NCERT पाठ्यपुस्तक अंतरा भाग 2 के अध्याय 15 जहाँ कोई वापसी नहीं के प्रश्न-अभ्यास के सभी 10 प्रश्नों, भाषा-शिल्प के 3 और योग्यता-विस्तार के 3 प्रश्नों के पूर्ण उत्तर, पाठ के आधार पर। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 प्रश्न-अभ्यास
प्र. अमझर से आप क्या समझते हैं? अमझर गाँव में सूनापन क्यों है?
उत्तर: अमझर सिंगरौली के नवागाँव क्षेत्र का एक गाँव है: “आम के पेड़ों से घिरा गाँव—जहाँ आम झरते हैं”। पिछले दो-तीन वर्षों से इन्हीं पेड़ों पर सूनापन छा गया है, न कोई फल पकता है, न कुछ नीचे झरता है। कारण पूछने पर लेखक को पता चला कि जब से सरकारी घोषणा हुई है कि अमरौली प्रोजेक्ट के अंतर्गत नवागाँव के अनेक गाँव उजाड़ दिए जाएँगे, “तब से न जाने कैसे, आम के पेड़ सूखने लगे।” लेखक की टिप्पणी है: “आदमी उजड़ेगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?”
प्र. आधुनिक भारत के ‘नए शरणार्थी’ किन्हें कहा गया है?
उत्तर: लेखक उन लोगों को आधुनिक भारत के ‘नए शरणार्थी’ कहते हैं, जिन्हें औद्योगीकरण के झंझावात ने उनकी घर-ज़मीन से उखाड़कर हमेशा के लिए निर्वासित कर दिया है। अमझर और नवागाँव क्षेत्र के गाँवों के निवासी, जो विकास परियोजनाओं के कारण अपने पैतृक गाँव से उजड़ने वाले हैं, इसी श्रेणी में आते हैं।
प्र. प्रकृति के कारण विस्थापन और औद्योगीकरण के कारण विस्थापन में क्या अंतर है?
उत्तर: बाढ़ या भूकंप के कारण लोग अपना घरबार छोड़कर कुछ अरसे के लिए ज़रूर बाहर चले जाते हैं, किंतु आफत टलते ही वे दोबारा अपने जाने-पहचाने परिवेश में लौट भी आते हैं। इसके विपरीत, विकास और प्रगति के नाम पर जब इतिहास लोगों को उन्मूलित करता है, तो वे फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते। यही प्रकृति और इतिहास के बीच का गहरा अंतर है।
प्र. यूरोप और भारत की पर्यावरण संबंधी चिंताएँ किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर: यूरोप में पर्यावरण का प्रश्न मनुष्य और भूगोल के बीच संतुलन बनाए रखने का है। भारत में यही प्रश्न मनुष्य और उसकी संस्कृति के बीच पारंपरिक संबंध बनाए रखने का हो जाता है, क्योंकि भारत की सांस्कृतिक विरासत यूरोप की तरह म्यूज़ियमों और संग्रहालयों में जमा नहीं थी, वह उन रिश्तों से जीवित थी, जो आदमी को उसकी धरती, उसके जंगलों, नदियों, एक शब्द में कहें, उसके समूचे परिवेश के साथ जोड़ते थे।
प्र. लेखक के अनुसार स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ‘ट्रैजेडी’ क्या है?
उत्तर: स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रैजेडी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रैजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय, प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाज़ुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है, इस ओर हमारे पश्चिम-शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया।
प्र. औद्योगीकरण ने पर्यावरण का संकट पैदा कर दिया है, क्यों और कैसे?
