आगे की ओर बढ़ता हुआ पार्थियन की राजधानी टेसीफ़ॉन तक चला गया और फिर वहाँ फ़ारस की खाड़ी के सिरे पर पहुँच गया। (इतिहासकार) कैसियस डियो के अनुसार वहाँ पर वह भारत की ओर जाने वाले किसी वाणिज्यिक पोत को लालायित नज़रों से देख रहा था और चाह रहा था कि काश वह सिकंदर जैसा जवान होता।”

फरगस मिल्लर, दि रोमन नीयर ईस्ट (इतिहासकार कैसियस डियो के विवरण को अपने शब्दों में बताते हुए)

3तीन महाद्वीपों पर शासन

3.1 आश्रित राज्यों से रोमन प्रांत तक

युद्ध जीतने से कहीं ज़्यादा आम था प्रत्यक्ष रोमन शासन का धीरे-धीरे फैलना, यानी “आश्रित” या अधीन राज्यों की पूरी शृंखला को रोमन प्रांतीय क्षेत्र में मिला लेना। निकटवर्ती पूर्व में ऐसे राज्यों की भरमार थी, जिनके शासक बदले में अपने अस्तित्व की गारंटी पाने के लिए अपनी सेनाएँ रोम के समर्थन में लगाते थे। दूसरी सदी के शुरू तक, फ़रात के पश्चिम में, यानी रोमन क्षेत्र के क़रीब, स्थित ऐसे सभी राज्य साम्राज्य में समा चुके थे।

परीक्षा संकेत

इनमें से कुछ राज्य बेहद धनी थे। अकेले हेरॉड के राज्य से हर साल लगभग 54 लाख दीनारियस मिलते थे, जो 1,25,000 किलोग्राम से ज़्यादा सोने के बराबर था।

याद रखेंपरिभाषा 4

दीनारियस एक रोमन चाँदी का सिक्का था, जिसमें लगभग साढ़े चार ग्राम शुद्ध चाँदी होती थी, और यह साम्राज्य की पहली तीन सदियों की मुद्रा-व्यवस्था की रीढ़ था।

इटली को छोड़कर, जिसे इन सदियों में प्रांत नहीं माना जाता था, साम्राज्य का हर क्षेत्र प्रांतों में बँटा था और कर के अधीन था। दूसरी सदी में अपने चरम पर, रोमन साम्राज्य स्कॉटलैंड से आर्मेनिया की सीमाओं तक, और सहारा से फ़रात तक, कभी-कभी उससे भी आगे तक फैला था, दूसरी सदी के मध्य में लगभग 6 करोड़ लोगों का घर।

याद रखेंपरिभाषा 5

एक रोमन नगर वह शहरी केंद्र होता था जिसके अपने दंडनायक, अपनी नगर परिषद, और एक “क्षेत्र” होता था जिसमें उसके अधीन गाँव शामिल होते थे। एक नगर कभी दूसरे नगर के क्षेत्र में नहीं आ सकता था, पर गाँव लगभग हमेशा किसी-न-किसी नगर के अधीन होते थे, और किसी गाँव को नगर का दर्जा मिल भी सकता था और छिन भी सकता था, आमतौर पर शाही कृपा या नाराज़गी के निशान के रूप में।

3.2 नगर क्यों? इतने विशाल साम्राज्य को चलाने का जवाब

जब आधुनिक अर्थों में कोई सरकार-तंत्र मौजूद ही नहीं था, तो सम्राट इतने विशाल और विविध क्षेत्र को संभालता कैसे था? किताब का अपना जवाब है : शहरीकरण। भूमध्यसागर के तटों पर बसे बड़े नगर, इनमें कार्थेज, सिकंदरिया और एंटिऑक सबसे बड़े थे, पूरे शाही तंत्र की असली नींव थे। इन्हीं नगरों के ज़रिए “सरकार” प्रांतीय ग्रामीण इलाक़ों से कर वसूल पाती थी, जो साम्राज्य की ज़्यादातर संपत्ति पैदा करते थे, क्योंकि स्थानीय अभिजात वर्ग रोमन राज्य के साथ मिलकर अपने ही क्षेत्रों का प्रशासन चलाने और कर वसूलने में सक्रिय रूप से सहयोग करता था।

रोमन राजनीतिक इतिहास की सबसे उल्लेखनीय बातों में से एक है दूसरी और तीसरी सदी में इटली से प्रांतों की ओर सत्ता का नाटकीय बदलाव। इस पूरे दौर में प्रांतीय अभिजात वर्ग ही धीरे-धीरे प्रशासक और सेना-कमांडर मुहैया कराने लगा, और एक नया अभिजात वर्ग बना जो पुराने सैनेट सदस्य वर्ग से कहीं ज़्यादा ताक़तवर हो गया, क्योंकि उसे ख़ुद सम्राटों का समर्थन हासिल था। सम्राट गैलीनस (253-68 ई.) ने तो सैनेट सदस्यों को सेना-कमान से पूरी तरह बाहर करके इस बदलाव को और पक्का कर दिया, ताकि सेना पर नियंत्रण सैनेट सदस्यों के हाथ में कभी न आ सके।

चित्र 3 : फ़्रांस के निम्स के पास पों दू गार (Pont du Gard), पहली सदी ई.पू. में बना एक रोमन जलसेतु। रोमन इंजीनियरों ने अपने तीनों महाद्वीपों में शहरों तक पानी पहुँचाने के लिए ऐसे विशाल जलसेतु बनाए। चित्र: Benh LIEU SONG / Wikimedia Commons / CC BY-SA 3.0.
चित्र 3: फ़्रांस के निम्स के पास पों दू गार (Pont du Gard), पहली सदी ई.पू. में बना एक रोमन जलसेतु। रोमन इंजीनियरों ने अपने तीनों महाद्वीपों में शहरों तक पानी पहुँचाने के लिए ऐसे विशाल जलसेतु बनाए। चित्र: Benh LIEU SONG / Wikimedia Commons / CC BY-SA 3.0.

नगर में रहने का एक बहुत व्यावहारिक फ़ायदा भी था : अकाल और खाद्य-संकट के समय नगर, आसपास के ग्रामीण इलाक़े से कहीं बेहतर सुरक्षित रहता था।

“कई प्रांतों में लगातार कई वर्षों से पड़ रहे अकाल ने साधारण से साधारण बुद्धिवाले आदमी को भी यह बता दिया कि लोगों में कुपोषण के कारण बीमारियाँ हो रही हैं। शहर में रहने वाले लोगों का फ़सल कटाई के शीघ्र बाद अगले पूरे वर्ष के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न अपने भंडारों में भर लेना एक रिवाज था। सारा गेहूँ, जौ, सेम तथा मसूर और दालों का काफी बड़ा हिस्सा शहरियों द्वारा ले जाने के बाद भी कई प्रकार की दालें किसानों के लिए बची रह गई थीं। सर्दियों के लिए जो कुछ भी बचा था, उसे खा-पीकर खत्म कर देने के पश्चात् देहाती लोगों को वसंत ऋतु में अस्वास्थ्यकर खाद्यों पर निर्भर रहना पड़ा; उन्होंने पेड़ों की टहनियाँ, छालें, जड़ें, झाड़ियाँ, अखाद्य पेड़-पौधे और पत्ते खाकर किसी तरह अपने प्राणों को बचाए रखा।”

