कक्षा 12 राजनीति विज्ञान अध्याय 1 महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित (Important Questions) हिंदी में

इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।

1 1 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (1 अंक)

प्र. सोवियत संघ कब और किस क्रांति के बाद अस्तित्व में आया?

उत्तर: रूस में हुई 1917 की समाजवादी क्रांति के बाद समाजवादी सोवियत गणराज्य (सोवियत संघ) अस्तित्व में आया।

प्रश्न 2 (1 अंक)

प्र. पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त का अर्थ लिखिए।

उत्तर: पेरेस्त्रोइका का अर्थ है पुनर्रचना और ग्लासनोस्त का अर्थ है खुलापन। ये गोर्बाचेव के आर्थिक और राजनीतिक सुधारों के दो नाम हैं।

प्रश्न 3 (1 अंक)

प्र. बर्लिन की दीवार कब बनी और कब गिराई गई?

उत्तर: यह दीवार 1961 में बनी और जनता ने इसे 9 नवंबर, 1989 को तोड़ दिया। यह 28 वर्षों तक खड़ी रही और 150 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी थी।

प्रश्न 4 (1 अंक)

प्र. ‘दूसरी दुनिया’ से क्या आशय है?

उत्तर: दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जिन पूर्वी यूरोपीय देशों की व्यवस्था सोवियत समाजवादी प्रणाली की तर्ज पर ढाली गई, उन्हें समाजवादी खेमे के देश या ‘दूसरी दुनिया’ कहा जाता है। इस खेमे का नेता सोवियत संघ था।

प्रश्न 5 (1 अंक)

प्र. सोवियत संघ के विघटन के बाद किन तीन गणराज्यों ने उसकी समाप्ति की घोषणा की?

उत्तर: दिसंबर 1991 में येल्तसिन के नेतृत्व में रूस, यूक्रेन और बेलारूस ने सोवियत संघ की समाप्ति की घोषणा की।

प्रश्न 6 (1 अंक)

प्र. ‘शॉक थेरेपी’ किसे कहा गया?

उत्तर: साम्यवाद से पूँजीवाद की ओर संक्रमण के उस मॉडल को शॉक थेरेपी कहा गया जो विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित था। इसका शाब्दिक अर्थ है आघात पहुँचाकर उपचार करना।

प्रश्न 7 (1 अंक)

प्र. 2001 का भारत-रूस सामरिक समझौता किसलिए महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर: इस समझौते के अंग के रूप में भारत और रूस के बीच 80 द्विपक्षीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर हुए, जो दोनों देशों के गहरे और बहुआयामी रिश्ते को दिखाते हैं।

प्रश्न 8 (1 अंक)

प्र. रूस के किन दो गणराज्यों में हिंसक अलगाववादी आंदोलन चले?

उत्तर: चेचन्या और दाग़िस्तान में। मास्को ने चेचन विद्रोहियों से निपटने में जो ग़ैर-ज़िम्मेदार सैन्य बमबारी की, उसमें मानवाधिकार का व्यापक उल्लंघन हुआ।

2 2 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (2 अंक)

प्र. सोवियत अर्थव्यवस्था की कोई दो मजबूतियाँ बताइए।

उत्तर: पहली, अमरीका को छोड़ दें तो सोवियत अर्थव्यवस्था शेष विश्व की तुलना में कहीं ज्यादा विकसित थी; उसके पास विशाल ऊर्जा-संसाधन, उन्नत संचार प्रणाली और आवागमन की सुव्यवस्थित प्रणाली थी। दूसरी, सरकार ने सभी नागरिकों के लिए न्यूनतम जीवन स्तर सुनिश्चित किया और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा बच्चों की देखभाल जैसी बुनियादी चीजें रियायती दर पर दीं।

प्रश्न 2 (2 अंक)

प्र. सोवियत प्रणाली की दो प्रमुख कमज़ोरियाँ लिखिए।

उत्तर: पहली, प्रणाली पर नौकरशाही का शिकंजा कसता गया, वह सत्तावादी होती गई और वहाँ लोकतंत्र तथा अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं थी; लोग अपनी असहमति चुटकुलों और कार्टूनों में व्यक्त करते थे। दूसरी, कम्युनिस्ट पार्टी का एकदलीय शासन था, वह जनता के प्रति जवाबदेह नहीं थी, और पंद्रह गणराज्यों के संघ में वास्तविक प्रभुत्व केवल रूस का था।

