कक्षा 12 भूगोल अध्याय 17 शॉर्ट नोट्स (Short Notes) हिंदी में

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: पाँच परिभाषाएँ, तालिका 9.1 व 9.2, नमामि गंगे के उद्देश्य, नगरीय अपशिष्ट व प्रवास के आँकड़े, गंदी बस्तियों व भू-निम्नीकरण के तथ्य, और तीनों केस अध्ययन एक नज़र में। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 पाँच परिभाषाएँ जो कंठस्थ करनी हैं

याद कर लेंपरिभाषा 1

पर्यावरण प्रदूषण मानवीय क्रियाकलापों के अपशिष्ट उत्पादों से मुक्त द्रव्य एवं ऊर्जा का परिणाम है। परिवहन व विसरण के माध्यम के आधार पर इसे चार प्रकारों में बाँटा गया है: जल, वायु, भू और ध्वनि प्रदूषण।

याद कर लेंपरिभाषा 2

वायु प्रदूषण धूल, धुआँ, गैसें, कुहासा, दुर्गंध व वाष्प जैसे संदूषकों का वायु में इतनी मात्रा व अवधि में मिलना है कि वे मनुष्यों, जंतुओं व संपत्ति के लिए हानिकारक हो जाएँ।

याद कर लेंपरिभाषा 3

ध्वनि प्रदूषण विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न ऐसी ध्वनि है जो मानव की सहनीय सीमा से अधिक व असहज हो। इसे डेसीबल (dB) में मापा जाता है।

याद कर लेंपरिभाषा 4

भू-निम्नीकरण का अभिप्राय भूमि की उत्पादकता में स्थायी या अस्थायी कमी है। यह मृदा अपरदन, लवणता (जलाक्रांतता) व भू-क्षारता से तथा प्राकृतिक व मानवजनित दोनों प्रक्रियाओं से होता है। सभी निम्नकोटि भूमियाँ व्यर्थ भूमि नहीं होतीं।

याद कर लेंपरिभाषा 5

गंदी बस्ती (स्लम) न्यूनतम वांछित आवासीय क्षेत्र है: जीर्ण-शीर्ण मकान, स्वास्थ्य की निम्न सुविधाएँ, खुली हवा का अभाव, पेयजल-प्रकाश-शौच का अभाव, खुले में शौच व अनियमित जल निकासी इसकी पहचान हैं।

2 प्रदूषण के प्रकार व स्रोत (तालिका 9.1)

प्रकार प्रमुख प्रदूषक प्रमुख स्रोत
वायु प्रदूषण सल्फर व नाइट्रोजन के ऑक्साइड, CO, हाइड्रोकार्बन, सीसा, एस्बेस्टास कोयला/पेट्रोल/डीज़ल का दहन, औद्योगिक प्रक्रम, ठोस कचरा व वाहित मल निपटान
जल प्रदूषण अमोनिया-यूरिया, नाइट्रेट-नाइट्राइट्स, क्लोराइड्स, तेल-ग्रीस, भारी धातुएँ वाहित मल निपटान, नगरीय वाही जल, औद्योगिक बहिःस्राव, कृषि भूमि से बहाव, नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र
भू-प्रदूषण मानव/पशु मलादि, विषाणु-जीवाणु, कीटनाशक व उर्वरक अवशिष्ट अनुचित मानव क्रियाकलाप, अनुपचारित औद्योगिक अपशिष्ट, कीटनाशक-उर्वरक उपयोग
ध्वनि प्रदूषण सहन क्षमता से अधिक ऊँची ध्वनि वायुयान, मोटर-वाहन, रेलगाड़ियाँ, औद्योगिक प्रक्रम, विज्ञापन मीडिया

सर्वाधिक जल प्रदूषक उद्योग: चमड़ा, लुगदी व कागज़, वस्त्र तथा रसायन।

3 गंगा-यमुना प्रदूषण (तालिका 9.2) व नमामि गंगे

नदी प्रदूषित पटरियाँ मुख्य प्रदूषक नगर/कारण
गंगा (उ.प्र., बिहार, प.बंगाल) कानपुर व वाराणसी का अनुप्रवाह, फरक्का बाँध कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना, कोलकाता के औद्योगिक-घरेलू कचरे व लाशों का विसर्जन
यमुना (दिल्ली, उ.प्र.) दिल्ली से चंबल मिलन तक, मथुरा-आगरा हरियाणा-उ.प्र. द्वारा सिंचाई हेतु जल-निर्गमन, कृषि प्रवाह, दिल्ली का घरेलू-औद्योगिक कचरा

