- स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी और GIS की पुस्तक की अपनी परिभाषाएँ
- स्थानिक और गैर-स्थानिक (गुण न्यास) आंकड़ों में, और रैस्टर तथा वेक्टर फॉर्मेट में अंतर
- GIS के पाँच घटक, और स्थानिक आंकड़ों का प्रग्रहण, प्रविष्टि, सत्यापन और रूपांतरण कैसे होता है
- यथार्थ, पदानुक्रमिक और अस्पष्ट सुमेलन अलग-अलग आंकड़ा फाइलों को सही तरीके से कैसे जोड़ते हैं
- अधिचित्रण विश्लेषण और बफ़र विश्लेषण क्या करते हैं, वास्तविक उदाहरणों के साथ
1 स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी क्या है?
कंप्यूटर हमें आंकड़ों को प्रक्रमित करने और ग्राफ़, आरेख तथा मानचित्र जल्दी बनाने में मदद करते हैं। पर इस तरह बने मानचित्र और ग्राफ़ अकेले यह तय करने में मदद नहीं करते कि आगे क्या किया जाए। “कोई वस्तु कहाँ है?”, “वह वहाँ क्यों है?” और “उसे हटाने पर क्या होगा?” जैसे असली सवालों के जवाब के लिए, अलग-अलग स्रोतों से आंकड़े जुटाकर उन्हें भू-प्रक्रमण के लिए बने कंप्यूटरों से जोड़ना पड़ता है। इसी में स्थानिक सूचना तंत्र की संकल्पना निहित है।
स्थानिक शब्द की व्युत्पत्ति स्थान से हुई है। इसका तात्पर्य भौगोलिक रूप से परिभाषित क्षेत्र, जिसके भौतिक रूप से माप योग्य आयाम हैं, पर लक्षणों और परिघटनाओं के वितरण से है।
स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी का संबंध स्थानिक सूचना के संग्रहण, भंडारण, पुनर्प्राप्ति, प्रदर्शन, हेरफेर, प्रबंधन और विश्लेषण में प्रौद्योगिक निवेश के प्रयोग से है। यह सुदूर संवेदन (Remote Sensing), वैश्विक स्थिति-निर्धारण तंत्र (GPS), भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS), आंकिक मानचित्र कला और सूचनाधार प्रबंधन तंत्र (DBMS) का सम्मिश्रण है।
आज हम जिन अधिकतर आंकड़ों का प्रयोग करते हैं, उनमें पहले से ही एक स्थानिक घटक होता है, जैसे किसी नगरपालिका सुविधा का पता अथवा कृषि जोत की सीमाएँ, भले ही हम उसे “मानचित्र का आंकड़ा” न समझें।
2 भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS) क्या है?
1970 के दशक के मध्य से उपलब्ध अग्रवर्ती अभिकलन प्रणालियों ने भू-संदर्भित सूचना का प्रक्रमण संभव बनाया: स्थानिक और गुण न्यास आंकड़ों का प्रबंध, अलग-अलग फाइलों में विशिष्ट सूचना की स्थिति निर्धारण, अभिकलन और निर्णय पोषक प्रणाली का विकास। इन सभी क्रियाओं में समर्थ तंत्र को भौगोलिक सूचना तंत्र कहा जाता है।
GIS पृथ्वी से स्थानिक रूप से संदर्भित आंकड़ों के प्रग्रहण, भंडारण, जाँच, समन्वय, हेरफेर, विश्लेषण और प्रदर्शन का तंत्र है। इसमें सामान्यतः स्थानिक रूप से संदर्भित कंप्यूटर सूचनाधार और उपयुक्त अनुप्रयोग सॉफ़्टवेयर सम्मिलित होता है। GIS आंकिक मानचित्र कला और सूचनाधार प्रबंधन तंत्र का सम्मिश्रण है।
GIS को अपनी संकल्पनात्मक और रीति-विधान संबंधी बल इन विद्याशाखाओं से मिलता है:
3 भौगोलिक सूचना के रूप
