NCERT की पाठ्यपुस्तक समकालीन विश्व राजनीति के अध्याय 2 (सत्ता के समकालीन केन्द्र) की प्रश्नावली के सभी 14 प्रश्न, ठीक उसी रूप में जैसे किताब (हिंदी संस्करण) में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। अध्याय के बीच में पूछे गए प्रश्नों और कक्षा-गतिविधि के उत्तर अंत में दिए गए हैं। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।
1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्र. तिथि के हिसाब से इन सबको क्रम दें:
(क) विश्व व्यापार संगठन में चीन का प्रवेश
(ख) यूरोपीय आर्थिक समुदाय की स्थापना
(ग) यूरोपीय संघ की स्थापना
(घ) आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना
उत्तर: सही क्रम है (ख), (ग), (घ), (क)।
1. यूरोपीय आर्थिक समुदाय की स्थापना: 1957
2. यूरोपीय संघ की स्थापना: 1992
3. आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना: 1994
4. विश्व व्यापार संगठन में चीन का प्रवेश: 2001
प्र. ‘ASEAN way’ या आसियान शैली क्या है?
(क) आसियान के सदस्य देशों की जीवन शैली है
(ख) आसियान सदस्यों के अनौपचारिक और सहयोगपूर्ण कामकाज की शैली को कहा जाता है।
(ग) आसियान सदस्यों की रक्षानीति है।
(घ) सभी आसियान सदस्य देशों को जोड़ने वाली सड़क है।
उत्तर: (ख) आसियान सदस्यों के अनौपचारिक और सहयोगपूर्ण कामकाज की शैली को कहा जाता है।
पुस्तक के अनुसार अनौपचारिक, टकरावरहित और सहयोगात्मक मेल-मिलाप का नया उदाहरण पेश करके आसियान ने काफी यश कमाया है और इसी को ‘आसियान शैली’ कहा जाने लगा है। इसके कामकाज में राष्ट्रीय सार्वभौमिकता का सम्मान करना बहुत महत्त्वपूर्ण रहा है।
प्र. इनमें से किसने ‘खुले द्वार’ की नीति अपनाई?
(क) चीन (ख) दक्षिण कोरिया (ग) जापान (घ) अमरीका
उत्तर: (क) चीन। 1978 में चीन के तत्कालीन नेता देंग श्याओपेंग ने आर्थिक सुधारों और ‘खुले द्वार की नीति’ की घोषणा की, ताकि विदेशी पूँजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता प्राप्त की जा सके।
2 रिक्त स्थान
प्र. खाली स्थान भरें:
(क) 1962 में भारत और चीन के बीच ______ और ______ को लेकर सीमावर्ती लड़ाई हुई थी।
(ख) आसियान क्षेत्रीय मंच के कामों में ______ और ______ करना शामिल है।
(ग) चीन ने 1972 में ______ के साथ दोतरफा संबंध शुरू करके अपना एकांतवास समाप्त किया।
(घ) ______ योजना के प्रभाव से 1948 में यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन की स्थापना हुई।
(ङ) ______ आसियान का एक स्तम्भ है जो इसके सदस्य देशों की सुरक्षा के मामले देखता है।
उत्तर:
(क) अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों और लद्दाख के अक्साई-चिन क्षेत्र
(ख) सुरक्षा नीतियों में तालमेल और विदेश नीतियों में तालमेल (1994 में आसियान क्षेत्रीय मंच इसी काम के लिए बनाया गया था)
(ग) अमरीका
(घ) मार्शल
(ङ) आसियान सुरक्षा समुदाय
3 वर्णनात्मक प्रश्न
प्र. क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर: क्षेत्रीय संगठन इसलिए बनाए जाते हैं ताकि:
1. अपने-अपने इलाके में चलने वाली ऐतिहासिक दुश्मनियों और कमजोरियों का क्षेत्रीय स्तर पर समाधान ढूँढ़ा जा सके। यूरोपीय संघ और आसियान, दोनों ने यही किया।
2. अपने इलाके में अधिक शांतिपूर्ण और सहकारी क्षेत्रीय व्यवस्था विकसित की जा सके।
3. क्षेत्र के देशों की अर्थव्यवस्थाओं का समूह बनाकर आर्थिक विकास तेज किया जा सके, जैसे साझा बाज़ार और मुक्त व्यापार क्षेत्र।
4. सदस्य देशों की सुरक्षा और विदेश नीतियों में तालमेल बनाया जा सके, जिसके लिए 1994 में आसियान क्षेत्रीय मंच बना।
5. सत्ता के वैकल्पिक केंद्र के रूप में उभरकर किसी एक महाशक्ति के प्रभुत्व को सीमित किया जा सके, जो इस अध्याय का मुख्य विषय ही है।
6. टकराव की जगह बातचीत को बढ़ावा दिया जा सके, जैसे आसियान ने कंबोडिया के टकराव और पूर्वी तिमोर के संकट में किया।
प्र. भौगोलिक निकटता का क्षेत्रीय संगठनों के गठन पर क्या असर होता है?
