इस अध्याय के 22 बहुविकल्पीय (MCQ / वस्तुनिष्ठ) प्रश्न, परीक्षा की प्रचलित शैलियों में। हर प्रश्न के उत्तर के साथ व्याख्या भी दी गई है, ताकि केवल सही विकल्प नहीं, उसकी वजह भी याद रहे।
1 सीधे प्रश्न
सीधे प्रश्न
- 1 अंकडॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म कब और कहाँ हुआ?
(क) 14 अप्रैल 1891, महू (मध्य प्रदेश)(ख) 14 अप्रैल 1891, दिल्ली(ग) 6 दिसंबर 1891, महू(घ) 14 अक्तूबर 1891, नागपुर - 1 अंकआंबेडकर के चिंतन व रचनात्मकता के मुख्यतः तीन प्रेरक व्यक्ति कौन थे?
(क) गांधी, नेहरू, पटेल(ख) बुद्ध, महावीर, गांधी(ग) बुद्ध, कबीर, ज्योतिबा फुले(घ) कबीर, तुलसीदास, सूरदास - 1 अंकआंबेडकर कब और कितने अनुयायियों के साथ बौद्ध मतानुयायी बने?
(क) 14 अप्रैल 1956, 1 लाख अनुयायियों के साथ(ख) 6 दिसंबर 1956, 10 लाख अनुयायियों के साथ(ग) 14 अक्तूबर 1950, 5 लाख अनुयायियों के साथ(घ) 14 अक्तूबर 1956, 5 लाख अनुयायियों के साथ - 1 अंकआंबेडकर की सबसे पहली प्रकाशित कृति कौन-सी थी?
(क) द कास्ट्स इन इंडिया (1917)(ख) एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट (1936)(ग) बुद्धा एंड हिज़ धम्मा (1957)(घ) द प्रॉब्लम ऑफ़ द रुपी (1923) - 1 अंकहिंदी में आंबेडकर के संपूर्ण वाङ्मय का प्रकाशन किस नाम से और कितने खंडों में हुआ है?
(क) “आंबेडकर रचनावली”, 15 खंडों में(ख) “आंबेडकर समग्र”, 25 खंडों में(ग) “जाति-भेद का उच्छेद”, 10 खंडों में(घ) “बाबा साहब आंबेडकर संपूर्ण वाङ्मय”, 21 खंडों में - 1 अंकप्रस्तुत दोनों प्रकरण आंबेडकर के किस भाषण से लिए गए हैं?
(क) हू आर दे? (1948)(ख) बुद्धिज़्म एंड कम्युनिज़्म (1956)(ग) एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट (1936)(घ) द प्रॉब्लम ऑफ़ द रुपी (1923) - 1 अंक‘एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट’ का हिंदी-रूपांतर किसने किया, और उसका नाम क्या है?
