अंतर्राष्ट्रीय संगठन

संयुक्त राष्ट्रसंघसुरक्षा परिषद्वीटोमहासचिवसंयुक्त राष्ट्रसंघ सुधारIMFविश्व बैंकWTO

1 अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय संगठन कोई शक्तिशाली राज्य नहीं होता जिसकी अपने सदस्यों पर धौंस चलती हो: यह राज्यों द्वारा बनाया जाता है और उन्हीं के प्रति जवाबदेह होता है। इसका महत्व दो तरह से है: कुछ समस्याएँ (जैसे बीमारी, ग्लोबल वार्मिंग) तभी हल हो सकती हैं जब सभी मिलकर सहयोग करें; और संघर्षरत देश युद्ध का सहारा लिए बिना बातचीत से मतभेद सुलझाने के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। वास्तव में अधिकांश संघर्ष युद्ध के बिना ही सुलझ जाते हैं, और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की इसमें एक महत्वपूर्ण, यद्यपि कम चर्चित, भूमिका होती है।

2 संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना कैसे हुई

संयुक्त राष्ट्रसंघ से पहले ‘लीग ऑव नेशंस’ (League of Nations) था, जो प्रथम विश्वयुद्ध के बाद बना। इसे शुरुआती सफलता तो मिली, पर यह द्वितीय विश्वयुद्ध (1939–45) को नहीं रोक सका, जिसमें पहले से कहीं अधिक लोग मारे गए और घायल हुए। संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना उसी युद्ध के तुरंत बाद, उसके उत्तराधिकारी के रूप में हुई।

1941, अगस्तअमरीकी राष्ट्रपति रूज़वेल्ट और ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल द्वारा अटलांटिक चार्टर पर हस्ताक्षर
1942, जनवरीधुरी शक्तियों के ख़िलाफ़ लड़ रहे 26 मित्र-राष्ट्र अटलांटिक चार्टर के समर्थन में वाशिंग्टन में मिले
1943, दिसंबरसंयुक्त राष्ट्रसंघ की घोषणा पर हस्ताक्षर हुए
1945, फ़रवरीयाल्टा सम्मेलन: ‘बिग थ्री’ ने संयुक्त राष्ट्रसंघ सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया
1945, अप्रैल–मईअंतर्राष्ट्रीय संगठन पर सेन फ्रांसिस्को सम्मेलन
1945, 26 जून50 देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्रसंघ चार्टर पर हस्ताक्षर; पोलैंड ने बाद में हस्ताक्षर किए: कुल 51 संस्थापक सदस्य
1945, 24 अक्तूबरसंयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना: हर वर्ष इसी दिन ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ दिवस’ मनाया जाता है
1945, 30 अक्तूबरभारत संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल हुआ
परीक्षा संकेत

2011 तक संयुक्त राष्ट्रसंघ के 193 सदस्य देश थे: यानी दुनिया के लगभग सभी स्वतंत्र देश।

3 संयुक्त राष्ट्रसंघ की संरचना

याद रखेंपरिभाषा 1

आम सभा (General Assembly) संयुक्त राष्ट्रसंघ का वह अंग है जिसमें हर सदस्य देश को एक-एक वोट मिलता है। सुरक्षा परिषद् (Security Council) युद्ध, शांति और सुरक्षा से जुड़े मामले देखती है: इसके 5 स्थायी सदस्य हैं (अमरीका, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे शक्तिशाली और विजयी देशों के रूप में चुने गए) और 10 अस्थायी सदस्य, जो दो-दो वर्ष के लिए निर्वाचित होते हैं।

याद रखेंपरिभाषा 2

निषेधाधिकार यानी वीटो (Veto Power) केवल पाँच स्थायी सदस्यों के पास है। यदि इनमें से कोई एक भी नकारात्मक वोट डाले, तो सुरक्षा परिषद् का प्रस्ताव रुक जाता है: चाहे बाक़ी सभी सदस्यों ने पक्ष में मतदान क्यों न किया हो।

