कक्षा 12 भूगोल अध्याय 17 NCERT Solutions (प्रश्नावली के हल) हिंदी में

NCERT की पाठ्यपुस्तक भारत: लोग और अर्थव्यवस्था के अध्याय 9 (भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएँ) के “अभ्यास” खंड के सभी प्रश्न (और पाठ के बीच पूछे गए प्रश्न), ठीक उसी रूप में जैसे किताब के हिंदी संस्करण में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।

1 बहुविकल्पीय प्रश्न (नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए)

प्रश्न 1 (i)

प्र. निम्नलिखित में से सर्वाधिक प्रदूषित नदी कौन-सी है?
(क) ब्रह्मपुत्र
(ख) सतलुज
(ग) यमुना
(घ) गोदावरी

उत्तर: (ग) यमुना। किताब के अनुसार यमुना दिल्ली में औद्योगिक व घरेलू कचरे तथा सिंचाई हेतु अत्यधिक जल-निष्कासन से अत्यंत प्रदूषित हो चुकी है (चित्र 9.1 में यमुना पर झाग की व्यापक पर्त इसका प्रमाण है)।

प्रश्न 1 (ii)

प्र. निम्नलिखित में से कौन-सा रोग जल जन्य है?
(क) नेत्रश्लेष्मला शोथ
(ख) अतिसार
(ग) श्वसन संक्रमण
(घ) श्वासनली शोथ

उत्तर: (ख) अतिसार (डायरिया)। किताब के अनुसार संदूषित जल के उपयोग से दस्त (डायरिया), आँतों के कृमि तथा हेपेटाइटिस जैसी बीमारियाँ होती हैं; पुस्तक शेष तीनों विकल्पों को जल-जनित रोगों में नहीं गिनाती।

प्रश्न 1 (iii)

प्र. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल वर्षा का एक कारण है?
(क) जल प्रदूषण
(ख) भूमि प्रदूषण
(ग) शोर प्रदूषण
(घ) वायु प्रदूषण

उत्तर: (घ) वायु प्रदूषण। किताब के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण अम्ल वर्षा भी हो सकती है; नगरीय पर्यावरण के वर्षा जल विश्लेषण से पता चलता है कि गर्मियों के बाद पहली बरसात का pH स्तर बाद की बरसातों से सदैव कम होता है।

प्रश्न 1 (iv)

प्र. प्रतिकर्ष और अपकर्ष कारक उत्तरदायी है-
(क) प्रवास के लिए
(ख) भू-निम्नीकरण के लिए
(ग) गंदी बस्तियाँ
(घ) वायु प्रदूषण

उत्तर: (क) प्रवास के लिए। ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के निम्न अवसर (प्रतिकर्ष कारक) और नगरीय क्षेत्रों में मज़दूरों की अधिक माँग (अपकर्ष कारक) मिलकर ग्रामीण-नगरीय प्रवास को प्रेरित करते हैं।

2 निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें

प्रश्न 2 (i)

प्र. प्रदूषण और प्रदूषकों में क्या भेद है?

उत्तर: प्रदूषण उस हानिकारक अवस्था को कहते हैं जब वायु, जल या भूमि में संदूषक इतनी अधिक मात्रा व अवधि में मिल जाएँ कि वे मनुष्यों, जंतुओं व संपत्ति के लिए हानिकारक बन जाएँ। प्रदूषक (जैसे धूल, धुआँ, गैसें, रसायन) वे पदार्थ हैं जो इस हानिकारक अवस्था को उत्पन्न करते हैं, अर्थात् प्रदूषक कारण हैं और प्रदूषण उसका परिणाम।

प्रश्न 2 (ii)

प्र. वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: जीवाश्म ईंधन का दहन, खनन और उद्योग वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। ये प्रक्रियाएँ सल्फर व नाइट्रोजन के ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड, सीसा तथा एस्बेस्टास जैसे प्रदूषक वायु में निर्मुक्त करती हैं।

प्रश्न 2 (iii)

प्र. भारत में नगरीय अपशिष्ट निपटान से जुड़ी प्रमुख समस्याओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: मुंबई, कोलकाता, चेन्नई व बेंगलूरु जैसे महानगरों को छोड़कर अधिकांश शहरों में 30 से 50 प्रतिशत कचरा बिना एकत्र किए छोड़ दिया जाता है, जो गलियों, घरों के पीछे व परती ज़मीनों पर इकट्ठा होकर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। अनुपचारित अपशिष्ट धीरे-धीरे सड़कर मिथेन सहित विषाक्त गैसें छोड़ता है।

प्रश्न 2 (iv)

प्र. मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के क्या प्रभाव पड़ते हैं?

