1यह अध्याय क्यों: मूल निवासी, तब और अब
1.1 यह अध्याय किस बारे में है
यह अध्याय अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के इतिहास के कुछ पहलू बताता है। एक अलग अध्याय, थीम 8, दक्षिण अमरीका के स्पेनी और पुर्तगाली उपनिवेशीकरण को पहले ही कवर कर चुका है, इसलिए यहाँ उसे दोहराया नहीं गया। 18वीं सदी से दक्षिण अमरीका, मध्य अमरीका, उत्तर अमरीका, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बड़े हिस्सों में यूरोप से आए आप्रवासी बसने लगे। इससे कई मूल निवासी दूसरे इलाक़ों में जाने को मजबूर हुए। यूरोपीय लोगों की इन बस्तियों को “उपनिवेश” कहा जाता था। जब किसी उपनिवेश के यूरोपीय बाशिंदे अपने यूरोपीय “मातृदेश” से स्वतंत्र हो गए, तो वह उपनिवेश एक “राष्ट्र” या देश बन गया।
उपनिवेश किसी दूसरे देश के लोगों द्वारा बसाया और नियंत्रित क्षेत्र होता है। जब किसी उपनिवेश के यूरोपीय बाशिंदे बाद में अपने यूरोपीय “मातृदेश” से राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हो गए, तो वह उपनिवेश स्वयं एक “राष्ट्र” या देश बन गया।
19वीं और 20वीं सदी में एशियाई देशों से भी लोग इनमें से कुछ देशों में आकर बस गए। आज इन देशों में यूरोपीय और एशियाई मूल के लोग बहुसंख्यक हैं, और मूल निवासियों की संख्या बहुत कम है, वे शहरों में मुश्किल से ही दिखते हैं, और लोग यह भूल चुके हैं कि कभी वे ही इस भूमि के अधिकांश हिस्से पर रहते थे। फिर भी, कई नदियों और शहरों के नाम आज भी मूल निवासी शब्दों से आए हैं: USA में ओहायो, मिसिसिपी और सिएटल, कनाडा में सस्केचवान, ऑस्ट्रेलिया में वोलोंगोंग और पैरामाटा।
मूल निवासी कबीलों के नाम बिल्कुल असंबंधित चीज़ों को भी दे दिए गए हैं: डकोटा (एक हवाई जहाज़), चिरोकी (एक जीप), पॉन्टिएक (एक कार) और मोहॉक (एक हेयरस्टाइल)!
1.2 मूल निवासियों का इतिहास कैसे गुम हुआ, और कैसे लौटा
20वीं सदी के मध्य तक अमरीकी और ऑस्ट्रेलियाई पाठ्यपुस्तकें बताती थीं कि कैसे यूरोपीयों ने अमरीका और ऑस्ट्रेलिया की “खोज” की, और मूल निवासियों का ज़िक्र मुश्किल से ही आता था, वह भी उन्हें “शत्रुतापूर्ण” बताने के लिए। हालाँकि 1840 के दशक से ही अमरीका में मानवविज्ञानियों ने मूल निवासियों का अध्ययन शुरू कर दिया था। बहुत बाद में, 1960 के दशक से, मूल निवासियों को अपना इतिहास स्वयं लिखने या बोलकर दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिसे “मौखिक इतिहास” कहा जाता है।
मौखिक इतिहास वह इतिहास है जो कोई समुदाय पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही स्मृति और परंपरा से बोलकर या सुनाकर दर्ज कराता है, न कि स्वयं लिखकर। 1960 के दशक से अमरीका के मूल निवासियों को इसी तरह अपना इतिहास दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
आज मूल निवासियों द्वारा स्वयं लिखे गए ऐतिहासिक ग्रंथ और कथा-साहित्य पढ़ना संभव है, और इन देशों के संग्रहालयों में जाने वाले लोग “देसी कला” की दीर्घाएँ और मूल निवासी जीवन-शैली दिखाने वाले विशेष संग्रहालय देख सकते हैं। USA का नेशनल म्यूज़ियम ऑफ़ द अमेरिकन इंडियन स्वयं अमेरिकी मूल निवासियों द्वारा तैयार किया गया है।
एक अंक का प्रश्न अक्सर पूछा जाता है: “मूल निवासी नामों से बने दो स्थान-नामों के उदाहरण दीजिए।” हमेशा एक USA/कनाडा से (ओहायो, मिसिसिपी, सिएटल, सस्केचवान) और एक ऑस्ट्रेलिया से (वोलोंगोंग, पैरामाटा) दीजिए ताकि अध्याय के दोनों हिस्सों का ज्ञान दिखे।
2यूरोपीय साम्राज्यवाद और “नई दुनिया”
2.1 व्यापार से उपनिवेश तक
स्पेन और पुर्तगाल के अमरीकी साम्राज्यों का 17वीं सदी के बाद विस्तार नहीं हुआ। उसके बाद, फ्रांस, हॉलैंड और इंग्लैंड ने अमरीका, अफ्रीका और एशिया में अपनी व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ानी और उपनिवेश स्थापित करने शुरू कर दिए। आयरलैंड भी लगभग इंग्लैंड का ही उपनिवेश था, क्योंकि वहाँ बसे अधिकांश भूस्वामी अंग्रेज़ बसने वाले ही थे।
18वीं सदी से उपनिवेश स्थापित करने के पीछे हमेशा मुनाफ़े की उम्मीद रही, लेकिन नियंत्रण किस तरह का रहा, यह क्षेत्र के अनुसार बहुत अलग था:
| क्षेत्र | यूरोपीय नियंत्रण का तरीक़ा |
|---|---|
| दक्षिण एशिया | ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी व्यापारिक कंपनियाँ स्वयं राजनीतिक शक्ति बन गईं, स्थानीय शासकों को हराया, क्षेत्र हड़प लिए। पुरानी, सुविकसित प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखी, भूस्वामियों से कर वसूला, और बाद में रेलवे बनाए, खदानें खोदीं और बड़े बाग़ान स्थापित किए। |
| अफ्रीका | यूरोपीय केवल तट पर व्यापार करते थे (दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर), और 19वीं सदी के अंत में ही भीतरी इलाक़ों में गए। इसके बाद यूरोपीय देशों ने आपस में सहमति बनाकर अफ्रीका को अपने-अपने उपनिवेशों में बाँट लिया। |
| अमरीका, आयरलैंड, न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका | यहाँ “बसने वाला” (सेटलर) शब्द इस्तेमाल होता है: दक्षिण अफ्रीका में डच, आयरलैंड-न्यूज़ीलैंड-ऑस्ट्रेलिया में ब्रिटिश, और अमरीका में सामान्यतः यूरोपीय लोगों के लिए। |
बसने वाला (सेटलर) उपनिवेश वह उपनिवेश होता है जहाँ बड़ी संख्या में यूरोपीय स्वयं स्थायी रूप से रहने और खेती करने आ गए, न कि केवल दूर से व्यापार या प्रशासन करने। इन उपनिवेशों की राजभाषा अंग्रेज़ी थी, केवल कनाडा को छोड़कर, जहाँ फ़्रेंच भी राजभाषा है।
