कक्षा 11 इतिहास अध्याय 1 लेखन कला और शहरी जीवन NCERT समाधान (NCERT Solutions) हिंदी में

एनसीईआरटी की पुस्तक विश्व इतिहास के कुछ विषय के अध्याय 1 “लेखन कला और शहरी जीवन” के अभ्यास के सभी छह प्रश्न, हिंदी संस्करण में छपे प्रश्नों के अनुसार (शब्द वही हैं, नुक़्ते इस वेबसाइट की एक जैसी वर्तनी के अनुसार लगाए गए हैं), और हर प्रश्न के नीचे पूरा आदर्श उत्तर। पहले ख़ुद लिखिए, फिर मिलाइए।

ध्यान दीजिए

इस अध्याय के हिंदी और अंग्रेज़ी संस्करणों के अभ्यास प्रश्न पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं। यहाँ प्रश्न हिंदी संस्करण के अनुसार दिए गए हैं, और जहाँ अंग्रेज़ी संस्करण अलग है वहाँ उत्तर में उसकी जानकारी भी दे दी गई है।

1 उर्वरता, खाद्य उत्पादन और आरंभिक शहरीकरण

संक्षेप में उत्तर दीजिए, प्रश्न 1

प्र. आप यह कैसे कह सकते हैं कि प्राकृतिक उर्वरता तथा खाद्य उत्पादन के उच्च स्तर ही आरंभ में शहरीकरण के कारण थे?

उत्तर: सच यह है कि अच्छी उपज नगर को संभव बनाती है, उसे जन्म नहीं देती, इसलिए इन्हें अकेला कारण नहीं कहा जा सकता। (अंग्रेज़ी संस्करण में यही प्रश्न निषेध के साथ छपा है, यानी “ये आरंभिक शहरीकरण के कारण नहीं थे, ऐसा हम क्यों कहते हैं”, और उत्तर की सामग्री दोनों में एक ही है।)
दक्षिणी मेसोपोटामिया की सिंचित खेती बेहद उपजाऊ थी, फिर भी वहाँ के गाँव हज़ारों साल तक अनाज उगाते रहे और उनमें से कोई नगर नहीं बना, और उत्तर-पूर्व के उपजाऊ मैदानों में तो लगभग 7000 ई.पू. से खेती हो रही थी।
नगर की असली पहचान उसकी अर्थव्यवस्था है। नगर में भोजन उगाना कई कामों में से सिर्फ़ एक होता है, उसके साथ व्यापार, निर्माण और सेवाएँ भी चलती हैं, और कोई भी अपने आप में पूरा नहीं रहता। मुद्रा गढ़ने वाला बारीक नक़्क़ाशी जानता है, पर काँसे के औज़ार और रंगीन पत्थर उसे कहीं और से लेने पड़ते हैं, और धातु का काम करने वाला ख़ुद खान खोदने नहीं निकलता। दक्षों के बीच यही लगातार लेन-देन श्रम विभाजन कहलाता है, और इसे चलाने के लिए भंडारण, अभियानों की तैयारी और लिखित हिसाब की सामाजिक व्यवस्था चाहिए।
अध्याय एक दूसरी बात और ज़ोर से कहता है। दक्षिणी मेसोपोटामिया में अच्छा पत्थर, धातु और मज़बूत लकड़ी थी ही नहीं, इसलिए उसे अपने कपड़े और अनाज देकर तुर्की, ईरान और खाड़ी पार से लकड़ी, तांबा, टिन, चाँदी, सोना, सीपी और पत्थर मँगाने पड़े। यानी बहुतायत नहीं, कमी ही वह चीज़ थी जिसने नगर की बुनियाद बनने वाली व्यवस्था खड़ी करवाई। इसलिए ऊँचा खाद्य उत्पादन एक ज़रूरी पृष्ठभूमि थी, और असली कारण थे व्यापार, विशेषज्ञता और उनके लिए ज़रूरी संगठन।