उत्तर: भौगोलिक निकटता क्षेत्रीय संगठनों की बुनियाद ही है:
1. पास-पास के देशों की समस्याएँ एक जैसी होती हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों ने मिलकर उपनिवेशवाद की मार, राष्ट्र-निर्माण, गरीबी और आर्थिक पिछड़ेपन का सामना किया, इसलिए साझा समाधान की ज़रूरत महसूस हुई।
2. पड़ोसी देशों के बीच ही पुरानी दुश्मनियाँ होती हैं। यूरोप में एकीकरण की सबसे बड़ी वजह यही थी कि पुरानी दुश्मनियों को दोहराने के बजाय नए सिरे से संबंध बनाए जाएँ।
3. निकटता से व्यापार, आवागमन और निवेश आसान और सस्ता होता है। शांगेन संधि ने तो 1985 में सदस्य देशों के बीच सीमा नियंत्रण ही समाप्त कर दिया।
4. एक ही इलाके के देशों की सुरक्षा आपस में जुड़ी होती है, इसलिए साझी सुरक्षा व्यवस्था बनाना स्वाभाविक हो जाता है।
5. भारत के पूर्वोत्तरी राज्य आसियान देशों के इतने निकट हैं कि भारत ने 1991 से लुक ईस्ट और 2014 से एक्ट ईस्ट नीति अपनाकर पूर्वी एशिया के देशों से आर्थिक संबंध बढ़ाए।
प्र. ‘आसियान विज़न-2020’ की मुख्य-मुख्य बातें क्या हैं?
उत्तर: आसियान के विजन दस्तावेज़ 2020 की मुख्य बातें ये हैं:
1. इसमें अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में आसियान की एक बहिर्मुखी भूमिका को प्रमुखता दी गई है, यानी आसियान अपने इलाके तक सिमटा न रहकर बाहर की दुनिया से जुड़े।
2. यह आसियान की उसी नीति से निकली बात है जिसमें टकराव की जगह बातचीत को बढ़ावा दिया जाता है।
3. इसी तरीके से आसियान ने कंबोडिया के टकराव को समाप्त किया और पूर्वी तिमोर के संकट को सम्भाला।
4. पूर्व-एशियाई सहयोग पर बातचीत के लिए 1999 से नियमित रूप से वार्षिक बैठक आयोजित की जाती है।
प्र. आसियान समुदाय के मुख्य स्तंभों और उनके उद्देश्यों के बारे में बताएँ।
उत्तर: 2003 में आसियान ने तीन स्तम्भों के आधार पर आसियान समुदाय बनाने की दिशा में कदम उठाए:
1. आसियान सुरक्षा समुदाय: यह इस सहमति पर आधारित है कि क्षेत्रीय विवादों को सैनिक टकराव तक न ले जाया जाए। 2003 तक सदस्य देशों ने कई समझौते किए जिनके द्वारा हर देश ने शांति, निष्पक्षता, सहयोग और अहस्तक्षेप को बढ़ावा देने तथा राष्ट्रों के आपसी अंतर एवं संप्रभुता के अधिकारों का सम्मान करने की वचनबद्धता जाहिर की।
2. आसियान आर्थिक समुदाय: इसका उद्देश्य आसियान देशों का साझा बाज़ार और उत्पादन आधार तैयार करना तथा इस इलाके के सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद करना है। यह क्षेत्र के आर्थिक विवादों को निपटाने की मौजूदा व्यवस्था को भी सुधारना चाहेगा।
3. आसियान सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय: इसका उद्देश्य इस क्षेत्र का सामाजिक और सांस्कृतिक विकास है, जो आसियान के मूल उद्देश्यों में शुरू से शामिल रहा है।
प्र. आज की चीनी अर्थव्यवस्था नियंत्रित अर्थव्यवस्था से किस तरह अलग है?
