कक्षा 12 भूगोल अध्याय 16 शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: व्यापार वृद्धि, निर्यात-आयात संघटन की तालिकाएँ, व्यापार दिशा, प्रमुख पत्तन व हवाई अड्डे। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 वैदेशिक व्यापार की वृद्धि

याद कर लेंपरिभाषा

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार दो या दो से अधिक देशों के बीच होने वाला व्यापार है, जो सभी देशों के लिए परस्पर लाभदायक है, चूँकि कोई भी देश आत्मनिर्भर नहीं है।

  • विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी केवल ~1%, फिर भी विश्व अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण भूमिका
  • 1950-51: वैदेशिक व्यापार ₹1,214 करोड़ → 2021-22: ₹77,19,796 करोड़
  • वृद्धि के कारण: विनिर्माण क्षेत्र की गतिशील उठान, सरकार की उदार नीतियाँ, बाज़ारों की विविधरूपता
  • आयात सदैव निर्यात से अधिक → भारत का व्यापार घाटा लगातार बना रहता है
वर्ष निर्यात (₹ करोड़) आयात (₹ करोड़) व्यापार संतुलन (₹ करोड़)
2004-05 3,75,340 5,01,065 -1,25,725
2009-10 8,45,534 13,63,736 -5,18,202
2013-14 19,05,011 27,15,434 -8,10,423
2016-17 18,52,340 25,77,422 -7,25,082
2021-22 31,47,021 45,72,775 -14,25,753
परीक्षा संकेत

तालिका 8.1 के आँकड़े मैच/सुमेलन प्रश्नों में सीधे पूछे जाते हैं – सबसे हाल के वर्ष (2021-22) का व्यापार घाटा (-14,25,753 करोड़) विशेष रूप से याद रखें।

2 निर्यात संघटन, तालिकाओं में

वस्तु समूह 2015-16 2021-22 रुझान
कृषि एवं समवर्गी उत्पाद 12.6% 11.9% ↓ कमी
अयस्क एवं खनिज 1.6% 2.0% ≈ स्थिर
विनिर्मित वस्तुएँ 72.9% 67.8% ↓ कमी
पेट्रोलियम व अपरिष्कृत उत्पाद 11.9% 16.4% ↑ वृद्धि
अन्य वस्तुएँ 1.1% 1.9% ↑ वृद्धि
  • विनिर्माण क्षेत्र: 2021-22 में कुल निर्यात का 67.8%; इंजीनियरिंग वस्तुओं में उल्लेखनीय वृद्धि; चीन व पूर्वी एशियाई देश प्रमुख प्रतिस्पर्धी; रत्न-आभूषण की बड़ी हिस्सेदारी
  • पारंपरिक वस्तुओं में गिरावट (जैसे काजू) – कड़ी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के कारण
  • वृद्धि दर्ज: फूलों की खेती से जुड़े उत्पाद, ताज़े फल, समुद्री उत्पाद, चीनी
  • तालिका 8.3 (2021-22, ₹ करोड़): विनिर्मित वस्तुएँ 21,32,296 · कृषि एवं समवर्गी 3,75,742 · खनिज ईंधन-स्नेहक 5,15,310 · अयस्क-खनिज 63,754

3 आयात संघटन, तालिकाओं में

याद कर लेंकालक्रम

1950-60 के दशक: खाद्यान्न संकट → प्रमुख आयात: खाद्यान्न, पूँजीगत माल, मशीनरी। 1970 के बाद: हरित क्रांति की सफलता से खाद्यान्न आयात बंद। 1973: ऊर्जा संकट से पेट्रोलियम मूल्य में उछाल, आयात बजट बढ़ा; खाद्यान्न की जगह उर्वरक व पेट्रोलियम ने ली। पेट्रोलियम आयात क्यों बढ़ा (तालिका 8.4): ईंधन और औद्योगिक कच्चा माल; बढ़ते औद्योगीकरण व बेहतर जीवन स्तर की गति; अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कदाचनिक मूल्य वृद्धि। पूँजीगत वस्तुओं का आयात लगातार घटा।

