संचार
गेजकोंकण रेलवेराष्ट्रीय जलमार्गउड़ान
गेलHVJ पाइपलाइनइनसैटIRSदूरदर्शन
1परिवहन तथा संचार: अर्थ और साधन
दंतमंजन से लेकर अनाज तक, जो कुछ भी हम रोज़ इस्तेमाल करते हैं वह कहीं और बनता है और हम तक पहुँचना ज़रूरी होता है। परिवहन वही है जो उत्पादन-स्थल से इन वस्तुओं को उस बाज़ार तक पहुँचाता है जहाँ उपभोक्ता उन्हें खरीदते हैं। हम रोज़ अपने विचार, दृष्टिकोण और संदेश भी एक-दूसरे तक भेजते हैं; इनका आदान-प्रदान संचार कहलाता है। दोनों की ज़रूरत एक ही जगह से आती है: किसी वस्तु (सामान, व्यक्ति या विचार) को उपलब्धता वाले स्थान से ज़रूरत वाले स्थान तक ले जाना।
परिवहन लोगों, सामान और सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भौतिक रूप से ले जाने का साधन है। संचार दूरी के पार लोगों के बीच विचारों, दृष्टिकोण और संदेशों का आदान-प्रदान है।
विशेष परिस्थितियों में विशिष्ट सामग्री ले जाने के लिए रज्जुमार्ग, केबिल मार्ग और पाइपलाइन जैसे साधन भी विकसित किए गए, जैसे पहाड़ी इलाकों में या तरल-गैस के लिए।
2स्थल परिवहन: सड़कें
2.1 भारत में सड़कों का विकास
प्राचीन काल से ही भारत में मार्गों और कच्ची सड़कों से परिवहन होता रहा है; आर्थिक-प्रौद्योगिक विकास के साथ बाद में पक्की सड़कें और रेलमार्ग बने। द्वितीय विश्व युद्ध से पहले तक आधुनिक सड़क परिवहन सीमित रहा: नागपुर योजना (1943) को रजवाड़ों और ब्रिटिश भारत के बीच तालमेल न बन पाने के कारण लागू नहीं किया जा सका। स्वतंत्रता के बाद बीस वर्षीय सड़क योजना (1961) से सड़कों की दशा सुधरी, लेकिन आज भी सड़कें नगरों के इर्द-गिर्द ही केंद्रित हैं, जबकि ग्रामीण और सुदूर क्षेत्र सबसे कम जुड़े हैं।
भारत का सड़क जाल विश्व के सबसे बड़े सड़क जालों में से एक है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 62.16 लाख कि.मी. है (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, वार्षिक रिपोर्ट 2020-21)।
2.2 सड़कों का वर्गीकरण
निर्माण और रख-रखाव के आधार पर सड़कों को राष्ट्रीय महामार्ग, राज्य महामार्ग, जिला सड़कें, ग्रामीण सड़कें और अन्य सड़कों (सीमांत सड़कें व अंतर्राष्ट्रीय महामार्ग) में वर्गीकृत किया गया है।
| सड़क श्रेणी | लंबाई 2020 में (कि.मी.) |
|---|---|
| राष्ट्रीय महामार्ग | 1,36,440 |
| राज्य महामार्ग | 1,76,818 |
| अन्य सड़कें | 59,02,539 |
| कुल | 62,15,797 |
स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, वार्षिक रिपोर्ट 2020-21 (तालिका 7.1)
हर साल लगभग 85% यात्री यातायात और 70% माल यातायात सड़कों से होता है, और छोटी दूरियों के लिए सड़क परिवहन सबसे अनुकूल है। यह आँकड़ा लगभग हर साल सीधे पूछा जाता है।
राष्ट्रीय महामार्ग (NH)
राष्ट्रीय महामार्ग केंद्र सरकार द्वारा निर्मित और अनुरक्षित मुख्य सड़कें हैं। ये अंतर्राज्यीय परिवहन तथा सामरिक क्षेत्रों तक रक्षा सामग्री व सेना के आवागमन का काम करती हैं, और राज्यों की राजधानियों, प्रमुख नगरों, महत्वपूर्ण बंदरगाहों तथा रेलवे जंक्शनों को जोड़ती हैं।