प्रश्न 3 (2 अंक)

प्र. सोवियत अर्थव्यवस्था को अमरीका जैसी पूँजीवादी अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली कोई तीन विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: एक, वहाँ समाजवाद प्रभावी विचारधारा थी और निजी संपत्ति की संस्था को समाप्त करने की कोशिश की गई। दो, उत्पादन के साधनों, भूमि और उत्पादक संपदाओं पर स्वामित्व और नियंत्रण राज्य का था। तीन, अर्थव्यवस्था के हर पहलू का नियोजन और नियंत्रण राज्य करता था, बाज़ार नहीं।

प्रश्न 4 (2 अंक)

प्र. रूस को सोवियत संघ का उत्तराधिकारी राज्य मानने का क्या अर्थ था?

उत्तर: इसका अर्थ था कि रूस को सुरक्षा परिषद् में सोवियत संघ की सीट मिली, सोवियत संघ ने जो अंतर्राष्ट्रीय करार और संधियाँ की थीं उन सबको निभाने का जिम्मा रूस का हो गया, और पूर्ववर्ती गणराज्यों में एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश का दर्ज़ा भी रूस को मिला। मध्य एशियाई गणराज्य पहले राष्ट्रकुल से बाहर थे, पर इस मुद्दे को तुरंत हल करके उन्हें राष्ट्रकुल का संस्थापक सदस्य बनाया गया।

प्रश्न 5 (2 अंक)

प्र. मध्य एशियाई गणराज्य बाहरी ताकतों की प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा क्यों बन गए?

उत्तर: वहाँ हाइड्रोकार्बन यानी पेट्रोलियम संसाधनों का विशाल भंडार है, और यह क्षेत्र रूस, चीन तथा अफ़गानिस्तान से सटा है और पश्चिम एशिया से नज़दीक भी। इसी वजह से अमरीका ने 11 सितंबर 2001 के बाद यहाँ किराए पर सैनिक ठिकाने लिए, रूस इन राज्यों को अपना निकटवर्ती ‘विदेश’ मानता है, और चीन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार शुरू किया। इसी अस्थिरता की एक और परत यह है कि यूक्रेन, किरगिझस्तान तथा जार्जिया में मौजूदा शासन को उखाड़ फेंकने के आंदोलन चल रहे हैं, और कई देश तथा प्रांत नदी-जल के सवाल पर आपस में भिड़े हुए हैं।

प्रश्न 6 (2 अंक)

प्र. चेकोस्लोवाकिया और युगोस्लाविया के टूटने में क्या अंतर रहा?

उत्तर: चेकोस्लोवाकिया शांतिपूर्वक दो भागों में बँट गया और चेक तथा स्लोवाकिया नाम के दो देश बने। युगोस्लाविया में इसके उलट सबसे गहन संघर्ष हुआ; 1991 के बाद बोस्निया-हर्जेगोविना, स्लोवेनिया और क्रोएशिया ने स्वतंत्रता घोषित की, नाटो को हस्तक्षेप करना पड़ा, बमबारी हुई और जातीय संघर्ष ने गृहयुद्ध का रूप ले लिया।

प्रश्न 7 (2 अंक)

प्र. भारत-सोवियत संबंधों के आर्थिक पक्ष का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: सोवियत संघ ने भारत के सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की ऐसे वक्त मदद की जब यह मदद कहीं और से मिलना मुश्किल था। उसने भिलाई, बोकारो और विशाखापट्टनम के इस्पात कारखानों तथा भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स जैसे मशीनरी संयंत्रों के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता दी, और जब भारत में विदेशी मुद्रा की कमी थी तब रुपये को माध्यम बनाकर व्यापार किया।

3 4 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (4 अंक)