2.2 “नई दुनिया” के नाम
यूरोपीयों ने जिन भूमियों तक पहुँच बनाई, उन्हें नए नाम दिए, और ये नाम आज भी इस्तेमाल होते हैं। *जियोग्राफ़िकल डिक्शनरी* में अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के सौ से अधिक ऐसे स्थान-नाम मिलते हैं जो “न्यू” (नया) शब्द से शुरू होते हैं।
| नाम | यह कहाँ से आया |
|---|---|
| “अमरीका” | अमेरिगो वेसपुकी (1451-1512) की यात्राओं के प्रकाशन के बाद पहली बार प्रयोग में आया |
| “कनाडा” | ह्यूरन-इरोक्वाइ भाषा के कनाटा (“गाँव”) से, जैसा खोजी जाक कार्टियर ने 1535 में सुना था |
| “ऑस्ट्रेलिया” | 16वीं सदी का नाम, ग्रेट सदर्न ओशन की भूमि के लिए (लैटिन में ऑस्ट्रल का अर्थ “दक्षिण”) |
| “न्यूज़ीलैंड” | हॉलैंड के तास्मान ने नाम दिया, जो 1642 में इन द्वीपों को देखने वाले पहले यूरोपीय थे (डच में ज़ी का अर्थ “समुद्र”) |
3उत्तर अमरीका: भूमि और उसके पहले निवासी
3.1 भूमि
उत्तर अमरीका महाद्वीप आर्कटिक वृत्त से कर्क रेखा तक, और प्रशांत महासागर से अटलांटिक महासागर तक फैला है। रॉकी पर्वत श्रृंखला के पश्चिम में एरिज़ोना और नेवाडा का मरुस्थल है, उससे भी पश्चिम में सिएरा नेवाडा पर्वत; पूर्व में ग्रेट प्लेन्स, ग्रेट लेक्स, मिसिसिपी और ओहायो की घाटियाँ, और एपलेशियन पर्वत हैं। दक्षिण में मेक्सिको है। कनाडा का 40% भाग वनों से ढका है, और तेल, गैस व खनिज संसाधनों के कारण ही USA और कनाडा में इतने बड़े उद्योग हैं। आज गेहूँ, मक्का और फल बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं, और कनाडा में मछली पकड़ना एक प्रमुख उद्योग है।
खनन, उद्योग और व्यापक कृषि का विकास पिछले 200 वर्षों में ही यूरोप, अफ्रीका और चीन से आए आप्रवासियों द्वारा हुआ। लेकिन यूरोपीयों को इस महाद्वीप के अस्तित्व का पता चलने से हज़ारों वर्ष पहले से यहाँ लोग रहते आ रहे थे।
3.2 उत्तर अमरीका के मूल निवासी
उत्तर अमरीका के सबसे पहले निवासी 30,000 वर्ष से भी पहले एशिया से बेरिंग जलडमरूमध्य के भू-सेतु को पार करके आए थे, और अंतिम हिमयुग के दौरान, 10,000 वर्ष पहले, और दक्षिण की ओर बढ़े। अमरीका में मिली सबसे पुरानी वस्तु, एक तीर की नोक, 11,000 वर्ष पुरानी है। जनसंख्या लगभग 5,000 वर्ष पहले, जलवायु के अधिक स्थिर होने पर बढ़नी शुरू हुई।
“अमरीका से ठीक पहले की शाम को [अर्थात यूरोपीयों के पहुँचने और इस महाद्वीप को यह नाम देने से पहले], हर तरफ़ विविधता फैली हुई थी। लोग सौ से भी अधिक भाषाएँ बोलते थे। वे शिकार, मछली पकड़ने, संग्रहण, बाग़बानी और खेती के हर संभव संयोजन से जीवन-यापन करते थे… कुछ संस्कृतियाँ सहस्राब्दियों से टिकी हुई थीं…” (विलियम मैक्लिश, द डे बिफ़ोर अमेरिका)
ये लोग नदी घाटियों के किनारे गाँवों में, समूहों में रहते थे। वे मछली और माँस खाते थे, और सब्ज़ियाँ व मक्का उगाते थे। वे अक्सर बाइसन (घास के मैदानों में घूमने वाला जंगली भैंसा) के शिकार के लिए लंबी यात्राएँ करते थे, यह 17वीं सदी से आसान हो गया, जब मूल निवासियों ने स्पेनी आबादकारों से घोड़े ख़रीदकर घुड़सवारी शुरू की। लेकिन वे केवल उतने ही जानवर मारते थे जितनी उन्हें भोजन के लिए ज़रूरत होती थी।
उन्होंने बड़े पैमाने पर खेती करने की कोशिश नहीं की, और चूँकि वे अपनी ज़रूरत से अधिक उत्पादन नहीं करते थे, इसलिए मध्य और दक्षिण अमरीका की तरह उन्होंने राजशाही और साम्राज्य नहीं बनाए। कबीलों के बीच क्षेत्र को लेकर कभी-कभार झगड़े ज़रूर होते थे, पर कुल मिलाकर भूमि पर नियंत्रण कोई बड़ा मुद्दा नहीं था: वे भूमि से मिलने वाले भोजन और आश्रय से संतुष्ट थे, उस पर “मिल्कियत” की कोई ज़रूरत महसूस किए बिना। उनकी परंपरा की एक अहम बात थी औपचारिक संबंध और दोस्तियाँ बनाना, और उपहारों का आदान-प्रदान करना: चीज़ें ख़रीदकर नहीं, बल्कि उपहार के रूप में मिलती थीं।

वेमपुम बेल्ट रंगीन सीपियों को आपस में सिलकर बनाई जाने वाली पट्टियाँ थीं, जिन्हें उत्तर अमरीका के मूल निवासी कबीले किसी संधि पर सहमत होने के बाद आपस में देते-लेते थे। बिना किसी लिखावट के किसी समझौते को दर्ज करने और सम्मान देने का यह उनका तरीक़ा था।
उत्तर अमरीका में अनेक भाषाएँ बोली जाती थीं, हालाँकि उनमें से कोई भी लिखी नहीं जाती थी। मूल निवासियों का विश्वास था कि समय चक्रीय गति से चलता है, और हर कबीले के पास अपनी उत्पत्ति और पुराने इतिहास की गाथाएँ थीं, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही थीं। वे कुशल कारीगर थे जो सुंदर कपड़े बुनते थे, और वे “धरती को पढ़ सकते थे”: जलवायु और भू-दृश्यों को उसी तरह समझते थे जैसे कोई साक्षर व्यक्ति लिखित पाठ पढ़ता है।
यह मत लिखिए कि उत्तर अमरीका के मूल निवासी “आदिम” थे क्योंकि उन्होंने राजशाही या साम्राज्य नहीं बनाए। NCERT की अपनी व्याख्या साफ़ है: उन्होंने कृषि में अधिशेष उत्पन्न नहीं किया, इसलिए उन्हें राजशाही बनाने की आर्थिक ज़रूरत ही नहीं थी, यह उनके जीने के तरीक़े से तय एक चुनाव था, क्षमता की कमी नहीं।
3.3 मूल निवासियों के लिए शब्दावली
अंग्रेज़ी में “नई दुनिया” के मूल निवासियों के लिए कई अलग-अलग शब्द इस्तेमाल होते हैं, और परीक्षा में शब्द को उसके अर्थ से मिलाने के लिए पूछा जा सकता है:
4एक ही भूमि को देखने के दो तरीक़े
4.1 पहला संपर्क: व्यापार, अभी ज़मीन नहीं
