कक्षा 12 हिंदी अध्याय 1 आत्मपरिचय एवं एक गीत महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. हरिवंश राय बच्चन का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर: उनका जन्म सन् 1907 में इलाहाबाद में हुआ था।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. ‘एक गीत’ किस काव्य संग्रह से ली गई है?

उत्तर: यह बच्चन के काव्य संग्रह ‘निशा निमंत्रण’ से ली गई है।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. बच्चन के काव्य-दर्शन को क्या नाम दिया गया है?

उत्तर: उनके काव्य-दर्शन को ‘हालावाद’ कहा जाता है।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. ‘आत्मपरिचय’ कविता में कवि किसका पान करता है?

उत्तर: कवि ‘स्नेह-सुरा’ (प्रेम रूपी मदिरा) का पान करता है।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. बच्चन की आत्मकथा कुल कितने खंडों में है?

उत्तर: बच्चन की आत्मकथा चार खंडों में है।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. ‘एक गीत’ कविता की टेक (पुनरावृत्ति पंक्ति) क्या है?

उत्तर: ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!’ यह इस कविता की टेक है।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. बच्चन किस विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे?

उत्तर: वे सन् 1942 से 1952 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. बच्चन की संपूर्ण रचनावली किस नाम से प्रकाशित हुई?

उत्तर: उनकी रचनावली ‘बच्चन ग्रंथावली’ नाम से दस खंडों में प्रकाशित हुई।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. हालावाद में जीवन, दुनिया, कल्पना और कविता को किन प्रतीकों से समझाया गया है?

उत्तर: जीवन को मधुकलश, दुनिया को मधुशाला, कल्पना को साकी और कविता को उस प्याले के रूप में दर्शाया गया है जिसमें ढालकर जीवन पाठक को पिलाया जाता है।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. बच्चन की काव्य-शैली छायावाद से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: छायावाद लाक्षणिक वक्रता पर बल देता है, जबकि बच्चन ने उसके बजाय सीधी-सादी जीवंत भाषा और संवेदनसिक्त गेय शैली में अपनी बात कही। बच्चन छायावादोत्तर गीतिकाव्य के प्रमुख कवियों में माने जाते हैं।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. ‘आत्मपरिचय’ में ‘साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ’ का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: कवि ‘साँसों के दो तार’ लिए फिरता है, जिन्हें किसी ने छूकर झंकृत (गुंजायमान) कर दिया है। इन्हें जीवन की डोर के रूप में पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. ‘एक गीत’ में पथिक और पक्षी दोनों की उतावली का कारण क्या है?

उत्तर: पथिक को डर है कि राह में रात न हो जाए, जबकि मंज़िल भी दूर नहीं है, इसलिए वह जल्दी-जल्दी चलता है। पक्षियों को नीड़ में प्रत्याशा में झाँक रहे बच्चों का ध्यान है, इसीलिए वे जल्दी-जल्दी उड़ते हैं।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. ‘नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना’ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जहाँ लोग स्वयं को ज्ञानी (दाना) समझते हैं, वहीं नादानी (मूर्खता) भी होती है; कवि पूछता है कि यत्न करके भी सत्य किसने जाना? इसे ज्ञान के अहंकार पर व्यंग्य के रूप में पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. बच्चन ने किन कृतियों का अनुवाद किया?

उत्तर: उन्होंने शेक्सपियर के नाटक ‘हैमलेट’ और ‘मैकबेथ’ के साथ-साथ ‘जनगीता’ का भी अनुवाद किया।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. ‘मैं वह खंडहर का भाग लिए फिरता हूँ’ पंक्ति से कवि क्या कहना चाहता है?

उत्तर: राजाओं के वैभवशाली महल जिस पर निछावर हों, कवि उस चमक-दमक को नहीं, बल्कि खंडहर (विनाश के अवशेष) को अपनाना चाहता है, इसे दिखावटी वैभव से ज़्यादा सच्चाई को गले लगाने के भाव के रूप में पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. ‘एक गीत’ के तीसरे अंतरे में कवि की मनोदशा पहले दो अंतरों से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर: पहले दो अंतरों में पथिक और पक्षी उतावले होकर तेज़ी से चलते और उड़ते हैं, पर तीसरे अंतरे में कवि पूछता है कि मुझसे मिलने को कौन विकल है; इस प्रश्न से उसकी गति धीमी पड़ जाती है (पद शिथिल हो जाते हैं) और हृदय विह्वलता से भर जाता है।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. हरिवंश राय बच्चन के जीवन-परिचय के मुख्य बिंदु लिखिए।