चिकित्सक गैलेन, ऑन गुड एण्ड बैड डाइट

3.3 रोमन नगर का सार्वजनिक जीवन

सार्वजनिक स्नानघर रोमन नगरीय जीवन की एक ख़ास पहचान थे, इतनी कि जब एक ईरानी शासक ने इन्हें ईरान में शुरू करने की कोशिश की, तो उसे वहाँ के पुरोहित वर्ग के भारी विरोध का सामना करना पड़ा : पानी उनके लिए एक पवित्र तत्व था, और सार्वजनिक स्नान उन्हें एक तरह की अपवित्रता जैसा लगा। नगरीय आबादी को मनोरंजन भी ख़ूब मिलता था : एक बचा हुआ कैलेंडर बताता है कि साल के कम-से-कम 176 दिन स्पेक्टाकुला (तमाशों) से भरे होते थे।

चित्र 4 : रोम का कोलोसियम, 79 ई. में बना और 60,000 दर्शकों की क्षमता वाला, ग्लैडिएटरों की लड़ाइयों और जानवरों के तमाशों के लिए रोमन सार्वजनिक मनोरंजन का सबसे मशहूर मंच। चित्र: Diliff / Wikimedia Commons / CC BY-SA 2.5.
चित्र 4: रोम का कोलोसियम, 79 ई. में बना और 60,000 दर्शकों की क्षमता वाला, ग्लैडिएटरों की लड़ाइयों और जानवरों के तमाशों के लिए रोमन सार्वजनिक मनोरंजन का सबसे मशहूर मंच। चित्र: Diliff / Wikimedia Commons / CC BY-SA 2.5.

अध्याय के शीर्षक का ठीक यही मतलब है, “तीन महाद्वीपों में फैला” साम्राज्य :

महाद्वीप वहाँ रोमन क्षेत्र
यूरोप इटली, स्पेन, गॉल, ब्रिटेन, और राइन-डैन्यूब की सीमाओं तक की भूमि
अफ्रीका मिस्र, उत्तरी अफ्रीका (कार्थेज सहित), सहारा मरुस्थल के किनारे तक
एशिया सीरिया, फ़िलिस्तीन (“निकटवर्ती पूर्व”), और फ़रात व आर्मेनिया की ओर फैला क्षेत्र

4तीसरी सदी का संकट

अगर पहली और दूसरी सदी को मोटे तौर पर शांति, समृद्धि और आर्थिक विकास का दौर कहें, तो तीसरी सदी ने पहली बार साम्राज्य के भीतर बड़े तनाव के संकेत दिए। 230 के दशक से साम्राज्य को एक साथ कई मोर्चों पर लड़ना पड़ा।

225 ई.ईरान में एक नया, कहीं ज़्यादा आक्रामक वंश, ससानी, उभरता है और सिर्फ़ 15 साल में तेज़ी से फ़रात की ओर बढ़ता है
↓
250 के दशकशापुर प्रथम फ़रात के पश्चिम के रोमन क्षेत्र पर हमला करता है; तीन भाषाओं में खुदा उसका अपना शिलालेख दावा करता है कि उसने 60,000 की रोमन सेना का सफ़ाया कर दिया और एंटिऑक पर क़ब्ज़ा कर लिया
↓
233-280 ई.जर्मन क़बायली संघ, ख़ासकर एलमन्नाइ, फ़्रैंक और गोथ, काला सागर से लेकर आल्पस और दक्षिणी जर्मनी तक के प्रांतों की पूरी लाइन पर बार-बार हमले करते हैं
↓
नतीजारोम को डैन्यूब के पार का क्षेत्र छोड़ना पड़ता है, और सिर्फ़ 47 साल में 25 सम्राट राज करते हैं, यही इस बात का सबसे साफ़ संकेत है कि साम्राज्य कितना दबाव में था
क्या आप जानते हैं?

शापुर प्रथम के ये दावे उसके अपने शिलालेख से मिलते हैं, जो तीन भाषाओं में खुदा है। इन वर्षों में सम्राट लगातार उन लोगों से लड़ते रहे जिन्हें रोमन “बर्बर” कहते थे।

5परिवार, स्त्रियाँ और साक्षरता

5.1 रोमन एकल परिवार

रोमन समाज की सबसे “आधुनिक” विशेषताओं में से एक थी एकल परिवार का व्यापक प्रचलन : बालिग़ बेटे आमतौर पर अपने माता-पिता के साथ नहीं रहते थे, और बालिग़ भाइयों का एक ही घर साझा करना अपवाद ही था, हालाँकि दासों को अब भी परिवार का हिस्सा माना जाता था, जैसा रोमन इसे समझते थे।

याद रखेंपरिभाषा 6

रोमन समाज में एकल परिवार का व्यापक चलन था : वयस्क पुत्र अपने पिता के परिवारों के साथ नहीं रहते थे और वयस्क भाई बहुत कम साझे परिवार में रहते थे, जबकि दासों को परिवार में सम्मिलित किया जाता था।

विवाह और संपत्ति : गणतंत्र के परवर्ती काल (पहली सदी ई.पू.) तक विवाह का आम रूप ऐसा था कि पत्नी की संपत्ति उसके अपने मायके के ही अधिकार में रहती थी, पति के अधिकार में नहीं। उसका दहेज विवाह चलने तक ही पति के पास रहता था; वह अपने पिता की मुख्य उत्तराधिकारी बनी रहती थी और पिता की मृत्यु पर स्वतंत्र संपत्ति-स्वामी बन जाती थी, यानी क़ानूनी तौर पर विवाहित जोड़ा एक नहीं बल्कि दो अलग वित्तीय इकाइयाँ था, और पत्नी को पूरी क़ानूनी स्वतंत्रता हासिल थी।

परीक्षा संकेत · रोमन स्त्रियाँ कितनी स्वतंत्र थीं

रोमन स्त्रियाँ अपने अधिकार में संपत्ति पूरी तरह रख और चला सकती थीं, और तलाक़ के लिए पति या पत्नी में से किसी की भी सिर्फ़ इच्छा-सूचना काफ़ी थी, यह उस दौर के हिसाब से वाक़ई चौंकाने वाली क़ानूनी स्वतंत्रता थी। लेकिन इसे असली असमानता के साथ भी तौलना ज़रूरी है : पुरुष आमतौर पर बीस के आख़िर या तीस की शुरुआत में शादी करते थे, स्त्रियाँ किशोरावस्था के आख़िर या बीस की शुरुआत में ही ब्याह दी जाती थीं। हिप्पो के बिशप ऑगस्टीन बताते हैं कि उनकी अपनी माँ को उनके पिता नियमित रूप से पीटते थे, और उनके शहर की बाक़ी ज़्यादातर पत्नियों के शरीर पर भी ऐसे ही निशान होते थे। पिता को भी बच्चों पर बहुत व्यापक क़ानूनी अधिकार हासिल था, कुछ चौंकाने वाले मामलों में तो अवांछित नवजातों को ठंड में छोड़ मरने देने तक का अधिकार।