“…वे सुबह उठे और सूर्योदय देखने निकले। उन्होंने मरुस्थल के पार देखा और स्पेनी विजेताओं को कवच पहने, कछुओं की तरह भूमि पर चलते देखा… इसलिए वे उस स्पेनी व्यक्ति के पास गए और हाथ मिलाने की उम्मीद में अपना हाथ बढ़ाया, लेकिन स्पेनी व्यक्ति ने उनके हाथ में एक तुच्छ सी वस्तु थमा दी।” (ली ब्राउन के 1986 के भाषण से)
17वीं सदी में, कठिन दो-महीने की समुद्री यात्रा के बाद उत्तरी तट पर पहुँचे यूरोपीय व्यापारियों को यह देखकर राहत मिली कि मूल निवासी मैत्रीपूर्ण और स्वागत करने वाले थे। दक्षिण अमरीका के स्पेनियों के विपरीत, जो सोने की प्रचुरता से अभिभूत थे, ये व्यापारी मछली और फ़र के व्यापार के लिए आए थे, जिसमें उन्हें शिकार में दक्ष मूल निवासियों की सहायता मिली। इससे आगे दक्षिण में, मिसिसिपी नदी के किनारे, फ्रांसीसियों ने देखा कि मूल निवासी नियमित रूप से किसी कबीले के विशेष हस्तशिल्प या किसी अन्य क्षेत्र में न मिलने वाले खाद्य-पदार्थों के आदान-प्रदान के लिए इकट्ठा होते थे।
स्थानीय उत्पादों के बदले यूरोपीय मूल निवासियों को कंबल, लोहे के बर्तन (जो कभी-कभी मिट्टी के बर्तनों की जगह इस्तेमाल होते), बंदूकें (जो तीर-कमान के साथ एक उपयोगी अतिरिक्त हथियार थीं), और शराब देते थे। शराब मूल निवासियों के लिए पहले से जानी-पहचानी चीज़ नहीं थी, और वे इसके आदी हो गए, जिससे यूरोपीयों को फ़ायदा हुआ, क्योंकि इससे वे व्यापार की शर्तें तय कर सकते थे। बदले में, यूरोपीय मूल निवासियों से तंबाकू की लत सीख गए।
4.2 आपसी धारणाएँ
18वीं सदी में पश्चिमी यूरोपीय “सभ्य” लोगों को साक्षरता, संगठित धर्म और शहरीपन के आधार पर परिभाषित करते थे। उनकी नज़र में अमरीका के मूल निवासी “असभ्य” दिखते थे। फ्रांसीसी दार्शनिक रूसो जैसे कुछ लोगों के लिए, ऐसे लोग सराहनीय थे क्योंकि वे “सभ्यता” के दोषों से अछूते थे, इसके लिए एक प्रचलित शब्द था “नोबल सैवेज”। अंग्रेज़ कवि वड्र्सवर्थ ने अपनी एक कविता में मूल निवासियों को “जंगलों के बीच” रहने वाला और कल्पना-शक्ति व भावनाओं में सीमित बताया, हालाँकि न रूसो और न ही वड्र्सवर्थ कभी किसी मूल अमरीकी से वास्तव में मिले थे।
अमरीका के तीसरे राष्ट्रपति थॉमस जैफ़र्सन का उद्धरण पुस्तक में यूँ दिया गया है: “यह दुर्भाग्यशाली नस्ल जिसे सभ्य बनाने में हमने इतना परिश्रम किया है… ने उन्मूलन को जायज़ ठहरा दिया है।” NCERT इसे विशेष रूप से यह दिखाने के लिए देता है कि यह ऐसा उद्धरण है जो “आज सार्वजनिक आक्रोश पैदा करेगा”। इसे कभी भी एक तटस्थ या स्वीकार्य ऐतिहासिक राय के रूप में प्रस्तुत न करें।
हर यूरोपीय नज़रिया शत्रुतापूर्ण नहीं था। वाशिंगटन इरविंग, जो (वड्र्सवर्थ और रूसो के विपरीत) वास्तव में मूल निवासियों से मिले थे, ने लिखा कि वे केवल उन गोरों के सामने चुप रहते थे जिनकी नीयत पर उन्हें भरोसा नहीं था और जिनकी भाषा वे समझते नहीं थे; लेकिन अपने बीच वे बड़े मज़ाकिया थे और गोरों की नक़ल उतारकर ख़ूब मनोरंजन करते थे, और उन्होंने गोरों की आलोचना की कि वे “बेचारे मूल निवासियों को पशुओं से कुछ बेहतर नहीं” मानते।
मूल निवासियों के लिए वस्तु-विनिमय का अर्थ
- मैत्री में दिए गए उपहार
- दूर यूरोप के “बाज़ार” का कोई एहसास नहीं
- क़ीमतें साल-दर-साल बदलने से हैरान और दुखी
- फ़र के लालच में सैकड़ों ऊदबिलाव मारे जाने से बेचैन
यूरोपीयों के लिए वस्तु-विनिमय का अर्थ
- यूरोप में मुनाफ़े पर बेचने की वस्तुएँ (कमोडिटी)
- क़ीमतें एक दूर के बाज़ार से तय होतीं, जो मूल निवासियों को नहीं दिखता था
- एक अवसर: शराब से अनजान मूल निवासियों से व्यापार की शर्तें अपने अनुसार तय कर लेना
- एक असमान सौदा, जिसे व्यापारी शायद ही कभी इस रूप में बताते
4.3 भूमि को देखने के दो तरीक़े
17वीं सदी से, अपने धर्म के कारण सताए गए यूरोपीय (कैथोलिक देशों में प्रोटैस्टेंट, या जहाँ प्रोटैस्टेंट धर्म राजकीय था वहाँ कैथोलिक) अमरीका में नया जीवन शुरू करने आने लगे। जब तक ख़ाली ज़मीन थी, यह समस्या नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे यूरोपीय भीतरी इलाक़ों में, मूल निवासी गाँवों के पास बसने लगे, और लोहे के औज़ारों से जंगल काटकर खेत बनाने लगे।
मूल निवासी और यूरोपीय एक ही जंगल को देखते हुए वस्तुतः अलग-अलग चीज़ें देखते थे: मूल निवासी ऐसी पगडंडियाँ पहचानते थे जो यूरोपीयों को दिखती ही नहीं थीं, जबकि यूरोपीय जंगल के कटकर मक्के के खेत बन जाने की कल्पना करते थे। राष्ट्रपति थॉमस जैफ़र्सन का “सपना” छोटे-छोटे यूरोपीय खेतों वाला देश था। मूल निवासी, जो केवल अपनी ज़रूरत के लिए फ़सल उगाते थे, बिक्री या मुनाफ़े के लिए नहीं, यह मानते थे कि भूमि पर “मिल्कियत” जताना ग़लत है, और जैफ़र्सन की नज़र में यही उन्हें “असभ्य” बनाता था।
“यूरोपीयों और मूल अमरीकियों की एक-दूसरे और प्रकृति के बारे में अलग-अलग छवियों को समझाइए” (NCERT की गतिविधि 1) एक पसंदीदा 3-अंक प्रश्न है। हमेशा दोनों पक्ष दीजिए: दोनों ने जंगल/भूमि को कैसे देखा, और दोनों ने एक-दूसरे की संस्कृति को कैसे देखा।
5फ्रंटियर पश्चिम की ओर खिसकता है
5.1 USA और कनाडा का आकार लेना
कनाडा और संयुक्त राज्य अमरीका के नाम से जाने जाने वाले देश 18वीं सदी के अंत में अस्तित्व में आए, तब वे आज के मुक़ाबले भूमि के एक छोटे-से हिस्से पर ही फैले थे। अगले सौ वर्षों में उन्होंने अपने वर्तमान आकार तक पहुँचने के लिए अधिक क्षेत्र पर नियंत्रण बढ़ाया। USA ने बड़े इलाक़े ख़रीद से पाए, दक्षिण में फ्रांस से ज़मीन (“लुइज़ियाना ख़रीद”) और रूस से अलास्का, और युद्ध से, दक्षिणी USA का बड़ा हिस्सा मेक्सिको से जीता गया। किसी को यह ख़याल तक नहीं आया कि इन इलाक़ों में रहने वाले मूल निवासियों की सहमति ली जानी चाहिए।
