इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार किसे कहते हैं?
उत्तर: दो या दो से अधिक देशों के बीच होने वाले व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं।
प्र. 1950-51 में भारत के वैदेशिक व्यापार का मूल्य कितना था?
उत्तर: 1950-51 में भारत के वैदेशिक व्यापार का मूल्य 1,214 करोड़ रुपए था।
प्र. 2021-22 में भारत के कुल निर्यात मूल्य में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी कितनी थी?
उत्तर: 2021-22 में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी भारत के कुल निर्यात मूल्य का 67.8 प्रतिशत थी।
प्र. वर्तमान में भारत में कितने प्रमुख पत्तन हैं?
उत्तर: वर्तमान में भारत में 12 प्रमुख पत्तन हैं (तथा 200 छोटे या मझोले पत्तन भी हैं)।
प्र. विभाजन के बाद भारत के कौन-से दो पत्तन अलग हो गए?
उत्तर: विभाजन के बाद कराची पत्तन पाकिस्तान में और चिटगाँव पत्तन तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में चला गया।
प्र. मुरगांव पत्तन को 1961 में किस खनिज के निर्यात के लिए, और किस देश को, पुनर्प्रतिरूपित किया गया?
उत्तर: लौह-अयस्क, जापान को निर्यात के लिए।
प्र. उड़ान योजना कब से लागू है, तथा इसके तहत कितने हवाई अड्डे चालू किए गए?
उत्तर: उड़ान योजना 2017 से लागू है; इसके तहत 9 हेलीपोर्ट और 2 जल हवाई अड्डों सहित कुल 73 असेवित/अल्पसेवित हवाई अड्डे चालू किए गए हैं।
प्र. चेन्नई पत्तन का निर्माण किस वर्ष हुआ था?
उत्तर: चेन्नई पत्तन, जो एक कृत्रिम पत्तन है, का निर्माण 1859 में हुआ था।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. पत्तन और पोताश्रय में अंतर बताइए।
उत्तर: पोताश्रय (हार्बर) समुद्र या नदी का वह आश्रित भाग है जो जहाज़ों को सुरक्षित लंगर डालने की सुविधा देता है, जो प्राकृतिक (जैसे मुंबई, कोच्चि) या कृत्रिम (जैसे चेन्नई) हो सकता है। पत्तन (पोर्ट) एक विकसित पोताश्रय है जिसमें गोदी, क्रेन, गोदाम आदि अवसंरचना जुड़ी होती है, जहाँ माल व यात्रियों की लदाई-उतराई होती है।
प्र. पृष्ठप्रदेश के अर्थ को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पृष्ठप्रदेश (हिंटरलैंड) किसी पत्तन से जुड़ा वह भीतरी क्षेत्र है जिसकी आयात-निर्यात संबंधी सेवाएँ वह पत्तन प्रदान करता है। पुस्तक के अनुसार पृष्ठप्रदेश की सीमा तय करना कठिन है क्योंकि यह क्षेत्र पर सुस्थिर नहीं होता, और एक पत्तन का पृष्ठप्रदेश दूसरे पत्तन के पृष्ठप्रदेश से अतिव्यापन (ओवरलैप) कर सकता है।
प्र. भारत का व्यापार घाटा (व्यापार असंतुलन) क्यों बना रहता है?
उत्तर: पुस्तक के अनुसार तालिका 8.1 में दिए गए सभी वर्षों में भारत के आयात का मूल्य निर्यात के मूल्य से अधिक रहा है (जैसे 2021-22 में आयात 45,72,775 करोड़ बनाम निर्यात 31,47,021 करोड़ रुपए), जिससे भारत का व्यापार घाटा लगातार बना रहता है।
प्र. भारत के पूर्वी तट पर स्थित पत्तनों के नाम बताइए।
उत्तर: भारत के पूर्वी तट पर स्थित पत्तन हैं: कोलकाता (श्यामा प्रसाद मुखर्जी), हल्दिया, पारादीप, विशाखापट्नम, चेन्नई, कामराजार (एन्नोर) तथा वी.ओ. चिदंबरनार (तूतीकोरिन)।
प्र. 1973 के ऊर्जा संकट का भारत के आयात व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: 1973 में आए ऊर्जा संकट से पेट्रोलियम (पदार्थों) के मूल्य में उछाल आया, जिससे आयात बजट भी बढ़ गया। खाद्यान्नों के आयात की जगह उर्वरकों एवं पेट्रोलियम ने ले ली।
प्र. किन वस्तुओं के निर्यात में हाल के वर्षों में वृद्धि दर्ज की गई है?
