कक्षा 12 समाजशास्त्र अध्याय 2, भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना, का
दो पन्नों का पुनरावृत्ति सारांश। हर परिभाषा, हर सारणी का आँकड़ा और अध्याय
का हर नामित तथ्य, बीच का कुछ नहीं। पहले पूरे नोट्स पढ़िए; यह
परीक्षा की सुबह पढ़िए।
1 यह अध्याय कहाँ कितने अंकों का है
| बोर्ड | इस अध्याय का भार |
|---|---|
| CBSE (2026-27 पाठ्यक्रम) | 10 अंक (80 सैद्धांतिक + 20 प्रोजेक्ट) |
अन्य बोर्ड अपने अंक स्वयं तय करते हैं; अपने बोर्ड की नवीनतम योजना देखिए।
2 सभी परिभाषाएँ एक जगह
हर परिभाषा एक जगह
जनसांख्यिकीजनसंख्या का सुव्यवस्थित अध्ययन: आकार, जन्म, मृत्यु, प्रवसन, तथा जनसंख्या की संरचना और बनावट
आकारिक जनसांख्यिकीमात्रात्मक; जनसंख्या परिवर्तन के घटकों का मापन और विश्लेषण
सामाजिक जनसांख्यिकीजनसंख्या अध्ययन; जनसंख्या संरचना व परिवर्तन के व्यापक कारण और परिणाम
जनगणनाएक निश्चित क्षेत्र के सभी लोगों की सुव्यवस्थित गणना; भारत में दसवर्षीय
जन्म दरकिसी क्षेत्र में किसी अवधि में प्रति 1000 जनसंख्या पर जीवित जन्म
मृत्यु दरकिसी क्षेत्र में किसी अवधि में प्रति 1000 जनसंख्या पर मृत्यु
प्राकृतिक वृद्धि दरजन्म दर घटा मृत्यु दर; जनसंख्या वृद्धि दर भी कहते हैं
प्रतिस्थापन स्तरनई पीढ़ियों को पुरानी की जगह लेने भर की वृद्धि दर; जनसंख्या स्थिर हो चुकी है
प्रजनन दर15-49 वर्ष की स्त्रियों में प्रति 1000 पर जीवित जन्म
अशोधित दरपूरी जनसंख्या का मोटा औसत, आयु वर्गों का अंतर नज़रअंदाज़
शिशु मृत्यु दरएक वर्ष से पहले मरने वाले शिशु, प्रति 1000 जीवित जन्म पर
मातृ-मृत्यु दरप्रसव में मरने वाली स्त्रियाँ, प्रति 1,00,000 जीवित जन्म पर
आयु संभाविताएक औसत व्यक्ति के जीने की अनुमानित वर्षों की संख्या
स्त्री-पुरुष अनुपातकिसी निश्चित समय पर प्रति 1000 पुरुषों पर स्त्रियाँ
बाल स्त्री-पुरुष अनुपात0-6 वर्ष आयु वर्ग का अनुपात; 1961 से गणना
आयु संरचनाकुल जनसंख्या के सापेक्ष विभिन्न आयु वर्गों का अनुपात
जनसंख्या का बूढ़ा होनाछोटे आयु वर्गों में छोटा, बड़े आयु वर्गों में बड़ा अनुपात
पराश्रितता अनुपात15 से कम या 64 से अधिक की जनसंख्या ÷ 15-64 वर्ष की जनसंख्या, प्रतिशत में
जनसांख्यिकीय लाभांशघटती पराश्रितता और अधिक अर्जकों से मिलने वाला अस्थायी लाभ
वंध्यकरणगर्भधारण-प्रसव रोकने की प्रक्रिया: पुरुषों की नसबंदी, स्त्रियों की नलिकाबंदी
जनसंख्या की गतिबड़ी प्रजनन-योग्य आबादी के कारण जारी वृद्धि, भले ही परिवार का आकार घटे
महामारी (pandemic)बहुत विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में फैली महामारी
3 दोनों सिद्धांत, साथ-साथ
3.1 दोनों सिद्धांत, साथ-साथ
माल्थस, 1798
- जनसंख्या ज्यामितीय (2,4,8,16), भोजन (कृषि उत्पादन) अंकगणितीय या समांतर (2,4,6,8) क्रम में बढ़ता है
- इसलिए मानवता हमेशा ग़रीबी में जीने को अभिशप्त
- कृत्रिम निरोध: विवाह टालना, संयम, ब्रह्मचर्य। स्वैच्छिक, सीमित