फ्रंटियर USA में यूरोपीय-अमरीकी बसाव की बदलती हुई पश्चिमी सीमा-रेखा थी। 19वीं सदी में जैसे-जैसे यह फ्रंटियर पश्चिम की ओर खिसकता गया, उससे परे रहने वाले मूल निवासी बार-बार और पीछे हटने को मजबूर होते गए।
5.2 नए खेत, नई फ़सलें, और बाड़बंद भूमि
19वीं सदी में अमरीका का भूदृश्य बहुत तेज़ी से बदला। ब्रिटेन और फ्रांस से आए कुछ आप्रवासी छोटे बेटे थे, जिन्हें अपने पिता की संपत्ति विरासत में नहीं मिलनी थी, और वे स्वयं अमरीका में ज़मीन के मालिक बनना चाहते थे। बाद में जर्मनी, स्वीडन और इटली से आई लहरें, ऐसे लोग जिनकी ज़मीन घर पर बड़े किसानों के हाथ चली गई थी, अपने लिए खेत चाहते थे, जबकि पोलैंड के लोग प्रेयरी घास के मैदानों की ओर आकर्षित हुए, जो उन्हें अपने देश के स्टेपी मैदानों की याद दिलाते थे, और सस्ते दामों पर बड़ी संपत्तियाँ ख़रीदने के अवसर से उत्साहित थे। बसने वालों ने चावल और कपास जैसी फ़सलें उगाईं, जो यूरोप में नहीं उगतीं और इसलिए वहाँ मुनाफ़े पर बेची जा सकती थीं। अपने बड़े खेतों की रक्षा के लिए भेड़ियों और पहाड़ी शेरों को विलुप्त होने तक मारा गया, और बसने वालों को पूरी सुरक्षा का एहसास 1873 में काँटेदार तार के आविष्कार के बाद ही हुआ।
5.3 दक्षिण में दास प्रथा
दक्षिणी क्षेत्र की गर्मी में यूरोपीयों के लिए खुले में काम करना मुश्किल था, और दक्षिण अमरीकी उपनिवेशों के अनुभव से पहले ही पता चल चुका था कि दास बनाए गए मूल निवासी बड़ी संख्या में मर जाते थे। इसलिए बाग़ान-मालिकों ने इसकी जगह अफ्रीका से दास ख़रीदे। दास-विरोधी समूहों के विरोध के कारण दास-व्यापार पर प्रतिबंध लगा, लेकिन USA में पहले से गुलाम बनाए गए अफ्रीकी, और उनकी संतानें, दास ही बने रहे।
उत्तरी राज्यों में, जिनकी अर्थव्यवस्था बाग़ानों पर निर्भर नहीं थी, दास प्रथा को अमानवीय बताकर उसके अंत की माँग की गई। 1861-65 में दास प्रथा बनाए रखने वाले और उन्मूलन का समर्थन करने वाले राज्यों के बीच युद्ध हुआ; उन्मूलनवादी जीते, और दास प्रथा समाप्त हुई। लेकिन अफ्रीकी-अमरीकियों को नागरिक अधिकारों की लड़ाई जीतने, और स्कूलों-सार्वजनिक परिवहन में “गोरे” और “ग़ैर-गोरे” के बीच भेदभाव समाप्त होने में 20वीं सदी तक इंतज़ार करना पड़ा।
5.4 कनाडा की अपनी राजनीतिक समस्या
कनाडा के सामने एक अलग, तात्कालिक समस्या थी जिसने मूल निवासियों के सवाल को और पीछे धकेल दिया: 1763 में ब्रिटेन ने फ्रांस से युद्ध में कनाडा जीता था, और फ्रांसीसी बसने वाले बार-बार स्वायत्त राजनीतिक दर्जे की माँग करते रहे। यह समस्या केवल 1867 में हल हुई, जब कनाडा को स्वायत्त राज्यों के परिसंघ के रूप में संगठित किया गया।
6मूल निवासी अपनी ज़मीन खोते हैं
6.1 संधियाँ, धोखा, और चिरोकी मामला
जैसे-जैसे USA में बसाव फैलता गया, मूल निवासियों को अपनी ज़मीन बेचने वाली संधियों पर हस्ताक्षर करने के लिए उकसाया या मजबूर किया गया, अक्सर बहुत कम क़ीमत पर, और ऐसे उदाहरण भी हैं जहाँ अमरीकियों ने वादे से अधिक ज़मीन लेकर या कम भुगतान करके उन्हें ठगा।
बड़े अधिकारियों तक को मूल निवासियों को उनकी भूमि से वंचित करने में कुछ ग़लत नहीं लगता था। जॉर्जिया राज्य में, अधिकारियों ने तर्क दिया कि चिरोकी कबीला राज्य के क़ानूनों के अधीन तो था, लेकिन उसे नागरिकों के अधिकार नहीं मिल सकते थे, यह तब जबकि सभी मूल निवासी कबीलों में चिरोकी ने ही अंग्रेज़ी सीखने और अमरीकी जीवन-शैली समझने का सबसे अधिक प्रयास किया था।

1832 में, USA के मुख्य न्यायाधीश जॉन मार्शल ने एक महत्वपूर्ण फ़ैसला सुनाया: चिरोकी “एक अलग समुदाय है, जो अपने ही क्षेत्र में रहता है, जहाँ जॉर्जिया के क़ानून लागू नहीं होते,” और उन्हें कुछ मामलों में संप्रभुता प्राप्त है। राष्ट्रपति एंड्रिउ जैकसन, जो अन्यथा आर्थिक और राजनीतिक विशेषाधिकार के विरुद्ध लड़ने के लिए जाने जाते थे, ने इस फ़ैसले को मानने से इनकार कर दिया, और सेना को आदेश दिया कि चिरोकी को उनकी भूमि से हटाकर ग्रेट अमेरिकन डेज़र्ट की ओर खदेड़ दिया जाए।
यह मत लिखिए कि “आँसुओं का रास्ता” (Trail of Tears) किसी जगह का नाम था। यह इस ज़बरदस्ती के निष्कासन को ही दिया गया नाम है: निकाले गए 15,000 चिरोकी में से एक चौथाई से भी अधिक रास्ते में ही मर गए।
जिन लोगों ने कबीलों की भूमि हड़पी, उन्होंने यह तर्क देकर उसे उचित ठहराया कि मूल निवासी ऐसी भूमि के हक़दार नहीं हैं जिसका वे “अधिकतम” उपयोग नहीं करते। उन्होंने मूल निवासियों को आलसी बताकर आलोचना की कि वे अपने शिल्प-कौशल से बाज़ार के लिए वस्तुएँ नहीं बनाते, अंग्रेज़ी नहीं सीखना चाहते या “सही ढंग” से (यानी यूरोपीयों जैसे) कपड़े नहीं पहनना चाहते। “आदिम मनुष्य आदिम पशु के साथ ही लुप्त हो जाएगा,” एक आगंतुक फ्रांसीसी ने लिखा।
| गतिविधि 2: जनसंख्या, USA 1820 बनाम स्पेनी अमरीका 1800 (लाखों में) | ||
|---|---|---|
| USA, 1820 | स्पेनी अमरीका, 1800 | |
| मूल निवासी | 0.6 | 7.5 |
| गोरे | 9.0 | 3.3 |
| मिश्रित यूरोपीय | 0.1 | 5.3 |
| अश्वेत | 1.9 | 0.8 |
| कुल | 11.6 | 16.9 |
6.2 आरक्षण, प्रतिरोध, और मुखिया सिएटल