उत्तर:
1. स्वामित्व: नियंत्रित अर्थव्यवस्था में खेती और उद्योग दोनों राज्य के नियंत्रण में थे; आज खेती (1982) और उद्योग (1998) दोनों का निजीकरण हो चुका है।
2. बाहरी दुनिया से रिश्ता: पहले चीन ने पूँजीवादी दुनिया से रिश्ते तोड़ लिए थे और विदेशी व्यापार न के बराबर था; आज विशेष आर्थिक क्षेत्रों में विदेशी निवेशक उद्यम लगाते हैं और चीन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए दुनिया का सबसे आकर्षक देश बनकर उभरा है।
3. तकनीक और पूँजी: पहले विदेशी मुद्रा की कमी के कारण आयातित सामान घरेलू स्तर पर तैयार करवाए जाते थे; 1978 के बाद नीति यह हुई कि विदेशी पूँजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता प्राप्त की जाए।
4. विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ाव: चीन 2001 में विश्व व्यापार संगठन में शामिल हो गया और अब उसकी योजना विश्व आर्थिकी से जुड़ाव और गहरा करके भविष्य की विश्व व्यवस्था को मनचाहा रूप देने की है।
5. बदलाव का तरीका: बाज़ारमूलक अर्थव्यवस्था अपनाने के लिए चीन ने अपना तरीका आजमाया, यानी शॉक थेरेपी पर अमल करने के बजाय अपनी अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध ढंग से खोला।
प्र. किस तरह यूरोपीय देशों ने युद्ध के बाद की अपनी परेशानियाँ सुलझाईं? संक्षेप में उन कदमों की चर्चा करें जिनसे होते हुए यूरोपीय संघ की स्थापना हुई।
उत्तर: परेशानियाँ: 1945 तक यूरोपीय देशों ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं की बर्बादी झेली और वे मान्यताएँ तथा व्यवस्थाएँ भी ध्वस्त होते देखीं जिन पर यूरोप खड़ा था। नेताओं के सामने ‘यूरोप का सवाल’ था: पुरानी दुश्मनियाँ फिर शुरू करें, या सिद्धांतों और संस्थाओं के आधार पर संबंध नए सिरे से बनाएँ।
कदम, क्रम से:
1. अमरीका ने मार्शल योजना के तहत यूरोप की अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन के लिए जबरदस्त मदद दी और ‘नाटो’ के तहत सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को जन्म दिया। 1945 के बाद यूरोप में मेल-मिलाप को शीतयुद्ध से भी मदद मिली।
2. मार्शल योजना के तहत ही 1948 में यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन बना, जो व्यापार और आर्थिक मामलों में एक-दूसरे की मदद का मंच बन गया।
3. 1949 में गठित यूरोपीय परिषद् राजनैतिक सहयोग के मामले में अगला कदम साबित हुई।
4. आर्थिक एकीकरण चरणबद्ध ढंग से बढ़ा और 1957 में यूरोपीयन इकॉनामिक कम्युनिटी का गठन हुआ। यूरोपीयन पार्लियामेंट के गठन के बाद इस प्रक्रिया ने राजनीतिक स्वरूप प्राप्त कर लिया।
5. सोवियत गुट के पतन के बाद प्रक्रिया में तेजी आयी और 1992 में यूरोपीय संघ की स्थापना हुई। इससे समान विदेश और सुरक्षा नीति, आंतरिक मामलों तथा न्याय पर सहयोग और एकसमान मुद्रा के चलन का रास्ता तैयार हो गया।
प्र. यूरोपीय संघ को क्या चीजें एक प्रभावी क्षेत्रीय संगठन बनाती हैं।
उत्तर:
1. आर्थिक शक्ति: वर्ष 2024 में यूरोपीय संघ का सकल घरेलू उत्पादन लगभग 19.35 खरब डॉलर होने का अनुमान है। इसकी मुद्रा यूरो अमरीकी डालर के प्रभुत्व के लिए खतरा बन सकती है। विश्व व्यापार में इसकी हिस्सेदारी अमरीका से तीन गुनी ज़्यादा है, इसीलिए यह अमरीका और चीन से व्यापारिक विवादों में पूरी धौंस के साथ बात करता है। इसका असर एशिया और अफ़्रीका के दूर-दराज के मुल्कों पर भी है, और यह विश्व व्यापार संगठन जैसे संगठनों के अंदर एक महत्त्वपूर्ण समूह के रूप में काम करता है।
2. राजनैतिक और कूटनीतिक प्रभाव: इसका सदस्य फ़्रांस सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य है और कई अन्य सदस्य देश अस्थायी सदस्यों में शामिल रहते हैं। इसके चलते यूरोपीय संघ अमरीका समेत सभी मुल्कों की नीतियों को प्रभावित करता है; ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित अमरीकी नीतियों को प्रभावित करना इसका उदाहरण है। चीन के साथ मानवाधिकारों और पर्यावरण के मामलों पर धमकी या सैनिक शक्ति की जगह कूटनीति, आर्थिक निवेश और बातचीत की इसकी नीति ज्यादा प्रभावी साबित हुई है।