उत्तर: काजू जैसी पारंपरिक वस्तुओं के निर्यात में गिरावट के बावजूद, फूलों की खेती से जुड़े उत्पादों (पुष्पोत्पादन), ताज़े फल, समुद्री उत्पाद तथा चीनी के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है।
प्र. भारत ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बढ़ाने के लिए कौन-से उपाय अपनाने शुरू किए हैं?
उत्तर: भारत का उद्देश्य अगले पाँच वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अपनी हिस्सेदारी दुगुनी करना है। इसके लिए आयात उदारीकरण, आयात करों में कमी, डि-लाइसेंसिंग (विअनुज्ञाकरण) तथा प्रक्रिया से उत्पाद के एकस्व (पेटेंट) में बदलाव जैसे अनुकूल उपाय अपनाने शुरू किए गए हैं।
प्र. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वायु परिवहन के लाभ व हानि बताइए।
उत्तर: लाभ: वायु परिवहन लंबी दूरी पर उच्च मूल्य या नाशवान सामानों को कम से कम समय में ले जाने व निपटाने में सक्षम है। हानि: यह भारी और स्थूल वस्तुओं के वहन के लिए बहुत महँगा और अनुपयुक्त होता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में इसकी भागीदारी महासागरीय मार्गों की तुलना में कम रहती है।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. तालिका 8.2 के आधार पर भारत के निर्यात संघटन में 2015-16 से 2021-22 के बीच आए परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: तालिका 8.2 के अनुसार भारत के निर्यात संघटन में निम्न परिवर्तन आए हैं: (1) कृषि एवं समवर्गी उत्पादों की हिस्सेदारी 12.6% (2015-16) से घटकर 11.9% (2021-22) रह गई। (2) विनिर्मित वस्तुओं की हिस्सेदारी 72.9% से घटकर 67.8% हो गई। (3) पेट्रोलियम व अपरिष्कृत उत्पादों की हिस्सेदारी 11.9% से बढ़कर 16.4% हो गई। (4) अन्य वस्तुओं की हिस्सेदारी 1.1% से बढ़कर 1.9% हो गई। (5) अयस्क एवं खनिज की हिस्सेदारी (1.6% से 2.0%) काफ़ी हद तक स्थिर रही। इस प्रकार कृषि व विनिर्माण की हिस्सेदारी घटी है, जबकि पेट्रोलियम व अन्य वस्तुओं की हिस्सेदारी बढ़ी है।
प्र. भारत के आयात व्यापार की संरचना में समय के साथ आए बदलावों की विवेचना कीजिए।
उत्तर: 1950-60 के दशकों में खाद्यान्न, पूँजीगत माल, मशीनरी व उपस्कर भारत के प्रमुख आयात थे और भुगतान संतुलन प्रतिकूल था, क्योंकि आयात प्रतिस्थापन के सभी प्रयासों के बावजूद आयात निर्यातों से अधिक थे। 1970 के दशक के बाद हरित क्रांति की सफलता से खाद्यान्न आयात बंद हुआ, परंतु 1973 के ऊर्जा संकट से पेट्रोलियम के मूल्यों में उछाल आया और आयात बजट बढ़ गया; खाद्यान्न आयात की जगह उर्वरक व पेट्रोलियम ने ले ली। वर्तमान में मशीन-उपस्कर, विशेष स्टील, खाद्य तेल व रसायन प्रमुख आयात वस्तुएँ हैं, जबकि पूँजीगत वस्तुओं के आयात में निरंतर गिरावट रही है। तालिका 8.4 के अनुसार ईंधन (कोयला, पीओएल) की हिस्सेदारी 2015-16 के 25.4% से बढ़कर 2021-22 में 31.6% हो गई है, जो पेट्रोलियम आयात पर बढ़ती निर्भरता दर्शाता है।
