कक्षा 11 इतिहास अध्याय 4 तीन वर्ग NCERT समाधान (NCERT Solutions) हिंदी में

NCERT की पाठ्यपुस्तक विश्व इतिहास के कुछ विषय, विषय 4 “तीन वर्ग” के अभ्यास के छहों प्रश्न, ठीक उसी क्रम और उन्हीं शब्दों में जैसे हिंदी संस्करण में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा मॉडल उत्तर। पाठ के बीच छपे क्रियाकलाप अंत में हल किए गए हैं। पहले चार प्रश्न किताब के शीर्षक संक्षेप में उत्तर दीजिए के नीचे आते हैं और आख़िरी दो संक्षेप में निबंध लिखिए के नीचे। पहले खुद उत्तर लिखिए, फिर इससे मिलाइए।

1 फ्रांस के प्रारंभिक सामंती समाज के दो लक्षण

प्रश्न 1

प्र. फ्रांस के प्रारंभिक सामंती समाज के दो लक्षणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: रोमन साम्राज्य के पतन के बाद पूर्वी और मध्य यूरोप के जर्मन कबीले इटली, स्पेन और फ्रांस में बस गए। कोई एक सत्ता न बचने से लड़ाइयाँ आम हो गईं और अपनी भूमि बचाने के लिए साधन जुटाना सबसे बड़ा सवाल बन गया, इसलिए सामाजिक व्यवस्था भूमि पर नियंत्रण के इर्द-गिर्द बनी। इसी से नीचे दिए दो लक्षण निकलते हैं।

1. ज़मीन वैसलेज के ज़रिए रखी जाती थी। फ्रांस के राजा अपनी प्रजा से वैसलेज की प्रथा के ज़रिए जुड़े थे, जो फ्रैंक जैसे जर्मन मूल के लोगों में आम थी। बड़े भू-स्वामी यानी अभिजात राजा के दास (वैसल) होते थे, और किसान भू-स्वामियों के दास। इस रस्म में एक अभिजात राजा को अपना सेन्योर मान लेता था और दोनों एक-दूसरे से वचन लेते थे: लॉर्ड दास की रक्षा करेगा और दास उसके प्रति वफ़ादार रहेगा। चर्च में बाइबल की शपथ ली जाती थी और दास को उस ज़मीन के प्रतीक के तौर पर एक लिखित पत्र, या एक छड़ी, या मिट्टी का एक ढेला दिया जाता था। इसी से अभिजात को खास हैसियत मिलती थी: अपनी संपत्ति पर हमेशा के लिए पूरा नियंत्रण, “सामंती सेना” खड़ी करने का अधिकार, अपनी अदालत, और अपना सिक्का चलाने का अधिकार तक।

2. समाज काम के आधार पर तीन वर्गों में बँटा था। फ्रांसीसी पादरियों का मानना था कि हर व्यक्ति तीन “वर्गों” में से किसी एक का सदस्य होता है। एक बिशप ने इसे एक ही वाक्य में कहा: “यहाँ वर्ग क्रम में, कुछ प्रार्थना करते हैं, दूसरे लड़ते हैं और शेष अन्य कार्य करते हैं।” पादरी प्रार्थना करते थे, अभिजात लड़ते और ज़मीन रखते थे, और किसान वर्ग, यानी स्वतंत्र किसान और सर्फ, वह अनाज उगाते थे जिससे बाकी दोनों वर्ग जीते थे। बारहवीं सदी में बिंगेन की आबेस हिल्डेगार्ड ने इस व्यवस्था को स्वाभाविक और ईश्वर-प्रदत्त बताते हुए लिखा कि सबको ईश्वर का प्यार मिलता है, “पर सब बराबर नहीं हैं।”

इनकी जगह ये दो लक्षण भी लिखे जा सकते हैं। लॉर्ड की जागीर यानी मेनर लगभग आत्मनिर्भर होती थी, जिसमें अपने खेत, लोहार-बढ़ई, राजमिस्त्री, जंगल, चरागाह, एक चर्च और एक दुर्ग होता था, हालाँकि नमक, चक्की का पाट और धातु के बर्तन बाहर से ही आते थे। उसके काश्तकार-किसान ज़रूरत पड़ने पर लॉर्ड के लिए पैदल सैनिक भी बन जाते थे। और नौवीं सदी से, जब छोटे-छोटे स्थानीय युद्ध आम हो गए, नाइट एक अलग वर्ग के रूप में उभरे, जिनमें हर एक 1,000 से 2,000 एकड़ या उससे ज़्यादा की फ़ीफ़ रखता था और बदले में तय शुल्क तथा युद्ध में लड़ने का वचन देता था।

2 जनसंख्या के लंबी-अवधि के परिवर्तन और उनका असर

प्रश्न 2

प्र. जनसंख्या के स्तर में होने वाले लंबी-अवधि के परिवर्तनों ने किस प्रकार यूरोप की अर्थव्यवस्था और समाज को प्रभावित किया?

