परीक्षा से ठीक पहले दोहराने के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, ज़रूरी तथ्य, तिथियाँ और तालिकाएँ। पूरी व्याख्या वाले विस्तृत नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 पूरा अध्याय एक फ्रेम में
यह अध्याय नौवीं से सोलहवीं सदी के पश्चिमी यूरोप का है, ख़ासकर फ्रांस और इंग्लैंड का। उस दौर के एक बिशप ने पूरी व्यवस्था एक पंक्ति में कह दी थी: “यहाँ नीचे कुछ लोग प्रार्थना करते हैं, कुछ लड़ते हैं, और बाकी काम करते हैं…”
यह दुनिया बनी कैसे। रोम के ढहने के बाद इटली, स्पेन और फ्रांस पूर्वी-मध्य यूरोप के जर्मन कबीलों के हाथ आ गए, और उनके ऊपर कोई एक सत्ता नहीं बची। लड़ाई रोज़ की बात थी, इसलिए जिसके पास भूमि, उसी के पास सब कुछ, और उस पर खड़ी सामाजिक व्यवस्था ने रोमन परंपरा और जर्मन रीति दोनों से लिया। ईसाई धर्म, जो चौथी सदी से रोमन साम्राज्य का राजधर्म था, रोम के पतन के बाद भी टिका रहा, मध्य-उत्तरी यूरोप तक फैला, और चर्च को एक बड़ा ज़मींदार और राजनीतिक ताक़त बना गया। एक संकरे जलमार्ग के पार इंग्लैंड-स्काटलैंड का द्वीप था, जिसे ग्यारहवीं सदी में नारमंडी के एक राजकुमार ने जीत लिया। रोमन प्रांत गॉल, जिसमें दो लंबी तटरेखाएँ, पहाड़, नदियाँ, जंगल और खेती लायक मैदान थे, वहाँ बसे जर्मन कबीले फ्रैंक के नाम पर फ्रांस कहलाया।
इतिहासकारों को कैसे पता चलता है। मध्यकाल से बहुत सारी सामग्री बची है: दस्तावेज़, भू-स्वामित्व के विवरण, कीमतें और अदालती मुकदमे। चर्चों में जन्म, विवाह और मृत्यु के रिकॉर्ड रखे जाते थे, चर्चों के अभिलेखों से व्यापारी संगठनों का पता चलता है, और गीतों-कहानियों से त्योहारों और सामुदायिक जीवन की झलक मिलती है। मार्क ब्लॉक (1886-1944) ने इसी सामग्री से “सामंती समाज” लिखी।
2 रट लेने लायक परिभाषाएँ
3 याद रखने लायक आँकड़े
| आँकड़ा | किसका |
|---|---|
| 4.2 / 6.2 / 7.3 करोड़ | 1000, 1200 और 1300 में यूरोप की आबादी |
| 10 साल | तेरहवीं सदी का यूरोपीय आठवीं सदी वाले से इतना ज़्यादा जीता था |
| 40 दिन | स्वतंत्र किसान की सालाना न्यूनतम सैनिक सेवा |
| 3 दिन हफ़्ते के | स्वतंत्र किसान का लॉर्ड की ज़मीन पर श्रम-लगान (किताब का शब्द: श्रम-अधिशेष), अक्सर इससे भी ज़्यादा |
| 1,000 से 2,000 एकड़ | नाइट की फ़ीफ़ का सामान्य आकार |
| 100 से 20-30 एकड़ | तेरहवीं सदी तक किसान की औसत जोत में गिरावट |
| 73 | बेनेडिक्टीन नियमावली के अध्याय |
| 180 | वे नॉरमन अभिजात जिनमें विलियम प्रथम ने इंग्लैंड की ज़मीन बाँटी |
| 250 प्रतिशत | ब्लैक डैथ के बाद इंग्लैंड में कृषि-मज़दूरी में बढ़ोतरी |
