कक्षा 12 भूगोल अध्याय 21 NCERT Solutions (प्रश्नावली के हल) हिंदी में

NCERT की पाठ्यपुस्तक भूगोल में प्रयोगात्मक कार्य, भाग-2 के अध्याय 4 (स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी) की प्रश्नावली/अभ्यास के सभी प्रश्न, ठीक उसी रूप में जैसे किताब के हिंदी संस्करण में छपे हैं, और हर प्रश्न का पूरा उत्तर। पहले ख़ुद उत्तर सोचिए, फिर मिलाइए।

1 बहुविकल्पीय प्रश्न (अभ्यास प्रश्न 1)

प्रश्न 1(i)

प्र. “स्थानिक आंकड़ों के लक्षण निम्नांकित स्वरूप में दिखाई देते हैं—”
(क) अवस्थितिक  (ख) रैखिक  (ग) क्षेत्रीय  (घ) उपर्युक्त सभी स्वरूपों में

उत्तर: (घ) उपर्युक्त सभी स्वरूपों में। अध्याय के अनुसार स्थानिक आंकड़े अपनी अवस्थितिक, रैखिक और क्षेत्रीय रूप की उपस्थिति द्वारा अभिलक्षित होते हैं (चित्र 4.1 में बिंदु, रेखा और क्षेत्र लक्षण)।

प्रश्न 1(ii)

प्र. विश्लेषक मॉड्यूल सॉफ़्टवेयर के लिए कौन-सा एक प्रचालन आवश्यक है?
(क) आंकड़ा संग्रहण  (ख) आंकड़ा प्रदर्शन  (ग) आंकड़ा निष्कर्षण  (घ) बफ़रिंग

उत्तर: (घ) बफ़रिंग। आंकड़ा संग्रहण, प्रदर्शन और निष्कर्षण मूल निवेश-बहिर्वेश कार्य हैं, जबकि बफ़रिंग एक स्थानिक विश्लेषण प्रचालन है जिसे विश्लेषक मॉड्यूल सॉफ़्टवेयर के बिना नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 1(iii)

प्र. चित्ररेखापुँज (रैस्टर) आंकड़ा फॉरमेट का एक अवगुण क्या है?
(क) सरल आंकड़ा संरचना  (ख) सहज एवं कुशल उपरिशायी  (ग) सुदूर संवेदन प्रतिबिंब के लिए सक्षम  (घ) कठिन परिपथ चाल विश्लेषण

उत्तर: (घ) कठिन परिपथ चाल (जाल) विश्लेषण। बॉक्स 4.2 के अनुसार परिपथ जाल विश्लेषण रैस्टर मॉडल की एक हानि है; बाकी तीनों विकल्प (सरल संरचना, सहज अधिचित्रण, सुदूर संवेदन प्रतिबिंबों से संगति) रैस्टर के गुण हैं, अवगुण नहीं।

प्रश्न 1(iv)

प्र. सदिश (वेक्टर) आंकड़ा फॉरमेट का एक गुण क्या है?
(क) समिश्र आंकड़ा संरचना  (ख) कठिन उपरिशायी प्रचालन  (ग) सुदूर संवेदन आंकड़ांे के साथ कठिन सुसंगतता  (घ) सघन आंकड़ा संरचना

उत्तर: (घ) सघन (संहत) आंकड़ा संरचना। बॉक्स 4.2 के अनुसार संहत आंकड़ा संरचना वेक्टर मॉडल का गुण है; समिश्र (जटिल) संरचना, कठिन अधिचित्रण और सुदूर संवेदन से असंगति तो वेक्टर की हानियाँ हैं, गुण नहीं।

प्रश्न 1(v)

प्र. “भौगोलिक सूचना तंत्र कोर में उपयोग कर नगरीय परिवर्तन की पहचान कुशलतापूर्वक की जाती है—”
(क) उपरिशायी प्रचालन  (ख) सामीप्य विश्लेषण  (ग) परिपथ जाल विश्लेषण  (घ) बफरिंग

