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1 संशोधन के तीन तरीक़े, एक नज़र में
| तरीक़ा | प्रक्रिया | उदाहरण |
|---|---|---|
| सामान्य बहुमत | संसद में साधारण बहुमत, कोई विशेष प्रक्रिया नहीं | अनुच्छेद 2, अनुच्छेद 3 |
| विशेष बहुमत | दोनों सदनों में अलग-अलग विशेष बहुमत | अनुच्छेद 368 के सामान्य प्रावधान |
| विशेष बहुमत + राज्यों का अनुमोदन | + आधी राज्य विधायिकाओं का साधारण बहुमत | संघीय ढाँचा/प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधान |
2 याद रखने लायक़ संख्याएँ
26 नवं 1949 / 26 जन 1950संविधान अंगीकृत / लागू
545 / 273लोकसभा के कुल सदस्य / न्यूनतम समर्थन ज़रूरी
74 वर्ष / 10626 जनवरी 2024 तक: संविधान की उम्र / कुल संशोधन
| वर्ष | क्या हुआ |
|---|---|
| 1973 | केशवानंद भारती मामला: मूल संरचना का सिद्धांत प्रतिपादित |
| 1974-76 | 3 वर्ष में 10 संशोधन (कांग्रेस का दबदबा, 352 लोकसभा सीटें) |
| 1975 | जून में आपातकाल की घोषणा |
| 1976 | 42वाँ संशोधन: सबसे विवादास्पद |
| 1977 | चुनाव में कांग्रेस की हार |
| 1977-78 | 43वाँ-44वाँ संशोधन: 42वें के ज़्यादातर बदलाव रद्द |
| 1980 | मिनर्वा मिल मामला: मूल संरचना की पुष्टि |
| 2000 | जस्टिस वेंकटचलैया आयोग: संविधान की समीक्षा |
| 2001-03 | 3 वर्ष में फिर 10 संशोधन (गठबंधन राजनीति का दौर) |
3 परिभाषाएँ, ठीक जैसी लिखनी हैं
सारी परिभाषाएँ एक जगह
अनुच्छेद 368संसद को अपनी संवैधानिक शक्ति से संविधान में संशोधन (जोड़ना, बदलना, हटाना) करने का अधिकार
लचीला संविधानजिसमें आसानी से संशोधन हो सके
कठोर संविधानजिसमें संशोधन बहुत मुश्किल हो
विशेष बहुमतकुल सदस्यों का कम से कम आधा + मतदान करने वालों का कम से कम दो-तिहाई
मूल संरचना का सिद्धांतकेशवानंद भारती मामले (1973) से जन्मा सिद्धांत, कोई संशोधन संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं कर सकता
संसदीय संप्रभुतासंशोधन पर अंतिम राय जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों की ही होती है
4 दो नामी मामले, एक नज़र में
4.1 केशवानंद भारती बनाम मिनर्वा मिल
केशवानंद भारती (1973)
- मूल संरचना का सिद्धांत पहली बार प्रतिपादित
- संसद की संशोधन-शक्ति की सीमा तय की
- न्यायपालिका को अंतिम अधिकार दिया
मिनर्वा मिल (1980)
- 42वें संशोधन की संसदीय-सर्वोच्चता की कोशिश के बाद आया
- मूल संरचना के सिद्धांत को फिर से पुष्ट किया
- चार दशक बाद भी यही निर्णय हावी है
4.2 तीन विवादास्पद संशोधन : 38वाँ, 39वाँ, 42वाँ
जून 1975आपातकाल की घोषणा, तीनों संशोधनों की पृष्ठभूमि
5→6 वर्ष42वें संशोधन ने बढ़ाया लोकसभा का कार्यकाल
43वाँ, 44वाँ1977 के बाद इन बदलावों को काफ़ी हद तक रद्द करने वाले संशोधन
आख़िरी दोहराव
- संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत, 26 जनवरी 1950 को लागू; 69+ वर्ष से एक ही संविधान लागू
- संशोधन के तीन तरीक़े: सामान्य बहुमत, विशेष बहुमत, विशेष बहुमत + आधे राज्यों का अनुमोदन
- विशेष बहुमत की दो शर्तें: कुल सदस्यों का आधा + मतदान करने वालों का दो-तिहाई; राष्ट्रपति संशोधन विधेयक वापस नहीं भेज सकते
- 26 जनवरी 2024 तक 74 वर्ष, 106 संशोधन; तीन श्रेणियाँ: तकनीकी, व्याख्यात्मक, राजनीतिक सहमति से
- 38वाँ-39वाँ-42वाँ सबसे विवादास्पद (आपातकाल-दौर); 43वें-44वें ने बदलाव पलटे
- मूल संरचना का सिद्धांत: केशवानंद भारती (1973), मिनर्वा मिल (1980) से पुष्ट; संविधान के पाठ में कहीं नहीं लिखा
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