इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. वृत्त आरेख को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
उत्तर: वृत्त आरेख को विभाजित वृत्त आरेख भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें वृत्त के कोण को अनुकूल अंशों में विभाजित करके आंकड़ों के उप-समूह दर्शाए जाते हैं।
प्र. प्रवाह संचित्र को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
उत्तर: प्रवाह संचित्र को गतिक मानचित्र भी कहा जाता है।
प्र. ‘आइसोप्लेथ’ शब्द किन दो शब्दों से मिलकर बना है?
उत्तर: आइसोप्लेथ शब्द आइसो (जिसका अर्थ ‘बराबर’ है) और प्लेथ (जिसका अर्थ ‘रेखाएँ’ है) से मिलकर बना है।
प्र. वृत्त आरेख में किसी चर का कोण ज्ञात करने का सामान्य सूत्र लिखिए।
उत्तर: कोण = दिए हुए राज्य/प्रदेश का मान / सभी राज्यों/प्रदेशों का कुल मान × 360।
प्र. वर्णमात्री मानचित्र में श्रेणी-अंतराल ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
उत्तर: श्रेणी-अंतराल = परास/5, जहाँ परास = अधिकतम मान – न्यूनतम मान।
प्र. इस अध्याय की भूमिका में सूचीबद्ध पाँच मुख्य प्रकार के आरेख/मानचित्र कौन-से हैं?
उत्तर: रेखा ग्राफ़, दंड आरेख, वृत्त आरेख, पवन आरेख और तारा आरेख, तथा प्रवाह संचित्र। (ध्यान दें: पवन आरेख और तारा आरेख को केवल नामित किया गया है, दोनों संस्करणों में इसकी रचना-विधि अध्याय में कहीं नहीं दी गई है।)
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. आलेख, आरेख और मानचित्र बनाने के तीन सामान्य नियम क्या हैं?
उत्तर: (1) उपयुक्त विधि का चयन, आंकड़ों की प्रकृति के अनुसार सही आलेखी विधि चुनना। (2) उपयुक्त मापनी का चयन, न बहुत बड़ी न बहुत छोटी। (3) अभिकल्पना: शीर्षक, निर्देशिका और दिशा का सावधानीपूर्वक निर्धारण।
प्र. एक साधारण दंड आरेख के निर्माण के तीन नियम लिखिए।
उत्तर: (1) सभी दंडों/स्तंभों की चौड़ाई बराबर होनी चाहिए। (2) सभी दंड बराबर अंतराल/दूरी पर स्थापित होने चाहिए। (3) दंडों को अलग व आकर्षक बनाने के लिए रंगों अथवा प्रतिरूपों से छायांकित किया जा सकता है।
प्र. बहुरेखाचित्र, साधारण रेखा ग्राफ़ से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर: साधारण रेखा ग्राफ़ में एक ही चर की समय-क्रम प्रवृत्ति दिखाई जाती है, जबकि बहुरेखाचित्र में दो या दो से अधिक चरों की तत्काल तुलना के लिए बराबर संख्या की रेखाएँ (सीधी, टूटी, बिंदु रेखा या अलग रंग) एक साथ खींची जाती हैं, जैसे विभिन्न राज्यों का लिंग अनुपात (तालिका 3.2)।
प्र. वृत्त आरेख बनाते समय ध्यान रखने योग्य दो सावधानियाँ लिखिए।
उत्तर: (1) वृत्त न तो इतना बड़ा हो कि स्थान में फिट न हो सके, न इतना छोटा कि सुपाठ्य न रहे। (2) कोण मापने की शुरुआत बड़े कोण से नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे त्रुटियों का संचयन होता है, जिससे छोटे कोण को दर्शाना कठिन हो जाता है।
प्र. थिमैटिक मानचित्र बनाने के लिए कोई तीन आवश्यकताएँ लिखिए।
उत्तर: (1) चुने हुए विषय से संबंधित राज्य/जिला स्तर के आंकड़े। (2) अध्ययन क्षेत्र का प्रशासनिक सीमाओं सहित रूपरेखा मानचित्र। (3) प्रदेश का भौतिक मानचित्र, जैसे जनसंख्या वितरण हेतु भू-आकृतिक मानचित्र या परिवहन मानचित्र हेतु उच्चावच-अपवाह मानचित्र।
