परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, नेताओं की तालिका, विघटन की समय-रेखा, शॉक थेरेपी के परिणाम और भारत-रूस के ठोस आँकड़े। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 तीन परिभाषाएँ जो हर बार पूछी जाती हैं
‘दूसरी दुनिया’ दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पूर्वी यूरोप के जिन देशों की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था सोवियत समाजवादी प्रणाली की तर्ज पर ढाली गई, उन्हें समाजवादी खेमे के देश या ‘दूसरी दुनिया’ कहा जाता है। इस खेमे का नेता समाजवादी सोवियत गणराज्य था।
शॉक थेरेपी साम्यवाद के पतन के बाद पूँजीवाद की ओर संक्रमण का वह मॉडल, जो विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित था। हिंदी में इसका अर्थ है आघात पहुँचाकर उपचार करना।
पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त गोर्बाचेव के दो सुधार: पेरेस्त्रोइका यानी पुनर्रचना, और ग्लासनोस्त यानी खुलापन।
2 सोवियत संघ के नेता, एक तालिका में
| नेता | वर्ष | किस बात के लिए जाने जाते हैं |
|---|---|---|
| व्लादिमीर लेनिन | 1870-1924 | बोल्शेविक कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक; 1917 की रूसी क्रांति के नायक; सोवियत समाजवादी गणराज्य के संस्थापक-अध्यक्ष |
| जोजेफ स्टालिन | 1879-1953 | 1924-1953 में नेतृत्व; तेज़ औद्योगीकरण और खेती का बलपूर्वक सामूहिकीकरण; दूसरे विश्व युद्ध में जीत का श्रेय; 1930 के दशक के आतंक के लिए ज़िम्मेदार ठहराए गए |
| निकिता ख्रुश्चेव | 1894-1971 | राष्ट्रपति 1953-1964; स्टालिन की शैली के आलोचक; 1956 में कुछ सुधार लागू किए; पश्चिम के साथ ‘शांतिपूर्ण सहअस्तित्व’ का सुझाव; हंगरी के जन-विद्रोह के दमन और क्यूबा के मिसाइल संकट में शामिल |
| लिओनिड ब्रेझनेव | 1906-1982 | राष्ट्रपति 1964-1982; एशिया की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का सुझाव; चेकोस्लोवाकिया के दमन और अफ़गानिस्तान पर आक्रमण में शामिल |
| मिख़ाइल गोर्बाचेव | जन्म 1931 | अंतिम राष्ट्रपति 1985-1991; पेरेस्त्रोइका और ग्लासनोस्त; जर्मनी के एकीकरण में सहायक; शीतयुद्ध समाप्त किया |
| बोरिस येल्तसिन | 1931-2007 | रूस के पहले चुने हुए राष्ट्रपति 1991-1999; गोर्बाचेव द्वारा मास्को के मेयर बनाए गए, बाद में उनके आलोचक; 1991 में विरोध का नेतृत्व; विघटन में केंद्रीय भूमिका |
3 कहानी की कड़ियाँ
- सोवियत प्रणाली: 1917 की समाजवादी क्रांति → निजी संपत्ति की संस्था समाप्त करने की कोशिश → कम्युनिस्ट पार्टी ही धुरी, विपक्ष के लिए जगह नहीं → योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था → 15 गणराज्यों का संघ, पर वास्तविक प्रभुत्व रूस का।
- ताक़त: अमरीका को छोड़कर सबसे विकसित अर्थव्यवस्था; उन्नत संचार; विशाल ऊर्जा-संसाधन; पिन से लेकर कार तक का उत्पादन; सबके लिए न्यूनतम जीवन स्तर।
- कमज़ोरी: नौकरशाही का शिकंजा → जवाबदेही का अभाव → पार्टी अधिकारियों के विशेषाधिकार → हथियारों की होड़ की भारी कीमत → 1979 का अफ़गानिस्तान हस्तक्षेप → 1970 के दशक के अंत में व्यवस्था ठहर गई।
- गोर्बाचेव: मार्च 1985 में महासचिव → पश्चिम से संबंध सामान्य करने और लोकतांत्रिक रूप देने का फ़ैसला → पूर्वी यूरोप में हस्तक्षेप नहीं → वहाँ की साम्यवादी सरकारें एक के बाद एक गिरीं → अंदर पार्टी नेताओं का विरोध।