भौगोलिक सूचना दो प्रकार के आंकड़ों से मिलती है: स्थानिक आंकड़े और गैर-स्थानिक (गुण न्यास) आंकड़े।
3.1 स्थानिक बनाम गैर-स्थानिक आंकड़े
स्थानिक आंकड़े
- पृथ्वी पर एक निश्चित स्थिति होती है
- स्थिति (बिंदु), रेखा और क्षेत्रीय रूप से पहचाने जाते हैं
- उदाहरण: राज्यों के नाम, जिनकी मानचित्र पर तय स्थिति होती है
गैर-स्थानिक (गुण न्यास) आंकड़े
- स्थानिक आंकड़ों के गुणों का वर्णन करते हैं
- स्वयं स्थानिक नहीं होते, कहीं भी हो सकते हैं
- उदाहरण: साइकिल की दुकान का पार्ट नंबर, मात्रा और विवरण
साइकिल की दुकान का स्टॉक रजिस्टर (पार्ट संख्या, मात्रा, विवरण) गैर-स्थानिक आंकड़ा है, ये पुर्जे़ कहीं भी हो सकते हैं। राज्यों की साक्षर जनसंख्या (1981) की तालिका स्थानिक आंकड़ा है, क्योंकि उसमें बताया गया हर राज्य मानचित्र पर एक निश्चित स्थिति रखता है। इस तरह के स्थान-निर्धारित आंकड़ों को GIS में प्रयोग किया जा सकता है।

ऐसे आंकड़ों को एक निर्धारित निर्देशांक प्रणाली से पंजीकृत और कोडित करना ज़रूरी है, ताकि उन्हें GIS सूचनाधार में संचित किया जा सके।
3.2 GIS सूचनाधार बनाना
आपूर्तिदाता से प्राप्त करना
किसी मौजूदा आंकड़ा आपूर्तिदाता से तैयार आंकिक आंकड़े लेना।
अनुरूप आंकड़ों का अंकरूपण
मौजूदा कागज़ी मानचित्रों या अभिलेखों को आंकिक रूप में बदलना।
स्वयं का सर्वेक्षण
आंकड़े सीधे जुटाने के लिए भौगोलिक सर्वेक्षण करना।
चुनाव अनुप्रयोग क्षेत्र, उपलब्ध बजट, और ज़रूरी आंकड़ा संरचना (वेक्टर/रैस्टर) पर निर्भर करता है। अधिकतर प्रयोक्ताओं के लिए सबसे सामान्य स्रोत स्थलाकृतिक अथवा विषयक मानचित्र होते हैं, कागज़ी (हार्ड कॉपी) या आंकिक (सॉफ़्ट कॉपी) रूप में। हर ऐसे मानचित्र की एक निश्चित मापनी, गुणों को दर्शाने वाले संकेत और रंग, और एक सहमत निर्देशांक प्रणाली होती है।
4 GIS बनाम मानचित्र की परंपरागत विधि
छपा हुआ मानचित्र एक स्थिर आकृति है। इसकी वास्तविक सीमाएँ हैं: यह केवल एक ही तरीके से प्रक्रमित और प्रस्तुत होता है, यह केवल एक या कुछ निश्चित विषयों को दिखाता है, और सूचना में कोई भी बदलाव करने के लिए बिल्कुल नया मानचित्र बनाना पड़ता है।
1. प्रयोक्ता प्रदर्शित स्थानिक लक्षणों से प्रश्न पूछ सकते हैं और विश्लेषण के लिए संबद्ध गुण न्यास सूचना प्राप्त कर सकते हैं।
2. गुण न्यास आंकड़ों से प्रश्न पूछकर या उनका विश्लेषण करके नए मानचित्र बनाए जा सकते हैं।
3. समन्वित सूचनाधार पर स्थानिक संक्रियाएँ (अधिचित्रण, बफ़रिंग) लगाकर नई सूचना बनाई जा सकती है।
4. गुण न्यास आंकड़ों की अलग-अलग मदों को एक साझा स्थान कोड के ज़रिए आपस में जोड़ा जा सकता है।
5 भौगोलिक सूचना तंत्र के घटक
5.1 पाँच घटक
हार्डवेयर
प्रक्रमण, भंडारण, प्रदर्शन, और निवेश-बहिर्वेश उपतंत्र।
सॉफ़्टवेयर
आंकड़ा प्रविष्टि, संपादन, अनुरक्षण, विश्लेषण, रूपांतरण, प्रदर्शन और बहिर्वेश के माड्यूल्स।
आंकड़े
स्थानिक आंकड़े और उनसे जुड़े तालिका रूपी (गुण न्यास) आंकड़े, GIS की रीढ़।
लोग
