उत्पत्ति एवं विकास
- पृथ्वी की उत्पत्ति के बारे में विचार कान्ट की नीहारिका परिकल्पना से आज के बिग बैंग सिद्धांत तक कैसे बदले
- वे तीन अवस्थाएँ, जिनमें पहले ब्रह्मांड, फिर तारे, फिर ग्रह वास्तव में बने
- पृथ्वी पूरी तरह ठोस चट्टान क्यों नहीं है, और वह अलग-अलग घनत्व की परतों में कैसे बँटी
- आज की हवा और महासागर तीन अलग अवस्थाओं में कैसे बने, और ऑक्सीजन वास्तव में कहाँ से आई
- निर्जीव रसायन जीवित पदार्थ में कैसे बदले, और सबसे पुराने जीवाश्म हमें क्या बताते हैं
1आरंभिक सिद्धांत: पृथ्वी की उत्पत्ति
पृथ्वी की उत्पत्ति के बारे में कोई भी विचार जाँचा जा सके, उससे बहुत पहले ही दार्शनिकों और वैज्ञानिकों ने इसे समझाने की कोशिश की थी। सबसे पुराना और लोकप्रिय मत जर्मन दार्शनिक इमैनुअल कान्ट का था। 1796 में गणितज्ञ लाप्लेस ने कान्ट के विचार को संशोधित करके एक पूरा रूप दिया, जिसे आज नीहारिका परिकल्पना कहा जाता है।
नीहारिका परिकल्पना के अनुसार ग्रहों का निर्माण एक युवा, धीमी गति से घूमते सूर्य से जुड़े पदार्थों के बादल (नीहारिका) से हुआ।
यह परिकल्पना लाप्लेस पर ही नहीं रुकी। 1950 में रूस के ऑटो शिमिड और जर्मनी के कार्ल वाइज़ास्कर ने नीहारिका परिकल्पना में और संशोधन किया, हालाँकि दोनों वैज्ञानिकों के विचार कुछ बिंदुओं पर अलग थे। इनके अनुसार युवा सूर्य एक सौर नीहारिका से घिरा था, जो मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम की बनी थी, साथ में कुछ धूलिकण भी थे। इन कणों के घर्षण और टकराने से एक चपटी तश्तरी के आकार का बादल बना, और इसी से अभिवृद्धि (छोटे कणों का धीरे-धीरे जुड़कर बड़े पिंड बनना) की प्रक्रिया द्वारा ग्रहों का निर्माण हुआ।
वैज्ञानिकों ने धीरे-धीरे सिर्फ़ “पृथ्वी कैसे बनी” पूछना छोड़कर एक बड़ा सवाल पूछना शुरू किया, “पूरा ब्रह्मांड कैसे बना”। यही सवाल इस खंड के आरंभिक सिद्धांतों को आगे के आधुनिक सिद्धांतों से अलग करता है।
2आधुनिक सिद्धांत: ब्रह्मांड की उत्पत्ति
ब्रह्मांड की उत्पत्ति की सबसे मान्य व्याख्या बिग बैंग सिद्धांत है।
बिग बैंग सिद्धांत, जिसे विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना भी कहते हैं, के अनुसार ब्रह्मांड एक अत्यंत गर्म व सघन बिंदु से शुरू हुआ, जिसमें विस्फोट हुआ और तब से यह लगातार फैल रहा है।
1920 में खगोलशास्त्री एडविन हब्बल ने इसका मुख्य प्रमाण दिया: समय बीतने के साथ आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर होती जा रही हैं। इसे समझने का एक आसान तरीका एक गुब्बारा है, जिस पर कुछ बिंदु बने हों। गुब्बारे को फुलाने पर हर बिंदु बाकी सभी बिंदुओं से दूर जाता दिखता है, ठीक वैसे ही जैसे ब्रह्मांड के फैलने पर आकाशगंगाएँ एक-दूसरे से दूर होती हैं। यह उदाहरण पूरी तरह सही नहीं है: गुब्बारे पर बिंदु स्वयं भी बड़े होते जाते हैं, जबकि असली आकाशगंगाएँ स्वयं नहीं फैलतीं, केवल उनके बीच की दूरी बढ़ती है।
अति छोटा गोलक
ब्रह्मांड का सारा पदार्थ एक ही स्थान पर, अत्यंत सूक्ष्म आयतन, अनंत तापमान और अनंत घनत्व वाले “अति छोटे गोलक” के रूप में मौजूद था।
विस्फोट
