कक्षा 11 इतिहास अध्याय 4 तीन वर्ग महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. “सामंतवाद” शब्द किस शब्द से बना है और उसका अर्थ क्या है?

उत्तर: यह जर्मन शब्द “फ़्यूड” से बना है, जिसका अर्थ है भूमि का एक टुकड़ा।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. मध्यकालीन समाज पर मार्क ब्लॉक की किताब का नाम और उसका कालखंड बताइए।

उत्तर: “सामंती समाज”, जो 900 से 1300 के बीच के यूरोपीय, ख़ासकर फ्रांसीसी, समाज का विवरण देती है।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. मध्यकालीन यूरोपीय समाज के तीन वर्गों के नाम लिखिए।

उत्तर: पादरी वर्ग, अभिजात वर्ग और किसान वर्ग।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. टीथ क्या था?

उत्तर: टीथ चर्च का वह अधिकार था जिससे उसे किसानों की साल भर की उपज का दसवाँ हिस्सा मिलता था।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. टैली क्या था?

उत्तर: टैली वह सीधा कर था जो राजा कभी-कभी सिर्फ किसानों पर लगाते थे; पादरी और अभिजात इससे मुक्त थे।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. फ़ीफ़ कितनी बड़ी होती थी और नाइट उसके बदले क्या देता था?

उत्तर: फ़ीफ़ आमतौर पर 1,000 से 2,000 एकड़ या उससे ज़्यादा की होती थी, और बदले में नाइट अपने लॉर्ड को एक तय शुल्क देता और युद्ध में उसकी तरफ़ से लड़ने का वचन देता था।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. अध्याय में बताए गए दो मशहूर मठों के नाम और उनके वर्ष लिखिए।

उत्तर: इटली में सेंट बेनेडिक्ट का मठ, 529 में, और बरगंडी में क्लूनी, 910 में।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. ब्लैक डैथ ने पश्चिमी यूरोप को कब तबाह किया और कितनी आबादी मारी गई?

उत्तर: 1347 से 1350 के बीच, और इसमें यूरोप की करीब 20 प्रतिशत आबादी मारी गई, कुछ जगहों पर यह आँकड़ा 40 प्रतिशत तक पहुँचा।

प्रश्न 9 (1 अंक)

प्र. “नगर की हवा स्वतंत्र बनाती है” कहावत का क्या मतलब था?

उत्तर: जो सर्फ एक साल और एक दिन तक नगर में बिना पकड़े छिपा रह जाता, वह आज़ाद आदमी बन जाता था।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. वैसलेज क्या था और यह रिश्ता कैसे पक्का किया जाता था?

उत्तर: वैसलेज लॉर्ड और दास (वैसल) के बीच आपसी वचन का रिश्ता था: लॉर्ड दास की रक्षा करेगा और दास उसके प्रति वफ़ादार रहेगा। यह रिश्ता एक विस्तृत समारोह से पक्का होता था, जिसमें चर्च में बाइबल की शपथ ली जाती थी और दास को दी गई ज़मीन के प्रतीक के तौर पर एक लिखित पत्र, या एक छड़ी, या मिट्टी का एक ढेला सौंपा जाता था।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. मध्यकालीन यूरोप के अभिजात को मिले कोई चार विशेषाधिकार बताइए।

उत्तर: उसे अपनी संपत्ति पर हमेशा के लिए पूरा नियंत्रण था। वह “सामंती सेना” खड़ी कर सकता था। उसकी अपनी अदालत होती थी। वह अपना सिक्का तक चला सकता था, और अपनी ज़मीन पर बसे हर व्यक्ति का मालिक था।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. मेनर की जागीर पूरी तरह आत्मनिर्भर क्यों नहीं हो सकती थी?

उत्तर: नमक, चक्की का पाट और धातु के बर्तन हमेशा बाहर से मँगवाने पड़ते थे। शानो-शौकत की ज़िंदगी चाहने वाले लॉर्ड को साज़-सामान, वाद्य यंत्र और गहने भी कहीं और से लाने पड़ते थे।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. गायक-चारण कौन थे और वे इतने लोकप्रिय क्यों थे?

उत्तर: बारहवीं सदी से गायक-चारण फ्रांस में एक मेनर से दूसरे मेनर घूमकर बहादुर राजाओं और नाइटों की, आधी सच्ची और आधी गढ़ी हुई, कहानियाँ गाकर सुनाते थे। उस दौर में पढ़े-लिखे लोग और पांडुलिपियाँ दोनों कम थीं, इसलिए यही सबसे लोकप्रिय मनोरंजन था, और कई मेनर भवनों के बड़े कक्ष के ऊपर उनके लिए एक गायक दीर्घा बनी होती थी।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. मध्यकालीन पश्चिमी यूरोप में पादरी बनने पर किन लोगों पर पाबंदी थी?

उत्तर: सर्फ, शारीरिक रूप से अक्षम लोग और स्त्रियाँ पादरी नहीं बन सकते थे। जो पुरुष पादरी बनता था, वह शादी नहीं कर सकता था।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. दो-खेत व्यवस्था क्या थी और वह नाकाफ़ी क्यों थी?

उत्तर: आधी ज़मीन पर सर्दियों का गेहूँ बोया जाता और आधी परती छोड़ दी जाती थी; अगले साल दोनों की बारी बदल जाती और परती ज़मीन पर राई बोई जाती। हर साल आधी ज़मीन बेकार पड़ी रहती थी और बार-बार की बुवाई से मिट्टी भी कमज़ोर होती जाती थी, इसलिए पैदावार कम रही और अकाल आम बात बन गए।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. किसान खुला विद्रोह किए बिना लॉर्ड की माँगों का विरोध कैसे करते थे?