- प्राकृतिक निरोध: अकाल और महामारी। अनिवार्य, असंतुलन से निपटने का प्रकृति का तरीका। बॉक्स 2.1: “मनुष्यों के दुर्गुण ही जनसंख्या को घटाने के सक्रिय और सक्षम कारक होते हैं”
- यूरोपीय अनुभव से और असमान बँटवारे को दोष देने वाले आलोचकों से खंडित
जनसांख्यिकीय संक्रमण
- अवस्था 1: अल्पविकसित; दोनों दरें बहुत ऊँची, वृद्धि कम
- अवस्था 2: संक्रमणकालीन; मृत्यु दर अपेक्षाकृत तेज़ी से गिरती है, जन्म दर धीरे-धीरे गिरती है, वृद्धि बहुत ऊँची, यही जनसंख्या विस्फोट
- अवस्था 3: विकसित; दोनों दरें कम, वृद्धि फिर कम
- पश्चिमी यूरोप में उन्नीसवीं-बीसवीं सदी में पूरा हुआ
- भारत का संक्रमण अभी पूरा नहीं
4 परीक्षा में ले जाने लायक आँकड़े
121 करोड़भारत की जनसंख्या, 2011
1921-31जन्म-मृत्यु दर अलग होने का दशक
943स्त्री-पुरुष अनुपात, 2011
919बाल स्त्री-पुरुष अनुपात, 2011
| वर्ष | जनसंख्या (मिलियन) | स्त्री-पुरुष अनुपात | बाल अनुपात | साक्षरता (%) | नगरीय (%) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1901 | 238 | 972 | – | – | 10.8 |
| 1951 | 361 | 946 | – | 18.3 | 17.3 |
| 1961 | 439 | 941 | 976 | 28.3 | 18.0 |
| 1971 | 548 | 930 | 964 | 34.5 | 19.9 |
| 1981 | 683 | 934 | 962 | 43.6 | 23.3 |
| 1991 | 846 | 927 | 945 | 52.2 | 25.7 |
| 2001 | 1028 | 933 | 927 | 65.4 | 27.8 |
| 2011 | 1210 | 943 | 919 | 73.0 | 31.2 |
यह एक सारणी अध्याय की पाँच सांख्यिकीय शृंखलाएँ एक साथ
देती है: जनसंख्या, स्त्री-पुरुष अनुपात, बाल अनुपात, साक्षरता और नगरीय %। साक्षरता 7 वर्ष और अधिक आयु की जनसंख्या के लिए है; 2011 में पुरुष
साक्षरता 80.9% और स्त्री 64.6%, अंतर 16.3।
| आयु वर्ग | 1961 | 1971 | 1981 | 1991 | 2001 | 2011 | 2026 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 0-14 वर्ष | 41 | 42 | 40 | 38 | 34 | 29 | 23 |
| 15-59 वर्ष | 53 | 53 | 54 | 56 | 59 | 63 | 64 |
| 60+ वर्ष | 6 | 5 | 6 | 7 | 7 | 8 | 12 |
कुल जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में आयु संरचना। 2026 एक अनुमान है।
5 भाग-वार तथ्य
वह सब जो एक अंक के लायक है
- जनगणना का इतिहास: अमेरिका 1790 पहली आधुनिक जनगणना; यूरोप 1800 के दशक की शुरुआत में; भारत 1867-72 ब्रिटिश भारत सरकार के अधीन; 1881 से दसवर्षीय; 1951 से सात; नवीनतम 2011; विश्व की सबसे बड़ी कवायद, क्योंकि चीन नियमित जनगणना नहीं कराता
- दुर्खाइम: आत्महत्या दर (प्रति 1,00,000) देशों में भिन्न होती है और सामाजिक कारणों से समझी जानी चाहिए, इसीलिए मृत्यु दर एक सामाजिक प्रघटना है
- माल्थस: 1766-1834, कैम्ब्रिज, ईसाई पादरी बनने का प्रशिक्षण, हैलीबरी के ईस्ट इंडिया कंपनी कॉलेज में प्रोफ़ेसर
- वृद्धि दरें: 1901-1951 कभी 1.33% से ऊपर नहीं; 1911-21 ऋणात्मक -0.03%, 1918-19 के इन्फ्लुएंज़ा महामारी के कारण (लगभग 125 लाख मृत्यु, लगभग 5% जनसंख्या, अनुमान भिन्न-भिन्न; बॉक्स 2.2 में 170 लाख; विश्व भर में कम-से-कम 4 करोड़ समझा जाता है; बाद की महामारियाँ 1957 और 1968); 1961-81 में शिखर 2.2%; 2011 में औसत वार्षिक 1.63%
