कक्षा 12 भूगोल अध्याय 10 शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, ग्रामीण बस्ती प्रकारों की तालिका, नगर-विकास की समय-रेखा, नगरीकरण के आँकड़े और नौ प्रकार्यात्मक वर्गों की तालिका। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 तीन परिभाषाएँ जो याद रखनी हैं

याद कर लेंपरिभाषा 1

मानव बस्ती किसी भी प्रकार और आकार के घरों का ऐसा संकुल है जिनमें मनुष्य रहते हैं। इसमें दो बातें सम्मिलित हैं: लोगों का समूहन, और उनके संसाधन आधार के रूप में क्षेत्र का आवंटन।

याद कर लेंपरिभाषा 2, जनगणना के अपने ही शब्दों में

भारत की जनगणना, 1991 नगरीय बस्ती को इस प्रकार परिभाषित करती है: “सभी स्थान जहाँ नगरपालिका, निगम, छावनी बोर्ड अथवा अधिसूचित नगरीय क्षेत्र समिति हो, एवं कम से कम 5,000 व्यक्ति वहाँ निवास करते हों, 75 प्रतिशत पुरुष श्रमिक गैर-कृषि कार्यों में संलग्न हों, तथा जनसंख्या का घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर हो।”

याद कर लेंपरिभाषा 3

नगरीकरण के स्तर का माप कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में किया जाता है। 2011 में भारत में यह स्तर 31.16% था।

2 ग्रामीण बस्तियों के चार प्रकार, एक तालिका में

प्रकार पहचान भारत में कहाँ
गुच्छित (संकुलित/आकेंद्रित) घरों का संकुलित क्षेत्र, खेत-खलिहान से स्पष्ट पृथक; आयताकार/अरीय/रैखिक आकृति उपजाऊ जलोढ़ मैदान, उत्तर-पूर्वी राज्य; सुरक्षा हेतु बुंदेलखंड-नागालैंड; जल-अभाव से राजस्थान
अर्ध-गुच्छित (विखंडित) बड़े संहत गाँव के विखंडन से; भूस्वामी केंद्र में, निचला तबका बाहर गुजरात का मैदान, राजस्थान के कुछ भाग
पल्लीकृत कई पृथक इकाइयाँ, एक साझा नाम: पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाँणी मध्य-निम्न गंगा मैदान, छत्तीसगढ़, हिमालय की निचली घाटियाँ
परिक्षिप्त (एकाकी) सुदूर जंगल/पहाड़ी ढाल पर एकाकी झोंपड़ियाँ; भू-भाग का अत्यधिक विखंडन मेघालय, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, केरल
आम ग़लती

गंगा के जलोढ़ मैदान और राजस्थान को परिक्षिप्त बस्ती से मत जोड़िए। उपजाऊ जलोढ़ मैदानों में प्रायः गुच्छित बस्तियाँ मिलती हैं, पर मध्य और निम्न गंगा के मैदान में पल्ली बस्तियाँ भी हैं; राजस्थान में जल-अभाव से संहत बस्तियाँ बनती हैं, और इसके कुछ भागों में अर्ध-गुच्छित बस्तियाँ भी मिलती हैं। हिमालय की निचली घाटियाँ पल्लीकरण से जुड़ी हैं, परिक्षिप्त से नहीं।

3 ग्रामीण-नगरीय अंतर, तीन बिंदु

  • आर्थिक आधार: ग्रामीण: भूमि आधारित प्राथमिक क्रियाएँ; नगरीय: प्रक्रमण, विनिर्माण, सेवाएँ।
  • नगर की भूमिका: नगर आर्थिक वृद्धि के नोड हैं, परिवहन-संचार परिपथ से ग्रामीण बस्तियों को भी वस्तुएँ-सेवाएँ देते हैं।
  • सामाजिक जीवन: ग्रामीण: कम गतिशील, घनिष्ठ संबंध; नगरीय: जटिल-तीव्र जीवन, औपचारिक संबंध।