उत्तर: जन्म 1907 इलाहाबाद, निधन 2003 मुंबई। सन् 1942 से 1952 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे। आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमों से संबद्ध रहे। बाद में विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ रहे। प्रमुख रचनाएँ: मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा निमंत्रण आदि। संपूर्ण रचनावली ‘बच्चन ग्रंथावली’ नाम से दस खंडों में प्रकाशित हुई।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. हालावाद क्या है? उमर ख़य्याम के प्रभाव के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: फ़ारसी कवि उमर ख़य्याम का मस्तानापन बच्चन की प्रारंभिक कविताओं में मिलता है। जीवन को मधुकलश, दुनिया को मधुशाला, कल्पना को साकी और कविता को प्याले के रूपक से दर्शाया गया। इसमें पूरी तन्मयता से जीवन का घूँट भरने और कड़वा-खट्टा भी सहज भाव से स्वीकार करने का दर्शन है। इसी से एक सूफ़ियाना-सी बेखयाली मन पर छाती है और तेरा-मेरा के समस्त झगड़े काफ़ूर हो जाते हैं। इसे बच्चन का हालावादी दर्शन कहते हैं।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. ‘आत्मपरिचय’ कविता का केंद्रीय भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पाठ के अनुसार पूरी कविता का सारांश यह है कि कवि का संसार से संबंध प्रीतिकलह का है। कवि का जीवन विरोधों का सामंजस्य है, जैसे उन्मादों में अवसाद, रोदन में राग, शीतल वाणी में आग। कवि अपूर्ण संसार से असंतुष्ट होकर स्वप्नों का संसार अपनाता है। अंततः वह ऐसा मस्ती का संदेश देना चाहता है जिसे सुनकर पूरी दुनिया झूम उठे।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. ‘आत्मपरिचय’ में कवि का धन-वैभव को ठुकराने का भाव किन पंक्तियों से स्पष्ट होता है? समझाइए।

उत्तर: ‘मैं और, और जग और, कहाँ का नाता’ पंक्ति में कवि स्वयं को जग से भिन्न मानता है। ‘जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव, मैं प्रति पग से उस पृथ्वी को ठुकराता’ पंक्ति में जग जहाँ धन-वैभव जोड़ता है, कवि उसी को हर कदम से ठुकराता है। यह धन-वैभव को ठुकराने का भाव है।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. ‘एक गीत’ कविता में प्रकृति और मानव-भाव का सम्मिश्रण कैसे हुआ है?

उत्तर: दिन का ढलना (प्रकृति) और मनुष्य के हृदय की धड़कन (भाव) को साथ जोड़ा गया है। पथिक को राह में रात होने का डर है और पक्षियों को प्रत्याशा में झाँकते बच्चों का ध्यान है। टेक ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ समय की तीव्र गति को रेखांकित करती है। अंतिम अंतरे में कवि अपने अकेलेपन पर प्रश्न उठाता है: ‘मुझसे मिलने को कौन विकल?’

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. बच्चन की गद्य-रचनाओं का परिचय दीजिए।

उत्तर: चार खंडों में आत्मकथा: क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक। डायरी विधा में ‘प्रवासी की डायरी’। कहानी और नाटक भी लिखे। उनकी आत्मकथा ईमानदार आत्मस्वीकृति और प्रांजल शैली के लिए जानी जाती है।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. ‘आत्मपरिचय’ कविता में विरोधाभास अलंकार के दो उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: ‘उन्मादों में अवसाद’ में बाहरी उल्लास में भीतरी उदासी दिखाई गई है। ‘शीतल वाणी में आग’ में शांत स्वर में तीव्र भाव छिपा है। दोनों में ऊपर से विरोधाभास लगता है, पर गहराई में कोई विरोध नहीं रहता; इसे सुख-दुख के सह-अस्तित्व के रूप में पढ़ा जा सकता है। यही विरोधाभास अलंकार है।

प्रश्न 8 (4 अंक)

प्र. ‘एक गीत’ कविता में टेक (पुनरावृत्ति) का क्या महत्व है?

उत्तर: ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!’ पंक्ति कविता के आरंभ में आती है और हर अंतरे के अंत में दोहराई जाती है। यह समय के तेज़ी से बीतने का बोध कराती है। यह कविता को गेय और संगीतात्मक बनाती है। यह तीनों अंतरों को एक भाव-सूत्र में बाँधती है।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. ‘आत्मपरिचय’ कविता के आधार पर हरिवंश राय बच्चन के जीवन-दर्शन को विस्तार से समझाइए।

उत्तर: जीवन के प्रति दृष्टिकोण: कवि जग-जीवन का भार लिए फिरते हुए भी प्रेम को साथ रखता है। इसे बच्चन का हालावादी दर्शन कहा जाता है: जीवन के हर घूँट को सहज भाव से स्वीकार करना। सुख-दुख का सामंजस्य: उन्माद में अवसाद, रोदन में राग, दोनों विरोधी भावों को समान भाव से अपनाना। ज्ञान पर प्रश्न: ‘कर यत्न मिटे सब, सत्य किसी ने जाना?’ और ‘नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना’, यानी सीखा हुआ ज्ञान भुलाना सीखना। वैभव को ठुकराना: जग जिस पृथ्वी पर वैभव जोड़ता है, कवि उसे प्रति पग से ठुकराता है। अंतिम लक्ष्य: मस्ती का ऐसा संदेश देना जिसे सुनकर पूरी दुनिया झूम उठे।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. हालावाद और छायावाद में अंतर स्पष्ट करते हुए बच्चन की काव्य-शैली की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: छायावाद: लाक्षणिक वक्रता पर बल देता है। बच्चन की शैली: लाक्षणिक वक्रता के बजाय सीधी-सादी जीवंत भाषा और संवेदनसिक्त गेय शैली। हालावाद: उमर ख़य्याम से प्रेरित, जीवन-दुनिया-कल्पना-कविता का मधुकलश-मधुशाला-साकी-प्याला रूपक, जीवन के हर घूँट को सहज भाव से स्वीकारना। निष्कर्ष: बच्चन छायावादोत्तर गीतिकाव्य के प्रमुख कवियों में माने जाते हैं; व्यक्तिगत अनुभूति की ईमानदार अभिव्यक्ति उनकी विलक्षण लोकप्रियता का मूल आधार है।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. ‘एक गीत’ कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए और बताइए कि यह गीति काव्य की कसौटी पर कैसे खरी उतरती है।