यह छोटा गोलक लगभग 13.7 अरब वर्ष पहले भीषण रूप से फटा। एक सेकंड के अल्पांश में सबसे तेज़ विस्तार हुआ, फिर यह धीमा पड़ गया। पहले तीन मिनट में ही पहला परमाणु बना।
ब्रह्मांड पारदर्शी बना
3 लाख वर्षों के भीतर तापमान गिरकर 4,500 केल्विन हो गया, साधारण परमाणवीय पदार्थ बना, और ब्रह्मांड घने विकिरण के बजाय पारदर्शी हो गया।

बिग बैंग सिद्धांत
- ब्रह्मांड एक बिंदु से शुरू हुआ और लगातार फैल रहा है
- हब्बल के 1920 के प्रेक्षणों से समर्थित
- आज वैज्ञानिक समुदाय इसी सिद्धांत को मानता है
स्थिर अवस्था संकल्पना
- हॉयल द्वारा एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत
- ब्रह्मांड किसी भी समय एक जैसा दिखता है
- विस्तार के प्रमाणों के कारण यह अब कम मान्य है
2.1 तारों का निर्माण
प्रारंभिक ब्रह्मांड में पदार्थ और ऊर्जा का वितरण एक समान नहीं था। इन आरंभिक घनत्व भिन्नताओं ने गुरुत्वाकर्षण बलों में भिन्नता पैदा की, जिससे पदार्थ एक जगह खिंचता गया और आकाशगंगाओं के विकास की नींव बनी। एक आकाशगंगा असंख्य तारों का समूह है, और अलग-अलग आकाशगंगाओं का व्यास 80 हजार से 1 लाख 50 हजार प्रकाश वर्ष तक हो सकता है। एक आकाशगंगा की शुरुआत हाइड्रोजन गैस के विशाल बादल, यानी नीहारिका, से होती है। यह नीहारिका बढ़ते-बढ़ते गैस के घने झुंड बनाती है, जो और घने होकर तारों का रूप ले लेते हैं। ऐसा माना जाता है कि तारों का निर्माण 5 से 6 अरब वर्ष पहले शुरू हुआ।
प्रकाश वर्ष समय का नहीं, बल्कि दूरी का माप है, जो एक वर्ष में प्रकाश द्वारा तय की गई दूरी के बराबर है: किमी, क्योंकि प्रकाश की गति 3 लाख किमी प्रति सेकंड है।
पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी 14 करोड़ 95 लाख 98 हजार किलोमीटर है। प्रकाश को यह दूरी तय करने में केवल 8.311 प्रकाश-मिनट लगते हैं, यानी एक पूरे प्रकाश वर्ष से बहुत कम। अभी इस पल आपकी आँखों तक पहुँच रही सूर्य की रोशनी लगभग आठ मिनट पहले सूर्य से चली थी।
3ग्रहों का निर्माण
एक बार जब नीहारिका के भीतर तारे बनने लगे, तो उनके आसपास बची गैस और धूल तीन और अवस्थाओं से गुज़रकर ग्रह बनी।
ग्रहाणु गैस के बादल के अंदर संसंजन से बने बड़ी संख्या में छोटे, गोल पिंड हैं; इनके आपस में टकराकर गुरुत्वाकर्षण से जुड़ने पर बड़े पिंड बनते हैं।
“अभिवृद्धि” (खंड 1, कणों का जुड़कर तश्तरी के आकार का बादल बनना) और “ग्रहाणुओं का ग्रहों में सहवर्धन” (खंड 3) को अलग-अलग याद रखें। दोनों में जुड़ने की प्रक्रिया है, पर पहला पूरी तश्तरी के बारे में है, दूसरा तश्तरी के अंदर के छोटे पिंडों के आपस में जुड़कर ग्रह बनने के बारे में है।
4स्थलमंडल का विकास
क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी शुरुआत में एक चट्टानी, गर्म और वीरान ग्रह थी, जिसका वायुमंडल केवल विरल हाइड्रोजन-हीलियम का था? यह आज की पृथ्वी से बहुत अलग है, और एक से दूसरे रूप तक पहुँचने में सचमुच कई बदलाव आए। पृथ्वी की संरचना परतदार है: वायुमंडल के बाहरी छोर से पृथ्वी के केंद्र तक पदार्थ एक जैसा नहीं है, और गहराई बढ़ने के साथ घनत्व भी बढ़ता जाता है।