पश्चिम की ओर धकेले गए मूल निवासियों को ज़मीन “उनकी सदा के लिए” दी गई थी, लेकिन अगर वहाँ सीसा, सोना या तेल मिल जाता तो उन्हें फिर से हटा दिया जाता। कई कबीलों को एक ही कबीले की मूल भूमि साझा करने पर मजबूर किया गया, जिससे उनके बीच झगड़े होते थे। उन्हें छोटे-छोटे इलाक़ों में क़ैद कर दिया गया जिन्हें आरक्षण कहा जाता था, अक्सर ऐसी भूमि जिससे उनका पहले कोई नाता ही नहीं था।
आरक्षण (रिज़र्वेशन) भूमि का वह छोटा टुकड़ा था जिसमें USA या कनाडा की सरकार ने मूल निवासियों को क़ैद कर दिया, अक्सर ऐसी भूमि जिससे उनका पहले कोई संबंध ही नहीं था, जैसे-जैसे बसाव पूरे महाद्वीप में फैलता गया।
मूल निवासियों ने बिना लड़े हार नहीं मानी: अमरीकी सेना ने 1865 से 1890 के बीच कई विद्रोहों को कुचला, और कनाडा में मेतीस (मिश्रित मूल निवासी-यूरोपीय वंश के लोग) ने 1869 से 1885 के बीच सशस्त्र विद्रोह किया। उसके बाद प्रतिरोध लगभग समाप्त हो गया।
यह इसी समय, 1840 के दशक से था, कि “मानवशास्त्र” (जो पहले ही फ्रांस में विकसित हो चुका था) विषय उत्तर अमरीका में लाया गया, “आदिम” मूल निवासी समुदायों और “सभ्य” यूरोप के बीच के अंतर को समझने की जिज्ञासा से प्रेरित होकर। कुछ मानवशास्त्रियों ने यहाँ तक तर्क दिया कि जैसे यूरोप में अब कोई “आदिम” लोग नहीं बचे, वैसे ही अमरीकी मूल निवासी भी अंततः “लुप्त” हो जाएँगे।

“आप आकाश को, भूमि की गर्माहट को कैसे ख़रीद या बेच सकते हैं? यह विचार हमारे लिए अजीब है… धरती का हर हिस्सा मेरे लोगों के लिए पवित्र है… नदियों-झरनों में बहता चमकता पानी केवल पानी नहीं, हमारे पूर्वजों का रक्त है।”
7उद्योग, अधिकार और बदलाव की बयार
7.1 गोल्ड रश और उद्योगों का विकास
1840 के दशक में कैलिफ़ोर्निया में सोने के निशान मिले, जिससे “गोल्ड रश” शुरू हुई, और हज़ारों उत्साहित यूरोपीय जल्दी क़िस्मत बनाने की उम्मीद में अमरीका दौड़ पड़े। इससे पूरे महाद्वीप में रेलवे लाइनें बिछाने का काम शुरू हुआ, जिसके लिए हज़ारों चीनी मज़दूरों की भर्ती की गई। USA का रेलवे 1870 तक, और कनाडा का 1885 तक पूरा हो गया। “पुराने राष्ट्र घोंघे की चाल से सरकते हैं,” स्कॉटलैंड से आए एक ग़रीब आप्रवासी और USA के पहले करोड़पति उद्योगपतियों में से एक, एंड्रिउ कार्नेगी ने कहा, “गणराज्य एक एक्सप्रेस की रफ़्तार से गरजता है।”
इंग्लैंड के विपरीत, जहाँ उद्योग छोटे किसानों की ज़मीन बड़े किसानों के हाथ जाने से विकसित हुआ, उत्तर अमरीकी उद्योग रेलवे उपकरण और बड़े पैमाने की खेती के लिए मशीनरी बनाने के लिए विकसित हुआ। 1860 में USA एक अविकसित अर्थव्यवस्था थी; 1890 तक वह विश्व की अग्रणी औद्योगिक शक्ति बन चुकी थी।

1890 तक बाइसन लगभग समाप्त हो चुका था, जिससे सदियों से चली आ रही मूल निवासियों की शिकार-आधारित जीवन-शैली का अंत हो गया। 1892 में USA का महाद्वीपीय विस्तार पूर्ण हो गया, प्रशांत और अटलांटिक के बीच की भूमि राज्यों में बँट चुकी थी, और अब पश्चिम की ओर बसने वालों को खींचने वाला कोई “फ्रंटियर” नहीं बचा था। कुछ ही वर्षों में USA स्वयं हवाई और फिलिपींस में अपने उपनिवेश स्थापित कर रहा था, वह ख़ुद एक साम्राज्यवादी शक्ति बन गया था।
7.2 संवैधानिक अधिकार, पर केवल कुछ के लिए
1770 के दशक में बसने वालों का नारा रहा “जनवादी उत्साह” ही पुरानी दुनिया की राजशाही और अभिजात वर्ग के विरुद्ध USA की पहचान बना, और USA के संविधान में “संपत्ति के अधिकार” को राज्य भी नहीं छीन सकता था। लेकिन जनवादी अधिकार (कांग्रेस और राष्ट्रपति के लिए मतदान का अधिकार) और संपत्ति का अधिकार, दोनों केवल गोरे पुरुषों के लिए थे।
कार्ल मार्क्स ने अमरीकी फ्रंटियर को “अंतिम सकारात्मक पूँजीवादी यूटोपिया…वह असीम प्रकृति और स्थान, जिससे मुनाफ़े की असीम भूख स्वयं को ढाल लेती है” बताया। वहीं कनाडाई मूल निवासी डेनियल पॉल ने 2000 में बताया कि जनतंत्र के महान पैरोकार थॉमस पाइन ने “मूल निवासियों को समाज कैसे संगठित हो सकता है, इसके उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया”। उन्होंने तर्क दिया कि मूल अमरीकियों के उदाहरण ने ही यूरोप के लोगों के दीर्घकालिक जनतंत्र-आंदोलन के बीज बो दिए।
7.3 बदलाव की बयार… USA और कनाडा में
1920 के दशक तक USA और कनाडा के मूल निवासियों की स्थिति में सुधार नहीं आया। समाजशास्त्री लेवाइस मेरिअम द्वारा निर्देशित एक सर्वेक्षण, द प्रॉब्लम ऑफ़ इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन (1928), जो USA में महामंदी आने से ठीक कुछ वर्ष पहले प्रकाशित हुआ, ने आरक्षणों में मूल निवासियों की बेहद ख़राब स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं की भयावह तस्वीर पेश की।
जो मूल निवासी अपनी संस्कृति खो रहे थे और साथ ही नागरिकता के लाभों से वंचित थे, उनके लिए सहानुभूति के चलते एक ऐतिहासिक क़ानून बना, 1934 का इंडियन रीऑर्गनाइज़ेशन एक्ट, जिसने आरक्षण के मूल निवासियों को ज़मीन ख़रीदने और ऋण लेने का अधिकार दिया। 1950 और 60 के दशक में, USA और कनाडा की सरकारों ने मूल निवासियों के लिए विशेष प्रावधान समाप्त करने की कोशिश की, इस उम्मीद में कि वे “मुख्यधारा में शामिल” हो जाएँगे, लेकिन मूल निवासी यह नहीं चाहते थे। 1954 में, “मूल निवासी अधिकार घोषणा” ने USA की नागरिकता इस शर्त पर स्वीकार की कि उनके आरक्षण और परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
आज, 18वीं सदी की तुलना में संख्या में बहुत घट जाने के बावजूद, दोनों देशों के मूल निवासी अपनी संस्कृतियों पर, और विशेष रूप से कनाडा में अपनी पवित्र भूमि पर, अपने अधिकार का दावा उस तरह से कर पा रहे हैं जैसे 1880 के दशक में उनके पूर्वज नहीं कर सकते थे।
