कक्षा 12 भूगोल अध्याय 20 नोट्स हिंदी में: आंकड़ों का आलेखी निरूपण

अध्याय मानचित्रिका: सब कुछ कैसे जुड़ा है
1 · आंकड़ों का प्रदर्शनसंख्याओं को आलेख, आरेख या मानचित्र में बदलना
2 · हर आरेख या मानचित्र के तीन सुनहरे नियमसही विधि, सही मापनी, सही अभिकल्पना
3 · आरेखों का आयाम के अनुसार वर्गीकरणएक, द्वि या त्रि-आयामी
4 · रेखा ग्राफ़ और बहुरेखाचित्रसमय-क्रम आंकड़े, एक रेखा या कई
आंकड़ों का आलेखी निरूपण
5 · दंड आरेखसाधारण, संयुक्त, बहुदंड और मिश्रित दंड
6 · वृत्त आरेखकुल आंकड़ा एक भाजित वृत्त में
7 · प्रवाह संचित्रलोगों या वस्तुओं की गति, अनुपाती रेखाओं में
8 · थिमैटिक मानचित्रबिंदुकित, वर्णमात्री, सममान रेखा मानचित्र + क्षेपक
इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे
  • भूगोलवेत्ता आंकड़ों को तालिका के बजाय आलेख, आरेख और मानचित्र में क्यों बदलते हैं
  • हर अच्छे आरेख या मानचित्र में तीन बातें सही होनी चाहिए: विधि, मापनी और अभिकल्पना
  • रेखा ग्राफ़, बहुरेखाचित्र और चारों प्रकार के दंड आरेख कैसे बनाए जाते हैं
  • कच्चे आंकड़ों या प्रतिशत से वृत्त आरेख का कोण कैसे निकाला जाता है
  • प्रवाह संचित्र क्या है और थिमैटिक मानचित्र सामान्य आलेख से कैसे अलग है
  • बिंदुकित मानचित्र, वर्णमात्री मानचित्र और सममान रेखा मानचित्र कैसे बनाए जाते हैं, और क्षेपक कैसे काम करता है
आंकड़ों का प्रदर्शनरेखा ग्राफ़बहुरेखाचित्रदंड आरेखवृत्त आरेखप्रवाह संचित्रथिमैटिक मानचित्रबिंदुकित मानचित्रवर्णमात्री मानचित्रसममान रेखा मानचित्रक्षेपक

1 आंकड़ों का प्रदर्शन

भूगोलवेत्ता, अर्थशास्त्री और संसाधन वैज्ञानिक जो आंकड़े इकट्ठा करते हैं, उन्हें संख्याओं की तालिका के रूप में रखा जा सकता है, या एक चित्र में बदला जा सकता है: आलेख, आरेख, मानचित्र या चार्ट। दृश्य विधियों द्वारा आंकड़ों के इस रूपांतरण को आंकड़ों का प्रदर्शन कहते हैं। संख्याओं की तालिका पढ़ने और तुलना करने में समय लगता है; एक चित्र देखते ही प्रतिरूप दिखा देता है, चाहे वह वृद्धि हो, वितरण हो या घनत्व।

याद रखेंपरिभाषा 1

आंकड़ों का प्रदर्शन आलेख, आरेख, मानचित्र और चार्ट जैसी दृश्य विधियों द्वारा आंकड़ों का रूपांतरण है, ताकि वितरण, वृद्धि और घनत्व के प्रतिरूप देखने और तुलना करने में आसान हो जाएँ।

एक चित्र हज़ारों शब्दों के बराबर होता है।

पुरानी चीनी कहावत, जिससे अध्याय की शुरुआत होती है

2 हर आरेख या मानचित्र के तीन सुनहरे नियम

कुछ भी बनाने से पहले तीन बातें सही ढंग से तय करनी होती हैं। इनमें से एक भी गलत हुई तो आरेख गुमराह करता है, समझाता नहीं।

2.1 विधि, मापनी और अभिकल्पना

1

उपयुक्त विधि का चयन

आंकड़ों का प्रकार ही विधि तय करता है। समय के साथ तापमान या जनसंख्या वृद्धि के लिए रेखा ग्राफ़। वर्षा या किसी वस्तु के उत्पादन के लिए दंड आरेख। जनसंख्या या पशुधन के वितरण के लिए बिंदुकित मानचित्र। जनसंख्या घनत्व के लिए वर्णमात्री मानचित्र।

2

उपयुक्त मापनी का चयन

मापनी आंकड़ों को आरेख या मानचित्र पर मापने का साधन है। इसे संपूर्ण आंकड़ा-सीमा को ध्यान में रखकर चुना जाना चाहिए, और यह न तो बहुत बड़ी होनी चाहिए न बहुत छोटी: बहुत बड़ी जगह बर्बाद करती है, बहुत छोटी अंतर को अदृश्य बना देती है।

3

अभिकल्पना

अभिकल्पना के तीन भाग हमेशा दिखाए जाने चाहिए: शीर्षक (क्षेत्र का नाम, संदर्भ वर्ष, उपशीर्षक; सबसे ऊपर बीच में), निर्देशिका (रंगों, छायाओं, प्रतीकों की व्याख्या करती है; आमतौर पर नीचे बाईं या नीचे दाईं ओर), और दिशा (उत्तर दिशा का प्रतीक, क्योंकि मानचित्र पृथ्वी के धरातल के एक भाग को दर्शाता है)।

परीक्षा संकेत

“अभिकल्पना” एक पसंदीदा लघु-उत्तरीय प्रश्न है। इसे श-नि-दि से याद रखें: शीर्षक, निर्देशिका, दिशा: तीन घटक, तीन अंक।

3 आरेखों का आयाम के अनुसार वर्गीकरण

आंकड़ों में मापने योग्य विशेषताएँ होती हैं: लंबाई, चौड़ाई, आयतन। इन विशेषताओं को दर्शाने के लिए बनाए गए आरेख और मानचित्र तीन वर्गों में बाँटे जाते हैं, इस आधार पर कि वे कितने आयामों का उपयोग करते हैं।

वर्ग अर्थ उदाहरण
एक-आयामी केवल लंबाई मान को दर्शाती है रेखा ग्राफ़, बहुरेखाचित्र, दंड आरेख, आयत चित्र, आयु-लिंग पिरामिड
द्वि-आयामी लंबाई और चौड़ाई (क्षेत्रफल) मान को दर्शाती हैं वृत्त आरेख, आयताकार आरेख
त्रि-आयामी लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई (आयतन) मान को दर्शाती हैं घन आरेख, गोलाकार आरेख
आम ग़लती

