1 अंतरराष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता क्यों?
अंतरराष्ट्रीय संगठन अपने सदस्यों पर अधिकार रखने वाला कोई महा-राज्य नहीं है: यह राज्यों द्वारा बनाया जाता है और उन्हीं के प्रति जवाबदेह होता है। इसका महत्व दो तरह से है: कुछ समस्याएँ (जैसे बीमारी, ग्लोबल वार्मिंग) तभी हल हो सकती हैं जब सभी मिलकर सहयोग करें; और संघर्षरत देश युद्ध का सहारा लिए बिना बातचीत से मतभेद सुलझाने के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। वास्तव में अधिकांश संघर्ष युद्ध के बिना ही सुलझ जाते हैं, और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की इसमें एक महत्वपूर्ण, यद्यपि कम चर्चित, भूमिका होती है।
2 संयुक्त राष्ट्र की स्थापना कैसे हुई
संयुक्त राष्ट्र से पहले राष्ट्र संघ (League of Nations) था, जो प्रथम विश्वयुद्ध के बाद बना। इसे शुरुआती सफलता तो मिली, पर यह द्वितीय विश्वयुद्ध (1939–45) को नहीं रोक सका, जिसमें पहले से कहीं अधिक लोग मारे गए और घायल हुए। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना उसी युद्ध के तुरंत बाद, उसके उत्तराधिकारी के रूप में हुई।
2011 तक संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देश थे: यानी दुनिया के लगभग सभी स्वतंत्र देश।
3 संयुक्त राष्ट्र की संरचना
महासभा (General Assembly) संयुक्त राष्ट्र का वह अंग है जिसमें हर सदस्य देश को एक-एक वोट मिलता है। सुरक्षा परिषद (Security Council) युद्ध, शांति और सुरक्षा से जुड़े मामले देखती है: इसके 5 स्थायी सदस्य हैं (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सबसे शक्तिशाली और विजयी देशों के रूप में चुने गए) और 10 अस्थायी सदस्य, जो दो-दो वर्ष के लिए निर्वाचित होते हैं।
वीटो शक्ति (Veto Power) केवल पाँच स्थायी सदस्यों के पास है। यदि इनमें से कोई एक भी नकारात्मक वोट डाले, तो सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव रुक जाता है: चाहे बाक़ी सभी सदस्यों ने पक्ष में मतदान क्यों न किया हो।
संयुक्त राष्ट्र का सबसे सार्वजनिक चेहरा उसका महासचिव (Secretary-General) होता है, जो संगठन का प्रतिनिधि प्रमुख है।
| महासचिव | देश | कार्यकाल | किसके लिए जाने गए |
|---|---|---|---|
| ट्रिग्वे ली | नॉर्वे | 1946–52 | कश्मीर पर भारत–पाकिस्तान संघर्ष-विराम |
| डाग हैमरशोल्ड | स्वीडन | 1953–61 | स्वेज़ नहर विवाद; अफ्रीका के उपनिवेशीकरण की समाप्ति |
| यू थांट | म्यांमार | 1961–71 | क्यूबा मिसाइल संकट; साइप्रस में शांति सेना की स्थापना |
| कुर्ट वाल्डहाइम | ऑस्ट्रिया | 1972–81 | नामीबिया और लेबनान; बांग्लादेश राहत कार्य |
| हावियर पेरेज़ द कुइयार | पेरू | 1982–91 | साइप्रस, अफ़ग़ानिस्तान, अल साल्वाडोर; फ़ॉकलैंड मध्यस्थता |
| बूट्रोस बूट्रोस-घाली | मिस्र | 1992–96 | ‘एन एजेंडा फ़ॉर पीस’ रिपोर्ट |
| कोफ़ी अन्नान | घाना | 1997–2006 | एड्स/टीबी/मलेरिया के विरुद्ध ग्लोबल फ़ंड; 2001 नोबेल शांति पुरस्कार |
| बान की मून | दक्षिण कोरिया | 2007–16 | जलवायु परिवर्तन; सहस्राब्दि/सतत विकास लक्ष्य |
| अंतोनियो गुटेरेस | पुर्तगाल | 2017–अब तक | नौवें महासचिव; पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री; पूर्व संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त |
इनके अलावा सामाजिक और आर्थिक मुद्दे WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन), UNDP (विकास कार्यक्रम), UNHRC (मानवाधिकार आयोग), UNHCR (शरणार्थी), UNICEF (बाल कोष) और UNESCO (शिक्षा, विज्ञान व संस्कृति) जैसी एजेंसियाँ देखती हैं।
4 शीत युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र में सुधार