उत्तर: यूरोप की आबादी तीन सदियों तक तेज़ी से बढ़ी और फिर एक ही सदी में गिर गई। दोनों बदलावों ने अर्थव्यवस्था और समाज को नया रूप दिया, पर उलटी-उलटी दिशाओं में।

1. वृद्धि, 1000 से 1300। आबादी 1000 में लगभग 4.2 करोड़ से बढ़कर 1200 में 6.2 करोड़ और 1300 में 7.3 करोड़ हो गई। वजह थी ग्यारहवीं सदी की नयी कृषि तकनीक: लोहे की भारी नोक वाला साँचेदार हल, कंधे का जुआ, लोहे की नाल, ज़्यादा पनचक्कियाँ-पवनचक्कियाँ, और सबसे बढ़कर दो-खेत से तीन-खेत व्यवस्था में बदलाव, जिससे भोजन की उपलब्धता दुगुनी हो गई।

2. लंबी उम्र और बेहतर भोजन। बसंत के खेत में उगने वाली मटर, सेम और मसूर से लोगों को वनस्पति-प्रोटीन और घोड़ों को जौ-बाजरा मिलने लगे। बेहतर भोजन का मतलब था लंबी उम्र: तेरहवीं सदी का औसत यूरोपीय आठवीं सदी वाले से लगभग दस साल ज़्यादा जीता था। हालाँकि स्त्रियों और लड़कियों की उम्र पुरुषों से कम रहती थी, क्योंकि पुरुषों को बेहतर खाना मिलता था।

3. नगर और संभावित चौथा वर्ग। बड़ी और बेहतर खाई-पिई आबादी ने नगर-जीवन फिर खड़ा किया, जो रोमन साम्राज्य के साथ लगभग मिट चुका था। अतिरिक्त अनाज बेचने की ज़रूरत से हाट-मेले और बाज़ार-केंद्र बने, जो चौक, चर्च, दुकानों वाली सड़कों और नगर चलाने वालों के दफ़्तर वाले नगरों में बदल गए। कुछ नगर बड़े दुर्गों, बिशपों की जागीरों या बड़े चर्चों के आसपास भी बसे। नगर में लोग सेवा की जगह लॉर्ड को कर देते थे, और एक साल और एक दिन तक बिना पकड़े छिपा रह जाने वाला सर्फ आज़ाद हो जाता था: “नगर की हवा स्वतंत्र बनाती है”। शिल्प श्रेणियों में संगठित हुए, पश्चिम एशिया से नए व्यापार-मार्ग बने, और सबसे अमीर व्यापारी अभिजातों को टक्कर देने लगे। बड़े नगरों की आबादी करीब 30,000 तक होती थी, और नगरवासियों को एक संभावित चौथा वर्ग तक कहा गया है।

4. सामंती बंधन ढीले पड़े। अर्थव्यवस्था नकदी पर टिकने लगी, तो लॉर्ड सेवा की जगह नकद लगान लेना पसंद करने लगे और किसान अपनी फ़सल सीधे व्यापारियों को बेचने लगे। इंग्लैंड में 1270 से 1320 के बीच कृषि-मूल्य दुगुने हो गए। एक किसान की जोत लगभग 100 एकड़ से घटकर 20-30 एकड़ रह गई, जिसे बेहतर जोता जा सकता था और जिससे घर को दूसरे कामों के लिए वक्त मिला।

5. गिरावट, 1300 से 1400। ठंडी जलवायु ने 1315-17 का महान अकाल और 1320 के दशक में भारी पशु-मृत्यु दी, ऑस्ट्रिया-सर्बिया की चाँदी की खानों की कमी ने सरकारों को मुद्रा का अवमूल्यन करने पर मजबूर किया, और 1347-50 की ब्लैक डैथ ने यूरोप का करीब पाँचवाँ हिस्सा निगल लिया। आबादी 1300 के 7.3 करोड़ से घटकर 1400 में 4.5 करोड़ रह गई।

6. गिरावट का असर। मज़दूर दुर्लभ और इसीलिए महँगे हो गए, और कृषि तथा विनिर्माण के बीच गंभीर असंतुलन पैदा हुआ, क्योंकि दोनों में बराबर लगने लायक लोग ही नहीं बचे। खरीदार घटने से कृषि-मूल्य गिरे, जबकि मज़दूरी तेज़ी से बढ़ी, इंग्लैंड में 250 प्रतिशत तक, और बचे हुए मज़दूर पुरानी दर से दुगुनी मज़दूरी माँग सकते थे। दोनों तरफ़ से घिरे लॉर्डों ने नकद अनुबंध छोड़कर पुरानी श्रम-सेवा लौटाने की कोशिश की, और किसानों ने हिंसक विरोध किया। अध्याय तीन विद्रोह गिनाता है: 1323 में फ़्लैंडर्स, जो प्लेग से पहले का है, 1315-17 के अकाल के बाद पशुओं की भारी मौतों वाले 1320 के दशक का, फिर 1358 में फ्रांस और 1381 में इंग्लैंड। सब कुचल दिए गए, फिर भी पुराने सामंती रिश्तों को पुनः लादा नहीं जा सका: नकदी अर्थव्यवस्था अब इतनी आगे बढ़ चुकी थी कि उसे श्रम-अर्थव्यवस्था में नहीं बदला जा सकता था।

3 नाइट एक अलग वर्ग क्यों बने और उनका पतन कब हुआ

प्रश्न 3

प्र. नाइट एक अलग वर्ग क्यों बने और उनका पतन कब हुआ?