प्र. मात्रात्मक और अमात्रात्मक थिमैटिक मानचित्रों में अंतर बताइए।
उत्तर: मात्रात्मक (सांख्यिकीय) मानचित्र आंकड़ों की मापनीय विविधता दर्शाते हैं, जैसे 200 सेमी से अधिक, 100-200 सेमी, 50-100 सेमी और 50 सेमी से कम वर्षा के क्षेत्र दिखाने वाला मानचित्र। अमात्रात्मक (विश्लेषणात्मक) मानचित्र दी गई सूचना के वितरण में अपरिमेय विशेषताएँ दर्शाते हैं, जैसे केवल उच्च और निम्न वर्षा प्राप्त करने वाले क्षेत्र दिखाने वाला मानचित्र।
प्र. बिंदुकित मानचित्र बनाते समय ध्यान रखने योग्य दो सावधानियाँ लिखिए।
उत्तर: (1) विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं को दर्शाने वाली रेखाएँ अत्यधिक घनी एवं मोटी नहीं होनी चाहिए। (2) प्रत्येक बिंदु का आकार समान होना चाहिए।
प्र. सममान रेखा खींचते समय ध्यान रखने योग्य दो नियम लिखिए।
उत्तर: (1) बराबर मानों को प्रदर्शित करने वाली सममान रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं। (2) मानों का बराबर अंतराल चुना जाता है, और 5, 10 अथवा 20 का आदर्श अंतराल माना जाता है; सममान रेखा का मान रेखा के दूसरी तरफ़ अथवा रेखा को तोड़कर बीच में लिखा जाना चाहिए।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. रेखा ग्राफ़ की रचना विधि के चार चरण समझाकर लिखिए।
उत्तर: (क) आंकड़े को पूर्णांक में बदलकर सरल बनाना, जैसे 1961 और 1981 की वृद्धि दर 1.96 व 2.22 को क्रमशः 2.0 व 2.2 में बदलना। (ख) X और Y अक्ष खींचना: समय-क्रम चर (वर्ष/महीना) को X अक्ष पर और आंकड़ों की मात्रा/मूल्य को Y अक्ष पर अंकित करना। (ग) उपयुक्त मापनी चुनकर Y अक्ष पर अंकित करना, यदि आंकड़ा ऋणात्मक हो (जैसे तालिका 3.1 में 1921 का -0.3) तो मापनी में उसे भी दिखाना। (घ) मापनी के अनुसार वर्ष/माह-वार आंकड़े अंकित कर बिंदु से मूल्यों की स्थिति चिह्नित करना और इन बिंदुओं को हाथ से रेखा खींचकर मिलाना।
प्र. वृत्त आरेख में कोणों की गणना की विधि, तालिका 3.7(क) के भारतीय निर्यात आंकड़ों का उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर: (क) आंकड़े को प्रतिशत के चढ़ते क्रम में व्यवस्थित करते हैं: अन्य (2.3), अफ्रीका (6.5), अमेरिका (14.8), यूरोप (20.2), एशिया व आसियान (56.2)। (ख) प्रत्येक मान को 3.6 के स्थिरांक (360/100) से गुणा कर कोण के अंश ज्ञात करते हैं, उदाहरण के लिए यूरोप का 20.2% होने पर कोण = 20.2×3.6 = 72.72°, जिसे पूर्णांकित कर 73° लिया जाता है। इसी प्रकार अफ्रीका 6.5×3.6=23.4°→23°, अमेरिका 14.8×3.6=53.28°→53°, एशिया व ASEAN 56.2×3.6=202.32°→203° (कुल को ठीक 360° बनाने हेतु पुस्तक का समायोजन), अन्य 2.3×3.6=8.28°→8°। (ग) आवश्यक संख्या में विभाजन कर वृत्त को अंकित करते हैं, जिससे पाँचों कोणों का योग 360° हो जाए (73+23+53+203+8=360)।
प्र. संयुक्त रेखा और दंड आरेख की रचना विधि, दिल्ली के तापमान-वर्षा उदाहरण (तालिका 3.4) के संदर्भ में समझाइए।