उत्तर: वे अपने ही खेतों पर ज़्यादा वक्त देते और उस मेहनत की उपज का बड़ा हिस्सा अपने पास रखते। बिना मज़दूरी की अतिरिक्त सेवाओं से बचते। साझा चरागाह और जंगल को लेकर वे लॉर्ड से टकराते भी थे, क्योंकि किसान इन्हें पूरे समुदाय का साधन मानते थे और लॉर्ड अपनी निजी संपत्ति।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. श्रेणी क्या थी और श्रेणी सभागार किस काम आता था?

उत्तर: श्रेणी (गिल्ड) वह संगठन थी जिसमें नगर का हर शिल्प या उद्योग बँधा था, और वह अपने उत्पाद की गुणवत्ता, कीमत और बिक्री पर नियंत्रण रखती थी। श्रेणी सभागार हर नगर की वह इमारत थी जहाँ आनुष्ठानिक कार्यक्रम होते और सभी श्रेणियों के मुखिया औपचारिक रूप से मिलते थे।

प्रश्न 9 (2 अंक)

प्र. चौदहवीं सदी में धातु-मुद्रा की कमी क्यों हुई और सरकारों ने क्या किया?

उत्तर: ऑस्ट्रिया और सर्बिया की चाँदी की खानों का उत्पादन अर्थव्यवस्था की ज़रूरत से कम पड़ गया, इसलिए सिक्के ढालने लायक धातु ही नहीं बची। सरकारों ने मुद्रा में सस्ती धातुएँ मिलाकर उसका अवमूल्यन कर दिया।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. इतिहासकार सामंतवाद से क्या समझते हैं, और यह सिर्फ आर्थिक व्यवस्था क्यों नहीं थी?

उत्तर: पृष्ठभूमि। रोमन साम्राज्य के पतन के बाद पूर्वी और मध्य यूरोप के जर्मन कबीले इटली, स्पेन और फ्रांस में बस गए। कोई एक सत्ता न बचने से लड़ाइयाँ आम हो गईं और अपनी भूमि बचाने के लिए साधन जुटाना सबसे बड़ा सवाल बन गया, इसलिए सामाजिक व्यवस्था भूमि पर नियंत्रण के इर्द-गिर्द बनी, जिसमें रोमन परंपरा और जर्मन रीति दोनों की छाप थी।
शब्द। सामंतवाद इतिहासकारों का दिया हुआ नाम है उन आर्थिक, कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक रिश्तों के लिए जो मध्यकालीन यूरोप में मौजूद थे। यह जर्मन शब्द “फ़्यूड” से बना है, जिसका अर्थ है भूमि का एक टुकड़ा।
कहाँ और कब। यह पहले मध्यकालीन फ्रांस में और बाद में इंग्लैंड व दक्षिणी इटली में विकसित हुआ। इसकी जड़ें रोमन साम्राज्य और शार्लमेन (742-814) के दौर तक जाती हैं, पर यूरोप के बड़े हिस्से में जीवन के स्थापित तरीके के रूप में यह ग्यारहवीं सदी में ही उभरा।
आर्थिक पहलू। आर्थिक अर्थ में सामंतवाद का मतलब है लॉर्ड और किसान के रिश्ते पर टिकी खेती: किसान अपनी ज़मीन के साथ लॉर्ड की ज़मीन भी जोतते थे और उसे श्रम-सेवा देते थे।
यह सिर्फ आर्थिक क्यों नहीं था। बदले में किसानों को सैनिक सुरक्षा मिलती थी, जो राजनीतिक रिश्ता है, और लॉर्ड का उन पर व्यापक न्यायिक अधिकार भी होता था, जो कानूनी रिश्ता है। ज़मीन, हथियार और न्याय, तीनों एक ही वर्ग के हाथ में थे, इसलिए सामंतवाद ने जीवन के सामाजिक और राजनीतिक पक्ष को भी उतना ही गहरा आकार दिया।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. मध्यकालीन यूरोपीय लॉर्ड की मेनर जागीर का वर्णन कीजिए।

उत्तर: यह थी क्या। मेनर में लॉर्ड का अपना घर, उसके निजी खेत और चरागाह, और उसके काश्तकार-किसानों के घर तथा खेत, सब शामिल थे। हर लॉर्ड का अपना मेनर-भवन होता था, और कुछ लॉर्ड अनेक गाँवों के मालिक थे।
आकार। छोटी जागीर में दर्जन भर परिवार और बड़ी में पचास-साठ परिवार रहते थे।
वहाँ के लोग। जागीर के खेत जोतने वाले काश्तकार-किसान ज़रूरत पड़ने पर लॉर्ड के लिए पैदल सैनिक भी बन जाते थे।
आत्मनिर्भरता। रोज़मर्रा की लगभग हर चीज़ वहीं बनती थी: खेतों का अनाज, औज़ार और हथियार ठीक करने वाले लोहार-बढ़ई, इमारतों की देखभाल करने वाले राजमिस्त्री, सूत कातती-बुनती स्त्रियाँ, और लॉर्ड के मदिरा-संपीडक में काम करते बच्चे। जागीर में शिकार के लिए जंगल, पशुओं-घोड़ों के लिए चरागाह, एक चर्च और सुरक्षा के लिए एक दुर्ग भी होता था।
सीमा। फिर भी कोई जागीर पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं थी। नमक, चक्की का पाट और धातु के बर्तन बाहर से आते थे, और साज़-सामान, वाद्य यंत्र व गहने जैसी विलासिता की चीज़ें भी कहीं और से मँगवानी पड़ती थीं।
दुर्ग। तेरहवीं सदी से कुछ दुर्गों को बड़ा बनाकर नाइट के परिवार के रहने लायक बनाया जाने लगा। इंग्लैंड में नॉरमन विजय से पहले दुर्गों की जानकारी ही नहीं थी; वहाँ ये सामंत-व्यवस्था के साथ राजनीतिक और सैनिक शक्ति के केंद्र बने।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. नाइट एक अलग वर्ग क्यों बने, और लॉर्ड से उनका रिश्ता कैसा था?