आयत चित्र, आयु-लिंग पिरामिड, आयताकार आरेख, घन आरेख और गोलाकार आरेख का नाम इस वर्गीकरण में केवल लिया गया है। यह अध्याय इन्हें बनाना नहीं सिखाता (ये भूगोल की किसी दूसरी प्रयोगात्मक पुस्तक में आते हैं)। इस अध्याय से इनकी रचना का प्रश्न मत बनाइए।

समय की कमी के कारण यह अध्याय केवल पाँच विधियों की रचना विस्तार से समझाता है: रेखा ग्राफ़, दंड आरेख, वृत्त आरेख और प्रवाह संचित्र, तथा अलग से, थिमैटिक मानचित्र (बिंदुकित, वर्णमात्री और सममान रेखा)। छठी विधि, पवन आरेख और तारा आरेख, अध्याय की अपनी सूची में नाम से आती है पर उसकी रचना विधि पाठ में कहीं नहीं समझाई गई। बस इतना जानिए कि यह पवन की दिशा और गति दर्शाने वाला एक आरेख है, इससे अधिक इस अध्याय से परीक्षा योग्य नहीं है।

4 रेखा ग्राफ़ और बहुरेखाचित्र

4.1 रेखा ग्राफ़

याद रखेंपरिभाषा 2

रेखा ग्राफ़ समय-क्रम आंकड़ों, जैसे तापमान, वर्षा, जनसंख्या वृद्धि या जन्म-मृत्यु दर, को बिंदुओं के रूप में अंकित करके और उन्हें एक रेखा से जोड़कर दर्शाता है।

चरण 1आंकड़े को पूर्णांक में बदलकर सरल कीजिए (जैसे 1.96 की वृद्धि दर को 2.0 में बदला जा सकता है)
चरण 2X-अक्ष (समय: वर्ष/माह) और Y-अक्ष (मापी जा रही मात्रा) खींचिए
चरण 3उपयुक्त मापनी चुनकर Y-अक्ष पर अंकित कीजिए; यदि आंकड़ों में ऋणात्मक मान हों तो उन्हें भी दिखाइए
चरण 4हर मान को उसके वर्ष/माह की स्थिति पर बिंदु से अंकित कीजिए, फिर बिंदुओं को हाथ से रेखा खींचकर जोड़िए
चित्र 1: रेखा ग्राफ़ की रचना: हर वर्ष के मान पर बिंदु अंकित कर हाथ से जोड़ा जाता है
चित्र 1: रेखा ग्राफ़ की रचना: हर वर्ष के मान पर बिंदु अंकित कर हाथ से जोड़ा जाता है
हल किया उदाहरण: उदाहरण 3.1

भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर, 1901-2011 के लिए रेखा ग्राफ़ बनाइए।

वर्ष 1911 1921 1931 1941 1951 1961 1971 1981 1991 2001 2011
वृद्धि दर (%) 0.56 -0.30 1.04 1.33 1.25 1.96 2.20 2.22 2.14 1.93 1.79

वर्ष X-अक्ष पर, वृद्धि दर (%) Y-अक्ष पर। 1921 का मान ऋणात्मक है, इसलिए Y-अक्ष की मापनी शून्य से नीचे तक जानी चाहिए।

ग्राफ़ 1: भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर, 1901-2011, ऊपर की तालिका से रेखा ग्राफ़ के रूप में अंकित
ग्राफ़ 1: भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर, 1901-2011, ऊपर की तालिका से रेखा ग्राफ़ के रूप में अंकित
क्या आप जानते हैं?

अध्याय इसे एक क्रिया के रूप में देता है: पता लगाइए कि 1911 और 1921 के बीच जनसंख्या वृद्धि में अचानक गिरावट क्यों आई। इन वर्षों में दो घटनाएँ एक साथ हुईं, प्रथम विश्व युद्ध और 1918 का वैश्विक इन्फ्लुएंज़ा महामारी, दोनों ने मृत्यु दर को तेज़ी से बढ़ाया। पुस्तक यह प्रश्न पूछती है पर अपने पाठ में इसका उत्तर नहीं देती।

4.2 बहुरेखाचित्र

याद रखेंपरिभाषा 3

बहुरेखाचित्र एक ऐसा रेखा ग्राफ़ है जिसमें दो या अधिक चरों को बराबर संख्या की रेखाओं द्वारा दिखाया जाता है, ताकि तुरंत तुलना की जा सके, जैसे अलग-अलग फसलों की वृद्धि दर, या अलग-अलग राज्यों की जन्म दर, मृत्यु दर और लिंग अनुपात।

हर रेखा को अलग शैली में खींचा जाता है ताकि चर अलग-अलग पहचाने जा सकें: सीधी रेखा, टूटी रेखा, बिंदु रेखा, बिंदु-टूटी रेखा का मिश्रण, या अलग-अलग रंगों की रेखाएँ।

हल किया उदाहरण: उदाहरण 3.2

तीन राज्यों के लिंग अनुपात (प्रति 1000 पुरुष पर स्त्रियाँ) की तुलना, 1961-2011:

राज्य 1961 1971 1981 1991 2001 2011
दिल्ली 785 801 808 827 821 866
हरियाणा 868 867 870 860 846 877
उत्तर प्रदेश 907 876 882 876 898 908

स्रोत: जनगणना, 2011

तीन रेखाएँ, प्रत्येक राज्य की अपनी, सभी एक ही X-अक्ष (वर्ष) और Y-अक्ष (लिंग अनुपात) पर, यही इसे तीन अलग रेखा ग्राफ़ों की जगह एक बहुरेखाचित्र बनाता है।

5 दंड आरेख

दंड आरेख (जिसे स्तंभ आरेख भी कहते हैं) बराबर चौड़ाई के स्तंभों से बनाया जाता है।

याद रखेंपरिभाषा 4

दंड आरेख आंकड़ों को बराबर चौड़ाई के, बराबर अंतराल पर रखे दंडों की श्रृंखला के रूप में दर्शाता है, जिनकी लंबाई या ऊँचाई हर दंड के मान के अनुपात में होती है।

