कक्षा 12 भूगोल अध्याय 13 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. लौह खनिज व अलौह खनिज में क्या अंतर है? एक-एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर: लौह खनिजों में लौह अंश (आयरन) होता है, जैसे लौह अयस्क; अलौह खनिजों में लौह अंश नहीं होता, जैसे ताँबा या बॉक्साइट।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. अधात्विक खनिजों के दो उदाहरण दीजिए जो अकार्बनिक उत्पत्ति के हों।

उत्तर: अभ्रक और चूना-पत्थर (या ग्रेफाइट) अकार्बनिक उत्पत्ति के अधात्विक खनिज हैं।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. खनिजों को ‘दूसरी फ़सल’ क्यों नहीं कहा जा सकता?

उत्तर: क्योंकि खनिजों को भूगर्भिक रूप से बनने में बहुत लंबा समय लगता है और आवश्यकता पड़ने पर इन्हें तुरंत पुनर्भरित नहीं किया जा सकता, इसलिए इन्हें दुबारा उत्पन्न नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. भारत में पेट्रोलियम के नए आरक्षित भंडार किन बेसिनों में मिले हैं?

उत्तर: कृष्णा-गोदावरी तथा कावेरी बेसिनों में।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. ‘मंगलोर-कानपुर रेखा’ किस संदर्भ में महत्वपूर्ण है?

उत्तर: किताब के अनुसार भारत के अधिकांश प्रमुख खनिज इस कल्पित रेखा के पूर्व में पाए जाते हैं।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. दांडी मार्च का आयोजन किसने और किस कारण किया था?

उत्तर: 1930 में महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार के नमक कानून (नमक कर) के विरोध में साबरमती आश्रम से गुजरात के दांडी तक नमक सत्याग्रह के रूप में दांडी मार्च का आयोजन किया था। यह गुजरात व राजस्थान के नमक के समृद्ध स्रोतों से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रसंग है, जिसे किताब का बॉक्स स्वयं जानने के लिए कहता है।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. पाठ्यपुस्तक के अनुसार, लौह अयस्क के कुल आरक्षित भंडारों का लगभग 95% भाग किन राज्यों में स्थित है?

उत्तर: ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गोआ, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. ओडिशा में लौह अयस्क किन पहाड़ी शृंखलाओं में पाया जाता है?

उत्तर: सुंदरगढ़, मयूरभंज तथा झार की पहाड़ी शृंखलाओं में।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. हेमेटाइट और मैग्नेटाइट क्या हैं?

उत्तर: ये भारत में पाए जाने वाले लौह अयस्क के दो प्रमुख प्रकार हैं। अपनी सर्वोत्तम गुणवत्ता के कारण भारतीय लौह अयस्क की विश्व-भर में भारी माँग है, और भारत में एशिया के विशालतम लौह अयस्क आरक्षित भंडार हैं।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. मैंगनीज़ का उपयोग किन उद्योगों में होता है, और यह मुख्यतः किन शैलों से संबद्ध है?

उत्तर: मैंगनीज़ का उपयोग लौह अयस्क के प्रगलन तथा लौह-मिश्रातु के विनिर्माण में होता है। यह लगभग सभी भूगर्भिक संरचनाओं में पाया जाता है, परंतु मुख्य रूप से धारवाड़ शैल क्रम से संबद्ध है।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. मध्य प्रदेश में मैंगनीज़ की पट्टी किन ज़िलों तक विस्तृत है?

उत्तर: मध्य प्रदेश में मैंगनीज़ की पट्टी बालाघाट, छिंदवाड़ा, निमाड़, मांडला और झाबुआ ज़िलों तक विस्तृत है।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. बॉक्साइट के अलौह-खनिजों में महत्वपूर्ण होने का क्या कारण है?

उत्तर: बॉक्साइट एक ऐसा अयस्क है जिसका उपयोग एल्यूमिनियम के विनिर्माण में किया जाता है, और बॉक्साइट को छोड़कर भारत की स्थिति अन्य सभी अलौह-खनिजों के मामले में निम्न है, इसलिए बॉक्साइट भारत के लिए विशेष महत्व का है।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. बॉक्साइट मुख्यतः किन प्रकार के निक्षेपों तथा चट्टानों से संबद्ध है?