5.2 साक्षरता : हर जगह एक जैसी नहीं

साम्राज्य भर में साधारण साक्षरता की दर बहुत अलग-अलग थी। पोम्पेई में, जो 79 ई. में ज्वालामुखी विस्फोट से दब गया था, मुख्य सड़कों की दीवारों पर अक्सर विज्ञापन लिखे मिलते थे, और पूरे नगर में जगह-जगह दीवार-लेखन पाया गया, आम लोगों में साधारण पढ़ने-लिखने के व्यापक प्रचलन का पक्का सबूत। इनमें से एक सबसे मज़ेदार दीवार-लेखन कहता है : “दीवार, तुम धन्य हो, अपने ऊपर इतनी उबाऊ लिखावट का बोझ ढोते हुए भी तुम बरकरार खड़ी हो, भरभराकर गिरी नहीं।”

मिस्र की कहानी अलग है। बचे हुए सैकड़ों पैपाइरस दिखाते हैं कि ज़्यादातर औपचारिक दस्तावेज़, ख़ासकर अनुबंध, व्यावसायिक लिपिकों द्वारा ही लिखे जाते थे, और अक्सर यह भी दर्ज होता था कि फ़लां व्यक्ति “पढ़-लिख नहीं सकता।” फिर भी मिस्र में भी कुछ ख़ास समूहों, सैनिकों, सेना-अधिकारियों और संपत्ति-प्रबंधकों में साक्षरता कहीं ज़्यादा आम थी।

5.3 भाषाओं और संस्कृतियों का मेल

साम्राज्य की सांस्कृतिक विविधता हर स्तर पर झलकती थी : धार्मिक पंथों और स्थानीय देवताओं की भरमार में, बोली जाने वाली भाषाओं की संख्या में, पहनावे और खान-पान में, और सामाजिक संगठन व बसावट के अलग-अलग तरीक़ों में। फ़रात के पश्चिम निकटवर्ती पूर्व में अरामाइक भाषा का बोलबाला था, मिस्र में कॉप्टिक बोली जाती थी, उत्तरी अफ्रीका में प्यूनिक और बर्बर, और स्पेन व उत्तर-पश्चिम में केल्टिक।

भाषा कहाँ बोली जाती थी पहली बार कब लिखी गई
कॉप्टिक मिस्र तीसरी सदी के मध्य तक बाइबल का अनुवाद हो चुका था
आर्मेनियाई आर्मेनिया पाँचवीं सदी जितनी देर से पहली बार लिखी गई
केल्टिक स्पेन और उत्तर-पश्चिम पहली सदी के बाद, लातिनी के फैलने से लिखा जाना बंद हो गया

इनमें से कई स्थानीय भाषाएँ लंबे समय तक सिर्फ़ बोली ही जाती रहीं, जब तक इनके लिए कोई लिपि नहीं बनी, और जहाँ लातिनी का प्रभाव फैला, वहाँ यह कई बार स्थानीय भाषा के लिखित रूप को पूरी तरह मिटा भी देता था, जैसा केल्टिक के साथ हुआ।

6व्यापार और अर्थव्यवस्था

6.1 गेहूँ, शराब और जैतून तेल की भूमध्यसागरीय अर्थव्यवस्था

साम्राज्य के पास एक ठोस आर्थिक ढाँचा था : बंदरगाह, खदानें, पत्थर की खानें, ईंट-भट्टे और जैतून-तेल के कारख़ाने। गेहूँ, शराब और जैतून तेल बड़ी मात्रा में व्यापार और खपत होते थे, मुख्यतः स्पेन, गॉल के प्रांतों, उत्तरी अफ्रीका और मिस्र से, और कुछ कम मात्रा में इटली से।

याद रखेंपरिभाषा 7

एम्फ़ोरा वे पात्र थे जिनमें शराब और जैतून तेल जैसे तरल पदार्थ भूमध्यसागर पार भेजे जाते थे। अकेले रोम के मोंटी टेस्टैकियो में ही 5 करोड़ से ज़्यादा टूटे एम्फ़ोरा के अवशेष माने जाते हैं, और पुरातत्वविद किसी टुकड़े की मिट्टी को उसके मूल स्थान की मिट्टी से मिलाकर बता सकते हैं कि वह कहाँ बना था।

चित्र 5 : ब्रिटिश म्यूज़ियम में रखे रोमन एम्फ़ोरा, शराब और जैतून तेल भेजने के मानक पात्र। इनके आकार और मिट्टी से पुरातत्वविद ठीक-ठीक बता सकते हैं कि किस क्षेत्र के उत्पादक किससे बाज़ार छीन रहे थे। चित्र: Ricardo Tulio Gandelman / Wikimedia Commons / CC BY 2.0.
चित्र 5: ब्रिटिश म्यूज़ियम में रखे रोमन एम्फ़ोरा, शराब और जैतून तेल भेजने के मानक पात्र। इनके आकार और मिट्टी से पुरातत्वविद ठीक-ठीक बता सकते हैं कि किस क्षेत्र के उत्पादक किससे बाज़ार छीन रहे थे। चित्र: Ricardo Tulio Gandelman / Wikimedia Commons / CC BY 2.0.

स्पेनी जैतून तेल अपने व्यावसायिक चरम पर 140-160 ई. के बीच था, और मुख्यतः “ड्रेसल 20” नाम के पात्र में ढोया जाता था, जिसका नाम उस पुरातत्वविद के नाम पर है जिसने पहली बार इसका आकार तय किया। भूमध्यसागर भर में ड्रेसल 20 के व्यापक अवशेष मिलना दिखाता है कि स्पेनी तेल कितनी दूर तक फैला, और यह भी कि स्पेनी उत्पादकों ने अपने इतालवी प्रतिद्वंद्वियों से बाज़ार छीन लिया था, लगभग पक्का बेहतर तेल कम क़ीमत पर देकर।

स्पेनी जैतून तेल का दबदबा140-160 ई. में चरम
उत्तरी अफ़्रीकी तेल का दबदबातीसरी-चौथी सदी
पूर्वी तेल-शराब का दबदबा425 ई. के बाद, पाँचवीं-छठी सदी

6.2 उपजाऊ क्षेत्र और चरागाही क्षेत्र

स्ट्रैबो और प्लिनी जैसे लेखकों के अनुसार कई क्षेत्र अपनी असाधारण उर्वरता के लिए प्रसिद्ध थे और साम्राज्य के घनी आबादी वाले तथा सबसे धनी भागों में थे : इटली में कैम्पैनिया, सिसिली, मिस्र में फैय्यूम, गैलिली, बाइजैकियम (ट्यूनीसिया), दक्षिणी गॉल (जिसे गैलिया नार्बोनेंसिस कहते थे) तथा बाएटिका (दक्षिणी स्पेन)। कैम्पैनिया सबसे अच्छी शराब बनाता था; सिसिली और बाइजैकियम (ट्यूनीशिया) रोम को भारी मात्रा में गेहूँ भेजते थे; गैलिली के बारे में इतिहासकार जोसिफ़स ने लिखा है: “प्रदेशवासियों ने ज़मीन के एक-एक इंच टुकड़े पर खेती कर रखी है”; और दक्षिणी स्पेन का बेटिका, नदी गुआडलक्विविर के किनारे बसे “फ़ुंडी” नाम की जागीरों से जैतून तेल पैदा करता था।