प्र. सोवियत संघ के विघटन के प्रमुख कारण बताइए।

उत्तर: एक, सोवियत संघ की राजनीतिक-आर्थिक संस्थाएँ अंदरुनी कमजोरी के कारण लोगों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकीं; कई सालों तक अर्थव्यवस्था गतिरुद्ध रही और उपभोक्ता-वस्तुओं की बड़ी कमी हो गई।
दो, सोवियत संघ ने अपने संसाधनों का अधिकांश परमाणु हथियार और सैन्य साजो-सामान पर तथा पूर्वी यूरोप के अपने पिछलग्गू देशों के विकास पर खर्च किया, जिससे गहरा आर्थिक दबाव बना।
तीन, पश्चिमी मुल्कों की तरक्की की जानकारी बढ़ने से लोगों को अपने पिछड़ेपन की पहचान का राजनीतिक-मनोवैज्ञानिक धक्का लगा।
चार, कम्युनिस्ट पार्टी ने 70 सालों तक शासन किया और जनता के प्रति जवाबदेह नहीं रही; गतिरुद्ध प्रशासन, भारी भ्रष्टाचार, सत्ता का केंद्रीकरण और पार्टी अधिकारियों के विशेषाधिकार ने आम जनता को अलग-थलग कर दिया।
पाँच, और सबसे तात्कालिक, राष्ट्रवादी भावनाओं तथा संप्रभुता की इच्छा का उभार, जो किताब के शब्दों में विघटन का अंतिम और सर्वाधिक तात्कालिक कारण सिद्ध हुआ।

प्रश्न 2 (4 अंक)

प्र. किन बातों के कारण गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार के लिए बाध्य हुए?

उत्तर: एक, पश्चिम के देशों में सूचना और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रांति हो रही थी और सोवियत संघ को उसकी बराबरी में लाने के लिए सुधार ज़रूरी हो गए थे।
दो, अर्थव्यवस्था 1970 के दशक के अंतिम वर्षों से लड़खड़ा रही थी और अंततः ठहर सी गई थी; हर तरह की उपभोक्ता-वस्तु की कमी थी और खाद्यान्न का आयात साल-दर-साल बढ़ रहा था।
तीन, अमरीका के साथ हथियारों की होड़ की भारी कीमत चुकानी पड़ी थी और 1979 के अफ़गानिस्तान हस्तक्षेप ने व्यवस्था को और कमजोर किया था।
चार, प्रणाली पर नौकरशाही का शिकंजा, भारी भ्रष्टाचार और जनता की राजनीतिक-आर्थिक आकांक्षाओं का पूरा न होना; इसीलिए गोर्बाचेव ने पश्चिम से संबंध सामान्य बनाने, सोवियत संघ को लोकतांत्रिक रूप देने और सुधार करने का फ़ैसला किया।

प्रश्न 3 (4 अंक)

प्र. सोवियत संघ के विघटन की तीन प्रमुख परिणतियाँ समझाइए।

उत्तर: पहली, शीतयुद्ध के दौर के संघर्ष की समाप्ति। समाजवादी प्रणाली पूँजीवादी प्रणाली को पछाड़ पाएगी या नहीं, यह विचारधारात्मक विवाद अब कोई मुद्दा नहीं रहा। इसी विवाद ने दोनों गुटों की सेनाओं को उलझाया था, हथियारों की तेज होड़ शुरू की थी, परमाणु हथियारों के संचय को बढ़ावा दिया था और विश्व को सैन्य गुटों में बाँटा था; अब होड़ समाप्त हुई और नई शांति की संभावना बनी।
दूसरी, विश्व राजनीति में शक्ति-संबंध बदल गए। दो ही संभावनाएँ थीं, एकध्रुवीय विश्व या बहुध्रुवीय विश्व; हुआ यह कि अमरीका अकेली महाशक्ति बन बैठा। पूँजीवादी अर्थव्यवस्था प्रभुत्वशाली हो गई, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ताकतवर सलाहकार बने, और उदारवादी लोकतंत्र राजनीतिक जीवन को सूत्रबद्ध करने की सर्वश्रेष्ठ धारणा के रूप में उभरा।
तीसरी, नए देशों का उदय हुआ, जिनकी अपनी स्वतंत्र पहचान और पसंद है। बाल्टिक और पूर्वी यूरोप के देश यूरोपीय संघ तथा नाटो से जुड़ना चाहते थे, जबकि मध्य एशियाई देशों ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फ़ायदा उठाते हुए रूस से मजबूत रिश्ता जारी रखा और पश्चिमी देशों, अमरीका तथा चीन से भी संबंध बनाए।

