कक्षा 12 इतिहास अध्याय 1 ईंटें, मनके तथा अस्थियाँ शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले दोहराने के लिए इस अध्याय का निचोड़: तीन काल, नगर-योजना, शिल्प-व्यापार, लिपि-बाट, शासकों पर बहस, और खोज का इतिहास। पूरी व्याख्या वाले विस्तृत नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 पूरा अध्याय एक फ्रेम में

हड़प्पा सभ्यता
आरंभिक (6000-2600 ई.पू.)छोटी बस्तियाँ, कुछ शिल्प, बड़ी इमारतें नहीं
परिपक्व (2600-1900 ई.पू.)नगर, मुहरें, मानक ईंटें-बाट, दूर व्यापार
उत्तर (1900-1300 ई.पू.)नगर खाली, ग्रामीण जीवन

लिपि आज तक अपठित है, इसलिए हड़प्पा सभ्यता के बारे में जो कुछ भी हम जानते हैं वह भौतिक अवशेषों से है: यह पूरे अध्याय की सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति है। इसे “हड़प्पा सभ्यता” कहते हैं क्योंकि हड़प्पा वह स्थल था जहाँ इसे सबसे पहले पहचाना गया; “सिंधु घाटी सभ्यता” भी इसी का दूसरा नाम है। 2000+ स्थल मिले हैं, जिनमें से दो-तिहाई सरस्वती बेसिन में हैं। पाँच प्रमुख नगर: राखीगढ़ी, मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धौलावीरा, गनवेरीवाला।

2 रट लेने लायक परिभाषाएँ

सभी परिभाषाएँ एक जगह
फ़यॉन्सरेत/सिलिका चूर्ण को रंग व गोंद के साथ मिलाकर पकाई गई कृत्रिम सामग्री। बनाना कठिन, इसलिए बहुमूल्य।
संचय (hoard)वस्तुओं का समूह, सावधानी से किसी पात्र में रखा गया, पुनः उपयोग के लिए बचाया गया।
स्तरविन्यास (stratigraphy)किसी स्थल की परतों का अध्ययन; निचली परतें सामान्यतः सबसे पुरानी।
टीला (mound)मानव-निवास का जमा हुआ मलबा, जहाँ लोग रहते और स्थान का पुनः उपयोग करते रहे।
बंजर परतें (sterile layers)निवास के कोई निशान न होने वाली परतें; स्थान के परित्याग का संकेत।
पुरातत्व-अनुवांशिकी (archaeogenetics)प्राचीन जनसंख्याओं के DNA का अध्ययन, आणविक अनुवांशिकी के प्रयोग से।
पुरा-वनस्पतिज्ञप्राचीन पौधों के अवशेष (जले अनाज, बीज) का अध्ययन करते हैं।
पुरा-प्राणिविज्ञानीप्राचीन पशु-अस्थियों का अध्ययन करते हैं (जू-आर्कियोलॉजिस्ट)।

3 नगर-योजना एक नज़र में

4:2:1ईंटों का लंबाई : चौड़ाई : ऊँचाई अनुपात, जम्मू से गुजरात तक समान
700मोहनजोदड़ो में लगभग इतने कुएँ
40 लाखनींव के लिए अनुमानित मानव-दिवस
पहलेकच्ची ईंट के चबूतरे बनाए गए
→
फिरनालियों सहित ग्रिड सड़कें बिछाई गईं
→
अंत मेंसड़कों के किनारे घर बनाए गए

दुर्ग (पश्चिम) = छोटा, ऊँचा, चबूतरों पर, परकोटे से घिरा, सार्वजनिक भवन (मालगोदाम, विशाल स्नानागार)। निचला नगर (पूर्व) = बड़ा, नीचा, ग्रिड, आवासीय। अपवाद: धौलावीरा और लोथल इस ढाँचे को तोड़ते हैं। जल-निकास क्रम: घर की नाली → हौदी (मलकुंड) → सड़क की नाली।

4 शिल्प, व्यापार और मेसोपोटामियाई नाम

1 खंडनगुठली को मोटा आकार
→
2 परतकरणमहीन परतें, अंतिम आकार
→
3 अंतिम रूपघिसाई, पालिश, छेद
मेसोपोटामियाई नाम संभवतः मुख्य प्रमाण
मगन ओमान ताँबे में निकल के अंश मेल खाते हैं
दिलमुन बहरीन गोल ‘फ़ारस की खाड़ी’ मुहरों पर हड़प्पाई आकृतियाँ; स्थानीय बाट हड़प्पाई मानक पर
मेलुहा हड़प्पाई क्षेत्र नाविकों की भूमि, कार्नीलियन/लाजवर्द/ताँबा/सोना का स्रोत

सामग्री के दो स्रोत: स्रोत पर बसना (नागेश्वर-बालाकोट: शंख; शोर्तुघई: लाजवर्द मणि) या अभियान भेजना (खेतड़ी: ताँबा; दक्षिण भारत: सोना)। शिल्प-केंद्र पहचानने का सबसे अच्छा संकेतक: बेकार सामग्री (waste), तैयार वस्तु नहीं।

5 मुहरें, लिपि और बाट: पाँच-पाँच तथ्य

लिपि के पाँच तथ्य
  • अब भी अपठित
  • सबसे लंबे अभिलेख में ~26 चिह्न
  • 375-400 चिह्न: वर्णमाला नहीं
  • दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी
  • मुहर, ताँबे के औज़ार, मर्तबान, आभूषण, हड्डी की छड़ों और धौलावीरा साइनबोर्ड पर मिलती है