प्र. पश्चिमी तट के किन्हीं चार प्रमुख पत्तनों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर: (1) दीनदयाल (कांडला) पत्तन: कच्छ की खाड़ी के मुहाने पर, पश्चिमी व उत्तर-पश्चिमी भारत की ज़रूरतें पूरा करता है, पेट्रोलियम व उर्वरक ग्रहण करने हेतु बनाया गया। (2) मुंबई पत्तन: प्राकृतिक पत्तन, देश का सबसे बड़ा पत्तन, 54 गोदियों व देश के सबसे बड़े तेल टर्मिनल सहित। (3) जवाहरलाल नेहरू पत्तन (न्हावा-शेवा): मुंबई का दबाव कम करने हेतु अनुषंगी पत्तन, भारत का विशालतम कंटेनर पत्तन। (4) मुरगांव पत्तन: गोवा में जुआरी नदमुख पर प्राकृतिक बंदरगाह, 1961 में जापान को लौह-अयस्क निर्यात हेतु पुनर्प्रतिरूपित।
प्र. पूर्वी तट के किन्हीं चार प्रमुख पत्तनों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर: (1) कोलकाता (श्यामा प्रसाद मुखर्जी) पत्तन: हुगली नदी पर, ब्रिटिश काल में विकसित, गाद की समस्या व निर्यात के दिक्परिवर्तन से महत्त्व कम हुआ। (2) हल्दिया पत्तन: कोलकाता से 105 कि.मी. डाउनस्ट्रीम, कोलकाता का दबाव कम करने हेतु बना, लौह-अयस्क, कोयला व पेट्रोलियम उत्पाद निपटाता है। (3) पारादीप पत्तन: महानदी डेल्टा पर, सबसे गहरा पोताश्रय, मुख्यतः लौह-अयस्क के बड़े पैमाने पर निर्यात हेतु विकसित। (4) विशाखापट्नम पत्तन: आंध्र प्रदेश का भू-आबद्ध पत्तन, चट्टान काटकर बनाई गई नहर से समुद्र से जुड़ा, लौह-अयस्क व पेट्रोलियम का निपटान करता है।
प्र. स्वतंत्रता के बाद भारतीय पत्तनों के विकास व प्रबंधन में क्या बदलाव आए हैं?
उत्तर: स्वतंत्रता के बाद भारतीय पत्तन निरंतर वृद्धि कर रहे हैं और आधुनिक अवसंरचना से लैस हो रहे हैं। पहले पत्तनों के विकास व आधुनिकीकरण की ज़िम्मेदारी सरकारी अभिकरणों पर थी, परंतु काम बढ़ने और पत्तनों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के समकक्ष लाने की आवश्यकता के चलते अब निजी उद्यमियों को भी आमंत्रित किया गया है। प्रमुख पत्तनों (12) की नीति व नियामक कार्य केंद्र सरकार तय करती है, जबकि छोटे/मझोले पत्तनों (200) की नीति राज्य सरकारें तय करती हैं। पत्तन क्षमता भी 1951 के 20 मिलियन टन से बढ़कर 2016 में 837 मिलियन टन से अधिक हो गई है।
प्र. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में हवाई अड्डों व वायु परिवहन की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: वायु परिवहन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेषकर उच्च मूल्य या नाशवान वस्तुओं के लिए, जिन्हें लंबी दूरी तक कम से कम समय में ले जाया जा सकता है। वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 के अनुसार देश में 25 मुख्य हवाई अड्डे कार्यरत थे (अहमदाबाद, बेंगलूरु, चेन्नई, दिल्ली आदि सहित)। 2017 से उड़ान योजना के तहत 9 हेलीपोर्ट व 2 जल हवाई अड्डों सहित 73 असेवित/अल्पसेवित हवाई अड्डे चालू किए गए हैं, जिससे हवाई संपर्क का विस्तार हुआ है। परंतु भारी व स्थूल वस्तुओं के लिए यह महँगा व अनुपयुक्त होने से इसकी भागीदारी महासागरीय मार्गों से कम रहती है।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. भारत में निर्यात और आयात व्यापार के संयोजन का वर्णन कीजिए।
उत्तर: निर्यात संयोजन (तालिका 8.2, 8.3): भारत के निर्यात में विनिर्मित वस्तुओं की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है (2021-22 में 67.8%, मूल्य 21,32,296 करोड़ रुपए), जिसमें इंजीनियरिंग वस्तुओं व रत्न-आभूषण का बड़ा योगदान है, हालाँकि चीन व पूर्वी एशियाई देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा है। कृषि एवं समवर्गी उत्पाद (11.9%, मूल्य 3,75,742 करोड़) पेट्रोलियम व अपरिष्कृत उत्पादों (16.4%) के बाद तीसरे स्थान पर हैं, जिसमें काजू जैसी पारंपरिक वस्तुओं में गिरावट व फूलों/ताज़े फल/समुद्री उत्पाद/चीनी में वृद्धि हुई है। पेट्रोलियम व अपरिष्कृत उत्पादों (16.4%) की हिस्सेदारी बढ़ी है, जबकि अयस्क-खनिज (2.0%) की हिस्सेदारी स्थिर रही है।