प्रश्न 4 (4 अंक)

प्र. शॉक थेरेपी की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: एक, हर देश को पूँजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर पूरी तरह मुड़ना था, यानी सोवियत दौर की हर संरचना से पूरी तरह निजात पानी थी।
दो, इसकी सर्वोपरि मान्यता थी कि मिल्कियत का सबसे प्रभावी रूप निजी स्वामित्व होगा; इसके अंतर्गत राज्य की संपदा का निजीकरण और व्यावसायिक स्वामित्व का ढाँचा तुरंत अपनाना शामिल था, और सामूहिक ‘फार्म’ को निजी ‘फार्म’ में बदला गया।
तीन, राज्य नियंत्रित समाजवाद या पूँजीवाद के अतिरिक्त किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था या ‘तीसरे रुख़’ को मंजूर नहीं किया गया।
चार, बाहरी रुझान बदले: मुक्त व्यापार को पूर्ण रूप से अपनाना, वित्तीय खुलापन और मुद्राओं की आपसी परिवर्तनीयता ज़रूरी मानी गई; सोवियत खेमे के आपसी व्यापारिक गठबंधन समाप्त कर दिए गए और हर देश को सीधे पश्चिमी मुल्कों से जोड़कर पश्चिमी अर्थतंत्र में समाहित किया गया।

प्रश्न 5 (4 अंक)

प्र. भारत जैसे देशों के लिए सोवियत संघ के विघटन के क्या परिणाम हुए?

उत्तर: एक, शीतयुद्ध की समाप्ति और अमरीका के अकेली महाशक्ति बन जाने से भारत को बदली हुई विश्व-व्यवस्था में अपनी विदेश नीति नए सिरे से साधनी पड़ी; भारत ने अमरीका से भी संबंध सुधारे।
दो, भारत और रूस दोनों का सपना बहुध्रुवीय विश्व का रहा, यानी कई शक्तियाँ हों, सुरक्षा की सामूहिक ज़िम्मेदारी हो, संघर्षों का समाधान बातचीत से हो, हर देश की स्वतंत्र विदेश नीति हो और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएँ मजबूत बनें।
तीन, रूस से रिश्ता जारी रहा और गहरा हुआ: 2001 के सामरिक समझौते के अंतर्गत 80 द्विपक्षीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर हुए; भारत को कश्मीर, ऊर्जा-आपूर्ति, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की सूचनाओं, पश्चिम एशिया में पहुँच और चीन के साथ संबंधों में संतुलन जैसे मसलों में फ़ायदे हुए।
चार, नए स्वतंत्र देशों के साथ नए रिश्ते बने; भारत कज़ाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से ऊर्जा-आयात बढ़ाने और तेल वाले इलाकों में साझेदारी तथा निवेश की कोशिश कर रहा है।

प्रश्न 6 (4 अंक)

प्र. शॉक थेरेपी के बाद इन देशों में लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण क्यों कमज़ोर रह गया?

उत्तर: आर्थिक बदलाव को बड़ी प्राथमिकता दी गई और उस पर पर्याप्त ध्यान भी दिया गया, पर लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण का काम उस प्राथमिकता के साथ नहीं हो सका। इन सभी देशों के संविधान हड़बड़ी में तैयार किए गए। रूस सहित अधिकांश देशों में राष्ट्रपति को कार्यपालिका प्रमुख बनाकर उसके हाथ में लगभग हरसंभव शक्ति थमा दी गई, जिससे संसद अपेक्षाकृत कमजोर संस्था रह गई। मध्य एशिया के कुछ राष्ट्रपति तो सत्तावादी हो गए; तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने पहले 10 वर्षों के लिए अपने को पद पर बहाल किया और फिर समय-सीमा अगले 10 सालों के लिए बढ़ा दी, और अपने फैसलों से असहमति या विरोध की अनुमति नहीं दी। अधिकतर देशों में न्यायिक संस्कृति और न्यायपालिका की स्वतंत्रता स्थापित करने का काम अभी भी बाकी है।