5.1 हर दंड आरेख के नियम

1

बराबर चौड़ाई

हर दंड या स्तंभ की चौड़ाई समान होनी चाहिए।

2

बराबर अंतराल

सभी दंड बराबर दूरी पर खड़े होने चाहिए।

3

छायांकन की अनुमति

दंडों को अलग और आकर्षक बनाने के लिए रंगों या प्रतिरूपों से छायांकित किया जा सकता है।

5.2 साधारण दंड आरेख

तुरंत तुलना के लिए उपयोग होता है। आंकड़ों को आमतौर पर चढ़ते या उतरते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, सिवाय समय-क्रम आंकड़ों के, जो समय के क्रम में ही रहते हैं।

हल किया उदाहरण: उदाहरण 3.3

थिरुवनंतपुरम की औसत मासिक वर्षा (से.मी. में):

माह जन फर मार्च अप्रै मई जून जुला अग सित अक्टू नव दिस
वर्षा (से.मी.) 2.3 2.1 3.7 10.6 20.8 35.6 22.3 14.6 13.8 27.3 20.6 7.5

रचना: ग्राफ पेपर पर X और Y अक्ष खींचिए; Y-अक्ष पर 5 से.मी. का अंतराल लीजिए; 12 महीनों के लिए X-अक्ष को 12 बराबर भागों में बाँटिए; हर महीने की वर्षा को चुनी हुई मापनी के अनुसार अंकित कीजिए।

ग्राफ़ 2: थिरुवनंतपुरम की औसत मासिक वर्षा, साधारण दंड आरेख के रूप में बनाई गई
ग्राफ़ 2: थिरुवनंतपुरम की औसत मासिक वर्षा, साधारण दंड आरेख के रूप में बनाई गई

5.3 रेखा और दंड आरेख का मिश्रण

दो निकट से जुड़ी विशेषताओं, जैसे मासिक तापमान और वर्षा, को एक ही आरेख में दिखाया जा सकता है: माह X-अक्ष पर, और दोनों चर Y-अक्ष पर आरेख के दोनों ओर (एक तरफ तापमान, दूसरी तरफ वर्षा)। तापमान को रेखा से और वर्षा को दंड से दर्शाया जाता है।

हल किया उदाहरण: उदाहरण 3.4

दिल्ली की औसत मासिक तापमान और वर्षा:

माह जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितं अक्टू नवं दिसं
तापमान (°C) 14.4 16.7 23.3 30.0 33.3 33.3 30.0 29.4 28.9 25.6 19.4 15.6
वर्षा (से.मी.) 2.5 1.5 1.3 1.0 1.8 7.4 19.3 17.8 11.9 1.3 0.2 1.0

रचना: उपयुक्त लंबाई के X और Y अक्ष खींचिए; X-अक्ष को 12 महीनों के लिए 12 भागों में बाँटिए; तापमान के लिए 5°C या 10°C के बराबर अंतराल की मापनी चुनकर दाईं ओर अंकित कीजिए; वर्षा के लिए 5 या 10 से.मी. के बराबर अंतराल की मापनी चुनकर बाईं ओर अंकित कीजिए; तापमान को रेखा और वर्षा को दंड से दर्शाइए।

5.4 बहुदंड आरेख

दो या अधिक चरों की तुलना के लिए बनाया जाता है, जैसे पुरुष और स्त्री जनसंख्या, हर वर्ग के लिए अलग-अलग सटे हुए दंडों के रूप में।

हल किया उदाहरण: उदाहरण 3.5

भारत में साक्षरता दर, 1951-2011 (%):

वर्ष कुल जनसंख्या पुरुष स्त्री
1951 18.33 27.16 8.86
1961 28.3 40.4 15.35
1971 34.45 45.96 21.97
1981 43.57 56.38 29.76
1991 52.21 64.13 39.29
2001 64.84 75.85 54.16
2011 73.0 80.9 64.6

स्रोत: जनगणना, 2011

रचना: X-अक्ष पर समय-क्रम, Y-अक्ष पर साक्षरता दर; हर वर्ष के लिए कुल, पुरुष और स्त्री को तीन अलग दंडों से अंकित कीजिए।

5.5 मिश्रित दंड आरेख

जब एक चर के कई घटकों को, या एक घटक के कई चरों को एक साथ समूहित किया जाता है, तो उन्हें एक ही दंड के अंदर अलग-अलग आयतों के रूप में दिखाया जाता है, अलग सटे हुए दंडों के रूप में नहीं। इसे यौगिक दंड आरेख भी कहा जाता है।

हल किया उदाहरण: उदाहरण 3.6

भारत में बिजली का कुल उत्पादन (बिलियन किलोवाट में):

वर्ष ऊष्मीय जलीय नाभिकीय कुल
2008-09 616.2 110.1 14.9 741.2
2009-10 677.1 104.1 18.6 799.8
2010-11 704.3 114.2 26.3 844.8

स्रोत: आर्थिक सर्वेक्षण, 2011-12

रचना: हर वर्ष के लिए एक दंड, जिसकी कुल लंबाई कुल उत्पादन के बराबर हो; उस एक दंड की लंबाई को ऊष्मीय + जलीय + नाभिकीय भागों में बाँटिए।

बहुदंड आरेख

  • हर चर का अपना अलग दंड
  • दंड एक समूह में साथ-साथ खड़े
  • चरों की सीधी तुलना करता है

मिश्रित दंड आरेख

  • सभी चर एक ही दंड में
  • दंड को भागों में बाँटा जाता है
  • दिखाता है कि भाग मिलकर कुल कैसे बनाते हैं
आम ग़लती

“बहुदंड आरेख और मिश्रित दंड आरेख में अंतर” एक मानक 30-शब्दीय प्रश्न है। अंतर आंकड़ों का नहीं है: यह इस बात का है कि चर अलग सटे दंडों में हैं (बहुदंड) या एक दंड के भागों में (मिश्रित)।

6 वृत्त आरेख

याद रखेंपरिभाषा 5

वृत्त आरेख (जिसे भाजित वृत्त आरेख भी कहते हैं) किसी विशेषता के कुल मान को एक वृत्त के रूप में दर्शाता है, जिसे उपसमूहों के अनुपात में कोणों में बाँटा जाता है।

6.1 कोण की गणना

सूत्र
किसी वर्ग का कोण = (वर्ग का मान ÷ कुल मान) × 360°
यदि आंकड़ा प्रतिशत रूप में हो: कोण = प्रतिशत × 3.6 (क्योंकि 360 ÷ 100 = 3.6)
हल किया उदाहरण: उदाहरण 3.7

