कक्षा 12 हिंदी अध्याय 1 सिल्वर वैडिंग महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. यशोधर बाबू का पूरा नाम क्या है?

उत्तर: वाई.डी. (यशोधर) पंत।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. किशनदा का पूरा नाम बताइए।

उत्तर: कृष्णानंद पांडे।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. यशोधर बाबू की शादी की तारीख़ बताइए।

उत्तर: 6 फ़रवरी 1947।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. यशोधर बाबू के तकिया-कलाम का नाम बताइए।

उत्तर: समहाउ इंप्रॉपर।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. किशनदा की मृत्यु किस कारण से बताई गई?

उत्तर: मृत्यु के कारण पर बस इतना जवाब मिला, जो हुआ होगा, यानी पता नहीं क्या हुआ।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. भूषण किस क्षेत्र में नौकरी करता है?

उत्तर: विज्ञापन क्षेत्र में (एक प्रमुख विज्ञापन संस्था में गैर-सरकारी नौकरी)।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. यशोधर बाबू का इलाक़ा किस नाम से जाना जाता था?

उत्तर: डी.आई.जैड. एरिया, गोल मार्केट के आसपास।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. अंत में भूषण ने यशोधर बाबू को क्या उपहार दिया?

उत्तर: ऊनी ड्रेसिंग गाउन।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. यशोधर बाबू ने अपनी शादी की सालगिरह के लिए ख़ुद पार्टी क्यों नहीं की थी?

उत्तर: यशोधर बाबू के अनुसार वैडिंग एनिवर्सरी मनाना गोरे साहबों का चोंचला है, हमारे यहाँ ऐसा नहीं मनाया जाता। फिर भी चाय के लिए वे पैसे देते हैं (“दैट तो आई डू नाट माइंड”): पहले दस का नोट और चड्ढा के ज़ोर देने पर दस-दस के दो नोट और। पर सारे सेक्शन के इसरार करने पर भी वे इस दावत के लिए रुकते नहीं।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. यशोधर बाबू गोल मार्केट का इलाक़ा छोड़ने से इनकार क्यों करते रहे?

उत्तर: इस इलाक़े से उनकी सारी पुरानी यादें, ख़ासकर किशनदा से जुड़ी यादें, बँधी हुई हैं। बेहतर क्वार्टर के प्रस्ताव आने पर भी उन्होंने हर बार इनकार किया, क्योंकि इस पुराने इलाक़े में डटे रहना उन्हें अपनी यादों के प्रति ज़रूरी लगता था।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. किशनदा की मृत्यु के बारे में पाठ क्या बताता है, और यशोधर बाबू इससे क्या निष्कर्ष निकालते हैं?

उत्तर: किशनदा को कोई बीमारी नहीं हुई थी; रिटायर होने के बाद वे बस मुरझाते-सूखते चले गए। मृत्यु का कारण पूछने पर उनके एक बिरादर ने कहा, “जो हुआ होगा”, यानी “पता नहीं, क्या हुआ”। इससे यशोधर बाबू यह मानते हैं कि जिन लोगों के बाल-बच्चे नहीं होते, घर-परिवार नहीं होता, उनकी रिटायर होने के बाद “जो हुआ होगा” से भी मौत हो जाती है; इसलिए बच्चों का होना भी ज़रूरी है।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. यशोधर बाबू के बेटे नौकर रखने का सुझाव क्यों देते हैं?

उत्तर: बच्चे चाहते हैं कि दूध, राशन, दवा, सब्ज़ी जैसे छोटे काम पिता ख़ुद न करें, इसलिए एक नौकर रख लें, जिसकी तनख्वाह वे स्वयं देने को तैयार हैं। यशोधर बाबू यह प्रस्ताव नहीं मानते: वे पत्नी को समझाते हैं कि इनका नौकर होगा तो इनके लिए ही होगा, और कि काम सब अपने हाथ से ठीक ही होते हैं, नौकरों को सौंपा कारोबार चौपट हुआ।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. यशोधर बाबू की पत्नी की यशोधर बाबू के प्रति क्या शिकायत है?

