Class 12 Sociology Book 2 Chapter 6 भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन Important Questions with Answers in Hindi

पाठ्यक्रम संबंधी सूचना

नोट: यह अध्याय CBSE कक्षा 12 समाजशास्त्र के 2026-27 पाठ्यक्रम में शामिल नहीं है (CBSE ने इसे हटा दिया है)। अन्य बोर्डों के छात्र अपने बोर्ड का नवीनतम पाठ्यक्रम देखें।

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. भूमंडलीकरण को पुस्तक के अपने अर्थ में परिभाषित करें।

उत्तर: भूमंडलीकरण का अर्थ है विश्व में विभिन्न लोगों, क्षेत्रों और देशों के बीच बढ़ती अंतःनिर्भरता, क्योंकि सामाजिक-आर्थिक संबंध पूरी दुनिया में फैल रहे हैं।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. भूस्थानीकरण क्या है?

उत्तर: भूस्थानीकरण का अर्थ है भूमंडलीय का स्थानीय के साथ मिश्रण।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. नाइके की स्थापना किसने की, और उन्होंने पहले जूते कहाँ से आयात किए?

उत्तर: फिल नाइट ने नाइके की स्थापना की, जो जापान से जूते आयात करते थे और उन्हें खेल आयोजनों में बेचते थे।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. 1991 से भारत के आर्थिक सुधारों को आमतौर पर किन दो नामों से जाना जाता है?

उत्तर: उदारीकरण और आर्थिक सुधार, दोनों ही 1991 से लिए गए नीतिगत निर्णयों के लिए पुस्तक के अपने शब्द हैं।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. पुस्तक किस शहर को भारत की वित्तीय राजधानी कहती है?

उत्तर: मुंबई को।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. टी.एन.सी. का पूरा अर्थ क्या है, पुस्तक के अनुसार?

उत्तर: पारराष्ट्रीय निगम, अर्थात् एक से अधिक देशों में माल का उत्पादन या बाज़ार सेवाएँ प्रदान करने वाली कंपनी।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. 2006 तक भारत सेलफोन प्रयोग में विश्व में किस स्थान पर पहुँच गया था, पुस्तक के अनुसार?

उत्तर: भारत सेलफोन प्रयोग में विश्व का चौथा सबसे बड़ा देश बन गया।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. उस प्राचीन व्यापार मार्ग का नाम बताएँ जो भारत को चीन, फारस, मिस्र और रोम से जोड़ता था।

उत्तर: रेशम मार्ग (सिल्करूट)।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. अंतःसरकारी संगठन और अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन में अंतर स्पष्ट करें, पुस्तक के अपने उदाहरणों सहित।

उत्तर: अंतःसरकारी संगठन सहभागी सरकारों द्वारा स्थापित निकाय है जिसे किसी पारराष्ट्रीय क्षेत्र पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी दी जाती है, जैसे डब्ल्यू.टी.ओ.। अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन सरकार से स्वतंत्र होता है और अपने नीतिगत निर्णय स्वयं लेता है, जैसे ग्रीनपीस, दि रेडक्रॉस, एम्नेस्टी इंटरनेशनल और मेडीसिंस सैन्स फ्रंटियरिस।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. कूपमंडूक दृष्टांत बताएँ और यह किस बात के विरुद्ध चेतावनी देता है।

उत्तर: कूपमंडूक एक मेंढ़क है जो जीवनभर कुएँ में रहता है, बाहर की दुनिया के बारे में कुछ नहीं जानता, किसी से बात नहीं करता, और बाहरी दुनिया पर केवल संदेह करता है। पुस्तक इसे (अमर्त्य सेन के हवाले से) एकाकीकरणवाद के विरुद्ध चेतावनी के रूप में उद्धृत करती है।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. जनरल मोटर्स की पोंटियाक ली मैन्स का उदाहरण बताएँ, जो पुस्तक भूमंडलीय उत्पादन समझाने के लिए देती है।

उत्तर: इस कार की 20,000 डॉलर की शोरूम कीमत में से केवल 7,600 डॉलर अमेरिका में रहते हैं। शेष में से 48% दक्षिण कोरिया (मज़दूरी-असेंबली), 28% जापान (इंजन-इलेक्ट्रॉनिक्स), 12% जर्मनी (शैली-डिज़ाइन), 7% ताईवान-सिंगापुर (छोटे कल-पुर्जे), 4% यूके (विपणन), और लगभग 1% बारबोडॉस या आयरलैंड (आँकड़े) को जाता है।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. डिजिटल विभाजन क्या है, और पुस्तक इसे भारत में अब भी बना हुआ कैसे दिखाती है?