गतिविधि 3 में उद्धृत होवर्ड स्पॉडेक की यह पंक्ति, कि मूल निवासियों के लिए अमरीकी क्रांति के प्रभाव बसने वालों के ठीक विपरीत थे (विस्तार संकुचन बन गया, जनतंत्र निरंकुशता बन गया, समृद्धि ग़रीबी बन गई, स्वतंत्रता क़ैद बन गई), एक पसंदीदा 3-अंक “इस कथन को समझाइए” प्रश्न है।
8ऑस्ट्रेलिया: बसाव और विस्थापन
8.1 आदिवासी और उनका लंबा इतिहास
अमरीका की तरह, ऑस्ट्रेलिया में भी मानव बसाव का लंबा इतिहास है। “आदिवासी” (कई अलग-अलग समाजों के लिए एक सामान्य नाम) 40,000 वर्ष पहले (शायद उससे भी पहले) से न्यू गिनी से पहुँचना शुरू हुए, जो उस समय एक भू-सेतु से ऑस्ट्रेलिया से जुड़ा हुआ था। मूल परंपरा में, वे ऑस्ट्रेलिया में “आए” नहीं थे, वे हमेशा से यहीं थे; उस गहरे अतीत को “स्वप्नकाल” (ड्रीमटाइम) कहा जाता है, ऐसी अवधारणा जिसमें भूत और वर्तमान का वह भेद, जो यूरोपीयों के लिए इतना स्पष्ट है, धुँधला पड़ जाता है।
“स्वप्नकाल” (ड्रीमटाइम) आदिवासी ऑस्ट्रेलियाई परंपरा में गहरे अतीत के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है, जिसमें भूत और वर्तमान का भेद, जो यूरोपीयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, धुँधला हो जाता है, और पूर्वज व भूमि निरंतर वर्तमान में बने रहते हैं।
18वीं सदी के अंत में ऑस्ट्रेलिया में 350 से 750 के बीच मूल समुदाय थे, हर एक की अपनी भाषा (इनमें से 200 आज भी बोली जाती हैं)। उत्तर में रहने वाले एक अलग, बड़े मूल निवासी समूह को टॉरस स्ट्रेट द्वीपवासी कहा जाता है; इनके लिए “आदिवासी” शब्द इस्तेमाल नहीं होता, क्योंकि माना जाता है कि वे कहीं और से आए हैं और एक अलग नस्ल से संबंधित हैं। मिलाकर, 2005 में मूल निवासी ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या का 2.4 प्रतिशत थे। ऑस्ट्रेलिया विरल आबादी वाला देश है, और आज भी अधिकांश शहर तट पर ही हैं, जहाँ ब्रिटिश 1770 में पहली बार पहुँचे, क्योंकि मध्य क्षेत्र शुष्क मरुस्थल है।

8.2 पहला संपर्क और उसका पलटाव
ऑस्ट्रेलिया में बसने वालों, मूल निवासियों और भूमि की कहानी अमरीका की कहानी से काफ़ी मिलती-जुलती है, हालाँकि यह लगभग 300 वर्ष बाद शुरू हुई। कैप्टन कुक और उनके दल की शुरुआती रिपोर्टें मूल निवासियों के साथ मुलाक़ातों में उनकी मित्रता को लेकर उत्साहजनक थीं। लेकिन ब्रिटिश भावना में अचानक बदलाव तब आया जब कुक की हत्या एक मूल निवासी ने कर दी, ऑस्ट्रेलिया में नहीं, बल्कि हवाई में। जैसा अक्सर होता है, इस एक घटना का इस्तेमाल उपनिवेशवादियों ने बाद में पूरी तरह अलग लोगों के विरुद्ध हिंसा को जायज़ ठहराने के लिए किया।

“तो दारूक लोग इस सबके बारे में क्या सोचते होंगे? उनके लिए पवित्र स्थलों का इतना बड़े पैमाने पर विनाश और उनकी भूमि के प्रति ऐसा अजीब, हिंसक व्यवहार समझ से परे था… इसमें कोई शक नहीं कि दारूक लोग बाद में इस बस्ती से दूर ही रहे, और उन्हें वापस लाने का एकमात्र तरीक़ा ‘आधिकारिक अपहरण’ ही था।” (पी. ग्रिमशॉ, एम. लेक, ए. मैकग्राथ, एम. क्वार्टली, क्रिएटिंग अ नेशन)
दारूक लोग यह अंदाज़ा नहीं लगा सके थे कि 19वीं और 20वीं सदी में उनमें से लगभग 90 प्रतिशत लोग मर जाएँगे, यूरोपीय रोगाणुओं के संपर्क से, अपनी भूमि और संसाधनों के नुक़सान से, और बसने वालों के विरुद्ध लड़ाइयों में। ब्राज़ील में पुर्तगाली अपराधियों को बसाने का प्रयोग तब छोड़ना पड़ा था जब उनके हिंसक व्यवहार से मूल निवासियों ने ग़ुस्से में जवाबी कार्रवाई की थी। ब्रिटेन ने अमरीकी उपनिवेशों में भी यही तरीक़ा अपनाया था (जब तक वे स्वतंत्र नहीं हुए), और फिर इसे ऑस्ट्रेलिया में जारी रखा। अधिकांश शुरुआती बसने वाले अपराधी थे, जिन्हें सज़ा पूरी होने पर, ब्रिटेन न लौटने की शर्त पर, स्वतंत्र जीवन जीने की अनुमति थी, और अपने लिए जीवन बनाने के अलावा कोई चारा न होने के कारण, उन्हें उस भूमि से मूल निवासियों को हटाने में कोई हिचक नहीं हुई जो वे खेती के लिए चाहते थे।
8.3 ली गई भूमि पर एक उपनिवेश का निर्माण
यूरोपीय बसाव के अधीन ऑस्ट्रेलिया का आर्थिक विकास अमरीका जितना विविध नहीं था: पहले विशाल भेड़-फ़ार्म और खनन केंद्र आए, फिर अंगूर के बाग़ और गेहूँ की खेती, जो देश की समृद्धि का आधार बनी।
1911 में, नई दिल्ली और कैनबरा दोनों को नई राष्ट्रीय राजधानी घोषित किया गया था। कैनबरा का नाम लगभग “वूलव्हीटगोल्ड” रखा जाने वाला था, अंततः इसे मूल निवासी शब्द कमबेरा से नाम मिला, जिसका अर्थ है “मिलने की जगह”।
मूल निवासी अक्सर खेतों में “इतनी कठोर परिस्थितियों में काम करते थे जो दास प्रथा से बहुत अलग नहीं थी।” बाद में, कैलिफ़ोर्निया की तरह ही, चीनी आप्रवासियों ने सस्ता श्रम उपलब्ध कराया, लेकिन ग़ैर-श्वेत श्रम पर निर्भरता को लेकर बेचैनी के चलते दोनों देशों की सरकारों ने चीनी आप्रवासन पर रोक लगा दी। 1974 तक, यह लोकप्रिय डर कि दक्षिण या दक्षिण-पूर्व एशिया से “काले” लोग बड़ी संख्या में ऑस्ट्रेलिया आ सकते हैं, इसका मतलब था कि “ग़ैर-श्वेत” लोगों को बाहर रखने की एक आधिकारिक नीति थी, जिसे बाद में “गोरे ऑस्ट्रेलिया” नीति कहा गया।
8.4 बदलाव की बयार… ऑस्ट्रेलिया में