संयुक्त राष्ट्रसंघ का सबसे सार्वजनिक चेहरा उसका महासचिव (Secretary-General) होता है, जो संगठन का प्रतिनिधि प्रमुख है।

महासचिव देश कार्यकाल किसके लिए जाने गए
ट्राइग्व ली नॉर्वे 1946–52 कश्मीर पर भारत–पाकिस्तान संघर्ष-विराम
डेग हैमरशोल्ड स्वीडन 1953–61 स्वेज़ नहर विवाद; अफ्रीका के उपनिवेशीकरण की समाप्ति
यू थांट म्यांमार 1961–71 क्यूबा मिसाइल संकट; साइप्रस में शांति सेना की स्थापना
कुर्त वाल्डहीम ऑस्ट्रिया 1972–81 नामीबिया और लेबनान; बांग्लादेश राहत कार्य
जेवियर पेरेज द कूइयार पेरू 1982–91 साइप्रस, अफ़ग़ानिस्तान, अल साल्वाडोर; फ़ॉकलैंड मध्यस्थता
बुतरस बुतरस घाली मिस्र 1992–96 ‘एन एजेंडा फ़ॉर पीस’ रिपोर्ट
कोफी ए. अन्नान घाना 1997–2006 एड्स/टीबी/मलेरिया के विरुद्ध ग्लोबल फ़ंड; 2001 नोबेल शांति पुरस्कार
बान की मून दक्षिण कोरिया 2007–16 जलवायु परिवर्तन; सहस्राब्दि/सतत विकास लक्ष्य
एंटोनियो गुटेरेस पुर्तगाल 2017–अब तक नौवें महासचिव; पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री; पूर्व संयुक्त राष्ट्रसंघ शरणार्थी उच्चायुक्त

संयुक्त राष्ट्रसंघ के छह प्रमुख अंग हैं, जो पुस्तक के ‘संयुक्त राष्ट्रसंघ की संरचना’ चार्ट में दिखाए गए हैं:

प्रमुख अंग संरचना (चार्ट के अनुसार) काम
आम सभा 193 सदस्यों के प्रतिनिधि, सभी को एकसमान मत। प्रमुख निर्णयों के लिए दो-तिहाई और बाकी में सामान्य बहुमत की ज़रूरत; निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी नहीं वैश्विक मामलों पर बहस-मुबाहिसा
सुरक्षा-परिषद् 15 सदस्य: पाँच स्थायी सदस्यों (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमरीका) को वीटो (निषेधाधिकार) का अधिकार; दस अस्थायी सदस्यों का चुनाव आम सभा द्वारा दो वर्षों के लिए; निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का संरक्षण
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय 15 न्यायाधीशों का चुनाव 9 वर्षों के लिए आम सभा और सुरक्षा-परिषद् दोनों में पूर्ण बहुमत द्वारा; मुख्यालय हेग में सदस्य देशों के बीच मौजूद विवादों का निपटारा
सचिवालय अन्य प्रमुख अंगों के कार्यों के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्टाफ़; इसका प्रधान महासचिव होता है, जिसकी नियुक्ति सुरक्षा-परिषद् की सलाह पर आम सभा पाँच सालों के लिए करती है संयुक्त राष्ट्रसंघ के मामलों का समायोजन और प्रशासन
आर्थिक और सामाजिक परिषद् सदस्य देशों का चुनाव आम सभा द्वारा तीन वर्षों के लिए; सभी भौगोलिक क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देते हुए 54 सदस्य सदस्य देशों के आर्थिक और सामाजिक कल्याण की चिंता
न्यासिता परिषद् अंतिम ‘ट्रस्ट टेरीटरी’ पलाउ के आज़ाद होने के साथ 1 नवम्बर 1994 से यह परिषद् स्थगित (इसे समाप्त करने पर सहमति 2005 के सुधारों में से एक थी)

