कक्षा 12 भूगोल अध्याय 10 NCERT Solutions (प्रश्नावली के हल) हिंदी में

NCERT की पाठ्यपुस्तक भारत: लोग और अर्थव्यवस्था के अध्याय 2 (मानव बस्तियाँ) की प्रश्नावली के सभी प्रश्न, ठीक उसी रूप में जैसे किताब के हिंदी संस्करण में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।

1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (प्रश्न 1)

प्रश्न 1(i)

प्र. निम्नलिखित में से कौन-सा नगर नदी तट पर अवस्थित नहीं है?
(क) आगरा  (ख) भोपाल  (ग) पटना  (घ) कोलकाता

उत्तर: (ख) भोपाल। आगरा यमुना तट पर, पटना गंगा तट पर और कोलकाता हुगली (गंगा की एक शाखा) तट पर बसा है; भोपाल किसी बड़ी नदी के तट पर नहीं, बल्कि झीलों के किनारे बसा है।

प्रश्न 1(ii)

प्र. भारत की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी एक विशेषता नगर की परिभाषा का अंग नहीं है?
(क) जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी  (ख) नगरपालिका, निगम का होना  (ग) 75% से अधिक जनसंख्या का प्राथमिक खंड में संलग्न होना  (घ) जनसंख्या आकार 5,000 व्यक्तियों से अधिक

उत्तर: (ग)। जनगणना की परिभाषा के अनुसार शर्त यह है कि कम से कम 75 प्रतिशत पुरुष श्रमिक गैर-कृषि (द्वितीयक/तृतीयक) कार्यों में संलग्न हों, प्राथमिक क्षेत्र में नहीं, इसीलिए “प्राथमिक खंड में संलग्न होना” परिभाषा का अंग नहीं है। बाक़ी तीनों (घनत्व 400/किमी², नगरपालिका/निगम की उपस्थिति, जनसंख्या 5,000 से अधिक) परिभाषा की असली शर्तें हैं।

प्रश्न 1(iii)

प्र. निम्नलिखित में से किस पर्यावरण में परिक्षिप्त ग्रामीण बस्तियों की अपेक्षा नहीं की जा सकती?
(क) गंगा का जलोढ़ मैदान  (ख) राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क प्रदेश  (ग) हिमालय की निचली घाटियाँ  (घ) उत्तर-पूर्व के वन और पहाड़ियाँ

उत्तर: (क) गंगा का जलोढ़ मैदान। अध्याय स्वयं कहता है कि भारत में संहत अथवा गुच्छित गाँव विशेष रूप से उत्तरी मैदानों (जिसमें गंगा का जलोढ़ मैदान भी आता है) में एक सार्वत्रिक लक्षण है, अर्थात यहाँ संहत बस्तियाँ अपेक्षित हैं, परिक्षिप्त नहीं। परिक्षिप्त बस्तियाँ अध्याय के अनुसार मेघालय, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और केरल के अनेक भागों में पाई जाती हैं, और चित्र 2.3 नागालैंड (उत्तर-पूर्व) की परिक्षिप्त बस्तियाँ दिखाता है; हिमालय की निचली घाटियों में पल्लीकृत बस्तियाँ बताई गई हैं। (राजस्थान में भी अध्याय संहत और अर्ध-गुच्छित बस्तियाँ ही बताता है, पर पुस्तक जिस क्षेत्र के संहत गाँवों को ‘सार्वत्रिक लक्षण’ कहती है, वह उत्तरी मैदान है, इसलिए सबसे उपयुक्त उत्तर (क) है।)
टिप्पणी: हिंदी संस्करण का यह प्रश्न “…की अपेक्षा नहीं की जा सकती” (नकारात्मक रूप में) पूछता है, जबकि अंग्रेज़ी संस्करण यही प्रश्न सकारात्मक रूप में पूछता है (किस पर्यावरण में परिक्षिप्त बस्तियों की अपेक्षा की जा सकती है; उत्तर: उत्तर-पूर्व के वन और पहाड़ियाँ)। यह दोनों संस्करणों के बीच एक वास्तविक अंतर है, इसलिए परीक्षा में हिंदी किताब वाला रूप ही लिखें।

2 लगभग 30 शब्दों में उत्तर (प्रश्न 2, हिंदी संस्करण के अपने चार उप-प्रश्न)

प्रश्न 2(i)

प्र. गैरिसन नगर क्या होते हैं? उनका क्या प्रकार्य होता है?

