कक्षा 12 इतिहास अध्याय 9 उपनिवेशवाद और देहात शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

आख़िरी वक़्त की रिवीज़न के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, ज़रूरी तथ्य, तारीख़ें और तालिकाएँ। पूरी व्याख्या वाले विस्तृत नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 पूरा अध्याय एक फ़्रेम में

उपनिवेशवाद और देहात · तीन क्षेत्र, तीन स्रोत-प्रकार
बंगालइस्तमरारी बंदोबस्त, ज़मींदार, जोतदार, पाँचवीं रिपोर्ट
राजमहल पहाड़ियाँपहाड़िया, संथाल, दामिन-इ-कोह, 1855-56 विद्रोह
बम्बई दक्कनरैयतवाड़ी, कपास-उछाल, 1875 विद्रोह, दंगा आयोग
स्रोत-प्रकार क्या बताता है, और सावधानी
पाँचवीं रिपोर्ट (1813) बंगाल का राजस्व-इतिहास; पर कंपनी-विरुद्ध राजनीतिक मामला, ज़मींदारी पतन अतिरंजित
बुकानन के सर्वेक्षण विस्तृत ग्रामीण विवरण; पर कंपनी-वित्तपोषित, “उत्पादक” बनाने के औपनिवेशिक नज़रिए से
होजेज के चित्र राजमहल पहाड़ियों का दृश्य; पर रोमांटिक “चित्रात्मक” शैली, तटस्थ नहीं
दक्कन दंगा आयोग (1878) रैयत-साहूकार साक्षात्कार, आँकड़े; पर सरकार को दोष से बचाता है

2 याद रखने लायक़ आँकड़े

1793बंगाल में इस्तमरारी बंदोबस्त लागू
1855-56संथाल विद्रोह
1875सूपा से शुरू दक्कन विद्रोह
आँकड़ा किस बात का
95%+ बर्दवान नीलामी (1797) में फ़र्जी बिक्री
75%+ इस्तमरारी बंदोबस्त के बाद हाथ बदलने वाली बंगाल ज़मींदारियाँ
~30 लाख रुपये 1793-1801 के बीच चार ज़मींदारियों में बेनामी ख़रीद
1,002 पृष्ठ पाँचवीं रिपोर्ट (1813) का आकार
40 → 1,473 दामिन में संथाल गाँव, 1838-1851
6,500 वर्ग किमी 1875 दक्कन विद्रोह का फैलाव (तीस से अधिक गाँव)
2× 1860-64 के बीच दक्कन का कपास-रक़बा वृद्धि

3 तारीख़ें एक नज़र में

तारीख़ क्या हुआ
1765 ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल की दीवानी प्राप्त
1773 रेगुलेटिंग एक्ट पारित
1793 बंगाल में इस्तमरारी बंदोबस्त (गवर्नर-जनरल कार्नवालिस)
1797 बर्दवान की संपदाओं की नीलामी
1800 के दशक संथाल राजमहल पहाड़ियों में बसना शुरू करते हैं
1813 पाँचवीं रिपोर्ट ब्रिटिश संसद को सौंपी गई
1818 बम्बई दक्कन में पहला राजस्व बंदोबस्त
1832 दामिन-इ-कोह का सीमांकन
1832-34 दक्कन में भीषण अकाल
1855-56 संथाल विद्रोह; बाद में संथाल परगना बनी
1857 कपास आपूर्ति संघ की स्थापना
1859 मैनचेस्टर कॉटन कंपनी; परिसीमन क़ानून
1861 अमेरिकी गृहयुद्ध, कपास-उछाल शुरू
1865 गृहयुद्ध की समाप्ति, साख सूखना
1875 सूपा से शुरू दक्कन विद्रोह
1878 दक्कन दंगा आयोग की रिपोर्ट