4 6 अंक के प्रश्न

प्रश्न 1 (6 अंक)

प्र. सोवियत प्रणाली क्या थी? उसकी विशेषताओं और कमज़ोरियों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

उत्तर: सोवियत संघ रूस में हुई 1917 की समाजवादी क्रांति के बाद अस्तित्व में आया। यह क्रांति पूँजीवादी व्यवस्था के विरोध में हुई थी और समाजवाद के आदर्शों तथा समतामूलक समाज की ज़रूरत से प्रेरित थी। यह मानव इतिहास में निजी संपत्ति की संस्था को समाप्त करने और समाज को समानता के सिद्धांत पर सचेत रूप से रचने की सबसे बड़ी कोशिश थी।
विशेषताएँ: राज्य और ‘पार्टी की संस्था’ को प्राथमिक महत्त्व दिया गया; सोवियत राजनीतिक प्रणाली की धुरी कम्युनिस्ट पार्टी थी और उसमें किसी अन्य दल या विपक्ष के लिए जगह नहीं थी; अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध और राज्य के नियंत्रण में थी। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सोवियत संघ महाशक्ति बनकर उभरा; अमरीका को छोड़ दें तो उसकी अर्थव्यवस्था शेष विश्व से कहीं ज्यादा विकसित थी, संचार प्रणाली उन्नत थी और उसके पास खनिज-तेल, लोहा-इस्पात तथा मशीनरी उत्पादों जैसे विशाल ऊर्जा-संसाधन थे। घरेलू उपभोक्ता-उद्योग में पिन से लेकर कार तक सब बनता था, और सरकार ने सभी नागरिकों के लिए न्यूनतम जीवन स्तर सुनिश्चित करते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा, बच्चों की देखभाल और लोक-कल्याण की चीजें रियायती दर पर दीं।
कमज़ोरियाँ: प्रणाली पर नौकरशाही का शिकंजा कसता चला गया, वह सत्तावादी होती गई और नागरिकों का जीवन कठिन होता गया। लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी न होने से लोग असहमति चुटकुलों और कार्टूनों में व्यक्त करते थे। एकदलीय शासन था और पार्टी जनता के प्रति जवाबदेह नहीं थी। पंद्रह गणराज्यों को मिलाकर संघ बना था, पर वास्तव में हर मामले में रूस का प्रभुत्व रहा और अन्य क्षेत्रों की जनता उपेक्षित तथा दमित महसूस करती थी। हथियारों की होड़ में अमरीका को टक्कर देने की भारी कीमत चुकानी पड़ी, प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढाँचे में देश पश्चिम से पीछे रह गया, और 1979 के अफ़गानिस्तान हस्तक्षेप ने व्यवस्था को और कमजोर किया। 1970 के दशक के अंतिम वर्षों में यह व्यवस्था लड़खड़ा रही थी और अंततः ठहर सी गई।

प्रश्न 2 (6 अंक)