उत्तर: (क) उपयुक्त लंबाई के X और Y अक्ष खींचकर X अक्ष को वर्ष के 12 महीनों के लिए 12 भागों में बाँटना। (ख) Y अक्ष पर तापमान आंकड़े के लिए 5°C या 10°C के बराबर अंतराल की मापनी चुनकर इसे दाईं तरफ़ अंकित करना। (ग) इसी प्रकार Y अक्ष पर वर्षा आंकड़े के लिए 5 सेमी या 10 सेमी के बराबर अंतराल की मापनी चुनकर इसे बाईं तरफ़ अंकित करना। (घ) तापमान आंकड़े को रेखा ग्राफ़ द्वारा और वर्षा आंकड़े को दंड आरेख द्वारा एक ही आरेख में एक साथ प्रदर्शित करना (चित्र 3.5)।
प्र. प्रवाह संचित्र बनाने के लिए आवश्यक तीन शर्तें/आवश्यकताएँ लिखिए।
उत्तर: (क) स्टेशनों को जोड़ते हुए वांछित यातायात मार्गों को दर्शाने वाला एक मार्ग मानचित्र। (ख) वस्तुओं, सेवाओं और वाहनों की संख्या का, उनके उत्पत्ति बिंदु और गतियों की दिशा सहित, प्रवाह से संबंधित आंकड़ा। (ग) यात्रियों और वस्तुओं की मात्रा अथवा वाहनों की संख्या से संबंधित आंकड़े को प्रस्तुत करने के लिए एक उपयुक्त मापनी का चुनाव, जैसे तालिका 3.8 के दिल्ली रेलमार्ग उदाहरण में 1 सेमी = 50 रेलगाड़ी की मापनी और उसके अनुसार 10 मिमी व 1.2 मिमी मोटी पट्टियाँ।
प्र. वर्णमात्री मानचित्र की रचना के चार चरण, भारत की साक्षरता दर 2001 (तालिका 3.10, उदाहरण 3.13) के संदर्भ में समझाइए।
उत्तर: (क) आंकड़ों को चढ़ते क्रम में व्यवस्थित करना। (ख) परास ज्ञात करना: न्यूनतम बिहार (47.0) और अधिकतम केरल (पुस्तक द्वारा पूर्णांकित 91.0) से परास = 91.0-47.0 = 44.0। (ग) परास/5 सूत्र से अंतराल ज्ञात करना: 44.0/5=8.8, पूर्णांकित कर 9.0। (घ) 47 से आरंभ कर 9.0 जोड़ते हुए पाँच श्रेणियाँ बनाना: 47-56 अति निम्न, 56-65 निम्न, 65-74 मध्यम, 74-83 उच्च, 83-92 अति उच्च। अंत में प्रत्येक श्रेणी को अलग रंग/प्रतिरूप दिया जाता है।
प्र. बिंदुकित मानचित्र की रचना के चार चरण, भारत की जनसंख्या 2001 (तालिका 3.9, उदाहरण 3.12) के महाराष्ट्र उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: (क) एक बिंदु का आकार और मान चुनना (जैसे प्रति बिंदु 1,00,000 जनसंख्या)। (ख) चुनी हुई मापनी से प्रत्येक राज्य में बिंदुओं की संख्या निश्चित करना: महाराष्ट्र के लिए 9,67,52,247/1,00,000 = 967.52, जिसे भिन्नात्मक भाग 0.5 से अधिक होने के कारण पूर्णांकित कर 968 बिंदु लिया जाता है। (ग) निश्चित संख्या के अनुसार प्रत्येक राज्य में बिंदु दर्शाना। (घ) भारत के भू-आकृतिक/उच्चावच मानचित्र को देखकर पर्वतीय, रेगिस्तानी और बर्फ़ से ढके क्षेत्रों में कम संख्या में बिंदु अंकित करना।
प्र. क्षेपक की विधि के चार चरण, 28°C और 33°C के बीच 30°C समताप रेखा के हल किए उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: (क) मानचित्र पर दिए गए न्यूनतम और अधिकतम मान निश्चित करना, यहाँ 28°C और 33°C। (ख) मान की परास ज्ञात करना: परास = 33-28 = 5। (ग) श्रेणी के आधार पर एक पूर्ण संख्या में अंतराल निश्चित करना। (घ) सूत्र [दो बिंदुओं के बीच की दूरी/दो मानों के बीच अंतर × अंतराल] लगाना: दोनों बिंदुओं की दूरी 1 सेमी (10 मिमी) मानने पर, 30°C, 28°C से 2 अंक दूर है, अतः (10/5)×2 = 4 मिमी 28°C से; और 33°C से 3 अंक पीछे है, अतः (10/5)×3 = 6 मिमी 33°C से। दोनों गणनाएँ पुस्तक के परिणाम (4 मिमी व 6 मिमी) से मेल खाती हैं।
प्र. मिश्रित (यौगिक) दंड आरेख और बहुदंड आरेख में अंतर स्पष्ट कीजिए, तालिका 3.6 (भारत में बिजली उत्पादन) के उदाहरण सहित।