हार्डवेयर-सॉफ़्टवेयर अभियंताओं से लेकर संसाधन वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और निगरानी अभिकरणों तक।
प्रक्रिया
आंकड़ों का प्रत्यानयन, तंत्र में निवेश, संचय, प्रबंध, रूपांतरण, विश्लेषण और अंत में प्रस्तुति।
6 स्थानिक आंकड़ा फॉर्मेट: रैस्टर और वेक्टर
स्थानिक आंकड़ों का प्रदर्शन दो तरीकों से होता है: रैस्टर और वेक्टर आंकड़ा फॉर्मेट।
रैस्टर (चित्ररेखापुँज) आंकड़ा किसी लक्षण को ग्रिड सेलों (ग्राफ़ पेपर के वर्गों जैसे) के प्रतिरूप के रूप में दिखाता है। हर सेल को उस स्थिति के गुण के आधार पर एक मान दिया जाता है, और उसे उसकी पंक्ति (row) व स्तंभ (column) से पहचाना जाता है।

विभेदन (resolution) सेल के आकार और सेलों की संख्या के बीच का संबंध है: छोटे सेल बेहतर विभेदन देते हैं पर संचित करने के लिए कहीं ज़्यादा सेल चाहिए। रैस्टर हवाई फ़ोटो, उपग्रह चित्र और स्कैन किए गए कागज़ी मानचित्रों के लिए, लागत कम रखने के लिए, जब अलग-अलग लक्षणों के विश्लेषण की ज़रूरत न हो, और “पृष्ठभूमि” मानचित्रों के लिए सबसे उपयुक्त है।
वेक्टर (सदिश) आंकड़ा किसी वस्तु को विशिष्ट बिंदुओं के बीच खींची गई रेखाओं के समुच्चय के रूप में दिखाता है, जिन्हें उनके निर्देशांकों (X, Y अथवा X, Y, Z) से दर्ज किया जाता है। रेखाओं की एक दिशा होती है; बहुभुज बिंदुओं या रेखाओं से बनते हैं; वेक्टर संस्थिति (टोपोलॉजी) को भी संचित कर सकता है।

हस्तेन अंकरूपण वेक्टर आंकड़ा डालने का सबसे अच्छा तरीका है। वेक्टर अत्यधिक शुद्धता वाले अनुप्रयोगों के लिए, जब फ़ाइल का आकार महत्वपूर्ण हो, जब अलग-अलग लक्षणों का विश्लेषण करना हो, और जब वर्णनात्मक सूचना संचित करनी हो, तब सबसे उपयुक्त है।
| रैस्टर मॉडल | वेक्टर मॉडल | |
|---|---|---|
| लाभ | सरल आंकड़ा संरचना · आसान, कारगर अधिचित्रण · उपग्रह चित्रों के साथ संगत · उच्च स्थानिक विविधता को कारगर ढंग से दर्शाता है · प्रोग्राम करना आसान · कई गुणों के लिए एक जैसे ग्रिड सेल | संहत (compact) आंकड़ा संरचना · परिपथ जाल विश्लेषण में कारगर · प्रक्षेप रूपांतरण में कारगर · शुद्ध मानचित्र बहिर्वेश |
| हानि | कंप्यूटर भंडारण का अकुशल प्रयोग · परिमाप और आकार में त्रुटियाँ · परिपथ जाल विश्लेषण कठिन · प्रक्षेप रूपांतरण अकुशल · बड़े सेलों से सूचना की हानि (कम शुद्ध मानचित्र) | जटिल आंकड़ा संरचना · अधिचित्रण संक्रियाएँ कठिन · उच्च स्थानिक विविधता अकुशल ढंग से दर्शाई जाती है · उपग्रह चित्रों से असंगत |
7 GIS क्रियाओं का क्रम
- 3 · सत्यापन और संपादन प्रविष्टि और योजन के बीच आता है, आगे प्रयोग से पहले प्रग्रहित आंकड़ों की त्रुटियाँ जाँचता है।
7.1 स्थानिक आंकड़ा निवेश
GIS का स्थानिक सूचनाधार दो तरीकों से बनाया जा सकता है:
(क) आंकड़ा आपूर्तिदाता से
- छोटी मापनी से लेकर बड़ी मापनी की योजनाओं तक, आंकिक आंकड़े आसानी से उपलब्ध
- खुद अंकरूपण करने के भारी काम से बचत