लेकिन रोमन क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कहीं कम विकसित था। नुमीडिया (आज का अल्जीरिया) में ऋतु-प्रवास यानी मौसमी चरवाही व्यापक थी, और जैसे-जैसे रोमन जागीरें वहाँ फैलती गईं, इन समुदायों के चरागाह सिकुड़ते गए और उनकी आवाजाही पर सख़्त पहरा बिठाया गया। उत्तरी स्पेन भी बहुत कम विकसित था, जहाँ ज़्यादातर केल्टिक-भाषी किसानों की आबादी थी, जो पहाड़ियों की चोटियों पर बसे गाँवों (कैस्टेला) में रहते थे।

याद रखेंपरिभाषा 8

ऋतु-प्रवास चरवाहों का हर साल ऊँचे पहाड़ी चरागाहों और नीची ज़मीन के बीच भेड़-बकरियों के लिए चारे की तलाश में होने वाला नियमित आवागमन है। नुमीडिया में ये अर्ध-घुमंतू समुदाय अपने साथ भट्टी जैसी आकृति की झोंपड़ियाँ (मैपालिया) भी ले जाते थे।

परीक्षा संकेत

अध्याय चेतावनी देता है कि “प्राचीन” का मतलब यह मत समझिए कि वह पिछड़ा हुआ था। जल-शक्ति के विविध उपयोग, जल-चालित चक्कियों में प्रगति, और स्पेन की सोने-चाँदी की खानों में जल-शक्ति से खुदाई इतने बड़े औद्योगिक पैमाने पर हुआ कि उन्नीसवीं सदी, यानी क़रीब 1,700 साल बाद तक, वैसा पैमाना फिर नहीं देखा गया। सुव्यवस्थित व्यापारिक और बैंकिंग नेटवर्क और पैसे का व्यापक उपयोग भी इसी विकसित अर्थव्यवस्था का हिस्सा थे।

7श्रमिकों पर नियंत्रण

7.1 दास प्रथा : व्यापक, पर पूरी कहानी नहीं

दास प्रथा प्राचीन भूमध्यसागर और निकटवर्ती पूर्व में गहराई तक जड़ जमाए हुए थी, और चौथी सदी में राजधर्म बनने के बाद भी ईसाई धर्म ने इसे गंभीरता से चुनौती नहीं दी। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि पूरे साम्राज्य में ज़्यादातर श्रम दासों से ही होता था। गणतंत्र के दौर में इटली के बड़े हिस्से में यह सच रहा होगा (ऑगस्टस के समय 75 लाख की कुल इतालवी आबादी में 30 लाख दास थे), पर पूरे साम्राज्य के लिए अब यह सच नहीं रहा।

“कुछ ही समय बाद शहर के शासक ल्यूसियस पेडेनियस सेकंडस का उसके एक दास ने कत्ल कर दिया। कत्ल के पश्चात, पुराने रिवाज के अनुसार यह आवश्यक था कि एक ही छत के नीचे रहने वाले प्रत्येक दास को फाँसी दे दी जाए। परन्तु बहुत से निर्दोष लोगों को बचाने के लिए भीड़ एकत्र हो गई और दंगे शुरू हो गए। सैनेट भवन को घेर लिया गया हालांकि सैनेट भवन में अत्यधिक कठोरता का विरोध किया जा रहा था। परंतु अधिकांश सदस्यों ने परिवर्तन किए जाने का विरोध किया। जो सैनेटर फाँसी देने के पक्ष में थे, उनकी बात मानी गई। परन्तु पत्थर और जलती हुई मशालें लिए भारी भीड़ ने इस आदेश को कार्यान्वित किए जाने से रोका। नीरो ने अभिलेख द्वारा इन लोगों को फटकार लगाई, उन सारे मार्गों पर सेना लगा दी गई जहाँ सैनिकों के साथ दोषियों को फाँसी पर चढ़ाने के लिए ले जाया जा रहा था।”

टैसिटस (55-117 ई.), नीरो के शासनकाल की एक घटना पर; पाठ्यपुस्तक यह अंश “दासों के प्रति व्यवहार” शीर्षक वाले बॉक्स में देती है

दास एक तरह का निवेश थे, और कम-से-कम एक रोमन कृषि-लेखक ने ज़मींदारों को सलाह दी कि उन्हें ऐसी जगहों पर इस्तेमाल न करें जहाँ एक साथ बहुत सारे चाहिए हों (जैसे फ़सल कटाई) या जहाँ उनकी सेहत को बड़ा ख़तरा हो (जैसे मलेरिया), यह हमदर्दी नहीं बल्कि ठंडा आर्थिक गणित था। जैसे-जैसे पहली सदी की शांति के साथ युद्ध कम होते गए, दासों की आपूर्ति घटती गई, और दास-मालिक या तो दास-प्रजनन की ओर मुड़े या सस्ते, आसानी से हटाए जा सकने वाले वेतनभोगी श्रमिकों की ओर। रोम के सार्वजनिक निर्माण कार्यों में मुक्त श्रम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल इसीलिए होता था क्योंकि व्यापक दास-श्रम कहीं ज़्यादा महँगा पड़ता, दासों को, वेतनभोगी मज़दूरों के उलट, साल भर खिलाना-पिलाना और रखना पड़ता था।

7.2 श्रम का प्रबंधन और अनुशासन

दासों और स्वतंत्र किए गए दासों (मुक्त व्यक्तियों) को, इसके विपरीत, कारोबार-प्रबंधक के रूप में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता था, क्योंकि इस काम में बड़ी संख्या की ज़रूरत नहीं थी; मालिक अक्सर अपने दासों या स्वतंत्र किए गए दासों को अपनी ओर से, या यहाँ तक कि उनके अपने नाम पर, कारोबार चलाने के लिए पूँजी दे देते थे।

दक्षिणी स्पेन के एक पहली सदी के लेखक कोलूमेल्ला ने सलाह दी कि ज़मींदार ज़रूरत से दोगुने औज़ार रखें ताकि उत्पादन कभी न रुके, “क्योंकि दास-श्रम के समय का नुक़सान ऐसी चीज़ों की क़ीमत से कहीं ज़्यादा होता है।” उन्होंने यह भी सुझाया कि श्रमिकों को दस-दस के दलों में बाँटा जाए, ताकि क़रीबी निगरानी आसान हो। इसके उलट, वरिष्ठ प्लिनी ने पैरों से एक-दूसरे से बाँधे गए दास-गिरोहों को उत्पादन का सबसे ख़राब तरीक़ा बताते हुए इसकी निंदा की।