उत्तर: बहुदंड आरेख में प्रत्येक चर के लिए अलग-अलग दंड बनाए जाते हैं (जैसे तालिका 3.5 में कुल जनसंख्या, पुरुष और स्त्री साक्षरता दर के तीन अलग दंड प्रत्येक वर्ष के लिए)। इसके विपरीत मिश्रित/यौगिक दंड आरेख में विभिन्न चरों को एक ही दंड में विभिन्न आयतों में विभाजित करके दिखाया जाता है, जैसे तालिका 3.6 में प्रत्येक वर्ष का एक ही दंड कुल विद्युत उत्पादन को दर्शाता है, और उस दंड की कुल लंबाई को ऊष्मीय, जलीय व नाभिकीय भागों में बाँटा जाता है (2010-11: कुल 844.8 अरब kWh में ऊष्मीय 704.3, जलीय 114.2, नाभिकीय 26.3)।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. भारत की साक्षरता दर के आंकड़ों (तालिका 3.5, 1951-2011) को दर्शाने के लिए किस आरेख का प्रयोग करेंगे और क्यों? इसकी रचना-विधि पूर्ण चरणों सहित समझाइए।
उत्तर: तालिका 3.5 में हर वर्ष के लिए तीन चर (कुल जनसंख्या, पुरुष व स्त्री साक्षरता दर) दिए गए हैं, अतः इसके लिए बहुदंड आरेख सर्वाधिक उपयुक्त है, क्योंकि यह एक साथ कई चरों की तुलना के लिए बनाया जाता है। रचना: (क) बहुदंड आरेख को चुनना। (ख) X अक्ष पर समय-क्रम (वर्ष: 1951 से 2011) और Y अक्ष पर साक्षरता दर (0 से 90% तक उपयुक्त मापनी में) अंकित करना। (ग) प्रत्येक वर्ष के लिए तीन सटे हुए दंड बनाकर कुल जनसंख्या, पुरुष और स्त्री के प्रतिशत को बंद खानों (closed columns) में दिखाना, जैसे 2011 में कुल 73.0%, पुरुष 80.9%, स्त्री 64.6%। (घ) आरेख को शीर्षक, निर्देशिका (तीन रंग/छायाओं द्वारा तीनों वर्ग पहचानना) और स्रोत (जनगणना 2011) सहित पूर्ण करना।
प्र. तालिका 3.9 (भारत की जनसंख्या, 2001) के आंकड़ों को बिंदुकित मानचित्र द्वारा प्रदर्शित करने की संपूर्ण प्रक्रिया, आवश्यकताओं और सावधानियों सहित समझाइए।
उत्तर: आवश्यकताएँ: (क) राज्य/जिला/खंड की सीमाएँ दिखाने वाला प्रशासनिक मानचित्र। (ख) चुनी हुई इकाई की सांख्यिकीय आंकड़े (यहाँ कुल जनसंख्या)। (ग) बिंदु का मान निश्चित करने हेतु मापनी का चुनाव। (घ) प्रदेश का भू-आकृतिक मानचित्र, विशेषकर उच्चावच व अपवाह मानचित्र। रचना: 1 बिंदु = 1,00,000 जनसंख्या मानकर हर राज्य के लिए बिंदु-संख्या निकाली जाती है, जैसे महाराष्ट्र 9,67,52,247÷1,00,000=967.52, जो 0.5 से अधिक भिन्नात्मक भाग के कारण 968 में पूर्णांकित होता है; इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के लिए 1,660 बिंदु और सिक्किम के लिए मात्र 5 बिंदु मिलते हैं। फिर इन बिंदुओं को हर राज्य के भीतर समान रूप से अंकित किया जाता है। सावधानियाँ: प्रशासनिक सीमा-रेखाएँ बहुत घनी/मोटी न हों; हर बिंदु का आकार समान हो; भू-आकृतिक मानचित्र देखकर पर्वतीय, रेगिस्तानी और बर्फ़ से ढके निर्जन क्षेत्रों में जान-बूझकर कम बिंदु अंकित किए जाते हैं ताकि मानचित्र वास्तविक वितरण को सही दर्शाए।
प्र. तालिका 3.10 (भारत में साक्षरता दर, 2001) के आंकड़ों को वर्णमात्री मानचित्र द्वारा प्रदर्शित करने की संपूर्ण प्रक्रिया, परास-अंतराल गणना और पाँचों श्रेणियों सहित समझाइए।
