कक्षा 12 हिंदी अंतरा भाग 2 अध्याय 15 जहाँ कोई वापसी नहीं महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions with Answers) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. निर्मल वर्मा का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर: निर्मल वर्मा का जन्म सन् 1929 में शिमला (हिमाचल प्रदेश) में हुआ था।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. “जहाँ कोई वापसी नहीं” किस संग्रह से लिया गया है?

उत्तर: यह अंश निर्मल वर्मा के यात्रा-संस्मरण संग्रह “धुंध से उठती धुन” से लिया गया है।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. पाठ में अमझर गाँव की पहचान किस प्रकार बताई गई है?

उत्तर: पाठ के अनुसार अमझर “आम के पेड़ों से घिरा गाँव” है, “जहाँ आम झरते हैं”। यह सिंगरौली के नवागाँव क्षेत्र के लगभग अठारह गाँवों में से एक है।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. लेखक किस संस्था की ओर से सिंगरौली गए थे?

उत्तर: लेखक दिल्ली स्थित संस्था ‘लोकायन’ की ओर से सिंगरौली गए थे।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. सिंगरौली को पुराने समय में किन दो नामों से जाना जाता था?

उत्तर: सिंगरौली को अपने सौंदर्य के कारण ‘बैकुंठ’ और अपने अकेलेपन/दुर्गमता के कारण ‘काला पानी’ कहा जाता था।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. निर्मल वर्मा को साहित्य अकादमी पुरस्कार कब और किस कृति पर मिला?

उत्तर: निर्मल वर्मा को सन् 1985 में उनके कहानी-संग्रह “कव्वे और काला पानी” पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. अमझर गाँव के पेड़ पिछले दो-तीन वर्षों से क्यों सूने पड़े हैं?

उत्तर: कारण पूछने पर लेखक को पता चला कि जब से सरकारी घोषणा हुई है कि अमरौली प्रोजेक्ट के अंतर्गत नवागाँव के अनेक गाँव उजाड़ दिए जाएँगे, “तब से न जाने कैसे, आम के पेड़ सूखने लगे”; न कोई फल पकता है, न कुछ नीचे झरता है। पाठ पेड़ सूखने का निश्चित कारण नहीं बताता; लेखक केवल टिप्पणी करते हैं: “आदमी उजड़ेगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?”

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. लेखक ने सिंगरौली के पेड़ों के मूक सत्याग्रह को अनूठा अनुभव क्यों बताया है?

उत्तर: लेखक ने टिहरी गढ़वाल में पेड़ बचाने के लिए हुए मानव-संघर्ष की कहानियाँ पहले भी सुनी थीं, लेकिन सिंगरौली में पेड़ों का स्वयं मनुष्य के विस्थापन के विरोध में मूक सत्याग्रह करना उन्हें एक विचित्र अनुभव लगा। एक दूसरी दृष्टि से भी यह अनूठा अनुभव था: विस्थापित लोगों की उन्मूलित ज़िंदगी लेखक ने शहरों की बस्तियों और स्लम्स में कई बार देखी थी, पर विस्थापन से पहले वे कैसे परिवेश में रहते होंगे, इसका दृश्य अपने स्वच्छ, पवित्र खुलेपन में पहली बार अमझर गाँव में देखने को मिला।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. धान रोपती स्त्रियों की तुलना लेखक ने किससे और क्यों की है?

उत्तर: लेखक ने चटाई के किश्तीनुमा हैट के कारण उन्हें फ़ोटो या फ़िल्मों में देखी वियतनामी या चीनी औरतों जैसा बताया है। आहट पाते ही वे एक साथ सिर उठाकर चौंकी हुई निगाहों से देखती हैं, “बिलकुल उन युवा हिरणियों की तरह” जिन्हें लेखक ने कान्हा के वन्यस्थल में देखा था। पर पाठ के अनुसार ये स्त्रियाँ “डरतीं नहीं, भागतीं नहीं”, सिर्फ़ विस्मय से मुसकुराती हैं और फिर काम में डूब जाती हैं।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. सिंगरौली की भूमि और जंगल किस तरह के थे?