3. सैनिक शक्ति: इसके पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है, कुल रक्षा बजट अमरीका के बाद सबसे अधिक है, इसके सदस्य फ़्रांस के पास करीब 335 परमाणु हथियार हैं, और अंतरिक्ष विज्ञान तथा संचार प्रौद्योगिकी में इसका दुनिया में दूसरा स्थान है।
4. अधिराष्ट्रीय स्वरूप: अधिराष्ट्रीय संगठन के तौर पर यह आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक मामलों में दखल देने में सक्षम है। इसका अपना झंडा, गान, स्थापना-दिवस और मुद्रा है तथा काफी हद तक साझी विदेश और सुरक्षा नीति भी है।
प्र. चीन और भारत की उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मौजूदा एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था को चुनौती दे सकने की क्षमता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने तर्कों से अपने विचारों को पुष्ट करें।
उत्तर: हाँ, इस कथन से काफी हद तक सहमत हुआ जा सकता है, और पुस्तक के तथ्य इसका आधार देते हैं।
सहमति के तर्क:
1. आर्थिक सुधारों की शुरुआत के बाद से चीन सबसे ज़्यादा तेजी से आर्थिक वृद्धि कर रहा है और माना जाता है कि इस रफ़्तार से चलते हुए 2040 तक वह दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति, अमरीका से भी आगे निकल जाएगा।
2. चीन पूर्व एशिया के विकास का इंजन-जैसा बना हुआ है; उसकी विशाल आबादी, बड़ा भू-भाग, संसाधन, क्षेत्रीय अवस्थिति और राजनैतिक प्रभाव उसकी ताकत को कई गुना बढ़ा देते हैं।
3. पारस्परिक निर्भरता ने यह स्थिति बना दी है कि जापान, अमरीका, आसियान और रूस सभी व्यापार के आगे चीन से बाकी विवादों को भुला चुके हैं।
4. भारत और चीन दोनों ही खुद को विश्व-राजनीति की उभरती शक्ति मानते हैं और दोनों एशिया की अर्थव्यवस्था तथा राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहेंगे। वैश्विक धरातल पर दोनों ने विश्व व्यापार संगठन जैसे संगठनों में एक जैसी नीतियाँ अपनायी हैं।
5. 1999 से भारत-चीन व्यापार 30 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है और 1992 के 33 करोड़ 80 लाख डॉलर से बढ़कर 2017 में 84 अरब डॉलर हो चुका है, यानी दोनों की साझी ताकत बढ़ रही है।
सावधानी के बिंदु: चीन में बेरोजगारी बढ़ी है और 10 करोड़ लोग रोजगार की तलाश में हैं, पर्यावरण का नुकसान और भ्रष्टाचार बढ़े हैं तथा गाँव-शहर और तटीय-मुख्यभूमि के बीच आर्थिक फासला बढ़ रहा है। भारत और चीन के बीच सीमा-विवाद जैसे मुद्दे भी बने हुए हैं। इसलिए चुनौती की क्षमता तो है, पर वह अपने आप पूरी नहीं होगी।
प्र. मुल्कों की शांति और समृद्धि क्षेत्रीय आर्थिक संगठनों को बनाने और मजबूत करने पर टिकी है। इस कथन की पुष्टि करें।
उत्तर: इस अध्याय के दोनों बड़े उदाहरण इस कथन की पुष्टि करते हैं।
1. यूरोप: दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप के देशों ने पुरानी दुश्मनियाँ दोहराने के बजाय आर्थिक सहयोग का रास्ता चुना। 1948 के यूरोपीय आर्थिक सहयोग संगठन से 1957 की यूरोपीयन इकॉनामिक कम्युनिटी और 1992 के यूरोपीय संघ तक की यात्रा ने उसी महाद्वीप को समृद्ध और शांतिपूर्ण बना दिया जो दो विश्व युद्धों का केंद्र था। 2012 में यूरोपीय संघ को नोबेल शांति पुरस्कार भी मिला।
2. दक्षिण-पूर्व एशिया: यह इलाका उपनिवेशवाद, गरीबी और महाशक्तियों के दबाव से जूझ रहा था। 1967 में आसियान बनने के बाद यहाँ के कई देश दुनिया में सबसे तेज रफ़्तार से आर्थिक तरक्की करने वाले देशों में आ गए। आसियान ने कंबोडिया के टकराव को समाप्त किया और पूर्वी तिमोर के संकट को सम्भाला, यानी संगठन ने शांति भी दी और समृद्धि भी।
3. संकट में सहारा: 1997 के वित्तीय संकट के बाद आसियान देशों की अर्थव्यवस्था को टिकाए रखने में चीन के आर्थिक उभार ने काफी मदद की, जो दिखाता है कि क्षेत्रीय आर्थिक जुड़ाव मुश्किल वक़्त में ढाल का काम करता है।
