परीक्षा से ठीक पहले के दोहराव के लिए इस अध्याय का निचोड़: परिभाषाएँ, तारीख़ें, संयुक्त राष्ट्रसंघ के अंग, महासचिवों की सूची, सुधार की बहस और वे आँकड़े जो सीधे पूछे जाते हैं। विस्तार से पढ़ने के लिए पूरे नोट्स अलग से उपलब्ध हैं।
1 एक नज़र में
अंतर्राष्ट्रीय संगठन कोई शक्तिशाली राज्य नहीं होता जिसकी अपने सदस्यों पर धौंस चलती हो। इसका निर्माण विभिन्न राज्य ही करते हैं और यह उनके मामलों के लिए जवाबदेह होता है। जब राज्यों में सहमति होती है कि ऐसा संगठन बनना चाहिए, तभी वह कायम होता है, और फिर वह समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान में सदस्य देशों की मदद करता है।
निषेधाधिकार (वीटो) सुरक्षा-परिषद् के किसी स्थायी सदस्य का नकारात्मक मत है, जिससे वह अकेले किसी फ़ैसले को रोक सकता है, भले ही अन्य स्थायी सदस्यों और सभी अस्थायी सदस्यों ने उस फ़ैसले के पक्ष में मतदान किया हो।
| बात | ब्योरा |
|---|---|
| स्थापना | 24 अक्टूबर 1945; इसी दिन संयुक्त राष्ट्रसंघ दिवस |
| पूर्ववर्ती संगठन | लीग ऑव नेशंस, जो दूसरा विश्वयुद्ध (1939-45) न रोक सकी |
| मूल संस्थापक सदस्य | 51 (26 जून 1945 को 50 देश, पोलैंड 15 अक्टूबर को) |
| उद्देश्य | अंतर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना और राष्ट्रों के बीच सहयोग की राह दिखाना |
| सदस्य देश | 2011 तक 193 |
| भारत शामिल हुआ | 30 अक्टूबर 1945 |
| वर्तमान महासचिव | अन्तोनियो गुटेरेस (पुर्तगाल), नौवें, 1 जनवरी 2017 से |
संयुक्त राष्ट्रसंघ का गठन मानवता को स्वर्ग पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि उसे नरक से बचाने के लिए हुआ है।
डेग हैमरसोल्ड, संयुक्त राष्ट्रसंघ के दूसरे महासचिव (किताब में इसी वर्तनी से)
2 स्थापना की समयरेखा
| तारीख़ | क्या हुआ |
|---|---|
| अगस्त 1941 | रूजवेल्ट और चर्चिल द्वारा अटलांटिक चार्टर पर हस्ताक्षर |
| जनवरी 1942 | 26 मित्र-राष्ट्र वाशिंग्टन में मिले; दिसंबर 1943 में संयुक्त राष्ट्रसंघ की घोषणा पर हस्ताक्षर हुए |
| फरवरी 1945 | याल्टा सम्मेलन: रूजवेल्ट, चर्चिल और स्टालिन ने एक सम्मेलन करने का निर्णय किया |
| अप्रैल-मई 1945 | सेन फ़्रांसिस्को में दो महीने लंबा सम्मेलन |
| 26 जून 1945 | चार्टर पर 50 देशों के हस्ताक्षर |
| 24 अक्टूबर 1945 | संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना |
| 30 अक्टूबर 1945 | भारत संयुक्त राष्ट्रसंघ में शामिल |
3 संरचना: अंग और उनकी पहचान
| अंग | सदस्य / कार्यकाल | ख़ास बात |
|---|---|---|
| सुरक्षा-परिषद् | 15 सदस्य; 5 स्थायी + 10 अस्थायी (2 वर्ष) | निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी; स्थायी सदस्यों को वीटो |
| आम सभा | 193 सदस्यों के प्रतिनिधि | सबका एकसमान मत; प्रमुख निर्णयों में दो-तिहाई बहुमत; निर्णय बाध्यकारी नहीं |
| अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय | 15 न्यायाधीश, 9 वर्षों के लिए | चुनाव आम सभा और सुरक्षा परिषद् दोनों में पूर्ण बहुमत से; मुख्यालय हेग |
| आर्थिक और सामाजिक परिषद् | 54 सदस्य, 3 वर्षों के लिए | सभी भौगोलिक क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व |
| सचिवालय | प्रधान महासचिव, 5 सालों के लिए | नियुक्ति सुरक्षा-परिषद् की सलाह पर आम सभा करती है |
| न्यासिता परिषद् | स्थगित | अंतिम ‘ट्रस्ट टेरीटरी’ पलाउ के आज़ाद होने पर 1 नवम्बर 1994 से स्थगित |