उत्तर: सिंगरौली की भूमि इतनी उर्वरा और जंगल इतने समृद्ध थे कि शताब्दियों से हज़ारों वनवासी और किसान इनके सहारे अपना भरण-पोषण करते आए थे; यह कोई उजाड़ रेगिस्तान नहीं था।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. सिंगरौली नाम की उत्पत्ति के बारे में क्या दंतकथा है?

उत्तर: एक पुरानी दंतकथा के अनुसार सिंगरौली का नाम पूर्व-पश्चिम में फैली ‘सृंगावली’ पर्वतमाला से निकला है।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. रिहंद बाँध का सिंगरौली पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: रिहंद बाँध बनने से सिंगरौली में विस्थापन की एक लहर आई थी, जिसके कारण हज़ारों गाँव उजाड़ दिए गए थे।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. लेखक के अनुसार सिंगरौली की खनिज संपदा किस तरह अभिशाप बन गई?

उत्तर: “कभी-कभी किसी इलाके की संपदा ही उसका अभिशाप बन जाती है।” सिंगरौली की अपार खनिज संपदा दिल्ली के सत्ताधारियों और उद्योगपतियों की आँखों से छिपी नहीं रही। रिहंद बाँध से विस्थापन की एक लहर आई, फिर सेंट्रल कोल फील्ड और नेशनल सुपर थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन बने, और कोयले की खदानों व ताप विद्युत गृहों की एक पूरी शृंखला ने पूरे प्रदेश को घेर लिया। घाटी और जंगलों पर ठेकेदारों, वन-अधिकारियों और सरकारी कारिंदों का आक्रमण शुरू हुआ।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. प्रकृति के कारण विस्थापन और औद्योगीकरण के कारण विस्थापन में क्या अंतर है?

उत्तर: प्रकृति द्वारा किए गए विस्थापन (बाढ़, भूकंप) में लोग कुछ अरसे के लिए ही अपना घरबार छोड़ते हैं और आफत टलते ही अपने जाने-पहचाने परिवेश में दोबारा लौट आते हैं। इसके विपरीत, जब विकास और प्रगति के नाम पर इतिहास लोगों को उन्मूलित करता है, तो वे फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते। आधुनिक औद्योगीकरण की आँधी में केवल मनुष्य ही नहीं उखड़ता, बल्कि उसका परिवेश, संस्कृति और आवास-स्थल भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं। पाठ के शीर्षक ‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ को इसी अंतर से जोड़कर पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. यूरोप और भारत की पर्यावरण संबंधी चिंताएँ किस प्रकार भिन्न हैं?

उत्तर: यूरोप में पर्यावरण का प्रश्न मनुष्य और भूगोल के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रश्न है। भारत में यही प्रश्न मनुष्य और उसकी संस्कृति के बीच पारंपरिक संबंध बनाए रखने का प्रश्न बन जाता है, क्योंकि भारत की सांस्कृतिक विरासत यूरोप की तरह संग्रहालयों में जमा नहीं थी, बल्कि आदमी को उसकी धरती, जंगलों और नदियों से जोड़ने वाले रिश्तों में जीवित थी। अतीत का मिथक-संसार पोथियों में नहीं, इन्हीं रिश्तों की अदृश्य लिपि में मौजूद रहता था।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. लेखक के अनुसार स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी “ट्रैजेडी” क्या है?

उत्तर: लेखक के अनुसार त्रासदी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना। असली त्रासदी यह है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय, प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच के नाज़ुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है, इस ओर हमारे पश्चिम-शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। लेखक के अनुसार हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, पर “कभी इसका खयाल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता।”

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. औद्योगीकरण ने पर्यावरण का संकट पैदा कर दिया है, क्यों और कैसे?