4. व्यापार से टकराव कम: चीन की अर्थव्यवस्था के बाहरी दुनिया से जुड़ाव और पारस्परिक निर्भरता के कारण जापान, अमरीका, आसियान और रूस सभी व्यापार के आगे बाकी विवादों को भुला चुके हैं। आर्थिक हित शांति की सबसे मज़बूत वजह बन जाता है।
5. भारत के लिए भी: भारत ने मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड से मुक्त व्यापार समझौते किए और 2010 में आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र व्यवस्था लागू हुई, जिससे पूर्वी एशिया से उसके संबंध बेहतर हुए।
प्र. भारत और चीन के बीच विवाद के मामलों की पहचान करें और बताएँ कि वृहत्तर सहयोग के लिए इन्हें कैसे निपटाया जा सकता है। अपने सुझाव भी दीजिए।
उत्तर: विवाद के मामले:
1. सीमा विवाद: भारत और चीन अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों और लद्दाख के अक्साई-चिन क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धी दावों के चलते 1962 में लड़ पड़े थे, और सीमा-विवाद आज भी हाल की गिरावट का एक कारण है।
2. तिब्बत: 1950 में चीन द्वारा तिब्बत को हड़पने तथा भारत-चीन सीमा पर बस्तियाँ बनाने के फैसले से दोनों देशों के संबंध एकदम गड़बड़ हो गए थे।
3. पाकिस्तान का पहलू: पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम में चीन को मददगार माना जाता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा और संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद विरोधी भारतीय प्रस्ताव के विरुद्ध चीन द्वारा पाकिस्तान को समर्थन देना हाल की गिरावट के कारण हैं।
4. पड़ोस में सैनिक संबंध: बांग्लादेश और म्यांमार से चीन के सैनिक संबंधों को दक्षिण एशिया में भारतीय हितों के खिलाफ माना जाता है।
5. प्रतिस्पर्धा: विदेशों में ऊर्जा सौदे हासिल करने जैसे मसलों पर दोनों के बीच होड़ रही है।
निपटारे के सुझाव:
1. सीमा विवाद सुलझाने की बातचीत बिना रुकावट जारी रखी जाए; 1981 से शुरू हुई वार्ताओं की शृंखला इसी का रास्ता है।
2. सीमा पर शांति और यथास्थिति बनाए रखने के उपाय तथा सैन्य स्तर पर सहयोग का कार्यक्रम जारी रहे।
3. व्यापार और आर्थिक जुड़ाव बढ़ाया जाए, क्योंकि साझा आर्थिक हित टकराव को कम करता है; व्यापार के लिए सीमा पर चार पोस्ट खोलने जैसे कदम इसी दिशा में हैं।
4. सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़े, और नेताओं तथा अधिकारियों के आपसी दौरे जारी रहें, जिससे दोनों देश एक-दूसरे को करीब से समझें।
5. जिन मसलों से विभेद पैदा हो सकता है, जैसे विदेशों में ऊर्जा सौदा, उन पर होड़ के बजाय सहयोग किया जाए, और विश्व व्यापार संगठन जैसे मंचों पर एक जैसी नीति अपनाई जाए।
4 पाठगत प्रश्न (अध्याय के बीच में पूछे गए प्रश्न)
किताब अध्याय के हाशिये पर, कार्टूनों के नीचे और बॉक्सों में भी कुछ प्रश्न पूछती है और एक कक्षा-गतिविधि देती है। ये प्रश्नावली में नहीं हैं, पर इन्हीं विचारों को परखते हैं, इसलिए किताब के क्रम में हर एक का उत्तर यहाँ दिया गया है।
प्र. (कार्टून, 2003) कार्टूनिस्ट ने यूरोपीय संघ को टाइटैनिक ज़हाज के रूप में क्यों दिखाया है?
उत्तर: टाइटैनिक एक विशाल ज़हाज था जिसे डूब न सकने वाला माना जाता था, पर वह अपनी पहली ही यात्रा में डूब गया। यह कार्टून 2003 में बना, जब यूरोपीय संघ की साझा संविधान बनाने की कोशिश नाकामयाब रही। कार्टूनिस्ट कहना चाहता है कि एकीकरण की यह विशाल योजना एक ऐसी रुकावट से टकरा गई जिसे वह पार नहीं कर सकी। पुस्तक यह रुकावट भी बताती है: अनेक देशों के लोग अपनी सरकार की ताकत यूरोपीय संघ को देने के लिए उत्साहित नहीं हैं, यूरोप के कुछ हिस्सों में एकीकरण के कार्यक्रम को लेकर नाराज़गी है, और सदस्य देशों की अपनी विदेश और रक्षा नीतियाँ कई बार एक-दूसरे के खिलाफ होती हैं।
प्र. कल्पना कीजिए, क्या होता अगर पूरे यूरोपीय संघ की एक फुटबाल टीम होती?