उत्तर: अश्वसेना की ज़रूरत। नौवीं सदी से यूरोप में छोटे-छोटे स्थानीय युद्ध आम हो गए। लॉर्ड के बुलाने पर खेत छोड़कर आने वाला शौकिया किसान-सैनिक अब काफ़ी नहीं था; ज़रूरत थी कुशल अश्वसेना की, जो हर वक्त तैयार रहे। यही ज़रूरत नाइटों को अलग वर्ग बना गई।
रिश्ता। नाइट लॉर्ड से ठीक उसी तरह जुड़े थे जैसे लॉर्ड राजा से। लॉर्ड नाइट को फ़ीफ़ नाम की ज़मीन देता और उसकी रक्षा का वचन देता था।
फ़ीफ़। यह उत्तराधिकार में मिल सकती थी, 1,000 से 2,000 एकड़ या उससे ज़्यादा की होती थी, और इसमें नाइट के परिवार के लिए घर, एक चर्च, एक पनचक्की और एक मदिरा-संपीडक शामिल थे। इसकी ज़मीन किसान ही जोतते थे, बिल्कुल सामंती मेनर की तरह।
नाइट क्या देता था। बदले में वह लॉर्ड को एक तय शुल्क देता और युद्ध में उसकी तरफ़ से लड़ने का वचन देता था। अपनी सैन्य योग्यता बनाए रखने के लिए वह रोज़ बाड़बंदी और पुतलों से रणकौशल का अभ्यास करता था।
वफ़ादारी। नाइट एक से ज़्यादा लॉर्डों की सेवा कर सकता था, पर उसकी पहली वफ़ादारी हमेशा अपने ही लॉर्ड के प्रति होती थी, जिसका गुणगान तेरहवीं सदी की फ्रांसीसी कविता “डून दे मयान्स” करती है।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. स्वतंत्र किसान और सर्फ में अंतर बताइए।

उत्तर: स्वतंत्र किसान। वे लॉर्ड के काश्तकार के रूप में अपने खेत रखते थे। घर के पुरुषों को साल में कम से कम चालीस दिन सैनिक सेवा देनी पड़ती थी। हफ़्ते में आमतौर पर तीन दिन, और अक्सर उससे भी ज़्यादा, लॉर्ड की ज़मीन पर श्रम-लगान (किताब का शब्द: श्रम-अधिशेष) के लिए रखने पड़ते थे, और उस मेहनत की उपज लॉर्ड को जाती थी। इसके अलावा गड्ढे खोदना, लकड़ी इकट्ठा करना, बाड़ बनाना और सड़कें ठीक करना जैसी बिना मज़दूरी की सेवाएँ भी देनी पड़ती थीं। वे “टैली” नाम का सीधा शाही कर भी देते थे, जिससे पादरी और अभिजात मुक्त थे।
सर्फ। वे जिस ज़मीन को जोतते थे वह लॉर्ड की होती थी, उनकी नहीं, और उपज का बड़ा हिस्सा सीधे लॉर्ड के पास जाता था। उन्हें कोई मज़दूरी नहीं मिलती थी। वे लॉर्ड की इजाज़त के बिना जागीर छोड़ नहीं सकते थे। आटे के लिए लॉर्ड की चक्की, रोटी के लिए उसका तंदूर और मदिरा के लिए उसका संपीडक, हर एक का शुल्क देकर ही इस्तेमाल कर सकते थे, और शादी के लिए भी लॉर्ड की मंज़ूरी और शुल्क ज़रूरी था।
असली फ़र्क। स्वतंत्र किसान अपनी जोत के बदले लॉर्ड को तय सेवाएँ देता था; सर्फ लॉर्ड को अपना श्रम, अपनी उपज और अपनी आवाजाही की आज़ादी, तीनों देता था।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. मध्यकालीन मठों का क्या कार्य था?