| ~30,000 | बड़े मध्यकालीन नगर की आबादी |
| 12 / 50-60 | छोटी और बड़ी मेनर जागीर पर परिवारों की संख्या |
4 एक नज़र में तिथियाँ
| तिथि | घटना |
|---|---|
| फ्रांस का प्रारंभिक इतिहास | |
| 481 | क्लोविस फ्रैंक लोगों का राजा बना |
| 486 | क्लोविस और फ्रैंक लोगों ने उत्तरी गॉल पर विजय शुरू की |
| 496 | क्लोविस और फ्रैंक लोगों ने ईसाई धर्म अपनाया |
| 714 | चार्ल्स मार्टल राजमहल का मेयर बना |
| 751 | मार्टल के बेटे पेपिन ने फ्रैंक शासक को हटाकर नए वंश की नींव रखी |
| 768 | पेपिन के बाद शार्लमेन, “चार्ल्स महान” (742-814), गद्दी पर बैठा |
| 800 | पोप लियो III ने शार्लमेन को पवित्र रोमन सम्राट का ताज पहनाया |
| 840 से आगे | नॉर्वे से वाइकिंग हमले |
| चर्च | |
| 529 | इटली में सेंट बेनेडिक्ट का मठ बना |
| 910 | बरगंडी में क्लूनी की स्थापना |
| ग्यारहवीं से चौदहवीं सदी | |
| 1066 | नॉरमन लोगों ने एंग्लो-सैक्सन को हराकर इंग्लैंड जीता; विलियम प्रथम ने ज़मीन 180 नॉरमन अभिजातों में बाँटी, जो राजा के प्रमुख काश्तकार बने, और एंग्लो-सैक्सन किसान अलग-अलग स्तर के भू-स्वामियों के काश्तकार बन गए |
| 1100 से आगे | फ्रांस में कैथीड्रल बनने लगे |
| 1340-1400 के आसपास | जोफरी चॉसर, “द कैंटरबरी टेल्स” के लेखक |
| 1360-70 के आसपास | लैंग्लैंड की कविता “पियर्स प्लाउमैन” |
| 1270-1320 | इंग्लैंड में कृषि-मूल्य दुगुने हुए |
| 1315-17 | यूरोप में महान अकाल |
| 1323 / 1358 / 1381 | फ़्लैंडर्स, फ्रांस और इंग्लैंड में किसान विद्रोह |
| 1338-1461 | इंग्लैंड और फ्रांस के बीच सौ-वर्षीय युद्ध |
| 1347-50 | ब्लैक डैथ |
| राजनीतिक बदलाव | |
| 1461-1559 | फ्रांस में नयी राजशाही का काल (लुई ग्यारहवें का शासन 1461-83) |
| 1474-1556 | स्पेन में नयी राजशाही का काल, ईसाबेला और फ़रडीनेंड के दौर से |
| 1485-1547 | इंग्लैंड में नयी राजशाही का काल, जिसकी शुरुआत हेनरी सप्तम से हुई |
| 1497, 1536, 1547, 1549, 1553 | इंग्लैंड में विद्रोह, हर एक में साझा मुद्दा कर |
| 1614 | बालक राजा लुई तेरहवें के दौर में एस्टेट्स जनरल की सभा |
| 1629-40 | चार्ल्स प्रथम ने बिना पार्लियामेंट बुलाए शासन किया |
| 1789 | लगभग दो सदियों बाद एस्टेट्स जनरल फिर बुलाई गई |
5 नीचे के दोनों वर्ग एक तालिका में
| स्वतंत्र किसान | सर्फ | |
|---|---|---|
| ज़मीन | लॉर्ड के काश्तकार के रूप में अपने खेत रखते थे | जिन खेतों को जोतते थे वे लॉर्ड के थे |
| उपज | अपनी फ़सल अपने पास रखते, लॉर्ड की ज़मीन पर श्रम-लगान देते | उपज का बड़ा हिस्सा सीधे लॉर्ड के पास जाता था |