उत्तर: सारांश: राह में रात न हो जाए और मंज़िल भी दूर नहीं, यह सोचकर थका पथिक जल्दी-जल्दी चलता है (अंतरा 1)। बच्चों की प्रतीक्षा में पक्षी जल्दी घोंसले लौटते हैं (अंतरा 2)। कवि पूछता है ‘मुझसे मिलने को कौन विकल?’, यह प्रश्न उसके पद शिथिल करता है और उसे विह्वल कर देता है (अंतरा 3)। गीति काव्य की कसौटी: निजी भाव (अकेलापन) की सरल, संगीतात्मक अभिव्यक्ति; टेक का बार-बार प्रयोग; रोज़मर्रा के बिंबों (पथिक, पक्षी) से भावों को सार्वभौमिक बनाना, ये सभी गीति काव्य के प्रमुख लक्षण हैं।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. दोनों कविताओं ‘आत्मपरिचय’ और ‘एक गीत’ की तुलना विषय, शैली और भाव के आधार पर कीजिए।

उत्तर: विषय: ‘आत्मपरिचय’ में कवि का संसार से दार्शनिक संबंध है, ‘एक गीत’ में समय बीतने और अकेलेपन का बोध है। शैली: ‘आत्मपरिचय’ के 10 लंबे अंतरे आत्मकथात्मक स्वर में हैं, ‘एक गीत’ के 3 छोटे अंतरे टेक-सहित गीत-शैली में हैं। भाव: ‘आत्मपरिचय’ में कवि अपने विरोधी भावों को स्वीकारते हुए अपना परिचय देता है; ‘एक गीत’ दिन ढलने की जल्दी और रात से पहले मंज़िल पहुँचने की उतावली से शुरू होकर तीसरे अंतरे में विह्वलता पर समाप्त होता है। समानता: दोनों में सरल भाषा, गेयता और बच्चन की निजी भावाभिव्यक्ति की शैली समान है।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
मैं और, और जग और, कहाँ का नाता,
मैं बना-बना कितने जग रोज़ मिटाता।
जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव,
मैं प्रति पग से उस पृथ्वी को ठुकराता!

(क) 2 अंक कवि स्वयं को जग से भिन्न क्यों मानता है?
उत्तर: क्योंकि जग वैभव जोड़ता है और कवि का रास्ता उससे अलग है, वह हर कदम से उस वैभव को ठुकराता है, जबकि जग उसी को जोड़ने में लगा रहता है।

(ख) 2 अंक इस अंतरे में कौन-सा भाव प्रमुख है?
उत्तर: यहाँ प्रमुख भाव धन-वैभव को ठुकराने और जग से अपनी भिन्नता का है।

(ग) 2 अंक ‘मैं और, और जग और’ पंक्ति में ‘और’ शब्द की क्या विशेषता है?
उत्तर: ‘और’ शब्द की पुनरावृत्ति कवि और जग के बीच के भेद को बार-बार रेखांकित करती है, जिससे यह भिन्नता और अधिक स्पष्ट व प्रभावी हो जाती है।

केस स्टडी
हो जाए न पथ में रात कहीं,
मंज़िल भी तो है दूर नहीं,
यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!

(क) 2 अंक पथिक जल्दी-जल्दी क्यों चल रहा है?
उत्तर: उसे भय है कि कहीं राह में रात न हो जाए, जबकि उसकी मंज़िल दूर नहीं है, यही सोच उसे तेज़ चलने पर विवश करती है।

(ख) 2 अंक यह अंतरा कविता की टेक से किस प्रकार जुड़ता है?
उत्तर: ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ टेक इस अंतरे की चिंता का कारण स्पष्ट करती है, दिन ढलने की तीव्र गति ही पथिक की उतावली का मूल कारण है।

(ग) 2 अंक इस अंतरे में प्रकृति और मानव-मन का कैसा संबंध दिखाया गया है?
उत्तर: प्रकृति (दिन का ढलना) मनुष्य के मन में समय बीतने की चिंता और गति उत्पन्न करती है, बाहरी प्रकृति और आंतरिक मनोभाव आपस में गहराई से जुड़े हुए दिखाए गए हैं।