- संगतता जाँचना ज़रूरी: मापनी, भू-संदर्भन प्रणाली, संग्रहण/प्रतिचयन विधि, आंकड़ों की गुणवत्ता, वर्गीकरण विधि, मानचित्रण इकाइयों का आकार-रूप, अभिलेख की लंबाई
- पुराने स्थानांतरण माध्यम: DAT टेप, CD-ROM, फ़्लॉपी डिस्क
(ख) हस्तेन (मैनुअल) निवेश
- चार अवस्थाएँ: स्थानिक आंकड़ों की प्रविष्टि, गुण न्यास की प्रविष्टि, दोनों का सत्यापन/संपादन, ज़रूरत पड़ने पर दोनों का योजन
- दो सामान्य विधियाँ: अंकरूपण और क्रमवीक्षण
- अंकरूपक और स्कैनर हाथ से निर्देशांक लिखने के समय और श्रम को बहुत कम करते हैं
आंकड़ों की संगतता की समस्या तब सबसे ज़्यादा होती है जब प्रशासनिक सीमाओं के आर-पार के स्रोत मिलाए जाते हैं (अंतर-ज़िला या अंतर-प्रांत आंकड़े), क्योंकि वहाँ अलग-अलग भू-संदर्भन प्रणाली और वर्गीकरण विधियाँ टकराने की संभावना ज़्यादा होती है।
7.2 स्कैनर
स्कैनर अनुरूप (analogue) आंकड़ों को आंकिक ग्रिड-आधारित (रैस्टर) चित्रों में बदलते हैं, जिन्हें सीधे प्रयोग किया जा सकता है या आगे वेक्टर संस्थिति में बदला जा सकता है। दो मूल प्रकार होते हैं: चरण-दर-चरण आंकड़े दर्ज करने वाले स्कैनर, और पूरा दस्तावेज़ एक ही बार में स्कैन करने वाले। चरण-प्रकार के स्कैनर में एक चल भुजा पर प्रकाश स्रोत और उच्च विभेदन वाला डिजिटल कैमरा होता है, जिसमें चार्ज्ड कपल्ड डिवाइस (CCD) लगे होते हैं, जो अर्धचालक संवेदक हैं और प्रकाश के फ़ोटॉन को इलेक्ट्रॉन गणना में बदलकर आंकिक मान के रूप में दर्ज करते हैं। मानचित्रों को समतल पटल पर या घूर्णी ड्रम पर लगाया जा सकता है। स्कैन किया गया चित्र कभी पूरी तरह सही नहीं होता, उसमें मूल मानचित्र के सभी धब्बे और खामियाँ रहती हैं, इसलिए उपयोगी बनाने के लिए अतिरिक्त आंकड़े हटाने ज़रूरी होते हैं।
7.3 गुण न्यास आंकड़ों की प्रविष्टि
गुण न्यास आंकड़े किसी लक्षण के उन गैर-स्थानिक गुणों का वर्णन करते हैं जो GIS में संभालने ज़रूरी हैं। उदाहरण के लिए, एक सड़क को स्थानिक रूप से रेखा की तरह दर्ज़ किया जा सकता है, जबकि उसकी चौड़ाई, सतह का प्रकार, अनुमानित यातायात और यातायात नियम गुण न्यास आंकड़ों के रूप में, या तो स्थानिक वस्तु के साथ (ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड सूचनाधार) या अलग से जोड़कर (संबंधपरक सूचनाधार) संचित किए जाते हैं। यह आंकड़े प्रकाशित अभिलेखों, आधिकारिक जनगणना, प्राथमिक सर्वेक्षणों या स्प्रेडशीट से मिल सकते हैं, और हस्तेन या मानक स्थानांतरण फॉर्मेट में आयात करके डाले जा सकते हैं।
8 आंकड़ों का सत्यापन, संपादन और रूपांतरण
GIS में प्रग्रहित स्थानिक आंकड़ों को भरोसेमंद बनाने से पहले उनकी त्रुटियों की जाँच ज़रूरी है। पारंपरिक तरीका है: अंकित आंकड़ों को मूल मानचित्र जैसी ही मापनी पर पारदर्शी शीट पर छापना, दोनों को लाइट टेबल पर एक-दूसरे के ऊपर रखना, और व्यवस्थित रूप से पूरे मानचित्र पर देखकर तुलना करना।
| त्रुटि का प्रकार | कैसे होती है |
|---|---|
