इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. भीष्म साहनी को किस उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?
उत्तर: भीष्म साहनी को ‘तमस’ उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
प्र. यह पाठ किस आत्मकथा का अंश है?
उत्तर: यह पाठ भीष्म साहनी की आत्मकथा ‘आज के अतीत’ का एक अंश है।
प्र. लेखक के भाई का नाम बताइए और वे सेवाग्राम में क्या काम करते थे।
उत्तर: लेखक के भाई का नाम बलराज था, वे सेवाग्राम में ‘नयी तालीम’ पत्रिका के सह-संपादक थे।
प्र. गांधी जी रोज़ किस समय घूमने निकलते थे?
उत्तर: गांधी जी रोज़ प्रातः सात बजे घूमने निकलते थे।
प्र. गांधी जी की टोली में लेखक ने किन दो लोगों को पहचाना?
उत्तर: लेखक ने डॉ. सुशीला नय्यर और गांधी जी के निजी सचिव महादेव देसाई को पहचाना।
प्र. काश्मीर में नेहरू जी की शोभायात्रा किस नदी पर निकाली गई?
उत्तर: नेहरू जी की शोभायात्रा झेलम नदी पर निकाली गई।
प्र. ‘लोटस’ पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक कौन थे?
उत्तर: ‘लोटस’ पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक फैज़ अहमद फैज़ थे।
प्र. यास्सेर अराफ़ात के नेतृत्व में ट्यूनिस में किस सरकार का मुख्यालय था?
उत्तर: ट्यूनिस में यास्सेर अराफ़ात के नेतृत्व में फ़िलिस्तीनी अस्थायी सरकार का मुख्यालय (सदरमुकाम) था।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. भीष्म साहनी की भाषा-शैली की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: भीष्म साहनी की भाषा में उर्दू शब्दों के प्रयोग से विषय को आत्मीयता मिलती है, और उनकी भाषा-शैली में पंजाबी भाषा की सोंधी महक भी महसूस होती है। वे छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग करके विषय को प्रभावी और रोचक बना देते हैं।
प्र. ‘संस्मरण’ विधा किसे कहते हैं?
उत्तर: संस्मरण ऐसी गद्य-विधा है जिसमें लेखक अपने जीवन की किसी वास्तविक घटना या व्यक्ति से जुड़ी स्मृतियों को शब्दों में उतारता है। यह आत्मकथा का हिस्सा हो सकता है, पर पूरी जीवन-कहानी नहीं बल्कि कुछ चुने हुए क्षणों का चित्रण होता है।
प्र. गांधी जी ने रावलपिंडी के बारे में क्या याद किया?
उत्तर: लेखक द्वारा रावलपिंडी का ज़िक्र किए जाने पर गांधी जी रुक गए, उनकी आँखों में चमक आई और उन्होंने कहा, ‘याद है। मैं कोहाट से रावलपिंडी गया था… मिस्टर जॉन कैसे हैं?’ मिस्टर जॉन रावलपिंडी के जाने-माने मुस्लिम बैरिस्टर थे, जिनके यहाँ गांधी जी शायद ठहरे थे।
प्र. सेवाग्राम में जापानी भिक्षु क्या करता था?
उत्तर: एक जापानी भिक्षु अपने चीवर वस्त्रों में गांधी जी के आश्रम की प्रदक्षिणा करता, लगभग मीलभर के घेरे में बार-बार अपना ‘गाँग’ बजाता हुआ आगे बढ़ता। उसकी प्रदक्षिणा प्रार्थना के समय समाप्त होती, जब वह गांधी जी को आदरपूर्वक प्रणाम करके एक ओर बैठ जाता।
प्र. सेवाग्राम में लेखक को कौन-कौन से देशभक्त मिले?
उत्तर: लेखक को सेवाग्राम में पृथ्वीसिंह आज़ाद (जिन्होंने हथकड़ियों समेत भागती रेलगाड़ी से छलाँग लगाकर भागने में सफलता पाई थी), मीरा बेन, खान अब्दुल गफ़्फ़ार खान, और कुछ दिनों के लिए राजेंद्र बाबू मिले।
प्र. भोज की मेज़ पर धर्म को लेकर क्या बहस हुई?
उत्तर: धर्म की चर्चा में रामेश्वरी नेहरू और जवाहरलाल जी के बीच बहस-सी छिड़ गई। एक बार तो जवाहरलाल जी बड़ी गरमजोशी के साथ तनिक तुनककर बोले, ‘मैं भी धर्म के बारे में कुछ जानता हूँ।’ रामेश्वरी चुप रहीं, शीघ्र ही जवाहरलाल जी ठंडे पड़ गए और धीरे से बोले, ‘आप लोगों को एक किस्सा सुनाता हूँ।’
प्र. ट्यूनिस में लेखक और उनकी पत्नी को भोज में क्यों झेंप हुई?
