इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. मानव बस्ती की परिभाषा एक पंक्ति में दीजिए।
उत्तर: मानव बस्ती किसी भी प्रकार और आकार के घरों का ऐसा संकुल है जिनमें मनुष्य रहते हैं, जिसमें लोगों का समूहन और संसाधन आधार के रूप में क्षेत्र का आवंटन सम्मिलित है।
प्र. ग्रामीण बस्तियों के चार प्रकारों के नाम लिखिए।
उत्तर: गुच्छित (संकुलित/आकेंद्रित), अर्ध-गुच्छित (विखंडित), पल्लीकृत, और परिक्षिप्त (एकाकी)।
प्र. पल्लीकृत बस्ती की इकाइयों को किन स्थानीय नामों से जाना जाता है?
उत्तर: पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाँणी आदि।
प्र. भारत की जनगणना, 1991 के अनुसार नगरीय बस्ती के लिए न्यूनतम जनसंख्या कितनी निर्धारित है?
उत्तर: कम से कम 5,000 व्यक्ति।
प्र. सिंधु घाटी सभ्यता के दो नगरों के नाम लिखिए, जिनका उल्लेख इस अध्याय में है।
उत्तर: हड़प्पा और मोहनजोदड़ो।
प्र. अध्याय में दिए किन्हीं दो प्राचीन नगरों के नाम लिखिए।
उत्तर: वाराणसी और प्रयाग (प्रयागराज), अथवा पाटलिपुत्र (पटना) और मदुरई।
प्र. जमशेदपुर किस प्रकार के नगर का उदाहरण है?
उत्तर: जमशेदपुर 1850 के बाद विकसित आधुनिक उद्योगों पर आधारित नगर का उदाहरण है।
प्र. 2011 में भारत का नगरीकरण स्तर क्या था?
उत्तर: 31.16 प्रतिशत।
प्र. नगरीकरण के स्तर को किस प्रकार मापा जाता है?
उत्तर: कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में।
प्र. स्मार्ट सिटी मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: ऐसे नगरों को बढ़ावा देना जो आधारभूत सुविधा, स्वच्छ व सतत पर्यावरण, और नागरिकों को बेहतर जीवन प्रदान करें।
प्र. एक गैरिसन (छावनी) नगर और एक खनन नगर का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: गैरिसन नगर: अंबाला (अथवा जालंधर, महू, बबीना, उधमपुर); खनन नगर: रानीगंज (अथवा झरिया, डिगबोई, अंकलेश्वर, सिंगरौली)।
प्र. अंग्रेज़ों ने तट पर सर्वप्रथम किस प्रकार के नगर विकसित किए?
उत्तर: व्यापारिक पत्तन नगर, जैसे सूरत, दमन, गोआ और पांडिचेरी।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. गुच्छित और अर्ध-गुच्छित बस्तियों में एक-एक अंतर बताइए।
उत्तर: गुच्छित बस्ती घरों का एक संकुलित क्षेत्र है जो चारों ओर के खेतों-खलिहानों से स्पष्ट रूप से पृथक होता है और ज्यामितीय आकृति दिखाता है, जबकि अर्ध-गुच्छित बस्ती किसी बड़े संहत गाँव के विखंडन या परिक्षिप्त बस्ती के सीमित क्षेत्र में गुच्छित होने से बनती है, जिसमें भूस्वामी समुदाय केंद्रीय भाग पर और निचला तबका बाहरी हिस्सों पर बसता है।
प्र. नगर ‘आर्थिक वृद्धि के नोड’ के रूप में क्या भूमिका निभाते हैं?