आयात संयोजन (तालिका 8.4, 8.5): ‘अन्य’ (38.5%) को छोड़कर सबसे बड़ी हिस्सेदारी ईंधन (कोयला, पीओएल) की है (2021-22 में 31.6%), इसके बाद पूँजीगत वस्तुएँ (10.1%, लगातार घटती हुई), फिर उर्वरक व खाद्य-संबंधित वस्तुएँ। तालिका 8.5 के अनुसार पेट्रोलियम एवं उत्पाद (12,07,803 करोड़ रुपए) सबसे बड़ी आयात वस्तु है, इसके बाद अलौह धातुएँ, रासायनिक उत्पाद तथा मोती व बहुमूल्य रत्न आते हैं। इस प्रकार आयात मूल्य निर्यात से हमेशा अधिक रहा है, जिससे व्यापार घाटा (2021-22 में -14,25,753 करोड़ रुपए) बना रहता है।
प्र. भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रकृति पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: स्वतंत्रता के बाद से भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार ने मात्रा, संघटन तथा दिशा तीनों में आमूल परिवर्तन का अनुभव किया है। मात्रा में, वैदेशिक व्यापार 1950-51 के ₹1,214 करोड़ से बढ़कर 2021-22 में ₹77,19,796 करोड़ हो गया, जिसका मुख्य कारण विनिर्माण क्षेत्र की गतिशील उठान, सरकार की उदार नीतियाँ तथा बाज़ारों की विविधरूपता है। संघटन में, निर्यात में कृषि व विनिर्माण की हिस्सेदारी घटी और पेट्रोलियम व अन्य वस्तुओं की बढ़ी है; आयात में खाद्यान्नों के आयात की जगह उर्वरकों एवं पेट्रोलियम ने ले ली, जबकि पूँजीगत वस्तुओं के आयात में लगातार गिरावट बनी रही। दिशा में, भारत के अब विश्व के अधिकांश देशों व प्रमुख व्यापारिक गुटों (विशेषकर एशिया व आसियान, जिसका 2021-22 में आयात व्यापार 29,18,577 करोड़ रुपए का था) से व्यापारिक संबंध हैं। भारत का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में विश्व व्यापार में अपनी हिस्सेदारी (वर्तमान में मात्र ~1%) दुगुनी करना है, जिसके लिए आयात उदारीकरण, आयात करों में कटौती, लाइसेंस-मुक्ति तथा प्रक्रिया पेटेंट से उत्पाद पेटेंट की ओर बदलाव जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। फिर भी आयात सदैव निर्यात से अधिक रहने के कारण व्यापार घाटा एक स्थायी चुनौती बना हुआ है।
प्र. भारत के प्रमुख पत्तनों का वर्णन करते हुए बताइए कि वे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में गेटवे की भूमिका कैसे निभाते हैं।
उत्तर: भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और लंबी तटरेखा के कारण भारत में 12 प्रमुख तथा 200 छोटे/मझोले पत्तन विकसित हुए हैं। यूरोपीय व्यापारियों के आगमन व ब्रिटिश उपनिवेशीकरण के बाद पत्तन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार के रूप में महत्त्वपूर्ण बने; अंग्रेज़ों ने इन्हें पृष्ठप्रदेशों के संसाधनों के अवशोषण केंद्र के रूप में उपयोग किया और रेलवे विस्तार ने स्थानीय से लेकर अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक जोड़ने की सुगमता दी। पश्चिमी तट पर दीनदयाल (कांडला), मुंबई, जवाहरलाल नेहरू (न्हावा-शेवा), मुरगांव, न्यू मंगलौर व कोच्चि पत्तन स्थित हैं, जबकि पूर्वी तट पर कोलकाता (अनुषंगी पत्तन हल्दिया सहित), पारादीप, विशाखापट्नम, चेन्नई, कामराजार (एन्नोर) व वी.