कक्षा 12 हिंदी अध्याय 1 आत्मपरिचय एवं एक गीत शॉर्ट नोट्स

परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: कवि परिचय, दोनों कविताओं का सार, प्रमुख पंक्तियाँ और परिभाषाएँ एक जगह। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।

1 कवि परिचय एक नज़र में

बिंदु विवरण
जन्म सन् 1907, इलाहाबाद
निधन सन् 2003, मुंबई
कार्यक्षेत्र 1942-1952 इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राध्यापक; आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमों से संबद्ध; फिर विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ
काव्य संग्रह मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा निमंत्रण, एकांत संगीत, सतरंगिणी आदि
आत्मकथा (4 खंड) क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक
अनुवाद हैमलेट, जनगीता, मैकबेथ
रचनावली ‘बच्चन ग्रंथावली’ (दस खंड)
काव्य-दर्शन हालावाद (उमर ख़य्याम से प्रेरित)
Learn by heartपरिभाषा 1

हालावाद: जीवन के हर घूँट (कड़वा-खट्टा भी) को सहज भाव से स्वीकार करने का दर्शन। जीवन=मधुकलश, दुनिया=मधुशाला, कल्पना=साकी, कविता=प्याला।

2 आत्मपरिचय सार-रूप में

मुख्य भाव, अंतरा-वार
  • जग-जीवन का भार, फिर भी प्यार साथ
  • स्नेह-सुरा का पान, जग की परवाह न करके अपने मन का गान
  • अपूर्ण संसार से असंतोष, स्वप्नों का संसार अपनाना
  • भवसागर की लहरों पर मस्त बहना, सुख-दुख दोनों में मग्न
  • उन्माद में अवसाद, बाहर हँसी भीतर रुदन
  • नादान वहीं जहाँ दाना, सीखा ज्ञान भुलाना सीखना
  • मैं और जग और, जग जिस पृथ्वी पर वैभव जोड़ता है, कवि उसे प्रति पग से ठुकराता है
  • शीतल वाणी में आग, खंडहर का भाग अपनाना
  • रोना बनाम गाना, कवि बनाम दीवाना
  • दीवानों का वेश, मस्ती का संदेश
Learn by heartपरिभाषा 2

प्रीतिकलह: प्रेम में होने वाली मीठी नोक-झोंक, कवि और दुनिया का संबंध इसी तरह का है।

Learn by heartपरिभाषा 3

विरोधाभास अलंकार: ऊपर से विरोधी लगने वाली बातों में गहरा सत्य छिपा होना। जैसे: ‘शीतल वाणी में आग’, ‘उन्मादों में अवसाद’।

3 एक गीत सार-रूप में

संग्रह: निशा निमंत्रण। टेक: ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!’

अंतरा 1राह में रात न हो जाए, मंज़िल भी दूर नहीं, यह सोचकर थका पथिक जल्दी-जल्दी चलता है
अंतरा 2बच्चे नीड़ों से झाँक रहे होंगे, इसलिए पक्षी जल्दी लौटते हैं
अंतरा 3कवि पूछता है ‘मुझसे मिलने को कौन विकल?’, यह प्रश्न पद शिथिल करता है और उर में विह्वलता भरता है
Learn by heartपरिभाषा 4

टेक: गीत में बार-बार दोहराई जाने वाली पंक्ति। ‘एक गीत’ में यह कविता के आरंभ में एक बार आती है और हर अंतरे के अंत में दोहराई जाती है; इससे समय की तीव्र गति का बोध होता है।

4 दोनों कविताओं की तुलना

आत्मपरिचय

  • 10 अंतरे, दार्शनिक-आत्मकथात्मक स्वर
  • भाव: प्रीतिकलह, विरोधों का सामंजस्य

एक गीत

  • 3 अंतरे, टेक-सहित गीत-शैली
  • भाव: समय के गुज़रने का एहसास; प्रिय से मिलने का आश्वासन ही गति देता है
परीक्षा से पहले यही पढ़ें
  • बच्चन: जन्म 1907 इलाहाबाद, निधन 2003 मुंबई
  • हालावाद: उमर ख़य्याम से प्रेरित मधुकलश-मधुशाला-साकी-प्याला रूपक
  • आत्मपरिचय: संसार से प्रीतिकलह, विरोधों का सामंजस्य
  • एक गीत: निशा निमंत्रण से, टेक के सहारे समय के गुज़रने का एहसास और लक्ष्य-प्राप्ति के लिए कुछ कर गुज़रने का जज़्बा