उत्तर:
• सिंगरौली की अपार खनिज संपदा दिल्ली के सत्ताधारियों और उद्योगपतियों की आँखों से छिपी नहीं रही; “कभी-कभी किसी इलाके की संपदा ही उसका अभिशाप बन जाती है।” एक भरे-पूरे, उर्वर ग्रामीण अंचल को नासमझी और निर्ममता से उजाड़ा गया।
• रिहंद बाँध बनने से विस्थापन की एक लहर आई, जिसमें हज़ारों गाँव उजाड़ दिए गए; फिर सेंट्रल कोल फील्ड और नेशनल सुपर थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन बने, और कोयले की खदानों व ताप विद्युत गृहों की एक पूरी शृंखला ने पूरे प्रदेश को घेर लिया। अमझर में गाँव उजाड़े जाने की घोषणा के बाद से आम के पेड़ तक “न जाने कैसे” सूखने लगे।
• ठेकेदारों, वन-अधिकारियों और सरकारी कारिंदों का आक्रमण घाटी और जंगलों पर शुरू हुआ, ठीक वैसे ही जैसे शिकार पर गिद्ध और चील मँडराते हैं।
• पश्चिम की नकल में योजनाएँ बनाते समय प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाज़ुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है, इस ओर सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया।
प्र. क्या स्वच्छता अभियान की ज़रूरत गाँव से ज़्यादा शहरों में है? (विस्थापित लोगों, मज़दूर बस्तियों, स्लमस क्षेत्रों, शहरों में बसी झुग्गी बस्तियों के संदर्भ में लिखिए।)
उत्तर: पाठ में लेखक ने बताया है कि विस्थापित होकर शहरों की गंदी, दम घुटती बस्तियों और स्लम्स में पहुँचे लोग अनाथ, उन्मूलित ज़िंदगी बिताते हैं। जबकि गाँव में, विस्थापन से पहले, यही लोग स्वच्छ, पवित्र खुलेपन में रहते थे। इससे स्पष्ट होता है कि शहरों की मज़दूर बस्तियों, स्लम क्षेत्रों और झुग्गी बस्तियों में स्वच्छता अभियान की ज़रूरत गाँव की तुलना में कहीं अधिक है, क्योंकि यहाँ विस्थापन के कारण उजड़े लोग गंदी, दम घुटती, भयावह बस्तियों और स्लम्स में रहने को मजबूर हैं, जबकि गाँव का उनका मूल परिवेश स्वच्छ और खुला हुआ था।
प्र. निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए:
(क) आदमी उजड़ेंगे तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?
(ख) प्रकृति और इतिहास के बीच यह गहरा अंतर है?
उत्तर (क): इस पंक्ति का आशय है कि मनुष्य और प्रकृति (यहाँ पेड़) का रिश्ता इतना गहरा है कि जब गाँव के लोगों का उजड़ना तय हो गया है, तो मानो उन्हीं पेड़ों के लिए भी जीने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। अमझर में गाँव उजाड़े जाने की घोषणा के बाद से “न जाने कैसे” आम के पेड़ सूखने लगे; लेखक इसे पेड़ों का मूक सत्याग्रह कहते हैं।
उत्तर (ख): इस पंक्ति का आशय है कि प्रकृति (बाढ़, भूकंप) से उजड़े लोग आपदा टलते ही अपने परिवेश में लौट आते हैं, अर्थात यह विस्थापन अस्थायी होता है, जबकि इतिहास (विकास, औद्योगीकरण) से उजड़े लोग फिर कभी घर वापस नहीं लौट सकते, अर्थात यह विस्थापन स्थायी होता है। यही दोनों के बीच का मूल अंतर है।
प्र. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए:
(क) आधुनिक शरणार्थी
(ख) औद्योगीकरण की अनिवार्यता
(ग) प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच आपसी संबंध
उत्तर (क): आधुनिक शरणार्थी वे लोग हैं, जिन्हें औद्योगीकरण के झंझावात ने उनकी घर-ज़मीन से हमेशा के लिए उखाड़कर निर्वासित कर दिया है। ये उन लोगों से इस मायने में अलग हैं जो बाढ़ या भूकंप से कुछ अरसे के लिए विस्थापित होते हैं और आफत टलते ही लौट आते हैं: इन्हें प्राकृतिक आपदा ने नहीं, बल्कि विकास और प्रगति के नाम पर इतिहास ने उन्मूलित किया है, और ये फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते।