(क) ललई सिंह यादव, ‘जाति-भेद का उच्छेद’(ख) प्रेमचंद, ‘जाति का नाश’(ग) महादेवी वर्मा, ‘जाति-उन्मूलन’(घ) रामविलास शर्मा, ‘वर्ण-व्यवस्था’
2 अभिकथन-कारण
अभिकथन-कारण
- 1 अंकअभिकथन (A): आंबेडकर जाति-प्रथा का विरोध इसलिए करते हैं क्योंकि यह श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन करती है।
कारण (R): श्रम-विभाजन सभ्य समाज की आवश्यकता है।
(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, परंतु R गलत है(घ) A गलत है, परंतु R सही है - 1 अंकअभिकथन (A): जाति-प्रथा में पेशा व्यक्ति की रुचि और क्षमता देखकर तय किया जाता है।
कारण (R): जाति-प्रथा में पेशा माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार गर्भधारण के समय से ही तय हो जाता है।
(क) A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है(ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है(ग) A सही है, परंतु R गलत है(घ) A गलत है, परंतु R सही है
3 सुमेलन कीजिए
सुमेलन कीजिए
- 1 अंकसुमेलन कीजिए:
सूची I: (i) एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट (ii) द कास्ट्स इन इंडिया (iii) हू आर द शूद्राज़ (iv) बुद्धा एंड हिज़ धम्मा
सूची II: (1) 1917 (2) 1946 (3) 1936 (4) 1957
(क) i-3, ii-1, iii-2, iv-4(ख) i-1, ii-2, iii-3, iv-4(ग) i-4, ii-3, iii-2, iv-1(घ) i-2, ii-4, iii-1, iv-3 - 1 अंकसुमेलन कीजिए:
सूची I: (i) स्वतंत्रता (ii) समता (iii) भ्रातृता (iv) दासता
सूची II: (1) दूसरे द्वारा निर्धारित व्यवहार का पालन करने की विवशता (2) अपना व्यवसाय चुनने की स्वतंत्रता तक विस्तार (3) नियामक सिद्धांत (4) दूध-पानी के मिश्रण जैसा भाईचारा
(क) i-1, ii-2, iii-3, iv-4(ख) i-4, ii-1, iii-2, iv-3(ग) i-2, ii-3, iii-4, iv-1(घ) i-3, ii-4, iii-1, iv-2
4 कथन आधारित प्रश्न
कथन आधारित प्रश्न
- 1 अंककथन I: आंबेडकर के अनुसार श्रम-विभाजन किसी भी सभ्य समाज की आवश्यकता है।
कथन II: आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा केवल श्रम का बँटवारा करती है, व्यक्तियों का नहीं।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल कथन I सही है(ख) केवल कथन II सही है(ग) कथन I और II दोनों सही हैं(घ) कथन I और II दोनों गलत हैं - 1 अंककथन I: हिंदू धर्म की जाति-प्रथा किसी को भी पैतृक पेशे से अलग पेशा चुनने की अनुमति नहीं देती।
कथन II: आधुनिक युग में उद्योग-तकनीक में कभी निरंतर तो कभी अकस्मात परिवर्तन होते रहते हैं।
इनमें से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल कथन I सही है(ख) केवल कथन II सही है(ग) कथन I और II दोनों सही हैं(घ) कथन I और II दोनों गलत हैं
5 सही क्रम में लगाइए
सही क्रम में लगाइए
- 1 अंकनिम्न घटनाओं का सही क्रम चुनिए:
(i) सम्मेलन स्थगित होना
(ii) अध्यक्षीय भाषण तैयार होना
(iii) स्वतंत्र पुस्तिका के रूप में प्रकाशन
(iv) आयोजकों की पूर्ण सहमति न बनना
(क) i-ii-iii-iv(ख) iii-i-ii-iv(ग) ii-iv-i-iii(घ) iv-iii-ii-i - 1 अंकआंबेडकर के जाति-प्रथा-विरुद्ध तर्कों का पाठ में दिया गया क्रम चुनिए:
(i) आर्थिक हानि (स्वेच्छा का अभाव)
(ii) श्रमिकों का ग़ैर-स्वाभाविक विभाजन
(iii) जीवन-भर की बाध्यता व बेरोज़गारी
(iv) पेशा रुचि पर नहीं, जन्म पर आधारित
(क) ii-iv-iii-i(ख) i-ii-iii-iv(ग) iv-iii-ii-i(घ) iii-i-iv-ii
6 रिक्त स्थान
रिक्त स्थान
- 1 अंकरिक्त स्थान भरें: “दासता का सबसे व्यापक व गहन रूप ____ दासता है।”
(क) आर्थिक(ख) सामाजिक(ग) राजनीतिक(घ) धार्मिक - 1 अंकरिक्त स्थान भरें: “इस प्रकार ‘समता’ यद्यपि काल्पनिक जगत की वस्तु है, फिर भी राजनीतिज्ञ को सभी परिस्थितियों को दृष्टि में रखते हुए, उसके लिए यही मार्ग भी रहता है, क्योंकि यही ____ भी है…”
(क) अनिवार्य(ख) असंभव(ग) अनुचित(घ) व्यावहारिक
7 असंगत चुनिए
असंगत चुनिए
- 1 अंकनिम्न में से कौन-सा आंबेडकर के आदर्श-समाज के तीन आधारों में से एक नहीं है?