संसार के बड़े प्रदेशों को भारत का निर्यात, 2010-11 (भारतीय निर्यात का %):

प्रदेश % गणना कोण
यूरोप 20.2 20.2 × 3.6 73°
अफ्रीका 6.5 6.5 × 3.6 23°
अमेरिका 14.8 14.8 × 3.6 53°
एशिया व आसियान 56.2 56.2 × 3.6 203°
अन्य 2.3 2.3 × 3.6
कुल 100 360°

स्रोत: आर्थिक सर्वेक्षण, 2011-12

ग्राफ़ 3: संसार के बड़े प्रदेशों को भारत का निर्यात, 2010-11, ऊपर की गणना से बनाया गया वृत्त आरेख
ग्राफ़ 3: संसार के बड़े प्रदेशों को भारत का निर्यात, 2010-11, ऊपर की गणना से बनाया गया वृत्त आरेख
चित्र 2: वृत्त आरेख की रचना: पहले त्रिज्या खींची जाती है, फिर हर वर्ग का कोण उसी से मापा जाता है
चित्र 2: वृत्त आरेख की रचना: पहले त्रिज्या खींची जाती है, फिर हर वर्ग का कोण उसी से मापा जाता है

6.2 रचना और सावधानियाँ

चरण 1उपयुक्त त्रिज्या चुनिए: अधिकांश आंकड़ों के लिए 3, 4 या 5 से.मी.
चरण 2केंद्र से चाप तक एक त्रिज्या रेखा खींचिए, यही शुरुआती बिंदु होगा
चरण 3चाप से कोणों को चढ़ते क्रम में, दक्षिणावर्त, सबसे छोटे कोण से शुरू करके मापिए
चरण 4शीर्षक, उपशीर्षक और निर्देशिका जोड़कर आरेख पूरा कीजिए, हर वर्ग के लिए अलग छाया का उपयोग कीजिए

✓ यह कीजिए

  • वृत्त की त्रिज्या ऐसी चुनिए जो न जगह में बहुत बड़ी हो, न पढ़ने में बहुत छोटी
  • सबसे छोटा कोण पहले अंकित कीजिए, फिर आगे बढ़िए

✗ यह कभी मत कीजिए

  • सबसे बड़े कोण से शुरुआत मत कीजिए: छोटी-छोटी त्रुटियाँ जमा हो जाती हैं और सबसे छोटा कोण मापना मुश्किल हो जाता है

7 प्रवाह संचित्र

याद रखेंपरिभाषा 6

प्रवाह संचित्र आलेख और मानचित्र का मिश्रण है, जिसे उत्पत्ति और गंतव्य के स्थानों के बीच लोगों या वस्तुओं के प्रवाह को दर्शाने के लिए अनुपाती चौड़ाई की रेखाओं से बनाया जाता है। इसे गतिक मानचित्र भी कहते हैं।

यात्रियों या वाहनों की संख्या को अलग-अलग मार्गों पर दर्शाने वाला यातायात मानचित्र इसका मानक उदाहरण है। सरकारी परिवहन विभाग अलग-अलग मार्गों पर यातायात के घनत्व को दिखाने के लिए प्रवाह संचित्र बनाते हैं।

7.1 प्रवाह संचित्र के लिए क्या चाहिए

1

यह क्या दर्शा सकता है

गति की दिशा के अनुसार वाहनों की संख्या और आवृत्ति, अथवा यात्रियों की संख्या या परिवहन किए गए सामान की मात्रा।

2

इसके लिए क्या चाहिए

जोड़ने वाले स्टेशनों सहित एक मार्ग मानचित्र; उत्पत्ति और गंतव्य सहित प्रवाह के आंकड़े; हर रेखा की चौड़ाई तय करने के लिए एक मापनी।

हल किया उदाहरण: उदाहरण 3.10 व 3.11

उदाहरण 3.10 में दिल्ली के आसपास के 16 रेलमार्गों पर चलने वाली रेलगाड़ियों की संख्या ली गई है (सबसे कम मार्ग पर 6 से सबसे व्यस्त मार्ग पर 50 तक)। उदाहरण 3.11 में गंगा बेसिन का जल प्रवाह मानचित्र बनाया गया है, जिसकी मापनी 1 से.मी. चौड़ाई = 50,000 क्यूसेक जल है।

रचना, चरण दर चरण: जोड़ने वाले स्टेशनों को दर्शाने वाला मार्ग मानचित्र लीजिए → रेखा की मोटाई के लिए मापनी चुनिए (उदाहरण 3.10 में 1 से.मी. = 50 रेलगाड़ियाँ, इसलिए सबसे व्यस्त मार्ग को 10 मि.मी. की और सबसे कम व्यस्त को 1.2 मि.मी. की पट्टी मिलेगी) → हर मार्ग की पट्टी को उसकी गणित मोटाई पर खींचिए → सीढ़ीनुमा मापनी को निर्देशिका के रूप में जोड़िए, साथ में स्टेशनों के लिए अलग प्रतीक चुनिए।

चित्र 3: प्रवाह संचित्र के साथ प्रयोग होने वाली सीढ़ीनुमा मापनी (एक प्रतीकात्मक मापनी-पट्टी, भौगोलिक रूप से सटीक मानचित्र नहीं): चौड़ी पट्टी हमेशा बड़ा मान दर्शाती है
चित्र 3: प्रवाह संचित्र के साथ प्रयोग होने वाली सीढ़ीनुमा मापनी (एक प्रतीकात्मक मापनी-पट्टी, भौगोलिक रूप से सटीक मानचित्र नहीं): चौड़ी पट्टी हमेशा बड़ा मान दर्शाती है
परीक्षा संकेत

बहुविकल्पीय प्रश्न में “गतिक मानचित्र” का मतलब हमेशा प्रवाह संचित्र होता है: यह एकमात्र NCERT मानचित्र है जो स्थिर वितरण के बजाय गति दर्शाने के लिए जाना जाता है।

8 थिमैटिक मानचित्र

आलेख और आरेख आंतरिक विविधताओं की तुलना दिखाने में अच्छे हैं, पर वे प्रादेशिक दृष्टिकोण नहीं दे सकते, यानी यह कि ज़मीन पर कहाँ क्या हो रहा है। यह काम मानचित्र करता है। किसी विषय के प्रादेशिक वितरण को दिखाने वाले मानचित्रों को थिमैटिक मानचित्र (वितरण मानचित्र भी) कहते हैं।