उत्तर:

1. वे क्यों उभरे। नौवीं सदी से यूरोप में छोटे-छोटे स्थानीय युद्ध बार-बार होने लगे। लॉर्ड के बुलाने पर खेत छोड़कर आने वाला शौकिया किसान-सैनिक इस तरह की लड़ाई के लिए काफ़ी नहीं था; ज़रूरत थी कुशल अश्वसेना की, जो हर वक्त तैयार और साल भर प्रशिक्षित रहे। यही ज़रूरत नाइटों को अहम बनाकर एक अलग वर्ग बना गई।

2. सामंती व्यवस्था से उनका जुड़ाव। नाइट लॉर्ड से ठीक उसी तरह जुड़े थे जैसे लॉर्ड राजा से। लॉर्ड नाइट को फ़ीफ़ नाम की एक ज़मीन देता और उसकी रक्षा का वचन देता था। फ़ीफ़ उत्तराधिकार में मिल सकती थी, 1,000 से 2,000 एकड़ या उससे ज़्यादा की होती थी, और इसमें नाइट के परिवार के लिए घर, एक चर्च, एक पनचक्की और एक मदिरा-संपीडक शामिल थे। इसकी ज़मीन किसान ही जोतते थे, बिल्कुल सामंती मेनर की तरह।

3. नाइट क्या देता था। बदले में वह अपने लॉर्ड को एक तय रकम देता और युद्ध में उसकी तरफ़ से लड़ने का वचन देता था। अपनी सैन्य योग्यता बनाए रखने के लिए वह रोज़ अपना कुछ समय बाड़बंदी और पुतलों से रणकौशल तथा बचाव के अभ्यास में लगाता था।

4. वफ़ादारी और संस्कृति। नाइट एक से ज़्यादा लॉर्डों की सेवा कर सकता था, पर उसकी पहली वफ़ादारी हमेशा अपने ही लॉर्ड के प्रति होती थी। तेरहवीं सदी की फ्रांसीसी कविता “डून दे मयान्स” इसी वफ़ादारी का गुणगान करती है: “अगर मेरा प्यारा लॉर्ड मारा जाए, तो उसकी किस्मत में मैं भी शामिल होऊँगा।” बारहवीं सदी से गायक-चारण फ्रांस के मेनरों में घूमकर बहादुर राजाओं और नाइटों की कहानियाँ गाते थे, और ये घुमक्कड़ चारण बहुत प्रसिद्ध थे।

5. पतन कब हुआ। अध्याय कोई एक वर्ष नहीं देता, इसलिए उत्तर उसी हिस्से से निकालना होगा जो नए शासकों की बात करता है। नाइटों का पतन पंद्रहवीं-सोलहवीं सदी के इन्हीं शासकों के साथ हुआ। लॉर्डशिप और वैसलेज की पुरानी व्यवस्था बिखरने पर राजाओं ने सामंती सेना को पूरी तरह छोड़ दिया और बंदूक व घेरा-तोपों से लैस प्रशिक्षित पैदल सेना खड़ी की, जो सीधे उनके अधीन थी। फ़ीफ़ के बदले लड़ने वाले घुड़सवार, कवचधारी नाइट के पास इस मारक क्षमता का कोई जवाब नहीं था, और अध्याय खुद कहता है कि इसके सामने “अभिजातों का विरोध टूटता चला गया”। जो नाइट नौवीं सदी में अनिवार्य था, वह सोलहवीं सदी तक एक महँगा और बेकार सिपाही रह गया।

4 मध्यकालीन मठों का कार्य

प्रश्न 4

प्र. मध्यकालीन मठों का क्या कार्य था?

उत्तर:

1. दुनिया से अलग रहने की जगह। गाँवों-नगरों में लोगों के बीच रहने वाले आम पादरियों के अलावा कुछ गहरे धार्मिक ईसाई अलग-थलग रहना चुनते थे, और इसके लिए वे ऐबी या मठ नाम के धार्मिक समुदायों में, अक्सर आबादी से बहुत दूर, रहते थे। सबसे मशहूर दो मठ थे इटली में 529 में बना सेंट बेनेडिक्ट का मठ और बरगंडी में 910 में बना क्लूनी।

2. प्रार्थना, अध्ययन और श्रम का जीवन। भिक्षु जीवनभर मठ में रहने का व्रत लेते थे और अपना समय प्रार्थना, अध्ययन और खेती जैसे शारीरिक श्रम में बाँटते थे। 73 अध्यायों वाली बेनेडिक्टीन नियमावली, जिसका पालन सदियों तक हुआ, यह अनुशासन तय करती थी: भिक्षुओं को बोलने की आज्ञा कभी-कभी ही दी जानी चाहिए, विनम्रता का अर्थ है आज्ञा पालन, किसी भिक्षु के पास निजी संपत्ति नहीं होनी चाहिए, आलस्य आत्मा का दुश्मन है इसलिए शारीरिक श्रम और पवित्र पाठ के घंटे तय हैं, और मठ ऐसा बनना चाहिए कि पानी, चक्की, बाग़ और कार्यशाला सब उसकी हद के अंदर मिल जाएँ।