(क) स्वतंत्रता(ख) राष्ट्रवाद(ग) समता(घ) भ्रातृता
8 गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश आधारित प्रश्न
गद्यांश
यह विडंबना की ही बात है, कि इस युग में भी ‘जातिवाद’ के पोषकों की कमी नहीं हैं। इसके पोषक कई आधारों पर इसका समर्थन करते हैं। समर्थन का एक आधार यह कहा जाता है, कि आधुनिक सभ्य समाज ‘कार्य-कुशलता’ के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है, और चूँकि जाति-प्रथा भी श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है।
- 1 अंकगद्यांश के अनुसार जाति-प्रथा के समर्थक इसे किस आधार पर उचित ठहराते हैं?
(क) यह भी श्रम-विभाजन का ही रूप है(ख) यह प्राचीन परंपरा है(ग) यह धर्म-ग्रंथों में लिखा है(घ) यह गरीबी घटाती है - 1 अंकगद्यांश के आरंभिक वाक्य से लेखक के जाति-प्रथा के समर्थकों के प्रति रुख़ का पता चलता है, वह है:
(क) समर्थन(ख) उदासीनता(ग) प्रशंसा(घ) व्यंग्यपूर्ण आलोचना
9 सत्य-असत्य
सत्य-असत्य
- 1 अंकनिम्न कथनों को सत्य (स) या असत्य (अ) के रूप में चिह्नित करें:
I. आंबेडकर श्रम-विभाजन को सभ्य समाज की आवश्यकता मानते हैं।
II. आंबेडकर जाति-प्रथा को श्रम-विभाजन का ही एक सही रूप मानते हैं।
III. जाति-प्रथा विभाजित वर्गों को ऊँच-नीच भी घोषित करती है।
(क) स-स-अ(ख) अ-स-स(ग) स-अ-स(घ) अ-अ-अ - 1 अंकनिम्न कथनों को सत्य (स) या असत्य (अ) के रूप में चिह्नित करें:
I. जाति-प्रथा में पेशा गर्भधारण के समय से ही तय हो जाता है।
II. जाति-प्रथा व्यक्ति को जीवन-भर एक ही पेशे में बाँध देती है।
III. आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा बेरोज़गारी घटाती है।
(क) स-स-अ(ख) अ-स-स(ग) स-अ-स(घ) अ-अ-स
उत्तर कुंजी एवं व्याख्या
सीधे प्रश्न
- (क) पाठ के लेखक-परिचय के अनुसार आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल, सन् 1891 को महू (मध्य प्रदेश) में हुआ।
- (ग) पाठ स्पष्ट कहता है कि आंबेडकर के मुख्यतः तीन प्रेरक व्यक्ति बुद्ध, कबीर और ज्योतिबा फुले रहे।
- (घ) पाठ के अनुसार आंबेडकर 14 अक्तूबर, सन् 1956 को 5 लाख अनुयायियों के साथ बौद्ध मतानुयायी बने।
- (क) पाठ के अनुसार ‘द कास्ट्स इन इंडिया…’ (1917) आंबेडकर की प्रथम प्रकाशित कृति थी।
- (घ) पाठ के अनुसार यह भारत सरकार के कल्याण मंत्रालय से “बाबा साहब आंबेडकर संपूर्ण वाङ्मय” नाम से 21 खंडों में प्रकाशित हुआ है।
- (ग) दोनों प्रकरण आंबेडकर के विख्यात भाषण ‘एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट’ (1936) से लिए गए हैं।
- (क) पाठ के अनुसार यह हिंदी-रूपांतर ललई सिंह यादव ने किया, जिसका नाम ‘जाति-भेद का उच्छेद’ है।
अभिकथन-कारण
