कक्षा 12 भूगोल अध्याय 13 NCERT Solutions (प्रश्नावली के हल) हिंदी में

NCERT की पाठ्यपुस्तक भारत: लोग और अर्थव्यवस्था के अध्याय 5 (खनिज तथा ऊर्जा संसाधन) के “अभ्यास” खंड के सभी प्रश्न (और अध्याय के बीच में पूछे गए प्रश्न व क्रियाकलाप), ठीक उसी रूप में जैसे किताब के हिंदी संस्करण में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।

1 बहुविकल्पीय प्रश्न (नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए)

प्रश्न 1 (i)

प्र. निम्नलिखित में से किस राज्य में प्रमुख तेल क्षेत्र स्थित हैं?
(क) असम
(ख) बिहार
(ग) राजस्थान
(घ) तमिलनाडु

उत्तर: (क) असम। किताब के अनुसार पेट्रोलियम के आरक्षित भंडार असम, गुजरात तथा मुंबई हाई में पाए जाते हैं; असम में डिगबोई, नहारकटिया तथा मोरान महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र हैं।

प्रश्न 1 (ii)

प्र. निम्नलिखित में से किस स्थान पर पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन स्थापित किया गया था?
(क) कलपक्कम
(ख) नरोरा
(ग) राणाप्रताप सागर
(घ) तारापुर

उत्तर: (घ) तारापुर। भारत का पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन तारापुर (महाराष्ट्र) में स्थापित किया गया था। किताब नाभिकीय ऊर्जा परियोजनाओं में तारापुर को सबसे पहले गिनाती है, इसके बाद कोटा के पास रावतभाटा, कलपक्कम, नरोरा, कैगा तथा काकरापाड़ा।

प्रश्न 1 (iii)

प्र. निम्नलिखित में कौन-सा ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत है?
(क) जल
(ख) सौर
(ग) ताप
(घ) पवन

उत्तर: (ग) ताप। किताब के अनुसार कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा नाभिकीय ऊर्जा (जिनसे ताप/थर्मल विद्युत बनती है) परंपरागत, समाप्य (अनवीकरणीय) स्रोत हैं; जल, सौर तथा पवन ऊर्जा नवीकरणीय/अपरंपरागत स्रोत हैं।

2 निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें

प्रश्न 2 (i)

प्र. भारत में अभ्रक के वितरण का विवरण दें।

उत्तर: किताब के अनुसार अभ्रक मुख्यतः झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना व राजस्थान में पाया जाता है, इसके पश्चात् तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल व मध्य प्रदेश आते हैं। झारखंड के निचले हज़ारीबाग पठार की पट्टी (150×22 कि.मी.) व आंध्र प्रदेश का नेल्लोर ज़िला (सर्वोत्तम गुणवत्ता) सबसे महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्र हैं।

प्रश्न 2 (ii)

प्र. नाभिकीय ऊर्जा क्या है? भारत के प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केंद्रों के नाम लिखें।

उत्तर: यूरेनियम व थोरियम खनिजों से उत्पन्न ऊर्जा नाभिकीय ऊर्जा कहलाती है। भारत के प्रमुख नाभिकीय ऊर्जा केंद्र हैं: तारापुर (महाराष्ट्र), रावतभाटा (राजस्थान), कलपक्कम (तमिलनाडु), नरोरा (उत्तर प्रदेश), कैगा (कर्नाटक) तथा काकरापाड़ा (गुजरात)।

प्रश्न 2 (iii)

प्र. अलौह धातुओं के नाम बताएँ। उनके स्थानिक वितरण की विवेचना करें।

उत्तर: प्रमुख अलौह धातुएँ बॉक्साइट व ताँबा हैं। बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक ओडिशा (कालाहांडी, संभलपुर) है; अन्य उत्पादक झारखंड, गुजरात, छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र हैं। ताँबा मुख्यतः झारखंड के सिंहभूमि, मध्य प्रदेश के बालाघाट तथा राजस्थान के झुंझुनु-अलवर ज़िलों में मिलता है।

प्रश्न 2 (iv)

प्र. ऊर्जा के अपारंपरिक स्रोत कौन-से हैं?