8.1 थिमैटिक मानचित्र के लिए आवश्यकताएँ और नियम

1

इसके लिए क्या चाहिए

चुने हुए विषय के राज्य/जिला-स्तरीय आंकड़े; प्रशासनिक सीमाओं सहित रूपरेखा मानचित्र; क्षेत्र का भौतिक मानचित्र (जैसे जनसंख्या वितरण के लिए भूआकृतिक मानचित्र, या परिवहन मानचित्र के लिए उच्चावच और अपवाह मानचित्र)।

2

अंतिम मानचित्र में क्या दिखना चाहिए

क्षेत्र का नाम, विषय-वस्तु का शीर्षक, आंकड़ों का स्रोत और वर्ष, प्रतीकों/रंगों/छायाओं की कुंजी, और मापनी, साथ ही विषय के लिए उपयुक्त विधि।

मात्रात्मक (सांख्यिकीय) मानचित्र

  • आंकड़ों में मापने योग्य विविधता दिखाते हैं
  • उदाहरण: वर्षा की श्रेणियाँ, 200 से.मी. से अधिक, 100-200 से.मी., 50-100 से.मी., 50 से.मी. से कम

अमात्रात्मक (गुणात्मक) मानचित्र

  • केवल अमापनीय विशेषताएँ दिखाते हैं
  • उदाहरण: केवल “अधिक वर्षा” और “कम वर्षा” वाले क्षेत्र दर्शाने वाला मानचित्र

समय की कमी के कारण अध्याय केवल तीन मात्रात्मक मानचित्रों तक सीमित रहता है, हर एक अलग खंड में नीचे: बिंदुकित मानचित्र, वर्णमात्री मानचित्र और सममान रेखा मानचित्र

8.2 बिंदुकित मानचित्र

याद रखेंपरिभाषा 7

बिंदुकित मानचित्र किसी तत्त्व (जनसंख्या, पशु, फसल के प्रकार) के वितरण को समान आकार के बिंदुओं से दिखाता है, जहाँ हर बिंदु एक निश्चित मान को दर्शाता है।

1

इसके लिए क्या चाहिए

राज्य/जिला/खंड की सीमाओं सहित प्रशासनिक मानचित्र; हर इकाई के लिए सांख्यिकीय आंकड़े (जैसे कुल जनसंख्या); एक बिंदु का मान तय करने की मापनी; क्षेत्र का भूआकृतिक/उच्चावच मानचित्र।

2

सावधानियाँ

सीमा रेखाएँ बहुत मोटी या गहरी नहीं होनी चाहिए; हर बिंदु का आकार बिल्कुल समान होना चाहिए।

हल किया उदाहरण: उदाहरण 3.12

यदि भारत की जनसंख्या (2001) को दर्शाना हो और हर बिंदु 1,00,000 लोगों के बराबर हो, तो किसी राज्य के बिंदुओं की संख्या उसकी जनसंख्या को 1,00,000 से भाग देकर मिलती है, और यदि शेष 0.5 से अधिक हो तो पूर्णांक ऊपर की ओर लिया जाता है।

दिया है

महाराष्ट्र की जनसंख्या (2001) = 9,67,52,247; एक बिंदु = 1,00,000 लोग

ज्ञात करना है

महाराष्ट्र के लिए बिंदुओं की संख्या

9,67,52,247 ÷ 1,00,000 = 967.52, जिसे पूर्णांक करने पर 968 बिंदु मिलते हैं (भिन्नात्मक भाग 0.52, जो 0.5 से अधिक है)

उसी तालिका के कुछ और राज्य, अभ्यास के लिए: जम्मू और कश्मीर 1,00,69,917 → 100 बिंदु · पंजाब 2,42,89,296 → 243 बिंदु · उत्तर प्रदेश 16,60,52,859 → 1,660 बिंदु · बिहार 8,28,78,796 → 829 बिंदु · केरल 3,18,38,619 → 318 बिंदु · तमिलनाडु 6,21,10,839 → 621 बिंदु।

चरण 1एक बिंदु का आकार और मान चुनिए
चरण 2हर इकाई के आंकड़े को बिंदु के मान से भाग देकर बिंदुओं की संख्या निश्चित कीजिए
चरण 3निश्चित संख्या के अनुसार हर इकाई में बिंदु रखिए
चरण 4भूआकृतिक मानचित्र देखिए: पर्वतीय, रेगिस्तानी या बर्फ से ढके क्षेत्रों में कम बिंदु रखिए, क्योंकि वहाँ वास्तव में कम लोग रहते हैं

8.3 वर्णमात्री मानचित्र

याद रखेंपरिभाषा 8

वर्णमात्री मानचित्र प्रशासनिक इकाइयों से जुड़ी किसी विशेषता, जैसे जनसंख्या घनत्व, साक्षरता दर या लिंग अनुपात, को क्रमबद्ध छायाओं या रंगों से दर्शाता है, हर वर्ग की अपनी छाया।

सूत्र
वर्ग अंतराल = परास ÷ 5, जहाँ परास = अधिकतम मान − न्यूनतम मान
आंकड़ों को हमेशा ठीक 5 वर्गों में बाँटा जाता है: अति निम्न, निम्न, मध्यम, उच्च, अति उच्च
हल किया उदाहरण: उदाहरण 3.13

भारत में साक्षरता दर, 2001: सबसे कम बिहार (47.0%), सबसे अधिक केरल (90.9%, परास के लिए 91.0 लिया गया)।

परास = 91.0 − 47.0 = 44.0  →  अंतराल = 44.0 ÷ 5 = 8.8, पूर्णांक में 9.0

साक्षरता दर की श्रेणी वर्ग राज्य (आंकड़ों से उदाहरण)
47 – 56 अति निम्न बिहार, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर
56 – 65 निम्न उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मेघालय, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़
65 – 74 मध्यम नागालैंड, कर्नाटक, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, गुजरात, पंजाब, मणिपुर, उत्तराखंड, त्रिपुरा, तमिलनाडु
74 – 83 उच्च हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, गोवा
83 – 92 अति उच्च मिज़ोरम, केरल
चरण 1आंकड़ों को चढ़ते या उतरते क्रम में व्यवस्थित कीजिए
चरण 2परास ÷ 5 सूत्र से आंकड़ों को 5 वर्गों में बाँटिए
चरण 3चढ़ते/उतरते क्रम में छायाएँ या रंग दीजिए: गहरा रंग आमतौर पर अधिक मान दर्शाता है
चरण 4शीर्षक, निर्देशिका और अन्य अभिकल्पना घटकों सहित मानचित्र पूरा कीजिए