उत्तर (ख): लेखक औद्योगीकरण को पूरी तरह अनुचित नहीं ठहराते; सिंगरौली जाने से पहले उनके मन में यह सुखद भ्रम नहीं था कि स्वतंत्रता के बाद चलाया गया औद्योगीकरण का चक्का अब रोका जा सकता है; हाँ, उनके अनुसार शायद पैंतीस वर्ष पहले हम कोई दूसरा विकल्प चुन सकते थे, जिसमें मानव सुख की कसौटी भौतिक लिप्सा न होकर जीवन की ज़रूरतों द्वारा निर्धारित होती। समस्या औद्योगीकरण अपनाने में नहीं, बल्कि उसे बिना सोचे-समझे, पश्चिम की नकल में और प्रकृति-मनुष्य-संस्कृति के संतुलन की परवाह किए बिना लागू करने में है।
उत्तर (ग): लेखक के अनुसार भारत में मनुष्य, प्रकृति और संस्कृति का संबंध बेहद नाज़ुक और आपस में गुँथा हुआ है। भारत की सांस्कृतिक विरासत यूरोप की तरह संग्रहालयों में जमा नहीं थी, वह उन रिश्तों से जीवित थी जो आदमी को उसकी धरती, उसके जंगलों, नदियों, यानी उसके समूचे परिवेश से जोड़ते थे। इसलिए भारत में पर्यावरण का प्रश्न मनुष्य और उसकी संस्कृति के बीच पारंपरिक संबंध बनाए रखने का प्रश्न बन जाता है। आधुनिक औद्योगीकरण की आँधी में सिर्फ़ मनुष्य ही नहीं उखड़ता, उसका परिवेश, संस्कृति और आवास-स्थल भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं।
प्र. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव-सौंदर्य लिखिए:
(क) कभी-कभी किसी इलाके की संपदा ही उसका अभिशाप बन जाती है।
(ख) अतीत का समूचा मिथक संसार पोथियों में नहीं, इन रिश्तों की अदृश्य लिपि में मौजूद रहता था।
उत्तर (क): भाव: इस पंक्ति में एक गहरी विडंबना व्यक्त हुई है, सिंगरौली जैसे समृद्ध और उर्वर क्षेत्र की अपार खनिज संपदा ही उसके विनाश और वहाँ के लोगों के विस्थापन का कारण बन गई। शिल्प-सौंदर्य: ‘संपदा’ और ‘अभिशाप’ का विरोधाभासी प्रयोग (विरोधाभास अलंकार) कथन को अत्यंत प्रभावशाली और मार्मिक बना देता है।
उत्तर (ख): भाव: भारत के अतीत का समूचा मिथक संसार पोथियों (लिखित ग्रंथों) में नहीं, बल्कि उन रिश्तों की अदृश्य लिपि में मौजूद रहता था जो आदमी को उसकी धरती, जंगलों और नदियों से जोड़ते थे; इसी अर्थ में भारत की सांस्कृतिक विरासत संग्रहालयों में जमा नहीं थी, इन रिश्तों से जीवित थी। शिल्प-सौंदर्य: ‘अदृश्य लिपि’ एक सुंदर बिंब है, जो अलिखित किंतु गहरे सांस्कृतिक संबंधों को एक अनोखी, काव्यात्मक अभिव्यक्ति देता है।
2 भाषा-शिल्प
प्र. पाठ के संदर्भ में निम्नलिखित अभिव्यक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए: मूक सत्याग्रह, पवित्र खुलापन, स्वच्छ मांसलता, औद्योगीकरण का चक्का, नाज़ुक संतुलन
उत्तर: मूक सत्याग्रह: बिना कुछ कहे, चुपचाप विरोध करना; अमझर के आम के पेड़ मानो गाँव उजाड़ने की घोषणा के विरोध में चुपचाप सूखने लगे। पवित्र खुलापन: विस्थापन से पहले के गाँव का स्वच्छ, बिना बनावट का, खुला-खुला परिवेश। स्वच्छ मांसलता: धान रोपती स्त्रियों की सहज, स्वस्थ और सजीव सुंदरता। औद्योगीकरण का चक्का: स्वतंत्रता के बाद चलाई गई औद्योगीकरण की वह निरंतर प्रक्रिया, जिसके बारे में लेखक को यह भ्रम नहीं था कि उसे अब रोका जा सकता है। नाज़ुक संतुलन: प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का वह सूक्ष्म तालमेल, जो ज़रा-सी लापरवाही से बिगड़ जाता है।