- पाँच स्थायी सदस्य: अमरीका, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस और चीन। ये इसलिए चुने गए क्योंकि दूसरे विश्वयुद्ध के तुरंत बाद ये सबसे ज़्यादा ताकतवर थे और महायुद्ध के विजेता भी।
- अस्थायी सदस्य: दो वर्ष; अवधि के तत्काल बाद दोबारा नहीं चुने जा सकते; निर्वाचन ऐसा कि सभी महादेशों का प्रतिनिधित्व हो; वीटो नहीं।
- एजेंसियाँ: WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन), UNDP (विकास कार्यक्रम), UNHRC (मानवाधिकार आयोग), UNHCR (शरणार्थी उच्चायोग), UNICEF (बाल कोष), UNESCO (शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन)।
- चार्ट के बाक़ी नाम: कार्यक्रम और कोष UNCTAD, UNEP, UNDP, UNICEF, UNFPA, UNHCR, WFP; विशेष एजेंसियाँ ILO, FAO, UNESCO, WHO, IMF, IMO, ITU; संबद्ध संगठन IAEA, OPCW, WTO; अन्य इकाइयाँ OHCHR, UNU, UNAIDS; शोध संस्थान UNRISD; सहायक निकाय सैन्य समिति और अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (पूर्व यूगोस्लाविया, रवांडा)।
4 महासचिव: नौ नाम, एक-एक पहचान
| महासचिव | कार्यकाल · देश | पहचान |
|---|---|---|
| ट्राइग्व ली | 1946-1952 · नार्वे | कश्मीर पर भारत-पाकिस्तान युद्धविराम के प्रयास; कोरिया-युद्ध पर आलोचना; त्यागपत्र |
| डेग हैमरशोल्ड | 1953-1961 · स्वीडन | स्वेज नहर विवाद, अफ़्रीका का अनौपनिवेशीकरण; कांगो-संकट के प्रयासों के लिए मरणोपरांत नोबेल शांति पुरस्कार |
| यू थांट | 1961-1971 · बर्मा (म्यांमार) | क्यूबा मिसाइल-संकट; साइप्रस में शांतिसेना; वियतनाम युद्ध पर अमरीका की आलोचना |
| कुर्त वाल्डहीम | 1972-1981 · ऑस्ट्रिया | नामीबिया और लेबनॉन; बांग्लादेश में राहत-अभियान; तीसरे कार्यकाल का चीन ने विरोध किया |
| जेवियर पेरेज द कूइयार | 1982-1991 · पेरु | साइप्रस, अफ़ग़ानिस्तान, अल सल्वाडोर; फ़ॉकलैंड युद्ध के बाद ब्रिटेन-अर्जेंटीना मध्यस्थता |
| बुतरस बुतरस घाली | 1992-1996 · मिस्र | ‘एन अजेंडा फॉर पीस’; मोजांबिक में सफलता; बोस्निया, सोमालिया, रवांडा में असफलता के आरोप |
| कोफी ए. अन्नान | 1997-2006 · घाना | एड्स, टीबी, मलेरिया के लिए वैश्विक कोष; इराक पर हमले को अवैध करार; 2001 का नोबेल शांति पुरस्कार |
| बान की मून | 2007-2016 · कोरिया गणराज्य | इस पद पर दूसरे एशियाई; जलवायु परिवर्तन; सहस्राब्दि और सतत विकास लक्ष्य; यूएन वीमेन |
| अन्तोनियो गुटेरेस | 2017- · पुर्तगाल | नौवें महासचिव; पुर्तगाल के प्रधानमंत्री 1995-2002; UNHCR 2005-2015; सोशलिस्ट इंटरनेशनल के अध्यक्ष 1999-2005 |
5 सुधार की बहस, कड़ियों में
- दो तरह के सुधार: (1) बनावट और प्रक्रियाओं में सुधार, (2) संगठन के न्यायाधिकार में आने वाले मुद्दों की समीक्षा। सहमति यह है कि दोनों ज़रूरी हैं; असहमति इस पर कि ठीक करना क्या है, कैसे और कब।
- शीतयुद्ध के बाद के बदलाव: सोवियत संघ बिखरा · अमरीका सबसे ताकतवर · रूस-अमरीका संबंध ज़्यादा सहयोगात्मक · चीन महाशक्ति के रूप में उभरता, भारत भी अग्रसर · एशिया की अर्थव्यवस्था तेज़ · अनेक नए देश शामिल · नयी चुनौतियाँ (जनसंहार, गृहयुद्ध, जातीय संघर्ष, आतंकवाद, परमाण्विक प्रसार, जलवायु में बदलाव, पर्यावरण की हानि, महामारी)।
- 1989: शीतयुद्ध का अंत, और यह सवाल कि क्या संयुक्त राष्ट्रसंघ का होना पर्याप्त है।