उत्तर: बॉक्साइट मुख्यतः टरश्यरी निक्षेपों में पाया जाता है और लैटराइट चट्टानों से संबद्ध है, जो प्रायद्वीपीय भारत के पठारी क्षेत्रों, पर्वत श्रेणियों तथा तटीय भागों में विस्तृत रूप से मिलती हैं।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. ताँबे के तीन भौतिक गुणधर्म बताइए जो इसे उपयोगी बनाते हैं।

उत्तर: ताँबा एक मिश्रातु योग्य, आघातवर्ध्य तथा तन्य धातु है, इसीलिए यह विद्युत उद्योग (तार, मोटरें, ट्रांसफार्मर, जेनेरेटर बनाने) के लिए अपरिहार्य है।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. ताँबे के निक्षेप भारत में मुख्यतः कहाँ पाए जाते हैं?

उत्तर: ताँबे के निक्षेप मुख्यतः झारखंड के सिंहभूमि ज़िले में, मध्य प्रदेश के बालाघाट में, तथा राजस्थान के झुंझुनु एवं अलवर ज़िलों में पाए जाते हैं।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. स्थानीय खपत के लिए भारत में कौन-से अधात्विक खनिज उत्पन्न किए जाते हैं (अभ्रक के अतिरिक्त)?

उत्तर: स्थानीय खपत के लिए चूना-पत्थर, डोलोमाइट तथा फॉस्फेट उत्पन्न किए जाते हैं।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. अभ्रक भारत में कहाँ-कहाँ पाया जाता है?

उत्तर: किताब के अनुसार भारत में अभ्रक मुख्यतः झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना व राजस्थान में पाया जाता है। इसके पश्चात् तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश आते हैं। झारखंड में उच्च गुणवत्ता वाला अभ्रक निचले हज़ारीबाग पठार की लगभग 150 कि.मी. लंबी व 22 कि.मी. चौड़ी पट्टी में पाया जाता है। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िले में सर्वोत्तम प्रकार के अभ्रक का उत्पादन होता है, और राजस्थान में अभ्रक की पट्टी जयपुर से भीलवाड़ा और उदयपुर के आसपास लगभग 320 कि.मी. लंबाई में विस्तृत है। कर्नाटक (मैसूर व हासन), तमिलनाडु (कोयम्बटूर, तिरुचिरापल्ली, मदुरई, कन्याकुमारी) और पश्चिम बंगाल (पुरुलिया, बाँकुरा) में भी अभ्रक के निक्षेप पाए जाते हैं।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. कोयला भारत में मुख्यतः किन दो भूगर्भिक कालों की शैल क्रमों में पाया जाता है, और इनमें से किसका महत्व अधिक है?

उत्तर: कोयला मुख्य रूप से दो भूगर्भिक कालों की शैल क्रमों में पाया जाता है: गोंडवाना और टर्शियरी निक्षेप। भारत में कोयला निक्षेपों का लगभग 80 प्रतिशत भाग बिटुमिनियस प्रकार का तथा गैर-कोककारी श्रेणी का है, और भारत का सबसे महत्वपूर्ण कोयला दामोदर घाटी में स्थित गोंडवाना कोयला क्षेत्रों से आता है, जो झारखंड-बंगाल कोयला पट्टी में हैं।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. झरिया और रानीगंज कोयला क्षेत्रों के बारे में क्या जानते हैं?

उत्तर: झरिया सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र है, जिसके बाद रानीगंज आता है। दोनों झारखंड-बंगाल कोयला पट्टी में स्थित हैं और दामोदर घाटी के गोंडवाना कोयला क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इस पट्टी के अन्य महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्र बोकारो, गिरीडीह तथा करनपुरा (सभी झारखंड में) हैं।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. भारत में महत्वपूर्ण कोयला खनन केंद्रों के नाम व उनके राज्य लिखिए।

उत्तर: मध्य प्रदेश में सिंगरौली (जिसका कुछ भाग उत्तर प्रदेश में भी है), छत्तीसगढ़ में कोरबा, ओडिशा में तलचर तथा रामपुर, महाराष्ट्र में चांदा-वर्धा, काम्पटी और बांदेर, तेलंगाना में सिंगरेनी, तथा आंध्र प्रदेश में पांडुर महत्वपूर्ण कोयला खनन केंद्र हैं।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. टर्शियरी कोयला भारत में कहाँ पाया जाता है, और यह गोंडवाना कोयले से किस प्रकार भिन्न क्षेत्रों में है?