उत्तर: नगर अपने निवासियों को और अपनी पश्च भूमि की ग्रामीण बस्तियों को भी, भोजन और कच्चे माल के बदले वस्तुएँ और सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं; यह प्रकार्यात्मक संबंध परिवहन और संचार परिपथ के माध्यम से स्थापित होता है।
प्र. मध्यकालीन नगरों की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: आज के लगभग 100 नगरों की जड़ें मध्यकाल से जुड़ी हैं; इनमें से अधिकांश रजवाड़ों और राज्यों के मुख्यालय के रूप में विकसित हुए। ये किला नगर हैं जो प्राचीन नगरों के खंडहरों पर बने। उदाहरण: दिल्ली, हैदराबाद, जयपुर, लखनऊ, आगरा, नागपुर।
प्र. परिवहन नगर किसे कहते हैं? दो प्रकार के उदाहरण दीजिए।
उत्तर: परिवहन नगर वे नगर हैं जो मुख्यतः आयात-निर्यात कार्यों में संलग्न पत्तन नगर होते हैं, अथवा आंतरिक परिवहन की धुरियाँ होते हैं। उदाहरण: पत्तन नगर, कांडला-कोच्चि; आंतरिक परिवहन धुरी, धुलिया, इटारसी।
प्र. नगरीय संकुल की पहचान किस प्रकार की जा सकती है? (हिंदी संस्करण के अभ्यास प्रश्न पर आधारित)
उत्तर: यह शब्द अध्याय में तालिका 2.1 के शीर्षक में प्रयुक्त हुआ है, पर औपचारिक परिभाषा नहीं दी गई। भारत की जनगणना के मानक अर्थ में, नगरीय संकुल किसी एक नगर और उसके भौतिक रूप से सन्निकट उपनगरीय क्षेत्रों (आउटग्रोथ) का सतत नगरीय विस्तार होता है, अथवा दो या अधिक भौतिक रूप से सटे हुए नगरों व उनके आउटग्रोथ का समूह; इसकी पहचान इसी सतत भौतिक जुड़ाव और संयुक्त जनगणना-गणना से होती है। (यह उत्तर इस अध्याय के बाहर की सामान्य भूगोल जानकारी पर आधारित है, जैसा हिंदी संस्करण के अपने प्रश्न की प्रकृति स्वयं संकेत करती है।)
प्र. भारत में नगरों के विकास में यूरोपीय काल (आधुनिक नगर) के दो चरण बताइए।
उत्तर: पहला चरण: तटीय स्थानों पर पैर जमाते हुए सूरत, दमन, गोआ, पांडिचेरी जैसे व्यापारिक पत्तन विकसित करना। दूसरा चरण: मुंबई (बंबई), चेन्नई (मद्रास) और कोलकाता (कलकत्ता), तीन मुख्य नोडों पर पकड़ मज़बूत कर उन्हें अंग्रेज़ी शैली में बनाना।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. ग्रामीण बस्तियों के प्रकार को निर्धारित करने वाले तीन प्रकार के कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: (i) भौतिक लक्षण: भू-भाग की प्रकृति, ऊँचाई, जलवायु और जल की उपलब्धता। (ii) सांस्कृतिक और मानवजातीय कारक: सामाजिक संरचना, जाति और धर्म। (iii) सुरक्षा संबंधी कारक: चोरियों और डकैतियों से सुरक्षा। इन्हीं तीन कारकों के संयोजन से भारत में चार प्रकार की ग्रामीण बस्तियाँ (गुच्छित, अर्ध-गुच्छित, पल्लीकृत, परिक्षिप्त) बनती हैं।
प्र. भारत की जनगणना, 1991 की नगरीय बस्ती की परिभाषा को उसकी तीनों शर्तों सहित समझाइए।
उत्तर: 1991 की भारतीय जनगणना के अनुसार, वे सभी स्थान नगरीय बस्ती कहलाते हैं जहाँ नगरपालिका, निगम, छावनी बोर्ड अथवा अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति हो, एवं जो तीन शर्तें पूरी करते हों: (i) न्यूनतम जनसंख्या 5,000 व्यक्ति, (ii) कम से कम 75 प्रतिशत पुरुष श्रमिक गैर-कृषि कार्यों में संलग्न, और (iii) जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।
प्र. भारतीय नगरों के तीन ऐतिहासिक कालों (प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक) का वर्णन कीजिए, एक-एक उदाहरण सहित।
उत्तर: प्राचीन नगर: 2,000 से अधिक वर्षों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, अधिकांश धार्मिक/सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में विकसित; उदाहरण: वाराणसी। मध्यकालीन नगर: आज के लगभग 100 नगरों की जड़ें यहीं हैं, अधिकांश रजवाड़ों के मुख्यालय, प्राचीन नगरों के खंडहरों पर बने किला नगर; उदाहरण: आगरा। आधुनिक नगर: अंग्रेज़ों और अन्य यूरोपियों द्वारा विकसित, पहले तटीय व्यापारिक पत्तन फिर तीन मुख्य नोड, बाद में औद्योगिक व स्वतंत्रता-पश्चात प्रशासनिक/अनुषंगी नगर; उदाहरण: जमशेदपुर।