वस्तु समूह 2015-16 2021-22 रुझान
खाद्य एवं संबंधित वस्तुएँ 5.1% 4.4% ↓
ईंधन (कोयला, पीओएल) 25.4% 31.6% ↑
उर्वरक 2.1% 2.3% ≈
पेपरबोर्ड विनिर्मित व अखबारी कागज़ 0.8% 0.7% ≈
पूंजीगत वस्तुएँ 13.0% 10.1% ↓ लगातार गिरावट
अन्य 38.1% 38.5% ≈
वस्तु (तालिका 8.5, 2021-22) मूल्य (₹ करोड़)
पेट्रोलियम एवं उत्पाद 12,07,803
अलौह धातुएँ 4,99,766
रासायनिक उत्पाद 3,08,882
खाद्य तेल 1,41,532
उर्वरक एवं उर्वरक विनिर्माण 1,05,796
मोती, बहुमूल्य एवं अल्प मूल्य रत्न 2,31,279
लोहा और इस्पात 94,053
चिकित्सीय एवं भेषजीय उत्पाद 67,545
लुगदी और अपशिष्ट कागज़ 11,934

अन्य प्रमुख आयात: मोती/बहुमूल्य-अल्प मूल्य रत्न, सोना-चांदी, अलौह धातुएँ।

4 व्यापार की दिशा

क्षेत्र आयात 2016-17 (₹ करोड़) आयात 2021-22 (₹ करोड़)
यूरोप 4,03,972 6,40,577
अफ्रीका 1,93,327 3,68,156
उत्तरी अमेरिका 1,95,332 3,78,041
लैटिन अमेरिका 1,15,762 1,61,995
एशिया एवं आसियान 15,44,520 29,18,577
परीक्षा संकेत

भारत का लक्ष्य: अगले 5 वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में हिस्सेदारी दुगुनी करना। उपाय: आयात उदारीकरण, आयात करों में कमी, डि-लाइसेंसिंग, प्रक्रिया से उत्पाद पेटेंट में बदलाव।

5 प्रवेश द्वार के रूप में समुद्री पत्तन

  • भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा, लंबी तटरेखा; जल = सस्ता परिवहन (कोई अशांति न होने पर)
  • समुद्री यात्रा की लंबी परंपरा; कई स्थानों के नाम “पत्तन” उपनाम से जुड़े
  • रोचक तथ्य: पश्चिमी तट पर पूर्वी तट से अधिक पत्तन
  • यूरोपीय व्यापारियों/ब्रिटिश उपनिवेशीकरण के बाद पत्तन प्रवेश द्वार के रूप में महत्त्वपूर्ण बने; अंग्रेज़ों ने इन्हें पृष्ठप्रदेशों के संसाधन-अवशोषण केंद्र के रूप में प्रयोग किया
  • रेलवे विस्तार: स्थानीय → क्षेत्रीय → राष्ट्रीय → अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार (1947 तक)
  • विभाजन (1947): कराची पत्तन → पाकिस्तान; चिटगाँव पत्तन → पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश); क्षतिपूर्ति: कांडला (पश्चिम) व डायमंड हार्बर (पूर्व)
  • पत्तन क्षमता: 20 मिलियन टन (1951) → 837+ मिलियन टन (2016)
  • 12 प्रमुख पत्तन (केंद्र सरकार की नीति) + 200 छोटे/मझोले पत्तन (राज्य सरकार की नीति)
  • पहले सरकारी अभिकरणों की ज़िम्मेदारी, अब निजी उद्यमी भी आमंत्रित (आधुनिकीकरण हेतु)