उत्तर: यह राष्ट्रीय निष्ठा पर सोचने का खुला प्रश्न है। फुटबाल के प्रशंसक अपनी-अपनी राष्ट्रीय टीम का जोश से साथ देते हैं, इसलिए यूरोपीय संघ की एक ही टीम होने पर लोगों को अपने देश और यूरोप के बीच चुनना पड़ता, और बहुत-से लोग इसके लिए तैयार न होते; ठीक वैसे ही जैसे अनेक देशों के लोग अपनी सरकार की ताकत यूरोपीय संघ को देने के लिए उत्साहित नहीं हैं। यह मज़ाक दिखाता है कि अपना झंडा, गान, स्थापना-दिवस और मुद्रा होने के बावजूद यूरोपीय संघ एक राष्ट्र नहीं बन पाया और उसके साझा संविधान की कोशिश क्यों नाकामयाब रही।
प्र. दुनिया के नक़्शे पर एक नज़र डालें। आपके ख़्याल से कौन-से देश एशिया के दक्षिणी क्षेत्र में आने चाहिए?
उत्तर: पुस्तक का यह प्रश्न दक्षिण-पूर्व एशिया के बारे में है। इस क्षेत्र के वे दस देश जो आज आसियान के सदस्य हैं: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर और थाईलैंड (1967 के पाँच संस्थापक), तथा ब्रुनेई दारुस्सलाम, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया, जो बाद के वर्षों में शामिल हुए।
प्र. नक़्शे में आसियान के सचिवालय को दिखाएँ।
उत्तर: यह मानचित्र-कार्य है; इसके लिए अपनी पाठ्यपुस्तक में छपे पूर्व एशिया और पैसिफिक के मानचित्र का उपयोग कीजिए। आसियान का सचिवालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में है।
प्र. क्या भारत दक्षिण-पूर्व एशिया का हिस्सा नहीं है? भारत के पूर्वोत्तरी राज्य आसियान देशों के इतने निकट हैं।
उत्तर: भौगोलिक रूप से भारत दक्षिण एशिया का देश है, दक्षिण-पूर्व एशिया का नहीं, और वह आसियान का सदस्य भी नहीं है। पर हाशिये की बात सही है कि भारत के पूर्वोत्तरी राज्यों की सीमा आसियान के सदस्य म्यांमार से मिलती है, इसलिए आसियान से निकटता भारत के लिए बहुत मायने रखती है। इसीलिए भारत ने 1991 से लुक ईस्ट और 2014 से एक्ट ईस्ट नीति अपनायी, जिससे पूर्वी एशिया के देशों से आर्थिक संबंध बढ़े; मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड से मुक्त व्यापार का समझौता किया; और 2010 में आसियान-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र व्यवस्था लागू हुई।
प्र. आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) के सदस्य कौन हैं?
उत्तर: पुस्तक सदस्यों की सूची नहीं देती; वह सिर्फ़ इतना बताती है कि आसियान देशों की सुरक्षा और विदेश नीतियों में तालमेल बनाने के लिए 1994 में आसियान क्षेत्रीय मंच की स्थापना की गई। इसके सदस्य आसियान के दस देश और उसके संवाद-साझीदार तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य देश हैं, जिनमें भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ शामिल हैं। यह पुस्तक की इस बात से मेल खाता है कि आसियान एशिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्रीय संगठन है जो एशियाई देशों और विश्व शक्तियों को राजनैतिक तथा सुरक्षा मामलों पर चर्चा का मंच देता है।
प्र. आसियान सफल क्यों हुआ जबकि दक्षेस (सार्क) नहीं?