पृथ्वी अपनी सबसे आरंभिक, प्रारंभिक अवस्था में अधिकतर एक अस्थिर, पिघली हुई अवस्था में थी। जैसे-जैसे घनत्व बढ़ा, भीतर का तापमान भी बढ़ता गया, और भीतर का पदार्थ अपने घनत्व के अनुसार अलग होने लगा। भारी पदार्थ, जैसे लोहा, केंद्र की ओर धँसे, जबकि हल्के पदार्थ सतह की ओर आए। समय के साथ पृथ्वी और ठंडी हुई, ठोस होकर छोटे आकार में सिमटी, और इसी ठंडक से बाहरी सतह, यानी भूपर्पटी, का निर्माण हुआ।
विभेदन वह प्रक्रिया है जिससे पृथ्वी का पदार्थ घनत्व के अनुसार अलग-अलग परतों में बँटा, भारी पदार्थ केंद्र की ओर धँसा और हल्का पदार्थ सतह की ओर आया।
चंद्रमा के निर्माण ने इसमें एक और मोड़ जोड़ा। ऐसा माना जाता है कि यह एक भीषण संघट्ट से हुआ, जिसने पृथ्वी को फिर से गर्म किया और विभेदन का दूसरा चरण शुरू किया। इसी पूरी प्रक्रिया से पृथ्वी का पदार्थ आज की परतों में बँट गया।

अध्याय 9, पृथ्वी की आंतरिक संरचना, में पर्पटी, प्रावार, बाह्य क्रोड और आंतरिक क्रोड का पूरा विस्तृत अध्ययन है, जिसमें इनकी गहराई, मोटाई और संरचना कैसे मापी जाती है, यह भी शामिल है।
5वायुमंडल व जलमंडल का विकास
आज का वायुमंडल मुख्यतः नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का बना है; अध्याय 13, वायुमंडल का संघटन तथा संरचना, में इसकी पूरी संरचना दी गई है। इस आज के वायुमंडल और महासागरों तक पहुँचने में तीन अलग अवस्थाएँ लगीं।
आदिकालिक वायुमंडल का ह्रास
सौर पवन ने पृथ्वी के आरंभिक, विरल हाइड्रोजन-हीलियम वायुमंडल को दूर धकेल दिया। ऐसा केवल पृथ्वी पर ही नहीं, हर पार्थिव ग्रह पर हुआ।
गर्म भीतरी भाग से गैस उत्सर्जन
पृथ्वी के ठंडे होने के साथ भीतर से गैसें व जलवाष्प बाहर निकलीं, जिनसे युवा वायुमंडल में जलवाष्प, नाइट्रोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन और अमोनिया आए, साथ में बहुत कम मुक्त ऑक्सीजन थी।
जीवों द्वारा संशोधन
जीवन शुरू होने के बाद जीवों के प्रकाश संश्लेषण ने धीरे-धीरे वायुमंडल की संरचना बदली, और अंततः आज की साँस लेने योग्य ऑक्सीजन जोड़ी।
गैस उत्सर्जन पृथ्वी के गर्म भीतरी भाग से, मुख्यतः लगातार ज्वालामुखी विस्फोटों के ज़रिए, गैसों और जलवाष्प के बाहर निकलने की प्रक्रिया है, जिसने पृथ्वी का आरंभिक वायुमंडल बनाया।
पृथ्वी के लगातार ठंडे होने के साथ, बाहर निकली जलवाष्प संघनित होने लगी, और कार्बन डाई ऑक्साइड वर्षा के पानी में घुल गई। इससे सतह और ठंडी हुई, जिससे और अधिक संघनन और वर्षा हुई, और गर्तों में इकट्ठा हुआ यही वर्षाजल महासागरों का रूप बन गया।
6जीवन की उत्पत्ति
पृथ्वी के विकास का अंतिम चरण जीवन की उत्पत्ति और विकास है। न तो आरंभिक पृथ्वी और न ही उसका आरंभिक वायुमंडल जीवन के लिए अनुकूल था, इसलिए पहले कुछ बदलना ज़रूरी था। आधुनिक वैज्ञानिक जीवन की उत्पत्ति को एक तरह की रासायनिक प्रतिक्रिया मानते हैं: जटिल कार्बनिक अणु बने और आपस में जुड़े, और यह समूहन स्वयं को दोहराने में सक्षम था, जो निर्जीव पदार्थ को सजीव में बदलने वाली ठीक वही बात है।
जीवन अचानक प्रकट नहीं हुआ। यह उसी क्षण शुरू हुआ जब एक रासायनिक समूहन ने स्वयं को दोहराना सीखा, और निर्जीव पदार्थ को सजीव पदार्थ में बदल दिया।