उत्तर: अलग जीवन। गाँवों-नगरों में लोगों के बीच रहने वाले आम पादरियों के अलावा कुछ गहरे धार्मिक ईसाई अलग-थलग रहना चुनते थे, और इसके लिए वे ऐबी या मठ नाम के धार्मिक समुदायों में, अक्सर आबादी से बहुत दूर, रहते थे। इनमें दो सबसे मशहूर थे इटली में 529 में बना सेंट बेनेडिक्ट का मठ और बरगंडी में 910 में बना क्लूनी।
व्रत। भिक्षु जीवनभर मठ में रहने और अपना समय प्रार्थना, अध्ययन और खेती जैसे शारीरिक श्रम में बिताने का व्रत लेते थे। पादरी बनने के उलट यह जीवन स्त्रियों के लिए भी खुला था; ऐसे पुरुष मोंक (भिक्षु) और स्त्रियाँ नन (भिक्षुणी) कहलाती थीं। 73 अध्यायों वाली बेनेडिक्टीन नियमावली रोज़ का अनुशासन तय करती थी: बोलने की इजाज़त कम ही मिलती, विनम्रता का मतलब आज्ञापालन था, किसी भिक्षु के पास निजी संपत्ति नहीं हो सकती थी, आलस्य आत्मा का दुश्मन माना जाता था, और मठ ऐसा बनना चाहिए कि पानी, चक्की, बाग़ और कार्यशाला सब उसकी हद के अंदर मिल जाएँ।
संस्थाएँ। दस-बीस लोगों के समुदाय बढ़ते-बढ़ते सैकड़ों लोगों के बड़े समुदाय बन गए, जिनके साथ बड़ी इमारतें, भू-जागीरें और स्कूल-कॉलेज तथा अस्पताल भी जुड़े होते थे।
कला। मठों ने कला में बड़ा योगदान दिया। आबेस हिल्डेगार्ड एक कुशल संगीतज्ञ थीं, जिन्होंने चर्च में सामूहिक प्रार्थना-गायन को बढ़ावा दिया।
उपदेश। तेरहवीं सदी से फ्रायर नाम के कुछ भिक्षु किसी एक मठ में टिकने के बजाय जगह-जगह घूमकर उपदेश देने और दान पर गुज़ारा करने लगे।
और आलोचना। चौदहवीं सदी तक मठवाद के मक़सद पर शक होने लगा था। लैंग्लैंड की कविता “पियर्स प्लाउमैन” में कुछ भिक्षुओं की विलासी ज़िंदगी की तुलना साधारण किसानों, चरवाहों और मज़दूरों के “शुद्ध विश्वास” से की गई, और चॉसर की “कैंटरबरी टेल्स” में एक नन, एक भिक्षु और एक फ्रायर का हास्यपूर्ण चित्रण मिलता है।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. मध्यकालीन यूरोप में कैथोलिक चर्च की शक्ति, बनावट और सामाजिक भूमिका का वर्णन कीजिए।

उत्तर: एक स्वतंत्र ताक़त। कैथोलिक चर्च के अपने कानून थे, शासकों से मिली ज़मीनें थीं, और वह खुद कर वसूल सकता था। इसलिए यह ऐसी ताक़तवर संस्था थी जो राजा पर बिल्कुल निर्भर नहीं थी।
बनावट। रोम में रहने वाला पोप पश्चिमी चर्च का मुखिया था। बिशप और पादरी यूरोप के ईसाइयों का मार्गदर्शन करते थे और पहला वर्ग बनाते थे। बिशप “धार्मिक अभिजात” थे: लॉर्ड की तरह उनके पास विशाल जागीरें थीं और वे शानदार महलों में रहते थे।
पैरिश। ज़्यादातर गाँवों का अपना चर्च होता था, जहाँ लोग हर रविवार पादरी का उपदेश सुनने और साथ प्रार्थना करने जमा होते थे। गाँव वाले अपने गाँव को ही “पैरिश” कहने लगे, यानी एक पादरी की देखरेख वाला इलाका।
कौन पादरी बन सकता था। सर्फ पर पाबंदी थी, शारीरिक रूप से अक्षम लोगों पर भी, और स्त्रियाँ तो पादरी बन ही नहीं सकती थीं। जो पुरुष पादरी बनता, वह शादी नहीं कर सकता था।
आमदनी। चर्च को टीथ का अधिकार था, यानी किसानों की साल भर की उपज का दसवाँ हिस्सा। अमीरों से मिलने वाला दान भी आमदनी का ज़रिया था, जो वे अपने और अपने मृत रिश्तेदारों के परलोक-कल्याण के लिए देते थे।
नए धर्म में पुरानी रीतियाँ। ईसाई बन जाने के बाद भी यूरोपवासियों ने चमत्कार और पुरानी लोक-परंपराओं से जुड़े अपने विश्वास पूरी तरह नहीं छोड़े। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला क्रिसमस एक पुराने पूर्व-रोमन त्योहार की जगह आया, जिसकी तारीख सौर पंचांग से तय होती थी, और चंद्र पंचांग से तय होने वाला ईस्टर वसंत के स्वागत वाले पुराने त्योहार की जगह आया। काम में डूबे किसान “पवित्र दिनों” का स्वागत छुट्टी की तरह करते थे, जो प्रार्थना के लिए तय थे पर अक्सर मौज-मस्ती और दावतों में बीतते थे, और शहीदों की समाधियों या बड़े गिरजाघरों की तीर्थयात्रा ईसाई जीवन का अहम हिस्सा थी।
चर्च की रस्मों में सामंती तौर-तरीके। प्रार्थना में हाथ जोड़कर, सिर झुकाकर घुटनों पर बैठना ठीक वैसा ही था जैसे नाइट अपने लॉर्ड को वफ़ादारी की शपथ देते वक्त करता था, और ईश्वर के लिए इस्तेमाल होने वाला “लॉर्ड” शब्द भी सामंती संस्कृति से ही आया।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. ग्यारहवीं सदी से यूरोपीय खेती में आए तकनीकी बदलावों और उनके असर का वर्णन कीजिए।

