NCERT की पाठ्यपुस्तक भूगोल में प्रयोगात्मक कार्य, भाग-2 के अध्याय 3 (आंकड़ों का आलेखी निरूपण) की प्रश्नावली/अभ्यास के दोनों प्रश्न, क्रियाकलाप और पाठ के बीच की क्रिया, ठीक उसी रूप में जैसे किताब के हिंदी संस्करण में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।
1 दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए (अभ्यास प्रश्न 1)
प्र. जनसंख्या वितरण दर्शाया जाता है:
(क) वर्णमात्री मानचित्रों द्वारा (ख) सममान रेखा मानचित्रों द्वारा (ग) बिंदुकित मानचित्रों द्वारा (घ) ऊपर में से कोई भी नहीं
उत्तर: (ग) बिंदुकित मानचित्रों द्वारा। अध्याय स्पष्ट कहता है कि जनसंख्या वितरण, मानव और पशुधन दोनों, बिंदु मानचित्र द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है; बिंदुकित मानचित्र भी उसी सिद्धांत पर विस्तार से दिया गया एक प्रकार है।
प्र. जनसंख्या की दशकीय वृद्धि को सबसे अच्छा प्रदर्शित करने का तरीका है:
(क) रेखा ग्राफ़ (ख) दंड आरेख (ग) वृत्त आरेख (घ) ऊपर में से कोई भी नहीं
उत्तर: (क) रेखा ग्राफ़। अध्याय के अनुसार जनसंख्या वृद्धि जैसे समय-क्रम आंकड़ों को दर्शाने के लिए रेखा ग्राफ़ सबसे उपयुक्त विधि है (उदाहरण 3.1, तालिका 3.1)।
प्र. बहुरेखाचित्र की रचना प्रदर्शित करती है:
(क) केवल एक चर (ख) दो चरों से अधिक (ग) केवल दो चर (घ) ऊपर में से कोई भी नहीं
उत्तर: (ख) दो चरों से अधिक। अध्याय के अनुसार बहुरेखाचित्र एक रेखा ग्राफ़ है जिसमें दो या दो से अधिक चरों की तत्काल तुलना के लिए, रेखाओं की बराबर संख्या द्वारा चरों को दर्शाया जाता है (जैसे तालिका 3.2 में तीन राज्यों का लिंग अनुपात)। दिए गए विकल्पों में यही परिभाषा से मेल खाता है; “केवल एक चर” तो साधारण रेखा ग्राफ़ है।
प्र. कौन-सा मानचित्र ‘गतिदर्शी मानचित्र’ जाना जाता है:
(क) बिंदुकित मानचित्र (ख) सममान रेखा मानचित्र (ग) वर्णमात्री मानचित्र (घ) प्रवाह संचित्र
उत्तर: (घ) प्रवाह संचित्र। अध्याय के मुख्य भाग में प्रवाह संचित्र को ‘गतिक मानचित्र’ कहा गया है।
टिप्पणी: यह अभ्यास-प्रश्न ‘गतिदर्शी मानचित्र’ शब्द प्रयोग करता है, जबकि अध्याय की मुख्य विषय-वस्तु में इसी अवधारणा के लिए ‘गतिक मानचित्र’ शब्द प्रयुक्त हुआ है। यह किताब की अपनी आंतरिक शब्दावली-भिन्नता है, अध्याय के मुख्य भाग और अभ्यास-खंड के बीच।
2 निम्नलिखित प्रश्नों के 30 शब्दों में उत्तर दीजिए (अभ्यास प्रश्न 2)
प्र. थिमैटिक मानचित्र क्या हैं?