उत्तर: पत्नी की शिकायत है कि यशोधर बाबू ने पुराने संयुक्त परिवार में कभी उसका पक्ष नहीं लिया और जिठानियों की चलने दी। साथ ही उसका कहना है कि यशोधर बाबू का स्वयं का देखा हुआ कुछ नहीं है, वे किशनदा से सुनी बातों को अपनी यादें बना लेते हैं।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. यशोधर बाबू के अनुसार किशनदा की सीख गधा-पचीसी का क्या अर्थ है?

उत्तर: गधा-पचीसी का अर्थ है जवानी की नासमझी और लापरवाही का लंबा दौर। किशनदा की सीख थी कि गधा-पचीसी में कोई क्या करता है इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि बाद में हर आदमी समझदार हो जाता है; उनका फ़िकरा था, “ज़िम्मेदारी सर पर पड़ेगी तब सब अपने ही आप ठीक हो जाएँगे”।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. पार्टी में यशोधर बाबू के असहज होने के दो कारण लिखिए।

उत्तर: पहला, वे आधुनिक, अजनबी मेहमानों की भीड़ (भूषण का बॉस, शहरी दोस्त) में सहज महसूस नहीं करते और अँधेरे में दुबके रहते हैं। दूसरा, बेटी का पश्चिमी पहनावा और पत्नी का शृंगार भी उन्हें समहाउ इंप्रॉपर लगता है।

प्रश्न 8 (2 अंक)

प्र. किशनदा की पहचान-छवि यशोधर बाबू के मन में कैसी बसी है?

उत्तर: किशनदा की जो छवि यशोधर बाबू के मन में सबसे ज़्यादा बसी है वह सुबह की सैर पर निकले किशनदा की है, कुर्ते-पजामे पर ऊनी गाउन, सिर पर गोल विलायती टोपी, पाँवों में देशी खड़ाऊँ और हाथ में कुत्ते भगाने के लिए एक छड़ी लिए हुए।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. यशोधर बाबू के चरित्र की तीन-चार प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: पहला, वे परंपरा और आधुनिकता के बीच फँसे हुए व्यक्ति हैं, न पूरी तरह पुराने रह पाए हैं न नए बन पाए हैं। दूसरा, कहानी उन्हें “डेमोक्रेट बाबू” कहती है, वे बच्चों पर अपनी बात थोपना नहीं चाहते, पर चाहते हैं कि बच्चे उनसे सलाह लें, यह उनका विरोधाभास है। तीसरा, वे किफ़ायती और सादगीपसंद हैं, फिर भी बच्चों की तरक्की पर मन ही मन गर्व भी करते हैं। चौथा, वे किशनदा के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं और उनकी कई परंपराओं को जीवित रखने की कोशिश करते हैं।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. किशनदा का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर: किशनदा यशोधर बाबू के “मर्यादा पुरुष” और मार्ग-दर्शक हैं। वे कुँआरे थे और पहाड़ से आए हुए कितने ही लड़के ठीक-ठिकाना होने से पहले उनके यहाँ रह जाते थे, जैसे यशोधर। मातहतों से चलते-चलते हँसी-मज़ाक, सुबह की सैर, “अरली टू बैड एंड अरली टू राइज” का मंत्र और “मूरख लोग मकान बनाते हैं, सयाने उनमें रहते हैं” जैसी उक्तियाँ उनकी पहचान हैं। लेकिन पाठ कहता है कि उनका बुढ़ापा सुखी नहीं रहा: क्वार्टर खाली करते समय उनके द्वारा उपकृत लोगों में से एक ने भी उन्हें अपने यहाँ रखने की पेशकश नहीं की, और गाँव में उनकी मृत्यु “जो हुआ होगा” से हुई। इसे कहानी की एक मार्मिक विडंबना के रूप में पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. समहाउ इंप्रॉपर वाक्यांश यशोधर बाबू के व्यक्तित्व को किस तरह उजागर करता है?