प्र. नगरों के प्रकार्यात्मक वर्गीकरण से आप क्या समझते हैं? किन्हीं चार प्रकार्यात्मक वर्गों के नाम व एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर: केंद्रीय अथवा नोडीय स्थान की भूमिका के अतिरिक्त, अनेक नगर विशेषीकृत सेवाओं का निष्पादन करते हैं और अपने प्रमुख अथवा विशेषीकृत प्रकार्य के आधार पर वर्गीकृत किए जाते हैं। चार उदाहरण: (i) प्रशासन नगर: चंडीगढ़, (ii) औद्योगिक नगर: मुंबई, (iii) खनन नगर: रानीगंज, (iv) धार्मिक व सांस्कृतिक नगर: वाराणसी।
प्र. भारत में नगरीकरण की प्रवृत्ति (1901-2011) का वर्णन तालिका 2.1 के आँकड़ों के आधार पर कीजिए।
उत्तर: 1901 में भारत में केवल 1,827 नगर/नगरीय संकुल थे और नगरीय जनसंख्या कुल जनसंख्या का मात्र 10.84 प्रतिशत थी। 1911 में यह प्रतिशत थोड़ा घटकर 10.29 हुआ (नगरों की संख्या भी घटकर 1,815 रह गई), पर उसके बाद हर दशक में बढ़ता गया: 1951 में 17.29%, 1981 में 23.34%, 2001 में 27.78% और 2011 में 31.16%, जबकि नगरों/नगरीय संकुलों की संख्या बढ़कर 6,171 हो गई (1961 में यह संख्या 2,843 से घटकर 2,365 भी हुई थी)। दशकीय वृद्धि दर उतार-चढ़ाव भरी रही: 1951 में 41.42%, 1961 में घटकर 26.41%, फिर 1981 में सबसे अधिक 46.14%। पिछले दो दशकों में यह वृद्धि दर धीमी हुई है: 1991 में 36.47%, 2001 में 31.13% और 2011 में 31.08%।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. विभिन्न प्रकार की ग्रामीण बस्तियों के लक्षणों की विवेचना कीजिए। विभिन्न भौतिक पर्यावरणों में बस्तियों के प्रारूपों के लिए कौन-से कारक उत्तरदायी हैं? (प्रश्नावली प्रश्न 3-i)
उत्तर: भारत में ग्रामीण बस्तियों को मुख्यतः चार प्रकारों में बाँटा जाता है।
(i) गुच्छित (संकुलित/आकेंद्रित) बस्तियाँ: घरों का एक संकुलित क्षेत्र, जो चारों ओर के खेतों-खलिहानों-चरागाहों से स्पष्ट रूप से पृथक होता है; गलियाँ आयताकार, अरीय या रैखिक जैसी पहचानी जाने वाली आकृतियाँ दिखाती हैं। उपजाऊ जलोढ़ मैदानों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में सामान्य; सुरक्षा कारणों से बुंदेलखंड और नागालैंड में भी; राजस्थान में जल की कमी के कारण अनिवार्य।
(ii) अर्ध-गुच्छित (विखंडित) बस्तियाँ: परिक्षिप्त बस्ती के सीमित क्षेत्र में गुच्छित होने अथवा किसी बड़े संहत गाँव के विखंडन से बनती हैं; भूस्वामी समुदाय केंद्रीय भाग पर, निचला तबका बाहरी हिस्सों पर। गुजरात के मैदान और राजस्थान के कुछ भागों में पाई जाती हैं।
(iii) पल्लीकृत बस्तियाँ: कई भौतिक रूप से पृथक इकाइयों में बँटी, पर सभी का नाम एक; इकाइयाँ पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाँणी कहलाती हैं; सामाजिक-मानवजातीय कारकों से प्रेरित। मध्य व निम्न गंगा मैदान, छत्तीसगढ़, हिमालय की निचली घाटियों में पाई जाती हैं।
(iv) परिक्षिप्त (एकाकी) बस्तियाँ: सुदूर जंगलों अथवा पहाड़ियों की ढालों पर एकाकी झोंपड़ियाँ; भू-भाग के अत्यधिक विखंडन के कारण। मेघालय, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, केरल में पाई जाती हैं।
उत्तरदायी कारक: (i) भौतिक लक्षण, भू-भाग, ऊँचाई, जलवायु, जल की उपलब्धता; (ii) सांस्कृतिक-मानवजातीय कारक, सामाजिक संरचना, जाति, धर्म; (iii) सुरक्षा संबंधी कारक, चोरी-डकैती से सुरक्षा। इन्हीं कारकों के अलग-अलग संयोजन से अलग-अलग भौतिक पर्यावरणों में अलग-अलग बस्ती-प्रारूप बनते हैं।
प्र. महानगर क्या होते हैं? ये नगरीय संकुलों से किस प्रकार भिन्न होते हैं? (केवल हिंदी संस्करण के अभ्यास प्रश्न 2-iv पर आधारित)
