NCERT की पुस्तक अंतराल भाग 2 के अध्याय 2 «बिस्कोहर की माटी» (विश्वनाथ त्रिपाठी) के प्रश्न-अभ्यास के सभी नौ प्रश्न और योग्यता-विस्तार की तीनों गतिविधियाँ, पुस्तक के अपने शब्दों में, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। पहले ख़ुद उत्तर सोचने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 कोइयाँ की विशेषताएँ
प्र. कोइयाँ किसे कहते हैं? उसकी विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
कोइयाँ वही जलपुष्प है जिसे कुमुद कहते हैं। इसे कोका-बेली भी कहते हैं। यह कमल से भी ज़्यादा बहार वाला फूल है। शरद में जहाँ भी गड्ढा हो और उसमें पानी हो, वहाँ कोइयाँ फूल उठती है। रेलवे-लाइन के दोनों ओर प्रायः गड्ढों में पानी भरा रहता है, और उत्तर भारत में इसे प्रायः सर्वत्र पाया जा सकता है। शरद की चाँदनी में सरोवरों में चाँदनी का प्रतिबिंब और खिली हुई कोइयाँ की पत्तियाँ एक हो जाती हैं। बिसनाथ बहुत दिनों समझते थे कि यह सिर्फ़ उनके यहाँ (“हमारे यहाँ”) का फूल है, पर वैष्णो देवी दर्शन के दौरान पंजाब में भी इसे रेलवे-लाइन के किनारे खिला देखकर यह भ्रम टूटा।
2 माँ का दूध पिलाना और जीवन-चरित
प्र. ‘बच्चे का माँ का दूध पीना सिर्फ़ दूध पीना नहीं, माँ से बच्चे के सारे संबंधों का जीवन-चरित होता है’, टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
लेखक के अनुसार, माँ अपने बच्चे को आँचल में छिपाकर दूध पिलाती है, और इस क्रिया में बच्चे का सुबुकना, रोना, माँ को मारना, माँ का भी कभी-कभी मारना, बच्चे का माँ से चिपटा रहना, माँ का चिपटाए रहना, बच्चे का माँ के पेट का स्पर्श और गंध भोगते रहना, यह सब कुछ शामिल होता है। इस तरह दूध पीना केवल शारीरिक ज़रूरत पूरी करना नहीं, बल्कि माँ और बच्चे के बीच के सारे भावनात्मक संबंधों, ममता, निर्भरता, आत्मीयता का जीता-जागता चित्रण होता है। लेखक यह भी कहते हैं कि पशु-माताएँ और पक्षी-अंडज भी यह सुख देती-पाती होंगी, यानी पाठ का अनुमान है कि पशुओं और पक्षियों में भी यह सुख होता होगा।
3 बिसनाथ पर अत्याचार
प्र. बिसनाथ पर क्या अत्याचार हो गया?
उत्तर:
बिसनाथ जब माँ का दूध पीने वाले ही थे कि तभी छोटा भाई आ गया। इस तरह बिसनाथ दूध कटहा हो गए, यानी उनका दूध कट गया। माँ के दूध पर छोटे भाई का कब्ज़ा हो गया, वह हुमक-हुमककर अम्माँ का दूध पीता और बिसनाथ को गाय का बेस्वाद दूध मिलता। इस तरह बिसनाथ माँ के दूध से वंचित हो गए, यही उन पर हुआ अत्याचार था। पड़ोस में रहने वाली कसेरिन दाई ने ही बिसनाथ को पाला-पोसा; साफ़-सफ़्फ़ाक सुजनी पर कसेरिन दाई के साथ लेटे तीन बरस के बिसनाथ चाँद को देखते रहते।
4 गरमी और लू से बचने के उपाय
प्र. गरमी और लू से बचने के उपायों का विवरण दीजिए। क्या आप भी उन उपायों से परिचित हैं?