6 भारत के प्रमुख पत्तन (12), तालिका में

पत्तन तट मुख्य विशेषता
दीनदयाल (कांडला) पश्चिम कच्छ की खाड़ी; मुंबई का दबाव कम करता है; पेट्रोलियम-उर्वरक हेतु
मुंबई पश्चिम प्राकृतिक पत्तन, देश का सबसे बड़ा; 54 गोदियाँ, सबसे बड़ा तेल टर्मिनल
जवाहरलाल नेहरू (न्हावा-शेवा) पश्चिम मुंबई का अनुषंगी; भारत का विशालतम कंटेनर पत्तन
मुरगांव पश्चिम गोवा, जुआरी नदमुख; 1961 में जापान-लौह-अयस्क हेतु पुनर्प्रतिरूपित
न्यू मंगलौर पश्चिम कर्नाटक; लौह-अयस्क/सांद्र निर्यात
कोच्चि पश्चिम वेम्बानद कयाल; “अरब सागर की रानी”; स्वेज-कोलंबो मार्ग के निकट
कोलकाता (श्यामा प्रसाद मुखर्जी) पूर्व हुगली नदी, 128 कि.मी. अंदर; गाद (सिल्ट) की समस्या
हल्दिया पूर्व कोलकाता का अनुषंगी पत्तन, 105 कि.मी. डाउनस्ट्रीम; कोलकाता का दबाव कम करता है
पारादीप पूर्व महानदी डेल्टा; सबसे गहरा पोताश्रय; लौह-अयस्क निर्यात
विशाखापट्नम पूर्व स्थलबद्ध (भू-आबद्ध) पत्तन; चट्टान काटकर बनी नहर से समुद्र से जुड़ा
चेन्नई पूर्व कृत्रिम पत्तन, 1859 में निर्मित; उथले जल के कारण बड़े पोत अनुपयुक्त
कामराजार (एन्नोर) पूर्व चेन्नई के 25 कि.मी. उत्तर; चेन्नई का दबाव कम करता है
वी.ओ. चिदंबरनार (तूतीकोरिन) पूर्व चेन्नई का दबाव कम करने हेतु; कोयला, नमक, खाद्यान्न आदि निपटान

पुस्तक हल्दिया का वर्णन अलग से करती है, हालाँकि यह कोलकाता का अनुषंगी पत्तन है, इसलिए 12 प्रमुख पत्तनों के लिए 13 नाम दिखते हैं।

7 हवाई अड्डे और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

  • लाभ: उच्च मूल्य/नाशवान वस्तुओं के लिए लंबी दूरी पर कम से कम समय
  • हानि: भारी/स्थूल वस्तुओं के लिए महँगा व अनुपयुक्त → महासागरीय मार्गों की तुलना में भागीदारी कम
  • 25 प्रमुख हवाई अड्डे (वार्षिक रिपोर्ट 2016-17): अहमदाबाद, बेंगलूरु, चेन्नई, दिल्ली, गोवा, गुवाहाटी, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, थिरुवनंथपुरम, श्रीनगर, जयपुर, कालीकट, नागपुर, कोयम्बटूर, कोच्चि, लखनऊ, पुणे, चण्डीगढ़, मंगलूरु, विशाखापट्नम, इंदौर, पटना, भुवनेश्वर, कन्नूर
  • उड़ान योजना (2017 से): 73 असेवित/अल्पसेवित हवाई अड्डे चालू, जिसमें 9 हेलीपोर्ट व 2 जल हवाई अड्डे शामिल (स्रोत: पीआईबी, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, 2023)

8 मानचित्र कार्य (CBSE 2026-27)

पहचानें और नाम लिखें स्थान (राज्य)
10 समुद्री पत्तन कांडला (गुजरात), मुंबई (महाराष्ट्र), मुरगांव (गोवा), मंगलौर (कर्नाटक), कोच्चि (केरल), तूतीकोरिन (तमिलनाडु), चेन्नई (तमिलनाडु), विशाखापट्नम (आंध्र प्रदेश), पारादीप (ओडिशा), हल्दिया (पश्चिम बंगाल)
10 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे अहमदाबाद (गुजरात), मुंबई (महाराष्ट्र), बेंगलूरु (कर्नाटक), चेन्नई (तमिलनाडु), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), गुवाहाटी (असम), दिल्ली, अमृतसर (पंजाब), थिरुवनंथपुरम (केरल), हैदराबाद (तेलंगाना)

हर स्थान पर बिंदु लगाकर उसके पास नाम लिखें। पूरे नोट्स में दोनों मानचित्र दिए गए हैं।

रिवीज़न चेकलिस्ट

1950-51 ₹1,214 करोड़ → 2021-22 ₹77,19,796 करोड़ · तालिका 8.1 से 8.6 के आँकड़े · 12 प्रमुख + 200 छोटे पत्तन · कराची व चिटगाँव की हानि (1947) · मुरगांव 1961 · चेन्नई पत्तन 1859 · पश्चिमी तट पर अधिक पत्तन · 25 हवाई अड्डे (2016-17) · उड़ान योजना 73/9/2 (2017 से)।