उत्तर: हल। लकड़ी के साधारण हल की जगह लोहे की भारी नोक वाले हल और साँचेदार पटरे आए, जो ज़्यादा गहराई तक खोदते और ऊपरी मिट्टी को सही से पलट देते थे, जिससे मिट्टी के पोषक तत्व बेहतर इस्तेमाल हुए।
पशु-शक्ति। गर्दन के जुए की जगह कंधे का जुआ आया, जिससे जानवर ज़्यादा ताक़त लगा सके, और घोड़ों के खुरों पर लोहे की नाल लगने से खुर सड़ने से बचने लगे।
हवा और पानी। अनाज पीसने और अंगूर निचोड़ने के लिए पूरे यूरोप में ज़्यादा पनचक्कियाँ और पवनचक्कियाँ लगीं।
भूमि का उपयोग। सबसे क्रांतिकारी बदलाव था दो-खेत से तीन-खेत व्यवस्था में जाना, जिसमें हर खेत तीन में से दो साल इस्तेमाल हो सकता था।
असर। खाद्य उत्पादन लगभग दुगुना हो गया। बसंत की नयी फ़सल यानी मटर, सेम और मसूर से लोगों को ज़्यादा वनस्पति-प्रोटीन और घोड़ों को जौ-बाजरा मिलने लगे। एक किसान की औसत जोत लगभग 100 एकड़ से घटकर 20-30 एकड़ रह गई, जिसे कम मेहनत में बेहतर जोता जा सकता था और जिससे दूसरे कामों के लिए वक्त बचा। खेती की ज़मीन बढ़ाने, तीन-खेत व्यवस्था अपनाने और गाँव में लोहार की दुकानें खोलने में किसानों ने खुद पहल की, जबकि महँगी चक्कियाँ लॉर्ड लगवाते थे।

प्रश्न 8 (4 अंक)

प्र. ग्यारहवीं सदी से यूरोप में नगर दोबारा कैसे और क्यों बढ़े?

उत्तर: खेती का आधार। रोमन साम्राज्य के पतन के बाद उसके नगर वीरान और खंडहर हो गए थे। ग्यारहवीं सदी से, जब नयी तकनीक ने खेती को बहुत बड़ी आबादी पालने लायक बना दिया, नगर-जीवन फिर संभव हो गया।
बाज़ार। जिन किसानों के पास बेचने लायक अतिरिक्त अनाज था, उन्हें उसे बेचने और औज़ार-कपड़ा खरीदने की जगह चाहिए थी, इसलिए हाट-मेले और छोटे बाज़ार-केंद्र बने, जो धीरे-धीरे नगर का रूप लेने लगे: एक चौक, एक चर्च, दुकानों वाली सड़कें, और नगर चलाने वालों के लिए एक दफ़्तर।
नगर बनने के दूसरे रास्ते। कुछ नगर बड़े दुर्गों के आसपास, कुछ बिशपों की जागीरों के आसपास और कुछ बड़े चर्चों के आसपास बसे।
अलग तरह की ज़िम्मेदारी। नगर में लोग ज़मीन के मालिक लॉर्ड को सेवा देने के बजाय कर देते थे।
आज़ादी। “नगर की हवा स्वतंत्र बनाती है” मशहूर कहावत थी: एक साल और एक दिन तक नगर में बिना पकड़े छिपा रह जाने वाला सर्फ आज़ाद हो जाता था। नगरों में स्वतंत्र किसान, भागे हुए सर्फ, दुकानदार, व्यापारी और बाद में साहूकार-वकील जैसे लोग बसने लगे।
संगठन और आकार। हर शिल्प एक श्रेणी में संगठित था, जो गुणवत्ता, कीमत और बिक्री पर नियंत्रण रखती और श्रेणी सभागार में मिलती थी। बड़े नगरों की आबादी करीब 30,000 तक होती थी, और व्यापार बढ़ने के साथ नगर के व्यापारी इतने अमीर हो गए कि अभिजातों को टक्कर देने लगे, इसीलिए नगरवासियों को एक संभावित चौथा वर्ग कहा गया है।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. चौदहवीं सदी में यूरोप के संकट के तीन कारण और उसके परिणाम समझाइए।

उत्तर: 1. जलवायु का बदलाव। तीन सदियों की गर्म गर्मियों के बाद तेरहवीं सदी के अंत तक यूरोप में कड़ाके की ठंड लौट आई। फ़सल का मौसम छोटा हो गया, ऊँची ज़मीन पर खेती मुश्किल हो गई, और तूफ़ानों तथा समुद्री बाढ़ ने खेत-खलिहान तबाह कर दिए। पीढ़ियों से जुती हुई मिट्टी तीन-खेत व्यवस्था के बावजूद थक चुकी थी, और चरागाह घटने से पशु भी कम हो गए। आबादी साधनों से आगे निकल चुकी थी, और नतीजा था 1315-17 का महान अकाल और 1320 के दशक में भारी पशु-मृत्यु।
2. धातु-मुद्रा की कमी। ऑस्ट्रिया और सर्बिया की चाँदी की खानों का उत्पादन ज़रूरत से कम पड़ गया। सरकारों को चाँदी में सस्ती धातुएँ मिलाकर मुद्रा का अवमूल्यन करना पड़ा।
3. ब्लैक डैथ। 1347 से 1350 के बीच व्यापारी जहाज़ों पर सवार चूहों के ज़रिए ब्यूबोनिक प्लेग पश्चिमी यूरोप में फैल गया। आधुनिक अनुमान के मुताबिक इसमें पूरी आबादी का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा मारा गया, और सबसे बुरी तरह प्रभावित जगहों पर यह 40 प्रतिशत तक पहुँचा।
प्लेग कैसे फैला। व्यापार-केंद्र होने के कारण नगर सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए। मठ-आश्रम जैसे बंद समुदायों में एक व्यक्ति के संक्रमित होते ही लगभग सब संक्रमित हो जाते थे। सबसे ज़्यादा जानें शिशुओं, जवानों और बुज़ुर्गों की गईं, और 1360-70 के दशकों में इसकी छोटी लहरें फिर आईं।
जनसंख्या पर असर। यूरोप की आबादी, जो 1300 में 7.3 करोड़ थी, 1400 में घटकर 4.5 करोड़ रह गई।
आर्थिक असर। आबादी घटने से मज़दूरों की भारी कमी हुई और कृषि तथा विनिर्माण के बीच गंभीर असंतुलन पैदा हो गया, क्योंकि दोनों में बराबर लगने लायक लोग ही नहीं बचे। खरीदार कम होने से कृषि-मूल्य गिरे, जबकि मज़दूरी तेज़ी से बढ़ी: इंग्लैंड में कृषि-मज़दूरी 250 प्रतिशत तक बढ़ी और बचे हुए मज़दूर पुरानी दर से दुगुनी मज़दूरी माँग सकते थे।
विद्रोह। लॉर्डों की आमदनी बुरी तरह घटी और बेबस होकर कई लॉर्डों ने नकद अनुबंध छोड़कर पुरानी श्रम-सेवा फिर लागू करने की कोशिश की। किसानों ने इसका हिंसक विरोध किया, और अध्याय तीन विद्रोह गिनाता है: 1323 में फ़्लैंडर्स, 1358 में फ्रांस और 1381 में इंग्लैंड। इनमें पहला अकाल के वर्षों का है, प्लेग से पहले का, और बाकी दो प्लेग के बाद के, यानी किसानों पर दबाव पूरी संकट-सदी भर बना रहा। विद्रोह बेरहमी से कुचले गए, फिर भी वे उन्हीं इलाकों में सबसे हिंसक थे जो पहले की समृद्धि देख चुके थे, और उनकी तीव्रता ने यह पक्का कर दिया कि पुराने सामंती रिश्ते दोबारा नहीं लादे जा सके: नकदी अर्थव्यवस्था इतनी आगे बढ़ चुकी थी कि उसे पलटा नहीं जा सकता था।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. जनसंख्या के स्तर में लंबी अवधि के बदलावों ने यूरोप की अर्थव्यवस्था और समाज को कैसे प्रभावित किया?