4 नगरों के विकास की समय-रेखा

सिंधु घाटी सभ्यता: हड़प्पा, मोहनजोदड़ो अस्तित्व में
प्राचीन नगर: 2,000+ वर्ष पुराने, धार्मिक/सांस्कृतिक केंद्र। उदा.: वाराणसी, प्रयाग (प्रयागराज), पाटलिपुत्र (पटना), मदुरई
मध्यकालीन नगर: आज के ~100 नगरों की जड़ें; रजवाड़ों के मुख्यालय, किला नगर। उदा.: दिल्ली, हैदराबाद, जयपुर, लखनऊ, आगरा, नागपुर
आधुनिक नगर, तटीय पत्तन: सूरत, दमन, गोआ, पांडिचेरी
आधुनिक नगर, तीन नोड: मुंबई (बंबई), चेन्नई (मद्रास), कोलकाता (कलकत्ता), अंग्रेज़ी शैली में निर्मित
आधुनिक नगर, औद्योगिक (1850+): जमशेदपुर
आधुनिक नगर, स्वतंत्रता-पश्चात: प्रशासनिक (चंडीगढ़, भुवनेश्वर, गांधीनगर, दिसपुर), औद्योगिक (दुर्गापुर, भिलाई, सिंदरी, बरौनी), अनुषंगी (दिल्ली के चारों ओर गाज़ियाबाद, रोहतक, गुरुग्राम)

5 नगरीकरण की प्रवृत्ति, तालिका 2.1 (संक्षिप्त)

वर्ष नगर/नगरीय संकुल नगरीय जनसंख्या % दशकीय वृद्धि %
1901 1,827 10.84 —
1951 2,843 17.29 41.42
1981 3,378 23.34 46.14
2001 5,161 27.78 31.13
2011* 6,171 31.16 31.08

(*2011 के आँकड़े अंतरिम। पूरी 12-पंक्ति तालिका विस्तृत नोट्स में है।)

आँकड़े जो याद रखने हैं

2011 नगरीकरण स्तर 31.16%, विकसित देशों से कम · 20वीं सदी में नगरीय जनसंख्या 11 गुना बढ़ी · पिछले दो दशकों में वृद्धि दर धीमी हुई (जनसंख्या स्वयं घटी नहीं) · स्मार्ट सिटी मिशन: आधारभूत सुविधा + स्वच्छ/सतत पर्यावरण + बेहतर जीवन, “लाइट हाउस” मॉडल (कोई संख्यात्मक लक्ष्य अध्याय में नहीं)।

6 नौ प्रकार्यात्मक वर्ग, हर एक का उदाहरण

वर्ग उदाहरण नगर
प्रशासन चंडीगढ़, नई दिल्ली, भोपाल, शिलांग, गुवाहाटी
औद्योगिक मुंबई, सेलम, कोयंबटूर, जमशेदपुर, भिलाई
परिवहन पत्तन: कांडला, कोच्चि, विशाखापट्टनम · आंतरिक धुरी: आगरा, इटारसी
वाणिज्यिक कोलकाता, सहारनपुर, सतना
खनन रानीगंज, झरिया, डिगबोई, सिंगरौली
गैरिसन/छावनी अंबाला, जालंधर, महू, उधमपुर
शैक्षिक रुड़की, वाराणसी, अलीगढ़, पिलानी, प्रयागराज
धार्मिक-सांस्कृतिक वाराणसी, मथुरा, अमृतसर, हरिद्वार, उज्जैन
पर्यटन नैनीताल, मसूरी, शिमला, जोधपुर, जैसलमेर
क्या आप जानते हैं?