1945 में जिस शीत-युद्धकालीन दुनिया के लिए संयुक्त राष्ट्र बना था, वह अब नहीं रही: सोवियत संघ का विघटन हो चुका है, अमेरिका सबसे शक्तिशाली देश है, चीन और भारत का उदय हो रहा है, और नई चुनौतियाँ (नरसंहार, आतंकवाद, परमाणु प्रसार, जलवायु परिवर्तन) सामने हैं। सुधार दो तरह के हैं: संरचना और प्रक्रियाओं का सुधार, और अधिकार-क्षेत्र के मुद्दों की समीक्षा।
(1) सुरक्षा परिषद अब समकालीन राजनीतिक यथार्थ का प्रतिनिधित्व नहीं करती। (2) इसके निर्णय केवल पश्चिमी मूल्यों और हितों को दर्शाते हैं, कुछ शक्तियों का वर्चस्व है। (3) इसमें न्यायसंगत प्रतिनिधित्व की कमी है। 1 जनवरी 1997 को महासचिव कोफ़ी अन्नान ने संयुक्त राष्ट्र सुधार पर जाँच शुरू की।
सुरक्षा परिषद के नए स्थायी या अस्थायी सदस्यों के लिए प्रस्तावित मापदंड: हर एक अपना कठिन सवाल खड़ा करता है:
| प्रस्तावित मापदंड | इससे उठने वाला सवाल |
|---|---|
| प्रमुख आर्थिक शक्ति | अर्हता के लिए अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी होनी चाहिए? |
| प्रमुख सैन्य शक्ति | क्या केवल सैन्य ताक़त से स्थायी सीट तय होनी चाहिए? |
| संयुक्त राष्ट्र बजट में बड़ा योगदान | क्या कोई देश पैसे से सीट ख़रीद सकता है? |
| बड़ी जनसंख्या | क्या बड़ी जनसंख्या फ़ायदा है, या असल में बोझ? |
| लोकतंत्र व मानवाधिकारों का सम्मान | क्या ऐसे देश परिषद सदस्य के रूप में प्रभावी होंगे? |
| विश्व की विविधता का प्रतिनिधित्व | भूगोल से? आर्थिक प्रणाली से? ‘सभ्यता’ से? कोई सहमति नहीं। |
सुरक्षा परिषद की सदस्यता आख़िरी बार 1965 में 11 से बढ़ाकर 15 की गई थी: पर 1945 से स्थायी सदस्यों की संख्या कभी नहीं बदली। वीटो को समाप्त करने पर भी बहस है, कुछ इसे लोकतंत्र और संप्रभु समानता के विरुद्ध मानते हैं; पर स्थायी सदस्य इस पर सहमत होने की संभावना कम है, और वीटो हटने पर बड़ी शक्तियों की संयुक्त राष्ट्र में दिलचस्पी ही ख़त्म हो सकती है।
शांति-निर्माण आयोग (Peacebuilding Commission) की स्थापना; जब कोई सरकार अपने नागरिकों की रक्षा करने में विफल रहे तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ज़िम्मेदारी स्वीकार करना; मानवाधिकार परिषद (Human Rights Council) की स्थापना (19 जून 2006 से सक्रिय); सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों (MDGs) पर सहमति; हर रूप में आतंकवाद की निंदा; लोकतंत्र कोष (Democracy Fund) की स्थापना; और न्यासिता परिषद (Trusteeship Council) को समाप्त करने पर सहमति।
5 भारत और संयुक्त राष्ट्र सुधार
भारत एक सशक्त, पुनर्जीवित संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करता है और चाहता है कि विकास इसके एजेंडे के केंद्र में रहे, क्योंकि भारत विकास को शांति और सुरक्षा की पूर्वशर्त मानता है। भारत की मुख्य चिंता: महासभा की सदस्यता बहुत बढ़ी, पर सुरक्षा परिषद की संरचना जस की तस रही; इसलिए भारत कहता है कि नए, अधिकांशतः विकासशील, सदस्य देशों को भी सुरक्षा परिषद के निर्णयों को आकार देने का अवसर मिलना चाहिए।
स्थायी सीट के लिए भारत का पक्ष
- सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश: विश्व की लगभग एक-पाँचवीं जनसंख्या
- विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र
- संयुक्त राष्ट्र शांति-सेना में लंबा और सशक्त योगदान
- संयुक्त राष्ट्र को नियमित, बिना चूके वित्तीय योगदान
- विश्व मंच पर बढ़ती आर्थिक शक्ति
भारत के विरुद्ध उठाई गई आपत्तियाँ
- पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों का विरोध
- भारत की परमाणु क्षमता को लेकर चिंता
- भारत–पाकिस्तान तनाव के कारण अप्रभावी सदस्य बनने की आशंका
