कक्षा 12 हिंदी अंतरा भाग 2 अध्याय 12 संवदिया NCERT समाधान

NCERT पाठ्यपुस्तक अंतरा भाग 2 के अध्याय 12 संवदिया (फणीश्वरनाथ ‘रेणु’) की प्रश्नावली (प्रश्न-अभ्यास, भाषा-शिल्प और योग्यता-विस्तार) के सभी प्रश्नों के पूर्ण उत्तर, पाठ्यपुस्तक के आधार पर। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 प्रश्न-अभ्यास

प्रश्न 1

प्र. संवदिया की क्या विशेषताएँ हैं और गाँववालों के मन में संवदिया की क्या अवधारणा है?

उत्तर: एक अच्छे संवदिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह संवाद के हर शब्द को हूबहू याद रखता है और उसे ठीक उसी सुर-स्वर में सुनाता है जिसमें वह उसे सुनाया गया हो, यह हर किसी के बस की बात नहीं। इसीलिए कहा गया है कि आदमी मानो भगवान के घर से संवदिया बनकर आता है। पाठ के अनुसार गाँव के लोगों की ग़लत धारणा है कि निठल्ला, कामचोर और पेटू आदमी ही संवदिया का काम करता है। बिना मज़दूरी लिए जो गाँव-गाँव संवाद पहुँचावे, उसे वे “औरतों का गुलाम” कहते हैं, और कहते हैं कि जो “ज़रा-सी मीठी बोली सुनकर ही नशे में आ जाए, ऐसे मर्द को भी भला मर्द कहेंगे?” फिर भी पाठ पूछता है कि गाँव में कौन ऐसा है, जिसके घर की माँ-बहू-बेटी का संवाद हरगोबिन ने नहीं पहुँचाया है।

प्रश्न 2

प्र. बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन के मन में किस प्रकार की आशंका हुई?

उत्तर: हरगोबिन को अचरज हुआ कि आज के ज़माने में जब गाँव-गाँव डाकघर खुल गए हैं, तब भी किसी को संवदिया की ज़रूरत क्यों पड़ी। हवेली में पहुँचकर उसने वातावरण को सूँघकर अंदाज़ा लगाया कि ज़रूर कोई गुप्त समाचार ले जाना होगा, जिसे चाँद-सूरज तक को न मालूम हो।

प्रश्न 3

प्र. बड़ी बहुरिया अपने मायके संदेश क्यों भेजना चाहती थी?

उत्तर: पति (बड़े भैया) की मृत्यु के बाद तीनों देवरों में झगड़ा हुआ, रैयतों ने ज़मीन पर दखल कर लिया, और तीनों देवर गाँव छोड़कर शहर जा बसे, जिससे बड़ी बहुरिया बिल्कुल अकेली और असहाय रह गई थी। उसे बथुआ-साग खाकर गुज़ारा करना पड़ रहा था, कोई नौकर भी नहीं बचा था। इसी असहनीय पीड़ा और अकेलेपन से तंग आकर उसने अपनी माँ को संदेश भेजा कि वह उसे यहाँ से ले जाए, वरना वह डूब मरेगी।

प्रश्न 4

प्र. हरगोबिन बड़ी हवेली में पहुँचकर अतीत की किन स्मृतियों में खो जाता है?

उत्तर: हरगोबिन को याद आता है कि बड़े भैया की मृत्यु एक घंटे की बीमारी में हो गई थी, और उसी के बाद तीनों भाइयों में झगड़ा शुरू होकर रैयतों ने ज़मीन पर दखल कर लिया, और तीनों भाई शहर जा बसे। उसे यह भी याद आता है कि बँटवारे के समय बड़ी बहुरिया के गहने ज़बरदस्ती छीने गए थे और उसकी बनारसी साड़ी तक तीन टुकड़ों में बाँट दी गई थी, जिसे उसने अपनी आँखों से द्रौपदी के चीर-हरण जैसा भयानक दृश्य देखा था।

प्रश्न 5

प्र. संवाद कहते वक्त बड़ी बहुरिया की आँखें क्यों छलछला आईं?

उत्तर: बड़ी बहुरिया अपने दुख, अकेलेपन और असहाय स्थिति को शब्दों में बयान कर रही थी, जो उसके लिए अत्यंत पीड़ादायक था। अपनी ही माँ को यह बताना कि वह अब यहाँ नहीं रह सकेगी और डूब मरने तक की बात कहनी पड़ रही है, इस गहरी वेदना के कारण ही उसकी आँखें छलछला आईं।

प्रश्न 6

प्र. गाड़ी पर सवार होने के बाद संवदिया के मन में काँटे की चुभन का अनुभव क्यों हो रहा था। उससे छुटकारा पाने के लिए उसने क्या उपाय सोचा?