8.4 सममान रेखा मानचित्र

याद रखेंपरिभाषा 9

सममान रेखा (आइसोप्लेथ) समान मान वाले स्थानों को जोड़ने वाली एक काल्पनिक रेखा है, जो प्राकृतिक (प्रशासनिक नहीं) सीमाओं के आधार पर खींची जाती है, वहाँ जहाँ आंकड़ों में निरंतरता हो जैसे ढाल, तापमान या वर्षा। शब्द “आइसो” (बराबर) और “प्लेथ” (रेखाएँ) से मिलकर बना है। ऐसी रेखाओं से बना मानचित्र सममान रेखा मानचित्र कहलाता है।

सममान रेखा किसकी समानता दिखाती है
समताप रेखा (Isotherm) तापमान
समवायुदाब रेखा (Isobar) वायुदाब
समवर्षा रेखा (Isohyet) वर्षा
सममेघ रेखा (Isoneph) बादल की मात्रा
आइसोहेल (Isohel) धूप की मात्रा
समोच्च रेखा (Contour) ऊँचाई
सम गहराई रेखा (Isobath) गहराई
समलवणता रेखा (Isohaline) लवणता
1

इसके लिए क्या चाहिए

स्थानों की स्थिति दिखाने वाला आधार मानचित्र; निश्चित समय-अवधि के तापमान, वायुदाब, वर्षा जैसे उपयुक्त आंकड़े; चित्र उपकरण, विशेषकर फ्रेंच कर्व।

2

पालन करने वाले नियम

मानों का बराबर अंतराल चुनिए; 5, 10 या 20 का अंतराल आदर्श है; सममान रेखा का मान रेखा के साथ या रेखा को बीच में तोड़कर लिखिए; बराबर मान की सममान रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।

8.5 क्षेपक (इंटरपोलेशन)

याद रखेंपरिभाषा 10

क्षेपक दो ज्ञात, प्रेक्षित स्थानों के बीच का मध्यवर्ती मान निकालने की विधि है, जैसे दो स्थानों के तापमान 28°C और 33°C के बीच 30°C की समताप रेखा कहाँ पड़ेगी। बराबर मान के स्थानों को जोड़ने वाली सममान रेखाएँ खींचना स्वयं ही क्षेपक कहलाता है।

सूत्र
सममान रेखा का बिंदु = (दो बिंदुओं के बीच की दूरी ÷ दोनों बिंदुओं के मानों का अंतर) × अंतराल
हल किया उदाहरण
दिया है

दो स्टेशनों पर तापमान 28°C और 33°C; मानचित्र पर दोनों के बीच की दूरी = 1 से.मी. (10 मि.मी.); 30°C की समताप रेखा खींचनी है

ज्ञात करना है

30°C की समताप रेखा कहाँ खींची जाए

दोनों मानों का अंतर = 33 − 28 = 5। मान 30, 28 से 2 बिंदु ऊपर और 33 से 3 बिंदु नीचे है।

इसलिए 30°C की समताप रेखा 28°C वाले स्टेशन से 4 मि.मी. दूर खींची जाएगी (या, वही रेखा, 33°C वाले स्टेशन से 6 मि.मी. दूर)।