1

सील और तलाशी

सिकंदरिया के फ्रैंकिन्सेंस (सुगंधित राल) के कारख़ानों में मज़दूरों के एप्रन पर सील लगाई जाती, मास्क या घनी जाली पहनाई जाती, और बाहर निकलने से पहले उन्हें उतार-कर तलाशा जाता

2

दाग़ लगाना

398 ई. के एक क़ानून में कहा गया है कि कामगारों को दागा जाता था, ताकि भाग निकलने पर उन्हें पहचाना जा सके

3

क़र्ज़-बंधन

मालिक अक्सर मज़दूरों के साथ समझौतों को क़र्ज़-अनुबंध का रूप दे देते, और दूसरी शताब्दी के आरंभ का एक लेखक बताता है : “हज़ारों श्रमिक गुलामी में काम करने के लिए आत्मसमर्पण करते हैं, हालांकि वे मुक्त हैं।” यानी बहुत-से ग़रीब परिवारों ने जीवित रहने के लिए ऋणबद्धता स्वीकार कर ली थी

4

ऊँची मज़दूरी, बिना ज़बरदस्ती

हर श्रम ज़बरदस्ती का नहीं था : सम्राट अनैस्टैसियस ने ऊँची मज़दूरी देकर मुक्त मज़दूरों को आकर्षित करते हुए दारा नगर तीन हफ़्तों से भी कम में बनवा दिया

ग्रामीण क़र्ज़दारी भी गहरी थी। ऑगस्टीन के एक पत्र में दर्ज है कि माता-पिता अपने ही बच्चों को 25 साल की बंधुआ मज़दूरी में बेच देते थे, और 66 ई. के बड़े यहूदी विद्रोह में विद्रोहियों ने साहूकारों के क़र्ज़-पत्र नष्ट कर दिए, ताकि जनता का समर्थन जीता जा सके। फिर भी छठी सदी तक, पैपाइरस दिखाते हैं कि भूमध्यसागर के कई हिस्सों में, ख़ासकर पूर्व में, वेतनभोगी मज़दूरी व्यापक हो चुकी थी, यह याद दिलाता है कि ज़बरन श्रम, भले ही असली था, कभी पूरी तस्वीर नहीं था।

8सामाजिक पदानुक्रम

इतिहासकार टैसिटस ने प्रारंभिक साम्राज्य के प्रमुख सामाजिक वर्गों को इस क्रम में बताया : सैनेट सदस्य (“पैट्रेस”, यानी शब्दशः “पिता”); घुड़सवार वर्ग यानी अश्वारोही के प्रमुख सदस्य; बड़े घरानों से जुड़े “सम्मानित” लोग; “फूहड़ निम्नतर वर्ग” (प्लेब्स सोर्डिडा), जिसे वे सर्कस और नाटकों का दीवाना बताते हैं; और सबसे नीचे, दास।

याद रखेंपरिभाषा 9

अश्वारोही (इक्वाइट्स) (“घुड़सवार”) पारंपरिक रूप से रोम का दूसरा सबसे शक्तिशाली और धनी वर्ग था, ऐसे परिवार जिनकी संपत्ति उन्हें कभी घुड़सवार सेना में सेवा के योग्य बनाती थी। सैनेट सदस्यों की तरह ज़्यादातर अश्वारोही भी ज़मींदार थे, पर इनमें से कई जहाज़-मालिक, व्यापारी और बैंकर भी थे, जबकि सैनेट सदस्य आमतौर पर कारोबार से दूर ही रहते थे।

याद रखेंपरिभाषा 10

ह्यूमिलिओरिस (शब्दशः “निचले”) निम्न वर्गों का विशाल समूह थे : बड़ी जागीरों पर काम करने वाला ग्रामीण श्रम-बल, औद्योगिक और खनन मज़दूर, फ़सल-कटाई और निर्माण के प्रवासी मज़दूर, स्वरोज़गार शिल्पकार (कहा जाता था कि वे वेतनभोगी मज़दूरों से बेहतर खाते-पीते थे), बड़े नगरों के आकस्मिक मज़दूर, और अब भी, ख़ासकर पश्चिमी साम्राज्य में, हज़ारों दास।

तीसरी सदी के शुरू तक सैनेट में लगभग 1,000 सदस्य थे, इनमें से लगभग आधे तब भी इतालवी परिवारों से थे। परवर्ती साम्राज्य तक, जो कॉन्स्टैनटाइन के शासन (चौथी सदी के शुरू) से गिना जाता है, सैनेट सदस्य और अश्वारोही एक ही, विस्तारित अभिजात वर्ग में मिल चुके थे, जिसमें कम-से-कम आधे परिवार अब अफ़्रीकी या पूर्वी मूल के थे। यह “परवर्ती रोमन” अभिजात वर्ग बेहद धनी था, पर कई मायनों में उन शुद्ध सैन्य अभिजात वर्गों से कम शक्तिशाली था, जो लगभग पूरी तरह ग़ैर-अभिजात पृष्ठभूमि से आते थे।

“मध्यम” वर्ग में अब नौकरशाही और सेना की सेवा से जुड़े आम लोग शामिल थे, और अपेक्षाकृत अधिक समृद्ध सौदागर और किसान भी, जिनमें बहुत-से पूर्वी प्रांतों के निवासी थे। टैसिटस ने इस सम्माननीय मध्यम वर्ग का वर्णन महान सीनेट घरानों के आश्रितों के रूप में किया था; अब मुख्य रूप से सरकारी सेवा और राज्य पर निर्भरता ही इन मध्यम वर्गीय परिवारों का भरण-पोषण करती थी। उनसे नीचे ह्यूमिलिओरिस थे।

“रोम के ऊँचे घरानों में से प्रत्येक के पास अपने आप में वह सब कुछ मौजूद था जो एक मध्यम आकार के शहर में हो सकता है। एक घुड़दौड़ का मैदान (हिप्पोड्रोम), अनेक मंच-मंदिर, फव्वारे और विभिन्न प्रकार के स्नानागार… बहुत से रोमन परिवारों को अपनी संपत्ति से प्रतिवर्ष 4,000 पाउंड सोने की आय प्राप्त होती थी, जिसमें अनाज, शराब और अन्य उपज शामिल नहीं थीं; इन उपजों को बेचने पर सोने में प्राप्त आय के एक-तिहाई के बराबर आमदनी हो सकती थी। रोम में द्वितीय श्रेणी के परिवारों की आय 1000 अथवा 1500 पाउंड सोना थी।”