उत्तर: बड़ी बहुरिया के संवाद का हर शब्द हरगोबिन के मन में काँटे की तरह चुभ रहा था, क्योंकि वह उस संवाद की गहरी पीड़ा को महसूस कर रहा था और डर रहा था कि उसे सुनाते समय अपने कलेजे को कैसे सँभालेगा। इस बेचैनी से छुटकारा पाने के लिए उसने पास बैठे सहयात्री से बातचीत करने की कोशिश की, पर उस चिड़चिड़े आदमी का रूखा जवाब सुनकर उसने भाँप लिया कि बातचीत नहीं जमेगी, और वह फिर मन-ही-मन संवाद को दुहराने लगा। (लौटते समय भी यही बेचैनी रही; तब “निरगुन गानेवाला सूरदास” गाड़ी में आया और “सूरदास के गीतों को सुनकर उसका जी स्थिर हुआ, थोड़ा”।)

प्रश्न 7

प्र. बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन क्यों नहीं सुना सका?

उत्तर: थाना बिंहपुर पहुँचते ही हरगोबिन का जी भारी हो गया। उसे लगा कि इसी पगडंडी से बड़ी बहुरिया मैके लौट आएगी, “गाँव छोड़कर चली जावेगी। फिर कभी नहीं आवेगी!”, और “गाँव की लक्ष्मी ही गाँव छोड़कर जावेगी!” वह सोचता है, “किस मुँह से वह ऐसा संवाद सुनाएगा? कैसे कहेगा कि बड़ी बहुरिया बथुआ-साग खाकर गुज़ारा कर रही है?” उसे डर था कि “सुननेवाले हरगोबिन के गाँव का नाम लेकर थूकेंगे”। इसी डर और बड़ी बहुरिया के प्रति करुणा के कारण वह असली संवाद नहीं सुना सका और झूठ बोल बैठा; रात में तय करने के बाद भी सुबह वह सच नहीं कह पाया।

प्रश्न 8

प्र. ‘संवदिया डटकर खाता है और अफर कर सोता है’ से क्या आशय है?

उत्तर: इसका आशय यह है कि आम तौर पर संवाद पहुँचाकर अपना उत्तरदायित्व निभा चुका संवदिया निश्चिंत होकर पेटभर खाता है और चैन से सो जाता है। पर हरगोबिन के साथ इसका उलटा होता है, हरगोबिन झूठ बोलने के अपराध-बोध में इतना बेचैन है कि वह रात का भोजन भी नहीं कर पाता और रातभर सो नहीं पाता।

प्रश्न 9

प्र. जलालगढ़ पहुँचने के बाद बड़ी बहुरिया के सामने हरगोबिन ने क्या संकल्प लिया?

उत्तर: होश में आने पर हरगोबिन बड़ी बहुरिया के पैर पकड़कर क्षमा माँगता है और कहता है कि वह उसका संवाद नहीं कह सका। वह संकल्प लेता है कि अब वह निठल्ला बैठा नहीं रहेगा, बड़ी बहुरिया का सारा काम करेगा, उसे कोई कष्ट नहीं होने देगा, और उससे विनती करता है कि वह गाँव छोड़कर न जाए। वह ख़ुद को उसका बेटा और उसे सारे गाँव की माँ बताता है।

प्रश्न 10

प्र. ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में संवदिया की क्या कोई भूमिका हो सकती है?

उत्तर: आज डाक, फ़ोन और इंटरनेट के ज़रिए तुरंत संदेश भेजा जा सकता है, पर इनमें संवदिया जैसा गहरा भावनात्मक जुड़ाव और आपसी भरोसा अक्सर नहीं मिलता। (यह विचार-आधारित प्रश्न है; पाठ में डिजिटल साधनों की चर्चा नहीं है।) संवदिया केवल शब्द नहीं, संदेश के साथ जुड़ी भावना, उसका दर्द और उसकी गरिमा भी समझकर पहुँचाता है, जैसा हरगोबिन बड़ी बहुरिया के मामले में करना चाहता था। इसीलिए आज भी, तकनीक के इस दौर में, किसी भरोसेमंद, संवेदनशील व्यक्ति की भूमिका पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई है, विशेषकर पारिवारिक और भावनात्मक मामलों में।

2 भाषा-शिल्प

प्रश्न 1

प्र. इन शब्दों का अर्थ समझिए, काबुली-कायदा, रोम-रोम कलपने लगा, अगहनी धान।

उत्तर: काबुली-कायदा, ज़ोर-ज़ुल्म से, कठोरता से उधार वसूलने का तरीक़ा। रोम-रोम कलपने लगा, पूरे शरीर और मन में गहरा दुख या पछतावा होना। अगहनी धान, अगहन महीने में तैयार होने वाली धान की फ़सल, जिसकी कटाई के समय देवर-देवरानियाँ गाँव आते थे।