- 1992 का आम सभा प्रस्ताव, तीन शिकायतें: परिषद् राजनीतिक वास्तविकताओं की नुमाइंदगी नहीं करती · उसके फ़ैसलों पर पश्चिमी मूल्यों-हितों की छाप और चंद देशों का दबदबा · बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं।
- 1 जनवरी 1997: महासचिव कोफी अन्नान ने जाँच शुरू करवाई कि सुधार कैसे कराए जाएँ।
- नए सदस्य के छह मानदंड: बड़ी आर्थिक ताकत · बड़ी सैन्य ताकत · बजट में ज़्यादा योगदान · आबादी के लिहाज से बड़ा राष्ट्र · लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान · भूगोल, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के लिहाज से विविधता की नुमाइंदगी।
- सितम्बर 2005, 60वीं सालगिरह के सात कदम: शांति संस्थापक आयोग · अत्याचारों पर विश्व-बिरादरी के उत्तरदायित्व की स्वीकृति · मानवाधिकार परिषद् (19 जून 2006 से सक्रिय) · सहस्राब्दि विकास लक्ष्य पर सहमति · हर रूप-रीति के आतंकवाद की निंदा · लोकतंत्र-कोष · न्यासिता परिषद् को समाप्त करने पर सहमति।
6 वीटो और भारत: वे आँकड़े जो पूछे जाते हैं
| आँकड़ा | मान |
|---|---|
| वीटो का इस्तेमाल (1 जून 2018 तक) | सोवियत संघ/रूस 135 · अमरीका 84 · यूके 32 · फ़्रांस 18 · चीन 11 |
| 2019 के बजट में शीर्ष योगदान | अमरीका 22.0% · चीन 12.0% · जापान 8.5% · जर्मनी 6.0% · यू.के. 4.5% |
| भारत का बजट योगदान | 0.8% (21 देशों की सूची में सबसे नीचे) |
| 1965 का विस्तार | सदस्य संख्या 11 से 15; स्थायी सदस्यों की संख्या स्थिर |
| भारत की आबादी | विश्व की कुल-जनसंख्या का 1/5वाँ हिस्सा; विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र |
- भारत का अपना सुधार-पक्ष: बदले हुए विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ की मज़बूती और दृढ़ता ज़रूरी है; यह संगठन देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और विकास को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाए; और अजेंडे में विकास का मामला प्रमुख हो, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए वह ज़रूरी पूर्व शर्त है।
- भारत के पक्ष में: सबसे बड़ी आबादी · सबसे बड़ा लोकतंत्र · लगभग सभी पहलकदमियों में भागीदारी · शांति बहाली में लंबी और ठोस भूमिका · उभरती आर्थिक-शक्ति · बजट में नियमित योगदान, भुगतान में कभी चूक नहीं · स्थायी सदस्यता का प्रतीकात्मक महत्त्व।
- भारत के विरुद्ध: पाकिस्तान का विरोध · कुछ देशों को भारत के परमाणु हथियारों की चिंता · यह आशंका कि पाकिस्तान से संबंधों की कठिनाई भारत को अप्रभावी बना देगी · यह तर्क कि भारत को लेने पर ब्राज़ील, जर्मनी, जापान और शायद दक्षिण अफ़्रीका को भी लेना पड़ेगा · यह माँग कि विस्तार हो तो अफ़्रीका और दक्षिण अमरीका को ज़रूर प्रतिनिधित्व मिले।
- निष्कर्ष: इन सरोकारों को देखते हुए निकट भविष्य में भारत या किसी और देश के लिए स्थायी सदस्य बन पाना मुश्किल लगता है।
7 एक-ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्रसंघ
- अमरीका पर अंकुश क्यों मुश्किल: वह एकमात्र महाशक्ति है और अपनी सैन्य-आर्थिक ताकत के बूते किसी भी संगठन की अनदेखी कर सकता है · बजट में सबसे बड़ा योगदानकर्ता, वित्तीय ताकत बेजोड़ · संगठन उसी के भू-क्षेत्र में है और कई नौकरशाह उसके नागरिक हैं · वीटो से वह कोई भी नागवार प्रस्ताव रोक सकता है और महासचिव के चयन में भी उसकी बात वज़न रखती है · वह शेष विश्व में फूट डालकर विरोध मंद कर सकता है।