उत्तर: (क) उपरिशायी (अधिचित्रण) प्रचालन। अध्याय स्वयं अलीगढ़ नगर के 1974 और 2001 के भूमि उपयोग मानचित्रों को अधिचित्रित कर नगरीय भूमि उपयोग परिवर्तन और नगरीय प्रसार मापने का उदाहरण देता है (चित्र 4.8, 4.9, 4.10)।

2 लगभग 30 शब्दों में उत्तर (अभ्यास प्रश्न 2, हिंदी संस्करण के अपने छह उप-प्रश्न)

प्रश्न 2(i)

प्र. चित्ररेखापुँज एवं सदिश (वेक्टर) आंकड़ा मॉडल के मध्य अंतर।

उत्तर: चित्ररेखापुँज (रैस्टर) आंकड़े किसी वस्तु को वर्गों (सेल) के जाल में दर्शाते हैं, जहाँ हर सेल को एक मूल्य दिया जाता है। सदिश (वेक्टर) आंकड़े वस्तु को विशिष्ट बिंदुओं के बीच खींची गई रेखाओं के समुच्चय, यानी उनके निर्देशांकों (X,Y अथवा X,Y,Z) के रूप में भंडारित करते हैं।

प्रश्न 2(ii)

प्र. उपरिशायी विश्लेषण क्या है?

उत्तर: उपरिशायी (अधिचित्रण) विश्लेषण GIS का प्रमाण चिह्न है, जिसमें उसी क्षेत्र के मानचित्रों के दो या अधिक विषयक स्तरों को अधिचित्रित (एक-दूसरे पर रखकर) करके एक नया मानचित्र स्तर प्राप्त किया जाता है, जो चालनी मानचित्रण जैसा प्रचालन है।

प्रश्न 2(iii)

प्र. भौगोलिक सूचना तंत्र में हस्तचलित विधि के गुण क्या हैं?

उत्तर: मानचित्र (हस्तचलित विधि) की तुलना में GIS में आंकड़ा भंडारण और प्रदर्शन अलग-अलग होते हैं, इसलिए प्रयोक्ता स्थानिक लक्षणों के बारे में प्रश्न पूछकर गुण न्यास निकाल सकते हैं, गुण न्यास की जाँच से नए मानचित्र आलेखित कर सकते हैं, समन्वित सूचनाधार पर स्थानिक प्रचालन (अधिचित्रण/बफ़रिंग) लगाकर नई सूचना बना सकते हैं, और अंश अवस्थिति कोड की सहायता से भिन्न आंकड़ा-मदों को जोड़ सकते हैं।

प्रश्न 2(iv)

प्र. भौगोलिक सूचना तंत्र के महत्वपूर्ण घटक क्या हैं?

उत्तर: GIS के पाँच महत्वपूर्ण घटक हैं: हार्डवेयर, सॉफ़्टवेयर, आंकड़े, लोग और प्रक्रिया, जो सभी मिलकर आंकड़ों के प्रग्रहण, भंडारण, विश्लेषण और प्रदर्शन का कार्य करते हैं (चित्र 4.2)।

प्रश्न 2(v)

प्र. भौगोलिक सूचना तंत्र के कोर में स्थानिक सूचना बनाने की विधि क्या है?

उत्तर: GIS का क्रोड आंकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक रूप में आंकड़े प्राप्त करके, विद्यमान अनुरूप (कागज़ी) आंकड़ों का अंकीकरण करके, अथवा भौगोलिक सत्ताओं का स्वयं सर्वेक्षण करके बनाया जा सकता है।

प्रश्न 2(vi)

प्र. स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी क्या है?

उत्तर: स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी का संबंध स्थानिक सूचना के संग्रहण, भंडारण, पुनर्प्राप्ति, प्रदर्शन, हेरफेर, प्रबंधन और विश्लेषण में प्रौद्योगिक निवेश के प्रयोग से है; यह सुदूर संवेदन, GPS, GIS, आंकिक मानचित्र कला और सूचनाधार प्रबंध प्रणालियों का सम्मिश्रण है।

3 125 शब्दों में उत्तर (अभ्यास प्रश्न 3)

प्रश्न 3(i)