उत्तर: डिजिटल विभाजन डिजिटल तकनीक तक पहुँच की असमानता है। पुस्तक 2017-18 के एक अध्ययन से दिखाती है कि हर 10 में से केवल 1 घर में कंप्यूटर है, और लगभग एक-चौथाई घरों में मोबाइल फोन से इंटरनेट है, जबकि ग्रामीण इलाके अनिश्चित बिजली, निरक्षरता और अधिसंरचना की कमी से वंचित रह जाते हैं।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. बड़े मछली पकड़ने वाले जहाज़ों के आने से भारत में किसकी आजीविका प्रभावित हुई, पुस्तक के अनुसार?

उत्तर: भारतीय समुद्र में बड़े जहाज़ों के आने से वे मछलियाँ चली गईं जो पहले भारतीय नौकाएँ इकट्ठी करती थीं, जिससे मछली छाँटने, सुखाने, बेचने और जाल बुनने वाली औरतों की आजीविका प्रभावित हुई।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. ‘समावेशात्मक भूमंडलीकरण’ से पुस्तक का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: समावेशात्मक भूमंडलीकरण वर्तमान से अलग भूमंडलीकरण की संभावना है, जिसमें समाज के सभी वर्ग शामिल हों, न कि केवल सुविधासंपन्न वर्ग को लाभ मिले।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. मैक्डॉनाल्डस भारत में भूस्थानीकरण को कैसे व्यवहार में लाता है, पुस्तक के अनुसार बताएँ।

उत्तर: मैक्डॉनाल्डस भारत में केवल शाकाहारी और चिकन उत्पाद बेचता है, विदेशों में लोकप्रिय गोमांस उत्पाद नहीं, और नवरात्रि पर्व पर पूर्ण शाकाहारी हो जाता है, ताकि अपनी बाज़ार क्षमता बढ़ा सके।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. बिहार की रेशम कातने वाली औरतों को चीनी और कोरियाई रेशम धागे से क्या खतरा हुआ, पुस्तक के अनुसार?

उत्तर: बिहार की रेशम कातने और धागा बनाने वाली औरतों का धंधा चौपट हो गया, क्योंकि बुनकर और उपभोक्ता सस्ता और चमकदार चीनी-कोरियाई रेशम धागा अधिक पसंद करने लगे।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. नाइके के जूतों के उत्पादन-स्थानांतरण को देशों और दशकों के साथ बताएँ, जैसा पुस्तक वर्णन करती है, और यह स्थानांतरण क्यों होता है, समझाएँ।

उत्तर: फिल नाइट ने 1960 के दशक में नाइके की स्थापना की, जो जापान से जूते आयात करते थे; उस समय नाइके के जूते जापान में बनते थे। जापान में लागत बढ़ने पर उत्पादन 1970 के दशक के मध्य में दक्षिण कोरिया स्थानांतरित हुआ। दक्षिण कोरिया में मज़दूरी बढ़ने पर 1980 के दशक में उत्पादन थाईलैंड और इंडोनेशिया तक फैला। 1990 के दशक से भारत में नाइके के जूतों का उत्पादन हो रहा है। पुस्तक बताती है कि उत्पादन हमेशा वहीं जाता है जहाँ मज़दूरी सबसे सस्ती हो, जिससे मज़दूर वर्ग असुरक्षित हो जाता है; यह फोर्डवाद (एक केंद्रीकृत स्थान पर विशाल उत्पादन) से फोर्डवादोत्तर (अलग-अलग स्थानों पर लचीला उत्पादन) की ओर बदलाव को दर्शाता है।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. भारत के दूरसंचार विस्तार के विभिन्न आयामों को पुस्तक के अपने आँकड़ों सहित समझाएँ।