2 आवश्यक दशाएँ और शहरों के विकास के परिणाम

संक्षेप में उत्तर दीजिए, प्रश्न 2

प्र. आपके विचार से निम्नलिखित में से कौन-सी आवश्यक दशाएँ थीं जिनकी वजह से प्रारंभ में शहरीकरण हुआ था और निम्नलिखित में से कौन-कौन सी बातें शहरों के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न हुईं?
(क) अत्यंत उत्पादक खेती,
(ख) जल-परिवहन,
(ग) धातु और पत्थर की कमी,
(घ) श्रम विभाजन,
(ङ) मुद्राओं का प्रयोग,
(च) राजाओं की सैन्य-शक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य बना दिया।

उत्तर:
आवश्यक दशाएँ
(क) अत्यंत उत्पादक खेती। नगर में बहुत से लोग ऐसे रहते हैं जो अपना अनाज ख़ुद नहीं उगाते, इसलिए भरोसे लायक़ अतिरिक्त उपज पहले से होनी चाहिए। यह दशा है, कारण नहीं, क्योंकि गाँवों में सदियों तक अतिरिक्त उपज रही और नगर नहीं बने।
(ख) जल-परिवहन। भारवाहक पशु और बैलगाड़ियाँ लंबी यात्रा का चारा खुद खा जाती हैं, जबकि नावें और बजरे धारा या हवा से चलते हैं। मेसोपोटामिया की नहरें बस्तियों के बीच बहती थीं और व्यापार के रास्ते भी थीं। इस सस्ती ढुलाई के बिना नगर का व्यापार टिक नहीं सकता था।
(ग) धातु और पत्थर की कमी। यह वह दशा है जिसने संगठित व्यापार को मजबूर किया, इसलिए इसे शहरीकरण का सबसे सक्रिय कारण माना जाता है। दक्षिण को अपने कपड़े और उपज देकर दूर-दूर से लकड़ी, तांबा, टिन, चाँदी, सोना, सीपी और पत्थर मँगाने पड़े, और इतने बड़े व्यापार के लिए भंडारण, तालमेल तथा लिखित हिसाब चाहिए, जो लोगों को नगर में इकट्ठा करता है।
(घ) श्रम विभाजन। यह दशा और चालक शक्ति दोनों है। जैसे ही दक्ष लोग एक-दूसरे पर निर्भर हुए, पास-पास रहना मजबूरी बन गया, और यही आपसी निर्भरता नगर को आगे बढ़ाती है।
शहरों के विकास के फलस्वरूप उत्पन्न बातें
(ङ) मुद्राओं का प्रयोग। बेलनाकार मुद्रा गठरी की गाँठ या मर्तबान के मुँह पर लुढ़काकर सामान को छेड़छाड़ से बचाती थी, और मिट्टी की चिट्ठी पर लुढ़काने से भेजने वाले की पहचान का प्रमाण बन जाती थी। ये दोनों काम वहीं ज़रूरी हैं जहाँ अनजान लोग बार-बार लेन-देन करें, इसलिए मुद्रा शहरी जीवन की उपज है।
(च) राजाओं की सैन्य-शक्ति जिसने श्रम को अनिवार्य बना दिया। राजपद पहले से बसे और भरे-पूरे इलाक़े में ज़मीन और पानी के बार-बार के झगड़ों से निकला। एक बार बन जाने के बाद राजाओं ने युद्ध-बंदियों और स्थानीय लोगों को मंदिर या अपने लिए अनिवार्य श्रम पर लगाया और उन्हें राशन दिया। यह शहरी समाज ने पैदा किया, इसने शहरी समाज को पैदा नहीं किया।
ध्यान रहे: अंग्रेज़ी संस्करण में यही प्रश्न तीन वर्गों में बाँटने को कहता है, आवश्यक दशाएँ, कारण और परिणाम। उस विभाजन में (क) और (ख) आवश्यक दशाएँ, (ग) और (घ) कारण, तथा (ङ) और (च) परिणाम होंगे।

3 खानाबदोश पशुचारक और शहरी जीवन

संक्षेप में उत्तर दीजिए, प्रश्न 3

प्र. यह कहना क्यों सही होगा कि खानाबदोश पशुचारक निश्चित रूप से शहरी जीवन के लिए ख़तरा थे?