राष्ट्रीय महामार्गों की लंबाई 1951 में 19,700 कि.मी. से बढ़कर 2020 में 1,36,440 कि.मी. हो गई। ये भारत की कुल सड़क लंबाई का केवल लगभग 2% हैं, पर सड़क यातायात का 40% इन्हीं से होकर गुज़रता है।
शेरशाह सूरी ने अपने साम्राज्य को सुदृढ़ रखने के लिए सिंधु घाटी से बंगाल की सोनार घाटी तक शाही राजमार्ग बनवाया था। ब्रिटिश शासन में इसे ग्रांड ट्रंक (GT) रोड नाम दिया गया, जो कलकत्ता और पेशावर को जोड़ता था। आज यह अमृतसर से कोलकाता तक जाता है।
भारतीय राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण (NHAI) 1995 में कार्यरत हुआ। यह सतह परिवहन मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्तशासी निकाय है, जो राष्ट्रीय महामार्गों के विकास, अनुरक्षण और संचालन के लिए ज़िम्मेदार है, और इनकी गुणवत्ता सुधारने के लिए शीर्ष संस्था है।
स्वर्णिम चतुर्भुज
5,846 कि.मी. लंबा 4/6-लेन उच्च घनत्व यातायात गलियारा, जो भारत के चार सबसे बड़े महानगरों: दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ता है। इससे इन महानगरों के बीच आवागमन का समय, दूरी और लागत घटती है।
उत्तर-दक्षिण गलियारा
श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) को कन्याकुमारी (तमिलनाडु) से जोड़ता है, कोच्चि-सेलम स्पर सहित, कुल 4,076 कि.मी.।
पूर्व-पश्चिम गलियारा
सिलचर (असम) को बंदरगाह नगर पोरबंदर (गुजरात) से जोड़ता है, कुल 3,640 कि.मी.।
भारतमाला परियोजना के तहत लगभग 26,000 कि.मी. के आर्थिक गलियारे बनाए जा रहे हैं, जो स्वर्णिम चतुर्भुज व उत्तर-दक्षिण/पूर्व-पश्चिम गलियारों के साथ मिलकर भारत का अधिकांश सड़क माल यातायात संभालेंगे, साथ ही नगरों की भीड़ कम करने के लिए रिंग रोड और बाईपास भी।
राज्य महामार्ग, जिला सड़कें और ग्रामीण सड़कें
| सड़क प्रकार | निर्माण/अनुरक्षण किसके द्वारा | क्या जोड़ती हैं |
|---|---|---|
| राज्य महामार्ग | राज्य सरकारें | राज्य की राजधानी को जिला मुख्यालयों व अन्य महत्वपूर्ण नगरों से; राष्ट्रीय महामार्गों से जुड़ी |
| जिला सड़कें | जिला प्रशासन | जिला मुख्यालय को जिले के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों से |
| ग्रामीण सड़कें | स्थानीय/ग्रामीण निकाय | ग्रामीण क्षेत्रों के भीतर महत्वपूर्ण कड़ी |
भारत की कुल सड़क लंबाई का लगभग 80% ग्रामीण सड़कें हैं। इनका घनत्व क्षेत्र-दर-क्षेत्र इसलिए बदलता है क्योंकि यह भूभाग की प्रकृति पर निर्भर करता है।
अन्य सड़कें: सीमांत सड़कें और अंतर्राष्ट्रीय महामार्ग
सीमा सड़क संगठन (BRO) मई 1960 में स्थापित किया गया, ताकि भारत की उत्तरी और उत्तर-पूर्वी सीमा पर तेज़ व समन्वित सड़क-निर्माण से आर्थिक विकास को गति मिले और रक्षा तैयारी मज़बूत हो। यह एक अग्रणी बहुमुखी निर्माण अभिकरण है: इसने चंडीगढ़ को मनाली (हिमाचल प्रदेश) और लेह (लद्दाख) से जोड़ने वाली सड़क बनाई, जो समुद्र तल से औसतन 4,270 मीटर की ऊँचाई पर है, और यह ऊँचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात हटाने का काम भी करता है।
विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग, अटल टनल (9.02 कि.मी.), हिमालय की पीरपंजाल पर्वतमाला में 3,000 मीटर की ऊँचाई पर BRO ने बनाई है। यह मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से पूरे वर्ष जोड़ती है। पहले यह घाटी भारी हिमपात के कारण लगभग 6 महीने तक कटी रहती थी।
अंतर्राष्ट्रीय महामार्ग पड़ोसी देशों के साथ प्रभावी संपर्क देकर सद्भावपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देते हैं, जैसे वाघा बॉर्डर से होकर चलने वाली दिल्ली-लाहौर बस और बारामुला-मुज़फ़्फ़राबाद के बीच अमन सेतु।
3स्थल परिवहन: रेल
भारतीय रेल का जाल विश्व के सबसे लंबे रेल जालों में से एक है। यह माल और यात्री, दोनों का परिवहन करता है और आर्थिक वृद्धि में सीधा योगदान देता है। महात्मा गांधी ने कहा था कि रेलवे ने “विविध संस्कृति के लोगों को एक साथ लाकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया।”
भारतीय रेल देश का सबसे बड़ा सरकारी उपक्रम है। इसका आकार इतना विशाल है कि केंद्रीकृत प्रबंधन का दबाव कम करने के लिए इसे 17 मंडलों में बाँटा गया है।
| रेल मंडल | मुख्यालय |
|---|---|
| मध्य | मुंबई CST |
| पूर्व | कोलकाता |
| पूर्व मध्य | हाजीपुर |
| पूर्व तट | भुवनेश्वर |
| उत्तर | नई दिल्ली |
| उत्तर मध्य | प्रयागराज |
| पूर्वोत्तर | गोरखपुर |
| पूर्वोत्तर सीमांत | मालीगाँव (गुवाहाटी) |
| उत्तर पश्चिम | जयपुर |
| दक्षिण | चेन्नई |
| दक्षिण मध्य | सिकंदराबाद |
| दक्षिण पूर्व | कोलकाता |
| दक्षिण पूर्व मध्य | बिलासपुर |
| दक्षिण पश्चिम | हुबली |
| पश्चिम | मुंबई (चर्च गेट) |
| पश्चिम मध्य | जबलपुर |
| मेट्रो रेलवे | कोलकाता |
वाष्प इंजनों की जगह अब डीज़ल और विद्युत इंजन ले चुके हैं, जिससे गति और ढुलाई क्षमता दोनों बढ़ी हैं, और स्टेशनों के आसपास का पर्यावरण भी बेहतर हुआ है। मेट्रो रेल ने भारत के शहरी परिवहन में क्रांति ला दी है; डीज़ल बसों की जगह CNG वाहन और मेट्रो, दोनों मिलकर शहरी वायु प्रदूषण नियंत्रित करने में कदम हैं।
3.1 तीन गेज
रेलवे का गेज पटरी की दोनों पटरियों के बीच की दूरी है। भारतीय रेल में तीन गेज हैं: बड़ी लाइन, मीटर लाइन और छोटी लाइन।
लंबाई 2019-20 के अनुसार। छोटी लाइन आमतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित है। भारतीय रेल के पास मीटर व छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने का व्यापक कार्यक्रम है।
रोहा (महाराष्ट्र) से मंगलूरु (कर्नाटक) तक 760 कि.मी. लंबा रेल मार्ग, इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना: 146 नदियों को पार करते हुए लगभग 2,000 पुल और 91 सुरंगें, जिनमें एशिया की सबसे लंबी सुरंग (~6.5 कि.मी.) भी शामिल है। महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक इस परियोजना में भागीदार हैं।
ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में कच्चे माल व बागान क्षेत्र, पहाड़ी स्थल और छावनी क्षेत्र रेल से अच्छी तरह जुड़े थे, मुख्यतः संसाधनों के दोहन के लिए। स्वतंत्रता के बाद अन्य क्षेत्रों में भी रेलमार्गों का विस्तार हुआ: इसमें सबसे महत्वपूर्ण रहा कोंकण रेलवे, जो पश्चिमी तट पर मुंबई और मंगलूरु को सीधे जोड़ता है। फिर भी, पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, मध्य भारत और राजस्थान में रेल जाल अपेक्षाकृत कम सघन है।
4जल परिवहन
जल परिवहन परिवहन का सबसे सस्ता साधन है, जो भारी और स्थूल सामग्री ढोने के लिए सबसे उपयुक्त है, और यह ईंधन-कुशल तथा पर्यावरण-अनुकूल भी है। इसके दो प्रकार हैं: अंतःस्थलीय जलमार्ग और महासागरीय मार्ग।
4.1 अंतःस्थलीय जलमार्ग
रेलवे आने से पहले अंतःस्थलीय जलमार्ग परिवहन का प्रमुख साधन थे, पर बाद में इन्हें सड़क और रेल से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिली। सिंचाई के लिए नदी जल मोड़ने से भी कई हिस्से नौकायन-अयोग्य हो गए। आज भारत में 14,500 कि.मी. नौकायन-योग्य जलमार्ग हैं, जो देश के परिवहन में लगभग 1% योगदान देते हैं और इनमें नदियाँ, नहरें, पश्च जल (backwaters) व खाड़ियाँ शामिल हैं।
अंतःस्थलीय जलमार्ग प्राधिकरण 1986 में राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास, अनुरक्षण और नियमन के लिए स्थापित किया गया। राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत 111 अंतर्देशीय जलमार्गों (पहले घोषित 5 सहित) को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया।
राष्ट्रीय जलमार्ग (NW) किसी नदी, नहर या पश्च जल का वह भाग है जिसे भारत सरकार ने राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत अंतःस्थलीय जल परिवहन के विकास व नियमन के लिए उपयुक्त घोषित किया है।
| जलमार्ग | विस्तार | विशिष्टता |
|---|---|---|
| रा.ज.मा. 1 | प्रयागराज-हल्दिया (1,620 कि.मी.) | पटना तक यंत्रचालित नौकाएँ, हरिद्वार तक सामान्य नौकाएँ नौकायन-योग्य। तीन भाग: हल्दिया-फर्रक्का (560 कि.मी.), फर्रक्का-पटना (460 कि.मी.), पटना-प्रयागराज (600 कि.मी.) |
| रा.ज.मा. 2 | सादिया-धुबरी (891 कि.मी.) | ब्रह्मपुत्र नदी स्टीमर द्वारा डिब्रूगढ़ तक नौकायन-योग्य (1,384 कि.मी.); भारत और बांग्लादेश साझा करते हैं |
| रा.ज.मा. 3 | कोट्टापुरम-कोल्लम (205 कि.मी.) | 168 कि.मी. पश्चिमी तट नहर, साथ में चंपाकारा नहर (14 कि.मी.) और उद्योगमंडल नहर (23 कि.मी.) |
| रा.ज.मा. 4 | गोदावरी व कृष्णा नदी, पुद्दुचेरी विस्तार (1,078 कि.मी.) | कोकिनाडा नहरों के साथ |
| रा.ज.मा. 5 | ब्राह्मणी नदी विस्तार (588 कि.मी.) | मातई नदी, महानदी-ब्राह्मणी डेल्टा चैनल और पूर्वी तटीय नहरों सहित |
स्रोत: वार्षिक रिपोर्ट, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, 2022-23 (तालिका 7.3)। अंतःस्थलीय जलमार्ग प्राधिकरण ने उन्नयन के लिए 10 और जलमार्ग चिह्नित किए हैं।