उत्तर: वायु प्रदूषण के कारण श्वसन तंत्रीय, तंत्रिका तंत्रीय तथा रक्त संचारतंत्र संबंधी विभिन्न बीमारियाँ होती हैं। यह शहरी धूम्र कुहरे (स्मॉग) का भी कारण बनता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है, और अम्ल वर्षा को भी जन्म देता है।

3 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें

प्रश्न 3 (i)

प्र. भारत में जल प्रदूषण की प्रकृति का वर्णन कीजिए।

उत्तर: बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिक विस्तारण के कारण जल के अविवेकपूर्ण उपयोग से जल की गुणवत्ता का बहुत अधिक निम्नीकरण हुआ है। जल प्रदूषक प्राकृतिक स्रोतों (अपरदन, भू-स्खलन, पेड़-पौधों व मृत पशुओं के सड़ने-गलने) से भी आते हैं, परंतु मानव क्रियाकलापों (उद्योग, कृषि, सांस्कृतिक गतिविधियाँ) से उत्पन्न प्रदूषक चिंता के वास्तविक कारण हैं; इनमें उद्योग सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण सहायक है। सर्वाधिक जल प्रदूषक उद्योग-चमड़ा, लुगदी व कागज़, वस्त्र तथा रसायन हैं। तालिका 9.1 के अनुसार जल में बदबू, घुलित-निलंबित ठोस कण, अमोनिया, यूरिया, नाइट्रेट-नाइट्राइट्स, क्लोराइड्स, फ़्लोराइड्स, तेल-ग्रीस, कीटनाशक अवशेष तथा भारी धातुएँ (सीसा, आर्सेनिक, पारा) मिल जाती हैं, जिनके स्रोत वाहित मल निपटान, नगरीय वाही जल, औद्योगिक बहिःस्राव, कृषि भूमि से बहकर आया विषाक्त जल तथा नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र हैं। गंगा व यमुना जैसी नदियाँ (तालिका 9.2) कानपुर, वाराणसी, दिल्ली जैसे नगरों के औद्योगिक-घरेलू कचरे से बुरी तरह प्रदूषित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में लगभग एक-चौथाई संचारी रोग जल-जनित हैं (दस्त, आँतों के कृमि, हेपेटाइटिस)। इसी को नियंत्रित करने हेतु केंद्र सरकार ने ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम आरंभ किया है, जिसके उद्देश्यों में सीवर ट्रीटमेंट, औद्योगिक प्रवाह की निगरानी, वनीकरण और जन-जागरूकता शामिल हैं।

प्रश्न 3 (ii)

प्र. भारत में गंदी बस्तियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर: गंदी बस्तियाँ न्यूनतम वांछित आवासीय क्षेत्र हैं जहाँ जीर्ण-शीर्ण मकान, स्वास्थ्य की निम्न सुविधाएँ, खुली हवा का अभाव तथा पेयजल, प्रकाश व शौच जैसी आधारभूत आवश्यकताओं का अभाव पाया जाता है। खुले में शौच, अनियमित जल निकासी व्यवस्था और भीड़-भरी संकरी सड़कें गंभीर स्वास्थ्य व सामाजिक-पर्यावरणीय खतरे उत्पन्न करती हैं। इनमें वे लोग रहते हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों से आजीविका की खोज में प्रवासित तो हुए, पर ऊँचे किराए व ज़मीन की महँगी कीमत के कारण उचित आवास नहीं ले सके। धारावी (मुंबई), एशिया की सबसे बड़ी गंदी बस्ती, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है: यहाँ अस्थायी दो-तीन मंज़िला भवनों में एक-एक कमरे में 10-12 लोग तक रहते हैं, फिर भी यहाँ से मृत्तिका शिल्प, कसीदाकारी, परिष्कृत चमड़ा-कार्य व आभूषण जैसी बहुमूल्य वस्तुएँ बनती हैं। अधिकांश स्लम-निवासी नगरीय अर्थव्यवस्था के असंगठित क्षेत्र में कम वेतन व अधिक जोखिम वाला कार्य करते हैं, अल्प-पोषित रहते हैं और बच्चों की उचित शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते; गरीबी उन्हें नशीली दवाओं, शराब, अपराध व सामाजिक बहिष्कार की ओर धकेलती है। भारत सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शहरी गंदी बस्तियों में जीवन की गुणवत्ता सुधारने का प्रयास शुरू किया है।

प्रश्न 3 (iii)

प्र. भू-निम्नीकरण को कम करने के उपाय सुझाइए।

उत्तर: भू-निम्नीकरण, अर्थात् भूमि की उत्पादकता में स्थायी या अस्थायी कमी, मृदा अपरदन, लवणता तथा भू-क्षारता से होता है और प्राकृतिक व मानवजनित दोनों प्रक्रियाओं से बढ़ता है। किताब के झबुआ और पेटलावाड केस अध्ययनों से स्पष्ट उपाय मिलते हैं: (1) भारतीय दूर-संवेदन संस्थान जैसी संस्थाओं द्वारा दूर-संवेदन तकनीक से व्यर्थ भूमि का सीमांकन व निगरानी; (2) भूमि, जल व वनस्पति के बीच संबद्धता पहचानते हुए जल संभरण प्रबंधन कार्यक्रम चलाना, जैसा झबुआ में ग्रामीण विकास व कृषि मंत्रालयों की सहायता से किया गया; (3) साझी संपदा संसाधनों पर वृक्षारोपण व उनका अनुरक्षण, जैसा पेटलावाड में हर परिवार ने किया; (4) चरागाह भूमि पर चारा घास बोना और खुली चराई की जगह सामाजिक घेराबंदी व नाँद से पशुओं को आहार देना; (5) सरकार-गैर सरकारी संगठन साझेदारी व सामुदायिक प्रतिभागिता को बढ़ावा देना, जिससे भूमि विवाद (जैसे अतिक्रमण) सुलझाए जा सकें और लोगों को साझी भूमि की हरियाली से लाभांश मिल सके।

