कक्षा 12 समाजशास्त्र अध्याय 6, सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ, का त्वरित रिवीज़न कट।
इसमें सिर्फ काम की बात है: हर परिभाषा, हर नामित उदाहरण और CBSE में इस अध्याय के अंक। पहले पूरे नोट्स पढ़ें;
इसे परीक्षा वाली सुबह पढ़ें।
1 यह अध्याय कहाँ मायने रखता है
| बोर्ड | यह अध्याय |
|---|---|
| CBSE | 10 अंक (इकाई 6, भाग A भारतीय समाज; सैद्धांतिक पेपर 80 + परियोजना 20) |
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2 सभी परिभाषाएँ
हर परिभाषा एक जगह
सांस्कृतिक विविधताभाषा, धर्म, पंथ, प्रजाति या जाति जैसे चिह्नों से परिभाषित अनेक सामाजिक समूह/समुदाय। “विविधता” का अर्थ अंतर है, असमानता नहीं
सामुदायिक पहचानजन्म और अपनेपन पर आधारित प्रदत्त पहचान, अर्जित उपलब्धि पर नहीं
राज्यएक अमूर्त सत्व: किसी क्षेत्र और उसकी जनता पर नियंत्रण का दावा करने वाली राजनीतिक-विधिक संस्थाएँ (वेबर: विधिसम्मत एकाधिकार)
राष्ट्र-राज्यवह राष्ट्र जिसने अपना राज्य पाने में सफलता पाई हो
आत्मसात्करणसभी नागरिकों को एक समान सांस्कृतिक मूल्य और मानक (आमतौर पर प्रभावशाली समूह के) अपनाने के लिए राज़ी, प्रोत्साहित या मजबूर करना; समूहों के बीच की सांस्कृतिक विभिन्नताओं को मिटाने की कोशिश
एकीकरणकेवल सार्वजनिक संस्कृति को एक राष्ट्रीय स्वरूप तक सीमित रखना, निजी क्षेत्र में अन्य संस्कृतियों को रहने देना
क्षेत्रवादभाषाओं, संस्कृतियों, जनजातियों और धर्मों की विविधता के कारण पाया जाता है; भौगोलिक संकेंद्रण से प्रोत्साहन और क्षेत्रीय वंचन के भाव से बल मिलता है
अल्पसंख्यककेवल संख्या नहीं: इसमें आमतौर पर हानि का कुछ भाव निहित है, और सदस्य एक सामूहिकता बनाते हैं
सांप्रदायिकताधर्म से जुड़ी आक्रामक राजनीतिक विचारधारा, राजनीति से जुड़ी, व्यक्तिगत आस्था से नहीं
धर्मनिरपेक्षता (भारतीय अर्थ)राज्य द्वारा सभी धर्मों का समान सम्मान, अलगाव या द्वेष नहीं
सत्तावादी राज्यवह राज्य जहाँ जनता की आवाज़ नहीं सुनी जाती और सत्ताधारी किसी के प्रति उत्तरदायी नहीं होते
नागरिक समाजपरिवार, राज्य और बाज़ार से परे स्वैच्छिक संगठन, सार्वजनिक मुद्दों पर सक्रिय; राज्य-नियंत्रित नहीं, विशुद्ध वाणिज्यिक नहीं
3 नामित तथ्य और आँकड़े एक नज़र में
| तथ्य / घटना | यह क्या दिखाता है |
|---|---|
| भारत, 2011 की जनगणना | 121 करोड़ लोग, ~1,632 भाषाएँ/बोलियाँ, आठवीं अनुसूची में 22 |
| धर्म, 2011 की जनगणना | हिंदू 80%, मुसलमान 14.2%, ईसाई 2.3%, सिख 1.7%, बौद्ध 0.7%, जैन 0.4% |
| पोट्टि श्रीरामुलु | अक्टूबर 1952 में आमरण अनशन, दिसंबर 1952 में मृत्यु → बलिदान से हिंसक विरोध → आंध्र प्रदेश राज्य की स्थापना, और इसके अलावा राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना |
| राज्य पुनर्गठन आयोग | रिपोर्ट 1 नवंबर 1956 को कार्यान्वित: भाषायी राज्यों पर अंतिम मुहर |
| श्रीलंका, 1956 | सिंहली एकमात्र राजभाषा घोषित; 1983 से गृहयुद्ध |
| पाकिस्तान, 1971 | विभाजित: पंजाबी/उर्दू (पश्चिम) बनाम बंगाली भावनाएँ (पूर्व) |
| छत्तीसगढ़, उत्तरांचल, झारखंड (2000) | जनजातीय पहचान, भाषा, क्षेत्रीय वंचन और पारिस्थितिकी पर आधारित नृजातीयता ने मिलकर आधार बनाया; भाषा की कोई प्रमुख भूमिका नहीं थी |