उत्तर: टर्शियरी कोयला असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय तथा नागालैंड में पाया जाता है (जैसे दरानगिरी, चेरापूँजी, मेवलांग व लैंग्रिन मेघालय में; माकुम, जयपुर व नज़ीरा ऊपरी असम में; नाम्चिक-नाम्फुक अरुणाचल प्रदेश में; कालाकोट जम्मू-कश्मीर में)। गोंडवाना कोयला इसके विपरीत मुख्यतः प्रायद्वीपीय भारत (झारखंड-बंगाल पट्टी, म.प्र., छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश) की नदी घाटियों में पाया जाता है। दोनों अलग-अलग भूगर्भिक कालों और अलग-अलग क्षेत्रों से संबंधित हैं।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. भारत में तेल शोधन कारखानों के दो प्रकार कौन-से हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: कुओं से निकाला गया कच्चा तेल अनेक अशुद्धियों से युक्त होता है और इसे सीधे प्रयोग में नहीं लाया जा सकता, इसे शोधित करने की आवश्यकता होती है। भारत में दो प्रकार के तेल शोधन कारखाने हैं: (क) क्षेत्र आधारित, उदाहरण डिगबोई तेल शोधन कारखाना, और (ख) बाज़ार आधारित, उदाहरण बरौनी तेल शोधन कारखाना।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. प्राकृतिक गैस के प्रमुख उपयोग बताइए और भारत में इसके प्रमुख भंडारों के नाम लिखिए।

उत्तर: प्राकृतिक गैस का उपयोग घरेलू व औद्योगिक ईंधन के रूप में, बिजली क्षेत्र में विद्युत उत्पादन हेतु, उद्योगों में हीटिंग के लिए, तथा रासायनिक, पेट्रोकैमिकल व उर्वरक उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। गैस-अवसंरचना के विस्तार से यह परिवहन ईंधन (CNG) व घरेलू खाना पकाने के ईंधन (PNG) के रूप में भी लोकप्रिय हो रही है। भारत के प्रमुख गैस भंडार मुंबई हाई व पश्चिमी तट के संबद्ध क्षेत्र (खंभात बेसिन सहित) तथा पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी बेसिन में हैं।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. भारत में लौह खनिजों (लौह अयस्क व मैंगनीज़) के वितरण का विस्तृत विवरण दीजिए।

उत्तर: भारत लौह खनिजों के संचय व उत्पादन दोनों में अच्छी स्थिति में है। लौह अयस्क के दो प्रमुख प्रकार हेमेटाइट व मैग्नेटाइट हैं, और भारत में एशिया के विशालतम लौह अयस्क आरक्षित भंडार हैं। किताब के अनुसार कुल भंडारों का लगभग 95% भाग ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, गोआ, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु में स्थित है। ओडिशा में सुंदरगढ़, मयूरभंज व झार की पहाड़ियों में (मुख्य खदानें गुरुमहिसानी, सुलाएपत, बादामपहाड़, किरुबुरू, बोनाई); झारखंड में नोआमंडी व गुआ (पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम ज़िलों में); यह पट्टी आगे दुर्ग, दांतेवाड़ा और बैलाडीला तक विस्तृत है (डल्ली और राजहरा प्रमुख खदानें); कर्नाटक में बल्लारि ज़िले का संदूर-होसपेटे क्षेत्र तथा चिकमगलूरु ज़िले की बाबा बूदन पहाड़ियाँ व कुद्रेमुख लौह अयस्क के प्रमुख क्षेत्र हैं। मैंगनीज़ का उपयोग लौह-प्रगलन व लौह-मिश्रातु में होता है और यह मुख्यतः धारवाड़ शैल क्रम से संबद्ध है; मध्य प्रदेश (बालाघाट-छिंदवाड़ा-निमाड़-मांडला-झाबुआ) व ओडिशा (बोनाई, केंदूझर, सुंदरगढ़, गंगपुर, कोरापुट, कालाहांडी, बोलनगीर) अग्रणी उत्पादक हैं; कर्नाटक व महाराष्ट्र भी उत्पादक हैं, यद्यपि महाराष्ट्र की खदानें इस्पात संयंत्रों से दूर होने के कारण नुकसान में हैं।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. 1956 से पहले और बाद में भारत में तेल अन्वेषण व उत्पादन की स्थिति में क्या परिवर्तन आया?