उत्तर: यह अध्याय स्वयं ‘महानगर’ शब्द का प्रयोग करता है (प्रकार्यात्मक वर्गीकरण खंड में, ‘विशेषीकृत नगर भी महानगर बनने पर बहुप्रकार्यात्मक बन जाते हैं’) पर इसकी संख्यात्मक परिभाषा नहीं देता। सामान्य भूगोल की शब्दावली में, महानगर सामान्यतः 10 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाला एक बहुत बड़ा, बहुप्रकार्यात्मक नगरीय क्षेत्र होता है, जिसमें उद्योग, व्यवसाय, प्रशासन और परिवहन जैसे कई प्रकार्य एक साथ महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं और इतने अंतर्ग्रंथित हो जाते हैं कि नगर को किसी एक विशेष प्रकार्य वर्ग में नहीं रखा जा सकता। नगरीय संकुल इससे भिन्न है: यह किसी एक नगर और उसके भौतिक रूप से सन्निकट उपनगरीय क्षेत्रों (आउटग्रोथ) का सतत नगरीय विस्तार है, अथवा दो या अधिक सटे हुए नगरों व उनके आउटग्रोथ का समूह है। हर महानगर एक नगरीय संकुल भी होता है, पर हर नगरीय संकुल महानगर जितना बड़ा या बहुप्रकार्यात्मक नहीं होता, अंतर मुख्यतः आकार, जनसंख्या-पैमाने और प्रकार्यात्मक जटिलता का है। (यह उत्तर अध्याय के बाहर की सामान्य भूगोल जानकारी पर आधारित पूरक व्याख्या है, जैसा हिंदी संस्करण के अपने अभ्यास-प्रश्न की प्रकृति संकेत करती है।)
प्र. क्या एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना की जा सकती है? नगर बहुप्रकार्यात्मक क्यों हो जाते हैं? (प्रश्नावली प्रश्न 3-ii)
उत्तर: नहीं, व्यवहार में एक ही प्रकार्य वाले नगर की कल्पना करना कठिन है। यद्यपि प्रत्येक नगर अपने प्रमुख अथवा विशेषीकृत प्रकार्य (जैसे प्रशासन, उद्योग, खनन, धार्मिक-सांस्कृतिक, पर्यटन आदि) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, किताब स्पष्ट कहती है कि वास्तव में प्रत्येक नगर कई प्रकार्य करता है। नगर केंद्रीय अथवा नोडीय स्थान के रूप में कार्य करते ही हैं, साथ ही विशेषीकृत सेवाएँ भी देते हैं। जैसे-जैसे कोई विशेषीकृत नगर बढ़कर महानगर बनता है, वह बहुप्रकार्यात्मक हो जाता है : उसमें उद्योग, व्यवसाय, प्रशासन, परिवहन आदि सभी प्रकार्य एक साथ महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। ये प्रकार्य इतने अंतर्ग्रंथित हो जाते हैं कि नगर को किसी एक विशेष प्रकार्य वर्ग में वर्गीकृत करना संभव नहीं रह जाता।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक बस्ती की प्रक्रिया में मूल रूप से कौन-सी दो बातें सम्मिलित होती हैं?
उत्तर: लोगों का समूहन, और उनके संसाधन आधार के रूप में क्षेत्र का आवंटन।
(ख) 1 अंक विरल रूप से अवस्थित छोटी बस्तियाँ क्या कहलाती हैं?
उत्तर: गाँव, जो कृषि अथवा अन्य प्राथमिक क्रियाकलापों में विशिष्टता रखते हैं।
(ग) 2 अंक गद्यांश के आधार पर बताइए कि नगरीय बस्तियाँ गाँवों से किस प्रकार भिन्न हैं।
उत्तर: गाँव विरल रूप से अवस्थित छोटी बस्तियाँ हैं जो कृषि व अन्य प्राथमिक क्रियाकलापों में विशिष्ट होती हैं, जबकि नगरीय बस्तियाँ कम संख्या में पर बड़े आकार की होती हैं और द्वितीयक (विनिर्माण) व तृतीयक (सेवा) क्रियाकलापों में विशेषीकृत होती हैं।
(क) 1 अंक नगरों को उनके प्रमुख प्रकार्य के आधार पर वर्गीकृत क्यों किया जाता है, जबकि वे कई प्रकार्य करते हैं?
उत्तर: क्योंकि प्रत्येक नगर कुछ निश्चित क्रियाओं, उत्पादनों या सेवाओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है, भले ही वह वास्तव में कई प्रकार्य करता हो, इसीलिए उसे उसके प्रमुख अथवा विशेषीकृत प्रकार्य के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
(ख) 1 अंक गद्यांश के अनुसार नगर के प्रकार्यों में परिवर्तन कब होता है?
उत्तर: जैसे-जैसे कोई विशेषीकृत नगर बढ़कर महानगर बनता है, वह बहुप्रकार्यात्मक हो जाता है, तब उसके प्रकार्यों में परिवर्तन हो जाता है।
(ग) 2 अंक गद्यांश के आधार पर बताइए कि किसी नगर को एक निश्चित प्रकार्यात्मक वर्ग में रखना कब कठिन हो जाता है।
उत्तर: जब नगर महानगर बन जाता है और उसमें उद्योग, व्यवसाय, प्रशासन, परिवहन जैसे कई प्रकार्य एक साथ महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं, तो ये प्रकार्य इतने अंतर्ग्रंथित हो जाते हैं कि नगर को किसी एक विशेष प्रकार्य वर्ग में वर्गीकृत करना कठिन हो जाता है।