उत्तर: (अंग्रेज़ी संस्करण में यह प्रश्न निषेध के साथ छपा है, यानी “चलते-फिरते पशुचारक शहरी जीवन के लिए ज़रूरी तौर पर ख़तरा क्यों नहीं थे”, इसलिए नीचे दोनों पक्ष दिए गए हैं और अंत में अध्याय की अपनी स्थिति भी।)
जिन बातों से उन्हें ख़तरा कहा जा सकता है
पानी तक पहुँचने के लिए खेत पार करता रेवड़ बोई हुई फ़सल उजाड़ सकता था। चलते-फिरते चरवाहे गाँव का जमा हुआ अनाज लूट सकते थे। बसे हुए समुदाय उन्हें कुछ रास्तों पर नहर के पानी तक जाने से रोकते थे, जिससे टकराव और बढ़ता था। यही वजह है कि मारी के राजा क़बीलों पर नज़र रखते थे और अधिकारियों की चिट्ठियों में रात के समय एक शिविर से दूसरे शिविर तक जाने वाले आग के संकेतों का ज़िक्र मिलता है, जो संभावित छापे की चेतावनी होते थे।
जिन बातों से वे ज़रूरी तौर पर ख़तरा नहीं थे
दोनों को एक-दूसरे की ज़रूरत थी। पशुचारक बसे हुए इलाक़ों में छोटे जानवर, पनीर, चमड़ा और मांस लाते थे और बदले में अनाज तथा धातु के औज़ार ले जाते थे। कटी हुई फ़सल के खेत में बाँधे गए रेवड़ का गोबर खेत को उपजाऊ बनाता था। पशुचारक बसे हुए समाज की कमियाँ भी भरते थे, फ़सल काटने के मज़दूर और भाड़े के सैनिक बनकर।
अध्याय की अपनी स्थिति
मेसोपोटामिया के इतिहास में पश्चिमी मरुस्थल के खानाबदोश समूह बार-बार भीतर आते रहे, पहले चरवाहे, मज़दूर या सैनिक बनकर, और उनमें से कुछ इतने समृद्ध हो गए कि अपने राजवंश बना लिए, जैसे अक्कदी, एमोराइट, असीरियाई और आरामेइन। मारी के अपने राजा एमोराइट थे, जो इस भूमि के परंपरागत देवताओं का सम्मान करते थे और साथ ही स्टेपी के देवता डैगन के लिए मारी में मंदिर भी बनवाते थे। अध्याय अलग-अलग लोगों को अपना लेने की इसी क्षमता को मेसोपोटामियाई सभ्यता की ताक़त मानता है, इसलिए संतुलित उत्तर यही है कि टकराव सचमुच था, पर पशुचारक नगर के लिए ज़रूरी तौर पर ख़तरा नहीं थे।

4 पुराने मंदिर घर जैसे क्यों रहे होंगे

संक्षेप में उत्तर दीजिए, प्रश्न 4

प्र. आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि पुराने मंदिर बहुत कुछ घर जैसे ही होंगे?

उत्तर: क्योंकि उन्हें ठीक वही समझा भी जाता था। मंदिर किसी देवता का निवास था, जैसे उर का चंद्र देवता या प्रेम और युद्ध की देवी इन्नाना, और घर उसी के लिए बनाया जाता है जिसे उसमें रहना हो। इसीलिए लगभग 5000 ई.पू. का सबसे पुराना ज्ञात मंदिर कच्ची ईंट का एक छोटा-सा पूजा-स्थल था, आस-पास के घरों जैसी ही सामग्री और वैसे ही ढाँचे में बना, जिसके कमरे खुले आँगन के चारों ओर थे।
शुरू से सिर्फ़ एक बात उसे अलग करती थी: उसकी बाहरी दीवार नियमित अंतराल पर भीतर-बाहर जाती थी, जो किसी आम घर की दीवार में नहीं होता था। बाक़ी सब कुछ समय के साथ आया। उसी जगह उसे बार-बार, हर बार पहले से बड़ा और पक्की ईंट का बनाया गया, और उसने ऐसे काम संभाल लिए जो किसी घर के नहीं थे: देवता को आस-पास के खेतों, मछलीघरों और पशुओं का स्वामी माना जाने लगा, वहाँ तेल पेरने, अनाज पीसने, सूत कातने और बुनने का काम होने लगा, और समुदाय के लिखित अभिलेख भी वहीं रखे जाने लगे। जो मंदिर देवता के घर के रूप में शुरू हुआ था, वह पूरे नगर की सबसे बड़ी संस्था बन गया।