| 28 राज्य, 8 संघ राज्यक्षेत्र | पुस्तक का अपना वर्तमान आँकड़ा |
| डॉ. भीमराव अंबेडकर (1891-1956) | संविधान के प्रमुख शिल्पकार; अल्पसंख्यक संरक्षण पर संविधान सभा में भाषण (बॉक्स 6.6) |
| अनुच्छेद 29 और 30 | अनुच्छेद 29(1): नागरिकों के किसी भी अनुभाग को अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति बनाए रखने का अधिकार; 29(2): राज्य-पोषित या राज्य-सहायता प्राप्त शिक्षा संस्था में प्रवेश से केवल धर्म, मूलवंश, जाति या भाषा के आधार पर वंचित नहीं किया जाएगा; 30(1): धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक-वर्गों को शिक्षा संस्थाएँ स्थापित और प्रशासित करने का अधिकार |
| सूचनाधिकार अधिनियम, 2005 | 15 जून 2005 को पारित, 13 अक्तूबर 2005 से लागू; सरकारी गुप्त अधिनियम, 1923 को निरस्त करता है |
परीक्षा टिप
पुस्तक के मूल पाठ में एक जगह “बॉक्स 6.8” लिखा है, जहाँ बात असल में बॉक्स 6.7 (संविधान के
अनुच्छेद 29-30) की हो रही है। अगर कोई प्रश्न किसी बॉक्स का नंबर पूछे, तो हमेशा बॉक्स के अपने छपे
नंबर से उत्तर दें: 6.6 = अंबेडकर का भाषण, 6.7 = अनुच्छेद 29-30, 6.8 = कबीर का दोहा।
4 आत्मसात्करण बनाम एकीकरण, संक्षेप में
4.1 एक पहचान बनाने के राज्यों के दो तरीके
आत्मसात्करण
- सभी नागरिकों को एक समान संस्कृति अपनाने के लिए राज़ी, प्रोत्साहित या मजबूर किया जाता है; अक्सर समूहों की पहचानें दबाई जाती हैं
- आमतौर पर संपूर्ण रूप से या अधिकांशतः प्रभावशाली समूह के मूल्य और मानक
एकीकरण
- केवल सार्वजनिक संस्कृति को एक राष्ट्रीय स्वरूप तक सीमित रखा जाता है
- अन्य संस्कृतियों को निजी क्षेत्र में बने रहने दिया जाता है
भारत पूरी तरह से कोई भी मॉडल नहीं अपनाता: यह स्पष्ट रूप से धर्मनिरपेक्ष है, पर
सार्वजनिक जीवन से धर्म या भाषा को बाहर नहीं करता।
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- विविधता ≠ असमानता; प्रतिस्पर्धा, असमानता या दुर्लभ संसाधनों से जुड़ने पर यह चुनौती बनती है
- सामुदायिक पहचान प्रदत्त है: जन्म से मिलती है, अर्जित नहीं, फिर भी पूर्ण
- राज्य = विशेष क्षेत्र में विधिसम्मत एकाधिकार का सफल दावा करने वाला निकाय (वेबर); राष्ट्र-राज्य = अपना राज्य पाने वाला राष्ट्र: यह एक-एक का जोड़ा हाल का विकास है, सार्वभौमिक नहीं
- राज्य विविधता को आत्मसात्करण या एकीकरण से संभालते हैं; दोनों में प्रभावशाली संस्कृति ही “राष्ट्रीय” बनने का खतरा रहता है
- भाषायी राज्यों (SRC 1956, पोट्टि श्रीरामुलु → आंध्र प्रदेश) ने भारतीय एकता मज़बूत की, श्रीलंका (1956) और पाकिस्तान (1971) के विपरीत
- अल्पसंख्यक = (आमतौर पर) हानि + सामूहिकता, केवल छोटी संख्या नहीं; अंबेडकर और अनुच्छेद 29-30 अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा करते हैं
- सांप्रदायिकता = धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल; धर्मनिरपेक्षता (भारतीय अर्थ) = सभी धर्मों का समान सम्मान, अल्पसंख्यक संरक्षण से असली तनाव में (“तुष्टीकरण” की बहस)
- नागरिक समाज राज्य को जवाबदेह रखता है: सूचनाधिकार अधिनियम, 2005 पुस्तक का अपना उदाहरण है
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