‘नमामि गंगे’ (केंद्र सरकार): सीवर ट्रीटमेंट, औद्योगिक प्रवाह की निगरानी, नदी विकास, तटीय वनीकरण, नदी तल की सफ़ाई, उत्तराखंड/यू.पी./बिहार/झारखंड में ‘गंगा ग्राम’, जन-जागरूकता। WHO: भारत में ~1/4 संचारी रोग जल-जनित (दस्त, आँतों के कृमि, हेपेटाइटिस)।

4 नगरीय अपशिष्ट निपटान, संख्याओं में

  • निपटान के दो स्रोत: (i) घरेलू (सार्वजनिक भूमि/निजी ठेकेदार स्थल) और (ii) औद्योगिक/व्यावसायिक (नगरपालिका द्वारा निचली सतह की सार्वजनिक ज़मीन/लैंडफिल)
  • महानगरों (मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलूरु) में 90% ठोस अपशिष्ट एकत्रित व निपटाया जाता है
  • अन्य अधिकांश शहरों में 30-50% कचरा बिना एकत्र किए रह जाता है → गलियों, परती ज़मीन पर इकट्ठा → टाइफाइड, गलघोटूँ, दस्त, हैजा का खतरा
  • अनुपचारित अपशिष्ट सड़कर मिथेन सहित विषाक्त गैसें छोड़ता है; इसे संसाधन मानकर ऊर्जा व कंपोस्ट बनाने में प्रयोग करना चाहिए

5 ग्रामीण-नगरीय प्रवास, संख्याओं में

  • कारक: नगरीय क्षेत्रों में मज़दूरों की अधिक माँग, ग्रामीण में रोज़गार के निम्न अवसर, असंतुलित विकास प्रारूप
  • विश्व की 55% जनसंख्या वर्तमान में नगरों में; 2050 तक 68% होने का अनुमान
  • नगरीय वृद्धि के तीन कारण: प्राकृतिक वृद्धि, निवल अप्रवास, नगरीय क्षेत्रों का पुनः वर्गीकरण
  • भारत: 1961 के बाद नगरीय वृद्धि में 60% वृद्धि, जिसमें से 29% ग्रामीण-नगरीय प्रवास से
  • प्रवास में पुरुषों का प्रभुत्व: गंतव्य पर कम मज़दूरी के कारण पत्नी-बच्चे गाँव में ही रह जाते हैं
  • भारत की 69% जनसंख्या ग्रामीण (2011); महात्मा गांधी ने गाँवों को आदर्श गणतंत्र माना

6 गंदी बस्तियाँ: धारावी एक नज़र में

  • धारावी: एशिया की सबसे बड़ी गंदी बस्ती, केंद्रीय मुंबई का हिस्सा; तीन-पहिया वाहन प्रवेश-निषेध
  • एकमात्र मुख्य सड़क: ग़लत नाम से ‘नाइंटीफुट रोड’, चौड़ाई घटकर आधे से कम
  • भवन: 2-3 मंज़िला अस्थायी, जंग लगी सीढ़ियाँ, एक कमरे में 10-12 लोग तक
  • यहाँ मुख्यतः अनुसूचित जाति व गरीब मुसलमान बसे; फिर भी यहाँ से मृत्तिका शिल्प, कसीदाकारी-ज़री, परिष्कृत चमड़ा-कार्य, आभूषण व फ़र्नीचर जैसी बहुमूल्य वस्तुएँ बनती हैं जो भारत व विदेश तक जाती हैं
  • स्रोत: सीब्रूक, 1996, पृ. 50, 51-52
  • स्वच्छ भारत मिशन: शहरों के नवीकरण का हिस्सा, गंदी बस्तियों में जीवन-गुणवत्ता सुधार हेतु