उत्तर:
गरमी में लू लगने की घटनाएँ सुनाई पड़तीं। माँ लू से बचने के लिए धोती या कमीज़ में गाँठ लगाकर प्याज़ बाँध देती थीं। लू लगने की दवा थी कच्चे आम का पन्ना, इसे भूनकर गुड़ या चीनी में उसका शरबत पिया जाता, देह में लेपा जाता, इससे नहाया जाता; कच्चे आम को भून या उबालकर उससे सिर धोते थे। (प्रश्न का दूसरा भाग विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर लिखें, कि वे इनमें से किन उपायों से परिचित हैं।)
5 माँ और बत्तख की तुलना के आधार
प्र. लेखक बिसनाथ ने किन आधारों पर अपनी माँ की तुलना बत्तख से की है?
उत्तर:
दिलशाद गार्डन के डियर पार्क में बत्तखें होती थीं। बत्तख अंडा देने को होती तो पानी छोड़कर ज़मीन पर, एक सुरक्षित काँटेदार बाड़े में आ जाती। वह बड़ी सतर्कता और कोमलता से अपने डैनों के अंदर अंडों को छिपाकर दुनिया से बचाती, कौवे से भी सावधान रहती। कभी-कभी कुछ अंडे बाहर छिटक जाते, तो वह उन्हें फिर उतनी ही सतर्कता से समेट लेती। इसी सतर्कता, कोमलता और ममता के आधार पर लेखक बिसनाथ की माँ और बत्तख की माँ की तुलना करते हैं। पाठ पूछता है, “किसने दी बिसनाथ की माँ और बत्तख की माँ को इतनी ममता?” और उत्तर देता है, “जैसे पानी बहता है, हवा चलती है, वैसे ही माँ में बच्चे की ममता”।
6 बिस्कोहर की बरसात का वर्णन
प्र. बिस्कोहर में हुई बरसात का जो वर्णन बिसनाथ ने किया है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
वर्षा कभी सीधे एकाएक नहीं आती थी। पहले बादल घिरते, गड़गड़ाहट होती, पूरा आकाश बादलों से घिर जाता कि दिन में रात हो जाती। वर्षा में सबसे ज़्यादा संगीत होता है, तबला, मृदंग और सितार का। पहली वर्षा में नहाने से दाद-खाज, फोड़ा-फुँसी ठीक हो जाते, पर कभी-कभी मछलियाँ ‘माँजा’ (फेन) लगने से मर भी जातीं। जोंक, केंचुआ, मच्छर जैसे कीड़े-मकोड़ों की भी बहुतायत हो जाती। बाढ़ आने पर गंदगी, कीचड़, बदबू और गीली लकड़ी के धुएँ की तकलीफ़ होती, पर बरसात के बाद बिस्कोहर की धरती, सिवान, आकाश और तालाब निखर उठते, धान-भुट्टे-चरी के पौधे झूमने लगते। शरद में तालाब में शैवाल (सेवार) होता और नीला जल आकाश का प्रतिबिंब देता।
7 फूल: गंध के साथ-साथ दवा भी
प्र. ‘फूल केवल गंध ही नहीं देते दवा भी करते हैं’, कैसे?