उत्तर: थिमैटिक मानचित्र वे मानचित्र हैं जो मानचित्रों की विविधता/प्रादेशिक वितरणों के प्रतिरूपों अथवा स्थानों पर विविधताओं की विशेषताओं को समझने के लिए बनाए जाते हैं। इन्हें वितरण मानचित्र भी कहा जाता है, जैसे जनसंख्या घनत्व या साक्षरता दर के मानचित्र।
प्र. आंकड़े के प्रस्तुतीकरण से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर: आलेख, आरेख, मानचित्र और चार्ट जैसी दृश्य विधियों द्वारा आंकड़ों के रूपांतरण को आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण कहते हैं। यह किसी भौगोलिक सीमा में जनसंख्या वृद्धि, वितरण, घनत्व आदि के प्रतिरूपों को सहज व समझने योग्य बनाता है।
प्र. बहुदंड आरेख और यौगिक दंड आरेख में अंतर बताइए।
उत्तर: बहुदंड आरेख में प्रत्येक चर के लिए अलग-अलग, पास-पास सटे दंड बनाए जाते हैं (जैसे तालिका 3.5 में कुल, पुरुष व स्त्री साक्षरता के तीन अलग दंड)। यौगिक (मिश्रित) दंड आरेख में विभिन्न चरों को एक ही दंड में विभिन्न आयतों द्वारा दर्शाया जाता है (जैसे तालिका 3.6 में एक दंड में ऊष्मीय, जलीय व नाभिकीय बिजली के भाग)।
प्र. एक बिंदुकित मानचित्र की रचना के लिए क्या आवश्यकताएँ हैं?
उत्तर: (क) राज्य/जिला/खंड की सीमाएँ दिखाने वाला प्रशासनिक मानचित्र। (ख) चुनी हुई प्रशासनिक इकाई के लिए सांख्यिकीय आंकड़े (जैसे कुल जनसंख्या)। (ग) एक बिंदु का मान निश्चित करने के लिए मापनी का चुनाव। (घ) प्रदेश का भू-आकृतिक मानचित्र, विशेषकर उच्चावच और जल अपवाह मानचित्र।
प्र. सममान रेखा मानचित्र क्या है? एक क्षेपक को किस प्रकार कार्यान्वित किया जाता है?
उत्तर: सममान रेखा मानचित्र वह मानचित्र है जिसमें समान मान के स्थानों को जोड़ने वाली एक काल्पनिक रेखा (जैसे समताप, समवर्षा रेखा) खींची जाती है। क्षेपक दो स्थानों के प्रेक्षित मानों के बीच मध्य मान प्राप्त करने की विधि है: इसके लिए न्यूनतम-अधिकतम मान निश्चित कर, परास (अधिकतम-न्यूनतम) निकालकर, एक पूर्ण संख्या में अंतराल तय कर, सूत्र [दो बिंदुओं की दूरी/मानों का अंतर × अंतराल] से ठीक बिंदु ज्ञात किया जाता है।
प्र. एक वर्णमात्री मानचित्र को तैयार करने के लिए अनुसरण करने वाले महत्वपूर्ण चरणों की सचित्र व्याख्या कीजिए।
उत्तर: (क) आंकड़ों को चढ़ते अथवा उतरते क्रम में व्यवस्थित करना। (ख) आंकड़े को अति उच्च से अति निम्न तक 5 श्रेणियों में वर्गीकृत करना। (ग) श्रेणियों के बीच अंतराल परास/5 सूत्र से ज्ञात करना (उदाहरण 3.13 में साक्षरता दर के लिए 44.0/5=8.8→9.0)। (घ) निम्न से उच्च तक हर श्रेणी को क्रमशः गहरे रंग/प्रतिरूप देकर मानचित्र को मानचित्र-योजना (शीर्षक, निर्देशिका, स्रोत, मापनी) सहित पूर्ण करना।