7 भू-निम्नीकरण व व्यर्थ भूमि का वर्गीकरण

प्रक्रिया व्यर्थ भूमि के प्रकार
प्राकृतिक कारक उत्खात/अवनालिकाजनित भूमि, मरुस्थलीय व तटीय रेतीली भूमि, बंजर चट्टानी क्षेत्र, तीव्र ढाल वाली भूमि, हिमानी क्षेत्र
प्राकृतिक + मानवजनित जलाक्रांत व दलदली क्षेत्र, लवणता-क्षारता प्रभावित भूमि, झाड़ी सहित/रहित भूमि
मानवजनित स्थानांतरित कृषि जनित क्षेत्र, रोपण कृषि जनित, क्षरित वन, क्षरित चरागाह, खनन व औद्योगिक व्यर्थ क्षेत्र

वर्गीकरण एजेंसी: भारतीय दूर-संवेदन संस्थान, दूर-संवेदन तकनीक द्वारा। तालिका 9.3 दर्शाती है कि मानवजनित प्रक्रियाओं से प्राकृतिक की अपेक्षा अधिक व्यर्थ भूमि बनी है।

8 तीन केस अध्ययन, एक नज़र में

  • दौराला (मेरठ): ‘प्रदूषक भोगता है’ नियम पर पारिस्थितिकी पुनर्भरण; जनसंख्या 12,000; भू-जल भारी धातुओं से संदूषित; सन् 2003 में दौरालावासियों की दुर्दशा पर नागरिक समाज का ध्यान गया; एन.जी.ओ. सर्वेक्षण, टंकी क्षमता वृद्धि, 900 मी. पाइपलाइन, तालाब सफ़ाई, वर्षा-जल संरचनाएँ, 1000 वृक्ष
  • रमेश (प्रवास): तलचर (उड़ीसा) में वेल्डर, ठेकेदार संग सूरत-मुंबई-गांधीनगर-भरूँच-जामनगर; पिता को प्रतिवर्ष रु. 20,000; 1988 में लुधियाना ऊन फैक्टरी (रु. 20/दिन, 6 माह); बाद में सूरत में वेल्डिंग सीखी
  • झबुआ व पेटलावाड (म.प्र.): अति पश्चिमी क्षेत्र, देश के 5 सर्वाधिक पिछड़े ज़िलों में एक, भील बहुल; ग्रामीण विकास व कृषि मंत्रालय अनुदानित जल संभरण; राजीव गांधी मिशन: 5 वर्षों में ~20% भूमि उपचारित; पेटलावाड में भील समुदाय ने वृक्षारोपण व सामाजिक घेराबंदी से CPR पुनर्जीवित किया, अतिक्रमणकर्ता को प्रयोक्ता समूह का सदस्य बनाकर विवाद सुलझाया
अंतिम दोहराव: सिर्फ़ संख्याएँ
  • 4 प्रकार का प्रदूषण: जल, वायु, भू, ध्वनि · ध्वनि की माप: डेसीबल
  • सर्वाधिक जल प्रदूषक उद्योग: चमड़ा, लुगदी-कागज़, वस्त्र, रसायन
  • WHO: भारत में ~1/4 संचारी रोग जल-जनित
  • नगरीय अपशिष्ट: महानगरों में 90% एकत्रित · अन्य शहरों में 30-50% अनएकत्रित
  • नगरीकरण: विश्व 55% (वर्तमान) → 68% (2050) · भारत में 1961 बाद 60% वृद्धि, 29% प्रवास से
  • भारत की ग्रामीण जनसंख्या 69% (2011) · धारावी: एशिया की सबसे बड़ी गंदी बस्ती
  • व्यर्थ भूमि वर्गीकरण एजेंसी: भारतीय दूर-संवेदन संस्थान
  • झबुआ: म.प्र. का अति पश्चिमी, 5 सर्वाधिक पिछड़े ज़िलों में एक, भील बहुल · राजीव गांधी मिशन: ~20% भूमि उपचारित
  • दौराला जनसंख्या 12,000 · रमेश: तलचर में वेल्डर, प्रतिवर्ष रु. 20,000 प्रेषण