- भारत को शामिल करने पर ब्राज़ील, जर्मनी, जापान, दक्षिण अफ़्रीका को भी शामिल करना पड़ सकता है
- अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के पास अभी कोई स्थायी सीट ही नहीं है
6 एकध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र
क्या संयुक्त राष्ट्र एक ही प्रभुत्वशाली शक्ति, अमेरिका, वाली दुनिया को संतुलित कर सकता है? अमेरिकी शक्ति को रोकना कठिन है, कई कारणों से: सोवियत संघ के पतन के बाद यह अकेली महाशक्ति है; यह संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता है; संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय भौतिक रूप से अमेरिकी भूमि पर स्थित है; संयुक्त राष्ट्र की नौकरशाही में कई अमेरिकी नागरिक हैं; और इसकी वीटो शक्ति इसे अपने हितों के विरुद्ध किसी भी क़दम को रोकने देती है, यहाँ तक कि महासचिव के चुनाव को भी प्रभावित करने देती है।
फिर भी, संयुक्त राष्ट्र दुनिया को अमेरिका के साथ संवाद का एक मंच देता है और उसके रवैये व नीतियों को कुछ हद तक प्रभावित कर सकता है: भले ही यह अमेरिकी शक्ति को पूरी तरह ‘संतुलित’ न कर सके। अध्याय का निष्कर्ष: संयुक्त राष्ट्र एक अपूर्ण संस्था है, पर जैसे-जैसे तकनीक के कारण विश्व अधिक परस्पर-निर्भर होता जा रहा है, ऐसे संगठन की ज़रूरत और बढ़ेगी।
| संगठन | स्थापना | क्या करता है |
|---|---|---|
| IMF: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष | : | अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की निगरानी; 190 सदस्य, पर वोट असमान: अकेले G-7 के पास 41% से अधिक वोट |
| विश्व बैंक | 1944 | विकासशील देशों को स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना व शासन के लिए ऋण व अनुदान; सख़्त मुक्त-बाज़ार शर्तों के लिए आलोचना |
| WTO: विश्व व्यापार संगठन | 1995 | वैश्विक व्यापार के नियम बनाता है; GATT का उत्तराधिकारी; 164 सदस्य; बड़ी शक्तियाँ नियमों को अपने पक्ष में मोड़ती हैं |
| IAEA: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी | 1957 | परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा; सैन्य उपयोग रोकने के लिए संयंत्रों का निरीक्षण |
| एमनेस्टी इंटरनेशनल | NGO | विश्व भर में मानवाधिकारों के लिए अभियान; सरकारों की आलोचना करने वाली रिपोर्टें प्रकाशित |
| ह्यूमन राइट्स वॉच | NGO | मानवाधिकार पर शोध व पैरवी; भूमि-सुरंगों और बाल-सैनिकों पर प्रतिबंध तथा ICC की स्थापना में सहायक |
- संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्तूबर 1945 को हुई, राष्ट्र संघ के उत्तराधिकारी के रूप में, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद
- सुरक्षा परिषद: वीटो सहित 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन) + 10 अस्थायी सदस्य
- 1992 का महासभा प्रस्ताव: 3 शिकायतें: पुराना यथार्थ, पश्चिमी वर्चस्व, न्यायसंगत प्रतिनिधित्व की कमी
- परिषद आख़िरी बार 1965 में 11→15 बढ़ी; 1945 से स्थायी सदस्यों की संख्या अपरिवर्तित
- 2005 के सुधार: शांति-निर्माण आयोग, मानवाधिकार परिषद, MDGs, लोकतंत्र कोष, न्यासिता परिषद समाप्त
- भारत का पक्ष, जनसंख्या, लोकतंत्र, शांति-सेना योगदान, वित्तीय योगदान; आपत्तियाँ, पाकिस्तान, परमाणु चिंता, अन्य दावेदार
- संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी शक्ति रोकना कठिन, वित्तीय भार, मुख्यालय, वीटो, फिर भी संवाद का मंच बना रहता है
- IMF, विश्व बैंक, WTO, IAEA अंतर-सरकारी संगठन हैं; एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच NGO हैं
- 1 अंकसंयुक्त राष्ट्र की स्थापना किस तिथि को हुई?