इनके अलावा सामाजिक और आर्थिक मुद्दे WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन), UNDP (विकास कार्यक्रम), UNHRC (मानवाधिकार आयोग), UNHCR (शरणार्थी), UNICEF (बाल कोष) और UNESCO (शिक्षा, विज्ञान व संस्कृति) जैसी एजेंसियाँ देखती हैं। चार्ट में संयुक्त राष्ट्रसंघ की विशेष एजेंसियाँ भी दिखाई गई हैं, जैसे अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), खाद्य एवं कृषि संगठन, UNESCO, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा-कोष।

4 शीत युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्रसंघ में सुधार

1945 में जिस शीत-युद्धकालीन दुनिया के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ बना था, वह अब नहीं रही: सोवियत संघ का विघटन हो चुका है, अमरीका सबसे शक्तिशाली देश है, चीन और भारत का उदय हो रहा है, और नई चुनौतियाँ (जनसंहार, आतंकवाद, परमाणु प्रसार, जलवायु परिवर्तन) सामने हैं। सुधार दो तरह के हैं: संरचना और प्रक्रियाओं का सुधार, और अधिकार-क्षेत्र के मुद्दों की समीक्षा।

1992 का संयुक्त राष्ट्रसंघ आम सभा प्रस्ताव: तीन शिकायतें

(1) सुरक्षा परिषद् अब समकालीन राजनीतिक यथार्थ का प्रतिनिधित्व नहीं करती। (2) इसके निर्णय केवल पश्चिमी मूल्यों और हितों को दर्शाते हैं, कुछ शक्तियों का वर्चस्व है। (3) इसमें न्यायसंगत प्रतिनिधित्व की कमी है। 1 जनवरी 1997 को महासचिव कोफी ए. अन्नान ने संयुक्त राष्ट्रसंघ सुधार पर जाँच शुरू की।

सुरक्षा परिषद् के नए स्थायी या अस्थायी सदस्यों के लिए प्रस्तावित मापदंड: हर एक अपना कठिन सवाल खड़ा करता है:

प्रस्तावित मापदंड इससे उठने वाला सवाल
प्रमुख आर्थिक शक्ति अर्हता के लिए अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी होनी चाहिए?
प्रमुख सैन्य शक्ति क्या केवल सैन्य ताक़त से स्थायी सीट तय होनी चाहिए?
संयुक्त राष्ट्रसंघ बजट में बड़ा योगदान क्या कोई देश पैसे से सीट ख़रीद सकता है?
बड़ी जनसंख्या क्या बड़ी जनसंख्या फ़ायदा है, या असल में बोझ?
लोकतंत्र व मानवाधिकारों का सम्मान क्या ऐसे देश परिषद् सदस्य के रूप में प्रभावी होंगे?
विश्व की विविधता का प्रतिनिधित्व भूगोल से? आर्थिक प्रणाली से? ‘सभ्यता’ से? कोई सहमति नहीं।

सुरक्षा परिषद् की सदस्यता आख़िरी बार 1965 में 11 से बढ़ाकर 15 की गई थी: पर 1945 से स्थायी सदस्यों की संख्या कभी नहीं बदली। वीटो को समाप्त करने पर भी बहस है, कुछ इसे लोकतंत्र और संप्रभु समानता के विरुद्ध मानते हैं; पर स्थायी सदस्य इस पर सहमत होने की संभावना कम है, और वीटो हटने पर बड़ी शक्तियों की संयुक्त राष्ट्रसंघ में दिलचस्पी ही ख़त्म हो सकती है।

2005 के सुधार: संयुक्त राष्ट्रसंघ की 60वीं वर्षगाँठ शिखर सम्मेलन, सितम्बर 2005

शांति संस्थापक आयोग (Peacebuilding Commission) की स्थापना; जब कोई सरकार अपने नागरिकों की रक्षा करने में विफल रहे तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की ज़िम्मेदारी स्वीकार करना; मानवाधिकार परिषद् (Human Rights Council) की स्थापना (19 जून 2006 से सक्रिय); सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों (MDGs) पर सहमति; हर रूप में आतंकवाद की निंदा; लोकतंत्र कोष (Democracy Fund) की स्थापना; और न्यासिता परिषद् (Trusteeship Council) को समाप्त करने पर सहमति।

