कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 3 चुनाव और प्रतिनिधित्व शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, संख्याएँ, तारीख़ें और तुलना की तालिकाएँ। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 सर्वाधिक मत से जीत वाली प्रणाली बनाम समानुपातिक प्रतिनिधित्व, एक नज़र में

आधार सर्वाधिक मत से जीत वाली प्रणाली समानुपातिक प्रतिनिधित्व
वोट किसे उम्मीदवार को पार्टी को
निर्वाचन क्षेत्र छोटा, हर क्षेत्र से एक प्रतिनिधि बड़ा या पूरा देश, कई प्रतिनिधि
बहुमत ज़रूरी नहीं ज़रूरी
उदाहरण भारत, यूनाइटेड किंगडम इज़राइल, नीदरलैंड
भारत में कहाँ लोक सभा, विधानसभा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्य सभा (एकल संक्रमणीय मत)

2 याद रखने लायक़ संख्याएँ

48%1984 में कांग्रेस के वोट, पर 415/543 सीटें
84 + 47लोक सभा में अनुसूचित जाति + अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें (26 जनवरी 2019 की स्थिति)
25 वर्षचुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु
संख्या / तारीख़ किसकी
18 वर्ष मतदान की न्यूनतम आयु (1989 से पहले 21 वर्ष)
2030 तक अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण की बढ़ाई गई अवधि (शुरू में 10 वर्ष)
3.25% इज़राइल में सीट पाने के लिए न्यूनतम वोट
6 वर्ष / 65 वर्ष मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल, जो पहले हो
1993 निर्वाचन आयोग स्थायी रूप से बहु-सदस्यीय बना
2023 नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण)
1991 / 2002 राजीव गांधी की हत्या, गुजरात हिंसा : दोनों बार चुनाव टाले गए

3 परिभाषाएँ, ठीक जैसी लिखनी हैं

सारी परिभाषाएँ एक जगह
सर्वाधिक मत से जीत वाली प्रणालीहर क्षेत्र से सबसे ज़्यादा वोट पाने वाला जीतता है, बहुमत ज़रूरी नहीं
समानुपातिक प्रतिनिधित्वहर पार्टी को उसके वोट-प्रतिशत के बराबर सीटें मिलती हैं
एकल संक्रमणीय मत प्रणालीराज्य सभा चुनाव की विधि, विधायक वरीयता क्रम में मतदान करते हैं
पृथक निर्वाचन-मंडलकिसी समुदाय के प्रतिनिधि को केवल उसी समुदाय के मतदाता चुनते, अस्वीकृत व्यवस्था
आरक्षित चुनाव-क्षेत्रसभी मतदाता वोट दें, पर उम्मीदवार आरक्षित समुदाय से ही हो
परिसीमन आयोगराष्ट्रपति द्वारा नियुक्त, निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा और आरक्षण तय करने वाली संस्था
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकारहर वयस्क नागरिक को बिना भेदभाव मत देने का अधिकार
विशेष बहुमतकुल सदस्यों का साधारण बहुमत + उपस्थित-मतदान करने वालों का दो-तिहाई बहुमत

4 निर्वाचन आयोग : बनावट और शक्तियाँ

1989 से पहलेएक-सदस्यीय आयोग
1989पहली बार दो और आयुक्त, चुनाव बाद फिर एक-सदस्यीय
1993 से आज तकस्थायी रूप से बहु-सदस्यीय

मुख्य काम: मतदाता-सूची तैयार करना · चुनाव कार्यक्रम तय करना · आदर्श आचार-संहिता लागू करना · चुनाव टालना/रद्द करना · दलों को मान्यता और चुनाव-चिह्न देना।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना: दोनों सदनों की विशेष बहुमत से सिफ़ारिश चाहिए। बाक़ी आयुक्तों को: राष्ट्रपति सीधे हटा सकते हैं।

5 आरक्षण : किसके लिए, कैसे

5.1 अनुसूचित जाति-जनजाति सीटें कैसे तय होती हैं

अनुसूचित जनजाति की सीटें

  • सबसे ज़्यादा अनुसूचित जनजाति की आबादी वाले क्षेत्र आरक्षित

अनुसूचित जाति की सीटें

  • ज़्यादा अनुसूचित जाति की आबादी वाले क्षेत्र, पर राज्य में फैलाकर (अनुसूचित जाति की आबादी समान रूप से फैली होती है)
आख़िरी दोहराव
  • सर्वाधिक मत से जीत वाली प्रणाली भारत की चुनी हुई प्रणाली है: सादगी, साफ़ पसंद, जवाबदेही और स्थिर सरकार के लिए
  • पृथक निर्वाचन-मंडल ख़ारिज हुआ (तजम्मुल हुसैन का विरोध); आरक्षित चुनाव-क्षेत्र अपनाए गए (जयपाल सिंह का समर्थन)
  • 1989 के बाद भारत में बहु-दलीय गठबंधन का दौर, सर्वाधिक मत से जीत वाली प्रणाली के बावजूद छोटे दलों को भी जगह
  • अनुच्छेद 324 से निर्वाचन आयोग बना; सुप्रीम कोर्ट ने इसकी व्यापक शक्तियों की व्याख्या को माना
  • चुनाव सुधार के सुझाव: समानुपातिक प्रतिनिधित्व की ओर बढ़ना, महिला आरक्षण, पैसे-अपराध पर नियंत्रण, पर इन पर कोई आम सहमति नहीं
  • भारत के चुनाव तंत्र की सफलता: शांतिपूर्ण सत्ता-परिवर्तन, बढ़ती भागीदारी, समावेशिता, धाँधली-मुक्त नतीजे, चुनाव अब जीवन का हिस्सा