उत्तर: 1956 से पहले असम का डिगबोई क्षेत्र भारत का एकमात्र तेल उत्पादक क्षेत्र था। 1956 में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग की स्थापना के बाद व्यवस्थित ढंग से तेल अन्वेषण व उत्पादन प्रारंभ हुआ और परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। असम में डिगबोई के अतिरिक्त नहारकटिया व मोरान भी महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र बन गए। गुजरात में अंकलेश्वर, कालोल, मेहसाणा, नवागाम, कोसांबा तथा लुनेज जैसे नए तेल क्षेत्र खोजे गए। मुंबई नगर से 160 कि.मी. दूर अपतटीय क्षेत्र मुंबई हाई की खोज 1973 में हुई और वहाँ 1976 में उत्पादन प्रारंभ हुआ। हाल के वर्षों में देश के दूरतम पश्चिमी व पूर्वी तटों पर भी नए तेल व प्राकृतिक गैस भंडार मिले हैं, विशेषकर पूर्वी तट पर कृष्णा-गोदावरी व कावेरी बेसिनों में अन्वेषणात्मक कूपों में।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. भारत में नाभिकीय ऊर्जा के विकास तथा प्रमुख नाभिकीय खनिजों व परियोजनाओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: नाभिकीय ऊर्जा के उत्पादन में प्रयुक्त होने वाले महत्वपूर्ण खनिज यूरेनियम तथा थोरियम हैं। यूरेनियम निक्षेप धारवाड़ शैलों में पाए जाते हैं और भौगोलिक रूप से सिंहभूम ताँबा पट्टी के साथ कई स्थानों पर मिलते हैं; यह राजस्थान के उदयपुर, अलवर व झुंझुनू ज़िलों, छत्तीसगढ़ के दुर्ग ज़िले, महाराष्ट्र के भंडारा ज़िले तथा हिमाचल प्रदेश के कुल्लू ज़िले में भी पाया जाता है। थोरियम मुख्यतः केरल के तटीय क्षेत्र की बालू में मोनाज़ाइट व इल्मेनाइट से प्राप्त किया जाता है; विश्व के सबसे समृद्ध मोनाज़ाइट निक्षेप केरल के पालाक्काड व कोल्लम ज़िलों, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्नम तथा ओडिशा में महानदी के नदी डेल्टा में पाए जाते हैं। परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना 1948 में हुई थी; 1954 में ट्रॉम्बे में परमाणु ऊर्जा संस्थान की स्थापना के बाद इस दिशा में प्रगति हुई, जिसे 1967 में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के रूप में पुनः नामित किया गया। महत्वपूर्ण नाभिकीय ऊर्जा परियोजनाएँ हैं: तारापुर (महाराष्ट्र), कोटा के पास रावतभाटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरोरा (उत्तर प्रदेश), कैगा (कर्नाटक) तथा काकरापाड़ा (गुजरात)।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. भारत में गैर-परंपरागत (अपरंपरागत) ऊर्जा संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है? चर्चा कीजिए।

उत्तर: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा नाभिकीय ऊर्जा जैसे जीवाश्म ईंधन के स्रोत समाप्य कच्चे माल का प्रयोग करते हैं, इसीलिए भारत सौर, पवन, जल, भूतापीय ऊर्जा तथा जैवभार जैसे सतत पोषणीय (नवीकरणीय) स्रोतों का विकास कर रहा है। सौर ऊर्जा फोटोवोल्टाइक सेलों व सौर-तापीय प्रौद्योगिकी से प्राप्त की जाती है और गुजरात-राजस्थान में इसकी अधिक संभावनाएँ हैं; यह कोयला/तेल संयंत्रों से 7% तथा नाभिकीय ऊर्जा से 10% अधिक प्रभावी मानी जाती है। पवन ऊर्जा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र व कर्नाटक में टरबाइनों के माध्यम से उत्पन्न की जा रही है। भूतापीय ऊर्जा का एक संयंत्र हिमाचल प्रदेश के मनीकरण में अधिकृत किया जा चुका है। जैव-ऊर्जा परियोजना के रूप में नई दिल्ली के ओखला में नगरपालिका कचरे को ऊर्जा में बदला जा रहा है। तटों पर ज्वारीय व तरंग ऊर्जा की व्यापक संभावनाएँ हैं, यद्यपि अभी तक इनका उपयोग नहीं किया गया है।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
एक खनिज निश्चित रासायनिक एवं भौतिक गुणधर्मों (विशिष्टताओं) के साथ कार्बनिक या अकार्बनिक उत्पत्ति का एक प्राकृतिक पदार्थ है। खनिजों की कुछ निश्चित विशेषताएँ होती हैं। ये क्षेत्र में असमान रूप से वितरित होते हैं। खनिजों की गुणवत्ता और मात्रा के बीच प्रतिलोमी संबंध पाया जाता है, अर्थात् अधिक गुणवत्ता वाले खनिज, कम गुणवत्ता वाले खनिजों की तुलना में कम मात्रा में पाए जाते हैं। तीसरी प्रमुख विशेषता यह है कि ये सभी खनिज समय के साथ समाप्त हो जाते हैं।