ओ. चिदंबरनार (तूतीकोरिन) स्थित हैं – रोचक तथ्य यह है कि पश्चिमी तट पर पूर्वी तट से अधिक पत्तन हैं। विभाजन में कराची व चिटगाँव पत्तनों की हानि के बाद कांडला व डायमंड हार्बर जैसे नए पत्तन विकसित किए गए। आज़ादी के बाद पत्तन क्षमता 1951 के 20 मिलियन टन से बढ़कर 2016 में 837+ मिलियन टन हो गई है, और अब निजी उद्यमियों को भी पत्तनों के आधुनिकीकरण में आमंत्रित किया जा रहा है, जिससे ये पत्तन भारत के बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रभावी प्रवेश द्वार बने हुए हैं।
प्र. तालिका 8.6 के आधार पर भारत के आयात व्यापार की दिशा का वर्णन कीजिए तथा भारत के भावी व्यापार लक्ष्यों व उपायों की चर्चा कीजिए।
उत्तर: तालिका 8.6 के अनुसार भारत के व्यापारिक संबंध विश्व के अधिकांश देशों व प्रमुख व्यापारिक गुटों से हैं। 2021-22 में क्षेत्र-वार आयात इस प्रकार था: एशिया एवं आसियान से सबसे अधिक (29,18,577 करोड़ रुपए), इसके बाद यूरोप (6,40,577 करोड़), उत्तरी अमेरिका (3,78,041 करोड़), अफ्रीका (3,68,156 करोड़) तथा लैटिन अमेरिका (1,61,995 करोड़ रुपए) से सबसे कम। 2016-17 से 2021-22 के बीच सभी क्षेत्रों से आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो भारत की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय व्यापार-निर्भरता दर्शाता है। भारत का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में विश्व व्यापार में अपनी हिस्सेदारी दुगुनी करना है, जिसके लिए आयात उदारीकरण, आयात करों में कमी, डि-लाइसेंसिंग (विअनुज्ञाकरण) तथा प्रक्रिया-पेटेंट से उत्पाद-पेटेंट में बदलाव जैसे अनुकूल उपाय पहले से अपनाए जाने शुरू कर दिए गए हैं।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक 1950-51 में भारत के वैदेशिक व्यापार का मूल्य कितना था?
उत्तर: 1,214 करोड़ रुपए।
(ख) 1 अंक 2021-22 में भारत का व्यापार संतुलन (व्यापार घाटा) कितना था?
उत्तर: -14,25,753 करोड़ रुपए।
(ग) 2 अंक गद्यांश के अनुसार भारत के वैदेशिक व्यापार में तीव्र वृद्धि के क्या कारण बताए गए हैं?
उत्तर: गद्यांश के अनुसार इस तीव्र वृद्धि के कारण हैं: विनिर्माण के क्षेत्र में संवेगी (गतिशील) उठान, सरकार की उदार नीतियाँ, तथा बाज़ारों की विविधरूपता।
(क) 1 अंक वार्षिक रिपोर्ट 2016-17 के अनुसार देश में कितने मुख्य हवाई अड्डे कार्यरत थे?
उत्तर: 25 मुख्य हवाई अड्डे।
(ख) 1 अंक उड़ान योजना के तहत कुल कितने असेवित/अल्पसेवित हवाई अड्डे चालू किए गए हैं?
उत्तर: 9 हेलीपोर्ट और 2 जल हवाई अड्डों सहित कुल 73 हवाई अड्डे।
(ग) 2 अंक गद्यांश के अनुसार वायु परिवहन के क्या लाभ व हानियाँ हैं?
उत्तर: गद्यांश के अनुसार वायु परिवहन का लाभ यह है कि यह लंबी दूरी पर उच्च मूल्य वाले या नाशवान सामानों को कम से कम समय में ले जा सकता है। हानि यह है कि यह भारी व स्थूल वस्तुओं के वहन के लिए बहुत महँगा और अनुपयुक्त है, जिससे महासागरीय मार्गों की तुलना में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में इसकी भागीदारी कम रहती है।