- फिर भी बची भूमिका: यह अमरीका और शेष विश्व के बीच बातचीत कायम कर सकता है और इसने ऐसा किया भी है; इसी के जरिए 190 राष्ट्रों को एक साथ किया जा सकता है; और यही वह मंच है जहाँ अमरीकी रवैये की आलोचना की सुनवाई हो और बीच का रास्ता तथा रियायत की बात सोची जा सके।
- अंतिम पंक्ति: संयुक्त राष्ट्रसंघ में थोड़ी कमियाँ हैं, लेकिन इसके बिना दुनिया और बदहाल होगी। बढ़ती ‘पारस्परिक निर्भरता’ के कारण इसका महत्त्व निरंतर बढ़ेगा।
8 अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन
| संगठन | स्थापना | याद रखने की बात |
|---|---|---|
| अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष | वर्ष किताब में नहीं | वैश्विक वित्त-व्यवस्था की देखरेख; माँगे जाने पर वित्तीय और तकनीकी सहायता; 190 सदस्य (19 फरवरी 2024); समूह-7 के पास 41.29%, अकेले अमरीका के पास 16.52%; चीन 6.09%, भारत 2.64% |
| विश्व बैंक | 1944 | दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान औपचारिक स्थापना; विकासशील देशों पर केंद्रित; आसान ऋण और अनुदान, ज़्यादा ग़रीब देशों को अनुदान वापस नहीं चुकाने पड़ते |
| विश्व व्यापार संगठन | 1995 | वैश्विक व्यापार के नियम तय करता है; ‘जेनरल एग्रीमेंट ऑन ट्रेड एंड टैरिफ’ का उत्तराधिकारी; 164 सदस्य (29 जुलाई 2016); विकासशील देशों की शिकायत कि कार्यविधि पारदर्शी नहीं |
| अंतर्राष्ट्रीय आण्विक ऊर्जा एजेंसी | 1957 | परमाण्विक ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा, सैन्य इस्तेमाल पर रोक; अधिकारी नियमित रूप से परमाण्विक सुविधाओं की जाँच करते हैं |
| एमनेस्टी इंटरनेशनल | वर्ष किताब में नहीं | स्वयंसेवी संगठन; मानवाधिकारों की रिपोर्ट तैयार और प्रकाशित करता है; ज़ोर सरकारों के दुर्व्यवहार पर, इसलिए रिपोर्टें सरकारों को नागवार लगती हैं |
| ह्यूमन राइट्स वॉच | वर्ष किताब में नहीं | अमरीका का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन; बारूदी सुरंगों पर रोक, बाल सैनिकों का प्रयोग रोकने और अंतर्राष्ट्रीय दंड न्यायालय की स्थापना के अभियानों में मदद |
9 दोहराने से पहले की परिभाषाएँ
अंतर्राष्ट्रीय संगठन: राज्यों द्वारा आपसी सहमति से बनाया गया और उन्हीं के प्रति जवाबदेह संगठन, जो सदस्य देशों को समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान में मदद करता है।
निषेधाधिकार (वीटो): स्थायी सदस्य का नकारात्मक मत, जो अकेले किसी फ़ैसले को रोक सकता है।
स्थायी सदस्य: सुरक्षा-परिषद् के वे पाँच सदस्य जिनकी सदस्यता स्थायी है और जिनके पास वीटो का अधिकार है।
अस्थायी सदस्य: आम सभा द्वारा दो वर्षों के लिए चुने गए दस सदस्य, जिन्हें वीटो का अधिकार नहीं है और जो अवधि के तत्काल बाद दोबारा नहीं चुने जा सकते।
पारस्परिक निर्भरता: विभिन्न समाजों और मसलों के बीच जुड़ते जा रहे आपसी तार, जिनकी वजह से कोई देश अकेले अपनी समस्याएँ नहीं सुलझा सकता।
न्यासिता परिषद्: संयुक्त राष्ट्रसंघ की न्यासिता प्रणाली के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की देख-रेख करने वाला अंग, जो अंतिम ऐसे क्षेत्र पलाउ के आज़ाद होने पर 1 नवम्बर 1994 से स्थगित है।
इस अध्याय में सबसे ज़्यादा अंक तीन जगह से आते हैं: सुरक्षा-परिषद् का ढाँचा और वीटो, सुधार की बहस (1992 की तीन शिकायतें, छह मानदंड, 2005 के सात कदम), और भारत की दावेदारी के पक्ष-विपक्ष। तारीख़ों में 24 अक्टूबर 1945, 30 अक्टूबर 1945, 1 नवम्बर 1994, 1 जनवरी 1997 और 19 जून 2006 सबसे ज़्यादा पूछी जाती हैं।