चरण 1मानचित्र पर दिए न्यूनतम और अधिकतम मान ज्ञात कीजिए
चरण 2परास की गणना कीजिए: परास = अधिकतम मान − न्यूनतम मान
चरण 3परास के आधार पर एक पूर्ण संख्या का अंतराल तय कीजिए, जैसे 5, 10, 15…
चरण 4सबसे पहले न्यूनतम मान की सममान रेखा खींचिए; बाकी उसी क्रम में आती हैं
परीक्षा से पहले स्वयं जाँचिए
  • क्या मैं बिना देखे किसी भी आरेख या मानचित्र के तीन सुनहरे नियम और “अभिकल्पना” के तीन भाग बता सकता हूँ?
  • क्या मैं एक पंक्ति में बहुदंड आरेख और मिश्रित दंड आरेख का अंतर बता सकता हूँ?
  • क्या मैं प्रतिशत से वृत्त आरेख के किसी वर्ग का कोण निकाल सकता हूँ?
  • क्या मैं बता सकता हूँ कि वृत्त आरेख का सबसे बड़ा कोण पहले क्यों नहीं अंकित करना चाहिए?
  • क्या मैं सभी आठ सममान रेखाओं के नाम और वे क्या दिखाती हैं, बता सकता हूँ?
  • क्या मैं क्षेपक के सूत्र से किसी सममान रेखा की सही स्थिति निकाल सकता हूँ?
सभी परिभाषाएँ एक जगह
आंकड़ों का प्रदर्शनदृश्य विधियों, आलेख, आरेख, मानचित्र, चार्ट, द्वारा आंकड़ों का रूपांतरण
रेखा ग्राफ़समय-क्रम आंकड़ों को बिंदुओं से अंकित कर रेखा से जोड़ना
बहुरेखाचित्रदो या अधिक चरों वाला रेखा ग्राफ़, हर चर की अपनी रेखा शैली
दंड आरेखबराबर चौड़ाई, बराबर अंतराल के दंडों में दिखाए गए आंकड़े
मिश्रित दंड आरेखकई चर एक ही दंड के भागों के रूप में दिखाए गए
वृत्त आरेखकुल मान एक वृत्त में, कोणों के अनुसार बँटा हुआ
प्रवाह संचित्रआलेख + मानचित्र का मिश्रण; अनुपाती चौड़ाई की रेखाएँ गति दिखाती हैं, इसे गतिक मानचित्र भी कहते हैं
थिमैटिक मानचित्रकिसी एक चुने विषय का प्रादेशिक वितरण दिखाने वाला मानचित्र
बिंदुकित मानचित्रवितरण को समान आकार के बिंदुओं से दिखाना, हर बिंदु का एक निश्चित मान
वर्णमात्री मानचित्रप्रशासनिक इकाई के आंकड़े को छायांकन से दिखाना, 5 वर्गों में बाँटकर
सममान रेखासमान मान के स्थानों को जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा, प्राकृतिक (न कि प्रशासनिक) सीमाओं पर
क्षेपकदो ज्ञात मानों के बीच किसी मध्यवर्ती मान की सही स्थिति निकालना
त्वरित पुनरावृत्ति: परीक्षा से एक रात पहले यह पढ़ें
  • हर आरेख या मानचित्र में सही विधि, सही मापनी और शीर्षक + निर्देशिका + दिशा वाली अभिकल्पना होनी चाहिए
  • आरेख एक-, द्वि- या त्रि-आयामी होते हैं, इस पर निर्भर कि वे कितने आयामों का उपयोग करते हैं
  • रेखा ग्राफ़ = समय-क्रम आंकड़े बिंदुओं से जोड़े हुए; बहुरेखाचित्र = ऐसी कई रेखाएँ एक साथ
  • दंड आरेख: साधारण (एक चर), बहुदंड (चर साथ-साथ), मिश्रित (चर एक दंड के अंदर)
  • वृत्त आरेख का कोण = (मान ÷ कुल) × 360°, या प्रतिशत × 3.6; सबसे छोटा कोण हमेशा पहले अंकित कीजिए
  • प्रवाह संचित्र = आलेख + मानचित्र, अनुपाती रेखा-चौड़ाई का उपयोग करते हुए; इसे गतिक मानचित्र भी कहते हैं
  • थिमैटिक मानचित्र वह प्रादेशिक चित्र देते हैं जो आलेख नहीं दे सकते; यह अध्याय बिंदुकित, वर्णमात्री और सममान रेखा मानचित्रों को कवर करता है
  • वर्णमात्री मानचित्र का अंतराल = परास ÷ 5, अति निम्न से अति उच्च तक 5 वर्गों में बाँटा हुआ
  • सममान रेखा = प्राकृतिक सीमाओं पर बराबर मान की रेखा; क्षेपक इसे दो प्रेक्षणों के बीच सही जगह पर बिठाता है
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सा मानचित्र जनसंख्या वितरण को दर्शाता है?
    (क) वर्णमात्री मानचित्र(ख) सममान रेखा मानचित्र(ग) बिंदुकित मानचित्र(घ) वर्गमूल मानचित्र
  2. 1 अंकजनसंख्या की दशकीय वृद्धि दर्शाने के लिए सबसे उपयुक्त है:
    (क) रेखा ग्राफ़(ख) दंड आरेख(ग) वृत्त आरेख(घ) प्रवाह आरेख
  3. 1 अंकबहुरेखाचित्र की रचना किसे दर्शाने के लिए की जाती है?
    (क) केवल एक चर(ख) केवल दो चर(ग) दो से अधिक चर(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
  4. 1 अंकनिम्नलिखित में से कौन-सा मानचित्र “गतिक मानचित्र” के नाम से जाना जाता है?
    (क) बिंदुकित मानचित्र(ख) वर्णमात्री मानचित्र(ग) सममान रेखा मानचित्र(घ) प्रवाह संचित्र
  5. 1 अंकवृत्त आरेख में किसी वर्ग का कोण निकालने के लिए प्रतिशत को किससे गुणा किया जाता है?
    (क) 3.6(ख) 6.3(ग) 36(घ) 360
  6. 1 अंकवर्णमात्री मानचित्र में वर्ग अंतराल निकालने के लिए परास को किससे भाग दिया जाता है?
    (क) 3(ख) 4(ग) 5(घ) 10
  7. 1 अंकसमान तापमान के स्थानों को जोड़ने वाली सममान रेखा कहलाती है:
    (क) समवायुदाब रेखा(ख) समताप रेखा(ग) समवर्षा रेखा(घ) आइसोहेल
  8. 1 अंकमिश्रित दंड आरेख में विभिन्न चर किस रूप में दर्शाए जाते हैं?
    (क) साथ-साथ रखे अलग दंडों में(ख) एक ही दंड के भागों में(ग) अलग-अलग आकार के बिंदुओं में(घ) वृत्त के अलग हिस्सों में
  9. 1 अंकवृत्त आरेख में कोण मापते समय शुरुआत किस कोण से की जानी चाहिए?
    (क) सबसे बड़े कोण से(ख) सबसे छोटे कोण से(ग) किसी भी क्रम में, फर्क नहीं पड़ता(घ) वर्गों के वर्णानुक्रम में
  10. 1 अंकसममान रेखा खींचने के लिए विशेष रूप से उपयोगी चित्र उपकरण है:
    (क) सेट स्क्वायर(ख) फ्रेंच कर्व(ग) चांदा(घ) डिवाइडर
अभिकथन (A): वर्णमात्री मानचित्र किसी भी संख्या में वर्ग बनाकर तैयार किया जा सकता है।
कारण (R): NCERT की विधि में वर्णमात्री आंकड़ों को हमेशा ठीक पाँच वर्गों में बाँटा जाता है: अति निम्न, निम्न, मध्यम, उच्च और अति उच्च।
अभिकथन (A): वृत्त आरेख में सबसे बड़े वर्ग का कोण हमेशा पहले अंकित करना चाहिए।
कारण (R): सबसे बड़े कोण से शुरू करने पर छोटी त्रुटियाँ जमा होती जाती हैं, जिससे सबसे छोटा कोण मापना कठिन हो जाता है।