थेब्स का ओलिंपिओडोरस, इतिहासकार और राजदूत, पाँचवीं सदी का प्रारंभ

परीक्षा संकेत

रोम का परवर्ती प्रशासन-तंत्र अपने वेतन का बड़ा हिस्सा सोने में पाता और उसे ज़मीन में निवेश करता था, इसलिए यह अपेक्षाकृत संपन्न वर्ग था, पर भ्रष्टाचार भी उतना ही असली था, ख़ासकर न्याय-व्यवस्था और सैन्य आपूर्ति में, और ऊँचे अधिकारियों व प्रांतीय गवर्नरों की ज़बरन वसूली, किताब के अपने शब्दों में, “कहावत जैसी” मशहूर थी। रोमन राज्य तानाशाही पर आधारित था : असहमति या आलोचना को कभी-कभार ही बर्दाश्त किया जाता था, और सरकार आमतौर पर विरोध का उत्तर हिंसा से देती थी, ख़ासकर पूर्वी भाग के शहरों में, जहाँ लोग अक्सर निडर होकर सम्राटों का मज़ाक़ उड़ाते थे। फिर भी चौथी सदी तक रोमन क़ानून की एक मज़बूत परंपरा बन चुकी थी, जो सबसे डरावने सम्राटों पर भी असली लगाम की तरह काम कर सकती थी, और इसी वजह से ऐम्ब्रोस जैसे शक्तिशाली बिशप आम लोगों के साथ सख़्त बर्ताव पर सम्राटों से सीधे टकरा सकते थे।

9परवर्ती पुराकाल

9.1 डायोक्लीशियन और कॉन्स्टैनटाइन का राज्य को नया रूप देना

परवर्ती पुराकाल उस अंतिम, बदलाव भरे दौर के लिए इतिहासकारों का इस्तेमाल किया शब्द है जिसमें रोमन साम्राज्य का विकास और अंततः विघटन हुआ, मोटे तौर पर चौथी से सातवीं सदी तक। राज्य की बुनियादी बनावट में बदलाव सम्राट डायोक्लीशियन (284-305 ई.) से शुरू हुआ : उसने सामरिक या आर्थिक रूप से कम मूल्य के क्षेत्र छोड़कर अति-विस्तार को क़ाबू में किया, सीमाओं को मज़बूत किया, प्रांतीय सीमाएँ फिर से तय कीं, और नागरिक व सैन्य कामकाज को अलग किया, जिससे सेनापतियों (ड्यूसीज़) को कहीं ज़्यादा स्वायत्तता और ताक़त मिली।

कॉन्स्टैनटाइन ने इन बदलावों को मज़बूत किया और अपनी ओर से भी नई चीज़ें जोड़ीं। सबसे अहम था मुद्रा-संबंधी बदलाव : सॉलिडस, साढ़े चार ग्राम शुद्ध सोने का सिक्का, जो इतने बड़े पैमाने पर ढाला गया कि यह ख़ुद रोमन साम्राज्य से भी ज़्यादा टिका।

चित्र 6 : एक सोने का सॉलिडस, वह सिक्का जो कॉन्स्टैनटाइन ने स्पेन की चाँदी की खानें सूखने के बाद परवर्ती साम्राज्य की मुद्रा-व्यवस्था खड़ी करने के लिए शुरू किया, यहाँ उसके बेटे कॉन्स्टैंशियस द्वितीय के शासनकाल का सिक्का दिखाया गया है। चित्र: Metropolitan Museum of Art / Wikimedia Commons / CC0.
चित्र 6: एक सोने का सॉलिडस, वह सिक्का जो कॉन्स्टैनटाइन ने स्पेन की चाँदी की खानें सूखने के बाद परवर्ती साम्राज्य की मुद्रा-व्यवस्था खड़ी करने के लिए शुरू किया, यहाँ उसके बेटे कॉन्स्टैंशियस द्वितीय के शासनकाल का सिक्का दिखाया गया है। चित्र: Metropolitan Museum of Art / Wikimedia Commons / CC0.
याद रखेंपरिभाषा 11

सॉलिडस साढ़े चार ग्राम शुद्ध सोने का सिक्का था, जिसे कॉन्स्टैनटाइन ने तब शुरू किया जब स्पेन की चाँदी की खानें ख़त्म हो गईं और पहली तीन सदियों की पुरानी चाँदी-आधारित मुद्रा-व्यवस्था चलाई नहीं जा सकती थी। परवर्ती पुराकाल में सॉलिडस लाखों की संख्या में प्रचलन में रहा।

कॉन्स्टैनटाइन का दूसरा बड़ा बदलाव राजनीतिक था : एक दूसरी राजधानी, कुंस्तुनतुनिया (आज का इस्तांबुल, पहले बाइज़ेंटियम कहलाता था), जो तीन तरफ़ से समुद्र से घिरी थी। नई राजधानी को अपनी सैनेट चाहिए थी, इसलिए चौथी सदी शासक वर्ग के तेज़ विस्तार का दौर बन गई। मुद्रा में स्थिरता और बढ़ती आबादी ने मिलकर असली आर्थिक विकास को गति दी; पुरातत्व से पता चलता है कि ग्रामीण इलाक़ों में तेल-प्रेस और काँच के कारख़ानों में भारी निवेश हुआ, स्क्रू-प्रेस और कई पहियों वाली पनचक्कियों जैसी नई तकनीकें आईं, और पूर्व के साथ लंबी दूरी का व्यापार फिर से जीवंत हुआ।

मिस्र के परवर्ती काल के पैपाइरस असली समृद्धि की तस्वीर पेश करते हैं : एक अपेक्षाकृत संपन्न, पैसे का व्यापक इस्तेमाल करने वाला समाज, जहाँ ग्रामीण जागीरें सोने में भारी आमदनी पैदा करती थीं। छठी सदी में जस्टीनियन के शासनकाल में अकेले मिस्र से हर साल 25 लाख से ज़्यादा सॉलिडस, यानी लगभग 35,000 पाउंड सोना, कर के रूप में मिलता था। पश्चिमी एशिया के ग्रामीण इलाक़े पाँचवीं-छठी सदी में इतने विकसित और घनी बसावट वाले थे कि, हैरानी की बात है, बीसवीं सदी में भी उतने नहीं थे।

9.2 ईसाईकरण, और कई धर्मों की दुनिया

शास्त्रीय संसार की परंपरागत धार्मिक संस्कृति, यूनानी और रोमन दोनों, बहुदेववादी थी : रोमन-इतालवी देवता जैसे जूपिटर, जूनो, मिनर्वा और मार्स, कई यूनानी और पूर्वी देवताओं के साथ-साथ, साम्राज्य भर के हज़ारों मंदिरों, तीर्थों और पूजा-स्थलों में पूजे जाते थे। बहुदेववादियों के पास, ग़ौर करने लायक़ बात है, अपने लिए कोई साझा नाम ही नहीं था। यहूदी धर्म साम्राज्य की दूसरी बड़ी धार्मिक परंपरा थी, और वह भी कोई एक-रूप चीज़ नहीं था, परवर्ती पुराकाल के यहूदी समुदायों में भी असली विविधता थी।

याद रखेंपरिभाषा 12

ईसाईकरण वह प्रक्रिया है जिससे ईसाई धर्म आबादी के अलग-अलग वर्गों में फैला और साम्राज्य का प्रमुख धर्म बन गया। यह धीमा और जटिल था : बहुदेववाद रातों-रात ख़त्म नहीं हुआ, ख़ासकर पश्चिमी प्रांतों में, और चौथी सदी में धार्मिक समुदायों की सीमाएँ कहीं ज़्यादा लचीली थीं, बाद में शक्तिशाली बिशपों ने विश्वासों का एक कहीं ज़्यादा सख़्त ढाँचा लागू करने की कोशिश की, तब जाकर ये सीमाएँ सख़्त हुईं।