उत्तर:
पाठ में बताया गया है कि नीम के फूल और पत्ते चेचक में रोगी के पास रख दिए जाते थे। बेर का फूल सूँघने से बर्रे-ततैया का डंक झड़ जाता था। भरभंडा (जिसे “शायद सत्यानाशी” कहते हैं) का दूध आँख आने पर माँ आँख में लगाती थीं, और लू की दवा कच्चे आम का पन्ना था। इस तरह गाँव में शहरी दवाइयों की जगह प्रकृति से मिले इन फूल-पत्तों का घरेलू इलाज के रूप में उपयोग किया जाता था, जो दिखाता है कि फूल केवल सुगंध ही नहीं देते, बल्कि रोग-निवारण में भी सहायक होते हैं।
8 प्रकृति, नारी और सौंदर्य की मान्यताएँ
प्र. ‘प्रकृति सजीव नारी बन गई’, इस कथन के संदर्भ में लेखक की प्रकृति, नारी और सौंदर्य संबंधी मान्यताएँ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
बिसनाथ ने पहली बार बढ़नी में एक रिश्तेदार के यहाँ एक स्त्री को देखा, जो उम्र में उनसे काफ़ी बड़ी थी (लेखक का अनुमान: “ताज्जुब नहीं दस बरस कम हो”)। बिस्कोहर में उन दिनों बिसनाथ संतोषी भइया के घर बहुत जाते थे, जिनके आँगन में जूही लगी थी; “उसकी खुशबू प्राणों में बसी रहती थी”। चाँदनी रात में जूही की यह ख़ुशबू और चाँदनी उस स्त्री की स्मृति से इस तरह घुलमिल गई कि चाँदनी, फूल, ख़ुशबू और वह स्त्री सब एक-दूसरे में समा गए। वह स्त्री बिसनाथ को स्त्री के रूप में नहीं, बल्कि जूही की लता बनकर, चाँदनी के रूप में दिखाई देने लगी। इस तरह लेखक के लिए प्रकृति और नारी दोनों एक-दूसरे में घुल-मिल गए: “प्रकृति सजीव नारी बन गई थी और बिसनाथ उसमें आकाश, चाँदनी, सुगंधि सब देख रहे थे।” सौंदर्य के बारे में लेखक कहते हैं, “सौंदर्य क्या होता है, तदाकार परिणति क्या होती है? जीवन की सार्थकता क्या होती है; यह सब बाद में सुना, समझा, सीखा सब उसी के संदर्भ में।” नारी के बारे में उनकी मान्यता है कि नारी-शरीर से उन्हें बिस्कोहर की ही फसलों, वनस्पतियों की उत्कट गंध आती है; पर “फूले हुए नीम की गंध को नारी-शरीर या शृंगार से कभी नहीं जोड़ सकते”।
9 स्मृति और मृत्यु का बोध
प्र. ऐसी कौन सी स्मृति है जिसके साथ लेखक को मृत्यु का बोध अजीब तौर पर जुड़ा मिलता है?
उत्तर:
यह उस स्त्री की स्मृति है जिसे बिसनाथ ने पहली बार बढ़नी में देखा था, जब वे दस से ज़्यादा के नहीं थे, और जिसमें उन्हें “प्रकृति सजीव नारी” बनी दिखी थी। पाठ के अंत में लेखक बताते हैं कि बड़े गुलाम अली खाँ साहब की पहाड़ी ठुमरी “अब तो आओ साजन” अकेले में सुनें या याद करें तो रुलाई आती है और वही औरत इसमें व्याकुल नज़र आती है: सफ़ेद रंग की साड़ी पहने, घने काले केश सँवारे, आँखों में आर्द्र व्यथा लिए, वह सिर्फ़ इंतज़ार करती है। “अप्राप्ति की कितनी और कैसी प्राप्तियाँ होती हैं!” हर कला-रूप के आस्वाद में वह मौजूद है। इसी स्मृति के बाद अंतिम पंक्ति आती है: “इस स्मृति के साथ मृत्यु का बोध अजीब तौर पर जुड़ा हुआ है।” वह नारी मिली भी, बिसनाथ आजीवन उससे शरमाते रहे और उसकी शादी बिस्कोहर में ही हुई। स्मृति में व्याकुल प्रतीक्षा करती उसी स्त्री के साथ लेखक को मृत्यु का बोध अजीब तौर पर जुड़ा मिलता है।