उत्तर: ऊर्जा के अपरंपरागत (नवीकरणीय) स्रोत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल, भूतापीय ऊर्जा तथा जैवभार (बायोमास) हैं। ये कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस व नाभिकीय ऊर्जा जैसे समाप्य परंपरागत स्रोतों के विपरीत अधिक समान रूप से वितरित तथा पर्यावरण-अनुकूल हैं।

3 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें

प्रश्न 3 (i)

प्र. भारत के पेट्रोलियम संसाधनों पर विस्तृत टिप्पणी लिखें।

उत्तर: कच्चा पेट्रोलियम द्रव व गैसीय अवस्था के हाइड्रोकार्बन से युक्त होता है और मोटर-वाहनों, रेलवे तथा वायुयानों के लिए ऊर्जा का अनिवार्य स्रोत है। अपनी दुर्लभता व विविध उपयोगों के लिए इसे ‘तरल सोना’ कहा जाता है। अपरिष्कृत पेट्रोलियम टरश्यरी युग की अवसादी शैलों में पाया जाता है। भारत में पेट्रोलियम के आरक्षित भंडार असम, गुजरात तथा मुंबई हाई (अरब सागर के अपतटीय क्षेत्र) में केंद्रित हैं; नए भंडार कृष्णा-गोदावरी व कावेरी बेसिनों में मिले हैं। 1956 में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग की स्थापना से पहले असम का डिगबोई एकमात्र तेल उत्पादक क्षेत्र था; उसके बाद असम में नहारकटिया व मोरान, गुजरात में अंकलेश्वर, कालोल, मेहसाणा, नवागाम, कोसांबा व लुनेज जैसे नए तेल क्षेत्र सामने आए। मुंबई से 160 कि.मी. दूर अपतटीय मुंबई हाई की खोज 1973 में हुई और उत्पादन 1976 में शुरू हुआ। कुओं से निकला कच्चा तेल अशुद्ध होता है और उसे शोधित करना पड़ता है; भारत में डिगबोई जैसा क्षेत्र-आधारित तथा बरौनी जैसा बाज़ार-आधारित, दो प्रकार के तेल शोधन कारखाने हैं। पेट्रोलियम के सह-उत्पाद उर्वरक, कृत्रिम रबर व रेशे, दवाइयाँ, वैसलीन, स्नेहक, मोम व साबुन जैसे पेट्रो-रसायन उद्योगों में प्रक्रमित होते हैं।

प्रश्न 3 (ii)

प्र. भारत में जल विद्युत पर एक निबंध लिखें।

उत्तर: इस अध्याय के 2026-27 के पुनर्मुद्रण में जल विद्युत पर अलग खंड नहीं है। पाठ्यपुस्तक “जल” को केवल सतत पोषणीय (नवीकरणीय) ऊर्जा स्रोतों की सूची में गिनाती है, इसलिए नीचे का उत्तर उसी सूची के बारे में पुस्तक की बातों पर आधारित है।

जल विद्युत बहते या गिरते जल की ऊर्जा से बनाई जाने वाली बिजली है। पाठ्यपुस्तक के अनुसार सतत पोषणीय ऊर्जा के स्रोत “नवीकरण योग्य स्रोत हैं जैसे— सौर, पवन, जल, भूतापीय ऊर्जा तथा जैवभार”; जल इन्हीं में से एक है।

  • नवीकरणीय: कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और नाभिकीय ऊर्जा समाप्य कच्चे माल का प्रयोग करते हैं, जल विद्युत नहीं।
  • अधिक समान वितरण: पुस्तक के अनुसार ये स्रोत “अधिक समान रूप से वितरित तथा पर्यावरण-अनुकूल” हैं।
  • टिकाऊ और सस्ती ऊर्जा: अपरंपरागत स्रोत “अधिक आरंभिक लागत के बावजूद अधिक टिकाऊ, पारिस्थितिक-अनुकूल तथा सस्ती ऊर्जा” उपलब्ध कराते हैं।
  • परीक्षा की दृष्टि से: यही अंतर इसी प्रश्नावली के प्रश्न 1(iii) में पूछा गया है, जहाँ जल नवीकरणीय स्रोत है और ताप अनवीकरणीय।

4 अध्याय के बीच में पूछे गए प्रश्न व क्रियाकलाप

पाठ का प्रश्न 1 (उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश)

प्र. क्या आपने कभी सोचा है कि प्रमुख लौह एवं इस्पात उद्योग इस क्षेत्र में क्यों अवस्थित हैं?