9.3 साम्राज्य का अंत : ढहा हुआ पश्चिम, जीवित पूर्व

पूर्व में समृद्धि ख़ासतौर पर ज़्यादा थी, वहाँ की आबादी 540 के दशक की महामारी के असर के बावजूद छठी सदी तक बढ़ती रही। पश्चिम में, इसके उलट, सीमावर्ती क्षेत्रों की जनजातियों (गोथ, विसीगोथ, वैंडल व अन्य) तथा रोम के बीच की व्यवस्थाएँ बिगड़ने लगीं। ये व्यवस्थाएँ व्यापार, सैन्य-भर्ती तथा बसने से जुड़ी थीं, और जनजातियों ने रोम प्रशासन पर अपने आक्रमण बढ़ा दिए। ये टकराव बढ़ते गए और साम्राज्य के आंतरिक मतभेदों से जुड़ गए, इसलिए पाँचवीं सदी तक पश्चिम का साम्राज्य नष्ट हो गया : वह राजनीतिक रूप से बिखर गया, क्योंकि जर्मन समूहों, गोथ, वैंडल और लौंबार्ड में से कई, ने बड़े प्रांतों पर क़ब्ज़ा कर लिया और ऐसे राज्य बनाए जिन्हें इतिहासकार “उत्तर-रोमन” कहते हैं।

उत्तर-रोमन राज्य कहाँ कब तक चला
विसिगोथ स्पेन अरबों ने ख़त्म किया, 711-720 ई.
फ़्रैंक गॉल लगभग 511-687 ई.
लौंबार्ड इटली 568-774 ई.

पूर्व में, जहाँ साम्राज्य एकजुट बना रहा, जस्टीनियन (527-65 ई.) का शासनकाल समृद्धि और शाही महत्वाकांक्षा का शिखर माना जाता है, जिसे रैवेना में उन्हीं के जीवनकाल में बने मशहूर मोज़ेक चित्र में देखा जा सकता है।

चित्र 7 : रैवेना के सान विताले बासिलिका का छठी सदी का मोज़ेक, जिसमें सम्राट जस्टीनियन को दिखाया गया है, यह पूर्वी साम्राज्य की परवर्ती पुराकाल की समृद्धि के शिखर की झलक देता है। चित्र: Wikimedia Commons / Public Domain.
चित्र 7: रैवेना के सान विताले बासिलिका का छठी सदी का मोज़ेक, जिसमें सम्राट जस्टीनियन को दिखाया गया है, यह पूर्वी साम्राज्य की परवर्ती पुराकाल की समृद्धि के शिखर की झलक देता है। चित्र: Wikimedia Commons / Public Domain.

जस्टीनियन ने 533 ई. में वैंडलों से अफ्रीका फिर से जीत लिया, लेकिन ऑस्ट्रोगोथों से इटली को वापस लेने में इटली पूरी तरह तबाह हो गया, और इसी ने आगे लौंबार्ड आक्रमण का रास्ता खोल दिया। सातवीं सदी के शुरू तक, रोम और ईरान के बीच युद्ध फिर भड़क उठा : तीसरी सदी से ईरान पर राज कर रहे ससानियों ने मिस्र सहित सभी बड़े पूर्वी प्रांतों पर पूरे पैमाने पर आक्रमण कर दिया। जब बाइज़ेंटियम, जैसा पूर्वी रोमन साम्राज्य अब कहलाने लगा था, ने 620 के दशक में इन प्रांतों को फिर से जीत लिया, तो वह उस आख़िरी बड़े झटके से बस कुछ ही साल दूर था, जो इस बार दक्षिण-पूर्व से आने वाला था।

परीक्षा संकेत

अरब प्रायद्वीप से इस्लाम के विस्तार को “प्राचीन विश्व इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक क्रांति” कहा गया है। पैग़ंबर मुहम्मद की मृत्यु के मुश्किल से दस साल बाद, 642 ई. तक, पूर्वी रोमन और ससानी दोनों साम्राज्यों के बड़े हिस्से अरबों के हाथ आ चुके थे। ये विजय अंततः, क़रीब एक सदी बाद, स्पेन, सिंध और मध्य एशिया तक पहुँचीं, लेकिन इनकी शुरुआत नए इस्लामी राज्य द्वारा पहले अरब प्रायद्वीप के अंदर ही अरब कबीलों को एकजुट करने से हुई थी।