प्रत्येक नगर वास्तव में कई प्रकार्य करता है, इस तालिका में केवल उसका प्रमुख/विशेषीकृत प्रकार्य दिखाया गया है। महानगर बनने पर विशेषीकृत नगर भी बहुप्रकार्यात्मक बन जाता है और उसे किसी एक वर्ग में नहीं रखा जा सकता।

सभी परिभाषाएँ एक जगह
  1. मानव बस्ती: किसी भी प्रकार और आकार के घरों का संकुल जिनमें मनुष्य रहते हैं; लोगों का समूहन + संसाधन आधार के रूप में क्षेत्र का आवंटन।
  2. गुच्छित बस्ती: घरों का संकुलित क्षेत्र, खेतों से पृथक, ज्यामितीय आकृति दिखाने वाला।
  3. अर्ध-गुच्छित बस्ती: बड़े संहत गाँव के विखंडन अथवा परिक्षिप्त बस्ती के सीमित क्षेत्र में गुच्छित होने से बनी बस्ती।
  4. पल्लीकृत बस्ती: कई भौतिक रूप से पृथक इकाइयों में बँटी, पर एक ही साझा नाम वाली बस्ती।
  5. परिक्षिप्त बस्ती: भू-भाग के अत्यधिक विखंडन की वजह से सुदूर जंगलों/पहाड़ियों में बनी एकाकी झोंपड़ियाँ या छोटी पल्ली।
  6. नगरीय बस्ती (जनगणना, 1991): नगरपालिका/निगम/छावनी बोर्ड/अधिसूचित क्षेत्र समिति वाला स्थान, जनसंख्या ≥5,000, ≥75% पुरुष श्रमिक गैर-कृषि में, घनत्व ≥400/किमी²।
  7. नगरीकरण का स्तर: कुल आबादी में से नगरों में रहने वालों का हिस्सा, प्रतिशत में।
अंतिम दोहराव: सिर्फ़ आँकड़े और नाम
  • जनगणना 1991: 5,000 जनसंख्या · 75% गैर-कृषि · 400/किमी² घनत्व
  • हड़प्पा, मोहनजोदड़ो (सिंधु घाटी) · वाराणसी (प्राचीन, सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण) · आगरा (मध्यकालीन) · जमशेदपुर (आधुनिक, 1850+)
  • 2011: 31.16% नगरीकरण · 6,171 नगर/नगरीय संकुल · 11 गुना (20वीं सदी वृद्धि)
  • चार ग्रामीण बस्ती प्रकार: गुच्छित, अर्ध-गुच्छित, पल्लीकृत, परिक्षिप्त, हर एक का अपना क्षेत्र
  • नौ प्रकार्यात्मक वर्ग: प्रशासन, औद्योगिक, परिवहन, वाणिज्यिक, खनन, गैरिसन, शैक्षिक, धार्मिक-सांस्कृतिक, पर्यटन
  • स्मार्ट सिटी मिशन: “लाइट हाउस” मॉडल, आधारभूत सुविधा + सतत पर्यावरण
  • आधुनिक नगर के चार चरण, क्रम से: तटीय पत्तन (सूरत, दमन, गोआ, पांडिचेरी) → तीन नोड (मुंबई, चेन्नई, कोलकाता) → 1850 के बाद औद्योगिक नगर (जमशेदपुर) → स्वतंत्रता-पश्चात प्रशासनिक/औद्योगिक/अनुषंगी नगर
परीक्षा संकेत: दो बार पढ़ें

1. गंगा का जलोढ़ मैदान और राजस्थान, दोनों को परिक्षिप्त बस्ती से न जोड़ें: उपजाऊ जलोढ़ मैदान प्रायः गुच्छित, मध्य-निम्न गंगा मैदान में पल्ली बस्तियाँ भी, और राजस्थान के कुछ भागों में अर्ध-गुच्छित बस्तियाँ भी। 2. जनगणना, 1991 की परिभाषा में तीनों संख्याएँ (5,000 / 75% / 400) एक साथ याद रखें, अकेली-अकेली भूलने की सबसे बड़ी वजह यही है। 3. नौ प्रकार्यात्मक वर्गों में से कम से कम पाँच नाम और उनका एक-एक उदाहरण नगर लिखने का अभ्यास करें।