उत्तर: “एक भरे-पूरे ग्रामीण अंचल को कितनी नासमझी और निर्ममता से उजाड़ा जा सकता है, सिंगरौली इसका ज्वलंत उदाहरण है।” सिंगरौली की अपार खनिज संपदा सत्ताधारियों और उद्योगपतियों की नज़र में आई। रिहंद बाँध बनने से विस्थापन की एक लहर आई, जिसमें हज़ारों गाँव उजाड़ दिए गए; फिर सेंट्रल कोल फील्ड और नेशनल सुपर थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन बने, और कोयले की खदानों और उनपर आधारित ताप विद्युत गृहों की एक पूरी शृंखला ने पूरे प्रदेश को अपने में घेर लिया। घाटी और जंगलों पर ठेकेदारों, वन-अधिकारियों और सरकारी कारिंदों का आक्रमण शुरू हुआ। आधुनिक औद्योगीकरण की आँधी में सिर्फ़ मनुष्य ही नहीं उखड़ता, उसका परिवेश, संस्कृति और आवास-स्थल भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं। लेखक के अनुसार असली समस्या यह है कि योजनाएँ बनाते समय प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच के नाज़ुक संतुलन की ओर ध्यान नहीं गया।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. आधुनिक भारत के “नए शरणार्थी” किन्हें कहा गया है और क्यों?

उत्तर: लेखक उन लोगों को आधुनिक भारत के “नए शरणार्थी” कहते हैं, जिन्हें औद्योगीकरण के झंझावात ने उनकी घर-ज़मीन से हमेशा के लिए उखाड़कर निर्वासित कर दिया है। ये लोग प्राकृतिक आपदा से पीड़ित लोगों जैसे नहीं हैं, क्योंकि इन्हें फिर कभी अपने घर लौटने का अवसर नहीं मिलता, जैसे अमझर और नवागाँव क्षेत्र के गाँवों के लोग, जिनके गाँव उजाड़े जाने की घोषणा हो चुकी है।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. सिंगरौली के इतिहास पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

उत्तर: 1926 से पूर्व सिंगरौली में खैरवार जाति के आदिवासी राजा शासन करते थे। बाद में इसका आधा हिस्सा, जिसमें उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के खंड शामिल थे, रीवाँ राज्य में शामिल कर लिया गया। बीस वर्ष पहले तक समूचा क्षेत्र विंध्याचल और कैमूर के पहाड़ों और जंगलों से घिरा था, जहाँ अधिकांशतः कत्था, महुआ, बाँस और शीशम के पेड़ उगते थे। एक पुरानी दंतकथा के अनुसार इसका नाम ‘सृंगावली’ पर्वतमाला से निकला है। घने जंगलों के कारण यातायात के साधन सीमित थे; अपने सौंदर्य के कारण यह ‘बैकुंठ’ और अपने अकेलेपन के कारण ‘काला पानी’ माना जाता था। फिर रिहंद बाँध से विस्थापन की एक लहर आई, जिसमें हज़ारों गाँव उजाड़े गए; सेंट्रल कोल फील्ड और नेशनल सुपर थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन बने, पक्की सड़कें और पुल बनाए गए, और सिंगरौली प्रगति के मानचित्र पर राष्ट्रीय गौरव के साथ प्रतिष्ठित हुआ।

प्रश्न 7 (4 अंक)

प्र. निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए: “कभी-कभी किसी इलाके की संपदा ही उसका अभिशाप बन जाती है।”

उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि सिंगरौली जैसे समृद्ध और उर्वर क्षेत्र की अपार खनिज संपदा ही उसके विनाश का कारण बन गई। लेखक कहते हैं: “अगर यह इलाका उजाड़ रेगिस्तान होता तो शायद इतना क्षोभ नहीं होता”; पर इसकी भूमि उर्वरा और जंगल समृद्ध थे, जिनके सहारे शताब्दियों से हज़ारों वनवासी और किसान जीते आए थे। सिंगरौली की अपार खनिज संपदा दिल्ली के सत्ताधारियों और उद्योगपतियों की आँखों से छिपी नहीं रही; यहाँ कोयले की खदानें और ताप विद्युत गृह बने, और स्थानीय लोग उजड़ गए। “संपदा” और “अभिशाप” का एक साथ आना इस विडंबना को तीखा बनाता है।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. “जहाँ कोई वापसी नहीं” पाठ के आधार पर सिंगरौली में विस्थापन की समस्या का वर्णन कीजिए।