10समय-रेखा : तीन महाद्वीपों में फैला साम्राज्य एक नज़र में

27 ई.पू.-14 ई.ऑगस्टस, पहला रोमन सम्राट; “प्रिंसिपेट” की स्थापना (27 ई.पू.)
14-37 ई.टिबेरियस, ऑगस्टस का गोद लिया उत्तराधिकारी, शासन करता है
66-70 ई.बड़ा यहूदी विद्रोह; रोमन सेनाओं द्वारा जेरूसलम पर क़ब्ज़ा
79 ई.विसूवियस ज्वालामुखी फटता है, पोम्पेई दब जाता है और वरिष्ठ प्लिनी की मौत हो जाती है
98-117 ई.त्राजान; लगभग 115 ई. में साम्राज्य अपने सबसे बड़े विस्तार तक पहुँचता है
212 ई.साम्राज्य के सभी स्वतंत्र निवासियों को रोमन नागरिकता मिलती है
224-225 ई.ईरान में ससानी वंश की स्थापना
253-68 ई.गैलीनस सेना को फिर से संगठित करता है; रोम पाल्मीरा को नष्ट करता है (273 ई.)
284-305 ई.डायोक्लीशियन साम्राज्य को 100 प्रांतों में बाँटता है (297 ई.)
312-37 ई.कॉन्स्टैनटाइन ईसाई धर्म अपनाता है (312), सॉलिडस चलाता है (लगभग 310), और कुंस्तुनतुनिया की स्थापना करता है (324)
378 ई.ऐड्रियॉनोपोल की लड़ाई में गोथ रोमन सेनाओं को कुचल देते हैं
410 ई.विसिगोथ रोम को लूटते हैं
527-65 ई.जस्टीनियन; अफ्रीका और इटली की पुनः विजय (533-50 ई.); बुबोनिक प्लेग का प्रकोप (541-70 ई.)
लगभग 570 ई.पैग़ंबर मुहम्मद का जन्म
622 ई.मुहम्मद और उनके साथी मक्का से मदीना जाते हैं, हिजरी युग की शुरुआत
633-42 ई.अरब सेनाएँ विजय की पहली, निर्णायक लहर में सीरिया, फ़िलिस्तीन, मिस्र, इराक़ और ईरान का कुछ हिस्सा जीत लेती हैं
711 ई.स्पेन पर अरब आक्रमण शुरू होता है, 720 ई. तक विसिगोथ राज्य का अंत हो जाता है
सभी परिभाषाएँ एक जगह
पैपाइरस / पैपाइरस शास्त्रीमिस्र का सरकंडे जैसे पौधे से बना लेखन-पदार्थ; बचे पैपाइरस का अध्ययन करने वाले विद्वान
प्रिंसिपेट / प्रिन्सेप्स27 ई.पू. से ऑगस्टस की व्यवस्था, सार्वजनिक रूप से सैनेट के “प्रमुख नागरिक” के शासन जैसी दिखाई गई
गणतंत्र / सैनेटरोम की 27 ई.पू. से पहले की व्यवस्था, जिसमें सत्ता धनी, आजीवन-सदस्यता वाली सैनेट के हाथ में थी
रोमन नगरअपने दंडनायक, परिषद और अधीन गाँवों वाले “क्षेत्र” से युक्त एक शहरी केंद्र
दीनारियसलगभग साढ़े चार ग्राम शुद्ध चाँदी का रोमन सिक्का, साम्राज्य की शुरुआती मुद्रा
रोमन एकल परिवारपति, पत्नी और बच्चे, जिसमें पत्नी अपनी संपत्ति पर स्वतंत्र क़ानूनी नियंत्रण रखती थी
एम्फ़ोराभूमध्यसागरीय शराब और जैतून तेल भेजने के मानक पात्र
ऋतु-प्रवासचरवाहे का पहाड़ी और निचले चरागाहों के बीच मौसमी आवागमन
अश्वारोही (इक्वाइट्स)दूसरा सबसे शक्तिशाली रोमन वर्ग, अक्सर ज़मींदार होने के साथ व्यापारी, बैंकर और जहाज़-मालिक भी
ह्यूमिलिओरिसविशाल निचला वर्ग : ग्रामीण मज़दूर, शिल्पकार, आकस्मिक मज़दूर और दास
सॉलिडसकॉन्स्टैनटाइन का साढ़े चार ग्राम सोने का सिक्का, परवर्ती साम्राज्य की मुद्रा
ईसाईकरणईसाई धर्म का साम्राज्य के प्रमुख धर्म बनने तक का धीमा, असमान प्रसार
फटाफट रिवीज़न : परीक्षा से पहली रात यही पढ़ें
  • रोम और ईरान ने यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के ज़्यादातर हिस्से को आपस में बाँट लिया था, फ़रात नदी इनके बीच की सीमा थी
  • ऑगस्टस ने 27 ई.पू. में प्रिंसिपेट स्थापित किया; सम्राट, सैनेट और वेतनभोगी पेशेवर सेना साम्राज्य के तीन मुख्य “खिलाड़ी” थे
  • आश्रित राज्य धीरे-धीरे कर-अधीन प्रांतों में बदलते गए; आधुनिक सरकार की जगह नगरों ने ही इतने विशाल साम्राज्य को असल में चलाया
  • तीसरी सदी ने असली संकट लाया : ईरान में आक्रामक नया ससानी वंश, राइन-डैन्यूब पर जर्मन आक्रमण, और 47 साल में 25 सम्राट
  • रोमन स्त्रियों को संपत्ति और तलाक़ में चौंकाने वाली क़ानूनी स्वतंत्रता थी, फिर भी विवाह की उम्र और घरेलू सत्ता में असली असमानता बनी रही
  • साक्षरता जगह-जगह अलग थी : पोम्पेई में व्यापक दीवार-लेखन, पर मिस्र में ज़्यादातर औपचारिक लेखन पेशेवर लेखकों के ज़िम्मे
  • गेहूँ, शराब और जैतून तेल एम्फ़ोरा में भूमध्यसागर पार करते थे; तेल-व्यापार पर बारी-बारी स्पेन, फिर उत्तरी अफ्रीका, फिर पूर्व का दबदबा रहा
  • समय के साथ दास-श्रम का महत्व घटता गया क्योंकि मुक्त और क़र्ज़-बंधी मज़दूरी बढ़ी; निगरानी, दाग़ लगाना और क़र्ज़-अनुबंध, दोनों तरह के मज़दूरों को क़ाबू में रखते थे
  • समाज सैनेट सदस्य-अश्वारोही से लेकर ह्यूमिलिओरिस तक फैला था, और परवर्ती साम्राज्य तक सैनेट सदस्य और अश्वारोही एक ही धनी अभिजात वर्ग में मिल चुके थे
  • डायोक्लीशियन और कॉन्स्टैनटाइन ने राज्य को नया रूप दिया : नए प्रांत, सोने का सॉलिडस, और कुंस्तुनतुनिया नाम की दूसरी राजधानी; ईसाई धर्म राजधर्म बन गया
  • पश्चिम पाँचवीं सदी तक जर्मन “उत्तर-रोमन” राज्यों में बिखर गया, जबकि पूर्व, बाइज़ेंटियम के रूप में, इस्लाम के उदय तक कई सदियाँ जीवित और फलता-फूलता रहा
परीक्षा से पहले ख़ुद जाँच लें
  • क्या मैं साम्राज्य की राजनीति के तीन मुख्य “खिलाड़ियों” के नाम बता सकता/सकती हूँ, और समझा सकता/सकती हूँ कि हर एक बाक़ी दोनों को कैसे नियंत्रित रखता था?
  • क्या मैं समझा सकता/सकती हूँ कि हेरॉड जैसा आश्रित राज्य कैसे रोमन प्रांत बना?
  • क्या मैं समझा सकता/सकती हूँ कि किताब शहरीकरण को इतने विशाल क्षेत्र पर शासन का “जवाब” क्यों कहती है?
  • क्या मैं तीसरी सदी के संकट के कम-से-कम तीन कारण गिना सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं रोमन पत्नी की क़ानूनी स्थिति की तुलना रोमन पिता की बच्चों पर क़ानूनी ताक़त से कर सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं बता सकता/सकती हूँ कि एम्फ़ोरा क्या होते थे, और पुरातत्वविद इन्हें सबूत के रूप में कैसे इस्तेमाल करते हैं?
  • क्या मैं मज़दूरों को नियंत्रित करने के दो अलग तरीक़े बता सकता/सकती हूँ, चाहे वे बंधुआ हों या मुक्त?
  • क्या मैं प्रिंसिपेट की चाँदी-आधारित मुद्रा और बाद के सोने के सॉलिडस के बीच का अंतर, और यह बदलाव क्यों हुआ, समझा सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं समझा सकता/सकती हूँ कि पश्चिमी साम्राज्य पाँचवीं सदी तक क्यों ढह गया जबकि पूर्वी साम्राज्य, बाइज़ेंटियम के रूप में, कई सदियों तक और टिका रहा?
  • क्या मैं बता सकता/सकती हूँ कि डायोक्लीशियन और कॉन्स्टैनटाइन ने साम्राज्य के चलने के तरीक़े में क्या-क्या बदला?
  • क्या मैं समझा सकता/सकती हूँ कि इतिहासकार पाठ, दस्तावेज़ और भौतिक अवशेषों को मिलाकर रोमन इतिहास कैसे रचते हैं?
  • क्या मैं समझा सकता/सकती हूँ कि “परवर्ती पुराकाल” को सिर्फ़ “पतन” न कहकर एक अलग, बदलाव भरा दौर क्यों माना जाता है?
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