5 भारत और संयुक्त राष्ट्रसंघ सुधार

भारत एक सशक्त, पुनर्जीवित संयुक्त राष्ट्रसंघ का समर्थन करता है और चाहता है कि विकास इसके एजेंडे के केंद्र में रहे, क्योंकि भारत विकास को शांति और सुरक्षा की पूर्वशर्त मानता है। भारत की मुख्य चिंता: आम सभा की सदस्यता बहुत बढ़ी, पर सुरक्षा परिषद् की संरचना जस की तस रही; इसलिए भारत कहता है कि नए, अधिकांशतः विकासशील, सदस्य देशों को भी सुरक्षा परिषद् के निर्णयों को आकार देने का अवसर मिलना चाहिए।

स्थायी सीट के लिए भारत का पक्ष

  • सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश: विश्व की लगभग एक-पाँचवीं जनसंख्या
  • विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र
  • संयुक्त राष्ट्रसंघ शांति-सेना में लंबा और सशक्त योगदान
  • संयुक्त राष्ट्रसंघ को नियमित, बिना चूके वित्तीय योगदान
  • विश्व मंच पर बढ़ती आर्थिक शक्ति

भारत के विरुद्ध उठाई गई आपत्तियाँ

  • पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों का विरोध
  • भारत की परमाणु क्षमता को लेकर चिंता
  • भारत–पाकिस्तान तनाव के कारण अप्रभावी सदस्य बनने की आशंका
  • भारत को शामिल करने पर ब्राज़ील, जर्मनी, जापान, दक्षिण अफ़्रीका को भी शामिल करना पड़ सकता है
  • अफ्रीका और दक्षिण अमरीका के पास अभी कोई स्थायी सीट ही नहीं है

6 एकध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ

क्या संयुक्त राष्ट्रसंघ एक ही प्रभुत्वशाली शक्ति, अमरीका, वाली दुनिया को संतुलित कर सकता है? अमरीकी शक्ति को रोकना कठिन है, कई कारणों से: सोवियत संघ के पतन के बाद यह अकेली महाशक्ति है; यह संयुक्त राष्ट्रसंघ का सबसे बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता है; संयुक्त राष्ट्रसंघ का मुख्यालय भौतिक रूप से अमरीकी भूमि पर स्थित है; संयुक्त राष्ट्रसंघ की नौकरशाही में कई अमरीकी नागरिक हैं; और इसकी वीटो इसे अपने हितों के विरुद्ध किसी भी क़दम को रोकने देती है, यहाँ तक कि महासचिव के चुनाव को भी प्रभावित करने देती है।

फिर भी, संयुक्त राष्ट्रसंघ दुनिया को अमरीका के साथ संवाद का एक मंच देता है और उसके रवैये व नीतियों को कुछ हद तक प्रभावित कर सकता है: भले ही यह अमरीकी शक्ति को पूरी तरह ‘संतुलित’ न कर सके। अध्याय का निष्कर्ष: संयुक्त राष्ट्रसंघ एक अपूर्ण संस्था है, पर जैसे-जैसे तकनीक के कारण विश्व अधिक परस्पर-निर्भर होता जा रहा है, ऐसे संगठन की ज़रूरत और बढ़ेगी।