उत्तर: उत्तर-पूर्वी पठारी प्रदेश (छोटानागपुर-झारखंड, ओडिशा का पठार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के कुछ भाग) में विभिन्न प्रकार के खनिज एक साथ उपलब्ध हैं, जैसे लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज़, बॉक्साइट व अभ्रक। यहाँ लौह अयस्क की खदानें कोयला क्षेत्रों के निकट स्थित हैं, जो इनके लिए लाभप्रद है। इस प्रकार लौह एवं इस्पात उद्योग के मुख्य कच्चे माल (लौह अयस्क, प्रगलन के लिए कोयला और मैंगनीज़) पास-पास मिल जाते हैं, जिससे परिवहन लागत घटती है। इसीलिए अधिकतर लौह एवं इस्पात संयंत्र इन खदानों के आसपास ही स्थित हैं (जैसे झारखंड की पुरानी लौह अयस्क खदानों के आसपास)।

पाठ का प्रश्न 2 (पता करें)

प्र. उन विशिष्ट प्रदेशों का पता करें, जहाँ इन खनिजों का दोहन हो रहा है।

उत्तर: अध्याय के अनुसार: लौह अयस्क ओडिशा के सुंदरगढ़, मयूरभंज व झार (खदानें गुरुमहिसानी, सुलाएपत, बादामपहाड़, किरुबुरू, बोनाई) तथा झारखंड के पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम (नोआमंडी, गुआ) में; कोयला दामोदर घाटी (झरिया, रानीगंज, बोकारो, गिरीडीह, करनपुरा) में; मैंगनीज़ ओडिशा की लौह अयस्क पट्टी के मध्य भाग (बोनाई, केंदुझर, सुंदरगढ़, गंगपुर, कोरापुट, कालाहांडी, बोलनगीर) में; बॉक्साइट ओडिशा के कालाहांडी, संभलपुर, बोलनगीर व कोरापुट तथा झारखंड के लोहारडागा के पैटलैंड्स में; और उच्च गुणवत्ता वाला अभ्रक झारखंड के निचले हज़ारीबाग पठार में निकाला जाता है। इन स्थानों को भारत के मानचित्र पर ढूँढिए।

पाठ का प्रश्न 3 (दांडी मार्च)

प्र. महात्मा गांधी द्वारा कब और क्यों दांडी मार्च आयोजित किया गया था?

उत्तर: अध्याय बताता है कि गुजरात व राजस्थान दोनों में नमक के समृद्ध स्रोत हैं। महात्मा गांधी ने 1930 में साबरमती आश्रम से गुजरात के समुद्र तट पर स्थित दांडी गाँव तक दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह) किया। इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के नमक कानून को तोड़ना था, जो नमक पर कर लगाता था और भारतीयों को स्वयं नमक बनाने की अनुमति नहीं देता था। दांडी में उन्होंने समुद्र के पानी से नमक बनाकर यह कानून तोड़ा, और यह मार्च ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सविनय अवज्ञा का जन-आंदोलन बन गया।

पाठ का प्रश्न 4 (लौह अयस्क खनन)

प्र. क्या आप इसके कारण पता लगा सकते हैं? (अध्याय में दी गई समाचार-कतरन के अनुसार भारत का लौह अयस्क खनन उद्योग अनेक नए छोटे-बड़े उद्यमियों को आकर्षित कर रहा है।)