- अतीत की महामारियाँ: बुख़ार, प्लेग, चेचक, हैज़ा। अब भी मारने वाले: मलेरिया, क्षय रोग, अतिसार, पेचिश। सूरत प्लेग सितंबर 1994; उसके बाद डेंगू-चिकनगुनिया
- अकाल: ग़रीबी, कुपोषण, वर्षा में उतार-चढ़ाव, ख़राब परिवहन और अपर्याप्त राज्य प्रयास से। अमर्त्य सेन: केवल उत्पादन गिरावट नहीं, “हकदारी की पूर्ति का अभाव” भी। मनरेगा नवीनतम राज्य पहल
- प्रजनन दर 2016: आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल में 1.7; केरल प्रतिस्थापन स्तर से नीचे; बिहार 3.3, उत्तर प्रदेश 3.1, मध्य प्रदेश 2.8, राजस्थान 2.7
- SRS 2020: भारत की अशोधित जन्म दर 19.5, ग्रामीण 21.1, नगरीय 16.1; बिहार 25.5 और उत्तर प्रदेश 25.1 सबसे ऊँची। आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19: ये दोनों राज्य 2041 तक वृद्धि का लगभग आधा (50%) भाग बढ़ा सकते हैं, अकेला उत्तर प्रदेश 22%
- 2041 तक वृद्धि हिस्सेदारी (चार्ट 2): उत्तर प्रदेश-बिहार 28%, पाँच दक्षिणी राज्य 16%, मध्य प्रदेश-राजस्थान-छत्तीसगढ़ 15%, महाराष्ट्र-गुजरात 13%, पश्चिम बंगाल-ओडिशा-झारखंड 13%, शेष राज्य 10%, पंजाब-हरियाणा-दिल्ली 5%
- जनसांख्यिकीय लाभांश: कुल पराश्रितता अनुपात 79 (1970), 64 (2005); आयु आधारित अनुपात 48 (2025) तक गिर सकता है, 50 (2050)। 2020 औसत आयु: भारत 29, चीन-अमेरिका 37, पश्चिमी यूरोप 45, जापान 48। पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और आयरलैंड जैसा। स्वतः नहीं: शिक्षा-रोज़गार चाहिए। 15-30 आयु वर्ग के पुरुषों में रोज़गार वृद्धि (ग्रामीण और नगरीय) 2.4% प्रति वर्ष (1987-94) से घटकर ग्रामीण पुरुषों 0.7% और नगरीय पुरुषों 0.3% (1994-2004)
- केरल बनाम उत्तर प्रदेश: केरल की आयु संरचना विकसित देश जैसी बनती जा रही; उत्तर प्रदेश में युवाओं का अनुपात ऊँचा, वृद्धों का कम; भारत बीच में
- स्त्री-पुरुष अनुपात: प्रकृति हर 1000 नर शिशुओं के पीछे मोटे तौर पर 943-952 बालिकाएँ पैदा करती है, पर बालिकाओं को शैशव में रोग-प्रतिरोध की बढ़त और स्त्रियों की लंबी आयु से अधिकांश संदर्भों में अनुपात लगभग 1050 बनता है। चीन, दक्षिण कोरिया और विशेषतः भारत जैसे कुछ देशों में घट रहा है; इसे उन सामाजिक मानकों से जोड़ा जा सकता है जो पुरुषों को कहीं अधिक महत्त्व देते हैं
- 1991 से 2001: समग्र अनुपात 6 अंक बढ़ा (927 से 933), अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि; बाल अनुपात 18 अंक गिरा (945 से 927), पहली बार समग्र से नीचे; 2011 में 8 अंक और गिरकर 919 (सारणी 3)
- 2011 का राज्यवार बाल अनुपात: कम-से-कम नौ राज्य-संघ राज्य क्षेत्र 900 से नीचे; पाठ इन छह का नाम लेता है: हरियाणा 793 (800 से नीचे इकलौता), फिर पंजाब, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तराखंड। 925 से नीचे: उत्तर प्रदेश, दमन-दीव, हिमाचल प्रदेश, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश। केरल 964; अरुणाचल प्रदेश 972, सबसे अधिक