उत्तर: पाठ में लेखक कहते हैं, ‘वहाँ पहुँचे तो बड़ी झेंप हुई।’ उनके पहुँचने पर यास्सेर अराफ़ात अपने दो-एक साथियों के साथ बाहर आए और उन्हें अंदर लिवा ले गए। संपादक ने कार्यक्रम का ब्यौरा नहीं दिया था। लेखक केवल अनुमान लगाते हैं: ‘संभव है संपादक महोदय ने सुरक्षा की दृष्टि से हमें खोलकर न बताया हो कि वास्तव में हम दोनों को दिन के भोजन पर आमंत्रित किया गया था।’
प्र. भोज की मेज़ पर क्या रखा था और लेखक व उनकी पत्नी को कहाँ बिठाया गया?
उत्तर: मेज़ पर एक बड़ा भुना हुआ बकरा रखा था, जो लगभग आधी मेज़ घेरे हुए था। लेखक और उनकी पत्नी को कमरे के बाईं ओर बिठाया गया, जहाँ चाय-पान का प्रबंध था, और यास्सेर अराफ़ात उनके साथ ही बैठ गए।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया था? (NCERT)
उत्तर: लेखक लगभग सन् 1938 में, जिस वर्ष कांग्रेस का हरिपुरा अधिवेशन हुआ था, सेवाग्राम गया था। उसके भाई बलराज वहाँ ‘नयी तालीम’ पत्रिका के सह-संपादक के रूप में रहते थे, और लेखक कुछ दिन उनके साथ बिताने के लिए वहाँ पहुँचा था।
प्र. लेखक का गांधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव किस प्रकार का रहा? (NCERT)
उत्तर: पहला अनुभव सकुचाने और उत्सुकता से भरा रहा। लेखक तड़के जगकर गांधी जी की राह देखने लगा। बलराज सोते रह गए, इसलिए दोनों को टोली से आगे बढ़कर मिलना पड़ा। गांधी जी ने हँसकर ‘इसे भी घेर लिया’ कहा, और लेखक को हूबहू वही व्यक्ति दिखे जैसा उन्होंने चित्रों में देखा था: यह अनुभव लेखक के लिए रोमांचक और यादगार रहा।
प्र. रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार किस प्रकार का था? (NCERT)
उत्तर: गांधी जी का व्यवहार अत्यंत सहज, सेवाभावी और स्नेहपूर्ण था। ‘ज़रूरी मीटिंग चल रही है’ कहे जाने के बावजूद वे स्वयं चले आए, बालक के फूले पेट पर हाथ फेरा, उसे हँसते हुए ‘पागल’ कहा, मुँह में उँगली डालकर कै करवाई और उसकी पीठ पर हाथ रखे तब तक झुके रहे जब तक उसका पेट हलका नहीं हो गया। उनके चेहरे पर लेशमात्र भी नाराज़गी नहीं थी, वे हँसते हुए ही वहाँ से गए।
प्र. काश्मीर के लोगों ने नेहरू जी का स्वागत किस प्रकार किया? (NCERT)
उत्तर: शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में झेलम नदी पर, शहर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक (सातवें पुल से अमीराकदल तक), नावों में नेहरू जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। नदी के दोनों ओर हज़ारों-हज़ार काश्मीरी निवासी अदम्य उत्साह के साथ उनका स्वागत कर रहे थे: लेखक इसे ‘अद्भुत दृश्य’ कहते हैं।
प्र. अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता स्पष्ट होती है? (NCERT)
उत्तर: यह घटना नेहरू जी के धैर्य, विनम्रता और सहनशीलता को दिखाती है। लेखक ने बचकानेपन में अखबार थामे रखा, फिर भी नेहरू जी झुँझलाए नहीं: वे चुपचाप खड़े रहे और अंत में बहुत विनम्रता से पूछा, ‘आपने देख लिया हो तो क्या मैं एक नज़र देख सकता हूँ?’ इससे उनका बड़प्पन और शालीनता झलकती है।
प्र. फ़िलिस्तीन के प्रति भारत का रवैया बहुत सहानुभूतिपूर्ण एवं समर्थन भरा क्यों था? (NCERT)