3. स्त्रियों के लिए भी खुला जीवन। पादरी बनने के उलट, जहाँ स्त्रियों पर पूरी पाबंदी थी, मठ का जीवन दोनों के लिए खुला था: ऐसे पुरुष मोंक (भिक्षु) और स्त्रियाँ नन (भिक्षुणी) कहलाती थीं। कुछ अपवादों को छोड़कर हर मठ एक ही लिंग के लोगों के लिए होता था, और भिक्षु-भिक्षुणी शादी नहीं करते थे।

4. शिक्षा और सेवा के केंद्र। दस-बीस लोगों से शुरू हुए समुदाय सैकड़ों लोगों के बड़े समुदाय बन गए, जिनके साथ बड़ी इमारतें, भू-जागीरें और स्कूल-कॉलेज तथा अस्पताल भी जुड़े होते थे।

5. कला और संगीत के केंद्र। मठों ने कला में बड़ा योगदान दिया। आबेस हिल्डेगार्ड अपनी लेखनी के अलावा एक कुशल संगीतज्ञ भी थीं, जिन्होंने चर्च में सामूहिक प्रार्थना-गायन को बहुत बढ़ावा दिया।

6. दुनिया में जाकर उपदेश। तेरहवीं सदी से फ्रायर नाम के कुछ भिक्षुओं ने किसी एक मठ में टिकने के बजाय जगह-जगह घूमकर उपदेश देना और दान पर गुज़ारा करना चुना।

7. और उन पर उठे सवाल। चौदहवीं सदी तक मठवाद के मक़सद और उपयोगिता पर शक होने लगा था। लैंग्लैंड की कविता “पियर्स प्लाउमैन” ने कुछ भिक्षुओं की आरामदेह और विलासी ज़िंदगी की तुलना साधारण किसानों, चरवाहों और मज़दूरों के “शुद्ध विश्वास” से की, और चॉसर की “कैंटरबरी टेल्स” में एक नन, एक भिक्षु और एक फ्रायर का हास्यपूर्ण चित्रण मिलता है।

5 मध्यकालीन फ्रांस के नगर में एक शिल्पकार का एक दिन

प्रश्न 5

प्र. मध्यकालीन फ्रांस के नगर में एक शिल्पकार के एक दिन के जीवन की कल्पना कीजिए और इसका वर्णन कीजिए।

उत्तर: यह प्रश्न कल्पना माँगता है, पर कल्पना अध्याय में दिए नगर, श्रेणी और कथीड्रल के ब्योरों पर ही खड़ी होनी चाहिए। नीचे बारहवीं सदी का एक दिन है, शिल्पकार की अपनी ज़ुबानी।

मैं कौन हूँ। मैं एक राजमिस्त्री हूँ, और मेरा नगर उस कथीड्रल के इर्द-गिर्द बसा है जो अब भी बन रहा है। मेरे दादा एक मेनर से दूसरे मेनर काम की तलाश में भटकते थे, पर मेरे पिता के समय तक फ्रांस में व्यापार और शिल्प इतने बढ़ चुके थे कि कारीगर एक ही जगह बस जाना बेहतर समझने लगे, और हमने भी यही किया।

सुबह। कथीड्रल की घंटी नगर को जगाती है। वह दूर तक सुनाई देने और लोगों को प्रार्थना के लिए बुलाने के लिए ही बनी है, और हमारे लिए घड़ी का काम भी वही करती है। काम के दिन मैं सीधे निर्माण-स्थल जाता हूँ, रास्ते में नगर का चौक, दुकानों वाली व्यापारी सड़क और नगर चलाने वालों का दफ़्तर पड़ता है।

दिन का काम। कथीड्रल मठ की संपत्ति है, पर पत्थर का बना है और पूरा होने में बरसों लेगा, इसलिए पूरे नगर की उसमें हिस्सेदारी है: कोई श्रम देता है, कोई सामान, कोई पैसा, और व्यापार से अमीर हुए सौदागर भी अपना पैसा चर्च को दान देने में लगाते हैं। आज मेरा काम एक खिड़की के लिए पत्थर तराशना है, क्योंकि कल रंगीन शीशे लेकर कारीगर आ रहे हैं। वे शीशे दिन में सूरज की रोशनी से चमकेंगे और रात में मोमबत्तियों की रोशनी से बाहर तक दिखेंगे, और उन पर बनी तस्वीरें उन लोगों को भी बाइबल की कहानियाँ सुनाएँगी जो पढ़ नहीं सकते। जब यह बनकर तैयार होगा तो तीर्थ-स्थल बन जाएगा और हमारा नगर उसके चारों ओर और बसेगा, जैसे रेम्स और कारटेस बसे हैं।

दोपहर और श्रेणी। मैं नगर के तंदूर की रोटी खाता हूँ, लॉर्ड के तंदूर की नहीं, क्योंकि नगर में हम लॉर्ड को कर देते हैं, सेवा नहीं। दोपहर बाद मैं श्रेणी सभागार जाता हूँ। मेरा शिल्प भी बाकी हर शिल्प और उद्योग की तरह एक श्रेणी में संगठित है, जो हमारे काम की गुणवत्ता, कीमत और बिक्री पर नज़र रखती है। सभी श्रेणियों के मुखिया इसी सभागार में औपचारिक रूप से मिलते हैं और यहीं समारोह भी होते हैं। आज एक नया प्रशिक्षु पेश किया जा रहा है, और एक राजमिस्त्री का मामला भी सुलझना है जो तय कीमत से कम पर काम ले रहा था।