उत्तर: सिंगरौली के नवागाँव क्षेत्र में जनसंख्या पचास हज़ार से अधिक है, जहाँ लगभग अठारह गाँव बसे हैं। अमझर जैसे गाँव आम के पेड़ों से घिरे थे, पर अमरौली प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद पेड़ भी सूने पड़ने लगे। विस्थापन से पहले लोग स्वच्छ, पवित्र खुलेपन में रहते थे और धान की खेती करते थे। विस्थापन के बाद इन्हीं लोगों के भोपाल, जबलपुर या बैढ़न की सड़कों पर पत्थर कूटते दिखाई देने की आशंका है। इससे पहले रिहंद बाँध बनने से विस्थापन की एक लहर आई थी, जिसके कारण हज़ारों गाँव उजाड़ दिए गए थे; इसके बाद सेंट्रल कोल फील्ड और नेशनल सुपर थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन जैसी नयी योजनाएँ आईं। यह विस्थापन स्थायी है, क्योंकि विकास से उजड़े लोग फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. निर्मल वर्मा का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं और भाषा-शैली का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: निर्मल वर्मा (1929-2005) का जन्म शिमला में हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज से इतिहास में एम.ए. किया, फिर सन् 1959 में प्राग गए और चेक उपन्यासों तथा कहानियों का हिंदी अनुवाद किया। सन् 1970 में भारत लौटकर स्वतंत्र लेखन करने लगे। वे नयी कहानी आंदोलन के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। उनके प्रमुख कहानी-संग्रह परिंदे, तीन एकांत, कव्वे और काला पानी हैं; उपन्यास वे दिन, लाल टीन की छत, अंतिम अरण्य हैं; यात्रा-संस्मरण हर बारिश में, धुंध से उठती धुन हैं; निबंध-संग्रह शब्द और स्मृति तथा कला का जोखिम और ढलान से उतरते हुए हैं। सन् 1985 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उनकी भाषा-शैली में अनोखी कसावट, मिश्र-संयुक्त वाक्यों की प्रधानता और उर्दू-अंग्रेज़ी शब्दों का स्वाभाविक प्रयोग मिलता है।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. “प्रकृति और इतिहास के बीच यह गहरा अंतर है” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: लेखक के अनुसार प्रकृति (बाढ़, भूकंप) से उजड़े लोग कुछ अरसे के लिए ही अपना घर छोड़ते हैं और आपदा टलते ही अपने जाने-पहचाने परिवेश में लौट आते हैं, अर्थात यह विस्थापन अस्थायी है। इसके विपरीत, जब विकास और प्रगति के नाम पर इतिहास लोगों को उन्मूलित करता है, तो वे फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते, अर्थात यह विस्थापन स्थायी है। अमझर और नवागाँव क्षेत्र के गाँवों के लोग इसी दूसरी श्रेणी में आते हैं। पाठ के शीर्षक ‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ को इसी गहरे अंतर से जोड़कर पढ़ा जा सकता है।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. सिंगरौली के विकास की कहानी को औद्योगीकरण के दो पहलुओं (उजला और अंधेरा) के रूप में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: विकास का ‘उजला’ पहलू यह है कि सिंगरौली, जो अपने सौंदर्य के कारण ‘बैकुंठ’ और अकेलेपन के कारण ‘काला पानी’ माना जाता था, अब प्रगति के मानचित्र पर राष्ट्रीय गौरव के साथ प्रतिष्ठित हुआ: सेंट्रल कोल फील्ड और नेशनल सुपर थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन बने, चारों तरफ़ पक्की सड़कें और पुल बनाए गए, और कोयले की खदानों और उनपर आधारित ताप विद्युत गृहों की एक पूरी शृंखला ने पूरे प्रदेश को घेर लिया। लेकिन यह ‘उजला’ पहलू अपने पीछे व्यापक पैमाने पर ‘विनाश का अंधेरा’ लेकर आया: रिहंद बाँध बनने से हज़ारों गाँव उजाड़ दिए गए, और अमझर जैसे गाँवों को उजाड़े जाने की सरकारी घोषणा हो चुकी है, जिसके बाद वहाँ के लोग हमेशा के लिए विस्थापित होंगे। जिस तरह ज़मीन पर पड़े शिकार को देखकर आकाश में गिद्धों और चीलों का झुंड मँडराने लगता है, वैसे ही सिंगरौली की घाटी और जंगलों पर ठेकेदारों, वन-अधिकारियों और सरकारी कारिंदों का आक्रमण शुरू हुआ।