उत्तर: भारत के नेताओं ने फ़िलिस्तीन के प्रति साम्राज्यवादी शक्तियों के अन्यायपूर्ण रवैए की खुलकर निंदा की थी, और फ़िलिस्तीन आंदोलन के प्रति भारतवासियों में विशाल स्तर पर सहानुभूति और समर्थन था। पाठ इस रवैये का अलग से कोई कारण नहीं देता; बातचीत में इन्हीं बातों की चर्चा हुई थी। अराफ़ात का यह कथन कि ‘वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं’, दोनों देशों के बीच इसी आदर और मैत्री के भाव का उदाहरण है।
प्र. अराफ़ात के आतिथ्य-प्रेम से संबंधित किन्हीं दो घटनाओं का वर्णन कीजिए। (NCERT)
उत्तर: पहली घटना: बातचीत के बीच-बीच में अराफ़ात स्वयं लेखक और उनकी पत्नी को फल छील-छीलकर खिला रहे थे और उनके लिए शहद की चाय बना रहे थे। दूसरी घटना: भोजन के समय जब लेखक गुसलखाने से बाहर निकले, तो यास्सेर अराफ़ात स्वयं तौलिया हाथ में लिए बाहर खड़े मिले: इससे लेखक को बड़ी झेंप हुई।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. अराफ़ात ने ऐसा क्यों कहा कि ‘वे आपके ही नहीं हमारे भी नेता हैं। उतने ही आदरणीय जितने आपके लिए।’ इस कथन के आधार पर गांधी जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए। (NCERT)
उत्तर: जब लेखक ने बातचीत में दो-एक बार गांधी जी और भारत के अन्य नेताओं का ज़िक्र किया, तो अराफ़ात ने कहा, ‘वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं। उतने ही आदरणीय जितने आपके लिए।’ पाठ इस कथन का कोई और कारण नहीं बताता। बातचीत का प्रसंग यह था कि भारत के नेताओं ने फ़िलिस्तीन के प्रति साम्राज्यवादी शक्तियों के अन्यायपूर्ण रवैए की भर्त्सना की थी, और भारतवासियों में फ़िलिस्तीन आंदोलन के प्रति विशाल स्तर पर सहानुभूति और समर्थन था। इस कथन के आधार पर गांधी जी एक ऐसे नेता के रूप में सामने आते हैं जिनका आदर भारत की सीमाओं के बाहर भी था: फ़िलिस्तीन के नेता के लिए वे उतने ही आदरणीय थे जितने भारतवासियों के लिए। पाठ के परिचय के अनुसार इस पाठ के माध्यम से राष्ट्रीयता, देशप्रेम और अंतरराष्ट्रीय मैत्री जैसे मुद्दे भी उजागर होते हैं; यह कथन उनमें से अंतरराष्ट्रीय मैत्री के भाव से जुड़ता है।
प्र. नेहरू जी द्वारा सुनाई गई कहानी को अपने शब्दों में लिखिए। (NCERT, भाषा-शिल्प)
उत्तर: पेरिस में एक गरीब बाज़ीगर रहता था, जो करतब दिखाकर अपना पेट पालता था और अब बूढ़ा हो चला था। क्रिसमस के दिन जब सब लोग सजे-धजे फूल और उपहार लेकर माता मरियम को श्रद्धांजलि देने गिरजे जा रहे थे, बाज़ीगर हताश खड़ा था क्योंकि उसके पास न कोई उपहार था, न ही किसी फटेहाल को गिरजे में जाने दिया जाता। तभी उसे विचार आया कि वह अपने करतब दिखाकर ही माता मरियम की अभ्यर्थना कर सकता है। गिरजा खाली होते ही वह चुपके से अंदर घुसा और तन्मयता से करतब दिखाने लगा। उसकी हाँफने की आवाज़ सुनकर बड़ा पादरी दौड़ा आया और बाज़ीगर को सिर के बल खड़ा देखकर क्रोधित हो गया। पर तभी उसने देखा कि माता मरियम की मूर्ति स्वयं मंच से उतरकर बाज़ीगर के पास आ गई है और अपने आँचल से उसका पसीना पोंछ रही है। पाठ इसका संदेश अलग से नहीं बताता; इस कहानी से यह भाव झलकता है कि सच्ची श्रद्धा साधनों पर निर्भर नहीं होती।
प्र. पाठ ‘गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात’ के आधार पर तीनों नेताओं के व्यक्तित्व की तुलना कीजिए।