जिनसे मैं मिलता हूँ। हमारा नगर उन बड़े नगरों जैसा तीस हज़ार का नहीं है, फिर भी यहाँ अनाज बेचने आए स्वतंत्र किसान, अकुशल मज़दूरी करते भागे हुए सर्फ, दुकानदार, व्यापारी और अब एक साहूकार तथा एक वकील भी हैं। हमारे निर्माण-स्थल पर काम करने वाला एक मज़दूर दो दिन की दूरी पर बसी जागीर का सर्फ है। उसे यहाँ ग्यारह महीने हो चुके हैं। अगर वह एक साल और एक दिन तक बिना पकड़े रह गया तो आज़ाद आदमी बन जाएगा, क्योंकि नगर की हवा स्वतंत्र बनाती है, और हममें से कोई किसी को कुछ नहीं बताएगा।

शाम। रोशनी ढलते ही दिन खत्म हो जाता है। पवित्र दिन होता तो काम होता ही नहीं: वे दिन प्रार्थना के लिए तय हैं, हालाँकि ज़्यादातर लोग उन्हें मौज-मस्ती और दावत में बिताते हैं। आज रात किसी शहीद की समाधि की ओर जाते तीर्थयात्रियों का एक जत्था नगर से गुज़र रहा है और चौक में रुकेगा। कल मैं फिर उसी पत्थर पर लौटूँगा, और उस कथीड्रल पर, जो मेरे जीते-जी पूरा नहीं होगा।

6 फ्रांस के सर्फ और रोम के दास की तुलना

प्रश्न 6

प्र. फ्रांस के सर्फ और रोम के दास के जीवन की दशा की तुलना कीजिए।

उत्तर: इस प्रश्न में रोम के दास के लिए विषय 2 “तीन महाद्वीपों में फैला साम्राज्य” और सर्फ के लिए यही अध्याय काम आता है। दोनों ही अस्वतंत्र थे, पर उनकी अस्वतंत्रता का रूप अलग था।

एक वाक्य में फ़र्क। रोम का दास किसी की संपत्ति था; फ्रांस का सर्फ ज़मीन से बँधा हुआ था। असली अंतर यही है, और इसी से समझ आता है कि सर्फ की अस्वतंत्रता नगर भागकर तोड़ी जा सकती थी, जबकि दास की अस्वतंत्रता सिर्फ उसका मालिक ही खत्म कर सकता था।

तुलना का आधार फ्रांस का सर्फ रोम का दास
कानूनी हैसियत ज़मीन से बँधा हुआ व्यक्ति। उसे वस्तु की तरह खरीदा-बेचा नहीं जाता था, पर वह लॉर्ड की इजाज़त के बिना जागीर छोड़ नहीं सकता था। संपत्ति। दास किसी का माल था, खरीदा-बेचा जा सकता था, और रोमन परिवार का ही एक हिस्सा गिना जाता था।
किस ज़मीन पर काम उन खेतों पर जो लॉर्ड के थे, उसके नहीं। उपज का बड़ा हिस्सा सीधे लॉर्ड के पास जाता था। अपने मालिक के खेतों, खानों, कार्यशालाओं या घर में। ऑगस्टस के समय इटली की 75 लाख की आबादी में लगभग 30 लाख दास थे।
मज़दूरी लॉर्ड को दी गई मेहनत की कोई मज़दूरी नहीं। कोई मज़दूरी नहीं। मालिक उसका पालन करता था, और काम हो या न हो, साल भर उसे खिलाना पड़ता था।
रोज़मर्रा की बंदिशें आटा लॉर्ड की चक्की में, रोटी लॉर्ड के तंदूर में और मदिरा लॉर्ड के संपीडक में ही, क्योंकि ये लॉर्ड के एकाधिकार थे। शादी के लिए भी लॉर्ड की मंज़ूरी और शुल्क ज़रूरी था। अपने विवाह और संतान पर भी उसका कोई कानूनी दावा नहीं था, और रोमन लेखक उसकी चर्चा जागीर के सामान की तरह करते थे: कोलुमेल्ला ने सलाह दी थी कि औज़ार दुगुने रखे जाएँ, क्योंकि “दास के श्रम-समय का नुकसान इन चीज़ों की कीमत से ज़्यादा बैठता है”।
दंड लॉर्ड की अपनी अदालत के अधीन, क्योंकि अभिजात को अपनी ज़मीन पर बसे हर व्यक्ति पर न्यायिक अधिकार था। मालिक के जीवन-मरण के अधिकार के अधीन। जब नगर-प्रीफ़ेक्ट लूसियस पेदानियस सेकुंडस की हत्या उसके अपने एक दास ने की, तो पुरानी प्रथा के अनुसार उस घर के हर दास को मृत्युदंड देना पड़ा, और सैनेट ने इसे लागू करवाया।
बाहर निकलने का रास्ता था। नगर भागकर एक साल और एक दिन तक बिना पकड़े रह जाने पर वह आज़ाद हो जाता था, क्योंकि “नगर की हवा स्वतंत्र बनाती है”। था, पर मालिक की मर्ज़ी से। मालिक उसे मुक्त कर सकता था और वह स्वतंत्रीकृत दास बन जाता था; ऐसे लोगों को पूँजी देकर व्यापार-प्रबंधक बनाया जाता था।
व्यवस्था क्यों बदली ब्लैक डैथ के बाद आबादी घटने से मज़दूर दुर्लभ हो गए और इंग्लैंड में मज़दूरी 250 प्रतिशत तक बढ़ गई, इसलिए पुराने सामंती रिश्ते पुनः लादे नहीं जा सके। पहली सदी की शांति से युद्ध घटे तो दासों की आपूर्ति भी घट गई, और साल भर दास पालने से सस्ता पड़ने लगा मज़दूरी पर आदमी रखना, इसलिए कई जागीरों पर दास-श्रम की जगह वेतन-श्रम ने ले ली।