उत्तर: गैरिसन (छावनी) नगर वे नगर हैं जिनका उदय सैन्य छावनियों के रूप में हुआ, जैसे अंबाला, जालंधर, महू, बबीना और उधमपुर। इनका मुख्य प्रकार्य सेना की टुकड़ियों को ठहराना और सैन्य गतिविधियों का केंद्र बनना है।

प्रश्न 2(ii), केवल हिंदी संस्करण में

प्र. किसी नगरीय संकुल की पहचान किस प्रकार की जा सकती है?

उत्तर: यह शब्द अध्याय में तालिका 2.1 के शीर्षक में प्रयुक्त हुआ है, पर अध्याय इसकी औपचारिक परिभाषा नहीं देता। भारत की जनगणना के मानक अर्थ में, नगरीय संकुल किसी एक नगर और उसके भौतिक रूप से सन्निकट उपनगरीय क्षेत्रों (आउटग्रोथ) का सतत नगरीय विस्तार होता है, अथवा दो या अधिक भौतिक रूप से सटे नगरों व उनके आउटग्रोथ का समूह; इसकी पहचान इसी सतत भौतिक जुड़ाव और संयुक्त जनगणना-गणना से होती है। (यह उत्तर इस अध्याय के बाहर की सामान्य भूगोल जानकारी है, अध्याय स्वयं इसे परिभाषित नहीं करता।)

प्रश्न 2(iii)

प्र. मरुस्थली प्रदेशों में गाँवों की अवस्थिति के कौन-से मुख्य कारक होते हैं।

उत्तर: मरुस्थली/अर्ध-शुष्क प्रदेशों (जैसे राजस्थान) में जल की कमी सबसे बड़ा कारक है: उपलब्ध सीमित जल संसाधनों (कुओं, तालाबों) के अधिकतम उपयोग के लिए बस्तियाँ जल-स्रोतों के निकट संहत (गुच्छित) रूप में बसती हैं, बिखरी हुई नहीं।

प्रश्न 2(iv), केवल हिंदी संस्करण में

प्र. महानगर क्या होते हैं? ये नगरीय संकुलों से किस प्रकार भिन्न होते हैं?

उत्तर: अध्याय स्वयं “महानगर” शब्द का प्रयोग करता है (प्रकार्यात्मक वर्गीकरण खंड में) पर संख्यात्मक परिभाषा नहीं देता। सामान्य भूगोल की शब्दावली में महानगर सामान्यतः 10 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाला एक बहुत बड़ा, बहुप्रकार्यात्मक नगरीय क्षेत्र होता है, जिसमें उद्योग, व्यवसाय, प्रशासन और परिवहन सब एक साथ महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। हर महानगर एक नगरीय संकुल भी होता है, पर हर नगरीय संकुल महानगर जितना बड़ा या बहुप्रकार्यात्मक नहीं होता, अंतर आकार, जनसंख्या-पैमाने और प्रकार्यात्मक जटिलता का है। (यह उत्तर भी अध्याय के बाहर की पूरक जानकारी है।)

3 लगभग 150 शब्दों में उत्तर (प्रश्न 3)

प्रश्न 3(i)

प्र. विभिन्न प्रकार की ग्रामीण बस्तियों के लक्षणों की विवेचना कीजिए। विभिन्न भौतिक पर्यावरणों में बस्तियों के प्रारूपों के लिए उत्तरदायी कारक कौन-से हैं?