प्रश्न 5 (6 अंक)

प्र. यूरोप और भारत की सांस्कृतिक-पर्यावरणीय दृष्टि में अंतर करते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत की विशेषता बताइए।

उत्तर: यूरोप में पर्यावरण का प्रश्न मनुष्य और भूगोल के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रश्न है; लेखक के अनुसार वहाँ की सांस्कृतिक विरासत म्यूज़ियमों और संग्रहालयों में जमा है। भारत में यही प्रश्न मनुष्य और उसकी संस्कृति के बीच पारंपरिक संबंध बनाए रखने का प्रश्न बन जाता है, क्योंकि भारत की सांस्कृतिक विरासत संग्रहालयों में जमा नहीं थी, बल्कि उन रिश्तों में जीवित थी जो आदमी को उसकी धरती, जंगलों और नदियों से जोड़ते थे। अतीत का समूचा मिथक-संसार पोथियों में नहीं, इन्हीं रिश्तों की अदृश्य लिपि में मौजूद रहता था। लेखक यह भी कहते हैं कि पश्चिम जिस विकल्प को खो चुका था, भारत में उसकी संभावनाएँ खुली थीं, क्योंकि अपनी समस्त कोशिशों के बावजूद अंग्रेज़ी राज हिंदुस्तान को संपूर्ण रूप से अपनी ‘सांस्कृतिक कॉलोनी’ बनाने में असफल रहा था।

प्रश्न 6 (6 अंक)

प्र. लेखक के अनुसार भारत विकास का कौन-सा वैकल्पिक मार्ग अपना सकता था, और उसने ऐसा क्यों नहीं किया?

उत्तर: लेखक के अनुसार शायद पैंतीस वर्ष पहले हम कोई दूसरा विकल्प चुन सकते थे, जिसमें मानव सुख की कसौटी भौतिक लिप्सा न होकर जीवन की ज़रूरतों द्वारा निर्धारित होती। पश्चिम यह विकल्प खो चुका था, लेकिन भारत में इसकी संभावनाएँ खुली थीं, क्योंकि अपनी समस्त कोशिशों के बावजूद अंग्रेज़ी राज हिंदुस्तान को संपूर्ण रूप से अपनी ‘सांस्कृतिक कॉलोनी’ बनाने में असफल रहा था। परंतु पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाज़ुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है, इस ओर हमारे पश्चिम-शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। लेखक के अनुसार हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, पर “कभी इसका खयाल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता।”

5 केस स्टडी

केस स्टडी
हम उस दुपहर सिंगरौली के एक क्षेत्र—नवागाँव गए थे। इस क्षेत्र की आबादी पचास हज़ार से ऊपर है, जहाँ लगभग अठारह छोटे-छोटे गाँव बसे हैं। इन्हीं गाँवों में एक का नाम है—अमझर—आम के पेड़ों से घिरा गाँव—जहाँ आम झरते हैं। किंतु पिछले दो-तीन वर्षों से पेड़ों पर सूनापन है, न कोई फल पकता है, न कुछ नीचे झरता है। कारण पूछने पर पता चला कि जब से सरकारी घोषणा हुई है कि अमरौली प्रोजेक्ट के अंतर्गत नवागाँव के अनेक गाँव उजाड़ दिए जाएँगे, तब से न जाने कैसे, आम के पेड़ सूखने लगे। आदमी उजड़ेगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?