| मज़दूरी | दी गई सेवा की कोई मज़दूरी नहीं | कोई मज़दूरी नहीं |
| आवाजाही | स्वतंत्र | लॉर्ड की इजाज़त के बिना जागीर छोड़ नहीं सकते थे |
| सैनिक सेवा | पुरुषों को साल में कम से कम 40 दिन | अध्याय 40 दिन की यह बाध्यता सिर्फ स्वतंत्र किसानों के लिए बताता है |
| अन्य सेवाएँ | गड्ढे खोदना, लकड़ी इकट्ठा करना, बाड़ बनाना, सड़कें ठीक करना, सब बिना मज़दूरी | लॉर्ड की चक्की, तंदूर और मदिरा-संपीडक शुल्क देकर ही इस्तेमाल कर सकते थे |
| कर | टैली नाम का सीधा शाही कर किसानों पर लगता था; सिर्फ पादरी और अभिजात इससे मुक्त थे | |
| विवाह | स्वतंत्र | लॉर्ड की मंज़ूरी और शुल्क ज़रूरी |
दोनों वर्गों की स्त्रियाँ और बच्चे सूत कातते-बुनते, मोमबत्ती बनाते और लॉर्ड की मदिरा के लिए अंगूर निचोड़ते भी थे।
6 भूमि, जलवायु और तकनीक
| ग्यारहवीं सदी से पहले | ग्यारहवीं सदी से | |
|---|---|---|
| जलवायु | कड़ाके की ठंड का लंबा दौर: सख़्त सर्दियाँ, छोटा फ़सल-मौसम, कम पैदावार | गर्मी का दौर: लंबा फ़सल-मौसम, हल चलाना आसान, जंगल की सीमा पीछे खिसकी |
| हल | बैलों से खिंचता लकड़ी का हल, जो ज़मीन को बस खुरचता था | लोहे की भारी नोक वाले हल और साँचेदार पटरे, जो गहरा खोदते और मिट्टी पलटते थे |
| पशु-शक्ति | गर्दन का जुआ | कंधे का जुआ, और खुर बचाने के लिए लोहे की नाल |
| अन्य शक्ति | इंसानी मेहनत; ज़मीन अक्सर चार साल में एक बार हाथ से खोदी जाती | अनाज पीसने और अंगूर निचोड़ने के लिए ज़्यादा पनचक्कियाँ-पवनचक्कियाँ |
| फ़सल-चक्र | दो-खेत: आधी ज़मीन पर सर्दियों का गेहूँ, आधी परती, अगले साल राई | तीन-खेत: शरद की फ़सल, बसंत की दलहन-जौ, और एक खेत परती |
| नतीजा | मिट्टी कमज़ोर होती गई, अकाल आम बात | खाद्य उत्पादन लगभग दुगुना, भोजन बेहतर, जोत छोटी पर ज़्यादा उपजाऊ |
किसने क्या लगवाया। खेती की ज़मीन बढ़ाने, तीन-खेत व्यवस्था अपनाने और हल-नाल बनाने-सुधारने के लिए गाँव में लोहार की दुकानें खोलने में किसानों ने खुद पहल की। महँगी पनचक्की और पवनचक्की वे लॉर्ड लगवाते थे जिनके पास पैसा था।
7 चौदहवीं सदी का संकट
परीक्षक के दो पसंदीदा बिंदु। व्यापार-केंद्र होने के कारण नगर प्लेग से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए, और मठ-आश्रम जैसे बंद समुदायों में एक व्यक्ति के संक्रमित होते ही लगभग कोई नहीं बचता था। और विद्रोह उन्हीं इलाकों में सबसे तीव्र हुए जो पहले सबसे ज़्यादा समृद्ध थे, क्योंकि किसान अपनी पहले की कमाई बचा रहे थे।
