कक्षा 12 हिंदी, अंतरा भाग 2, अध्याय 4 का त्वरित पुनरीक्षण। हर परिभाषा, हर शब्दार्थ और हर नामित तथ्य एक ही जगह, बीच का कुछ नहीं। पहले पूरे नोट्स पढ़ें, यह परीक्षा की सुबह पढ़ें।
1 कवि-परिचय एक नज़र में
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| नाम | केदारनाथ सिंह |
| जीवनकाल | सन् 1934 – 2018 |
| जन्मस्थान | बलिया ज़िले का चकिया गाँव |
| शिक्षा | काशी हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए.; वहीं से ‘आधुनिक हिंदी कविता में बिंब-विधान’ विषय पर पीएच.डी. |
| कार्यक्षेत्र | गोरखपुर में हिंदी के प्राध्यापक; बाद में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केंद्र में हिंदी के प्रोफ़ेसर पद से अवकाश |
| काव्य-विशेषता | मानवीय संवेदनाओं के कवि; बिंब-विधान पर विशेष बल; विद्रोह का शांत-संयत स्वर |
| पुरस्कार | 1989 साहित्य अकादमी पुरस्कार (अकाल में सारस पर); 1994 मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रीय सम्मान तथा अन्य सम्मान |
2 रचनाएँ, विधा-अनुसार
| विधा | रचनाएँ |
|---|---|
| काव्य-संग्रह (7) | अभी, बिलकुल अभी · ज़मीन पक रही है · यहाँ से देखो · अकाल में सारस · उत्तर कबीर तथा अन्य कविताएँ · बाघ · टालस्टाय और साईकिल |
| आलोचनात्मक पुस्तकें | कल्पना और छायावाद · आधुनिक हिंदी कविता में बिंब विधान का विकास |
| निबंध-संग्रह | मेरे समय के शब्द · कब्रिस्तान में पंचायत |
| चयन-संग्रह | प्रतिनिधि कविताएँ (चुनी हुई कविताओं का संग्रह) |
| संपादित संग्रह | ताना-बाना (विविध भारतीय भाषाओं की कविताओं का हिंदी अनुवाद) |
3 दोनों कविताओं की मूल जानकारी
| बनारस | दिशा | |
|---|---|---|
| विषय | बनारस शहर का सांस्कृतिक-आध्यात्मिक चित्रण | बाल मनोविज्ञान |
| केंद्रीय भाव | प्राचीनता के साथ आधुनिकता का समाहार; पूर्णता और रिक्तता का चित्रण | हर व्यक्ति का अपना यथार्थ होता है |
| आकार | 9 अंश, विवरणात्मक शिल्प | लघु आकार, 8 पंक्तियाँ |
| भाषा | संरचना में सरल, अर्थ में गहरी | सहज, बोलचाल जैसी |
| छंद | मुक्त छंद | मुक्त छंद |
4 बनारस: शहर के प्रमुख स्थान और बिंब
| स्थान/बिंब | कविता में भूमिका |
|---|---|
| लहरतारा, मडुवाडीह | बनारस के मोहल्ले, जिनकी तरफ़ से वसंत के साथ धूल का बवंडर उठता है |
| दशाश्वमेध घाट | पूजा-स्नान का घाट, जहाँ आदमी वसंत में जाता है |
| गंगा | मोक्ष की मिथकीय आस्था का केंद्र; गंगा में बंधी नाव सदियों से वहीं है |
| तुलसीदास की खड़ाऊँ | सैकड़ों बरस से अपनी जगह पर रखी, शहर की अटूट स्थिरता का प्रतीक |
| मंदिर-घाटों के दीप व चिताग्नि | जीवन और मृत्यु का एक साथ चित्रण, विरोधाभासी बिंब |
5 बनारस की काव्य-सौंदर्य विशेषताएँ
विरोधाभास अलंकार“जो है वह सुगबुगाता है, जो नहीं है वह फेंकने लगता है पचखियाँ”; “आधा है और आधा नहीं है”
प्रतीकात्मकता“अपनी एक टाँग पर खड़ा है यह शहर, अपनी दूसरी टाँग से बिलकुल बेखबर”: एक पठन के अनुसार, परंपरा और आधुनिकता में एक साथ, बेपरवाह होकर जीना
पुनरुक्तिप्रकाश“धीरे-धीरे” शब्द बार-बार: शहर की मंथर, अटूट लय को महसूस कराना
शिल्पविवरणात्मक, कवि की सूक्ष्म दृष्टि का परिचायक; भाषा बोलचाल जैसी सहज
6 सभी शब्दार्थ एक जगह
बनारस
बवंडरअंधड़, आँधी
सुगबुगानाजागरण, जागने की क्रिया
पचखियाँअंकुरण
निचाटबिलकुल, एकदम
सई-साँझशाम की शुरुआत
स्तंभखंभा
अलक्षितअज्ञात, न देखा हुआ
अर्घ्यपूजा के 16 उपचारों में से एक, दूब, दूध, चावल आदि मिला जल, जो देवता को श्रद्धापूर्वक चढ़ाया जाता है
दशाश्वमेधबनारस के एक घाट का नाम, जहाँ पूजा-स्नान होता है
लहरतारा / मडुवाडीहबनारस के मोहल्लों के नाम
7 दिशा: मूल संदेश
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| कवि ने बच्चे से क्या पूछा? | हिमालय किधर है? |
| बच्चे ने क्या उत्तर दिया? | उधर-उधर, जिधर उसकी पतंग भागी जा रही थी |
| कवि की प्रतिक्रिया | मैं स्वीकार करूँ, मैंने पहली बार जाना हिमालय किधर है! |
| मूल संदेश | हर व्यक्ति का अपना यथार्थ होता है; हम बच्चों से कुछ-न-कुछ सीख सकते हैं |
त्वरित पुनरीक्षण: परीक्षा से पहले यही पढ़ें
- केदारनाथ सिंह (1934-2018), जन्म बलिया के चकिया गाँव में; काशी हिंदू विश्वविद्यालय से एम.ए. व पीएच.डी. (विषय: बिंब-विधान)
- 1989 में साहित्य अकादमी पुरस्कार (अकाल में सारस पर), 1994 में मैथिलीशरण गुप्त राष्ट्रीय सम्मान; सात काव्य-संग्रह, दो निबंध-संग्रह
- बनारस: शिव की नगरी, गंगा से मोक्ष की अवधारणा; विरोधाभास अलंकार (“जो है…जो नहीं है”, “आधा…आधा नहीं”); “धीरे-धीरे” की आवृत्ति शहर की अटूट लय दर्शाती है
- “अपनी एक टाँग पर खड़ा है यह शहर, अपनी दूसरी टाँग से बिलकुल बेखबर”: एक पठन के अनुसार, परंपरा और आधुनिकता, दोनों में एक साथ, बेपरवाह होकर जीना
- दिशा: बाल मनोविज्ञान; बच्चे का उत्तर “उधर-उधर”; संदेश: हर व्यक्ति का अपना यथार्थ होता है, हम बच्चों से कुछ-न-कुछ सीख सकते हैं
- दोनों कविताएँ मुक्त छंद में; बिंब-विधान दोनों की साझा विशेषता
इसी अध्याय की बाक़ी सामग्री