उत्तर: 1947 में भारत की 35 करोड़ की जनसंख्या के लिए केवल 84,000 टेलीफोन लाइनें थीं। 1980 तक भी हालत ठीक नहीं थी: 70 करोड़ की जनसंख्या के लिए केवल 25 लाख टेलीफोन और 12,000 सार्वजनिक फोन थे, और भारत के 6 लाख गाँवों में से केवल 3% में टेलीफोन थे। 1990 के दशक के अंत में बड़ा बदलाव आया: 1999 तक भारत में 300 नगरों, 4,869 कस्बों और 3,10,897 गाँवों में 2.5 करोड़ से अधिक टेलीफोन लाइनें लग चुकी थीं, जिससे भारत का नेटवर्क विश्व का नौवाँ सबसे बड़ा बन गया। 1988-1998 के बीच टेलीफोन सुविधा वाले गाँव 27,316 से बढ़कर 3,00,000 (आधे गाँव) हो गए। 2000 तक लगभग 6,50,000 पब्लिक कॉल ऑफिस (पीसीओ) दूरदराज़, ग्रामीण, पहाड़ी और जनजातीय इलाकों में भी विश्वसनीय टेलीफोन सेवा देने लगे, जिससे परिवार से जुड़े रहने की मज़बूत सामाजिक-सांस्कृतिक ज़रूरत पूरी हुई।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. भारत में उदारीकरण की आर्थिक नीति की चर्चा करें, जैसा इस अध्याय में बताया गया है।

उत्तर: उदारीकरण उन नीतिगत निर्णयों को कहते हैं जो भारत राज्य ने 1991 से भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व-बाज़ार के लिए खोलने हेतु लिए, जो स्वतंत्रता के बाद की उस नीति से अलग था जो भारतीय व्यवसाय को व्यापक विश्व की प्रतियोगिता से बचाती थी। जुलाई 1991 से भारतीय अर्थव्यवस्था ने कृषि, उद्योग, व्यापार, विदेशी निवेश-प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक क्षेत्र और वित्तीय संस्थाओं में सुधारों की एक शृंखला देखी, इस विश्वास के साथ कि भूमंडलीय बाज़ार में अधिक समावेश भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी होगा। इस प्रक्रिया में अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष (आई.एम.एफ.) जैसी संस्थाओं से ऋण लेना भी शामिल था, जो संरचनात्मक समायोजन की शर्त पर मिलते थे, जिसका अर्थ आमतौर पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर सरकारी खर्च में कटौती होता है, और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू.टी.ओ.) जैसी संस्थाओं की अधिक भूमिका।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. भूमंडलीकरण स्वदेशी शिल्प, साहित्यिक परंपराओं और ज्ञान व्यवस्थाओं को कैसे खतरे में डालता है, पुस्तक के अपने उदाहरणों सहित समझाएँ।

उत्तर: आधुनिक विकास ने भूमंडलीकरण से पहले भी परंपरागत सांस्कृतिक रूपों में घुसपैठ की थी, पर आज परिवर्तन का अनुपात और गहनता कहीं अधिक तीव्र है। मुंबई के परेल और गिरगाँव के कपड़ा मिलों के इलाके में सक्रिय लगभग 30 थिएटर समूह निष्क्रिय हो गए, क्योंकि अधिकांश मिल मज़दूरों की नौकरी खत्म हो गई। सरसिला गाँव (करीमनगर जिला) और डुबक्का गाँव (मेढ़क जिला), आंध्र प्रदेश के परंपरागत बुनकरों में बड़ी संख्या में आत्महत्या की खबरें मिलीं, क्योंकि उनके पास विद्युतकर्घों से मुकाबला करने और बदलती उपभोक्ता रुचियों के अनुरूप ढलने के लिए तकनीक में निवेश करने के साधन नहीं थे। चिकित्सा और कृषि की परंपरागत ज्ञान व्यवस्थाएँ भी खतरे में हैं, जैसा कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा तुलसी, हल्दी, रूद्राक्ष और बासमती चावल के प्रयोग को पेटेंट कराने के प्रयासों से दिखता है।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. सजातीयकरण बनाम भूस्थानीकरण की चर्चा करें, पुस्तक के अपने उदाहरणों सहित।