उत्तर: वृद्धि, 1000 से 1300। यूरोप की आबादी 1000 में लगभग 4.2 करोड़ से बढ़कर 1200 में 6.2 करोड़ और 1300 में 7.3 करोड़ हो गई। इसकी वजह थी ग्यारहवीं सदी की नयी कृषि तकनीक, जिसने खाद्य उत्पादन लगभग दुगुना कर दिया।
लंबी उम्र। बेहतर भोजन का मतलब था लंबी उम्र: तेरहवीं सदी का औसत यूरोपीय आठवीं सदी वाले से लगभग दस साल ज़्यादा जीता था। हालाँकि स्त्रियों और लड़कियों की उम्र पुरुषों से कम रहती थी, क्योंकि पुरुषों को बेहतर खाना मिलता था।
नगर और व्यापार। बड़ी और बेहतर खाई-पिई आबादी ने नगर-जीवन को फिर खड़ा किया, जो रोमन साम्राज्य के साथ लगभग मिट चुका था। हाट-मेले और बाज़ार-केंद्र चौक, चर्च, दुकानों और अपने दफ़्तर वाले नगर बन गए। शिल्प श्रेणियों में संगठित हुए, पश्चिम एशिया से नए व्यापार-मार्ग बने, और व्यापारी इतने अमीर हो गए कि अभिजातों को टक्कर देने लगे। नगरवासियों को एक संभावित चौथा वर्ग तक कहा गया।
सामंती बंधन ढीले पड़े। अर्थव्यवस्था नकदी पर टिकने लगी, तो लॉर्ड सेवा की जगह नकद लगान लेने लगे और किसान अपनी फ़सल व्यापारियों को बेचने लगे, जिससे सामंतवाद की नींव रहे निजी रिश्ते कमज़ोर पड़ गए। इंग्लैंड में 1270 से 1320 के बीच कृषि-मूल्य दुगुने हो गए।
गिरावट, 1300 से 1400। अकाल, मुद्रा की कमी और ब्लैक डैथ ने यह सब पलट दिया। आबादी 1300 के 7.3 करोड़ से घटकर 1400 में 4.5 करोड़ रह गई।
गिरावट का असर। मज़दूर दुर्लभ और इसीलिए महँगे हो गए, और कृषि तथा विनिर्माण के बीच गंभीर असंतुलन पैदा हुआ क्योंकि दोनों के लिए लोग ही नहीं बचे। खरीदार घटने से कृषि-मूल्य गिरे, जबकि इंग्लैंड में मज़दूरी 250 प्रतिशत तक बढ़ी। दोनों तरफ़ से घिरे लॉर्डों ने श्रम-सेवा लौटाने की कोशिश की, और किसानों ने जवाब में विद्रोह किए: 1323 में फ़्लैंडर्स, 1358 में फ्रांस और 1381 में इंग्लैंड। स्थायी नतीजा यह रहा कि कृषि-दासता दोबारा खड़ी नहीं की जा सकी: जनसंख्या के बदलाव ने मोल-भाव की ताक़त मज़दूर के हाथ में सरका दी थी।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. “नए शासक” कौन थे और उन्होंने यूरोप की राजनीतिक व्यवस्था कैसे बदली?