प्र. आंकड़े को वृत्त आरेख की सहायता से प्रदर्शित करने के लिए महत्वपूर्ण चरणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर: आंकड़ों को प्रतिशत के चढ़ते क्रम में व्यवस्थित कर हर चर का कोण [मान/कुल×360, या प्रतिशत×3.6] सूत्र से निकाला जाता है (उदाहरण 3.7)। फिर उपयुक्त त्रिज्या (3, 4 या 5 सेमी) का वृत्त बनाकर, केंद्र से चाप तक त्रिज्या-रेखा खींचकर, सबसे छोटे कोण से दक्षिणावर्त चढ़ते क्रम में कोण मापे जाते हैं (बड़े कोण से शुरुआत त्रुटि-संचयन बढ़ाती है), और अंत में शीर्षक, उपशीर्षक व निर्देशिका से आरेख पूर्ण किया जाता है।
3 क्रियाकलाप
अभ्यास के अंत में पाँच क्रियाकलाप दिए गए हैं, जिनमें आंकड़ों को आरेख द्वारा दर्शाना है। परीक्षा में आरेख ग्राफ़ पेपर पर बनाना होता है; नीचे हर क्रियाकलाप के लिए उपयुक्त आरेख, मापनी, आवश्यक गणना और रचना के चरण दिए गए हैं, और अंत में तैयार मॉडल आरेख भी दिखाया गया है (क्रियाकलाप 4 के दोनों मानचित्रों को छोड़कर, जिनके लिए भारत का रेखा मानचित्र चाहिए)।
प्र. निम्न आंकड़े को अनुकूल/उपयुक्त आरेख द्वारा प्रदर्शित कीजिए: भारत: नगरीकरण की प्रवृत्ति 1901-2001 (दशवार्षिक वृद्धि %: 1911 0.35, 1921 8.27, 1931 19.12, 1941 31.97, 1951 41.42, 1961 26.41, 1971 38.23, 1981 46.14, 1991 36.47, 2001 31.13)।
उत्तर: उपयुक्त आरेख: रेखा ग्राफ़। अध्याय के अनुसार विभिन्न समयावधियों के बीच जनसंख्या वृद्धि के आंकड़े रेखा ग्राफ़ द्वारा सबसे अच्छी तरह दर्शाए जाते हैं। चरण: (क) आंकड़ों को सरल कीजिए, जैसे 0.35 को 0.4, 8.27 को 8.3; (ख) X अक्ष पर 1911 से 2001 तक के वर्ष बराबर अंतराल पर अंकित कीजिए; (ग) Y अक्ष पर 1 सेमी = 5 प्रतिशत की मापनी से 0 से 50 तक अंकित कीजिए (कोई मान ऋणात्मक नहीं है); (घ) हर दशक का मान बिंदु से अंकित करके बिंदुओं को हाथ से खींची रेखा से जोड़िए; (ङ) शीर्षक “भारत: नगरीकरण की प्रवृत्ति, 1901-2001” लिखिए। ग्राफ़ 1981 में 46.14 प्रतिशत के शिखर तक पहुँचता है, जबकि 1961 (26.41) और 1991 (36.47) में गिरावट दिखती है।
प्र. निम्नलिखित आंकड़े को उपयुक्त आरेख की सहायता से प्रदर्शित कीजिए: भारत: प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में साक्षरता और नामांकन अनुपात (1950-51 और 1999-2000)।
उत्तर: उपयुक्त आरेख: बहुदंड आरेख, क्योंकि एक ही वर्ष के लिए कई संबंधित चरों की तुलना करनी है, जैसे अध्याय में तालिका 3.5 (कुल, पुरुष, स्त्री साक्षरता) के लिए किया गया है। हर वर्ष के लिए दंडों के तीन समूह बनाइए: साक्षरता अनुपात (1950-51 में व्यक्ति 18.3, पुरुष 27.2, स्त्री 8.86; 1999-2000 में 65.4, 75.8, 54.2), प्राथमिक नामांकन अनुपात (लड़के 60.6, लड़कियाँ 25, कुल 42.6; फिर 104, 85, 94.9) और उच्च प्राथमिक नामांकन अनुपात (लड़के 20.6, लड़कियाँ 4.6, कुल 12.7; फिर 67.2, 50, 58.8)। Y अक्ष पर 1 सेमी = 10 की मापनी (0 से 110 तक, क्योंकि एक मान 104 है) लीजिए, सभी दंड बराबर चौड़ाई के रखिए और हर चर को अलग छाया देकर निर्देशिका बनाइए।