(क) 1 अंक नवागाँव क्षेत्र में कितने गाँव बसे हैं?
उत्तर: नवागाँव क्षेत्र में लगभग अठारह छोटे-छोटे गाँव बसे हैं।

(ख) 1 अंक कारण पूछने पर लेखक को अमझर के पेड़ों के सूखने के बारे में क्या पता चला?
उत्तर: अमरौली प्रोजेक्ट के अंतर्गत गाँव उजाड़े जाने की सरकारी घोषणा के बाद से पेड़ सूखने लगे; लेखक के अनुसार यह “न जाने कैसे” हुआ, कारण स्पष्ट नहीं।

(ग) 2 अंक लेखक ने इस घटना को किस पंक्ति में व्यक्त किया है और इसका क्या भाव है?
उत्तर: लेखक कहते हैं: “आदमी उजड़ेगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?” इसका भाव यह है कि मनुष्य और प्रकृति का रिश्ता इतना गहरा है कि मनुष्य के उजड़ने की आशंका से मानो पेड़ भी जीवन छोड़ने लगते हैं।

(घ) 2 अंक नवागाँव क्षेत्र की जनसंख्या के आधार पर लेखक इस विस्थापन के पैमाने के बारे में क्या संकेत देते हैं?
उत्तर: पचास हज़ार से अधिक की आबादी वाले अठारह-गाँव के क्षेत्र में से कई गाँवों के उजड़ने की आशंका यह दर्शाती है कि यह विस्थापन बड़े पैमाने पर होगा, जो क्षेत्र के परंपरागत अस्तित्व के एक बड़े हिस्से को मिटा देगा।

केस स्टडी
भारत की सांस्कृतिक विरासत यूरोप की तरह म्यूज़ियम्स और संग्रहालयों में जमा नहीं थी—वह उन रिश्तों से जीवित थी, जो आदमी को उसकी धरती, उसके जंगलों, नदियों—एक शब्द में कहें—उसके समूचे परिवेश के साथ जोड़ते थे। अतीत का समूचा मिथक संसार पोथियों में नहीं, इन रिश्तों की अदृश्य लिपि में मौजूद रहता था। यूरोप में पर्यावरण का प्रश्न मनुष्य और भूगोल के बीच संतुलन बनाए रखने का है—भारत में यही प्रश्न मनुष्य और उसकी संस्कृति के बीच पारंपरिक संबंध बनाए रखने का हो जाता है। स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रेजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय—प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है—इस ओर हमारे पश्चिम-शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया।

(क) 1 अंक भारत की सांस्कृतिक विरासत कहाँ जीवित थी?
उत्तर: भारत की सांस्कृतिक विरासत उन रिश्तों से जीवित थी, जो आदमी को उसकी धरती, उसके जंगलों, नदियों, यानी उसके समूचे परिवेश के साथ जोड़ते थे।

(ख) 1 अंक लेखक के अनुसार त्रासदी क्या नहीं थी?
उत्तर: शासक वर्ग का औद्योगीकरण का मार्ग चुनना सबसे बड़ी ट्रेजेडी (त्रासदी) नहीं थी।

(ग) 2 अंक लेखक के अनुसार असली त्रासदी क्या थी?
उत्तर: पश्चिम की नकल में योजनाएँ बनाते समय प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच के नाज़ुक संतुलन को बचाने की ओर पश्चिम-शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी न जाना ही असली त्रासदी थी।

(घ) 2 अंक इस गद्यांश के आधार पर भारत और यूरोप की सांस्कृतिक विरासत की प्रकृति में क्या अंतर बताया गया है?
उत्तर: यूरोप की सांस्कृतिक विरासत म्यूज़ियम्स और संग्रहालयों में जमा है, जबकि भारत की विरासत उन जीवित रिश्तों में है जो आदमी को उसकी धरती, जंगलों, नदियों, यानी उसके समूचे परिवेश से जोड़ते हैं; अतीत का मिथक संसार पोथियों में नहीं, इन रिश्तों की अदृश्य लिपि में मौजूद रहता था।