| अपूर्ण या दोहरे आंकड़े | हस्तेन प्रविष्टि में बिंदु/रेखा/बहुभुज छूट जाना; स्कैन किए आंकड़ों में, जहाँ रैस्टर-से-वेक्टर रूपांतरण किसी रेखा को पूरी तरह नहीं जोड़ पाया |
| ग़लत मापनी | ग़लत मापनी पर अंकरूपण करना, अथवा स्कैन किए आंकड़ों को भू-संदर्भित करते समय ग़लत मान प्रयोग करना |
| विकृत आंकड़े | अंकरूपण के लिए प्रयुक्त आधार मानचित्र सही मापनी के न होना; लेंस/उच्चावच/झुकाव से विकृत हवाई फ़ोटो; बारिश, धूप या बार-बार मोड़ने से बिगड़े कागज़ी मानचित्र |
सुधार सॉफ़्टवेयर के ज़रिए किए जाते हैं: कुंजीपटल या स्क्रीन कर्सर से लक्षणों को खिसकाना, घुमाना, मिटाना, जोड़ना, खींचना या काटना, और किसी रेखा के फ़ालतू निर्देशांक “वीडिंग” कलनविधि (algorithm) से हटाना। रैस्टर की त्रुटिपूर्ण सेलों को उनका मान बदलकर सुधारा जाता है।
जब कई आंकड़ा स्तरों को एक साथ प्रयोग करना हो, तो सबका फॉर्मेट एक जैसा होना चाहिए। रूपांतरण आमतौर पर वेक्टर से रैस्टर की ओर होता है (क्योंकि ज़्यादातर विश्लेषण रैस्टर में ही होता है), प्रयोक्ता द्वारा तय सेल आकार का ग्रिड बिछाकर। इसके उलट, रैस्टर से वेक्टर रूपांतरण मुख्यतः आंकड़ा कटौती के लिए किया जाता है, क्योंकि रैस्टर आंकड़ों के लिए वेक्टर से कहीं ज़्यादा भंडारण चाहिए।
9 भौगोलिक आंकड़े: सहलग्नता और सुमेलन
स्थानिक और गुण न्यास आंकड़ों को सही ढंग से जोड़ना बहुत मायने रखता है, लापरवाही से जोड़ने पर अंतिम विश्लेषण में गड़बड़ी होती है। उदाहरण के लिए, किसी राज्य में 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों में कुपोषण से मृत्युदर जानने के लिए, बच्चों की संख्या वाली एक फाइल और कुपोषण से मृत्युदर वाली दूसरी फाइल को पहले जोड़ना होगा, फिर एक संख्या को दूसरी से भाग देना होगा।
यथार्थ सुमेलन में दोनों फाइलों में मौजूद एक साझा कुंजी, जैसे किसी कस्बे का नाम, प्रयोग करके अभिलेखों को जोड़ा जाता है, ताकि एक ही लक्षण के बारे में दोनों फाइलों के अभिलेख एक साथ आ जाएँ।
पदानुक्रमिक सुमेलन तब प्रयोग होता है जब छोटे क्षेत्रों के आंकड़े ज़्यादा बार और विस्तार से जुटाए जाते हैं, पर बड़ी प्रशासनिक इकाइयों के आंकड़े कम बार। छोटे क्षेत्रों के आंकड़ों को तब तक जोड़ते हैं जब तक वे बड़ी इकाई के बराबर न हो जाएँ, फिर उन्हें यथार्थतापूर्वक सुमेलित किया जाता है।
अस्पष्ट सुमेलन तब चाहिए जब दो आंकड़ा समुच्चयों की सीमाएँ आपस में मेल न खाएँ, जैसे फ़सल के खेतों की सीमाएँ अक्सर मृदा प्रकारों की सीमाओं से मेल नहीं खातीं। दोनों स्तरों का अधिचित्रण करके हर मृदा प्रकार के लिए फ़सल उत्पादकता जैसा कोई संयुक्त मान निकाला जाता है।
10 स्थानिक विश्लेषण
GIS की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्लेषणात्मक क्षमता में है। स्थानिक विश्लेषण की क्रियाएँ ही GIS को बाक़ी सूचना तंत्रों से अलग करती हैं। विश्लेषण क्रियाएँ सूचनाधार में संचित स्थानिक और गैर-स्थानिक गुणों का प्रयोग करके असली दुनिया के सवालों के जवाब देती हैं, मॉडल बनाकर अंतर्निहित प्रवृत्तियों को उजागर करती हैं। किसी भी विश्लेषण से पहले, समस्या की पहचान और विश्लेषण का उद्देश्य तय करना ज़रूरी है। GIS में चार स्थानिक विश्लेषण संक्रियाएँ संभव हैं:
यह अध्याय केवल पहली दो, यानी अधिचित्रण और बफ़र विश्लेषण, की विस्तार से चर्चा करता है।
10.1 अधिचित्रण विश्लेषण
अधिचित्रण GIS का प्रमाण चिह्न है: एक ही क्षेत्र के कई मानचित्र स्तरों का समन्वय करके एक नया मानचित्र स्तर मिलता है। यह सिव मानचित्रण (sieve mapping) जैसा है, यानी लाइट टेबल पर मानचित्रों को एक-दूसरे पर रखकर तुलना करना और बहिर्वेश मानचित्र बनाना।

अधिचित्रण विश्लेषण के कई उपयोग हैं। इससे दो अलग-अलग समयों के बीच भूमि उपयोग/भूमि आवरण में हुए परिवर्तन का अध्ययन किया जा सकता है, और यह प्रस्तावित भूमि उपयोग के लिए किसी भूमि की उपयुक्तता जाँचने में भी काम आता है। NCERT का अपना उदाहरण: अलीगढ़ शहर के शहरी भूमि उपयोग को 1974 और 2001 के लिए मानचित्रित किया गया; दोनों मानचित्रों को अधिचित्रित करने पर भूमि उपयोग में हुए ठीक-ठीक परिवर्तन सामने आए और उस अवधि में शहरी विस्तार (urban sprawl) को मानचित्रित किया जा सका।
10.2 बफ़र विश्लेषण
बफ़र किसी भी बिंदु, रेखा या क्षेत्रीय लक्षण के चारों ओर एक निश्चित दूरी का क्षेत्र होता है। बफ़र विश्लेषण, जिसे निकटता विश्लेषण भी कहते हैं, यह पता लगाने में प्रयोग होता है कि किसी सुविधा, जैसे अस्पताल, दवा की दुकान, डाकघर, सड़क या पार्क, से कौन-से क्षेत्र या जनसंख्या को लाभ मिल रहा है या वंचित है; इससे प्रदूषण के किसी बिंदु स्रोत के स्वास्थ्य पर प्रभाव का भी अध्ययन हो सकता है। बफ़र संक्रिया मूल लक्षण चाहे जिस आकार का हो, हमेशा बहुभुज (polygon) प्रकार के लक्षण बनाती है।

ArcView/ArcGIS, Geomedia अथवा Quantum GIS (मुफ़्त ओपन-सोर्स सॉफ़्टवेयर) जैसे GIS सॉफ़्टवेयर का प्रयोग करके, बड़े अस्पताल वाले शहरों के चारों ओर 2, 4, 6, 8 और 10 किलोमीटर के बफ़र बनाए जा सकते हैं। एक अध्ययन के रूप में, सहारनपुर, मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ, ग़ाज़ियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और अलीगढ़ (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) के चारों ओर बफ़र बनाए गए। इन शहरों के नज़दीक के क्षेत्रों को बेहतर सेवा मिलती है; दूर रहने वाले लोगों को चिकित्सा सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, और वे क्षेत्र सबसे कम लाभान्वित होते हैं।
अध्याय तीन स्रोत बताता है: schoolgis.nic.in, bhuvan.nrsc.gov.in और www.iirs.gov.in।
- स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी = RS + GPS + GIS + आंकिक मानचित्र कला + DBMS
- GIS = पृथ्वी से संदर्भित आंकड़ों का प्रग्रहण, संचय, जाँच, समन्वय, हेरफेर, विश्लेषण और प्रदर्शन; 1970 के दशक के मध्य से उपलब्ध