4 सभी परिभाषाएँ एक जगह

शब्द अर्थ
इस्तमरारी बंदोबस्त 1793, राजा-ताल्लुकदारों के साथ, राजस्व सदा के लिए निश्चित
सूर्यास्त विधि निश्चित तिथि के सूर्यास्त तक भुगतान न पहुँचने पर ज़मींदारी नीलामी के लिए उत्तरदायी
बेनामी गुप्त/छद्म नाम से की गई ख़रीद, ज़मींदार का अपना एजेंट ख़रीदार बनना
जोतदार निवासी धनी किसान, हज़ारों एकड़, व्यापार-महाजनी पर नियंत्रण
अधियार/बरगादार बटाईदार, जो अपना हल-श्रम देकर आधी उपज रखते
दिकू संथालों की भूमि हड़पने वाला ऊँची-ब्याज महाजन
दामिन-इ-कोह 1832 में सीमांकित संथाल क्षेत्र
रैयतवाड़ी बंदोबस्त बम्बई दक्कन, राजस्व सीधे रैयत से, हर 30 वर्ष पुनः सर्वेक्षित
भाड़ा-पत्र (किरायानामा) ऋणी किसान अपने पशु महाजन को बेचकर, फिर किराए पर वापस लेते
परिसीमन क़ानून (1859) ऋण-पत्र केवल तीन वर्ष वैध; महाजनों ने चक्रवृद्धि में मोड़ा

5 बंगाल बनाम बम्बई दक्कन

बंगाल (इस्तमरारी बंदोबस्त) बम्बई दक्कन (रैयतवाड़ी)
किसके साथ ज़मींदार (राजा-ताल्लुकदार) सीधे व्यक्तिगत रैयत
माँग सदा के लिए स्थिर हर 30 वर्ष पुनः सर्वेक्षित, ऊपर संशोधित
प्रभावित सिद्धांत — डेविड रिकार्डो का “औसत लगान”
कठोरता सूर्यास्त विधि सख़्त कलक्टर, फ़सल-ज़ब्ती

6 फटाफट पुनरावृत्ति · परीक्षा से एक रात पहले यही पढ़ें

इस्तमरारी बंदोबस्त (1793, गवर्नर-जनरल कार्नवालिस) ने बंगाल में राजस्व राजाओं-ताल्लुकदारों के साथ सदा के लिए स्थिर किया; माँग बहुत ऊँची और ग़लत समय पर तय होने, सूर्यास्त विधि की कठोरता और ज़मींदारों की घटती सत्ता (सेना भंग, कचहरी कलक्टर के अधीन) के कारण 75 प्रतिशत से अधिक ज़मींदारियों ने हाथ बदले, यद्यपि फ़र्जी बिक्री व बेनामी ख़रीद से ज़मींदार अक्सर नियंत्रण बचा लेते थे (बर्दवान, 1797, 95%+ काल्पनिक)। जोतदार जैसे निवासी धनी किसान अनुपस्थित ज़मींदार से कहीं अधिक वास्तविक सत्ता रखते थे। पाँचवीं रिपोर्ट (1813) ने 150 वर्षों तक बंगाल की समझ आकारित की, पर कंपनी-विरुद्ध मामला बनाते हुए ज़मींदारी पतन को अतिरंजित किया। राजमहल पहाड़ियों में पहाड़िया कुदाल से झूम खेती करते, संथाल हल से बसी खेती करते थे; दामिन-इ-कोह (1832) ने संथालों को भूमि दी पर भारी कर व दिकू-शोषण लाया, जिससे संथाल विद्रोह (1855-56) हुआ। बम्बई दक्कन में रैयतवाड़ी बंदोबस्त (डेविड रिकार्डो से प्रभावित) ने राजस्व सीधे रैयत से लिया; 1861 के अमेरिकी गृहयुद्ध-चालित कपास-उछाल ने आसान साख दी, पर 1865 के पतन और साथ ही 50 से 100 प्रतिशत बढ़ी राजस्व-माँग ने रैयतों को महाजनों पर पूर्ण निर्भर बना दिया, जिन्होंने ब्याज कभी मूलधन से अधिक न होने का पुराना मानदंड तोड़ा और 1859 के परिसीमन क़ानून को भी अपने पक्ष में मोड़ा, जिससे 1875 में सूपा से दक्कन विद्रोह भड़का। दक्कन दंगा आयोग (1878) ने केवल महाजनों को दोषी ठहराया, औपनिवेशिक रिपोर्टों का एक पैटर्न जो राज्य की अपनी राजस्व-नीति को दोष से बचाता था।