उत्तर: एक विचार यह है कि भूमंडलीकरण से सभी संस्कृतियाँ एक समान (सजातीय) हो जाएँगी। अन्य मानते हैं कि संस्कृति के भूस्थानीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति है, जो भूमंडलीय का स्थानीय के साथ मिश्रण है, पूर्णतः स्वतः नहीं बल्कि वाणिज्यिक हितों से जुड़ी हुई, और विदेशी फर्मों द्वारा अपनी बाज़ार क्षमता बढ़ाने के लिए अपनाई गई रणनीति। पुस्तक के अपने उदाहरण: विदेशी चैनल स्टार, एमटीवी, चैनल वी और कार्टून नेटवर्क भारतीय भाषाओं का प्रयोग करते हैं; मैक्डॉनाल्डस भारत में केवल शाकाहारी और चिकन उत्पाद बेचता है और नवरात्रि में पूर्ण शाकाहारी हो जाता है; संगीत में भाँगड़ा पॉप, इंडि पॉप, फ्यूज़न म्यूज़िक और रीमिक्स की बढ़ती लोकप्रियता।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. उपभोग की संस्कृति को पुस्तक कैसे बताती है, और इसने भारतीय शहरों को कैसे बदल दिया है?

उत्तर: संस्कृति केवल पहनावा, संगीत, नृत्य और खाद्य नहीं बल्कि पूरी जीवन-शैली है; पुस्तक उपभोग की संस्कृति और निगम संस्कृति, इन दो रूपों का उल्लेख करती है जो भूमंडलीकरण के किसी भी अध्याय में होने चाहिए। 1970 के दशक तक उत्पादन उद्योग नगरों की वृद्धि में मुख्य भूमिका निभाता था; अब सांस्कृतिक उपभोग (कला, खाद्य, फैशन, पर्यटन) यह भूमिका निभाता है, जो शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों, मनोरंजन उद्यानों और वाटर वर्ल्ड पार्कों की वृद्धि में दिखता है। विज्ञापन और मीडिया अब खर्च करने को महत्वपूर्ण मानने वाली संस्कृति को बढ़ावा देते हैं; ब्रह्मांड सुंदरी और विश्वसुंदरी प्रतियोगिताओं की सफलता से फैशन-सौंदर्य उद्योगों में भारी वृद्धि हुई।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. भूमंडलीकरण के रोज़गार पर पड़ने वाले असमान प्रभाव का वर्णन करें, पुस्तक के अनुसार।

उत्तर: नगरीय मध्यवर्गीय युवाओं के लिए भूमंडलीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति ने नए रोज़गार के अवसर खोले हैं: बी.एससी./बी.ए./बी.कॉम की सामान्य डिग्री की जगह अब कई युवा कंप्यूटर भाषाएँ सीखते हैं, कॉल सेंटरों या बी.पी.ओ. कंपनियों में काम करते हैं, या बिक्री भंडारों और रेस्टोरेंट में नौकरी करते हैं। पर व्यापक रोज़गार का रुझान निराशाजनक बना हुआ है: आई.एल.ओ. रिपोर्ट ‘एशिया और प्रशांत क्षेत्र में श्रम एवं सामाजिक प्रवृत्तियाँ 2005’ कहती है कि सबसे अधिक गरीब लोग दक्षिणी एशिया में रहते हैं, खासकर भारत, नेपाल और बांग्लादेश में, और 2003-2004 के बीच रोज़गार केवल 1.6% (2.5 करोड़ नौकरियाँ) बढ़ा, कुल 1.588 अरब नौकरियों तक, जबकि आर्थिक वृद्धि दर 7% से अधिक थी।

प्रश्न 8 (4 अंक)

प्र. भारत के अपने इतिहास के उदाहरण से पुस्तक कैसे तर्क देती है कि भूमंडलीय अंतःसंबंध नए नहीं हैं?