केरल के पश्च जल (कयाल) का अंतःस्थलीय जलमार्गों में विशेष महत्व है: सस्ता परिवहन देने के साथ-साथ ये भारी संख्या में पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं। प्रसिद्ध नेहरू ट्रॉफी नौका दौड़ (वल्लमकली) इन्हीं पश्च जल पर आयोजित होती है।
4.2 महासागरीय मार्ग
भारत की तटरेखा, द्वीपों सहित, लगभग 7,517 कि.मी. लंबी है, जहाँ 12 प्रमुख और 200 गौण पत्तन स्थित हैं। महासागरीय मार्गों से भारत का लगभग 95% विदेशी व्यापार भार से और 70% मूल्य से होता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के अलावा इन मार्गों का उपयोग द्वीपों और शेष देश के बीच सामान ले जाने में भी होता है।
5वायु परिवहन
वायु परिवहन आवागमन का सबसे तेज़ साधन है, जो यात्रा का समय घटाकर दूरी को छोटा कर देता है। भारत जैसे विशाल देश के लिए, जहाँ दूरियाँ बहुत लंबी हैं और भूभाग व जलवायु विविध हैं, यह आवश्यक है।
भारत में वायु परिवहन की शुरुआत 1911 में हुई, जब प्रयागराज और नैनी के बीच केवल 10 कि.मी. की दूरी पर हवाई डाक सेवा शुरू हुई। इसका वास्तविक विकास स्वतंत्रता के बाद हुआ। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) भारतीय वायुक्षेत्र में सुरक्षित, सक्षम वायु यातायात और वैमानिकी संचार सेवाएँ देने के लिए उत्तरदायी है।
उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक), नागर विमानन मंत्रालय की क्षेत्रीय संपर्क योजना (RCS) के रूप में चलाई जाने वाली, विश्व की अपनी तरह की पहली योजना है, जो नीतियों और प्रोत्साहनों के ज़रिए एयरलाइनों को क्षेत्रीय व सुदूर मार्गों पर उड़ान भरने के लिए प्रेरित करके क्षेत्रीय विमानन बाज़ार को गति देती है और आम नागरिक के लिए हवाई यात्रा किफायती बनाती है।
पवन हंस एक हेलीकॉप्टर सेवा है जो देश के पर्वतीय, पूर्वोत्तर क्षेत्रों में पर्यटकों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग की जाती है; यह पेट्रोलियम क्षेत्र और सामान्य रूप से पर्यटन की भी सेवा करती है।
6तेल तथा गैस पाइपलाइन
पाइपलाइन लंबी दूरी तक तरल और गैस ले जाने का सबसे सुविधाजनक व सक्षम साधन है। ठोस पदार्थ को भी घोल (slurry) में बदलकर पाइपलाइन से भेजा जा सकता है।

इस HVJ पाइपलाइन ने भारतीय गैस बाज़ार को गति दी। कुल मिलाकर, भारत का गैस पाइपलाइन बुनियादी ढाँचा दस गुना से भी अधिक बढ़कर 1,700 कि.मी. से 18,500 कि.मी. तक पहुँच गया है, और जल्द ही यह देश भर के सभी गैस स्रोतों व उपभोक्ता बाज़ारों को जोड़ने वाली गैस ग्रिड के रूप में 34,000 कि.मी. से अधिक तक पहुँचने की उम्मीद है, जिसमें पूर्वोत्तर राज्य भी शामिल होंगे।
7संचार तंत्र
समय के साथ मनुष्य ने संचार के कई तरीके अपनाए हैं: ढोल या खोखले वृक्ष तने बजाना, धुआँ या आग के संकेत, और तेज़ दौड़ने वाले लोग, घोड़े, ऊँट, कुत्ते व पक्षी संदेश ले जाने के लिए। शुरुआत में परिवहन के साधन ही अक्सर संचार के साधन भी होते थे। डाकघर, तार, मुद्रण प्रेस, दूरभाष और उपग्रह के आविष्कार ने, विज्ञान-प्रौद्योगिकी की प्रगति से प्रेरित होकर, संचार को कहीं तेज़ और आसान बना दिया।