उत्तर: पहले आंकड़ों को चढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है: सबसे कम बिहार (47.0%) और सबसे अधिक केरल (90.9%, गणना हेतु पुस्तक में 91.0 पूर्णांकित)। परास = 91.0-47.0 = 44.0। अंतराल = परास/5 = 44.0/5 = 8.8, जिसे पूर्णांकित कर 9.0 लिया जाता है। इस अंतराल को न्यूनतम मान 47.0 में क्रमशः जोड़कर पाँच श्रेणियाँ बनती हैं: 47-56 अति निम्न (बिहार, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर), 56-65 निम्न (उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मेघालय, उड़ीसा, असम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़), 65-74 मध्यम (नागालैंड, कर्नाटक, हरियाणा, प.बंगाल, सिक्किम, गुजरात, पंजाब, मणिपुर, उत्तरांचल, त्रिपुरा, तमिलनाडु), 74-83 उच्च (हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, गोवा), 83-92 अति उच्च (मिज़ोरम, केरल)। अंत में निम्न से उच्च श्रेणी तक क्रमशः गहरे होते रंग/प्रतिरूप देकर मानचित्र को मानचित्र-योजना (शीर्षक, निर्देशिका, स्रोत, मापनी) सहित पूर्ण किया जाता है।
प्र. सममान रेखा मानचित्र क्या है? इसकी आवश्यकताएँ, नियम और क्षेपक की संपूर्ण विधि सूत्र सहित समझाइए।
उत्तर: सममान रेखा मानचित्र वह मानचित्र है जिसमें एक काल्पनिक रेखा, जो समान मान के स्थानों को जोड़ती है (जैसे समताप, समवायुदाब, समवर्षा, सममेघ, आइसोहेल, समोच्च, सम गहराई, समलवणता रेखा), खींची जाती है; यह शब्द आइसो (बराबर) और प्लेथ (रेखाएँ) से बना है। आवश्यकताएँ: विभिन्न स्थानों की स्थिति दर्शाने वाला आधार मानचित्र, निश्चित समय का अनुकूल आंकड़ा, तथा चित्रांकन उपकरण (जैसे फ्रेंच कर्व)। नियम: बराबर मानों की सममान रेखाएँ कभी नहीं काटतीं; मानों का बराबर अंतराल (5, 10 या 20) चुना जाता है; मान रेखा के साथ या तोड़कर लिखा जाता है। क्षेपक की विधि: (क) मानचित्र पर न्यूनतम-अधिकतम मान निश्चित करना, (ख) परास (अधिकतम-न्यूनतम) निकालना, (ग) एक पूर्ण संख्या में अंतराल तय करना, (घ) सूत्र [दो बिंदुओं की दूरी/दोनों मानों का अंतर × अंतराल] से ठीक बिंदु निकालना, उदाहरणतः 28°C व 33°C (10 मिमी दूरी, अंतर 5) के बीच 30°C रेखा 28°C से 4 मिमी दूर और 33°C से 6 मिमी पहले खींची जाती है।
प्र. तालिका 3.7 के आंकड़ों (भारतीय निर्यात, 2010-11) से वृत्त आरेख बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया, कोण-गणना सहित समझाइए।
उत्तर: आंकड़ों को प्रतिशत के चढ़ते क्रम में व्यवस्थित कर हर क्षेत्र का कोण मान/कुल×360 (या प्रतिशत×3.6) सूत्र से निकाला जाता है: अन्य 2.3×3.6=8.28°→8°, अफ्रीका 6.5×3.6=23.4°→23°, अमेरिका 14.8×3.6=53.28°→53°, यूरोप 20.2×3.6=72.72°→73°, एशिया व ASEAN 56.2×3.6=202.32°→203° (कुल ठीक 360° बनाने हेतु पुस्तक का पूर्णांकन-समायोजन, जाँच: 73+23+53+203+8=360)। रचना: (क) आंकड़ा-समूह के अनुरूप उपयुक्त त्रिज्या (3, 4 या 5 सेमी) चुनना, (ख) केंद्र से चाप तक त्रिज्या-रेखा खींचना, (ग) प्रत्येक श्रेणी का कोण चढ़ते क्रम में, दक्षिणावर्त, सबसे छोटे कोण से शुरू कर मापना (बड़े कोण से आरंभ करने पर त्रुटि-संचयन का खतरा रहता है), (घ) शीर्षक, उपशीर्षक और निर्देशिका (अलग-अलग रंगों में हर क्षेत्र हेतु सूचिका-चिह्न) से आरेख पूर्ण करना।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक दी गई आंकड़ा-प्रकृति (कुल का प्रतिशत, पाँच श्रेणियाँ) के लिए कौन-सा आरेख सर्वाधिक उपयुक्त होगा?