- (ख) (ख) A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है। आंबेडकर श्रम-विभाजन को सभ्य समाज की आवश्यकता मानते हैं (R: “श्रम विभाजन, निश्चय ही सभ्य समाज की आवश्यकता है”), पर उनकी आपत्ति श्रमिकों के अस्वाभाविक विभाजन से है (A), जो R से नहीं निकलता।
- (घ) A ग़लत है: पाठ स्पष्ट कहता है कि पेशा रुचि या क्षमता पर आधारित नहीं होता। R सही है और वास्तव में A का खंडन करता है, जो दिखाता है कि जाति-प्रथा में पेशा-निर्धारण कैसे होता है।
सुमेलन कीजिए
- (क) सही मिलान: एनीहिलेशन ऑफ़ कास्ट=1936, द कास्ट्स इन इंडिया=1917, हू आर द शूद्राज़=1946, बुद्धा एंड हिज़ धम्मा=1957।
- (ग) सही मिलान: स्वतंत्रता=अपना व्यवसाय चुनने की स्वतंत्रता तक विस्तार (पाठ में स्वतंत्रता का एक रूप), समता=नियामक सिद्धांत, भ्रातृता=दूध-पानी के मिश्रण जैसा भाईचारा, दासता=दूसरे द्वारा निर्धारित व्यवहार की विवशता।
कथन आधारित प्रश्न
- (क) कथन I सही है। कथन II गलत है: आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा व्यक्तियों को भी स्थायी वर्गों में बाँटती है, यही उनकी एक प्रमुख आपत्ति है (“श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिक-विभाजन का भी रूप लिए हुए है”)।
- (ग) दोनों कथन पाठ में सीधे कहे गए हैं: यही दोनों तथ्य मिलकर जाति-प्रथा को बेरोज़गारी का कारण बनाते हैं।
सही क्रम में लगाइए
- (ग) सही क्रम: पहले भाषण तैयार हुआ, फिर सहमति न बनने पर सम्मेलन स्थगित हुआ, अंत में इसे पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया गया।
- (क) पाठ में क्रम यही है: पहले श्रमिकों के ग़ैर-स्वाभाविक विभाजन की बात, फिर पेशे के जन्म-आधारित निर्धारण की, फिर जीवन-भर की बाध्यता व बेरोज़गारी की, अंत में आर्थिक हानि के निष्कर्ष की।
रिक्त स्थान
- (ख) पाठ की भूमिका की मूल पंक्ति है: “दासता का सबसे व्यापक व गहन रूप सामाजिक दासता है।”
- (घ) पाठ की मूल पंक्ति है: “यही व्यावहारिक भी है और यही उसके व्यवहार की एकमात्र कसौटी भी है।”
असंगत चुनिए
- (ख) आंबेडकर के आदर्श-समाज के तीन आधार स्वतंत्रता, समता और भ्रातृता हैं; “राष्ट्रवाद” इनमें से नहीं है।
गद्यांश आधारित प्रश्न
- (क) गद्यांश स्पष्ट कहता है कि समर्थक तर्क देते हैं कि जाति-प्रथा भी श्रम-विभाजन का ही दूसरा रूप है।
- (घ) “यह विडंबना की ही बात है” कहकर व्यंग्य के साथ लेखक शुरू से ही जाति-प्रथा के समर्थकों के तर्क को आलोचनात्मक दृष्टि से देखता है।
सत्य-असत्य
- (ग) कथन I और III सही हैं। कथन II गलत है: आंबेडकर जाति-प्रथा को श्रम-विभाजन का दोषपूर्ण, ग़ैर-स्वाभाविक रूप मानते हैं, सही रूप नहीं।
- (क) कथन I और II सही हैं। कथन III गलत है: आंबेडकर के अनुसार जाति-प्रथा बेरोज़गारी घटाती नहीं, बल्कि उसका एक प्रमुख कारण है।
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री