उत्तर: कारण, अध्याय और कतरन के आधार पर: (i) भारत में एशिया के विशालतम लौह अयस्क आरक्षित भंडार हैं, और अपनी सर्वोत्तम गुणवत्ता के कारण भारतीय लौह अयस्क (हेमेटाइट व मैग्नेटाइट) की विश्व-भर में भारी माँग है; (ii) हर औद्योगिक राष्ट्र को लोहा व इस्पात बनाने के लिए भारी मात्रा में लौह अयस्क चाहिए, और भारत में इस्पात का उपयोग करने वाले उद्योग तेज़ी से बढ़ रहे हैं; (iii) उत्तर-पूर्वी पठार प्रदेश में लौह अयस्क की खदानें कोयला क्षेत्रों के निकट हैं, जो लाभप्रद है; (iv) सरकार ने राष्ट्रीय खनिज नीति, 1993 और संशोधित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम जैसे कदमों से इस क्षेत्र में निजी निवेश और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित किया है।

क्रियाकलाप (एक राष्ट्र एक ग्रिड)

प्र. गेल (इंडिया) द्वारा ‘एक राष्ट्र एक ग्रिड’ के अंतर्गत बिछाई गई क्रॉस कंट्री प्राकृतिक गैस पाइप लाइन के बारे में जानकारी एकत्रित करें।

उत्तर: यह एक परियोजना-कार्य है: जानकारी गेल (इंडिया) लिमिटेड और सरकारी स्रोतों से एकत्र करें। इन बिंदुओं को शामिल करें: ‘एक राष्ट्र एक ग्रिड’ (राष्ट्रीय गैस ग्रिड) का उद्देश्य प्राकृतिक गैस पाइप लाइनों के जाल से देश के सभी भागों को जोड़ना है, ताकि गैस हर क्षेत्र तक पहुँचे। अध्याय का परंपरागत ऊर्जा स्रोतों वाला चित्र (चित्र 5.4) HVJ (हज़ीरा-विजयपुर-जगदीशपुर) प्राकृतिक गैस पाइप लाइन दिखाता है, जो पश्चिमी तट के हज़ीरा से भीतरी भागों में विजयपुर व जगदीशपुर तक गैस पहुँचाती है। ऐसी पाइप लाइनें शहर गैस वितरण नेटवर्क के माध्यम से प्राकृतिक गैस को परिवहन ईंधन (CNG) और घरों में खाना पकाने के ईंधन (PNG) के रूप में उपलब्ध कराने में सहायक हैं।

पाठ का प्रश्न 5 (अपरंपरागत ऊर्जा)

प्र. भारत में गैर-परंपरागत ऊर्जा संसाधनों का उपयोग कैसे करते हैं? परिचर्चा कीजिए।

उत्तर: भारत समाप्य जीवाश्म ईंधनों की जगह नवीकरणीय स्रोतों का विकास कर रहा है: (i) सौर ऊर्जा फोटोवोल्टाइक और सौर-तापीय प्रौद्योगिकी से प्राप्त की जाती है और हीटरों, फ़सल शुष्ककों व कुकरों में प्रयोग होती है; गुजरात व राजस्थान में इसकी अधिक संभावनाएँ हैं। अध्याय की समाचार-कतरनों के अनुसार सितंबर 2023 में भारत की स्थापित सौर क्षमता 70,000 मेगावाट से अधिक हो गई, और 2023 की पहली छमाही में भारत का सौर उत्पादन 26 प्रतिशत बढ़ा। (ii) भारत ने पवन ऊर्जा का उत्पादन आरंभ कर दिया है; राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में अनुकूल परिस्थितियाँ हैं। (iii) हिमाचल प्रदेश के मनीकरण में भूतापीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा चुका है। (iv) नई दिल्ली के ओखला में नगरपालिका कचरे को ऊर्जा में बदलने वाली परियोजना है। (v) भारत के पश्चिमी तट पर ज्वारीय ऊर्जा की व्यापक संभावनाएँ हैं, परंतु अभी तक इनका उपयोग नहीं किया गया है।

परीक्षा संकेत

प्रश्नावली के तीनों बहुविकल्पीय प्रश्न बोर्ड परीक्षा में सीधे वस्तुनिष्ठ रूप में पूछे जा सकते हैं। तारापुर और असम के तेल क्षेत्र याद रखिए। प्रश्न 3(i) (पेट्रोलियम) के लिए तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग 1956, मुंबई हाई 1973/1976 और दोनों प्रकार के शोधन कारखानों के नाम ज़रूर याद कर लीजिए।