प्र. निम्नलिखित आंकड़े को वृत्त आरेख की सहायता से प्रदर्शित कीजिए: भारत: भूमि उपयोग 1951-2001 (1950-51 और 1998-2001)।
उत्तर: दोनों वर्षों के लिए एक ही त्रिज्या (जैसे 4 सेमी) के दो वृत्त आरेख बनाइए। आंकड़े प्रतिशत में हैं, इसलिए कोण = प्रतिशत × 3.6।
| भूमि उपयोग | 1950-51 (%) | कोण | 1998-2001 (%) | कोण |
|---|---|---|---|---|
| शुद्ध (निवल) बोया गया क्षेत्र | 42 | 151.2° | 46 | 165.6° |
| वन | 14 | 50.4° | 22 | 79.2° |
| कृषि के लिए अप्राप्य | 17 | 61.2° | 14 | 50.4° |
| परती भूमि | 10 | 36.0° | 8 | 28.8° |
| चरागाह और पेड़ | 9 | 32.4° | 5 | 18.0° |
| कृषि योग्य बंजर भूमि | 8 | 28.8° | 5 | 18.0° |
| योग | 100 | 360° | 100 | 360° |
कोणों को दक्षिणावर्त, सबसे छोटे कोण से चढ़ते क्रम में मापिए और दोनों वृत्तों को शीर्षक व एक ही निर्देशिका से पूर्ण कीजिए।
प्र. नीचे दी गई तालिका (बड़े राज्यों में चावल के क्षेत्र और उत्पादन) का अध्ययन कीजिए और दिए हुए आरेखों/मानचित्रों को खींचिए: (क) प्रत्येक राज्य में चावल के क्षेत्र को दिखाने के लिए एक बहुदंड आरेख की रचना कीजिए। (ख) प्रत्येक राज्य में चावल के अंतर्गत क्षेत्र के प्रतिशत को दिखाने के लिए एक वृत्त आरेख की रचना कीजिए। (ग) प्रत्येक राज्य में चावल के उत्पादन को दिखाने के लिए एक बिंदुकित मानचित्र की रचना कीजिए। (घ) राज्यों में चावल उत्पादन के प्रतिशत को दिखाने के लिए एक वर्णमात्री मानचित्र की रचना कीजिए।
उत्तर: (क) बहुदंड आरेख: हर राज्य के लिए दो पास-पास दंड बनाइए, क्षेत्र (हजार हेक्टेयर में: पश्चिम बंगाल 5,435; उत्तर प्रदेश 5,839; आंध्र प्रदेश 4,028; पंजाब 2,611; तमिलनाडु 2,113; बिहार 3,671) और उत्पादन (हजार टन में: 12,428; 11,540; 12,428; 9,154; 7,218; 5,417), दोनों एक ही मापनी पर, जैसे 1 सेमी = 2,000 हजार। (प्रतिशत-स्तंभ की इकाई अलग है, इसलिए उसे इन दंडों के साथ एक ही अक्ष पर नहीं दिखाया जाता।)
(ख) वृत्त आरेख (कोण = प्रतिशत × 3.6)। छह राज्यों का कुल हिस्सा 53.6 प्रतिशत है, इसलिए शेष 46.4 प्रतिशत “अन्य राज्य” के रूप में दिखाइए: पश्चिम बंगाल 12.3 → 44.3°; उत्तर प्रदेश 13.2 → 47.5°; आंध्र प्रदेश 9.1 → 32.8°; पंजाब 5.9 → 21.2°; तमिलनाडु 4.8 → 17.3°; बिहार 8.3 → 29.9°; अन्य राज्य 46.4 → 167.0°; योग 360°।
(ग) बिंदुकित मानचित्र (उत्पादन): एक बिंदु का मान चुनिए, जैसे 1 बिंदु = 2,00,000 टन (200 हजार टन)। बिंदु = उत्पादन ÷ 200: पश्चिम बंगाल 12,428 → 62.1 → 62 बिंदु; उत्तर प्रदेश 11,540 → 57.7 → 58; आंध्र प्रदेश 12,428 → 62.1 → 62; पंजाब 9,154 → 45.8 → 46; तमिलनाडु 7,218 → 36.1 → 36; बिहार 5,417 → 27.1 → 27। रूपरेखा मानचित्र पर हर राज्य में समान आकार के बिंदु लगाइए, पर्वतीय या मरुस्थलीय भागों में कम।