उत्तर: पुस्तक में आसियान के बारे में दी गई बातों के आधार पर:
1. आसियान ने ‘आसियान शैली’ अपनाई, यानी अनौपचारिक, टकरावरहित और सहयोगात्मक मेल-मिलाप, और राष्ट्रीय सार्वभौमिकता के सम्मान को सबसे ऊपर रखा; सदस्यों को अपनी ताकत किसी अधिराष्ट्रीय संस्था को नहीं सौंपनी पड़ी।
2. आसियान सुरक्षा समुदाय इस सहमति पर टिका है कि क्षेत्रीय विवाद सैनिक टकराव तक न जाएँ, और 2003 तक सदस्यों ने शांति, सहयोग और अहस्तक्षेप के कई समझौते किए। दक्षेस अपने सदस्यों, ख़ासकर भारत और पाकिस्तान, के राजनीतिक मतभेदों के कारण आगे नहीं बढ़ पाया।
3. आसियान बुनियादी रूप से एक आर्थिक संगठन था और ऐसा ही बना रहा, और इसके कई देश दुनिया में सबसे तेज़ आर्थिक तरक्की करने वालों में हैं, इसलिए आर्थिक फ़ायदे ने सदस्यों को जोड़े रखा।
4. आसियान टकराव की जगह बातचीत को बढ़ावा देता है और उसने कंबोडिया के टकराव को समाप्त किया तथा पूर्वी तिमोर के संकट को सम्भाला।
प्र. (चीन की दीवार और ड्रैगन वाला कार्टून) पहचानिए कि कार्टून में दिखाया गया एक छोटा-सा आदमी कौन हो सकता है? क्या वह ड्रैगन को रोक सकता है?
उत्तर: चीन की दीवार और ड्रैगन चीन के प्रतीक हैं और यहाँ ड्रैगन चीन के आर्थिक उभार को दिखाता है। उसे रोकने की कोशिश करता छोटा आदमी अमरीका, यानी अकेली महाशक्ति, या फिर बाकी दुनिया का प्रतीक है जो चीन के उभार से चिंतित है। वह ड्रैगन को नहीं रोक सकता: आर्थिक सुधारों की शुरुआत के बाद से चीन सबसे तेज़ी से वृद्धि करने वाली अर्थव्यवस्था है, माना जाता है कि 2040 तक वह अमरीका से भी आगे निकल जाएगा, वह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए दुनिया का सबसे आकर्षक देश है और पूर्व एशिया के विकास का इंजन बना हुआ है।
प्र. चीन में सिर्फ़ छह ही विशेष आर्थिक क्षेत्र हैं और भारत में ऐसे 200 से ज्यादा क्षेत्रों को मंजूरी! क्या यह भारत के लिए अच्छा है?
उत्तर: दोनों पक्ष हैं। पक्ष में: चीन में विशेष आर्थिक क्षेत्रों, जहाँ व्यापार संबंधी अवरोध हटाए गए और विदेशी निवेशक उद्यम लगा सकते हैं, से विदेश-व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और चीन प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए सबसे आकर्षक देश बना; भारत में भी ये क्षेत्र निवेश, निर्यात और रोज़गार ला सकते हैं। विपक्ष में: चीन ने यह सिर्फ़ छह बड़े क्षेत्रों से किया, जबकि भारत के 200 से ज़्यादा छोटे क्षेत्रों में निवेश बिखर सकता है, खेती की ज़मीन जा सकती है और कर-छूट का फ़ायदा उस पैमाने के बिना मिल सकता है जिसने चीन के क्षेत्रों को सफल बनाया। असली सवाल संख्या का नहीं, इस बात का है कि ये क्षेत्र सचमुच निवेश और रोज़गार पैदा करते हैं या नहीं।
प्र. (कार्टून ‘चीनी साइकिल’) कार्टून में साइकिल का इस्तेमाल आज के चीन के दोहरेपन को इंगित करने के लिए किया गया है। यह दोहरापन क्या है? क्या हम इसे अंतर्विरोध कह सकते हैं?
उत्तर: दोहरापन यह है कि चीन में राजनीतिक व्यवस्था एक ही दल (साम्यवादी पार्टी) के हाथ में है, जबकि अर्थव्यवस्था बाज़ारमूलक, यानी पूँजीवादी ढंग की हो गई है। पहला कार्टून चीन के रुख़ में बदलाव दिखाता है: ‘तब’ माओ के हाथ में उनकी ‘लाल किताब’ है और ‘अब’ राष्ट्रपति हू ने पूँजीवादी ‘लाल टाई’ पहन रखी है। दूसरे कार्टून में साइकिल, जो विश्व में सबसे ज़्यादा चीन में इस्तेमाल होती है, के एक पहिये पर साम्यवाद का हँसिया-हथौड़ा और दूसरे पर डॉलर का निशान है, और चीन दोनों पहियों के सहारे आगे बढ़ रहा है। इसे अंतर्विरोध कहा जा सकता है, क्योंकि साम्यवाद बाज़ार को समाप्त करना चाहता था। पर पुस्तक दिखाती है कि चीन ने इसे अपने ढंग से चलाया है: उसने शॉक थेरेपी के बजाय अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध ढंग से खोला और बाज़ारमूलक अर्थव्यवस्था की स्थापना में राज्य की केंद्रीय भूमिका बनी रही।
प्र. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2019 में भारत का दौरा किया। 2018 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन गए थे। इन दौरों में जिन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए उनके बारे में पता करें।
उत्तर: यह खोज-कार्य है और पुस्तक इसकी सूची नहीं देती। ये अनौपचारिक शिखर वार्ताएँ थीं, जो अप्रैल 2018 में वुहान और अक्टूबर 2019 में मामल्लपुरम (चेन्नई) में हुईं, और इनमें कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ। दोनों नेताओं ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और यथास्थिति बनाए रखने और व्यापार तथा लोगों के आपसी संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई। विस्तार के लिए विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्तियाँ देखिए।
प्र. कुछ लोग कहते हैं कि चीनी माल हमारे बाज़ार में भर जाएँगे? पर वे हैं कहाँ?