उत्तर: तीनों नेता अपनी-अपनी शैली में महान थे। गांधी जी सहज, विनोदी और सेवाभावी दिखते हैं: रोगी बालक का उपचार करते हुए भी वे हास्य नहीं छोड़ते, और कुटिया में रहने वाले एक रोगी की रोज़ ख़बर लेना उनकी करुणा दिखाता है। नेहरू जी में धैर्य, विनम्रता और गहरी सांस्कृतिक समझ झलकती है: धर्म पर बहस में बड़ी गरमजोशी के साथ तनिक तुनककर बोलने के बाद वे शीघ्र ही ठंडे पड़ जाते हैं और एक किस्सा सुनाते हैं, और अखबार माँगते समय भी विनम्रता नहीं छोड़ते। यास्सेर अराफ़ात एक कुशल, आत्मीय मेज़बान के रूप में सामने आते हैं: स्वयं अतिथियों का स्वागत करना, फल खिलाना, तौलिया लेकर खड़े रहना, यह सब उनकी सहजता और अतिथि-प्रेम दिखाता है। तीनों में एक समानता है: तीनों बड़े राजनैतिक कद के बावजूद रोज़मर्रा के, आत्मीय क्षणों में बेहद सरल और मानवीय दिखते हैं।
प्र. इस पाठ के माध्यम से लेखक ने राष्ट्रीयता, देशप्रेम और अंतरराष्ट्रीय मैत्री के जो मुद्दे उठाए हैं, उन्हें स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पाठ में राष्ट्रीयता और देशप्रेम गांधी जी और नेहरू जी के प्रसंगों में झलकते हैं: सेवाग्राम में देशभक्तों (पृथ्वीसिंह आज़ाद, मीरा बेन, खान अब्दुल गफ़्फ़ार खान, राजेंद्र बाबू) का जमावड़ा और काश्मीर में जनता का नेहरू जी के प्रति अपार प्रेम, दोनों भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की गहराई दिखाते हैं। अंतरराष्ट्रीय मैत्री का भाव यास्सेर अराफ़ात के प्रसंग में सबसे स्पष्ट है: भारत के नेताओं ने फ़िलिस्तीन के प्रति साम्राज्यवादी शक्तियों के अन्यायपूर्ण रवैए की भर्त्सना की थी, और भारतवासियों में फ़िलिस्तीन आंदोलन के प्रति विशाल स्तर पर सहानुभूति और समर्थन था। अराफ़ात का यह कहना कि गांधी जी ‘हमारे भी नेता हैं’, दोनों देशों के बीच आदर और मैत्री का भाव दिखाता है।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक लड़के का पेट किस कारण फूला हुआ था?
उत्तर: ईख (गन्ने का रस) अधिक मात्रा में पीने के कारण।
(ख) 2 अंक गांधी जी ने लड़के की मदद के लिए क्या-क्या किया?
उत्तर: गांधी जी ने उसके फूले पेट पर हाथ फेरा, उसे सहारा देकर उठाया, मुँह में उँगली डालकर कै कर देने को कहा, और उसका पेट हलका होने तक उसकी पीठ पर हाथ रखे झुके रहे।
(ग) 3 अंक इस घटना से गांधी जी के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषताएँ उजागर होती हैं?
उत्तर: यह घटना गांधी जी की सहजता, हास्य-बोध, धैर्य और सेवाभाव को उजागर करती है। ‘ज़रूरी मीटिंग चल रही है’ कहे जाने के बावजूद वे बालक के पास स्वयं चले आए, और पूरे समय उनके चेहरे पर लेशमात्र भी क्षोभ नहीं था: वे हँसते हुए ही उसका उपचार करते रहे।
(क) 1 अंक लेखक और उनकी पत्नी को कहाँ आमंत्रित किया गया था?
उत्तर: फ़िलिस्तीनी अस्थायी सरकार के सदरमुकाम (मुख्यालय) में।
(ख) 2 अंक लेखक को वहाँ पहुँचने पर झेंप क्यों हुई?
उत्तर: संपादक ने कार्यक्रम का ब्यौरा नहीं दिया था, और वहाँ पहुँचने पर स्वयं यास्सेर अराफ़ात अपने दो-एक साथियों के साथ बाहर आकर उन्हें अंदर ले गए। (आगे लेखक केवल अनुमान लगाते हैं: ‘संभव है’ संपादक ने सुरक्षा की दृष्टि से यह न बताया हो कि यह दिन के भोजन का निमंत्रण था।)
(ग) 3 अंक इस प्रसंग से यास्सेर अराफ़ात के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता झलकती है?
उत्तर: यह प्रसंग अराफ़ात की सहजता और आत्मीय आतिथ्य-भाव को दिखाता है: एक बड़े राजनैतिक नेता होते हुए भी वे स्वयं अपने अतिथियों का स्वागत करने बाहर आए।