प्र. ‘शॉक थेरेपी’ के परिणामों का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर: 1990 में अपनायी गई शॉक थेरेपी जनता को उपभोग के उस ‘आनंदलोक’ तक नहीं ले गई जिसका उसने वादा किया था; अमूमन इससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो गई।
उद्योग और निजीकरण: रूस में पूरा राज्य-नियंत्रित औद्योगिक ढाँचा चरमरा उठा और लगभग 90 प्रतिशत उद्योग निजी हाथों या कंपनियों को बेच दिए गए। पुनर्निर्माण सरकार की औद्योगिक नीति के बजाय बाज़ार की ताकतें कर रही थीं, इसलिए यह कदम सभी उद्योगों को मटियामेट करने वाला साबित हुआ। महत्त्वपूर्ण उद्योगों की कीमत कम से कम आँककर उन्हें औने-पौने दामों में बेचा गया, इसीलिए इसे ‘इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल’ कहा जाता है। नागरिकों को अधिकार-पत्र दिए गए थे, पर धन की ज़रूरत में अधिकांश ने वे कालाबाज़ारियों के हाथों बेच दिए।
मुद्रा और खाद्यान्न: रूबल के मूल्य में नाटकीय गिरावट आई और मुद्रास्फीति इतनी बढ़ी कि लोगों की जमापूँजी जाती रही। सामूहिक खेती की प्रणाली समाप्त होने से खाद्यान्न की सुरक्षा नहीं रही और रूस ने खाद्यान्न आयात करना शुरू किया। सन् 1999 में वास्तविक ‘सकल घरेलू उत्पाद’ 1989 की तुलना में कहीं नीचे था। रूस के डेढ़ हज़ार बैंकों और वित्तीय संस्थानों में से लगभग आधे दिवालिया हो गए; दूसरे सबसे बड़े बैंक इंकॉम के डूबने से ग्राहकों के अलावा दस हज़ार कंपनियों और शेयरधारकों की जमापूँजी भी डूब गई।
समाज: समाज कल्याण की पुरानी व्यवस्था क्रम से नष्ट की गई और सरकारी रियायतों के खात्मे से ज्यादातर लोग ग़रीबी में पड़ गए। मध्य वर्ग समाज के हाशिए पर आ गया और अकादमिक-बौद्धिक कामों से जुड़े लोग बिखर गए या बाहर चले गए। कई देशों में एक ‘माफिया वर्ग’ उभरा और उसने अधिकतर आर्थिक गतिविधियों पर नियंत्रण कर लिया; निजीकरण ने नई विषमताओं को जन्म दिया और अमीर-गरीब के बीच तीखा विभाजन हो गया।
मूल्यांकन: संक्रमण ज़रूरी था, पर उसकी गति और एकतरफ़ा तरीका ही मुख्य दोष रहा; लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण की उपेक्षा हुई और अर्थव्यवस्थाएँ सन् 2000 में, यानी आज़ादी के 10 साल बाद ही खड़ी होना शुरू कर सकीं, वह भी खनिज-तेल, प्राकृतिक गैस और धातु के निर्यात के सहारे; जिन देशों के क्षेत्र से तेल की पाइप-लाइन गुजरती है, उन्हें इस एवज में किराया मिलता है।

प्रश्न 3 (6 अंक)

प्र. शीतयुद्ध के दौरान भारत और सोवियत संघ के बहुआयामी संबंधों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: शीतयुद्ध के दौरान भारत और सोवियत संघ के संबंध बहुत गहरे थे; इतने कि आलोचकों को यह कहने का अवसर भी मिला कि भारत सोवियत खेमे का हिस्सा था। ये संबंध चार आयामों में फैले थे।
आर्थिक: सोवियत संघ ने भारत के सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की ऐसे वक्त में मदद की जब ऐसी मदद पाना मुश्किल था। उसने भिलाई, बोकारो और विशाखापट्टनम के इस्पात कारखानों तथा भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स जैसे मशीनरी संयंत्रों के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता दी। भारत में जब विदेशी मुद्रा की कमी थी तब सोवियत संघ ने रुपये को माध्यम बनाकर भारत के साथ व्यापार किया।
राजनीतिक: सोवियत संघ ने कश्मीर मामले पर संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत के रुख को समर्थन दिया और भारत के संघर्ष के गाढ़े दिनों, ख़ासकर सन् 1971 में पाकिस्तान से युद्ध के दौरान मदद की। भारत ने भी सोवियत संघ की विदेश नीति का अप्रत्यक्ष, लेकिन महत्त्वपूर्ण तरीके से समर्थन किया।
सैन्य: भारत को सोवियत संघ ने ऐसे वक्त में सैनिक साजो-सामान दिए जब शायद ही कोई अन्य देश अपनी सैन्य टेक्नालॉजी भारत को देने के लिए तैयार था। कई समझौते ऐसे भी हुए जिनसे भारत संयुक्त रूप से सैन्य उपकरण तैयार कर सका।
सांस्कृतिक: हिंदी फिल्म और भारतीय संस्कृति सोवियत संघ में लोकप्रिय थीं और बड़ी संख्या में भारतीय लेखकों तथा कलाकारों ने सोवियत संघ की यात्रा की। किताब का एक बॉक्स बताता है कि विघटन के सात साल बाद भी ताशकंद में हिंदी फिल्मों की वही ललक थी और राजकपूर से लेकर अमिताभ बच्चन तक इस पूरे क्षेत्र में घर-घर जाने जाते हैं।