उत्तर: समहाउ इंप्रॉपर यशोधर बाबू का तकिया-कलाम है, जिसे वे नई, आधुनिक चीज़ों और आदतों के बारे में बोलते हैं: सालगिरह पर “इनसिस्ट” करना, बेटे का वेतन उनके हाथ में न रखना, बेटी की जीन और बगैर बाँह का टॉप, पत्नी की लाली और ख़िज़ाब, सिल्वर वैडिंग की भव्य पार्टी। यह वाक्यांश उनके मन की उलझन दिखाता है, वे न इन चीज़ों को पूरी तरह स्वीकार पाते हैं, न पूरी तरह ठुकरा पाते हैं; जैसे पार्टी “समहाउ इंप्रापर” लगने पर भी उन्हें इस बात से संतोष होता है कि आज इतना कुछ मौजूद है। इसे उनके पीढ़ी-अंतराल में फँसे होने का संकेत माना जा सकता है।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. जो हुआ होगा वाक्य की कितनी अर्थ-छवियाँ कहानी में मिलती हैं, समझाइए।

उत्तर: पहली अर्थ-छवि सीधी अनभिज्ञता की है: किशनदा की मृत्यु का कारण पूछने पर उनके एक बिरादर ने कहा, “जो हुआ होगा”, यानी “पता नहीं, क्या हुआ”। दूसरी अर्थ-छवि नियति-स्वीकृति की है: जो होना था वह हो गया, इसलिए उसकी चिंता व्यर्थ है। तीसरी अर्थ-छवि मृत्यु और अकेलेपन के दर्शन की है: ध्यान के समय यशोधर बाबू को दिखाई दे रहे किशनदा कहते हैं कि सभी जन इसी “जो हुआ होगा” से मरते हैं, गृहस्थ हों, ब्रह्मचारी हों, अमीर हों, गरीब हों, और शुरू में और आख़िर में सब अकेले ही होते हैं। इस तरह यह वाक्य अनभिज्ञता, नियति और अकेलेपन, तीनों को समेट लेता है।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. यशोधर बाबू के बच्चों और उनके बीच के तनाव के कोई चार उदाहरण दीजिए।

उत्तर: पहला, बेटा अपना वेतन पिता के हाथ में नहीं रखता। दूसरा, बेटा घर के सामान को अपना कहकर पिता को छूने तक नहीं देता। तीसरा, कमाऊ बेटे ने कह दिया कि बुआ को भेजने के लिए पैसे मैं तो नहीं दूँगा, जबकि यशोधर बाबू रिश्तेदारी निभाना ज़रूरी समझते हैं। चौथा, बच्चों को पिता का साइकिल-सवार होना सख़्त नागवार गुज़रता है, इसलिए वे चाहते हैं कि पिताजी स्कूटर ले लें।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. सिल्वर वैडिंग पार्टी का दृश्य यशोधर बाबू के मन की उलझन को कैसे दिखाता है?

उत्तर: घर पहुँचते ही यशोधर बाबू को पहले धोखा होता है कि किसी गलत जगह आ गए हैं, क्योंकि बाहर कार, स्कूटर, झालरें और गुब्बारे लगे थे और बहुत से लोग विदा ले-दे रहे थे। वे अजनबी, आधुनिक भीड़ में असहज होकर अँधेरे में दुबके रहते हैं। पार्टी उन्हें समहाउ इंप्रापर लगती है, फिर भी उन्हें इस बात से संतोष होता है कि जिस अनाथ यशोधर के जन्मदिन पर कभी लड्डू नहीं आए, उसकी शादी की पच्चीसवीं सालगिरह पर आज इतना कुछ जुट गया है। यह दोहरी प्रतिक्रिया ही उनके भीतर के द्वंद्व को उजागर करती है।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. यशोधर बाबू की पत्नी के व्यक्तित्व में आए परिवर्तन का वर्णन कीजिए।

उत्तर: यशोधर बाबू की पत्नी अपने मूल संस्कारों से किसी भी तरह आधुनिक नहीं है। संयुक्त परिवार वाले दौर में उसे ऐसे बंधनों में रखा गया मानो वह जवान औरत नहीं, बुढ़िया हो, और उसका पक्ष कभी नहीं लिया गया। अब बच्चों की तरफ़दारी करने की मातृसुलभ मजबूरी ने उसे भी मॉड बना डाला है, बगैर बाँह का ब्लाउज़, ऊँची एड़ी की सैंडल, लिपस्टिक और बालों में ख़िज़ाब उसने अपना लिया है, जो यशोधर बाबू को समहाउ इंप्रॉपर लगता है।

प्रश्न 8 (4 अंक)

प्र. यशोधर बाबू अपनी बेटी और पत्नी के आधुनिक पहनावे पर क्या रवैया रखते हैं?