- गिरावट के कारण: बालिकाओं की घोर उपेक्षा, लिंग-विशिष्ट गर्भपात, बालिका शिशुओं की हत्या। मातृ-मृत्यु दर को मुख्य कारण मानना कठिन है, क्योंकि वह घट रही है। सोनोग्राम भ्रूण-विकार जाँचने बना, लिंग-चयन में दुरुपयोग होता है
- समृद्धि का विरोधाभास: पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय ऊँची पर बाल अनुपात नीचा, इसलिए कारण ग़रीबी, अज्ञानता या संसाधनों की कमी नहीं
- क़ानून और नीति: पीएनडीटी अधिनियम 1996 से लागू, 2003 में सख्त; बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ। दीर्घकालीन समाधान मुख्यतः अभिवृत्तियों पर निर्भर, हालाँकि नियम एवं क़ानून भी मदद कर सकते हैं
- साक्षरता (सारणी 4): 1991 से 2001 में स्त्री 39.3% से 54.2% (लगभग 15 अंक), पुरुष 64.1% से 75.9% (लगभग 12 अंक); 2001 से 2011 में कुल लगभग 7.6 अंक, पुरुष लगभग 5 अंक, स्त्री लगभग 10 अंक; 2011 में अंतर 16.3 अंक। अनुसूचित जाति-जनजाति कम, उनकी स्त्रियाँ और कम। केरल पूर्ण साक्षरता के क़रीब, बिहार बहुत पीछे। असमानता पीढ़ी-दर-पीढ़ी दोहराती है
- ग्रामीण-नगरीय: कृषि सकल घरेलू उत्पाद का लगभग छठा हिस्सा; 5,161 नगर-शहर, 28.6 करोड़ लोग; दो-तिहाई से अधिक नगरीय जनसंख्या 27 दस-लाखी शहरों में। ग़ैर-कृषि ग्रामीण व्यवसाय: परिवहन सेवाएँ, व्यापारिक उद्यम, हस्तशिल्प
- लोग क्यों प्रवास करते हैं: काम के लिए; साझी संपत्ति के संसाधनों (तालाब, वन प्रदेश, गोचर भूमि) के निजी संपत्ति बनने या समाप्त होने से; शहर की सापेक्ष गुमनामी से, जो अनुसूचित जाति-जनजाति को रोज़ाना के अपमान से बचाती है और प्रभावशाली समूहों के ग़रीब वर्गों को निम्न दर्जे का काम करने देती है
- जनसंख्या नीति: 1952, संभवतः विश्व की पहली; राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम; आपातकाल 1975-76 की बलात् नसबंदी, अगली सरकार ने त्यागी; राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम नाम मिला; राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000; राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के लक्ष्य: स्वास्थ्य व्यय GDP के वर्तमान 1.04% से समयबद्ध ढंग से 2.5% तक; आयु संभाविता 67.5 से 70, 2025 तक; TFR 2.1, 2025 तक; पाँच वर्ष से कम मृत्यु दर 23, 2025 तक; मातृ-मृत्यु दर 100, 2020 तक; नवजात मृत्यु दर 16, 2025 तक
- जनसंख्या की गति: TFR 3.8 (1990) से आज 2.7, फिर भी 1.2 अरब से 2050 तक अनुमानित 1.6 अरब। 1950 से 1990 तक CBR की गिरावट CDR से कम तीव्र थी; 1990 के दशक में CBR तेज़ी से गिरी, जिससे आज वृद्धि दर 1.6%
- अध्याय का अंतिम शब्द: राज्य जनसांख्यिकीय परिवर्तन के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ बनाने के लिए बहुत-कुछ कर सकता है, फिर भी अधिकांश जनसांख्यिकीय परिवर्तनशील दरों में (विशेषकर प्रजनन दर में) अंततः आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पक्ष ही महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री