प्रश्न 2

प्र. पाठ से प्रश्नवाचक वाक्यों को छाँटिए और संदर्भ के साथ उन पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: पाठ में अनेक प्रश्नवाचक वाक्य कहानी की बेचैनी और मनोद्वंद्व को उभारते हैं। जैसे, “फिर उसकी बुलाहट क्यों हुई?”, हरगोबिन के शुरुआती कौतूहल को दिखाता है। बड़ी बहुरिया का बार-बार दोहराया प्रश्न, “बथुआ-साग खाकर कब तक जीऊँ? किसलिए, किसके लिए?”, उसकी गहरी हताशा को व्यक्त करता है। हरगोबिन का प्रश्न, “किस मुँह से वह ऐसा संवाद सुनाएगा?”, उसकी आत्म-ग्लानि और असमर्थता दिखाता है। साँझ के अँधेरे में राह भटकने पर लगातार पूछे गए प्रश्न, “यह कहाँ चला आया हरगोबिन? यह कौन गाँव है?”, उसकी भ्रमित, बेहोशी की ओर बढ़ती मनोदशा को उभारते हैं। ये सभी प्रश्नवाचक वाक्य पाठक को पात्रों के भीतर की उथल-पुथल सीधे महसूस कराते हैं।

प्रश्न 3

प्र. इन पंक्तियों की व्याख्या कीजिए।

(क) बड़ी हवेली अब नाममात्र को ही बड़ी हवेली है।
उत्तर: हवेली “टूट भी गई है”; जहाँ दिनरात नौकर-नौकरानियों और जन-मज़दूरों की भीड़ लगी रहती थी, वहाँ आज बड़ी बहुरिया ख़ुद सूपा में अनाज फटक रही है। यानी उसकी असली शान, नौकर-चाकर और रौनक़, ख़त्म हो चुकी है। ज़मीन-जायदाद पर पाठ में दो मत हैं: बूढ़ी माता कहती है “ज़मीन-जायदाद तो सब चली ही गई”, जबकि हरगोबिन कहता है “ज़मीन-जायदाद अभी भी कुछ कम नहीं। जो है, वही बहुत है।” अब सिर्फ़ नाम में “बड़ी” रह गया है, हक़ीक़त में वहाँ ग़रीबी और सूनापन है।

(ख) हरगोबिन ने देखी अपनी आँखों से द्रौपदी की चीरहरण लीला।
उत्तर: महाभारत में द्रौपदी का चीर खींचकर उसे अपमानित करने की कोशिश हुई थी। हरगोबिन बँटवारे के समय बड़ी बहुरिया के गहने छीने जाने और उसकी बनारसी साड़ी तीन टुकड़ों में बाँटे जाने को उतना ही क्रूर और अपमानजनक मानता है, इसीलिए इसकी तुलना द्रौपदी के चीर-हरण से करता है।

(ग) बथुआ साग खाकर कब तक जीऊँ?
उत्तर: बथुआ-साग खाकर गुज़ारा करना उसकी दयनीय आर्थिक स्थिति का संकेत है। बड़ी बहुरिया के मुँह से यह सवाल उसकी गहरी हताशा और आर्थिक तंगी को दिखाता है, वह पूछ रही है कि कब तक वह इतनी दयनीय हालत में बिना किसी उम्मीद या सहारे के यूँ ही जीती रहेगी।

(घ) किस मुँह से वह ऐसा संवाद सुनाएगा।
उत्तर: हरगोबिन सोचता है, “कैसे कहेगा कि बड़ी बहुरिया बथुआ-साग खाकर गुज़ारा कर रही है?” उसका डर है कि “सुननेवाले हरगोबिन के गाँव का नाम लेकर थूकेंगे”, कि कैसा गाँव है जहाँ लक्ष्मी जैसी बहुरिया दुख भोग रही है। इसीलिए वह ख़ुद को इतना असमर्थ महसूस करता है कि सच बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।

3 योग्यता-विस्तार

प्रश्न 1

प्र. संवदिया की भूमिका आपको मिले तो आप क्या करेंगे? संवदिया बनने के लिए किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है?

उत्तर: यदि मुझे संवदिया की भूमिका मिले, तो मैं सबसे पहले संवाद को शब्द-दर-शब्द ध्यान से सुनूँगा और उसे उसी सुर-स्वर में सुनाने की कोशिश करूँगा जिसमें वह मुझे सुनाया गया हो। संवदिया बनने के लिए धैर्य, अच्छी स्मरण-शक्ति, दूसरों की भावनाओं को समझने की संवेदनशीलता, ईमानदारी और संवाद की गोपनीयता बनाए रखने जैसी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। साथ ही, यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि व्यक्तिगत भावुकता के कारण संवाद में कोई हेरफेर न हो, जैसा हरगोबिन से हो गया।

प्रश्न 2

प्र. इस कहानी का नाट्य रूपांतरण कर विद्यालय के मंच पर प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर: यह एक मंचीय गतिविधि है। कहानी को तीन दृश्यों में बाँटा जा सकता है, पहला दृश्य बड़ी हवेली में मोदिआइन-प्रसंग और बड़ी बहुरिया का संवाद देना, दूसरा दृश्य ट्रेन में हरगोबिन का मनोद्वंद्व और बूढ़ी माता से भेंट, और तीसरा दृश्य वापसी की कठिन यात्रा और अंत में बड़ी बहुरिया द्वारा हरगोबिन को होश में लाना। संवादों को पाठ की मूल भाषा में ही रखना चाहिए ताकि आंचलिक शैली की सच्चाई बनी रहे।