उत्तर: यशोधर बाबू बेटी के जीन और बगैर बाँह के टॉप पहनने को और पत्नी के लिपस्टिक-ख़िज़ाब को समहाउ इंप्रॉपर मानते हैं और कई बार टोकते भी हैं। पर वे इसे रोकने की ज़िद नहीं करते, यह कहकर कि मैं तुम्हें रोक नहीं रहा, इसलिए तुम भी मेरे जीने के ढंग पर एतराज़ मत करो, यही उनका डेमोक्रेट बाबू वाला रवैया है।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. यशोधर बाबू की कहानी को दिशा देने में किशनदा की क्या भूमिका रही है, विस्तार से लिखिए।

उत्तर: किशनदा यशोधर बाबू के जीवन के हर मोड़ पर मौजूद रहे। दिल्ली आने पर उन्होंने यशोधर को शरण दी, मैस का रसोइया बनाकर रखा और पचास रुपये उधार दिए ताकि वह अपने लिए कपड़े बनवा सके और गाँव पैसा भेज सके। बाद में अपने ही नीचे नौकरी दिलवाकर पूरे दफ़्तरी जीवन में मार्ग-दर्शन किया। सुबह की सैर, रोज़ मंदिर जाना, संध्या-पूजा, गीता प्रेस की किताबें, होली गवाना, जन्यो पुन्यूं पर कुमाउँनियों को जनेऊ बदलने के लिए बुलाना, रामलीला की तालीम के लिए कमरा देना, लाल गमछा जैसी कई आदतें और परंपराएँ यशोधर बाबू ने किशनदा से विरासत में लीं; रिटायर होकर वानप्रस्थ के लिए पुश्तैनी गाँव जाने का इरादा उनका अपना है, हालाँकि ऐसी बातें वे किशनदा के ही शब्दों और लहजे में कहते हैं। किशनदा के चले जाने के बाद भी यशोधर बाबू उन्हीं की तरह बोलते, हँसते और सोचते हैं। इस तरह किशनदा ने उनके जीवन के साथ-साथ उनकी सोच और मूल्यों को भी गहराई से प्रभावित किया।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. समहाउ इंप्रॉपर वाक्यांश और यशोधर बाबू के व्यक्तित्व तथा कहानी के कथ्य के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: समहाउ इंप्रॉपर यशोधर बाबू के हर उस पल का साथी है जब वे किसी नई, आधुनिक चीज़ का सामना करते हैं, सालगिरह पर “इनसिस्ट” करना, बेटे का वेतन उनके हाथ में न रखना, बेटी का पहनावा, पत्नी की लाली और ख़िज़ाब, सिल्वर वैडिंग की पार्टी। (गैस पर बनी रोटी उन्हें “समहाउ रोटी जैसी लगती नहीं”।) यह वाक्यांश दिखाता है कि वे न इन चीज़ों को दिल से स्वीकार कर पाते हैं, न इनका खुला विरोध कर पाते हैं, बल्कि एक अनमने ढंग से इन्हें बर्दाश्त करते चले जाते हैं। इस अनमनेपन को कहानी के केंद्रीय कथ्य से जोड़कर पढ़ा जा सकता है: पीढ़ी का अंतराल किसी एक बड़े टकराव से नहीं, बल्कि इसी तरह की छोटी-छोटी, रोज़मर्रा की असहमतियों से बनता है। इसलिए यह वाक्यांश सिर्फ़ यशोधर बाबू की आदत नहीं, बल्कि कहानी के व्यंग्य का एक केंद्र-बिंदु माना जा सकता है।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. निम्नलिखित में से किसे आप कहानी की मूल संवेदना कहेंगे और क्यों, तर्क सहित लिखिए (हाशिए पर धकेले जाते मानवीय मूल्य, पीढ़ी का अंतराल, पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव)।