अभिकथन (A): प्रवाह संचित्र को गतिक मानचित्र भी कहा जाता है।
कारण (R): प्रवाह संचित्र को लोगों या वस्तुओं की गति दिखाने के लिए अनुपाती चौड़ाई की रेखाओं से बनाया जाता है।
अभिकथन (A): सममान रेखा मानचित्र बिना किसी आधार आंकड़े के बनाया जा सकता है।
कारण (R): सममान रेखाएँ काल्पनिक रेखाएँ होती हैं जो ज्ञात बिंदुओं पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर समान मान वाले स्थानों को जोड़ती हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 30 शब्दों में उत्तर दीजिए)
  1. 2 अंकथिमैटिक मानचित्र क्या है?
  2. 2 अंक“आंकड़ों के प्रदर्शन” से आप क्या समझते हैं?
  3. 2 अंकबहुदंड आरेख और मिश्रित दंड आरेख में अंतर बताइए।
  4. 2 अंकबिंदुकित मानचित्र बनाने के लिए क्या आवश्यकताएँ हैं?
  5. 2 अंकसममान रेखा मानचित्र क्या है? क्षेपक किस प्रकार किया जाता है?
  6. 3 अंकवर्णमात्री मानचित्र तैयार करने में अपनाए जाने वाले महत्वपूर्ण चरणों का वर्णन और उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
  7. 3 अंकवृत्त आरेख की सहायता से आंकड़े दर्शाने के महत्वपूर्ण चरणों की विवेचना कीजिए।
  8. 2 अंककिसी भी आरेख या मानचित्र को खींचते समय पालन किए जाने वाले तीन सुनहरे नियमों के नाम लिखिए।
  9. 2 अंकमानचित्र की “अभिकल्पना” के तीन घटक कौन-से हैं, और हर एक की आवश्यकता क्यों है?
  10. 2 अंकआलेख या आरेख प्रादेशिक दृष्टिकोण क्यों नहीं दे सकते, जबकि थिमैटिक मानचित्र दे सकता है?
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
  1. 5 अंकरचना के चरणों सहित बताइए कि रेखा ग्राफ़ कैसे खींचा जाता है। यदि आंकड़ों में ऋणात्मक मान हों तो Y-अक्ष की मापनी में उन्हें दिखाना क्यों ज़रूरी है?
  2. 5 अंकप्रवाह संचित्र बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। प्रवाह संचित्र किन दो प्रकार के आंकड़ों को दर्शा सकता है?
  3. 5 अंकवर्णमात्री मानचित्र क्या है? एक हल किए उदाहरण की सहायता से बताइए कि वर्ग अंतराल और पाँच वर्ग कैसे निर्धारित किए जाते हैं।
  4. 5 अंकसममान रेखा को परिभाषित कीजिए। किन्हीं छह सममान रेखाओं के नाम और वे क्या दर्शाती हैं, लिखिए, और उन्हें खींचते समय पालन किए जाने वाले नियम बताइए।
  5. 4 अंकमात्रात्मक (सांख्यिकीय) मानचित्र और अमात्रात्मक (गुणात्मक) मानचित्र में अंतर बताइए, हर एक का एक-एक उदाहरण देते हुए।
संख्यात्मक / आंकड़ा-आधारित प्रश्न
  1. 4 अंकभारत में भूमि उपयोग, कुल क्षेत्रफल के प्रतिशत में: शुद्ध बोया गया क्षेत्र: 42 (1950-51), 46 (1998-2001); वन: 14, 22; कृषि के लिए अप्राप्य: 17, 14; परती भूमि: 10, 8; चरागाह व वृक्ष फसल: 9, 5; कृषि योग्य बंजर भूमि: 8, 5।
    1998-2001 के लिए हर वर्ग का वृत्त-आरेख कोण निकालिए, और बताइए कि इस आंकड़े के लिए कौन-सा आरेख सबसे उपयुक्त है और क्यों।
  2. 4 अंककिसी राज्य की जनसंख्या 5,42,00,000 है। 1 बिंदु = 2,00,000 लोगों की मापनी का उपयोग करते हुए, बिंदुकित मानचित्र के लिए आवश्यक बिंदुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
  3. 4 अंकमानचित्र पर 2 से.मी. दूर स्थित दो मौसम स्टेशन क्रमशः 24°C और 32°C तापमान दर्ज करते हैं। क्षेपक सूत्र का उपयोग करते हुए, 28°C की समताप रेखा की सही स्थिति (24°C वाले स्टेशन से से.मी. में) ज्ञात कीजिए।
  4. 3 अंककिसी आंकड़ा-समूह का अधिकतम मान 96 और न्यूनतम मान 16 है। परास और वर्णमात्री वर्ग-अंतराल की गणना कीजिए, और पाँचों वर्गों की सीमाएँ लिखिए।
  5. 3 अंकछह राज्यों में चावल का क्षेत्र (कुल का % में): पश्चिम बंगाल 12.3, उत्तर प्रदेश 13.2, आंध्र प्रदेश 9.1, पंजाब 5.9, तमिलनाडु 4.8, बिहार 8.3। राज्यों की तुरंत तुलना के लिए कौन-सा आरेख सबसे बेहतर होगा, साधारण दंड आरेख या वृत्त आरेख? एक पंक्ति में अपने उत्तर का औचित्य बताइए।
उत्तर कुंजी
बहुविकल्पीय 1-10(ग) · (ख) · (ग) · (घ) · (क) · (ग) · (ख) · (ख) · (ख) · (ख)
अभिकथन-कारण 1(घ): A असत्य है: वर्णमात्री आंकड़ों को हमेशा ठीक पाँच वर्गों में ही बाँटा जाता है, किसी भी संख्या में नहीं। R सत्य है।
अभिकथन-कारण 2(घ): A असत्य है: सबसे छोटा कोण पहले अंकित करना चाहिए, सबसे बड़ा नहीं। R सही ढंग से बताता है कि सबसे बड़े कोण से शुरुआत क्यों गलत है।
अभिकथन-कारण 3(क): दोनों सत्य; R सही ढंग से बताता है कि प्रवाह संचित्र को गतिक क्यों कहा जाता है, यह अनुपाती रेखा-चौड़ाई से गति दिखाता है।
अभिकथन-कारण 4(घ): A असत्य है: सममान रेखा मानचित्र बनाने के लिए ज्ञात बिंदुओं पर दर्ज आंकड़े चाहिए ही होते हैं, बिना आधार आंकड़े के यह नहीं बनाया जा सकता। R सत्य है।
संख्यात्मक 1शुद्ध बोया गया क्षेत्र 46% → 165.6°; वन 22% → 79.2°; अप्राप्य 14% → 50.4°; परती 8% → 28.8°; चरागाह 5% → 18°; बंजर भूमि 5% → 18° (कुल 360°)। वृत्त आरेख सबसे उपयुक्त है: यह एक कुल (100%) के छह हिस्सों की तुलना एक नज़र में दिखाता है।
संख्यात्मक 25,42,00,000 ÷ 2,00,000 = 271 बिंदु
संख्यात्मक 3अंतर = 32 − 24 = 8; 28 का मान 24 से 4 बिंदु दूर है; बिंदु = (2 ÷ 8) × 4 = 24°C वाले स्टेशन से 1 से.मी. दूर
संख्यात्मक 4परास = 96 − 16 = 80; अंतराल = 80 ÷ 5 = 16; वर्ग: 16-32 (अति निम्न), 32-48 (निम्न), 48-64 (मध्यम), 64-80 (उच्च), 80-96 (अति उच्च)
संख्यात्मक 5साधारण दंड आरेख: यह छह स्वतंत्र राज्य-मानों की सीधी तुलना ऊँचाई से करता है; वृत्त आरेख तभी उपयुक्त होता जब छह मान मिलकर एक सार्थक कुल (100%) बनाते
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