चर्च और लोक-विश्वास। ईसाई बन जाने के बाद भी यूरोपवासियों ने चमत्कार और पुरानी लोक-परंपराओं पर अपना विश्वास पूरी तरह नहीं छोड़ा। क्रिसमस (25 दिसंबर) ने एक पुराने पूर्व-रोमन त्योहार की जगह ली, जिसकी तारीख सौर पंचांग से तय होती थी, और चंद्र पंचांग से तय होने वाले ईस्टर ने वसंत के स्वागत वाले त्योहार की जगह। गाँव को अब “पैरिश” कहा जाने लगा, और “पवित्र दिन” काम में डूबे किसानों के लिए छुट्टी थे।
कैथीड्रल-नगर। बारहवीं सदी से फ्रांस में कैथीड्रल नाम के बड़े चर्च बनने लगे। ये मठों की संपत्ति होते थे, पर इन्हें बनाने में कई लोगों का श्रम, सामान और पैसा लगता था, और अमीर व्यापारी भी अपना पैसा चर्च को दान देने में लगाते थे। पत्थर से बने ये कैथीड्रल पूरे होने में सालों लेते और तैयार होने पर तीर्थ-स्थल बन जाते, जिनके चारों ओर छोटे नगर बस जाते। इन्हें इस तरह बनाया जाता था कि पादरी की आवाज़ और भिक्षुओं का गायन साफ़ सुनाई दे और घंटियाँ दूर तक पहुँचें, और इनके रंगीन शीशों (किताब का शब्द: अभिरंजित काँच) पर बनी तस्वीरें अनपढ़ लोगों को बाइबल की कहानियाँ सुनाती थीं। किताब के अपने उदाहरण हैं रेम्स, कारटेस और सॉल्सबरी, और चॉसर के तीर्थयात्री कैंटरबरी की ओर जा रहे हैं। एबट सुगेर (1081-1151) ने पेरिस के पास सेंट डेनिस के ऐबी के लिए बनवाई गई नयी खिड़कियों का वर्णन किया।
8 नए शासक, और फ्रांस-इंग्लैंड की अलग राहें
| शासक | राज्य |
|---|---|
| लुई ग्यारहवें | फ्रांस |
| मैक्समिलन | ऑस्ट्रिया |
| हेनरी सप्तम | इंग्लैंड |
| ईसाबेला और फ़रडीनेंड | स्पेन |
उन्होंने क्या खड़ा किया: स्थायी सेना, स्थायी नौकरशाही, राष्ट्रीय कर-व्यवस्था, और स्पेन-पुर्तगाल में समुद्र-पार विस्तार की शुरुआत। कामयाबी की वजह: लॉर्डशिप और वैसलेज का बिखरना, साथ में धीमी आर्थिक वृद्धि, जिसने राजाओं को पहला असली मौका दिया। वे कैसे लड़े: सामंती सेना की जगह बंदूक और घेरा-तोपों से लैस प्रशिक्षित पैदल सेना आई, जो सीधे राजा के अधीन थी, और बढ़े हुए करों से खड़ी बड़ी सेनाओं के बल पर शासकों ने अपनी सीमाओं की रक्षा-विस्तार किया और भीतरी विरोध दबाया। शाही निरंकुशता सामंतवाद का बदला हुआ रूप क्यों कही गई: वही लॉर्ड वर्ग राजनीति पर छाया रहा, बस अब प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि स्थायी पदों वाला वफ़ादार अधिकारी बनकर, एक ऐसे दरबारी समाज में जहाँ आश्रय पैसे से मिलता था, और इसी रास्ते व्यापारी-साहूकार भी दरबार तक पहुँच गए।
| फ्रांस | इंग्लैंड | |
|---|---|---|
| सभा | एस्टेट्स जनरल, पादरी-अभिजात-“बाकी सब” के तीन सदन | एंग्लो-सैक्सन महान परिषद, जो आगे चलकर पार्लियामेंट बनी |
