परीक्षा से ठीक पहले दोहराने के लिए इस अध्याय का निचोड़: तीन काल, नगर-योजना, शिल्प-व्यापार, लिपि-बाट, शासकों पर बहस, और खोज का इतिहास। पूरी व्याख्या वाले विस्तृत नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 पूरा अध्याय एक फ्रेम में
लिपि आज तक अपठित है, इसलिए हड़प्पा सभ्यता के बारे में जो कुछ भी हम जानते हैं वह भौतिक अवशेषों से है: यह पूरे अध्याय की सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति है। इसे “हड़प्पा सभ्यता” कहते हैं क्योंकि हड़प्पा वह स्थल था जहाँ इसे सबसे पहले पहचाना गया; “सिंधु घाटी सभ्यता” भी इसी का दूसरा नाम है। 2000+ स्थल मिले हैं, जिनमें से दो-तिहाई सरस्वती बेसिन में हैं। पाँच प्रमुख नगर: राखीगढ़ी, मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धौलावीरा, गनवेरीवाला।
2 रट लेने लायक परिभाषाएँ
3 नगर-योजना एक नज़र में
दुर्ग (पश्चिम) = छोटा, ऊँचा, चबूतरों पर, परकोटे से घिरा, सार्वजनिक भवन (मालगोदाम, विशाल स्नानागार)। निचला नगर (पूर्व) = बड़ा, नीचा, ग्रिड, आवासीय। अपवाद: धौलावीरा और लोथल इस ढाँचे को तोड़ते हैं। जल-निकास क्रम: घर की नाली → हौदी (मलकुंड) → सड़क की नाली।
4 शिल्प, व्यापार और मेसोपोटामियाई नाम
| मेसोपोटामियाई नाम | संभवतः | मुख्य प्रमाण |
|---|---|---|
| मगन | ओमान | ताँबे में निकल के अंश मेल खाते हैं |
| दिलमुन | बहरीन | गोल ‘फ़ारस की खाड़ी’ मुहरों पर हड़प्पाई आकृतियाँ; स्थानीय बाट हड़प्पाई मानक पर |
| मेलुहा | हड़प्पाई क्षेत्र | नाविकों की भूमि, कार्नीलियन/लाजवर्द/ताँबा/सोना का स्रोत |
सामग्री के दो स्रोत: स्रोत पर बसना (नागेश्वर-बालाकोट: शंख; शोर्तुघई: लाजवर्द मणि) या अभियान भेजना (खेतड़ी: ताँबा; दक्षिण भारत: सोना)। शिल्प-केंद्र पहचानने का सबसे अच्छा संकेतक: बेकार सामग्री (waste), तैयार वस्तु नहीं।
5 मुहरें, लिपि और बाट: पाँच-पाँच तथ्य
- अब भी अपठित
- सबसे लंबे अभिलेख में ~26 चिह्न
- 375-400 चिह्न: वर्णमाला नहीं
- दाएँ से बाएँ लिखी जाती थी
- मुहर, ताँबे के औज़ार, मर्तबान, आभूषण, हड्डी की छड़ों और धौलावीरा साइनबोर्ड पर मिलती है
बाट: चर्ट पत्थर, घनाकार, बिना निशान। निचली इकाइयाँ द्विआधारी (1,2,4,8,16,32); ऊँची इकाइयाँ दशमलव (160,200,320,640)। मुहर-सीलबंदी: गीली मिट्टी पर मुहर दबाई जाती थी; अक्षुण्ण सीलबंदी = सामान से छेड़छाड़ नहीं हुई, इसका प्रमाण।
6 शासकों पर तीन मत
कोई शासक नहीं
सबकी सामाजिक स्थिति समान थी।
कई शासक
मोहनजोदड़ो, हड़प्पा आदि के अपने-अपने राजा।
एक ही राज्य
पुरावशेष-समानता, नियोजित बस्तियाँ, 4:2:1 अनुपात इसके पक्ष में।
‘पुरोहित-राजा’ नाम मेसोपोटामिया की समानता से गढ़ा गया, प्रमाण नहीं। NCERT यह भी बताती है कि हड़प्पावासी शायद किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था का पालन करते थे।