उत्तर: तीनों विकल्प कहानी में मौजूद हैं, पर पीढ़ी का अंतराल ही कहानी की मूल संवेदना कहलाने का सबसे मज़बूत दावेदार है, क्योंकि यही वह मूल टकराव है जिससे बाक़ी दोनों विकल्प निकलते हैं। मानवीय मूल्यों का हाशिए पर जाना (बेटे का वेतन पिता के हाथ न रखना, और बच्चों का घर के काम के लिए नौकर रखने का आग्रह) और पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव (केक, पार्टी, आधुनिक पहनावा) दोनों ही पीढ़ी के अंतराल के परिणाम हैं, कारण नहीं। यशोधर बाबू और उनके बच्चों के बीच की हर छोटी-बड़ी असहमति, चाहे वह पहनावे की हो या पैसे की, अंततः दो अलग-अलग पीढ़ियों की सोच के टकराने से ही उपजती है। इसलिए पीढ़ी का अंतराल इस कहानी की सबसे केंद्रीय संवेदना है।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. यशोधर बाबू के बारे में दिए गए तीन कथनों में से आप किसके समर्थन में हैं (पूरी तरह पुराने विचारों वाले, सहानुभूति के पात्र नहीं; या द्वंद्वग्रस्त, सहानुभूति के पात्र; या आदर्श व्यक्तित्व, अनुसरण योग्य), तर्क सहित लिखिए।

उत्तर: मेरे विचार में दूसरा कथन सबसे उचित है, यशोधर बाबू में एक तरह का द्वंद्व है जिसके कारण नया उन्हें कभी-कभी खींचता तो है पर पुराना छोड़ता नहीं, इसलिए उन्हें सहानुभूति के साथ देखने की ज़रूरत है। वे पूरी तरह पुराने विचारों के हठी बूढ़े नहीं हैं, क्योंकि कहानी उन्हें “डेमोक्रेट बाबू” कहती है, वे बच्चों पर अपनी बात थोपना नहीं चाहते, और बच्चों की तरक्की पर मन ही मन ख़ुश भी होते हैं। पर वे पूर्णतः आदर्श व्यक्तित्व भी नहीं हैं, क्योंकि उनकी सोच में भी विरोधाभास है, वे उस परंपरा की दुहाई देते हैं जो उन्होंने किशनदा से सुनकर अपनाई; पत्नी का कहना है, और कहानी इसे “सही कहना” मानती है, कि उनका स्वयं का देखा हुआ कुछ नहीं है। यह दोहरापन ही उन्हें एक यथार्थवादी, सहानुभूति के योग्य पात्र बनाता है, न कि खलनायक या आदर्श, बल्कि बदलते समय में फँसा हुआ एक साधारण इंसान।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
यशोधर बाबू को यही ‘समहाउ इंप्रापर’ मालूम होता है कि उनका बेटा अपना वेतन उनके हाथ में नहीं रखे। … इस क्रम में बेटे ने पिता का यह क्वार्टर तक अपना बना लिया है। अपना वेतन अपने ढंग से वह इस घर पर खर्च कर रहा है। कभी कारपेट बिछवा रहा है, कभी पर्दे लगवा रहा है। कभी सोफ़ा आ रहा है कभी डनलपवाला डबल बैड और सिगार मेज़। कभी टी. वी., कभी फ्रिज … कहता यही है कि मेरा टी. वी. है समझे, इसे कोई न छुआ करे!

(क) 1 अंक गद्यांश के अनुसार यशोधर बाबू को क्या समहाउ इंप्रॉपर लगता है?
उत्तर: बेटे का अपना वेतन पिता के हाथ में न रखना।

(ख) 2 अंक गद्यांश के आधार पर बताइए कि बेटे ने घर पर किन-किन चीज़ों पर ख़र्च किया है।
उत्तर: बेटे ने कारपेट, पर्दे, सोफ़ा, डनलपवाला डबल बैड, सिगार मेज़, टी.वी. और फ्रिज पर अपने वेतन से ख़र्च किया है।

(ग) 3 अंक गद्यांश में वर्णित पिता-पुत्र के संबंध का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर: गद्यांश दिखाता है कि बेटा आर्थिक रूप से स्वतंत्र होकर घर पर अपना अधिकार तो जमा रहा है, पर पिता के साथ भावनात्मक साझेदारी नहीं बना पा रहा, वह चीज़ों को अपना कहकर पिता को उनसे ही दूर कर रहा है। यह आधुनिक पीढ़ी की आर्थिक स्वतंत्रता और परंपरागत पारिवारिक सम्मान के बीच के टकराव को दिखाता है, जहाँ पैसा तो बँट रहा है पर आदर और साझेदारी की भावना नहीं।