मापदंड और गुणवत्ता के आधार पर संचार के साधन दो श्रेणियों में आते हैं: वैयक्तिक संचार तंत्र, जैसे इंटरनेट और ई-मेल से एक-से-एक संपर्क, और सामूहिक संचार तंत्र, जो रेडियो, टेलीविज़न और उपग्रहों के ज़रिए एक साथ बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचता है।
7.1 वैयक्तिक संचार: इंटरनेट
वैयक्तिक संचार तंत्रों में इंटरनेट सबसे प्रभावी और अधुनातन है, जो नगरीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। यह उपयोगकर्ता को ई-मेल के ज़रिए प्रत्यक्ष संपर्क देता है, दुनिया भर के ज्ञान तक पहुँच देता है, और ई-कॉमर्स व मौद्रिक लेन-देन के लिए भी उपयोग किया जाता है: आँकड़ों का एक विशाल केंद्रीय भंडारागार, जो कम लागत में सूचना तक कुशल पहुँच देता है।
7.2 सामूहिक संचार: रेडियो
ऑल इंडिया रेडियो सूचना, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़े कार्यक्रम प्रसारित करता है, साथ ही संसद और राज्य विधानसभाओं के सत्रों जैसे विशेष अवसरों पर समाचार बुलेटिन भी।
7.3 सामूहिक संचार: टेलीविज़न
7.4 उपग्रह संचार
उपग्रह स्वयं में संचार का एक साधन हैं, और ये संचार के अन्य साधनों का नियमन भी करते हैं। उपग्रहों से किसी बड़े क्षेत्र का सतत और समग्र दृश्य मिलने के कारण उपग्रह संचार आर्थिक और सामरिक कारणों से बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, जिसका उपयोग मौसम पूर्वानुमान, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी और सीमा क्षेत्रों की चौकसी के लिए किया जाता है।
समाकृति और उद्देश्य के आधार पर भारत के उपग्रह तंत्र दो समूहों में बँटे हैं: इंडियन नेशनल सेटेलाइट सिस्टम (इनसैट), एक बहुउद्देश्यीय उपग्रह प्रणाली जो दूरसंचार, मौसम विज्ञान अवलोकन और अन्य विविध आँकड़ों-कार्यक्रमों के लिए है; और इंडियन रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट सिस्टम (IRS), जो कई वर्णक्रमीय बैंडों में आँकड़े एकत्र कर विविध उपयोगों के लिए भू-स्टेशनों को भेजता है।
हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय दूर संवेदन केंद्र (NRSC) इन आँकड़ों के अधिग्रहण और प्रक्रमण की सुविधा देता है, जो प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में बहुत उपयोगी है।
- परिवहन सामान, लोगों व सामग्री को ले जाता है; संचार विचारों, दृष्टिकोण व संदेशों को। स्थल, जल और वायु परिवहन के तीन प्रमुख साधन हैं।
- सड़कें: कुल ~62.16 लाख कि.मी. (2020)। राष्ट्रीय महामार्ग लंबाई का 2% पर 40% यातायात; 19,700 कि.मी. (1951) से 1,36,440 कि.मी. (2020) तक बढ़े। NHAI (1995) NH का विकास व अनुरक्षण करता है।
- स्वर्णिम चतुर्भुज (5,846 कि.मी., दिल्ली-मुंबई-चेन्नई-कोलकाता), उत्तर-दक्षिण गलियारा (4,076 कि.मी.), पूर्व-पश्चिम गलियारा (3,640 कि.मी.); भारतमाला परियोजना ~26,000 कि.मी. आर्थिक गलियारे जोड़ती है।