बाट: चर्ट पत्थर, घनाकार, बिना निशान। निचली इकाइयाँ द्विआधारी (1,2,4,8,16,32); ऊँची इकाइयाँ दशमलव (160,200,320,640)। मुहर-सीलबंदी: गीली मिट्टी पर मुहर दबाई जाती थी; अक्षुण्ण सीलबंदी = सामान से छेड़छाड़ नहीं हुई, इसका प्रमाण।

6 शासकों पर तीन मत

1

कोई शासक नहीं

सबकी सामाजिक स्थिति समान थी।

2

कई शासक

मोहनजोदड़ो, हड़प्पा आदि के अपने-अपने राजा।

3

एक ही राज्य

पुरावशेष-समानता, नियोजित बस्तियाँ, 4:2:1 अनुपात इसके पक्ष में।

‘पुरोहित-राजा’ नाम मेसोपोटामिया की समानता से गढ़ा गया, प्रमाण नहीं। NCERT यह भी बताती है कि हड़प्पावासी शायद किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था का पालन करते थे।

7 सभ्यता का अंत: क्या गया, क्या आया

क्या ग़ायब हुआ

  • बाट, मुहरें, विशिष्ट मनके
  • लिपि, दूर व्यापार, शिल्प-विशेषज्ञता
  • बड़ी सार्वजनिक संरचनाएँ

उसकी जगह क्या आया

  • स्थानीय बाट, कम सामग्री से कम वस्तुएँ
  • ग्रामीण जीवनशैली (“उत्तर हड़प्पा”)
  • 1000+ वर्ष बाद ही अलग क्षेत्र में नए नगर

~1800 ई.पू. तक चोलिस्तान जैसे क्षेत्रों के अधिकांश स्थल त्यागे गए। कारण: जलवायु परिवर्तन, वन-कटाई, बाढ़, नदी-मार्ग बदलना/सूखना, भूमि का अति-उपयोग: कोई एक अकेले पूरी सभ्यता को नहीं समझाता। निष्कर्ष: एक सुदृढ़ एकीकरण तत्व, संभवतः हड़प्पाई राज्य, का अंत हुआ।

8 खोज का इतिहास: समयरेखा

वर्ष घटना
1875 कनिंघम की हड़प्पाई मुहर पर रिपोर्ट (पर पहचान नहीं पाए: “कनिंघम का भ्रम”: गंगा घाटी से इतिहास शुरू मानते थे)
1921 दयाराम साहनी हड़प्पा में खुदाई आरंभ
1922 मोहनजोदड़ो में खुदाई आरंभ (राखालदास बनर्जी)
1924 जॉन मार्शल सभ्यता की खोज की घोषणा (क्षैतिज-इकाई खुदाई से संदर्भ खोया)
1944 व्हीलर डायरेक्टर जनरल बने, टीले के स्तरविन्यास का अनुसरण किया (1946 में हड़प्पा में खुदाई; 1947 में कंकालों को ऋग्वेद से जोड़ा)
1964 जॉर्ज डेल्स ने आक्रमण-सिद्धांत का खंडन किया
1955-97 लोथल, कालीबंगन, धौलावीरा, राखीगढ़ी की खुदाई (विभाजन के बाद भारतीय सर्वेक्षण)
2013 वसंत शिंदे: राखीगढ़ी में पुरातत्व-अनुवांशिक शोध शुरू
राखीगढ़ी DNA का निष्कर्ष

हड़प्पावासी स्थानीय (indigenous) थे, जड़ें 10,000 ई.पू. तक: आर्यों के बड़े पैमाने के आगमन के सिद्धांत को खारिज करता है। शोध: डेक्कन कॉलेज पुणे + CCMB हैदराबाद + हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज।

9 धर्म का पुनर्निर्माण: एक केस स्टडी में

आद्य-शिव मुहर: योगिक मुद्रा में बैठी आकृति, पशुओं से घिरी: शिव का प्रारंभिक रूप माना गया। पर ऋग्वेदिक रुद्र न पशुपति हैं, न योगी: विवरण मेल नहीं खाता। वैकल्पिक व्याख्या: यह कोई शमन हो सकती है। सीख: ज्ञात-से-अज्ञात विधि (वर्तमान से पीछे की ओर) चक्की-पत्थर जैसी वस्तुओं के लिए ठीक काम करती है, पर धार्मिक व्याख्या में अक्सर टूट जाती है।

फटाफट पुनरावृत्ति · परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़ें
  • तीन चरण: 6000-2600 (आरंभिक), 2600-1900 (परिपक्व), 1900-1300 ई.पू. (उत्तर हड़प्पा)
  • ईंटों का अनुपात 4:2:1, हर जगह समान: एक-राज्य के मत के पक्ष में दिया जाने वाला एक प्रमाण
  • दुर्ग (पश्चिम, छोटा, ऊँचा) + निचला नगर (पूर्व, बड़ा, नीचा): धौलावीरा-लोथल अपवाद
  • लिपि अपठित, 375-400 चिह्न, दाएँ से बाएँ; बाट द्विआधारी + दशमलव
  • मगन=ओमान, दिलमुन=बहरीन, मेलुहा=हड़प्पाई क्षेत्र
  • शासकों पर तीन मत: कोई नहीं / कई / एक राज्य
  • पतन का कोई एक कारण नहीं: एकीकरण तत्व के अंत की परिकल्पना
  • कनिंघम (पाठ-केंद्रित) → मार्शल (संदर्भ-हानि) → व्हीलर (स्तरविन्यास) → राखीगढ़ी (पुरातत्व-अनुवांशिकी)