प्र. इन मुहावरों पर ध्यान दीजिए: मटियामेट होना, आफत टलना, न फटकना
उत्तर: मटियामेट होना (पूरी तरह नष्ट हो जाना): पाठ में झोंपड़े, खेत, ढोर, आम के पेड़, सब औद्योगिक कॉलोनी के नीचे मटियामेट हो जाने की बात है। वाक्य: भूकंप में पूरा गाँव मटियामेट हो गया। आफत टलना (मुसीबत दूर होना): बाढ़ या भूकंप की आफत टलते ही लोग अपने परिवेश में लौट आते हैं। वाक्य: बीमारी की आफत टलते ही वह काम पर लौट आया। न फटकना (पास तक न आना): जहाँ बाहर का आदमी फटकता न था, वहाँ अफ़सरों की कतार लग गई। वाक्य: डर के मारे बच्चे उस पुराने कुएँ के पास भी नहीं फटकते।
प्र. ‘किंतु यह भ्रम है … डूब जाती हैं।’ इस गद्यांश को भूतकाल की क्रिया के साथ अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: किंतु वह भ्रम था, वह बाढ़ नहीं, पानी में डूबे धान के खेत थे। जब हमने थोड़ी-सी हिम्मत बटोरकर गाँव के भीतर कदम रखा, तब वे औरतें दिखाई दीं जो एक पाँत में झुकी हुई धान के पौधे छप-छप पानी में रोप रही थीं। उनकी सुंदर, सुडौल, धूप में चमचमाती काली टाँगें थीं और सिरों पर चटाई के किश्तीनुमा हैट थे, जो फ़ोटो या फ़िल्मों में देखी हुई वियतनामी या चीनी औरतों की याद दिलाते थे। ज़रा-सी आहट पाते ही उन्होंने एक साथ सिर उठाकर चौंकी हुई निगाहों से हमें देखा, बिलकुल उन युवा हिरणियों की तरह, जिन्हें मैंने एक बार कान्हा के वन्यस्थल में देखा था। किंतु वे डरीं नहीं, भागीं नहीं, सिर्फ़ विस्मय से मुसकुराईं और फिर सिर झुकाकर अपने काम में डूब गईं।
3 योग्यता-विस्तार
ये रिपोर्ट-लेखन और विचार-आधारित प्रश्न हैं। नीचे हर प्रश्न के लिए उत्तर की दिशा दी गई है।
प्र. विस्थापन की समस्या से आप कहाँ तक परिचित हैं। किसी विस्थापन संबंधी परियोजना पर रिपोर्ट लिखिए।
उत्तर: (यह रिपोर्ट-लेखन है।) रिपोर्ट में परियोजना का नाम और स्थान, उससे कितने गाँव या लोग प्रभावित हुए, उन्हें कहाँ बसाया गया, उनकी खेती, रोज़गार और संस्कृति पर क्या असर पड़ा, और पुनर्वास के सुझाव लिखे जा सकते हैं। पाठ के सिंगरौली (रिहंद बाँध, कोयला खदानें, ताप विद्युत गृह) के उदाहरण को आधार बनाया जा सकता है।
प्र. लेखक ने दुर्घटनाग्रस्त मज़दूरों को अस्पताल पहुँचाने में मदद की है। आपकी दृष्टि में दुर्घटना-राहत और बचाव कार्य के लिए क्या-क्या करना चाहिए?
उत्तर: (विद्यार्थी अपने विचार लिखें।) उत्तर में लिखा जा सकता है: घायल को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाना, प्राथमिक उपचार देना, एंबुलेंस या नज़दीकी अस्पताल से संपर्क करना, भीड़ न लगने देना, पुलिस और परिवार को सूचना देना, और कार्य-स्थलों पर सुरक्षा उपकरण, प्राथमिक उपचार पेटी और प्रशिक्षित कर्मचारी पहले से तैयार रखना।
प्र. अपने क्षेत्र की पर्यावरण संबंधी समस्याओं और उनके समाधान हेतु संभावित उपायों पर एक रिपोर्ट तैयार कीजिए।
उत्तर: (यह रिपोर्ट-लेखन है।) रिपोर्ट में अपने क्षेत्र की मुख्य समस्याएँ (जैसे पेड़ों की कटाई, जल-प्रदूषण, कचरा, वायु-प्रदूषण) और उनके कारण लिखें, फिर समाधान सुझाएँ, जैसे वृक्षारोपण, कचरे का पृथक्करण, जल-संरक्षण और जन-जागरूकता। पाठ का यह संदेश भी जोड़ा जा सकता है कि विकास और पर्यावरण-सुरक्षा के बीच संतुलन होना चाहिए।