दोनों में समानता क्या थी। दोनों को मज़दूरी नहीं मिलती थी, दोनों अपनी मर्ज़ी से न कहीं जा सकते थे न शादी कर सकते थे, दोनों किसी सार्वजनिक अदालत के नहीं बल्कि एक निजी सत्ता के अधीन थे, और दोनों समाजों में अस्वतंत्र लोगों की मेहनत उसी ऊपरी वर्ग की सुख-सुविधा पालती थी जो कानून भी खुद ही लिखता था।

7 पाठ के बीच के क्रियाकलाप

अभ्यास के छह प्रश्नों के अलावा पुस्तक में कालक्रम तीन (बदलती परंपराएँ खंड का कालक्रम, जो इसी विषय से ठीक पहले छपा है) के साथ एक क्रियाकलाप और अध्याय के बीच चार क्रियाकलाप छपे हैं। नीचे इनके उत्तर उसी क्रम में दिए गए हैं जिस क्रम में ये पुस्तक में आते हैं।

कालक्रम तीन का क्रियाकलाप

प्र. आपने यह ध्यान दिया होगा कि आस्ट्रेलिया/प्रशांत महासागरीय द्वीपों के खाने में बहुत ही कम तिथियाँ अंकित हुई हैं। ऐसा इसलिए हुआ कि इन क्षेत्रों के लोग प्रायः तिथि को बताने के लिए दूसरे साधनों जैसे पेंटिंग आदि का प्रयोग करते थे जैसा ऊपर दिखाया गया है। कृपया एक घटना बताएँ जो ऊपर दिए गए पाँच खानों में दिखाई गई है जिसे आस्ट्रेलिया के एक चित्रकार ने रिकार्ड करने योग्य समझा। ऐसे ही दूसरी अन्य पाँच घटनाओं की तालिका बनाएँ जो उसे असंगत लगीं।

उत्तर: वे घटनाएँ जिन्हें आस्ट्रेलिया का कोई चित्रकार दर्ज करने योग्य समझ सकता था, क्योंकि इनसे दूर के लोग, जहाज़ और व्यापार प्रशांत की दुनिया के क़रीब आए:
अफ़्रीका: पुर्तगालियों ने दास व्यापार प्रारंभ किया (1442)।
यूरोप: दक्षिण अमरीका में उपजी कॉफ़ी को यूरोप में पहली बार पिया गया, और तंबाकू, चॉकलेट, टमाटर और टर्की भी लाए गए (1517)।
एशिया: यूरोप में चीन की चाय और रेशम की बढ़ती माँग (1625-50)।
दक्षिण एशिया: वास्को-डि-गामा भारत आया (1498), या ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना (1600)।
अमरीका: कोलंबस वेस्ट इंडीज़ पहुँचा (1492), या वेस्टइंडीज़ में पहली बार गन्ने की खेती (1654)।
ये सब उन्हीं यूरोपीय समुद्री यात्राओं और व्यापार का हिस्सा थे जो जल्द ही प्रशांत तक पहुँच गए: मैगेलन प्रशांत महासागर पहुँचा (1519), डच नाविक अनायास ही आस्ट्रेलिया पहुँचे, और डच नाविक अबेल तस्मान ने आस्ट्रेलिया की परिक्रमा करके वान डिमेन की भूमि (तस्मानिया) पर क़दम रखा।
ऐसी पाँच घटनाएँ जो आस्ट्रेलिया के चित्रकार को असंगत लगी होंगी, क्योंकि उनका वहाँ के जीवन पर कोई असर नहीं था: इंग्लैंड और फ्रांस के मध्य शतवर्षीय युद्ध (1337-1453); जोफरी चॉसर द्वारा दि कैंटरबरी टेल्स की रचना; इंग्लैंड में ट्यूडर वंश की स्थापना (1485); ताजमहल का निर्माण (1632-53); जापान में प्रथम काबुकी नाटक (1586)।

क्रियाकलाप 1

प्र. विभिन्न मानकों; जैसे – व्यवसाय, भाषा, धन और शिक्षा पर आधारित श्रेणीबद्ध सामाजिक ढाँचे की चर्चा कीजिए। मध्यकालीन फ्रांस की तुलना मेसोपोटामिया और रोमन साम्राज्य से करें।