4 पाठ के बीच पूछे गए प्रश्न

पाठगत प्रश्न 1 (नगरीय अपशिष्ट)

प्र. हम क्या फेंकते हैं, और क्यों? हमारा कचरा (अपशिष्ट) कहाँ जाकर समाप्त होता है? रद्दी बीनने वाले बच्चे कचरे को क्यों खँगालते हैं? क्या इसका कुछ मूल्य होता है? क्या हमारा नगरीय अपशिष्ट उपयोगी है?

उत्तर: हम पुरानी व प्रयुक्त वस्तुएँ फेंकते हैं, जैसे धातु के टुकड़े, टूटे काँच के बर्तन, प्लास्टिक के डिब्बे, पॉलीथिन की थैलियाँ, राख और पुरानी सीडी, क्योंकि वे टूट गई हैं या हमारे काम की नहीं रहीं। घरेलू कचरा सार्वजनिक भूमि या निजी ठेकेदारों के स्थलों पर और औद्योगिक कचरा निचले सार्वजनिक मैदानों (भराव क्षेत्रों) में डाला जाता है; महानगरों को छोड़कर अधिकतर नगरों में 30 से 50 प्रतिशत कचरा एकत्र ही नहीं होता और सड़कों व खुले स्थानों पर पड़ा रहता है। रद्दी बीनने वाले कचरे को इसलिए खँगालते हैं क्योंकि उसमें धातु, काँच, प्लास्टिक और कागज़ जैसी वस्तुएँ होती हैं जिन्हें पुनर्चक्रण के लिए बेचा जा सकता है। अतः नगरीय अपशिष्ट का मूल्य है: पुस्तक के अनुसार अपशिष्ट को संसाधन मानकर उससे ऊर्जा और कम्पोस्ट खाद बनाई जानी चाहिए।

पाठगत क्रियाकलाप 2

प्र. क्या आपने कोई गंदी बस्ती देखी है? अपने शहर की किसी गंदी बस्ती में जाएँ और वहाँ रहने वाले लोगों की समस्याओं के बारे में लिखें।

उत्तर: यह क्षेत्र-कार्य है। अपनी रिपोर्ट में पुस्तक के बिंदुओं को शीर्षक बनाइए: जीर्ण-शीर्ण मकान और भीड़; गंदगी व हवा-रोशनी की कमी; पीने के पानी, बिजली और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव; खुले में शौच, अनियोजित जल-निकास और तंग गलियाँ; असंगठित क्षेत्र में कम मज़दूरी वाले जोखिम भरे काम; कुपोषण और बीमारियाँ; बच्चों को उचित शिक्षा न मिल पाना; तथा नशाखोरी, शराब और अपराध की ओर झुकाव।

पाठगत प्रश्न 3

प्र. गंदी बस्तियों के निवासियों के बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित क्यों रह जाते हैं?

उत्तर: गंदी बस्तियों के अधिकतर निवासी नगरीय अर्थव्यवस्था के असंगठित क्षेत्र में कम वेतन वाले, जोखिम भरे कामों में लगे होते हैं, इसलिए वे गरीब, कुपोषित और प्रायः बीमार रहते हैं और अपने बच्चों को उचित शिक्षा नहीं दिला पाते। बच्चों को अक्सर परिवार की आय बढ़ाने के लिए काम पर लगा दिया जाता है या छोटे भाई-बहनों की देखभाल करनी पड़ती है, और गरीबी से उपजी नशाखोरी व सामाजिक बहिष्कार उन्हें स्कूल से और दूर कर देते हैं।

पाठगत प्रश्न 4

प्र. भू-उर्वरकता के अप्रबंधन के साथ इसका अविरल उपयोग होने पर क्या स्थिति होगी?

उत्तर: पुस्तक का अपना उत्तर: भू-निम्नीकरण होगा तथा उत्पादकता में कमी आएगी। भू-निम्नीकरण का अर्थ है स्थायी या अस्थायी तौर पर भूमि की उत्पादकता में कमी, और यदि यह प्रक्रिया अनियंत्रित रहे तो भूमि व्यर्थ भूमि में बदल सकती है।

परीक्षा संकेत

प्रश्नावली के चारों बहुविकल्पीय प्रश्न बोर्ड परीक्षा में सीधे वस्तुनिष्ठ रूप में पूछे जा सकते हैं। तालिका 9.1 (प्रदूषण के प्रकार व स्रोत) और ‘नमामि गंगे’ के उद्देश्य याद रखिए। प्रश्न 3 के तीनों दीर्घ-उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर में झबुआ व धारावी के उदाहरण ज़रूर लिखिए।