- स्थानिक आंकड़ों की स्थिति होती है; गैर-स्थानिक (गुण न्यास) आंकड़े उसका वर्णन करते हैं
- स्थानिक आंकड़े बिंदु (स्थिति), रेखा (रेखीय) या क्षेत्र (क्षेत्रीय) रूप में मिलते हैं
- GIS के 5 घटक: हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, आंकड़े, लोग, प्रक्रिया
- रैस्टर = मानों वाली ग्रिड सेलें; वेक्टर = बिंदु/रेखा के निर्देशांक, शुद्धता और टोपोलॉजी के लिए बेहतर
- GIS की 5 क्रियाएँ क्रम में: आंकड़ा निवेश → गुण न्यास प्रविष्टि → सत्यापन/संपादन → योजन → स्थानिक विश्लेषण
- आंकड़ा निवेश: आपूर्तिदाता से, या हस्तेन (अंकरूपण, क्रमवीक्षण)
- 3 तरह के सुमेलन: यथार्थ (साझा कुंजी), पदानुक्रमिक (छोटे क्षेत्र जुड़कर बड़ी इकाई बनते हैं), अस्पष्ट (बेमेल सीमाओं का अधिचित्रण)
- 4 स्थानिक विश्लेषण संक्रियाएँ: अधिचित्रण, बफ़र, परिपथ जाल विश्लेषण, अंकिक भू-भाग मॉडल; यहाँ केवल अधिचित्रण और बफ़र पढ़े गए
- अधिचित्रण स्तरों को जोड़कर नया मानचित्र बनाता है (उदाहरण: अलीगढ़ भूमि उपयोग 1974 बनाम 2001); बफ़र = किसी सुविधा के चारों ओर निकटता विश्लेषण
- क्या मैं GIS और स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी की पुस्तक की परिभाषाएँ ज्यों की त्यों बता सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं GIS के 5 घटक और GIS सूचनाधार बनाने के 3 तरीके गिना सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं रैस्टर और वेक्टर में अंतर, हर एक का एक लाभ और एक हानि सहित समझा सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं तीनों तरह के सुमेलन को उनके अपने उदाहरण सहित बता सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं अधिचित्रण और बफ़र विश्लेषण को अध्याय के अपने उदाहरण सहित समझा सकता/सकती हूँ?
- 1 अंकस्थानिक आंकड़े निम्नलिखित रूपों में मिलते हैं:
(क) स्थिति (बिंदु)(ख) रेखीय(ग) क्षेत्रीय(घ) उपरोक्त सभी रूप - 1 अंकनिम्नलिखित में से किस संक्रिया के लिए विश्लेषण माड्यूल सॉफ़्टवेयर चाहिए?
(क) आंकड़ा भंडारण(ख) आंकड़ा प्रदर्शन(ग) आंकड़ा बहिर्वेश(घ) बफ़रिंग - 1 अंकरैस्टर आंकड़ा फॉर्मेट की हानि निम्नलिखित में से कौन-सी है?
(क) सरल आंकड़ा संरचना(ख) आसान, कारगर अधिचित्रण(ग) सुदूर संवेदन चित्रों के साथ संगत(घ) परिपथ जाल विश्लेषण कठिन - 1 अंकवेक्टर आंकड़ा फॉर्मेट का लाभ निम्नलिखित में से कौन-सा है?
(क) जटिल आंकड़ा संरचना(ख) अधिचित्रण संक्रियाएँ कठिन(ग) सुदूर संवेदन आंकड़ों से असंगति(घ) संहत आंकड़ा संरचना - 1 अंकGIS में शहरी परिवर्तन का पता कारगर ढंग से किससे लगाया जाता है?
(क) अधिचित्रण संक्रियाएँ(ख) निकटता विश्लेषण(ग) परिपथ जाल विश्लेषण(घ) बफ़रिंग - 1 अंकGIS आंकिक मानचित्र कला और किसका सम्मिश्रण है?
(क) केवल सुदूर संवेदन का(ख) सूचनाधार प्रबंधन तंत्र का(ग) केवल वैश्विक स्थिति-निर्धारण तंत्र का(घ) एक कागज़ी स्थलाकृतिक मानचित्र का - 1 अंकस्कैनर में प्रयुक्त चार्ज्ड कपल्ड डिवाइस (CCD) क्या हैं?