उत्तर: भारत में ग्रामीण बस्तियों को मुख्यतः चार प्रकारों में बाँटा जाता है।
1. गुच्छित (संकुलित/आकेंद्रित): घरों का एक संकुलित क्षेत्र, जो चारों ओर के खेतों-खलिहानों-चरागाहों से स्पष्ट रूप से पृथक होता है; गलियाँ आयताकार, अरीय या रैखिक जैसी पहचानी जाने वाली आकृतियाँ दिखाती हैं। उपजाऊ जलोढ़ मैदानों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में सामान्य; सुरक्षा कारणों से बुंदेलखंड और नागालैंड में भी; राजस्थान में जल की कमी के कारण अनिवार्य।
2. अर्ध-गुच्छित (विखंडित): परिक्षिप्त बस्ती के सीमित क्षेत्र में गुच्छित होने अथवा किसी बड़े संहत गाँव के विखंडन से बनती हैं; भूस्वामी समुदाय केंद्रीय भाग पर, निचला तबका बाहरी हिस्सों पर बसता है। गुजरात के मैदान और राजस्थान के कुछ भागों में पाई जाती हैं।
3. पल्लीकृत: कई भौतिक रूप से पृथक इकाइयों में बँटी, पर सभी का नाम एक; इकाइयाँ पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाँणी कहलाती हैं; सामाजिक-मानवजातीय कारकों से प्रेरित। मध्य व निम्न गंगा मैदान, छत्तीसगढ़, हिमालय की निचली घाटियों में पाई जाती हैं।
4. परिक्षिप्त (एकाकी): सुदूर जंगलों अथवा पहाड़ियों की ढालों पर एकाकी झोंपड़ियाँ; भू-भाग के अत्यधिक विखंडन के कारण। मेघालय, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, केरल में पाई जाती हैं।
उत्तरदायी कारक: (i) भौतिक लक्षण, भू-भाग की प्रकृति, ऊँचाई, जलवायु, जल की उपलब्धता; (ii) सांस्कृतिक-मानवजातीय कारक, सामाजिक संरचना, जाति, धर्म; (iii) सुरक्षा संबंधी कारक, चोरी-डकैती से सुरक्षा। इन्हीं तीन कारकों के अलग-अलग संयोजन से अलग-अलग भौतिक पर्यावरणों में अलग-अलग बस्ती-प्रारूप बनते हैं।

प्रश्न 3(ii)

प्र. क्या एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना की जा सकती है? नगर बहुप्रकार्यात्मक क्यों हो जाते हैं?

उत्तर: नहीं, व्यवहार में एक ही प्रकार्य वाले नगर की कल्पना करना कठिन है। यद्यपि प्रत्येक नगर अपने प्रमुख अथवा विशेषीकृत प्रकार्य (जैसे प्रशासन, उद्योग, खनन, धार्मिक-सांस्कृतिक, पर्यटन आदि) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, किताब स्पष्ट कहती है कि वास्तव में प्रत्येक नगर कई प्रकार्य करता है। नगर केंद्रीय अथवा नोडीय स्थान के रूप में कार्य करते ही हैं, साथ ही विशेषीकृत सेवाएँ भी देते हैं। जैसे-जैसे कोई विशेषीकृत नगर बढ़कर महानगर बनता है, वह बहुप्रकार्यात्मक हो जाता है: उसमें उद्योग, व्यवसाय, प्रशासन, परिवहन आदि सभी प्रकार्य एक साथ महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। ये प्रकार्य इतने अंतर्ग्रंथित हो जाते हैं कि नगर को किसी एक विशेष प्रकार्य वर्ग में वर्गीकृत करना संभव नहीं रह जाता।

परीक्षा संकेत

प्रश्न 1 के तीनों वस्तुनिष्ठ प्रश्न सीधे पुस्तक के तथ्यों पर आधारित हैं, इसलिए उनकी शब्दावली और विकल्प ध्यान से पढ़िए। प्रश्न 3(i) (ग्रामीण बस्तियों के प्रकार और उनके कारक) का उत्तर दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नों की तैयारी के लिए सबसे उपयोगी है।

4 पाठगत गतिविधि (अध्याय के बीच में दी गई)

पाठगत गतिविधि

प्र. नगरीय संकुलों/नगरों की राज्यानुसार सूची बनाये और नगरों के इस वर्ग के अंतर्गत राज्यानुसार जनसंख्या को देखें।

उत्तर: यह आँकड़ों पर आधारित गतिविधि है, जो भारत की जनगणना, 2011 की तालिकाओं (censusindia.gov.in) से की जाती है। तीन स्तंभों वाली तालिका बनाइए: राज्य, नगरीय संकुल/नगर, जनसंख्या। उदाहरण के लिए, जनगणना 2011 के सबसे बड़े नगरीय संकुल हैं: बृहत् मुंबई (महाराष्ट्र, लगभग 1.84 करोड़), दिल्ली (दिल्ली, लगभग 1.63 करोड़), कोलकाता (पश्चिम बंगाल, लगभग 1.41 करोड़), चेन्नई (तमिलनाडु, लगभग 87 लाख), बेंगलुरु (कर्नाटक, लगभग 85 लाख) और हैदराबाद (तब आंध्र प्रदेश, अब तेलंगाना, लगभग 77 लाख)। फिर हर राज्य के ऐसे नगरों की जनसंख्या जोड़िए। आप देखेंगे कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों में बड़े नगरों की संख्या अधिक है, जो अध्याय की इस बात से मेल खाता है कि नगरीय केंद्रों के विवर्धन ने नगरीय जनसंख्या की वृद्धि में सार्थक भूमिका निभाई है।