7 सभ्यता का अंत: क्या गया, क्या आया
क्या ग़ायब हुआ
- बाट, मुहरें, विशिष्ट मनके
- लिपि, दूर व्यापार, शिल्प-विशेषज्ञता
- बड़ी सार्वजनिक संरचनाएँ
उसकी जगह क्या आया
- स्थानीय बाट, कम सामग्री से कम वस्तुएँ
- ग्रामीण जीवनशैली (“उत्तर हड़प्पा”)
- 1000+ वर्ष बाद ही अलग क्षेत्र में नए नगर
~1800 ई.पू. तक चोलिस्तान जैसे क्षेत्रों के अधिकांश स्थल त्यागे गए। कारण: जलवायु परिवर्तन, वन-कटाई, बाढ़, नदी-मार्ग बदलना/सूखना, भूमि का अति-उपयोग: कोई एक अकेले पूरी सभ्यता को नहीं समझाता। निष्कर्ष: एक सुदृढ़ एकीकरण तत्व, संभवतः हड़प्पाई राज्य, का अंत हुआ।
8 खोज का इतिहास: समयरेखा
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1875 | कनिंघम की हड़प्पाई मुहर पर रिपोर्ट (पर पहचान नहीं पाए: “कनिंघम का भ्रम”: गंगा घाटी से इतिहास शुरू मानते थे) |
| 1921 | दयाराम साहनी हड़प्पा में खुदाई आरंभ |
| 1922 | मोहनजोदड़ो में खुदाई आरंभ (राखालदास बनर्जी) |
| 1924 | जॉन मार्शल सभ्यता की खोज की घोषणा (क्षैतिज-इकाई खुदाई से संदर्भ खोया) |
| 1944 | व्हीलर डायरेक्टर जनरल बने, टीले के स्तरविन्यास का अनुसरण किया (1946 में हड़प्पा में खुदाई; 1947 में कंकालों को ऋग्वेद से जोड़ा) |
| 1964 | जॉर्ज डेल्स ने आक्रमण-सिद्धांत का खंडन किया |
| 1955-97 | लोथल, कालीबंगन, धौलावीरा, राखीगढ़ी की खुदाई (विभाजन के बाद भारतीय सर्वेक्षण) |
| 2013 | वसंत शिंदे: राखीगढ़ी में पुरातत्व-अनुवांशिक शोध शुरू |
हड़प्पावासी स्थानीय (indigenous) थे, जड़ें 10,000 ई.पू. तक: आर्यों के बड़े पैमाने के आगमन के सिद्धांत को खारिज करता है। शोध: डेक्कन कॉलेज पुणे + CCMB हैदराबाद + हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज।
9 धर्म का पुनर्निर्माण: एक केस स्टडी में
आद्य-शिव मुहर: योगिक मुद्रा में बैठी आकृति, पशुओं से घिरी: शिव का प्रारंभिक रूप माना गया। पर ऋग्वेदिक रुद्र न पशुपति हैं, न योगी: विवरण मेल नहीं खाता। वैकल्पिक व्याख्या: यह कोई शमन हो सकती है। सीख: ज्ञात-से-अज्ञात विधि (वर्तमान से पीछे की ओर) चक्की-पत्थर जैसी वस्तुओं के लिए ठीक काम करती है, पर धार्मिक व्याख्या में अक्सर टूट जाती है।
- तीन चरण: 6000-2600 (आरंभिक), 2600-1900 (परिपक्व), 1900-1300 ई.पू. (उत्तर हड़प्पा)
- ईंटों का अनुपात 4:2:1, हर जगह समान: एक-राज्य के मत के पक्ष में दिया जाने वाला एक प्रमाण
- दुर्ग (पश्चिम, छोटा, ऊँचा) + निचला नगर (पूर्व, बड़ा, नीचा): धौलावीरा-लोथल अपवाद
- लिपि अपठित, 375-400 चिह्न, दाएँ से बाएँ; बाट द्विआधारी + दशमलव
- मगन=ओमान, दिलमुन=बहरीन, मेलुहा=हड़प्पाई क्षेत्र
- शासकों पर तीन मत: कोई नहीं / कई / एक राज्य
- पतन का कोई एक कारण नहीं: एकीकरण तत्व के अंत की परिकल्पना
- कनिंघम (पाठ-केंद्रित) → मार्शल (संदर्भ-हानि) → व्हीलर (स्तरविन्यास) → राखीगढ़ी (पुरातत्व-अनुवांशिकी)