प्रश्न 4 (6 अंक)

प्र. सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत और रूस के संबंधों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: भारत ने साम्यवादी रह चुके सभी देशों के साथ अच्छे संबंध कायम किए हैं, लेकिन सबसे गहरे संबंध रूस के साथ हैं; यह भारत की विदेश नीति का एक महत्त्वपूर्ण पहलू है। भारत-रूस संबंधों का इतिहास आपसी विश्वास और साझे हितों का इतिहास है और यह दोनों देशों की जनता की अपेक्षाओं से भी मेल खाता है।
साझा दृष्टिकोण: दोनों देशों का सपना बहुध्रुवीय विश्व का है, यानी अंतर्राष्ट्रीय फलक पर कई शक्तियाँ मौजूद हों, सुरक्षा की सामूहिक ज़िम्मेदारी हो, क्षेत्रीयताओं को ज्यादा जगह मिले, अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों का समाधान बातचीत से हो, हर देश की स्वतंत्र विदेश नीति हो, और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं द्वारा फ़ैसले हों तथा उन्हें मजबूत, लोकतांत्रिक और शक्तिसंपन्न बनाया जाए। 2001 के भारत-रूस सामरिक समझौते के अंग के रूप में 80 द्विपक्षीय दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर हुए हैं।
भारत को लाभ: कश्मीर, ऊर्जा-आपूर्ति, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान, पश्चिम एशिया में पहुँच बनाने और चीन के साथ अपने संबंधों में संतुलन लाने जैसे मसलों में फ़ायदे हुए हैं। रूस भारत की परमाण्विक योजना के लिए महत्त्वपूर्ण है और उसने भारत के अंतरिक्ष उद्योग में ज़रूरत के वक्त क्रायोजेनिक रॉकेट देकर मदद की; दोनों देश विभिन्न वैज्ञानिक परियोजनाओं में साझीदार हैं।
रूस को लाभ: भारत रूस के लिए हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार देश है और भारतीय सेना को अधिकांश सैनिक साजो-सामान रूस से मिलता है। भारत तेल के आयातक देशों में से एक है, इसलिए भी वह रूस के लिए महत्त्वपूर्ण है; रूस ने तेल के संकट की घड़ी में हमेशा भारत की मदद की है। भारत रूस के साथ-साथ कज़ाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से भी ऊर्जा-आयात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें तेल वाले इलाकों में साझेदारी और निवेश शामिल है।

प्रश्न 5 (6 अंक)

प्र. “दूसरी दुनिया के विघटन के बाद भारत को अपनी विदेश-नीति बदलनी चाहिए और रूस जैसे परंपरागत मित्र की जगह संयुक्त राज्य अमरीका से दोस्ती करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।” इस कथन के पक्ष या विपक्ष में अपने विचार लिखिए।

उत्तर: पक्ष में तर्क: सोवियत संघ के विघटन के बाद अमरीका अकेली महाशक्ति बन बैठा और पूँजीवादी अर्थव्यवस्था अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रभुत्वशाली हो गई। विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाएँ, जिन पर अमरीकी प्रभाव है, विभिन्न देशों की ताकतवर सलाहकार बन गईं। ऐसी दुनिया में प्रौद्योगिकी, निवेश और बाज़ार के लिए अमरीका से नज़दीकी भारत के हित में है, और उदारवादी लोकतंत्र भी अब राजनीतिक जीवन की सर्वश्रेष्ठ धारणा माना जाता है, जो भारत की अपनी व्यवस्था से मेल खाता है।
विपक्ष में तर्क: भारत-रूस संबंधों का इतिहास आपसी विश्वास और साझे हितों का इतिहास है। रूस ने कश्मीर मामले पर संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत का साथ दिया, 1971 के युद्ध में मदद की, इस्पात कारखानों और मशीनरी संयंत्रों में सहायता दी, और तब सैन्य टेक्नालॉजी दी जब कोई और देने को तैयार नहीं था। आज भी भारतीय सेना को अधिकांश साजो-सामान रूस से मिलता है, रूस भारत की परमाण्विक योजना और अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए महत्त्वपूर्ण है, और तेल संकट की घड़ी में उसने हमेशा भारत की मदद की है। ऐसे परखे हुए रिश्ते को छोड़ना समझदारी नहीं होगी।
निष्कर्ष: विदेश नीति किसी एक मित्र को दूसरे से बदलने का खेल नहीं है। भारत और रूस दोनों बहुध्रुवीय विश्व चाहते हैं, जहाँ कई शक्तियाँ हों और फ़ैसले संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं से हों। इसलिए बेहतर रास्ता यह है कि भारत रूस के साथ अपने पुराने रिश्ते को बनाए रखते हुए अमरीका सहित सभी शक्तियों से संबंध बढ़ाए, और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर क़ायम रहे।