संगठन स्थापना क्या करता है
IMF: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष पाठ में वर्ष नहीं दिया गया अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की निगरानी; 190 सदस्य, पर हर सदस्य की राय का वजन बराबर नहीं: समूह-7 के सदस्यों के पास 41.29 प्रतिशत मत (अकेले अमरीका के पास 16.52 प्रतिशत); भारत के पास 2.64 प्रतिशत
विश्व बैंक 1944 विकासशील देशों को स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना व शासन के लिए ऋण व अनुदान; सख़्त मुक्त-बाज़ार शर्तों के लिए आलोचना
WTO: विश्व व्यापार संगठन 1995 वैश्विक व्यापार के नियम बनाता है; GATT का उत्तराधिकारी; 164 सदस्य; फ़ैसला सभी सदस्यों की सहमति से किया जाता है, लेकिन बड़ी शक्तियाँ नियमों को अपने पक्ष में मोड़ती हैं
IAEA: अंतर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेंसी 1957 परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा; सैन्य उपयोग रोकने के लिए संयंत्रों का निरीक्षण
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) पाठ में वर्ष नहीं दिया गया पुस्तक के संयुक्त राष्ट्रसंघ की संरचना चार्ट में दिखाई गई एक विशेष एजेंसी
एमनेस्टी इंटरनेशनल NGO विश्व भर में मानवाधिकारों के लिए अभियान; सरकारों की आलोचना करने वाली रिपोर्टें प्रकाशित
ह्यूमन राइट्स वॉच NGO मानवाधिकार पर शोध व पैरवी; बारूदी सुरंगों पर रोक, बाल सैनिकों का प्रयोग रोकने और अंतर्राष्ट्रीय दंड न्यायालय (ICC) की स्थापना में सहायक
झटपट दोहराव: परीक्षा से एक रात पहले पढ़ें
  • संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना 24 अक्तूबर 1945 को हुई, लीग ऑव नेशंस के उत्तराधिकारी के रूप में, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद
  • सुरक्षा परिषद्: वीटो सहित 5 स्थायी सदस्य (अमरीका, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन) + 10 अस्थायी सदस्य
  • छह प्रमुख अंग: आम सभा, सुरक्षा-परिषद्, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (15 न्यायाधीश, मुख्यालय हेग), सचिवालय (प्रधान महासचिव, पाँच साल), आर्थिक और सामाजिक परिषद् (54 सदस्य, तीन वर्ष), न्यासिता परिषद् (1994 से स्थगित)
  • 1992 का आम सभा प्रस्ताव: 3 शिकायतें: पुराना यथार्थ, पश्चिमी वर्चस्व, न्यायसंगत प्रतिनिधित्व की कमी
  • परिषद् आख़िरी बार 1965 में 11→15 बढ़ी; 1945 से स्थायी सदस्यों की संख्या अपरिवर्तित
  • 2005 के सुधार: शांति संस्थापक आयोग, मानवाधिकार परिषद्, MDGs, लोकतंत्र कोष, न्यासिता परिषद् समाप्त
  • भारत का पक्ष, जनसंख्या, लोकतंत्र, शांति-सेना योगदान, वित्तीय योगदान; आपत्तियाँ, पाकिस्तान, परमाणु चिंता, अन्य दावेदार
  • संयुक्त राष्ट्रसंघ में अमरीकी शक्ति रोकना कठिन, वित्तीय भार, मुख्यालय, वीटो, फिर भी संवाद का मंच बना रहता है
  • IMF, विश्व बैंक, WTO, IAEA अंतर-सरकारी संगठन हैं (ILO और IMF संयुक्त राष्ट्रसंघ की विशेष एजेंसियाँ हैं); एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच NGO हैं
अभ्यास प्रश्न: 1 अंक
  1. 1 अंकसंयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना किस तिथि को हुई?
  2. 1 अंकसुरक्षा परिषद् के पाँच स्थायी सदस्य कौन-से देश हैं?