उत्तर: पुस्तक बताती है कि भारत दो हज़ार वर्ष पहले भी विश्व से अलग-थलग नहीं था: रेशम मार्ग भारत को चीन, फारस, मिस्र और रोम की महान सभ्यताओं से जोड़ता था, और भारत के लंबे इतिहास में लोग व्यापारी, विजेता और प्रवासी के रूप में यहाँ आए और बस गए। संस्कृत के सबसे महान व्याकरणाचार्य पाणिनी अफगान मूल के थे; सातवीं शताब्दी के चीनी विद्वान यी जिंग ने चीन से भारत आते हुए जावा में संस्कृत सीखी। आधुनिक पूँजीवाद का स्वयं अपनी शुरुआत से ही उपनिवेशवाद के अंतर्गत एक भूमंडलीय आयाम रहा है, जिसे नई पूँजी, कच्ची सामग्री, बाज़ार और एक संजाल चाहिए था, और जिसमें यूरोपीय लोगों का अमेरिका-आस्ट्रेलिया में बसना, भारतीय गिरमिटिया मज़दूर और दास-व्यापार जैसे बड़े पैमाने के प्रवसन शामिल थे।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. ‘भूमंडलीकरण सबको प्रभावित करता है, पर सबको अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है।’ पुस्तक के अपने आजीविका-हानि और नए अवसर के उदाहरणों सहित इस कथन की चर्चा करें।

उत्तर: पुस्तक दिखाती है कि भूमंडलीकरण का प्रभाव व्यापक पर बहुत असमान है। कुछ के लिए इसने नए अवसर लाए: नगरीय मध्यवर्गीय युवाओं को आईटी, बीपीओ और कॉल सेंटरों में नए करियर मिले; कुछ भारतीय निगम पारराष्ट्रीय बन गए; बाज़ार खुलने से उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिले। पर दूसरों के लिए इसका अर्थ आजीविका की हानि था: बिहार की रेशम कातने वाली औरतों का धंधा सस्ते चीनी-कोरियाई रेशम धागे से चौपट हो गया; बड़े जहाज़ों के आने से मछली छाँटने-सुखाने-बेचने-जाल बुनने वाली औरतें विस्थापित हुईं; गुजरात की गोंद इकट्ठा करने वाली औरतें सस्ते सूडानी गोंद से रोज़गार खो बैठीं; भारत के शहरों के रद्दी बीनने वाले आयातित रद्दी कागज़ से अपना रोज़गार खो बैठे; और डोमबारी समुदाय जैसे परंपरागत मनोरंजनकर्ताओं की आजीविका टेलीविजन-रेडियो ने छीन ली। इस प्रभाव पर राय एक जैसी नहीं है: कुछ इसे बेहतर विश्व का अग्रदूत मानते हैं, कुछ कहते हैं कि सुविधासंपन्न वर्ग को लाभ होता है जबकि वंचित आबादी की हालत और बिगड़ती है, और कुछ का कहना है कि यह कोई नई प्रक्रिया ही नहीं है।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. भूमंडलीकरण के राजनीतिक आयाम की चर्चा करें, जिसमें नव-उदारवाद, समावेशात्मक भूमंडलीकरण और अंतर्राष्ट्रीय-क्षेत्रीय संगठनों का उदय शामिल हो।

उत्तर: भूतपूर्व समाजवादी विश्व का विघटन एक बड़ा राजनीतिक परिवर्तन था जिसने भूमंडलीकरण को और तेज़ कर दिया, और इसे एक विशिष्ट नव-उदारवादी आर्थिक-राजनीतिक दृष्टिकोण दिया: मुक्त उद्यम की दूरदर्शिता, जिसमें बाज़ार शक्तियों का निर्बाध शासन कुशल और न्यायसंगत माना जाता है, और जो राज्य के नियमन तथा सब्सिडी दोनों की आलोचना करता है। इसके विपरीत, पुस्तक समावेशात्मक भूमंडलीकरण की भी बात करती है, एक ऐसा भूमंडलीकरण जिसमें समाज के सभी वर्ग शामिल हों। इसके साथ ही, भूमंडलीकरण ने राजनीतिक सहयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय तंत्रों का विकास देखा है, जैसे यूरोपीय संघ (ई.यू.), दक्षिण एशियाई राष्ट्र संघ (एशियान), और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग सम्मेलन (सार्क)। इसने अंतःसरकारी संगठनों का भी उदय देखा है, जो सहभागी सरकारों द्वारा स्थापित निकाय हैं जिन्हें किसी पारराष्ट्रीय क्षेत्र को नियमित करने की ज़िम्मेदारी दी जाती है (पुस्तक का उदाहरण डब्ल्यू.टी.ओ. है, जिसकी व्यापार नियमों पर भूमिका बढ़ रही है), और अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों का, जो सरकार से स्वतंत्र होकर अपने नीतिगत निर्णय स्वयं लेते हैं, जैसे ग्रीनपीस, दि रेडक्रॉस, एम्नेस्टी इंटरनेशनल और मेडीसिंस सैन्स फ्रंटियरिस।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. पुस्तक द्वारा बताए गए भूमंडलीकरण के विभिन्न आर्थिक आयामों की चर्चा करें: उदारीकरण, पारराष्ट्रीय निगम, इलेक्ट्रॉनिक अर्थव्यवस्था, भाररहित/ज्ञानात्मक अर्थव्यवस्था और वित्त का भूमंडलीकरण।