5 केस स्टडी

केस स्टडी
एक बड़े देश के नए नेता ने 1980 के दशक के मध्य में तय किया कि वे पश्चिम के देशों से संबंध सामान्य बनाएँगे, अपने देश को लोकतांत्रिक रूप देंगे और व्यवस्था में सुधार करेंगे। पर जब उन्होंने व्यवस्था में ढील दी तो लोगों की आकांक्षाओं का ऐसा ज्वार उमड़ा जिसका अनुमान शायद ही कोई लगा सकता था। एक तबका कहता था कि वे बहुत धीरे चल रहे हैं, दूसरा कहता था कि वे बहुत जल्दबाजी दिखा रहे हैं। इस खींचतान में उनका समर्थन हर तरफ़ से जाता रहा।

(क) 1 अंक ये नेता कौन हैं और वे किस पद पर आए?
उत्तर: मिख़ाइल गोर्बाचेव। वे मार्च 1985 में सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव चुने गए।

(ख) 1 अंक उनके दो सुधारों के नाम लिखिए।
उत्तर: पेरेस्त्रोइका (पुनर्रचना) और ग्लासनोस्त (खुलापन)।

(ग) 2 अंक गद्यांश के आधार पर बताइए कि उनका समर्थन दोनों तरफ़ से क्यों कम हुआ।
उत्तर: जनता का एक तबका चाहता था कि वे ज्यादा तेज गति से कदम उठाएँ; ये लोग उनकी कार्यपद्धति से धीरज खो बैठे और निराश हो गए। दूसरी ओर कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य और वे लोग जो सोवियत व्यवस्था से फ़ायदे में थे, कहते थे कि उनकी सत्ता और विशेषाधिकार कम हो रहे हैं और गोर्बाचेव जल्दबाजी दिखा रहे हैं। इस खींचतान में जनमत बँट गया और समर्थन हर तरफ़ से जाता रहा।

केस स्टडी
एक क्षेत्र के गणराज्यों में हाइड्रोकार्बन संसाधनों का विशाल भंडार है। इससे इन गणराज्यों को आर्थिक लाभ हुआ है, लेकिन इसी कारण यह क्षेत्र बाहरी ताकतों और तेल कंपनियों की आपसी प्रतिस्पर्धा का अखाड़ा भी बन चला है। यह क्षेत्र रूस, चीन और अफ़गानिस्तान से सटा है तथा पश्चिम एशिया से नजदीक है। एक बड़ी घटना के बाद अमरीका यहाँ सैनिक ठिकाना बनाना चाहता था और उसने इसके लिए भुगतान भी किया।

(क) 1 अंक यह कौन-सा क्षेत्र है?
उत्तर: मध्य एशिया, यानी पूर्व सोवियत संघ के मध्य एशियाई गणराज्य।

(ख) 1 अंक गद्यांश में जिस ‘बड़ी घटना’ का ज़िक्र है, वह कौन-सी है?
उत्तर: 11 सितंबर 2001 की घटना।

(ग) 2 अंक इस क्षेत्र में रूस और चीन की दिलचस्पी किस रूप में सामने आती है?
उत्तर: रूस इन राज्यों को अपना निकटवर्ती ‘विदेश’ मानता है और उसका मानना है कि इन्हें रूस के प्रभाव में रहना चाहिए। चीन के हित खनिज-तेल जैसे संसाधनों की मौजूदगी के कारण इस क्षेत्र से जुड़े हैं, और चीनियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में आकर व्यापार करना शुरू कर दिया है।