5 नयी संस्थाएँ और राजा की पहल

संक्षेप में निबंध लिखिए, प्रश्न 5

प्र. शहरी जीवन शुरू होने के बाद कौन-कौन सी नयी संस्थाएँ अस्तित्व में आईं? आपके विचार से उनमें से कौन-सी संस्थाएँ राजा की पहल पर निर्भर थीं।

उत्तर:
शहरी जीवन के साथ आईं नयी संस्थाएँ
मंदिर, जो नगर का आर्थिक और धार्मिक केंद्र बना; राजपद; राशन पर टिका अनिवार्य श्रम; संगठित लंबी दूरी का व्यापार; लिखित अभिलेख और लेखकों की पाठशालाएँ; दस्तकारों का श्रम विभाजन; तथा मालिकाना हक़ और प्रामाणिकता दिखाने वाली मुद्राएँ।
जो राजा की पहल पर निर्भर थीं
1. अनिवार्य श्रम। युद्ध-बंदियों और स्थानीय लोगों को सीधे मंदिर या शासक के लिए काम पर लगाया जाता था। यह खेती पर लगने वाला कर नहीं, ज़बरदस्ती की सेवा थी, और मज़दूरों को मिलने वाले अनाज, कपड़े तथा तेल की सैकड़ों राशन-सूचियाँ बची हैं। ऐसा दबाव सैन्य ताक़त वाला ही डाल सकता था, और इसके बिना यह समझाया ही नहीं जा सकता कि एक मंदिर बनाने में 1,500 आदमी रोज़ दस घंटे पाँच साल तक कैसे लगे रहे।
2. संगठित लंबी दूरी का व्यापार। एनमर्कर वाली सुमेरियन कविता साफ़ कहती है कि उरुक के इस प्राचीन शासक ने सुमेर का पहला व्यापार संगठित किया और लाजवर्द पत्थर तथा बहुमूल्य धातुओं के लिए सात पहाड़ी शृंखलाएँ पार करके अरट्टा तक दूत भेजा। इतने बड़े अभियानों के लिए अधिकार, रक्षक और साधन किसी एक घर या कारख़ाने के बस की बात नहीं थी।
3. नगर की रक्षा-दीवार और विशाल निर्माण। उरुक ने बहुत जल्दी रक्षा-दीवार बनवाई, और गिल्गोमिश पक्की ईंट की नींव वाली जिस नगर-दीवार के लिए याद किया जाता है वह भी इसी तरह का काम है। दीवारें, मंदिर और राजमहल संगठित श्रम के काम हैं, यानी बात फिर पहले बिंदु पर लौट आती है।
4. लेखन, जैसा वे ख़ुद मानते थे। उनकी परंपरा में मिट्टी पर पहली बार शब्द लिखने का श्रेय एनमर्कर को है। ऐतिहासिक सच जो भी हो, इससे इतना ज़रूर पता चलता है कि वे हिसाब रखने को भी राजपद की ही देन मानते थे।
जो उसकी पहल पर निर्भर नहीं थीं
5. मंदिर। वह राजपद से पुराना है। दक्षिण में लगभग 5000 ई.पू. से कच्ची ईंट का छोटा पूजा-स्थल मौजूद था, राजाओं के होने से बहुत पहले, और वह अपने ही विकास से नगर की सबसे बड़ी संस्था बना। सफल योद्धा नेता उसे लूट से सजाते थे और उसी से उन्हें प्रतिष्ठा मिलती थी, यानी मंदिर ने राजा बनाए, राजा ने मंदिर नहीं।
6. श्रम विभाजन और मुद्राओं का प्रयोग। ये शहरी अर्थव्यवस्था के अपने कामकाज से निकले। दक्षों को एक-दूसरे की ज़रूरत थी, और मुद्रा वहीं चाहिए थी जहाँ अनजान लोग सामान और चिट्ठियाँ बदलते हों।
निष्कर्ष
7. राजा की पहल पर वही संस्थाएँ टिकी थीं जिनमें बल या बड़े पैमाने का तालमेल चाहिए, यानी अनिवार्य श्रम, संगठित व्यापार और विशाल निर्माण। मंदिर और दस्तकारी समुदाय के जीवन से उपजे, और राजाओं ने बाद में उन्हें अपनाकर और बड़ा किया।

6 पुरानी कहानियों से मिलने वाली झलक

संक्षेप में निबंध लिखिए, प्रश्न 6

प्र. किन पुरानी कहानियों से हमें मेसोपोटामिया की सभ्यता की झलक मिलती है?