उत्तर: उदारीकरण भारत की अपनी 1991 की नीति है जिसने अर्थव्यवस्था को विश्व-बाज़ार के लिए खोला, प्रमुख क्षेत्रों में सुधार लाए और आई.एम.एफ. के ऋणों को संरचनात्मक समायोजन की शर्त पर स्वीकार किया। पारराष्ट्रीय निगम (टी.एन.सी./एम.एन.सी.), जैसे कोकाकोला, जनरल मोटर्स, कॉलगेट-पामोलिव, कोडैक और मित्सुबिशी, एक से अधिक देशों में माल बनाते या सेवाएँ देते हैं और भूमंडलीय बाज़ारों-मुनाफों की ओर उन्मुख होते हैं। इलेक्ट्रॉनिक अर्थव्यवस्था में बैंक, निगम और निवेशकर्ता माउस क्लिक मात्र से निधि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेज सकते हैं, हालाँकि इसमें जोखिम भी है, जैसे स्टॉक बाज़ार में उतार-चढ़ाव। भाररहित अर्थव्यवस्था में उत्पाद सूचना पर आधारित होते हैं (सॉफ़्टवेयर, मीडिया, इंटरनेट सेवाएँ), जबकि ज्ञानात्मक अर्थव्यवस्था में अधिकांश कार्य-बल प्रारूप, विकास, विपणन और सर्विस में लगा रहता है, न कि भौतिक उत्पादन में, जिससे कार्यक्रम प्रबंधक जैसे नए व्यवसाय बने। अंततः, वित्त का भूमंडलीकरण, मुख्यतः सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति से प्रेरित, भूमंडलीय स्तर पर एकीकृत वित्तीय बाज़ार बनाता है जो कुछ ही सेकंड में अरबों डॉलर का लेन-देन करते हैं, चौबीसों घंटे, न्यूयॉर्क-टोकियो-लंदन जैसे केंद्रों के साथ और मुंबई भारत की अपनी वित्तीय राजधानी के रूप में।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. ‘भूमंडलीकरण संस्कृति को कई तरीकों से प्रभावित करता है।’ सजातीयकरण/भूस्थानीकरण, जेंडर, उपभोग की संस्कृति, निगम संस्कृति और स्वदेशी परंपराओं को खतरे के संदर्भ में इस कथन की चर्चा करें।