1968 में, मानवशास्त्री डब्ल्यू.ई.एच. स्टैनर के एक व्याख्यान, “द ग्रेट ऑस्ट्रेलियन साइलेंस” (इतिहासकारों की स्वयं आदिवासियों के बारे में चुप्पी पर) ने लोगों को झकझोर दिया। 1970 के दशक से, जैसा उत्तर अमरीका में हो रहा था, मूल निवासियों को “मानवशास्त्रीय जिज्ञासा” के रूप में नहीं, बल्कि विशिष्ट संस्कृतियों और प्रकृति-जलवायु की अपनी समझ रखने वाले समुदायों के रूप में समझने की नई उत्सुकता जगी। इस सबके पीछे वह सवाल था जिसे बाद में हेनरी रेनल्ड्स ने अपनी सशक्त पुस्तक व्हाई वीयरन’ट वी टोल्ड? में उठाया, जिसने ऑस्ट्रेलियाई इतिहास को कैप्टन कुक की “खोज” से शुरू मानकर लिखने की प्रथा की निंदा की।
तब से विश्वविद्यालयों में मूल संस्कृतियों के अध्ययन के लिए विभाग बने हैं, संग्रहालयों में देसी कला की दीर्घाएँ जुड़ी हैं, और मूल निवासियों ने स्वयं अपनी जीवन-गाथाएँ लिखनी शुरू की हैं। 1974 से, “बहुसंस्कृतिवाद” ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक नीति बन गई, जो मूल संस्कृतियों और यूरोपीय-एशियाई आप्रवासियों की अलग-अलग संस्कृतियों को समान सम्मान देती है।
बहुसंस्कृतिवाद एक देश के भीतर विभिन्न सांस्कृतिक समुदायों को समान सम्मान और दर्जा देने की नीति है, न कि अल्पसंख्यक संस्कृतियों से एक प्रमुख संस्कृति में विलीन हो जाने की अपेक्षा करना। यह 1974 से ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक सरकारी नीति बन गई।
1970 के दशक से, जैसे-जैसे संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की बैठकों में “मानवाधिकार” शब्द सुनाई देने लगा, ऑस्ट्रेलियाई जनता को दुख के साथ यह एहसास हुआ कि USA, कनाडा और न्यूज़ीलैंड के विपरीत, ऑस्ट्रेलिया में यूरोपीयों द्वारा भूमि के अधिग्रहण को औपचारिक रूप देने वाली मूल निवासियों के साथ कोई संधि ही नहीं थी। सरकार हमेशा से इस भूमि को टेरा न्यूलिअस कहती आई थी, “जो किसी की नहीं है।”
टेरा न्यूलिअस लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है “भूमि जो किसी की नहीं है।” यह यूरोपीय बसाव से पहले की मूल निवासी भूमि का वर्णन करने के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार का अपना क़ानूनी शब्द था, जिससे किसी संधि-प्रक्रिया से बचा जा सके, क्योंकि जो भूमि किसी की नहीं, उसे लेने के लिए किसी समझौते की ज़रूरत ही नहीं।
मिश्रित (मूल निवासी-यूरोपीय) रक्त के बच्चों को उनके मूल निवासी रिश्तेदारों से ज़बरन पकड़कर अलग करने का भी एक लंबा और पीड़ादायक इतिहास था। इन सवालों पर उठे आंदोलन के कारण दो महत्वपूर्ण फ़ैसले हुए: पहला, यह मान्यता देना कि मूल निवासियों का भूमि से गहरा ऐतिहासिक संबंध है, जो उनके लिए “पवित्र” है और जिसका सम्मान किया जाना चाहिए; दूसरा, कि भले ही बीती ग़लतियों को पूर्ववत नहीं किया जा सकता, इन बच्चों के साथ हुए अन्याय के लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगी जानी चाहिए।
ऑस्ट्रेलियाई कवयित्री जूडिथ राइट (1915-2000), जो जीवन भर आदिवासी अधिकारों की समर्थक रहीं, ने आदिवासी कवयित्री ऊडगेरो नूनुक्कल के लिए लिखी अपनी कविता “टू ड्रीमटाइम्स” में इसी हानि के बारे में लिखा: “उन्होंने मुझे नहीं बताया था कि जिस ज़मीन को मैं इतना प्यार करती हूँ, वह तुम्हारे ही हाथों से छीनी गई थी।”
USA/कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की तुलना करते समय हमेशा यह एक अंतर सबसे पहले बताइए: USA, कनाडा और न्यूज़ीलैंड ने अपने मूल निवासियों के साथ (चाहे कितनी भी असमान) संधियाँ कीं; ऑस्ट्रेलिया ने कोई संधि नहीं की, क्योंकि वहाँ टेरा न्यूलिअस का सिद्धांत लागू था। यह एक तथ्य ही अधिकांश “तुलना करें” प्रश्नों का उत्तर बन जाता है।
- अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को 20वीं सदी के मध्य तक इतिहास से लगभग हटा दिया गया था; 1960-70 के दशक से मौखिक इतिहास और देसी संग्रहालयों ने उनकी आवाज़ लौटाई
- स्पेन-पुर्तगाल के रुकने के बाद फ्रांस, हॉलैंड, इंग्लैंड ने उपनिवेश बढ़ाए; नियंत्रण का तरीक़ा अलग-अलग था, दक्षिण एशिया में व्यापारिक कंपनी-शासन, अफ्रीका में तटीय व्यापार फिर बँटवारा, अमरीका/आयरलैंड/न्यूज़ीलैंड/ऑस्ट्रेलिया में “बसने वाले” उपनिवेश
- उत्तर अमरीका के मूल निवासी शिकार, मछली और छोटी खेती से जीते थे, भूमि “मिल्कियत” की अवधारणा नहीं थी; वेमपुम बेल्ट संधियाँ दर्ज करते थे, लिखावट नहीं
- मूल निवासी वस्तु-विनिमय को उपहार मानते, यूरोपीय बाज़ार-वस्तु; इस अंतर और शराब की लत ने यूरोपीयों को व्यापार-शर्तें तय करने दीं
- USA/कनाडा का फ्रंटियर 19वीं सदी भर पश्चिम खिसकता रहा (लुइज़ियाना ख़रीद, मेक्सिको से युद्ध), हर बार मूल निवासी पीछे धकेले गए
- 1832 के मार्शल फ़ैसले ने चिरोकी भूमि की रक्षा की; जैकसन ने उसे नज़रअंदाज़ किया, नतीजा, आँसुओं का रास्ता (15,000 में से एक चौथाई से अधिक मरे)
- 1890 तक बाइसन लगभग समाप्त, सदियों पुराना शिकार-जीवन ख़त्म; 1892 में अमरीकी फ्रंटियर का “अंत”
- अधिकार धीरे-धीरे मिले: इंडियन रीऑर्गनाइज़ेशन एक्ट (USA, 1934), मूल निवासी अधिकार घोषणा (1954), कनाडा का संविधान अधिनियम (1982)
- ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी 40,000+ वर्ष पहले आए; 1788 से ब्रिटिश बसाव ने बीमारी, भूमि-हानि और हिंसा से लगभग 90% को मार डाला, वह भी बिना किसी संधि के (टेरा न्यूलिअस)
- ऑस्ट्रेलिया का अपना लेखा-जोखा: माबो केस (1992) ने टेरा न्यूलिअस को पलटा; राष्ट्रीय क्षमायाचना दिवस (1999) ने ज़बरन अलग किए गए मिश्रित-रक्त बच्चों के लिए माफ़ी माँगी
- क्या मैं बता सकता/सकती हूँ कि उत्तर अमरीका के मूल निवासियों ने कभी राजशाही/साम्राज्य क्यों नहीं बनाए?