उत्तर: मध्यकालीन फ्रांस: समाज कार्य के आधार पर तीन वर्गों में बँटा था: प्रार्थना करने वाले पादरी, लड़ने वाले अभिजात और काम करने वाले कृषक। धन का अर्थ था भूमि: अभिजात वैसलेज के ज़रिए भूमि पर नियंत्रण रखते, अपनी अदालतें लगाते और सिक्के ढालते थे, जबकि सर्फ़ के पास अपना कुछ नहीं था और वह जागीर नहीं छोड़ सकता था। शिक्षा मुख्यतः पादरियों और मठों तक सीमित थी; पढ़े-लिखे लोग कम थे, इसीलिए कहानियाँ चारणों के गीतों और कथीड्रल की रंगीन खिड़कियों के चित्रों से सुनाई जाती थीं। स्त्रियाँ पादरी नहीं बन सकती थीं, और सर्फ़ तथा शारीरिक रूप से बाधित लोग भी नहीं।
मेसोपोटामिया: राजाओं और मंदिर के अधिकारियों का एक छोटा संभ्रांत वर्ग धन के बड़े हिस्से का मालिक था, जैसा उर में राजाओं-रानियों के साथ दफ़नाई गई दौलत दिखाती है। लिपिक, मुद्रा काटने वाले, धातुकर्मी और व्यापारी जैसे विशेषज्ञ एक-दूसरे पर निर्भर थे। शिक्षा से प्रतिष्ठा मिलती थी: बहुत कम लोग कीलाकार लिपि पढ़-लिख सकते थे, और जो राजा पढ़ सकता था वह इसका बखान करता था। भाषाएँ समय के साथ बदलीं (सुमेरियन, अक्कदी, अरामाइक), और एमोराइट जैसे बाहर से आए लोग शासक तक बन सके।
रोमन साम्राज्य: टैसिटस सैनेटरों, अश्वारोही वर्ग के प्रमुख सदस्यों, बड़े घरानों से जुड़े सम्माननीय लोगों, फूहड़ निम्नतर वर्ग और दासों का वर्णन करता है; परवर्ती साम्राज्य में सैनेटर और अश्वारोही मिलकर एक अभिजात वर्ग बन गए, जिसके नीचे मध्य वर्ग और ह्यूमिलिओरिस थे। भाषा से उच्च वर्ग की पहचान होती थी: पूर्व के उच्च वर्ग यूनानी और पश्चिम के लातिनी में लिखते थे। साक्षरता वर्गों के अनुसार भिन्न थी: सैनिक, सैन्य अधिकारी और जागीरों के प्रबंधक दूसरों से अधिक साक्षर थे।
तुलना: तीनों में धन और भूमि या संसाधनों पर नियंत्रण ने एक छोटे संभ्रांत वर्ग को ऊपर और ग़ैर-आज़ाद या ग़रीब मज़दूरों को नीचे रखा। मध्यकालीन फ्रांस ने चर्च की मान्यता के साथ दर्जे को सबसे कठोरता से व्यवसाय और जन्म के वर्ग से बाँधा; मेसोपोटामिया और रोम में विशेष हुनर, व्यापार, सरकारी सेवा और रोम में व्यापार से कमाए धन के ज़रिए ऊपर उठने की गुंजाइश ज़्यादा थी।

क्रियाकलाप 2

प्र. मध्यकालीन मेनर, महल और पूजा के स्थान पर विभिन्न सामाजिक-स्तर के व्यक्तियों से अपेक्षित व्यवहार के तरीकों की उदाहरण देते हुए चर्चा कीजिए।

उत्तर: मेनर में: कृषक तय दिनों में लॉर्ड की भूमि पर काम करते, श्रम-अधिशेष और बिना वेतन की सेवाएँ देते, और ज़रूरत पड़ने पर पैदल सैनिक बनकर लड़ते थे; सर्फ़ लॉर्ड की आज्ञा के बिना जागीर नहीं छोड़ सकते थे, केवल लॉर्ड की चक्की, तंदूर और मदिरा संपीडक ही इस्तेमाल कर सकते थे, और विवाह के लिए भी लॉर्ड की सहमति चाहिए थी, जिसके लिए वह शुल्क लेता था। बदले में लॉर्ड से उनकी रक्षा की अपेक्षा थी, और वह उन पर अपनी अदालत चलाता था। अभिजात बड़े कक्ष में भोज करते और गायक दीर्घा से गायक उनका मनोरंजन करते।
महल या लॉर्ड के दरबार में: दास (वैसल) चर्च में बाईबल की शपथ लेकर अपने लॉर्ड के प्रति निष्ठावान रहने का वचन देता और अपनी भूमि के प्रतीक के रूप में एक लिखित अधिकार पत्र, एक छड़ी या केवल एक मिट्टी का डला पाता था; लॉर्ड उसकी रक्षा करता और वह वफ़ादार रहता। नाइट की पहली वफ़ादारी अपने लॉर्ड के प्रति होती थी। बाद में नए शासकों के अधीन अभिजात दरबारी बन गए, जो संरक्षक-आश्रित संबंधों के जाल में राजा के प्रति वफ़ादार रहते थे।
पूजा के स्थान पर: लोग हर रविवार चर्च में पादरी का धर्मोपदेश सुनने और सामूहिक प्रार्थना के लिए इकट्ठा होते; प्रार्थना करते समय हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर घुटनों के बल झुकते, ठीक वैसे ही जैसे नाइट अपने लॉर्ड के प्रति वफ़ादारी की शपथ लेते समय करता था, और ईश्वर को “लॉर्ड” कहते। पहले वर्ग के रूप में पादरियों को धार्मिक मार्गदर्शक माना जाता था, और कृषक चर्च को अपनी उपज का दसवाँ हिस्सा, टीथ, देते थे।