(घ) वर्णमात्री मानचित्र (उत्पादन का प्रतिशत): मानों को क्रम में लगाइए (6.4, 8.5, 10.8, 13.5, 13.6, 14.6); परास = 14.6 − 6.4 = 8.2; अंतराल = 8.2 ÷ 5 = 1.64। श्रेणियाँ: 6.40-8.04 अति निम्न (बिहार); 8.04-9.68 निम्न (तमिलनाडु); 9.68-11.32 मध्यम (पंजाब); 11.32-12.96 उच्च (कोई राज्य नहीं); 12.96-14.60 अति उच्च (आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल)। श्रेणियों को हल्के से गहरे रंग में दिखाकर निर्देशिका बनाइए। (तालिका में पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश का उत्पादन एक ही, 12,428, छपा है पर प्रतिशत अलग हैं; यह मानचित्र प्रश्न के अनुसार प्रतिशत वाले स्तंभ से बनाइए।)
प्र. कोलकाता के तापमान और वर्षा के निम्नलिखित आंकड़े को एक उपयुक्त आरेख द्वारा दर्शाइए।
उत्तर: उपयुक्त आरेख: रेखा और दंड आरेख, जैसे अध्याय में दिल्ली के तापमान-वर्षा (तालिका 3.4) के लिए बनाया गया है। X अक्ष को 12 महीनों में बाँटिए। वर्षा को बाईं ओर के Y अक्ष पर दंडों से 1 सेमी = 5 सेमी वर्षा की मापनी पर (0 से 35 तक, क्योंकि अधिकतम 33.4 सेमी अगस्त में है), और तापमान को दाईं ओर के Y अक्ष पर रेखा से 1 सेमी = 5°C की मापनी पर (0 से 35 तक, क्योंकि अधिकतम 30.4°C मई में है) दर्शाइए। आरेख में तापमान का शिखर मई में, मानसून से ठीक पहले, और वर्षा का शिखर जुलाई-अगस्त (33.1 और 33.4 सेमी) में दिखता है।
4 पाठ के बीच की क्रिया
पाठगत क्रिया. चित्र 3.2 में दिखाए गए 1911 और 1921 के बीच जनसंख्या में अचानक आए परिवर्तन के लिए कारणों को खोजिए।
उत्तर: चित्र 3.2 में वृद्धि दर 1911 के 0.56 प्रतिशत से गिरकर 1921 में −0.3 प्रतिशत हो जाती है, जो तालिका 3.1 का एकमात्र ऋणात्मक मान है, यानी उस दशक में जनसंख्या घट गई। इसका मुख्य कारण बहुत ऊँची मृत्यु दर थी: 1918-19 की इन्फ्लुएंज़ा महामारी से भारत में लाखों लोगों की मृत्यु हुई, और इन्हीं वर्षों में अकाल तथा प्लेग, मलेरिया व हैज़ा जैसी महामारियों से भी भारी जनहानि हुई। मृत्यु की संख्या जन्म से अधिक होने के कारण जनसंख्या वृद्धि ऋणात्मक हो गई।
दोनों संस्करणों में प्रश्न 1 में 4 और प्रश्न 2 में 7 उप-प्रश्न हैं, पर प्रश्न 2 की सामग्री अलग है: हिंदी संस्करण में “आंकड़े के प्रस्तुतीकरण से आपका क्या तात्पर्य है?” पूछा गया है, जबकि अंग्रेज़ी संस्करण में उसकी जगह यातायात प्रवाह मानचित्र की रचना-विधि पूछी गई है। यहाँ हिंदी संस्करण के प्रश्न ही दिए गए हैं। वृत्त आरेख के कोण-सूत्र (मान/कुल × 360) और वर्णमात्री मानचित्र के अंतराल-सूत्र (परास/5) पर आधारित संख्यात्मक प्रश्नों का अभ्यास ऊपर के क्रियाकलापों से कीजिए।