उत्तर:
1. गिल्गोमिश महाकाव्य। बारह पट्टिकाओं पर लिखा यह महाकाव्य उरुक के उस वीर की कथा है जो अपने सबसे प्रिय मित्र की मृत्यु से हिलकर अमरता का रहस्य खोजने निकला, दुनिया को घेरने वाली मानी जाने वाली जलराशियों तक पार कीं, और ख़ाली हाथ लौटा। उसे सांत्वना अपने ही बनवाए नगर की दीवार पर टहलते हुए, उसकी पक्की ईंट की नींव निहारते हुए मिली। क़बीलाई समाज का नायक इस विचार से संतोष पाता कि उसके बेटे उसके बाद जीवित रहेंगे; गिल्गोमिश को संतोष उस नगर से मिलता है जो उसके लोगों ने मिलकर बनाया। इससे पता चलता है कि मेसोपोटामियावासी के लिए असली विरासत नगर थी, वंश नहीं।
2. एनमर्कर और अरट्टा के स्वामी की कथा। इस लंबी सुमेरियन कविता में उरुक का प्राचीन शासक सुमेर का पहला व्यापार संगठित करता है और फिर, जब दूत का “मुँह थक जाता है” और वह लंबे मौखिक संदेश ठीक-ठीक नहीं पहुँचा पाता, मिट्टी की पट्टिका बनाकर शब्द लिख देता है। इससे साफ़ है कि वे व्यापार और लेखन दोनों को राजपद की देन मानते थे, और उसी कविता में लेखन को पड़ोसी अरट्टा पर अपनी श्रेष्ठता का चिह्न भी बताया गया है।
3. जलप्रलय की कथा। मेसोपोटामिया की परंपरा में इस कथा का नायक ज़िउसूद्र या उतनापिष्टिम है, और वह बाईबल की नूह वाली कथा से इतनी मिलती-जुलती है कि 1873 में एक ब्रिटिश अख़बार ने वह पट्टिका ढूँढ़ने के लिए ब्रिटिश म्यूज़ियम के पूरे अभियान का ख़र्च उठाया। 1960 के दशक तक विद्वान मान चुके थे कि ऐसी कथाएँ शब्दशः सच नहीं, बल्कि ऐतिहासिक बदलावों को याद रखने का तरीक़ा हैं।
4. उजड़े नगरों का विलाप। मेसोपोटामियावासियों को अलग-अलग समुदायों और संस्कृतियों के लोगों के साथ रहने पर गर्व था, और जब कोई नगर युद्ध में उजड़ता तो वे उस पर शोक-कविताएँ लिखते थे। इससे उनके शहरी जीवन के प्रति लगाव का पता चलता है।
5. अतीत को सहेजने की आदत। गिल्गोमिश महाकाव्य जैसी रचनाओं की नक़लों पर नक़ल करने वाले का नाम और तारीख़ दर्ज रहती थी, और असुरबनिपाल ने निनवै के अपने पुस्तकालय के लिए पुरानी पट्टिकाएँ ढुँढ़वाने दक्षिण में लेखक भेजे। इससे एक ऐसी सभ्यता दिखती है जो अपनी ही प्राचीनता के प्रति सचेत थी।
निष्कर्ष
6. हिसाब की पट्टिकाएँ बताती हैं कि उनके पास क्या था और वे क्या बेचते-ख़रीदते थे। ये कहानियाँ बताती हैं कि वे क्या सोचते और किसे बड़ा मानते थे: राजपद की उनकी समझ, नगरों का उनका गर्व, लेखन की उनकी व्याख्या, और आपदा की उनकी स्मृति।