10 योग्यता-विस्तार
प्र. पाठ में आए फूलों के नाम, साँपों के नाम छाँटिए और उनके रूप, रंग, विशेषताओं के बारे में लिखिए।
उत्तर: फूल: कमल (पत्र को पुरइन, नाल को भसीण, बीज कमल गट्टा), कोइयाँ (कुमुद, कोका-बेली; शरद में पानी भरे गड्ढों में), सिंघाड़े के उजले गंधवाले फूल, हरसिंगार (शरद में; मालिन दाई इसकी राशि दरवाज़े पर रख जाती थीं), और वे असली फूल जिनकी चर्चा फूलों के रूप में नहीं होती: तोरी, लौकी, भिंडी, भटकटैया, इमली, अमरूद, कदंब, बैंगन, कोंहड़ा, शरीफ़ा, आम के बौर, कटहल, बेल, अरहर, उड़द, चना, मसूर, मटर के फूल, सेमल के फूल; सरसों के फूल का पीला सागर; धान, गेहूँ, जौ के फूल (ज़ीरे की शक्ल में), भुट्टे का फूल; दूबों के अनेक वर्णी छोटे फूल; भरभंडा (पीली तितली जैसा फूल), गुड़हल (देवी का फूल), नीम और बेर के फूल, जूही (संतोषी भइया के आँगन में)। साँप: डोंड़हा और मजगिदवा (विषहीन; डोंड़हा को वामन जाति का मानकर मारा नहीं जाता), धामिन (विषहीन पर लंबी; मुँह से कुश पकड़कर पूँछ से मार दे तो अंग सड़ जाए), गोंहुअन, जिसे लेखक के गाँव में “फेंटारा” कहते थे (सबसे खतरनाक), घोर कड़ाइच (काटने पर आदमी घोड़े की तरह हिनहिनाकर मरे), भटिहा (दो मुँह वाला)। रूप-रंग की अतिरिक्त जानकारी विद्यार्थी स्वयं खोजकर जोड़ें।
प्र. इस पाठ से गाँव के बारे में आपको क्या-क्या जानकारियाँ मिलीं? लिखिए।
उत्तर: गाँव शहर की तरह सुविधायुक्त नहीं होते, प्रकृति पर अधिक निर्भर रहते हैं। पाठ से ये जानकारियाँ मिलती हैं: भोज में कमल-पत्र (पुरइन) पर भोजन परोसा जाता; अकाल में कमल-ककड़ी (भसीण) खाई जाती; तरह-तरह के फूल, साँप, बिच्छू; फूल-पत्तों से घरेलू इलाज (नीम, बेर, भरभंडा, कच्चे आम का पन्ना); लू से बचने को धोती-कमीज़ में प्याज़ बाँधना; वर्षा का संगीत, बाढ़ की तकलीफ़ें, दिसा-मैदान की कठिनाई, गीले कंडों का धुआँ; खेतों की सिंचाई के लिए ‘बरहा’ नालियाँ; गाँव की बोली (“रख जाती थीं” के लिए ‘कुरइ जात रहीं’)। इनके साथ अपने देखे गाँव की बातें भी जोड़ें।
प्र. वर्तमान समय-समाज में माताएँ नवजात शिशु को दूध नहीं पिलाना चाहतीं। आपके विचार से माँ और बच्चे पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है?
उत्तर: (यह विचार-आधारित प्रश्न है, अपने तर्क के साथ उत्तर लिखें।) पाठ के अनुसार बच्चे का माँ का दूध पीना सिर्फ़ दूध पीना नहीं, माँ से बच्चे के सारे संबंधों का जीवन-चरित होता है: बच्चा सुबुकता है, चिपटा रहता है, माँ के स्पर्श और गंध को भोगता है। माँ का दूध न मिलने से बच्चा इस आत्मीय जुड़ाव से वंचित रह जाता है। पाठ कहता है, ‘माँ के अंक से लिपटकर माँ का दूध पीना, जड़ के चेतन होने यानी मानव-जन्म लेने की सार्थकता है।’ दूध न पिलाने पर माँ और बच्चे, दोनों का यह सुख छूट जाता है। (स्वास्थ्य से जुड़े तर्क विद्यार्थी अपने विचार के रूप में जोड़ सकते हैं; पाठ स्वास्थ्य की बात नहीं करता।)
प्रश्न 6, 8 और 9 के उत्तर पाठ के मूल भाव (प्रकृति-चित्रण, नारी-स्मृति, मृत्यु-बोध) से जुड़े हैं।