- विघटन: अगस्त 1991 का असफल तख़्तापलट → येल्तसिन नायक बने → सत्ता मास्को से गणराज्यों की तरफ़ → दिसंबर 1991 में रूस, यूक्रेन और बेलारूस की घोषणा → कम्युनिस्ट पार्टी प्रतिबंधित → मध्य एशियाई गणराज्य राष्ट्रकुल के संस्थापक सदस्य बनाए गए → 25 दिसंबर, 1991 को गोर्बाचेव का इस्तीफा।
4 विघटन क्यों हुआ, पाँच कारण
- आर्थिक गतिरोध और उपभोक्ता-वस्तुओं की भारी कमी; संस्थाएँ लोगों की आकांक्षाएँ पूरी नहीं कर सकीं।
- संसाधनों का अधिकांश परमाणु हथियार, सैन्य साजो-सामान और पूर्वी यूरोप के पिछलग्गू देशों पर खर्च।
- पश्चिम की तरक्की की जानकारी से अपने पिछड़ेपन का राजनीतिक-मनोवैज्ञानिक धक्का।
- 70 साल का जवाबदेही-रहित पार्टी शासन, भारी भ्रष्टाचार, गतिरुद्ध प्रशासन और सत्ता का केंद्रीकरण।
- राष्ट्रवादी भावनाओं और संप्रभुता की इच्छा का उभार, जिसे किताब विघटन का अंतिम और सर्वाधिक तात्कालिक कारण कहती है।
विडंबना याद रखिए: राष्ट्रवाद मध्य-एशियाई गणराज्यों में नहीं, बल्कि यूरोपीय और अपेक्षाकृत समृद्ध गणराज्यों (रूस, यूक्रेन, जार्जिया, बाल्टिक) में सबसे प्रबल निकला। यहीं से अभिकथन-कारण प्रश्न बनते हैं।
5 विघटन की तीन परिणतियाँ
| क्रम | परिवर्तन | क्या हुआ |
|---|---|---|
| 1 | शीतयुद्ध के संघर्ष की समाप्ति | विचारधारात्मक विवाद ख़त्म; हथियारों की होड़ समाप्त; नई शांति की संभावना |
| 2 | शक्ति-संबंधों में बदलाव | अमरीका अकेली महाशक्ति; पूँजीवादी अर्थव्यवस्था प्रभुत्वशाली; विश्व बैंक और मुद्रा कोष ताकतवर सलाहकार; उदारवादी लोकतंत्र सर्वश्रेष्ठ धारणा |
| 3 | नए देशों का उदय | बाल्टिक और पूर्वी यूरोप के देश यूरोपीय संघ तथा नाटो की ओर; मध्य एशियाई देशों ने अपनी भौगोलिक स्थिति का फ़ायदा उठाया |
6 शॉक थेरेपी: क्या किया और क्या हुआ
| जो किया गया | जो नतीजा निकला |
|---|---|
| राज्य की संपदा का तुरंत निजीकरण | लगभग 90 प्रतिशत उद्योग बिके; ‘इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल’ |
| नागरिकों को अधिकार-पत्र | अधिकांश ने धन की ज़रूरत में कालाबाज़ारियों को बेच दिए |
| सामूहिक ‘फार्म’ का अंत | खाद्यान्न की सुरक्षा गई; रूस ने खाद्यान्न आयात शुरू किया |
| मुक्त व्यापार और मुद्रा-परिवर्तनीयता | रूबल का मूल्य गिरा; मुद्रास्फीति से जमापूँजी डूबी |
| पुरानी समाज-कल्याण व्यवस्था का अंत | ग़रीबी बढ़ी; मध्य वर्ग हाशिए पर; ‘माफिया वर्ग’ का उभार |
| हड़बड़ी में बने संविधान | राष्ट्रपति बहुत ताक़तवर, संसद कमजोर; न्यायपालिका की स्वतंत्रता अब भी अधूरी |
सन् 1999 का वास्तविक ‘सकल घरेलू उत्पाद’ 1989 से नीचे · रूस के डेढ़ हज़ार बैंकों और वित्तीय संस्थानों में से लगभग आधे दिवालिया · इंकॉम, रूस का दूसरा सबसे बड़ा बैंक, डूबने से दस हज़ार कंपनियों और शेयरधारकों की जमापूँजी गई · सन् 2000 में, आज़ादी के 10 साल बाद, अर्थव्यवस्थाएँ खड़ी होने लगीं, तेल, गैस और धातु के निर्यात के सहारे; पाइप-लाइन जिनके क्षेत्र से गुजरती है उन्हें किराया मिलता है · तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने 10 वर्ष, फिर 10 वर्ष और।
| जगह | क्या हुआ |
|---|---|
| चेचन्या, दाग़िस्तान | रूस के दो गणराज्य; हिंसक अलगाववादी आंदोलन; सैन्य बमबारी में मानवाधिकार का व्यापक उल्लंघन |
| ताज़िकिस्तान | दस वर्षों यानी 2001 तक गृहयुद्ध |
| नगरनों कराबाख | अज़रबैजान का प्रांत; स्थानीय अर्मेनियाई अर्मेनिया से मिलना चाहते हैं |
| जार्जिया | दो प्रांत स्वतंत्रता चाहते हैं और गृहयुद्ध लड़ रहे हैं |
| यूक्रेन, किरगिझस्तान, जार्जिया | मौजूदा शासन को उखाड़ फेंकने के आंदोलन; इसके साथ कई देश और प्रांत नदी-जल के सवाल पर आपस में भिड़े हुए हैं |