इस अध्याय से याद रखने वाली एक बात
उस आरंभिक जीवन का प्रमाण आज भी चट्टानों में जीवाश्म के रूप में मिलता है। आज के शैवाल से मिलती-जुलती सूक्ष्मदर्शी संरचनाएँ 300 करोड़ वर्ष से भी पुरानी भूगर्भिक शैलों में पाई गई हैं, इसीलिए माना जाता है कि जीवन का विकास लगभग 380 करोड़ वर्ष पहले शुरू हुआ।
“स्टार डस्ट” परियोजना (जैसा NCERT की पुस्तक में दिया गया है, वेबसाइट www.sci.edu/public.html और www.nasm.edu) के बारे में पता लगाएँ: (अ) इसे किस एजेंसी ने शुरू किया; (ब) वैज्ञानिक स्टार डस्ट इकट्ठा करने में इतनी रुचि क्यों दिखाते हैं; (स) स्टार डस्ट वास्तव में कहाँ से एकत्रित की जा रही है।
- कान्ट के आरंभिक विचार को लाप्लेस ने 1796 में नीहारिका परिकल्पना का रूप दिया; 1950 में शिमिड और वाइज़ास्कर ने इसे और संशोधित किया
- बिग बैंग सिद्धांत (विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना) ब्रह्मांड की उत्पत्ति की सबसे मान्य व्याख्या है, जिसे हब्बल के 1920 के प्रमाण का समर्थन मिला; हॉयल की स्थिर अवस्था संकल्पना इसका कम मान्य विकल्प है
- बिग बैंग की तीन अवस्थाएँ थीं: अति छोटा गोलक, 13.7 अरब वर्ष पहले विस्फोट, और 3 लाख वर्षों में ब्रह्मांड का पारदर्शी होना
- तारे नीहारिका के भीतर बनते हैं; ग्रह तीन अवस्थाओं में बनते हैं: क्रोड व तश्तरी, ग्रहाणु, फिर अभिवृद्धि से पूरे ग्रह
- पृथ्वी की परतें, पर्पटी, प्रावार, बाह्य क्रोड, आंतरिक क्रोड, विभेदन से बनीं, जो पहले घनत्व व ताप से शुरू हुआ और फिर चंद्रमा के भीषण संघट्ट से और तेज़ हुआ
- वायुमंडल तीन अवस्थाओं में विकसित हुआ: आदिकालिक वायुमंडल का ह्रास, गर्म भीतरी भाग से गैस उत्सर्जन, फिर प्रकाश संश्लेषण से संशोधन
- महासागर लगभग 400 करोड़ वर्ष पुराने हैं; जीवन का प्रारंभ लगभग 380 करोड़ वर्ष पहले हुआ; ऑक्सीजन से वायुमंडल केवल लगभग 200 करोड़ वर्ष पहले भरा
- क्या मैं बिना देखे नीहारिका परिकल्पना के मूल लेखक और उसके 1796 के संशोधक का नाम बता सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं बिग बैंग की तीनों अवस्थाओं को क्रम से बता सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं पृथ्वी की चारों परतों को सतह से केंद्र तक बता सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं वायुमंडल के विकास की तीन अवस्थाएँ समझा सकता/सकती हूँ, और महासागर-निर्माण, जीवन-प्रारंभ, प्रकाश संश्लेषण व ऑक्सीजन-भराव की तारीखों को सही क्रम में रख सकता/सकती हूँ?
- 1 अंकनीहारिका परिकल्पना क्या है?
- 1 अंक1796 में कान्ट की परिकल्पना का गणितीय संशोधन किसने किया?
- 1 अंकबिग बैंग सिद्धांत को और किस नाम से जाना जाता है?
- 1 अंकएडविन हब्बल ने ब्रह्मांड के विस्तार का प्रमाण किस वर्ष दिया?
- 1 अंकप्रकाश वर्ष किसका माप है?
- 1 अंकग्रहाणु को एक पंक्ति में परिभाषित करें।
- 1 अंकअभिवृद्धि क्या है?
- 1 अंकपृथ्वी की चार परतों के नाम सतह से केंद्र तक बताएँ।
- 1 अंकगैस उत्सर्जन क्या है?
- 1 अंकबिग बैंग सिद्धांत के विकल्प के रूप में स्थिर अवस्था संकल्पना किसने प्रस्तुत की?
