कक्षा 12 हिंदी अंतरा भाग 2 अध्याय 15 जहाँ कोई वापसी नहीं शॉर्ट नोट्स

कक्षा 12 हिंदी, अंतरा भाग 2, अध्याय 15 का त्वरित पुनरीक्षण। हर परिभाषा, हर शब्दार्थ और हर नामित तथ्य एक ही जगह, बीच का कुछ नहीं। पहले पूरे नोट्स पढ़ें, यह परीक्षा की सुबह पढ़ें।

1 लेखक-परिचय एक नज़र में

तथ्य विवरण
नाम निर्मल वर्मा
जीवनकाल सन् 1929-2005
जन्म स्थान शिमला (हिमाचल प्रदेश)
शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय, सेंट स्टीफ़ेंस कॉलेज, इतिहास में एम.ए.
प्राग-प्रवास सन् 1959, चेकोस्लोवाकिया के प्राच्य-विद्या संस्थान के निमंत्रण पर, चेक उपन्यासों तथा कहानियों का हिंदी अनुवाद
भारत वापसी सन् 1970, स्वतंत्र लेखन
साहित्यिक आंदोलन नयी कहानी आंदोलन के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर
सम्मान सन् 1985, साहित्य अकादमी पुरस्कार (कव्वे और काला पानी)

2 रचनाएँ, विधा-अनुसार

विधा रचनाएँ
कहानी-संग्रह परिंदे, जलती झाड़ी, तीन एकांत, पिछली गरमियों में, कव्वे और काला पानी, बीच बहस में, सूखा तथा अन्य कहानियाँ
उपन्यास वे दिन, लाल टीन की छत, एक चिथड़ा सुख, अंतिम अरण्य, रात का रिपोर्टर
यात्रा-संस्मरण हर बारिश में, चीड़ों पर चाँदनी, धुंध से उठती धुन (इसी से यह पाठ लिया गया)
निबंध-संग्रह शब्द और स्मृति, कला का जोखिम, ढलान से उतरते हुए

3 पाठ की मूल जानकारी

बिंदु विवरण
विधा यात्रा-वृत्तांत
पाठ ‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ का ‘सिंगरौली’ वाला संपादित अंश
स्रोत संग्रह धुंध से उठती धुन
यात्रा वर्ष 1983
स्थान सिंगरौली, नवागाँव क्षेत्र (गाँव: अमझर)
प्रयोजन संस्था लोकायन (दिल्ली स्थित)
केंद्रीय विषय विकास/औद्योगीकरण से होने वाला स्थायी विस्थापन और पर्यावरण-विनाश; लेखक का मत: अंधाधुंध विकास और पर्यावरण-सुरक्षा के बीच संतुलन होना चाहिए

4 प्रकृति बनाम इतिहास द्वारा विस्थापन

प्रकृति (बाढ़, भूकंप)

  • अस्थायी विस्थापन
  • आफत टलते ही परिवेश में लौट आते हैं

इतिहास (विकास, औद्योगीकरण)

  • स्थायी विस्थापन
  • फिर कभी घर वापस नहीं लौट सकते

5 सिंगरौली का इतिहास, क्रम में

1926 से पूर्वखैरवार आदिवासी राजाओं का शासन
बाद मेंआधा हिस्सा रीवाँ राज्य में शामिल
बीस वर्ष पहले तकविंध्याचल-कैमूर के पहाड़ों और जंगलों से घिरा; सौंदर्य के कारण ‘बैकुंठ’, अकेलेपन के कारण ‘काला पानी’
फिररिहंद बाँध बनने से विस्थापन की एक लहर, हज़ारों गाँव उजाड़े गए
नयी योजनाएँसेंट्रल कोल फील्ड और नेशनल सुपर थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन का निर्माण; पक्की सड़कें और पुल
1983लेखक की यात्रा; सिंगरौली प्रगति के मानचित्र पर राष्ट्रीय गौरव के साथ प्रतिष्ठित

6 सभी शब्दार्थ एक जगह

शब्दार्थ
विस्थापनअपने निवास स्थान से बलपूर्वक हटाना, उजाड़ना
उन्मूलितअपने मूल से कटना
शाश्वतनिरंतर, कभी न मिटने वाला
झंझावातमुसीबत, परेशानी
लोलुपलालची
चक्काचक्र, मिट्टी का ढेला, गाड़ी का पहिया

7 मुहावरे और वाक्यांश

मुहावरा/वाक्यांश अर्थ
मटियामेट होना पूरी तरह नष्ट हो जाना
आफत टलना मुसीबत दूर होना
न फटकना बिलकुल न आना
मूक सत्याग्रह बिना कुछ कहे चुपचाप विरोध करना
पवित्र खुलापन बिना बनावट का स्वच्छ, सहज जीवन
स्वच्छ मांसलता शरीर की सहज, स्वस्थ सुंदरता
औद्योगीकरण का चक्का औद्योगीकरण की निरंतर चलती प्रक्रिया
नाज़ुक संतुलन प्रकृति-मनुष्य-संस्कृति के बीच का सूक्ष्म तालमेल
त्वरित पुनरावृत्ति: परीक्षा से पहले यही पढ़ें
  • निर्मल वर्मा (1929-2005), जन्म शिमला, नयी कहानी आंदोलन के हस्ताक्षर, 1985 साहित्य अकादमी पुरस्कार
  • “जहाँ कोई वापसी नहीं” यात्रा-वृत्तांत “धुंध से उठती धुन” संग्रह से लिया गया है; पाठ उसका “सिंगरौली” वाला संपादित अंश है, यात्रा वर्ष 1983
  • अमझर गाँव के आम के पेड़ अमरौली प्रोजेक्ट की सरकारी घोषणा के बाद से “न जाने कैसे” सूखने लगे
  • लेखक के अनुसार मनुष्य के विस्थापन के विरोध में पेड़ भी मूक सत्याग्रह कर सकते हैं, इसका विचित्र अनुभव सिर्फ़ सिंगरौली में हुआ
  • प्रकृति से विस्थापन अस्थायी है; इतिहास/विकास से विस्थापन स्थायी है; शीर्षक को इसी अंतर से जोड़कर पढ़ा जा सकता है
  • सिंगरौली पहले ‘बैकुंठ’/’काला पानी’ था; रिहंद बाँध से हज़ारों गाँव उजड़े, फिर कोल फील्ड और थर्मल पॉवर परियोजनाओं ने इसे बदला
  • यूरोप: मनुष्य-भूगोल संतुलन; भारत: मनुष्य-संस्कृति का पारंपरिक संबंध
  • असली “ट्रैजेडी”: औद्योगीकरण चुनना नहीं, बल्कि पश्चिम की नकल में संतुलन की अनदेखी करना