| टकराव | 1614 में बालक राजा लुई तेरहवें के दौर में बैठी, फिर 1789 तक नहीं बुलाई गई | चार्ल्स प्रथम ने 1629 से 1640 तक बिना बुलाए शासन किया, फिर धन के लिए बुलाना पड़ा |
| नतीजा | राजा तीन वर्गों के साथ ताक़त बाँटने को तैयार नहीं थे | पार्लियामेंट का एक भाग राजा के विरोध में चला गया, राजा को प्राणदंड देकर गणतंत्र बना, फिर राजतंत्र लौटा, पर इस शर्त पर कि पार्लियामेंट नियमित बुलाई जाएगी |
| आज | गणतंत्र | राजतंत्र |
9 पाँच मिनट का दोहराव
- मध्यकालीन यूरोप को तीन वर्गों में बाँटकर देखा जाता था: पादरी जो प्रार्थना करते थे, अभिजात जो लड़ते थे, और किसान जो काम करते थे। मार्क ब्लॉक (1886-1944) ने “सामंती समाज” में 900 से 1300 के फ्रांस का अध्ययन करके इस समाज के अध्ययन की शुरुआत की।
- सामंतवाद जर्मन शब्द फ़्यूड यानी भूमि के टुकड़े से बना है; इसकी जड़ें रोम और शार्लमेन के दौर तक जाती हैं, पर यह पूरे यूरोप में स्थापित ग्यारहवीं सदी में ही हुआ।
- अभिजात वैसलेज के ज़रिए ज़मीन रखते और मेनर से जीते थे; नाइट 1,000-2,000 एकड़ की फ़ीफ़ के बदले तय शुल्क और युद्ध में लड़ने का वचन देते थे।
- चर्च के अपने कानून, ज़मीनें और कर थे, वह हर किसान की उपज का टीथ लेता और पैरिश-जीवन चलाता था; भिक्षु-भिक्षुणी सेंट बेनेडिक्ट (529) और क्लूनी (910) जैसे मठों में 73 अध्यायों वाली बेनेडिक्टीन नियमावली के अनुसार रहते थे।
- किसान या तो स्वतंत्र थे (श्रम-लगान, बिना मज़दूरी की सेवाएँ, 40 दिन की सैनिक सेवा और टैली) या सर्फ (लॉर्ड की ज़मीन से बँधे, उसकी चक्की-तंदूर-संपीडक शुल्क देकर इस्तेमाल करते)।
- इंग्लैंड में सामंतवाद 1066 की नॉरमन विजय के बाद ही आया, जब विलियम प्रथम ने ज़मीन 180 नॉरमन अभिजातों में बाँटी और निजी युद्ध पर रोक लगाई।
- ग्यारहवीं सदी से लोहे का हल, कंधे का जुआ, चक्कियाँ और तीन-खेत व्यवस्था ने खाद्य उत्पादन लगभग दुगुना कर दिया, जिससे आबादी 4.2 करोड़ से 7.3 करोड़ हो गई।
- नगर फिर बसे, शिल्प श्रेणियों में संगठित हुए, बारहवीं सदी से कैथीड्रल-नगर बने, और नगरवासियों को एक संभावित चौथा वर्ग कहा गया।
- चौदहवीं सदी में ठंडी जलवायु, चाँदी की कमी और 1347-50 की ब्लैक डैथ आई। आबादी 4.5 करोड़ रह गई और फ़्लैंडर्स (1323), फ्रांस (1358) व इंग्लैंड (1381) में किसान विद्रोह हुए।
- पंद्रहवीं सदी से नए शासकों ने स्थायी सेना और राष्ट्रीय कर वाले केंद्रीकृत राज्य बनाए। फ्रांस की एस्टेट्स जनरल 1614 से 1789 तक चुप रही जबकि इंग्लैंड की पार्लियामेंट मज़बूत होती गई, इसीलिए आज फ्रांस गणतंत्र है और इंग्लैंड राजतंत्र।