- BRO (स्थापना मई 1960) सामरिक सीमा सड़कें बनाता व अनुरक्षित करता है, जिसमें अटल टनल (9.02 कि.मी., विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग) शामिल है।
- ग्रामीण सड़कें = कुल सड़क लंबाई का ~80%। राज्य/जिला/ग्रामीण सड़कों का अपना अलग स्तर, राष्ट्रीय महामार्ग के नीचे।
- रेल: शुरुआत 1853 (मुंबई-थाणे, 34 कि.मी.); 67,956 कि.मी. जाल (2019-20); 17 मंडल; तीन गेज (बड़ी लाइन 1.676 मी./63,950 कि.मी. प्रमुख); कोंकण रेलवे (1998, 760 कि.मी., रोहा-मंगलूरु) स्वतंत्रता के बाद की सबसे बड़ी रेल उपलब्धि है।
- जल परिवहन सबसे सस्ता व पर्यावरण-अनुकूल है: अंतःस्थलीय जलमार्ग (14,500 कि.मी. नौकायन-योग्य; 2016 अधिनियम के तहत 111 राष्ट्रीय जलमार्ग) और महासागरीय मार्ग (7,517 कि.मी. तटरेखा; भार से 95% विदेशी व्यापार समुद्र से)।
- वायु परिवहन सबसे तेज़ साधन है; शुरुआत 1911 (प्रयागराज-नैनी हवाई डाक)। AAI वायु यातायात नियंत्रण चलाता है; उड़ान/RCS क्षेत्रीय उड़ान किफायती बनाती है; पवन हंस हेलीकॉप्टर सेवाएँ चलाता है।
- पाइपलाइन तरल, गैस और घोल के रूप में ठोस भी ढोती है। OIL (1959) ने एशिया की पहली अंतर्देशीय पाइपलाइन (नहरकटिया-बरौनी, 1,157 कि.मी.) बनाई। गेल (1984) ने HVJ पाइपलाइन बनाई; गैस बुनियादी ढाँचा 1,700 कि.मी. से 18,500 कि.मी. हुआ, लक्ष्य 34,000 कि.मी. की गैस ग्रिड।
- संचार वैयक्तिक (इंटरनेट) या सामूहिक (रेडियो, टी.वी., उपग्रह) है। रेडियो: 1923 से आकाशवानी (1957) तक। टी.वी.: 1959 से दूरदर्शन (1976) और इनसैट-1A के बाद CNP। उपग्रह: इनसैट (1983, बहुउद्देश्यीय) और IRS (IRS-1A, मार्च 1988, भारत के अपने PSLV से); NRSC (हैदराबाद) रिमोट सेंसिंग आँकड़े प्रक्रमित करता है।
- 1 अंकपरिवहन और संचार को परिभाषित करें।
- 1 अंकभारतीय रेल प्रणाली को कितने मंडलों में बाँटा गया है?
- 1 अंकभारत में रेडियो प्रसारण किस वर्ष और किसके द्वारा शुरू हुआ?
- 1 अंकजल परिवहन के दो प्रकारों के नाम बताएँ।
- 1 अंक‘उड़ान’ का पूरा नाम क्या है?
- 1 अंकसमाकृति व उद्देश्य के आधार पर भारत के दो उपग्रह तंत्रों के नाम बताएँ।
- 1 अंकअटल टनल किस संगठन ने बनाई?
- 1 अंकसीमा सड़क संगठन की स्थापना किस वर्ष हुई?
- 3 अंकपरिवहन किन क्रियाकलापों को अभिव्यक्त करता है? परिवहन के तीन प्रमुख साधनों के नाम बताएँ।
- 3 अंकपाइपलाइन परिवहन के लाभ और हानि पर चर्चा करें।
- 2 अंक‘संचार’ से आपका क्या तात्पर्य है? इसकी दो व्यापक श्रेणियाँ बताएँ।
- 2 अंकबड़ी लाइन और छोटी लाइन रेल पटरियों में अंतर स्पष्ट करें।
- 3 अंकभारतीय राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण क्या है, और यह किसके लिए उत्तरदायी है?
- 2 अंकराष्ट्रीय महामार्ग और राज्य महामार्ग में अंतर स्पष्ट करें।
- 3 अंकभारत में जल परिवहन को सबसे सस्ता साधन क्यों माना जाता है?
- 2 अंकस्वर्णिम चतुर्भुज क्या है? यह किन चार नगरों को जोड़ता है?