उत्तर: वे कौन थे। पंद्रहवीं और सोलहवीं सदी में यूरोपीय राजाओं ने अपनी सैनिक और आर्थिक ताक़त बढ़ाई और ऐसे राज्य बनाए जो यूरोप के लिए उतने ही अहम थे जितने उस दौर के आर्थिक बदलाव। इतिहासकार इन्हें “नए शासक” कहते हैं: फ्रांस में लुई ग्यारहवें, ऑस्ट्रिया में मैक्समिलन, इंग्लैंड में हेनरी सप्तम, और स्पेन में ईसाबेला व फ़रडीनेंड। नयी राजशाही का काल फ्रांस में 1461-1559, स्पेन में 1474-1556 और इंग्लैंड में 1485-1547 माना जाता है।
उन्होंने क्या खड़ा किया। इन निरंकुश शासकों ने स्थायी सेना, स्थायी नौकरशाही और राष्ट्रीय कर-व्यवस्था बनानी शुरू की, और स्पेन तथा पुर्तगाल ने यूरोप के समुद्र-पार विस्तार की शुरुआत की।
कामयाबी की वजह। लॉर्डशिप और वैसलेज की पुरानी व्यवस्था के बिखरने और आर्थिक वृद्धि के धीमे रहने ने राजाओं को पहली बार अपनी प्रजा पर नियंत्रण बढ़ाने का असली मौका दिया।
सैनिक बदलाव। सामंती सेना की जगह बंदूक और घेरा-तोपों से लैस प्रशिक्षित पैदल सेना ने ले ली, जो सीधे राजा के अधीन थी, और अभिजातों का विरोध इस ताक़त के सामने टूट गया।
कर से क्या मिला। बढ़े हुए करों से बड़ी सेनाएँ खड़ी हुईं, जिनके बल पर शासकों ने अपनी सीमाओं की रक्षा और विस्तार किया और भीतरी विरोध को दबाया।
विरोध। केंद्रीकरण का विरोध भी हुआ, और हर तरह के विरोध में साझा धागा कर ही था। इंग्लैंड में 1497, 1536, 1547, 1549 और 1553 में विद्रोह हुए। फ्रांस में लुई ग्यारहवें (1461-83) को ड्यूकों और राजकुमारों से लंबा संघर्ष करना पड़ा, छोटे अभिजातों ने स्थानीय सभाओं के ज़रिए विरोध किया, और सोलहवीं सदी के “धार्मिक” युद्ध भी अंशतः शाही विशेषाधिकार और क्षेत्रीय स्वतंत्रताओं की लड़ाई थे।
अभिजातों का पाला बदलना। अभिजात विरोधी से राजभक्त बन गए और उन्हें प्रशासनिक सेवा में स्थायी पद मिल गए। इसीलिए शाही निरंकुशता को सामंतवाद का बदला हुआ रूप कहा गया है: वही वर्ग राजनीति पर छाया रहा।
नया दरबार। अब राजा निजी वफ़ादारी वाले पिरामिड के शिखर पर नहीं, बल्कि एक बड़े दरबारी समाज और आश्रयदाता-अनुयायी तंत्र के केंद्र में था, जहाँ आश्रय पैसे से मिलता था। जो व्यापारी और साहूकार राजाओं को सैनिकों की तनख्वाह के लिए कर्ज़ देते थे, उन्हें दरबार में जगह मिल गई, और राज्य-व्यवस्था में ग़ैर-सामंती तत्वों के लिए भी रास्ता खुल गया।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. फ्रांस गणतंत्र और इंग्लैंड राजतंत्र क्यों बना? सत्रहवीं सदी से इनकी राहें कैसे अलग हुईं?

उत्तर: साझा शुरुआत। दोनों राज्य सामंतवाद से निकले थे और दोनों में समाज के वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक सभा थी, और दोनों में जो झगड़ा उनका भविष्य तय करने वाला था वह कर और सत्ता के बँटवारे का ही था।
फ्रांस: एस्टेट्स जनरल। 1614 में बालक राजा लुई तेरहवें के शासनकाल में फ्रांस की परामर्शदात्री सभा एस्टेट्स जनरल की बैठक हुई। इसके तीन सदन थे, जो पादरी, अभिजात और “बाकी सब” का प्रतिनिधित्व करते थे। इसके बाद लगभग दो सदियों तक, 1789 तक, इसे दोबारा नहीं बुलाया गया, क्योंकि राजा तीन वर्गों के साथ अपनी ताक़त बाँटना नहीं चाहते थे। इसलिए फ्रांस में निरंकुशता बेरोक-टोक बढ़ती रही, और जब हिसाब हुआ तो क्रांति के रूप में हुआ।
इंग्लैंड: महान परिषद और पार्लियामेंट। नॉरमन विजय से भी पहले एंग्लो-सैक्सन लोगों की एक महान परिषद थी, जिसकी सलाह के बिना राजा कोई कर नहीं लगा सकता था। यही आगे चलकर पार्लियामेंट बनी, जिसमें हाउस ऑफ लॉर्ड्स (लॉर्ड और पादरी) और हाउस ऑफ कामन्स (नगरों और ग्रामीण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व) शामिल थे।
चार्ल्स प्रथम। राजा चार्ल्स प्रथम ने 1629 से 1640 तक, ग्यारह वर्षों तक, पार्लियामेंट को बुलाए बिना शासन किया। धन की ज़रूरत पड़ने पर जब वे उसे बुलाने को बाध्य हुए तो पार्लियामेंट का एक हिस्सा उनके विरोध में चला गया, और बाद में उन्हें प्राणदंड देकर गणतंत्र की स्थापना हुई।
राजतंत्र की वापसी। यह गणतंत्र ज़्यादा दिन नहीं चला। राजतंत्र लौट आया, पर इस शर्त पर कि पार्लियामेंट नियमित रूप से बुलाई जाएगी, यानी ताज अपनी सत्ता पर सीमा मानकर ही बच पाया।
नतीजा। आज फ्रांस में गणतंत्रीय सरकार है और इंग्लैंड में राजतंत्र। इसका कारण सत्रहवीं सदी के बाद दोनों देशों के इतिहास की अलग-अलग दिशाएँ हैं: इंग्लैंड में सभा ने राजा को साध लिया, फ्रांस में राजा ने सभा को चुप करा दिया।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
बेनेडिक्टीन मठों में 73 अध्यायों वाले नियमों की एक पांडुलिपि थी, जिसका पालन भिक्षु सदियों तक करते रहे। अध्याय 6: भिक्षुओं को बोलने की इजाज़त कम ही दी जानी चाहिए। अध्याय 7: विनम्रता का मतलब है आज्ञापालन। अध्याय 33: किसी भी भिक्षु के पास निजी संपत्ति नहीं होनी चाहिए। अध्याय 47: आलस्य आत्मा का दुश्मन है, इसलिए भिक्षु और भिक्षुणियों को तय समय पर शारीरिक श्रम और नियत घंटों में पवित्र पाठ करना चाहिए। अध्याय 48: मठ ऐसा बनाया जाना चाहिए कि उसकी हद के अंदर ही सब ज़रूरी चीज़ें मिल जाएँ: पानी, चक्की, बाग़ और कार्यशालाएँ।

