परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: कृति-परिचय, मुख्य बिंदुओं की तालिकाएँ, याद रखने लायक़ उद्धरण और सारे शब्दार्थ एक जगह। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 कृति एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| पाठ | बिस्कोहर की माटी |
| लेखक | विश्वनाथ त्रिपाठी |
| स्रोत आत्मकथा | नंगातलाई का गाँव |
| पुस्तक | अंतराल भाग 2, पाठ 2 |
| कथा-सूत्र (लेखक स्वयं) | बिसनाथ (पाठ में लेखक का ही पात्र-नाम, बचपन और वयस्क दोनों रूपों में) |
| गाँव | बिस्कोहर |
2 मुख्य विषय, संक्षेप में
| विषय | मुख्य बिंदु |
|---|---|
| कमल | पुरइन (पत्र), भसीण (नाल), कमल गट्टा (बीज); लेंवडी का ताल |
| कोइयाँ | कुमुद/कोका-बेली; पंजाब में भी मिलती है |
| असली फूल | तोरी, लौकी, भिंडी, अरहर, कदंब, सेमल आदि: “ऐसे कितने फूल थे जिनकी चर्चा फूलों के रूप में नहीं होती, और हैं वे असली फूल”; कमल, कोइयाँ, हरसिंगार “फूल कहे जाते हैं” |
| साँप | डोंड़हा, मजगिदवा, धामिन (विषहीन); गोंहुअन (गाँव में “फेंटारा”), घोर कड़ाइच (ख़तरनाक); भटिहा (दो मुँह); भय भी और “डर से ही सही उनकी प्रतीक्षा” भी; सरसराते साँप को देखना “भयानक रस”; बिच्छू के काटे से दर्द, मृत्यु नहीं |
| गर्मी-लू | बचाव: धोती/कमीज़ में प्याज़ बाँधना; लू लगने की दवा: कच्चे आम का पन्ना |
| वर्षा | बादल-गड़गड़ाहट, संगीत जैसी बारिश, कभी-कभी माँजा से मछली मरना |
| स्मृति 1 | चाँदनी और उम्र में काफ़ी बड़ी एक स्त्री (“ताज्जुब नहीं दस बरस कम हो”); “वह नारी मिली भी”; प्रकृति सजीव नारी बन गई; सफ़ेद साड़ी में इंतज़ार करती वही स्त्री ठुमरी “अब तो आओ साजन” में; अंत में इसी स्मृति के साथ मृत्यु का बोध |
| स्मृति 2 | माँ और बत्तख की ममता; हज़ारीप्रसाद द्विवेदी का प्रश्न और “बुश-ब्लेयर” वाली टिप्पणी |
| दूध कटहा | छोटा भाई आया, बिसनाथ “दूध कटहा” हो गए (गाय का बेस्वाद दूध); कसेरिन दाई ने पाला-पोसा; सुजनी पर लेटे तीन बरस के बिसनाथ चाँद को देखते रहते |
3 याद रखने लायक़ उद्धरण
“प्रकृति सजीव नारी बन गई थी।”
चाँदनी, फूल और उस स्त्री की स्मृति के घुलमिल जाने पर
“क्या यह सब बिना किसी प्रयोजन के है? बिना किसी उद्देश्य के है?”
गुरुवर हज़ारीप्रसाद द्विवेदी का प्रश्न, माँ-बत्तख की ममता के संदर्भ में
“इस स्मृति के साथ मृत्यु का बोध अजीब तौर पर जुड़ा हुआ है।”
पाठ की अंतिम पंक्ति
4 मूल भाव, संक्षेप में
1प्रकृति-मनुष्य का गहरा नाता
2स्मृति और आत्मकथा
3ममता का सार्वभौमिक रूप
5 सारे शब्दार्थ एक जगह
सभी शब्दार्थ एक जगह
भसीणकमलनाल, कमल का तना
कुमुदजलपुष्प, कुइयाँ, कोकाबेली
सिंघाड़ाजलफल, काँटेदार फल जो पानी में होता है
बतियाफल का अविकसित रूप
प्रयोजनउद्देश्य
कथरीबिछौना
साफ़-सफ़्फ़ाकसाफ़ और स्वच्छ
इफ़रातअधिकता
भीटोंटीले, ढूह
बरहाखेतों की सिंचाई के लिए बनाई गई नाली
सुबुकनाधीमे स्वर में रोना
आँख आनागरमियों के मौसम में आँख का रोग होना
थिरकनानाचना
अगाधभरपूर
आर्द्रनमी
परीक्षा से एक रात पहले
- कृति-परिचय (आत्मकथा, लेखक, बिसनाथ) दोहरा लें
- छह साँपों के नाम और उनका ख़तरा-स्तर याद कर लें
- तीनों याद रखने लायक़ उद्धरण शब्दशः दोहरा लें
- शब्दार्थ में से कम से कम दस शब्द बिना देखे बताने की कोशिश करें
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