| चेकोस्लोवाकिया | शांतिपूर्वक बँटा; चेक और स्लोवाकिया बने |
| युगोस्लाविया | सबसे गहन संघर्ष; बोस्निया-हर्जेगोविना, स्लोवेनिया और क्रोएशिया स्वतंत्र; नाटो का हस्तक्षेप और बमबारी |
| मध्य एशिया | हाइड्रोकार्बन का विशाल भंडार; 11 सितंबर 2001 के बाद अमरीका ने किराए पर ठिकाने लिए; रूस इसे निकटवर्ती ‘विदेश’ मानता है; चीन का व्यापार बढ़ा |
8 भारत के रिश्ते: सोवियत संघ और फिर रूस
| आयाम | ठोस उदाहरण |
|---|---|
| आर्थिक | भिलाई, बोकारो और विशाखापट्टनम के इस्पात कारखाने; भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स; रुपये को माध्यम बनाकर व्यापार |
| राजनीतिक | कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत के रुख का समर्थन; 1971 के युद्ध में मदद |
| सैन्य | साजो-सामान तब मिला जब कोई और देने को तैयार नहीं था; संयुक्त रूप से उपकरण बनाने के समझौते |
| सांस्कृतिक | हिंदी फिल्में और भारतीय संस्कृति लोकप्रिय; राजकपूर से अमिताभ बच्चन तक घर-घर जाने जाते हैं। किताब का ताशकंद वाला बॉक्स: दुकानदार मुहम्मद शरीफ़ के अनुसार वहाँ के लगभग 70 फीसदी लोग हिंदी फिल्में खरीदते हैं और रोज़ाना लगभग 100 वीडियो बिकते हैं; रिपोर्ट बीबीसी के लुईस हिदाल्गो की है |
| विघटन के बाद | 2001 का सामरिक समझौता और 80 द्विपक्षीय दस्तावेज़; भारत हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार; क्रायोजेनिक रॉकेट; कज़ाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से ऊर्जा-कोशिश |
- 1917: रूसी समाजवादी क्रांति · 1922: सोवियत संघ के निर्माण की संधि
- 1961: बर्लिन की दीवार बनी · 9 नवंबर 1989: दीवार गिरी (28 वर्ष, 150 किलोमीटर से ज्यादा लंबी)
- 1979: अफ़गानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप
- मार्च 1985: गोर्बाचेव महासचिव · जून 1988: लिथुआनिया में आंदोलन शुरू
- अक्टूबर 1989: वारसा समझौते के सदस्य स्वतंत्र · फरवरी 1990: 72 वर्ष का एकाधिकार समाप्त
- मार्च 1990: लिथुआनिया पहला स्वतंत्र गणराज्य · जून 1990: रूसी संसद की घोषणा
- जून 1991: येल्तसिन रूस के राष्ट्रपति · अगस्त 1991: असफल तख़्तापलट
- सितंबर 1991: तीनों बाल्टिक गणराज्य संयुक्त राष्ट्रसंघ में (मार्च 2004 में नाटो में)
- दिसंबर 1991: राष्ट्रकुल का गठन · 25 दिसंबर 1991: सोवियत संघ का अंत · 1993: जार्जिया राष्ट्रकुल में
- 1990: शॉक थेरेपी · 1999: सकल घरेलू उत्पाद 1989 से नीचे · सन् 2000: अर्थव्यवस्थाओं का उठना
- 2001: ताज़िकिस्तान का गृहयुद्ध समाप्त · 11 सितंबर 2001 · 2001: भारत-रूस सामरिक समझौता
9 अरब स्प्रिंग (CBSE का संदर्भ विषय)
यह NCERT पुस्तक में नहीं है। CBSE के 2026-27 पाठ्यक्रम में इसे “अतिरिक्त संदर्भ सामग्री” के रूप में जोड़ा गया है और वहाँ लिखा है कि यह कक्षा में चर्चा के लिए है, बोर्ड परीक्षा में इसका मूल्यांकन नहीं होगा।
- पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ़्रीका के अरब देशों में लोकतंत्र की माँग को लेकर जन-विरोध की लहर; शुरुआत ट्यूनीशिया (दिसंबर 2010) से, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और ग़रीबी के ख़िलाफ़, जिन्हें लोग निरंकुश तानाशाही का परिणाम मानते थे।
- मिस्र: 1981 से राष्ट्रपति रहे होस्नी मुबारक का शासन 2011 में व्यापक प्रदर्शनों के कारण गिरा।
- इसी तरह के प्रदर्शन यमन, बहरीन, लीबिया और सीरिया में।
- CBSE की सामग्री में शुरुआत 2009 और मुबारक का शासन 1979 से लिखा है; प्रदर्शन दिसंबर 2010 में शुरू हुए और मुबारक 1981 में राष्ट्रपति बने।