उत्तर: अपने घर और बाज़ार में देखिए: इलेक्ट्रॉनिक सामान, मोबाइल फ़ोन, खिलौने, त्योहारों की रोशनी और सजावट, और बहुत-सा घरेलू सामान चीन में बना होता है। यह उसी व्यापार का नतीजा है जिसका पुस्तक ज़िक्र करती है: 1999 से भारत-चीन व्यापार 30 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा है और 1992 के 33 करोड़ 80 लाख डॉलर से बढ़कर 2017 में 84 अरब डॉलर हो गया। चिंता यह है कि सस्ते आयात से भारतीय उद्योगों को नुकसान होता है; फ़ायदा यह है कि उपभोक्ताओं को सामान सस्ता मिलता है।
प्र. (जापान वाला बॉक्स) इन तथ्यों को ध्यान में रखकर अनुमान लगाइए कि वैकल्पिक शक्ति-केंद्र के रूप में जापान कितना प्रभावकारी होगा? हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय यात्राओं के दौरान हस्ताक्षर किए गए प्रमुख समझौतों के बारे में भी पता करें।
उत्तर: आर्थिक रूप से जापान काफी प्रभावकारी है: 2017 में उसकी अर्थव्यवस्था विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, एशिया के देशों में अकेला जापान ही समूह-7 में है, वह 1964 से आर्थिक सहयोग तथा विकास संगठन का सदस्य है, संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में 10 प्रतिशत का योगदान करता है और उसके ब्रांड उच्च प्रौद्योगिकी के लिए जाने जाते हैं। राजनीतिक और सैनिक रूप से वह सीमित है: 1951 से उसका अमरीका के साथ सुरक्षा-गठबंधन है और संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार जापान के लोग युद्ध का हमेशा के लिए त्याग करते हैं, हालाँकि सकल घरेलू उत्पाद का केवल 1 प्रतिशत होने पर भी उसका सैन्य व्यय विश्व में सातवें स्थान पर है। इसलिए जापान सैनिक शक्ति से ज़्यादा आर्थिक शक्ति के वैकल्पिक केंद्र के रूप में प्रभावकारी है। भारत के साथ समझौतों के लिए हाल के भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलनों के संयुक्त वक्तव्य देखिए।
प्र. (दक्षिण कोरिया वाला बॉक्स) हाल के दिनों में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच हस्ताक्षर किए गए प्रमुख समझौतों के बारे में पता करें।
उत्तर: यह खोज-कार्य है। पुस्तक का मुद्दा यह है कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच अनेक समझौते उनके बढ़ते वाणिज्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाते हैं, और सैमसंग, एलजी तथा हुंडई जैसे दक्षिण कोरियाई ब्रांड भारत में प्रसिद्ध हो गए हैं। सूची के लिए हाल की भारत-दक्षिण कोरिया शिखर यात्राओं के संयुक्त वक्तव्य देखिए।
प्र. अपनी कक्षा को तीन समूहों में बाँटो। हर समूह को यूरोपीय संघ, आसियान और दक्षेस जैसे संगठनों के बारे में जानकारियाँ जुटाने का जिम्मा सौंपें, जिनमें संगठन के उद्देश्य और कामकाज के बारे में सूचनाएँ भी हों, और हर समूह अपनी जानकारी कक्षा के सामने रखे।
कैसे करें: यह समूह-परियोजना है, इसलिए इसका कोई एक उत्तर नहीं है। यूरोपीय संघ और आसियान के उद्देश्य, कामकाज और उपलब्धियाँ इसी अध्याय में हैं (यूरोपीय एकीकरण का कालक्रम, आसियान के उद्देश्य और उसके तीन स्तम्भ)। दक्षेस के लिए इसी पुस्तक का अध्याय 3 देखिए। अंत में तुलना कीजिए कि कौन-सा संगठन कितना सफल रहा और क्यों।