  3. 1 अंकवर्तमान संयुक्त राष्ट्रसंघ महासचिव कौन हैं?
  4. 1 अंकWTO की स्थापना किस वर्ष हुई, और किसके उत्तराधिकारी के रूप में?
  5. 1 अंकIAEA की स्थापना किस वर्ष हुई?
  6. 1 अंकवीटो क्या है?
  7. 1 अंकसुरक्षा परिषद् आख़िरी बार कब और कितने सदस्यों तक बढ़ाई गई?
  8. 1 अंकसंयुक्त राष्ट्रसंघ से पहले का संगठन कौन-सा था?
अभ्यास प्रश्न: 2 और 4 अंक
  1. 2 अंकअंतर्राष्ट्रीय संगठन को ऐसा शक्तिशाली राज्य क्यों नहीं कहा जा सकता जिसकी अपने सदस्यों पर धौंस चलती हो?
  2. 2 अंक2005 की वर्षगाँठ सम्मेलन में तय किसी भी दो सुधार क़दमों को लिखिए।
  3. 2 अंकस्थायी सीट के लिए भारत के दो तर्क बताइए।
  4. 4 अंक1992 के आम सभा प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद् के विरुद्ध की गई तीन शिकायतों की व्याख्या कीजिए।
  5. 4 अंकसुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता के नए मापदंडों पर सहमति क्यों कठिन है?
  6. 4 अंकसंयुक्त राष्ट्रसंघ में अमरीकी शक्ति को रोकना कठिन क्यों है?
  7. 4 अंकविश्व बैंक और IMF में अंतर स्पष्ट कीजिए।
अभ्यास प्रश्न: 6 अंक
  1. 6 अंकसंयुक्त राष्ट्रसंघ सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता के लिए भारत के पक्ष और उसके विरुद्ध की आपत्तियों की चर्चा कीजिए।
  2. 6 अंकशीत युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्रसंघ की संरचना और प्रक्रियाओं में सुधार की व्याख्या कीजिए।
  3. 6 अंक“संयुक्त राष्ट्रसंघ एक अपूर्ण संस्था है, पर इसके बिना विश्व और बुरी स्थिति में होता।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
बहुविकल्पीय प्रश्न
  1. 1 अंकसंयुक्त राष्ट्रसंघ सुरक्षा परिषद् के कितने स्थायी सदस्य हैं?
    (क) 4(ख) 5(ग) 10(घ) 15
  2. 1 अंकWTO किसका उत्तराधिकारी है?
    (क) IMF(ख) लीग ऑव नेशंस(ग) GATT(घ) विश्व बैंक
  3. 1 अंकIAEA किस अमरीकी राष्ट्रपति के ‘एटम्स फ़ॉर पीस’ प्रस्ताव को लागू करती है?
    (क) रूज़वेल्ट(ख) ट्रूमैन(ग) आइज़नहावर(घ) कैनेडी
  4. 1 अंकसुरक्षा परिषद् 11 से 15 सदस्यों तक कब बढ़ाई गई?
    (क) 1945(ख) 1965(ग) 1992(घ) 2005
  5. 1 अंकवर्तमान महासचिव एंटोनियो गुटेरेस किस देश से हैं?
    (क) घाना(ख) दक्षिण कोरिया(ग) पुर्तगाल(घ) स्वीडन
अभिकथन एवं कारण

विकल्प: (क) दोनों सही, कारण सही व्याख्या · (ख) दोनों सही, पर व्याख्या नहीं · (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत · (घ) अभिकथन ग़लत, कारण सही।

  1. 1 अंक
    अभिकथन (A): केवल सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों के पास वीटो है।
    कारण (R): अस्थायी सदस्य दो-दो वर्ष के लिए चुने जाते हैं और सभी महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  2. 1 अंक
    अभिकथन (A): संयुक्त राष्ट्रसंघ विश्व राजनीति में अमरीकी शक्ति को पूरी तरह संतुलित कर सकता है।
    कारण (R): अमरीका संयुक्त राष्ट्रसंघ का सबसे बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता है और उसके पास वीटो है।
उत्तर कुंजी
बहुविकल्पीय 1–5(ख) (ग) (ग) (ख) (ग)  ·  अभिकथन 1(ख), दोनों सही, व्याख्या नहीं · 2(घ), अभिकथन ग़लत, संयुक्त राष्ट्रसंघ पूरी तरह संतुलित नहीं कर सकता
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