उत्तर: पुस्तक भूमंडलीकरण के संस्कृति पर पड़ने वाले प्रभाव के कई अलग-अलग रास्ते बताती है। पहला, सजातीयकरण बनाम भूस्थानीकरण: कुछ का तर्क है कि सभी संस्कृतियाँ एक समान हो रही हैं, जबकि अन्य बढ़ते भूस्थानीकरण, भूमंडलीय-स्थानीय के मिश्रण, की ओर इशारा करते हैं, जो विदेशी चैनलों के भारतीय भाषाओं में प्रसारण और मैक्डॉनाल्डस के केवल शाकाहारी-चिकन भारतीय मेन्यू में दिखता है। दूसरा, जेंडर और संस्कृति: परंपरागत सांस्कृतिक पहचान के समर्थक भूमंडलीकरण को गलत तरीके से हौवा बनाकर महिलाओं के विरुद्ध अन्यायपूर्ण प्रथाओं (सती से लेकर शिक्षा से बहिष्कार तक) का बचाव कर सकते हैं, हालाँकि भारत ने एक अधिक समावेशात्मक संस्कृति-परिभाषा देने वाली लोकतांत्रिक परंपरा बनाए रखी है। तीसरा, उपभोग की संस्कृति: कला, खाद्य, फैशन और पर्यटन की सांस्कृतिक खपत अब शहरों की वृद्धि को उस तरह आकार देती है जैसे 1970 के दशक तक उत्पादन उद्योग करता था (शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स), और मीडिया बचत की जगह खर्च को बढ़ावा देता है। चौथा, निगम संस्कृति, प्रबंधन सिद्धांत की एक शाखा जो कंपनी के कार्यक्रमों-रीतियों से कर्मचारी वफ़ादारी बढ़ाती है। अंत में, स्वदेशी शिल्प, साहित्यिक परंपराओं और ज्ञान व्यवस्थाओं को वास्तविक खतरा है: मुंबई के परेल-गिरगाँव थिएटर समूह निष्क्रिय हो गए, सरसिला-डुबक्का गाँव के बुनकरों की स्थिति बिगड़ी, और बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने तुलसी, हल्दी, रूद्राक्ष और बासमती चावल को पेटेंट कराने का प्रयास किया।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
मीना का परिवार आंध्र प्रदेश के एक छोटे शहर में रहता है। उसकी माँ एक परंपरागत हथकरघा बुनकर हैं, पर स्थानीय बाज़ार में सस्ता पावरलूम कपड़ा आने से ग्राहकों के ऑर्डर घटते जा रहे हैं, और उन्हें नई मशीनरी में निवेश करने के लिए पैसे की चिंता सता रही है। दूसरी ओर, मीना का बड़ा भाई हैदराबाद के एक कॉल सेंटर में रात की पाली में काम करता है, विदेशी ग्राहकों की समस्याएँ सुलझाता है, और अपनी तनख्वाह से परिवार के लिए नया फ्रिज खरीद पाया है।

(क) 1 अंक मीना के भाई की कॉल-सेंटर नौकरी किस तरह के नए अवसर का उदाहरण है, अध्याय के अनुसार?
उत्तर: यह भूमंडलीकरण और आईटी/बीपीओ क्रांति से नगरीय-अर्धनगरीय मध्यवर्गीय युवाओं के लिए खुले नए करियर अवसर का उदाहरण है।

(ख) 2 अंक अध्याय में वर्णित परंपरागत बुनकरों के अनुभव का उपयोग करते हुए बताएँ कि मीना की माँ की आजीविका को खतरा क्यों है।
उत्तर: अध्याय में वर्णित सरसिला और डुबक्का गाँव के बुनकरों की तरह, मीना की माँ के पास पावरलूम से मुकाबला करने और बदलती उपभोक्ता रुचियों के अनुरूप ढलने के लिए तकनीक में निवेश करने के साधन नहीं हैं, इसलिए सस्ता मशीन-निर्मित कपड़ा बाज़ार पर हावी होने से उनके ऑर्डर और आजीविका घट रहे हैं।

(ग) 3 अंक समाजशास्त्रीय कल्पनाशक्ति की अवधारणा का प्रयोग करते हुए मीना के परिवार के दोनों अनुभवों को भूमंडलीकरण की व्यापक प्रक्रिया से जोड़ें।
उत्तर: समाजशास्त्रीय कल्पनाशक्ति व्यक्ति (सूक्ष्म) को समाज और भूमंडल (स्थूल) से जोड़ती है: मीना की माँ के घटते हथकरघा ऑर्डर और उसके भाई की नई कॉल-सेंटर आय, दोनों ही व्यक्तिगत अनुभव हैं, पर दोनों एक ही स्थूल प्रक्रिया, भूमंडलीकरण और उदारीकरण, से जुड़े हैं, जिसने भारत को भूमंडलीय बाज़ार, सस्ते मशीन-निर्मित माल और सूचना-प्रौद्योगिकी आधारित सेवा-कार्य के लिए एक साथ खोल दिया। एक ही भूमंडलीय शक्ति परिवार के एक सदस्य को लाभ पहुँचाती है जबकि दूसरे की आजीविका को खतरे में डालती है, ठीक वही असमान प्रभाव जो यह अध्याय बताता है।