(क) 1 अंक बेनेडिक्टीन नियमावली में कुल कितने अध्याय थे?
उत्तर: तिहत्तर।

(ख) 2 अंक अध्याय 33 और 47 से भिक्षु के रोज़मर्रा के जीवन के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर: अध्याय 33 किसी भी भिक्षु को निजी संपत्ति रखने से रोकता है, यानी मठ में कोई चीज़ किसी एक व्यक्ति की नहीं थी। अध्याय 47 आलस्य को आत्मा का दुश्मन बताकर शारीरिक श्रम और पवित्र पाठ के लिए समय तय करता है, यानी भिक्षु का दिन आराम का नहीं, काम और अध्ययन की एक तय दिनचर्या का था।

(ग) 3 अंक अध्याय 48 मठ को बाहरी दुनिया से किस तरह जोड़ता है, और यह मठों की स्थापना के तरीके से कैसे मेल खाता है?
उत्तर: अध्याय 48 कहता है कि मठ ऐसा बने कि हर ज़रूरी चीज़ उसकी अपनी हद में मिल जाए: पानी, चक्की, बाग़ और कार्यशालाएँ। मक़सद यह था कि समुदाय को बाहर जाने की कोई वजह ही न रहे। यह मठों की स्थापना के तरीके से मेल खाता है, क्योंकि भिक्षु जान-बूझकर आबादी से दूर बने धार्मिक समुदायों में रहना चुनते थे, जबकि आम पादरी लोगों के बीच रहते थे। आत्मनिर्भरता ने ही इस अलगाव को व्यावहारिक बनाया, और इसी वजह से आगे चलकर मठ बड़ी जागीरों, स्कूल-कॉलेजों और अस्पतालों वाले बड़े संस्थान बन सके।

केस स्टडी
चौदहवीं सदी की शुरुआत तक यूरोप का आर्थिक विस्तार धीमा पड़ गया था। तीन सदियों की गर्म गर्मियों के बाद कड़ाके की ठंड लौट आई, फ़सल का मौसम छोटा हुआ, तूफ़ानों और समुद्री बाढ़ ने खेत-खलिहान तबाह किए, और बार-बार की जुताई से मिट्टी थक गई। आबादी अपने साधनों से आगे निकल चुकी थी, और 1315-17 के महान अकाल के बाद 1320 के दशक में भारी पशु-मृत्यु हुई। ऑस्ट्रिया और सर्बिया की चाँदी की खानों का उत्पादन घटने से सरकारों के पास धातु नहीं बची और उन्होंने मुद्रा का अवमूल्यन कर दिया। फिर 1347 से 1350 के बीच व्यापारी जहाज़ों पर सवार चूहे ब्यूबोनिक प्लेग ले आए।

(क) 1 अंक यूरोप में महान अकाल किन वर्षों में पड़ा?
उत्तर: 1315-17 में।

(ख) 2 अंक जलवायु के बदलाव से यूरोप का खाद्य उत्पादन क्यों घटा?
उत्तर: ठंडी गर्मियों ने फ़सल का मौसम छोटा कर दिया और ऊँची ज़मीन पर खेती मुश्किल बना दी, जबकि तूफ़ानों और समुद्री बाढ़ ने खेत-खलिहान तबाह कर दिए। साथ ही पीढ़ियों से लगातार जुती मिट्टी थक चुकी थी, और चरागाह घटने से पशु भी कम रह गए।

(ग) 3 अंक 1347-50 के प्लेग से 1358 और 1381 के किसान विद्रोहों तक की कड़ी जोड़िए।
उत्तर: प्लेग ने यूरोप की करीब पाँचवीं आबादी ले ली, और जनसंख्या 1300 के 7.3 करोड़ से घटकर 1400 में 4.5 करोड़ रह गई। मज़दूर बहुत कम बचे, इसलिए मज़दूरी तेज़ी से बढ़ी, इंग्लैंड में 250 प्रतिशत तक, जबकि खरीदार घटने से कृषि-मूल्य गिर गए। दोनों तरफ़ से घिरे लॉर्डों ने नकद अनुबंध छोड़कर पुरानी श्रम-सेवा लौटाने की कोशिश की। जो किसान पहले ही बेहतर शर्तें जीत चुके थे, उन्होंने हिंसक विरोध किया, और 1358 में फ्रांस तथा 1381 में इंग्लैंड में विद्रोह भड़के। (अध्याय एक तीसरा विद्रोह भी गिनाता है, 1323 में फ़्लैंडर्स का, जो प्लेग से पहले अकाल के वर्षों का है।) सब कुचल दिए गए, फिर भी नकदी अर्थव्यवस्था इतनी आगे बढ़ चुकी थी कि कृषि-दासता दोबारा नहीं लौट सकी।