- 1 अंकसुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य कौन-से देश हैं?
- 1 अंकवर्तमान संयुक्त राष्ट्र महासचिव कौन हैं?
- 1 अंकWTO की स्थापना किस वर्ष हुई, और किसके उत्तराधिकारी के रूप में?
- 1 अंकIAEA की स्थापना किस वर्ष हुई?
- 1 अंकवीटो शक्ति क्या है?
- 1 अंकसुरक्षा परिषद आख़िरी बार कब और कितने सदस्यों तक बढ़ाई गई?
- 1 अंकसंयुक्त राष्ट्र से पहले का संगठन कौन-सा था?
- 2 अंकअंतरराष्ट्रीय संगठन ‘महा-राज्य’ क्यों नहीं है?
- 2 अंक2005 की वर्षगाँठ सम्मेलन में तय किसी भी दो सुधार क़दमों को लिखिए।
- 2 अंकस्थायी सीट के लिए भारत के दो तर्क बताइए।
- 4 अंक1992 के महासभा प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद के विरुद्ध की गई तीन शिकायतों की व्याख्या कीजिए।
- 4 अंकसुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के नए मापदंडों पर सहमति क्यों कठिन है?
- 4 अंकसंयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी शक्ति को रोकना कठिन क्यों है?
- 4 अंकविश्व बैंक और IMF में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- 6 अंकसंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत के पक्ष और उसके विरुद्ध की आपत्तियों की चर्चा कीजिए।
- 6 अंकशीत युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र की संरचना और प्रक्रियाओं में सुधार की व्याख्या कीजिए।
- 6 अंक“संयुक्त राष्ट्र एक अपूर्ण संस्था है, पर इसके बिना विश्व और बुरी स्थिति में होता।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
- 1 अंकसंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कितने स्थायी सदस्य हैं?
(क) 4(ख) 5(ग) 10(घ) 15 - 1 अंकWTO किसका उत्तराधिकारी है?
(क) IMF(ख) राष्ट्र संघ(ग) GATT(घ) विश्व बैंक - 1 अंकIAEA किस अमेरिकी राष्ट्रपति के ‘एटम्स फ़ॉर पीस’ प्रस्ताव को लागू करती है?
(क) रूज़वेल्ट(ख) ट्रूमैन(ग) आइज़नहावर(घ) कैनेडी - 1 अंकसुरक्षा परिषद 11 से 15 सदस्यों तक कब बढ़ाई गई?
(क) 1945(ख) 1965(ग) 1992(घ) 2005 - 1 अंकवर्तमान महासचिव अंतोनियो गुटेरेस किस देश से हैं?
(क) घाना(ख) दक्षिण कोरिया(ग) पुर्तगाल(घ) स्वीडन
विकल्प: (क) दोनों सही, कारण सही व्याख्या · (ख) दोनों सही, पर व्याख्या नहीं · (ग) अभिकथन सही, कारण ग़लत · (घ) अभिकथन ग़लत, कारण सही।
- 1 अंक
अभिकथन (A): केवल सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति है।
कारण (R): अस्थायी सदस्य दो-दो वर्ष के लिए चुने जाते हैं और सभी महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। - 1 अंक
अभिकथन (A): संयुक्त राष्ट्र विश्व राजनीति में अमेरिकी शक्ति को पूरी तरह संतुलित कर सकता है।
कारण (R): अमेरिका संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता है और उसके पास वीटो शक्ति है।