- क्या मुझे पता है कि वेमपुम बेल्ट किस काम आती थी?
- क्या मैं चिरोकी मामले को 1832 के फ़ैसले से आँसुओं के रास्ते तक क्रम से बता सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं USA/कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में मूल निवासियों की भूमि लिए जाने का मुख्य अंतर बता सकता/सकती हूँ?
- क्या मैं ऑस्ट्रेलिया के क्षमायाचना तक के रास्ते की कम से कम तीन घटनाएँ क्रम से बता सकता/सकती हूँ?
- 1 अंकमूल निवासी नामों से बने दो स्थान-नामों के उदाहरण दीजिए, एक उत्तर अमरीका से और एक ऑस्ट्रेलिया से।
- 1 अंकवेमपुम बेल्ट किस काम आती थी?
- 1 अंकद प्रॉब्लम ऑफ़ इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन (1928) किसने लिखा?
- 1 अंकअमरीकी फ्रंटियर को किस वर्ष “समाप्त” घोषित किया गया?
- 1 अंकटेरा न्यूलिअस का क्या अर्थ है?
- 1 अंक1968 का व्याख्यान “द ग्रेट ऑस्ट्रेलियन साइलेंस” किसने दिया?
- 1 अंककिस मामले में ऑस्ट्रेलियाई हाई कोर्ट ने टेरा न्यूलिअस को अवैध घोषित किया?
- 3 अंकदक्षिणी और उत्तरी अमरीका के मूल निवासियों के बीच के फ़र्कों पर टिप्पणी करिए। (NCERT)
- 3 अंकअमरीकियों के लिए “फ्रंटियर” के क्या मायने थे? (NCERT)
- 2 अंकइतिहास की किताबों में ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को शामिल क्यों नहीं किया गया था? (NCERT)
- 3 अंकमूल निवासी और यूरोपीय वस्तु-विनिमय को अलग-अलग तरीक़े से कैसे देखते थे?
- 2 अंक“आँसुओं का रास्ता” क्या था?
- 3 अंक“आरक्षण” शब्द समझाइए और बताइए कि मूल निवासियों को उनमें क्यों रखा गया।
- 2 अंकUSA और ऑस्ट्रेलिया दोनों में चीनी आप्रवासियों पर प्रतिबंध के दो कारण बताइए।
- 3 अंकटेरा न्यूलिअस क्या था, और यह महत्वपूर्ण क्यों था कि ऑस्ट्रेलिया ने यह शब्द इस्तेमाल किया?
- 5 अंकसंग्रहालय-गैलरी किसी संस्कृति को समझाने में कितनी संतोषजनक है? अपने संग्रहालय-अनुभव से उदाहरण दीजिए। (NCERT)
- 5 अंककैलिफ़ोर्निया में 1880 के आसपास एक पूर्व अफ्रीकी दास, एक चीनी मज़दूर, गोल्ड रश में आया एक जर्मन, और होपी कबीले के एक मूल निवासी के बीच काल्पनिक मुलाक़ात की बातचीत लिखिए। (NCERT)
- 5 अंकप्रारंभिक संधियों से लेकर आँसुओं के रास्ते और आरक्षणों तक, USA के मूल निवासियों की भूमि खोने के चरण बताइए।
- 5 अंकUSA/कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में मूल निवासियों के साथ व्यवहार की तुलना कीजिए, संधियों (या उनके अभाव) के संदर्भ में।
- 5 अंक“मूल निवासियों के लिए अमरीकी क्रांति के प्रभाव बसने वालों के ठीक विपरीत थे।” होवर्ड स्पॉडेक के इस कथन पर चर्चा कीजिए।
- 5 अंक20वीं सदी में USA, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में मूल निवासियों की स्थिति सुधारने वाली “बदलाव की बयार” का वर्णन कीजिए।
- 1 अंकउत्तर अमरीका के सबसे पहले निवासी एशिया से यहाँ किस रास्ते पहुँचे?
(a) बेरिंग जलडमरूमध्य भू-सेतु(b) सिल्क रूट
(c) अटलांटिक महासागर(d) पनामा भू-सेतु - 1 अंकचिरोकी संप्रभुता की रक्षा करने वाला 1832 का फ़ैसला किसने दिया?
(a) एंड्रिउ जैकसन(b) जॉन मार्शल
(c) थॉमस जैफ़र्सन(d) लेवाइस मेरिअम - 1 अंकआरक्षण के मूल निवासियों को ज़मीन ख़रीदने का अधिकार देने वाला इंडियन रीऑर्गनाइज़ेशन एक्ट किस वर्ष पारित हुआ?
(a) 1874(b) 1901
(c) 1934(d) 1954 - 1 अंककिस आविष्कार (1873) ने अमरीकी बसने वालों को अपने खेतों के लिए नई सुरक्षा का एहसास दिलाया?
(a) रेलवे(b) काँटेदार तार
(c) टेलीग्राफ़(d) स्टील हल - 1 अंकआदिवासी माने जाते हैं कि वे ऑस्ट्रेलिया सबसे पहले कहाँ से आए?
(a) न्यू गिनी(b) इंडोनेशिया
(c) न्यूज़ीलैंड(d) दक्षिण एशिया - 1 अंकऑस्ट्रेलियाई हाई कोर्ट ने टेरा न्यूलिअस को क़ानूनी रूप से अवैध किस मामले में घोषित किया?
(a) चिरोकी मामला(b) माबो मामला
(c) मार्शल मामला(d) स्टैनर मामला - 1 अंकऑस्ट्रेलिया में “राष्ट्रीय क्षमायाचना दिवस” किस तारीख़ को मनाया जाता है?
(a) 26 जनवरी(b) 4 जुलाई
(c) 26 मई(d) 1 जनवरी - 1 अंक“गोरे ऑस्ट्रेलिया” नीति आधिकारिक रूप से किस वर्ष समाप्त हुई?
(a) 1955(b) 1968
(c) 1974(d) 1992
कारण (R): वे व्यापक खेती नहीं करते थे और अधिशेष उत्पन्न नहीं करते थे, क्योंकि भूमि पर नियंत्रण सामान्यतः ऐसी चीज़ नहीं थी जिसके लिए उन्हें लड़ना पड़े।
कारण (R): जैकसन ने सेना को चिरोकी को हटाने का आदेश दिया, जिससे “आँसुओं का रास्ता” बना, जिसमें निकाले गए 15,000 में से एक चौथाई से अधिक की मृत्यु हो गई।
कारण (R): केवल ऑस्ट्रेलिया में ऐसी कोई संधि नहीं थी, क्योंकि उसकी सरकार भूमि को हमेशा टेरा न्यूलिअस, “जो किसी की नहीं”, कहती रही।