(क) प्रकाश को इलेक्ट्रॉन गणना में बदलने वाले अर्धचालक संवेदक(ख) केवल मानचित्र छापने वाले उपकरण(ग) एक तरह का वेक्टर आंकड़ा फॉर्मेट(घ) एक तरह का बफ़र विश्लेषण - 1 अंककस्बे के नाम को साझा कुंजी मानकर दो फाइलों के अभिलेख जोड़ना किस सुमेलन का उदाहरण है?
(क) अस्पष्ट सुमेलन(ख) पदानुक्रमिक सुमेलन(ग) यथार्थ सुमेलन(घ) बफ़र सुमेलन - 1 अंकGIS संबंधी काम के लिए सक्षम उन्नत अभिकलन प्रणालियाँ कब से उपलब्ध हैं?
(क) 1930 के दशक से(ख) 1970 के दशक के मध्य से(ग) केवल 1990 के दशक से(घ) 2010 के बाद से - 1 अंकGIS के पाँच घटकों में इनमें से कौन शामिल नहीं है?
(क) हार्डवेयर(ख) लोग(ग) मुद्रा(घ) प्रक्रिया
कारण (R): उदाहरण के लिए, फ़सल के खेतों की सीमाएँ प्रायः खेत की मेड़ों से तय होती हैं और मृदा प्रकारों की सीमाओं से मुश्किल से मेल खाती हैं।
कारण (R): रैस्टर आंकड़ा परिपथ जाल विश्लेषण और संहत भंडारण में वेक्टर से हमेशा बेहतर होता है।
कारण (R): मानचित्र पर दिखाई गई सूचना में कोई भी बदलाव करने के लिए बिल्कुल नया मानचित्र बनाना पड़ता है।
- 2 अंकस्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी क्या है?
- 2 अंकरैस्टर और वेक्टर आंकड़ा मॉडल में अंतर बताइए।
- 2 अंकअधिचित्रण विश्लेषण क्या है?
- 3 अंकपरंपरागत (मैनुअल) विधियों की तुलना में GIS के क्या लाभ हैं?
- 3 अंकGIS के महत्वपूर्ण घटक कौन-से हैं? हर एक को नाम सहित संक्षेप में समझाइए।
- 2 अंकGIS सूचनाधार में स्थानिक आंकड़े किन-किन तरीकों से बनाए जा सकते हैं?
- 2 अंकस्थानिक आंकड़ों और गैर-स्थानिक (गुण न्यास) आंकड़ों में एक-एक उदाहरण सहित अंतर बताइए।
- 3 अंकस्थानिक आंकड़े प्रग्रहित करते समय होने वाली तीन तरह की त्रुटियों को समझाइए।
- 2 अंकबफ़र क्या है, और बफ़र विश्लेषण को निकटता विश्लेषण क्यों कहा जाता है?
- 3 अंकयथार्थ सुमेलन, पदानुक्रमिक सुमेलन और अस्पष्ट सुमेलन में एक-एक उदाहरण सहित अंतर बताइए।
- 2 अंकआंकड़ा रूपांतरण आमतौर पर वेक्टर से रैस्टर की ओर ही क्यों होता है?
- 2 अंकइस अध्याय में बताई गई चार स्थानिक विश्लेषण संक्रियाओं के नाम लिखिए।
- 5 अंकरैस्टर और वेक्टर आंकड़ा फॉर्मेट की विवेचना कीजिए, हर एक कब बेहतर होगा इसका एक वास्तविक उदाहरण दीजिए।
- 5 अंकआंकड़ा निवेश से स्थानिक विश्लेषण तक, GIS से जुड़े कामों के क्रम का विवरणात्मक वर्णन कीजिए।
- 5 अंकअध्याय के अपने उदाहरण, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहरों के अस्पताल बफ़रों की सहायता से बफ़र विश्लेषण समझाइए।
- 5 अंकअधिचित्रण विश्लेषण समझाइए। इसका प्रयोग 1974 और 2001 के बीच अलीगढ़ शहर के शहरी भूमि उपयोग परिवर्तन के अध्ययन में कैसे किया गया?