- 3 अंकभारत में सीमा सड़क संगठन की भूमिका स्पष्ट करें।
- 2 अंकद्वितीय विश्व युद्ध से पहले भारत में आधुनिक सड़क परिवहन सीमित क्यों रहा?
- 3 अंकउड़ान क्या है? इसका केंद्रीय विचार क्या है?
- 2 अंकभारत के किन्हीं दो राष्ट्रीय जलमार्गों के नाम बताएँ, साथ ही प्रत्येक का विस्तार भी।
- 5 अंकभारत में परिवहन के प्रमुख साधन कौन-कौन से हैं? इनके विकास को प्रभावित करने वाले कारकों पर चर्चा करें।
- 5 अंकभारत में रेलवे के विकास का विस्तृत विवरण दें और इसका महत्व स्पष्ट करें।
- 5 अंकभारत के आर्थिक विकास में सड़कों की भूमिका का वर्णन करें।
- 5 अंकस्वर्णिम चतुर्भुज तथा उत्तर-दक्षिण/पूर्व-पश्चिम गलियारों के संदर्भ में भारत के सड़क जाल के विकास का वर्णन करें।
- 5 अंकउदाहरणों सहित भारत में तेल व गैस पाइपलाइनों के विकास को स्पष्ट करें।
- 5 अंकरेडियो, टेलीविज़न और उपग्रहों के माध्यम से भारत में सामूहिक संचार के विकास पर चर्चा करें।
- 1 अंकभारतीय रेल प्रणाली को कितने मंडलों में विभाजित किया गया है?
(क) 9(ख) 12(ग) 17(घ) 14 - 1 अंकराष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1 किस नदी पर, और किन दो स्थानों के बीच है?
(क) ब्रह्मपुत्र, सादिया-धुबरी(ख) गंगा, हल्दिया-प्रयागराज
(ग) पश्चिमी तट नहर, कोट्टापुरम-कोल्लम(घ) गोदावरी-काकीनाडा, पुडुच्चेरी - 1 अंकभारत में पहला रेडियो कार्यक्रम किस वर्ष प्रसारित हुआ था?
(क) 1911(ख) 1936(ग) 1927(घ) 1923 - 1 अंकबड़ी लाइन में दोनों पटरियों के बीच की दूरी कितनी होती है?
(क) 1 मीटर(ख) 1.676 मीटर(ग) 0.762 मीटर(घ) 0.610 मीटर - 1 अंकस्वर्णिम चतुर्भुज किन नगरों को जोड़ता है?
(क) दिल्ली-मुंबई-चेन्नई-कोलकाता(ख) श्रीनगर-कन्याकुमारी
(ग) सिलचर-पोरबंदर(घ) अमृतसर-कोलकाता - 1 अंककोंकण रेलवे किन्हें जोड़ता है?
(क) रोहा को मंगलूरु से(ख) बंबई को थाणे से
(ग) दिल्ली को कोलकाता से(घ) चंडीगढ़ को लेह से - 1 अंकदूरदर्शन को ऑल इंडिया रेडियो से अलग पहचान किस वर्ष मिली?
(क) 1959(ख) 1972(ग) 1976(घ) 1983 - 1 अंकऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा बनाई गई एशिया की पहली अंतर्देशीय पाइपलाइन किन स्थानों के बीच थी?
(क) नहरकटिया और बरौनी(ख) हजीरा और जगदीशपुर
(ग) मुंबई हाई और बेसीन(घ) रोहा और मंगलूरु
कारण (R): राष्ट्रीय महामार्ग भारत की कुल सड़क लंबाई का केवल लगभग 2% हैं।
कारण (R): जल परिवहन ईंधन-कुशल है और भारी, स्थूल सामग्री ढोने के लिए सबसे उपयुक्त है।
कारण (R): इतने बड़े जाल को बाँटने से केंद्रीकृत रेल प्रबंधन का दबाव कम हो जाता है।
कारण (R): उड़ान नीतियों और प्रोत्साहनों के ज़रिए एयरलाइनों को क्षेत्रीय व सुदूर मार्गों पर उड़ान भरने के लिए प्रेरित करती है।