प्र. चित्ररेखापँुज (रैस्टर) एवं सदिश (वेक्टर) आंकड़ा फॉरमेट को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: रैस्टर फॉर्मेट किसी लक्षण को वर्गों (सेल) के जाल के प्रारूप में दर्शाता है; हर सेल को उसके स्थान के गुण के आधार पर एक मूल्य मिलता है और पंक्ति-स्तंभ निर्देशांक किसी भी पिक्सेल की पहचान कर सकते हैं। सेल-आकार व सेल-संख्या के अनुपात को विभेदन कहते हैं। उदाहरण के लिए 50 मीटर पिक्सेल के 20×16 जाल की तुलना में 25 मीटर पिक्सेल का 40×36 जाल चार गुना अधिक पिक्सेल (320 की जगह 1,440) देता है (चित्र 4.4)। रैस्टर वायव फ़ोटो/उपग्रह चित्रों के प्रदर्शन और ‘बैकड्राप’ मानचित्रों के लिए उपयुक्त है।
वेक्टर फॉर्मेट किसी वस्तु को विशिष्ट बिंदुओं के बीच खींची गई रेखाओं के समुच्चय के रूप में दर्शाता है; हर बिंदु को द्वि-आयामी (X,Y) अथवा त्रि-आयामी (X,Y,Z) निर्देशांकों से व्यक्त किया जाता है, और रेखाओं-बहुभुजों का निर्माण बिंदुओं के अनुक्रम से होता है। हस्तेन अंकीकरण इसकी सर्वोत्तम निवेश-विधि है। वेक्टर उच्च परिशुद्ध अनुप्रयोगों और व्यक्तिगत लक्षण-विश्लेषण के लिए उपयुक्त है, जैसे किसी सड़क को उसके आरंभिक-अंतिम बिंदुओं के निर्देशांकों से दर्शाना।

प्रश्न 3(ii)

प्र. भौगोलिक सूचना तंत्र से संबंधित कार्यांे को क्रमबद्ध रूप में किस प्रकार किया जाता है, एक व्याख्यात्मक लेख प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: GIS से संबंधित कार्य में पाँच क्रियाओं का अनुक्रम सम्मिलित होता है। (1) स्थानिक आंकड़ा निवेश: आंकड़ा आपूर्तिदाता से आंकिक आंकड़े प्राप्त करके या हस्तेन निवेश (अंकरूपण/क्रमवीक्षण) से। (2) गुण न्यास की प्रविष्टि: प्रकाशित रिकार्ड, जनगणना, सर्वेक्षण या स्प्रैडशीट जैसे स्रोतों से गुण न्यास को हस्तेन या मानक स्थानांतरण फॉर्मेट से निवेशित किया जाता है। (3) आंकड़ों का सत्यापन और संपादन: कंप्यूटर आलेख की मूल मानचित्र से तुलना कर त्रुटियाँ (अपूर्ण/दोहरे आंकड़े, ग़लत मापनी, विरूपण) चिह्नित व संशोधित की जाती हैं। (4) स्थानिक और गुण न्यास आंकड़ों की सहलग्नता: विभिन्न आंकड़ा समुच्चयों को यथार्थ, पदानुक्रमिक या अस्पष्ट सुमेलन विधियों से जोड़ा जाता है। (5) स्थानिक विश्लेषण: अधिचित्रण, बफ़र (और नामित परिपथ जाल विश्लेषण व अंकिक भू-भाग मॉडल) जैसे प्रचालनों से आंकड़ों को नीति-निर्माताओं के लिए उपयोगी सूचना में बदला जाता है, जो अंततः एक निर्णय-पोषित प्रणाली को संभव बनाता है।

परीक्षा संकेत

प्रश्न 1 के पाँचों वस्तुनिष्ठ प्रश्न, और प्रश्न 2(iv)/3(i) (GIS के घटक और रैस्टर-वेक्टर तुलना) परीक्षा की दृष्टि से विशेष महत्त्वपूर्ण हैं। ध्यान रहे कि प्रश्न 1(iii)/1(iv) में सही उत्तर हमेशा ‘अवगुण’ या ‘गुण’ शब्द से मेल खाने वाला विकल्प है, विपरीत गुण वाला विकल्प नहीं।