(क) 1 अंक खनिज की परिभाषा में किस प्रकार की उत्पत्ति का उल्लेख है?
उत्तर: कार्बनिक या अकार्बनिक उत्पत्ति।

(ख) 1 अंक खनिजों की गुणवत्ता व मात्रा के बीच किस प्रकार का संबंध पाया जाता है?
उत्तर: प्रतिलोमी (व्युत्क्रम) संबंध: अधिक गुणवत्ता वाले खनिज कम मात्रा में पाए जाते हैं।

(ग) 2 अंक गद्यांश के अनुसार खनिजों की तीसरी प्रमुख विशेषता क्या है, और इसका क्या निहितार्थ है?
उत्तर: तीसरी प्रमुख विशेषता यह है कि सभी खनिज समय के साथ समाप्त हो जाते हैं। इसका निहितार्थ यह है कि इन्हें भूगर्भिक रूप से बनने में लंबा समय लगता है और आवश्यकता के समय तुरंत पुनर्भरित नहीं किया जा सकता, इसलिए इन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए और इनका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

केस स्टडी
सतत पोषणीय विकास की चुनौती के लिए आर्थिक विकास की चाह का पर्यावरणीय मुद्दों से समन्वय आवश्यक है। संसाधन उपयोग के परंपरागत तरीकों के परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में अपशिष्ट के साथ-साथ अन्य पर्यावरणीय समस्याएँ भी पैदा होती हैं। अतएव, सतत पोषणीय विकास भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों के संरक्षण का आह्वान करता है। धात्विक खनिजों के मामले में, छाजन धातुओं का उपयोग, धातुओं का पुनर्चक्रण संभव करेगा। ताँबा, सीसा और जस्ते जैसी धातुओं में जिनमें भारत के भंडार अपर्याप्त हैं, छाजन (स्क्रैप) का प्रयोग विशेष रूप से सार्थक है।

(क) 1 अंक सतत पोषणीय विकास के लिए किन दो पक्षों में समन्वय आवश्यक है?
उत्तर: आर्थिक विकास की चाह और पर्यावरणीय मुद्दों में समन्वय आवश्यक है।

(ख) 1 अंक गद्यांश के अनुसार परंपरागत संसाधन-उपयोग के तरीकों का क्या परिणाम होता है?
उत्तर: बड़ी मात्रा में अपशिष्ट तथा अन्य पर्यावरणीय समस्याएँ पैदा होती हैं।

(ग) 2 अंक छाजन (स्क्रैप) का प्रयोग किन धातुओं के लिए विशेष रूप से सार्थक है, और क्यों?
उत्तर: ताँबा, सीसा और जस्ते जैसी धातुओं के लिए छाजन का प्रयोग विशेष रूप से सार्थक है, क्योंकि भारत के पास इन धातुओं के भंडार अपर्याप्त हैं, और स्क्रैप का पुनर्चक्रण धातुओं की खपत व नए खनन की आवश्यकता को घटाता है।

6 मानचित्र कार्य

मानचित्र कार्य: भारत का रेखा-मानचित्र

दिए गए रेखा-मानचित्र पर निम्नलिखित को उपयुक्त चिह्नों से अंकित कीजिए और उनके नाम लिखिए:

  1. मयूरभंज (लौह अयस्क खान) 1 अंक
  2. बैलाडीला (लौह अयस्क खान) 1 अंक
  3. रत्नागिरी (लौह अयस्क खान) 1 अंक
  4. बल्लारी (बेल्लारी) (लौह अयस्क खान) 1 अंक
  5. बालाघाट (मैंगनीज़ खान) 1 अंक
  6. शिवमोगा (शिमोगा) (मैंगनीज़ खान) 1 अंक
  7. हज़ारीबाग (ताँबा खान) 1 अंक
  8. सिंहभूम (ताँबा खान) 1 अंक
  9. खेतड़ी (ताँबा खान) 1 अंक
  10. कटनी (बॉक्साइट खान) 1 अंक
  11. बिलासपुर (बॉक्साइट खान) 1 अंक
  12. कोरापुट (बॉक्साइट खान) 1 अंक
  13. झरिया (कोयला खान) 1 अंक
  14. बोकारो (कोयला खान) 1 अंक
  15. रानीगंज (कोयला खान) 1 अंक
  16. निवेली (लिगनाइट कोयला खान) 1 अंक
  17. मथुरा (तेल शोधन कारखाना) 1 अंक
  18. जामनगर (तेल शोधन कारखाना) 1 अंक
  19. बरौनी (तेल शोधन कारखाना) 1 अंक

उत्तर-संकेत:

  1. मयूरभंज (लौह अयस्क खान): ओडिशा: ओडिशा की लौह अयस्क पहाड़ी शृंखलाएँ (सुंदरगढ़, मयूरभंज, झार), राज्य का उत्तरी भाग।
  2. बैलाडीला (लौह अयस्क खान): छत्तीसगढ़: दुर्ग-दांतेवाड़ा-बैलाडीला पट्टी, राज्य का सुदूर दक्षिण।
  3. रत्नागिरी (लौह अयस्क खान): महाराष्ट्र: कोंकण तट का ज़िला, मुंबई के दक्षिण में।
  4. बल्लारी (बेल्लारी) (लौह अयस्क खान): कर्नाटक: बल्लारी ज़िले का संदूर-होसपेटे क्षेत्र, पूर्वी कर्नाटक।
  5. बालाघाट (मैंगनीज़ खान): मध्य प्रदेश: बालाघाट-छिंदवाड़ा-निमाड़-मांडला-झाबुआ पट्टी, दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश।
  6. शिवमोगा (शिमोगा) (मैंगनीज़ खान): कर्नाटक: पश्चिमी कर्नाटक, पश्चिमी घाट के पूर्व में पठार पर।
  7. हज़ारीबाग (ताँबा खान): झारखंड: हज़ारीबाग पठार, उत्तरी झारखंड।
  8. सिंहभूम (ताँबा खान): झारखंड: दक्षिण-पूर्वी झारखंड, सिंहभूम ताँबा पट्टी।
  9. खेतड़ी (ताँबा खान): राजस्थान: झुंझुनू ज़िला, उत्तर-पूर्वी राजस्थान (अरावली पट्टी)।
  10. कटनी (बॉक्साइट खान): मध्य प्रदेश: कटनी-जबलपुर क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश।
  11. बिलासपुर (बॉक्साइट खान): छत्तीसगढ़: उत्तरी छत्तीसगढ़, अमरकंटक पठार के निकट।
  12. कोरापुट (बॉक्साइट खान): ओडिशा: दक्षिणी ओडिशा (पूर्वी घाट क्षेत्र)।
  13. झरिया (कोयला खान): झारखंड: दामोदर घाटी; भारत का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र।
  14. बोकारो (कोयला खान): झारखंड: दामोदर घाटी, झरिया के पश्चिम में।
  15. रानीगंज (कोयला खान): पश्चिम बंगाल: दामोदर घाटी, झारखंड सीमा के ठीक पूर्व में।
  16. निवेली (लिगनाइट कोयला खान): तमिलनाडु: चेन्नई के दक्षिण में, पूर्वी तट के पास; लिगनाइट।
  17. मथुरा (तेल शोधन कारखाना): उत्तर प्रदेश: दिल्ली के दक्षिण में, यमुना के किनारे।
  18. जामनगर (तेल शोधन कारखाना): गुजरात: कच्छ की खाड़ी का तट, सौराष्ट्र।
  19. बरौनी (तेल शोधन कारखाना): बिहार: गंगा के किनारे, उत्तर बिहार; बाज़ार-आधारित तेल शोधन कारखाना।