- 3 अंकबिग बैंग की तीन अवस्थाओं की व्याख्या करें।
- 3 अंकबिग बैंग सिद्धांत और स्थिर अवस्था संकल्पना में अंतर बताएँ।
- 3 अंकग्रहों के निर्माण की तीन अवस्थाओं की व्याख्या करें।
- 3 अंकविभेदन क्या है? इसने पृथ्वी की परतदार संरचना कैसे बनाई, समझाएँ।
- 3 अंकपृथ्वी के विकास में चंद्रमा के निर्माण की क्या भूमिका रही?
- 3 अंकपृथ्वी के वायुमंडल के विकास की तीन अवस्थाओं का वर्णन करें।
- 5 अंकबिग बैंग सिद्धांत का विस्तृत वर्णन करें, जिसमें इसकी तीन अवस्थाएँ और ब्रह्मांड के विस्तार के प्रमाण शामिल हों।
- 5 अंकपृथ्वी के आरंभिक पिघली अवस्था से लेकर आज की परतदार पृथ्वी तक के विकास की अवस्थाएँ बताएँ।
- 5 अंकपृथ्वी के वायुमंडल व जलमंडल का आरंभिक वायुमंडल से आज की संरचना तक विकास का वर्णन करें।
- 5 अंक“जीवन की उत्पत्ति, वायुमंडल व महासागरों के ठीक उसी क्रम में हुए विकास पर निर्भर थी।” इस कथन की चर्चा इस अध्याय के आधार पर करें।
- 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सी संख्या पृथ्वी की आयु को दर्शाती है?
(क) 46 लाख वर्ष(ख) 13.7 अरब वर्ष(ग) 4.6 अरब वर्ष(घ) 13.7 खरब वर्ष - 1 अंकनिम्न में से कौन-सा तत्व वर्तमान वायुमंडल के निर्माण या संशोधन से संबंधित नहीं है?
(क) सौर पवन(ख) विभेदन(ग) गैस उत्सर्जन(घ) प्रकाश संश्लेषण - 1 अंकपृथ्वी पर जीवन वर्तमान से लगभग कितने वर्ष पहले प्रकट हुआ?
(क) 13.7 अरब(ख) 3.8 लाख(ग) 4.6 अरब(घ) 3.8 अरब - 1 अंक1796 में कान्ट की परिकल्पना का गणितीय संशोधन करके नीहारिका परिकल्पना किसने दी?
(क) लाप्लेस(ख) एडविन हब्बल(ग) ऑटो शिमिड(घ) हॉयल - 1 अंकबिग बैंग सिद्धांत के विकल्प, स्थिर अवस्था संकल्पना, के प्रस्तावक कौन थे?
(क) हब्बल(ख) कान्ट(ग) हॉयल(घ) वाइज़ास्कर - 1 अंकवह प्रक्रिया, जिससे पृथ्वी का पदार्थ अलग-अलग घनत्व की परतों में बँटा, कहलाती है:
(क) अभिवृद्धि(ख) गैस उत्सर्जन(ग) विभेदन(घ) संघनन - 1 अंकगैस के बादल के भीतर संसंजन से बने छोटे, गोल पिंड, जो बाद में टकराकर ग्रह बनाते हैं, कहलाते हैं:
(क) नीहारिका(ख) ग्रहाणु(ग) अति छोटा गोलक(घ) क्षुद्रग्रह
- 1 अंक
अभिकथन (A): बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार, ब्रह्मांड अपनी बहुत आरंभिक अवस्था में अत्यंत गर्म और सघन था।
कारण (R): आरंभ में ब्रह्मांड बनाने वाला सारा पदार्थ एक ही स्थान पर अनंत तापमान और घनत्व वाले “अति छोटे गोलक” के रूप में मौजूद था। - 1 अंक
अभिकथन (A): ऑटो शिमिड और कार्ल वाइज़ास्कर ने 1950 में नीहारिका परिकल्पना में संशोधन किया।
कारण (R): तारों का निर्माण लगभग 5 से 6 अरब वर्ष पहले हुआ माना जाता है। - 1 अंक
अभिकथन (A): पृथ्वी के वायुमंडल और महासागरों का विकास पृथ्वी बनने के बाद तीन अलग अवस्थाओं में हुआ।
कारण (R): पृथ्वी के वायुमंडल के विकास की अंतिम अवस्था सौर पवन से आदिकालिक हाइड्रोजन-हीलियम वायुमंडल का ह्रास थी। - 1 अंक
अभिकथन (A): चंद्रमा का निर्माण पृथ्वी के परतों में बँटना शुरू करने से पहले हुआ था।
कारण (R): चंद्रमा बनाने वाले भीषण संघट्ट ने पृथ्वी को और गर्म किया, जिससे विभेदन का दूसरा चरण शुरू हुआ।