क्रियाकलाप 3

प्र. उपर्युक्त नक्शे और नगर के चित्र को ध्यान से देखिए। मध्यकालीन यूरोपीय नगरों के कौन से महत्त्वपूर्ण लक्षण आपको उनमें दिखाई पड़ते हैं। वे अन्य स्थानों व अन्य काल के नगरों से किस प्रकार भिन्न थे?

उत्तर: फ्रांसीसी कथीड्रल नगर रेम्स के सत्रहवीं सदी के नक्शे में दिखता है: रक्षा-दीवार से घिरा नगर, जो एक नदी के किनारे बसा है और जिस पर पुल बने हैं; सँकरी, टेढ़ी-मेढ़ी गलियों के किनारे सटे हुए घर; घरों के ऊपर उठे हुए अनेक चर्च और विशाल कथीड्रल; और एक खुला चौक। अध्याय और भी लक्षण बताता है: नगर चौक, चर्च, सड़कें जहाँ व्यापारी अपनी दुकानें और घर बनाते थे, नगर का शासन चलाने वालों के मिलने का कार्यालय, हर नगर में श्रेणी सभागार, नगर की दीवारों पर गश्त लगाते पहरेदार, और यात्रियों के लिए सराय। बहुत से नगर बड़े दुर्गों, बिशपों की जागीरों, बड़े चर्चों या कथीड्रलों के चारों ओर विकसित हुए, जो तीर्थस्थल बन गए।
अंतर: मध्यकालीन नगर मेलों और बाज़ारों से, चर्चों और दुर्गों के आसपास, बिना योजना के धीरे-धीरे बढ़े, इसलिए उनकी गलियाँ अनियमित थीं, हड़प्पा के नियोजित नगरों से बिल्कुल अलग। वे भागे हुए सर्फ़ों के लिए स्वतंत्रता के केंद्र थे (“नगर की हवा स्वतंत्र बनाती है”), और उनकी अर्थव्यवस्था श्रेणियों में संगठित थी। कार्थेज, सिकंदरिया और एंटिऑक जैसे बड़े रोमन नगरों की तुलना में, जो शाही प्रशासन के केंद्र थे और जिनमें सार्वजनिक स्नानघर और विशाल आबादी थी, मध्यकालीन नगर छोटे थे; बड़े नगरों की आबादी लगभग 30,000 थी। और आधुनिक नगरों के विपरीत, वे रक्षा के लिए दीवारों से घिरे थे और उन पर सरकारी या व्यापारिक इमारतों के बजाय कथीड्रल छाया रहता था।

क्रियाकलाप 4

प्र. तिथियों के साथ दी गई घटनाओं और प्रक्रियाओं को पढ़िए और उनका विवरणात्मक लेखा-जोखा दीजिए।

उत्तर: 1066 में नॉरमन लोगों ने एंग्लो-सैक्सन लोगों को हराकर इंग्लैंड पर विजय पाई, और विलियम प्रथम ने भूमि 180 नॉरमन अभिजातों में बाँट दी, जिससे इंग्लैंड में सामंतवाद विकसित हुआ। 1100 के बाद, जब खेती और व्यापार बढ़े और नगर पनपे, फ्रांस में कथीड्रलों का निर्माण हुआ, अक्सर धनी व्यापारियों के दान से, और उनके चारों ओर छोटे नगर बस गए। चौदहवीं सदी की शुरुआत तक यह विस्तार धीमा पड़ गया: ठंडी गर्मियाँ, थकी हुई मिट्टी और संसाधनों से अधिक आबादी के कारण 1315-17 में यूरोप में महान अकाल पड़ा। इसी दौरान इंग्लैंड और फ्रांस के बीच सौ-वर्षीय युद्ध (1338-1461) चला, जो क्षेत्र और व्यापार को लेकर लंबा संघर्ष था। फिर 1347-50 में व्यापारिक जहाज़ों पर सवार चूहों द्वारा लाए गए ब्यूबोनिक प्लेग (ब्लैक डैथ) ने यूरोप की लगभग पाँचवीं आबादी को मार डाला। मज़दूरों की कमी से मज़दूरी बढ़ी और कृषि-उत्पादों के दाम गिरे, इसलिए लॉर्डों ने फिर से श्रम-सेवाएँ लागू करने की कोशिश की, और कृषकों ने विद्रोह किए, जैसे 1381 में इंग्लैंड में। विद्रोह कुचल दिए गए, पर पुराने सामंती संबंध फिर से पूरी तरह लागू नहीं हो सके, और आगे की सदियों के नए शासकों का रास्ता खुला।