उत्तर: वृत्त आरेख (विभाजित वृत्त आरेख), क्योंकि यह किसी कुल मूल्य के उप-समूहों को दर्शाने के लिए उपयुक्त है।
(ख) 2 अंक एशिया व ASEAN क्षेत्र (56.2%) के लिए कोण की गणना कीजिए, और बताइए पुस्तक इसे किस मान में पूर्णांकित करती है।
उत्तर: 56.2 × 3.6 = 202.32°। पुस्तक इसे 203° में पूर्णांकित करती है, ताकि पाँचों क्षेत्रों (73+23+53+203+8) का योग ठीक 360° हो सके, यह पुस्तक का अपना समायोजन है, सामान्य पूर्णांकन नियम से नहीं।
(ग) 2 अंक वृत्त आरेख में कोण मापने की शुरुआत किस क्रम में करनी चाहिए, और ऐसा क्यों?
उत्तर: कोण मापने की शुरुआत सबसे छोटे कोण से, दक्षिणावर्त, चढ़ते क्रम में करनी चाहिए। बड़े कोण से शुरुआत करने पर त्रुटियों का संचयन होता है, जिससे छोटे कोण को सही ढंग से दर्शाना कठिन हो जाता है।
(घ) 1 अंक वृत्त आरेख को और किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: विभाजित वृत्त आरेख (Divided Circle Diagram)।
(क) 1 अंक प्रवाह संचित्र किसे दर्शाने के लिए बनाया जाता है?
उत्तर: प्रवाह संचित्र उत्पत्ति और उद्देश्य के स्थानों के बीच वस्तुओं अथवा लोगों (जैसे यहाँ रेलगाड़ियों) के प्रवाह को दर्शाने के लिए बनाया जाता है।
(ख) 2 अंक प्रवाह संचित्र बनाने के लिए आवश्यक कोई तीन शर्तें लिखिए।
उत्तर: (1) स्टेशनों को जोड़ने वाला मार्ग मानचित्र। (2) उत्पत्ति-बिंदु व दिशा सहित वस्तुओं/वाहनों की संख्या का आंकड़ा। (3) मात्रा/संख्या के अनुरूप एक उपयुक्त मापनी का चुनाव।
(ग) 2 अंक यदि मापनी 1 सेमी = 50 रेलगाड़ी (जिसे 10 मिमी पट्टी से दर्शाया जाता है) चुनी जाए, तो न्यूनतम संख्या 6 रेलगाड़ियों के लिए पट्टी की मोटाई सीधे अनुपात से परिकलित कीजिए।
उत्तर: सीधे अनुपात से: (6/50) × 10 मिमी = 1.2 मिमी। यह पुस्तक के अपने कथन (‘1.2 मिमी मोटी रेखा’) से पूरी तरह मेल खाता है।
(घ) 1 अंक इसी मापनी (1 सेमी = 50 रेलगाड़ी) पर निज़ामुद्दीन-बदरपुर मार्ग (30 रेलगाड़ियाँ) की पट्टी कितनी मोटी खींची जाएगी?
उत्तर: सीधे अनुपात से: (30/50) × 10 मिमी = 6 मिमी मोटी पट्टी।