इस अध्याय के परीक्षा-उपयोगी प्रश्न, अंक-वार, हर प्रश्न के पूरे उत्तर के साथ। पहले स्वयं उत्तर लिखने की कोशिश कीजिए, फिर मिलाइए।
1 1 अंक के प्रश्न
प्र. पुस्तक में दी गई समूह की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: समूह ऐसे दो या दो से अधिक व्यक्तियों की एक संगठित व्यवस्था है जो एक दूसरे से अंतःक्रिया करते हैं तथा परस्पर-निर्भर होते हैं, जिनकी समान अभिप्रेरणाएँ होती हैं, सदस्यों के बीच निर्धारित भूमिका संबंध होता है, और सदस्यों के व्यवहार को नियमित करने के लिए प्रतिमान होते हैं।
प्र. टकमैन की समूह-निर्माण की पाँच अवस्थाओं के नाम क्रम में लिखिए।
उत्तर: निर्माण या आकृतिकरण, विप्लवन या झंझावात, प्रतिमान या मानक निर्माण, निष्पादन और समापन।
प्र. समूहचिंतन क्या है?
उत्तर: समूहचिंतन एक ऐसा प्रक्रम है, जिसकी खोज इरविंग जेनिस ने की, जिसमें समूह की एकमत्य की चिंता कार्य-योजना के वास्तविक मूल्यांकन की अभिप्रेरणा को दबा देती है, जिससे तर्कहीन और अविवेचनात्मक निर्णय बनते हैं।
प्र. सामाजिक स्वैराचार को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: सामाजिक स्वैराचार एक सामूहिक कार्य पर, जिसमें परिणाम समूह के अन्य सदस्यों के साथ मिला दिए जाते हैं, कार्य करते समय व्यक्तिगत प्रयास में आई कमी है।
प्र. समूह ध्रुवीकरण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: समूह ध्रुवीकरण समूह में अंतःक्रिया और विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप समूह की प्रारंभिक स्थिति का और मज़बूत होना है।
प्र. पुस्तक का भीड़ का उदाहरण दीजिए।
उत्तर: सड़क दुर्घटना होने पर संयोगवश एकत्र हुए लोग: ये एक स्थान पर उपस्थित होते हैं, किंतु उनमें कोई संरचना, आत्मीयता की भावना या पारस्परिक निर्भरता नहीं होती।
प्र. अध्याय के अनुसार समूह में हैसियत किन दो आधारों पर दी जा सकती है?
उत्तर: हैसियत प्रदत्त हो सकती है (जैसे वरिष्ठता के कारण) या उपार्जित (विशेषज्ञता या कठिन परिश्रम से अर्जित)।
प्र. ताजफेल के न्यूनतम समूह प्रतिमान प्रयोग में ब्रिटिश स्कूली बच्चों को किन दो चित्रकारों की पेंटिंग के बीच चुनना था?
उत्तर: वैसिली वैंकडिन्सकी और पाल क्ली।
2 2 अंक के प्रश्न
प्र. पुस्तक के अपने मानदंडों के आधार पर समूह और भीड़ में अंतर बताइए।
उत्तर: समूह परस्पर-निर्भर, अंतःक्रियाशील व्यक्तियों की एक संगठित व्यवस्था है जिनकी समान अभिप्रेरणाएँ, निर्धारित भूमिकाएँ और प्रतिमान होते हैं, जैसे परिवार या कक्षा। भीड़ किसी स्थान पर संयोगवश उपस्थित लोगों का समूहन है (जैसे सड़क दुर्घटना के बाद); इसमें कोई संरचना, आत्मीयता की भावना या सदस्यों के बीच पारस्परिक निर्भरता नहीं होती, और भीड़ में व्यवहार अविवेकी होता है।
प्र. पुस्तक द्वारा बताए गए समूह और टीम के दो अंतर लिखिए।
उत्तर: (1) समूह में निष्पादन सदस्यों के व्यक्तिगत योगदान पर निर्भर करता है; टीम में व्यक्तिगत योगदान एवं दल-कार्य दोनों महत्त्व रखते हैं। (2) समूह में नेता या मुखिया कार्य की ज़िम्मेदारी लेता है; टीम में नेता होने पर भी सदस्य स्वयं अपनी ज़िम्मेदारी लेते हैं।
प्र. पुस्तक के अपने उदाहरण सहित समूह-निर्माण की दशा ‘सान्निध्य’ को समझाइए।
उत्तर: सान्निध्य का अर्थ है एक ही लोगों के साथ बार-बार संपर्क और अंतःक्रिया: एक ही कॉलोनी में रहना, एक ही विद्यालय में जाना, या एक ही खेल-मैदान में खेलना। ऐसी बार-बार होने वाली अंतःक्रिया हमें दूसरों की अभिरुचियाँ और अभिवृत्तियाँ जानने का अवसर देती है, और समान अभिरुचि, अभिवृत्ति तथा पृष्ठभूमि समूह के सदस्यों के प्रति आपकी पसंद के मुख्य निर्धारक हैं: पुस्तक कहती है कि यदि आप इसी सान्निध्य को साझा नहीं करते तो शायद आप अपने मित्र-समूह के मित्र नहीं बनते।
प्र. अध्याय के अनुसार, कौन-सी दशाएँ समूह में समूहचिंतन की संभावना बढ़ाती हैं?
उत्तर: समूहचिंतन उन समूहों में अधिक होने की संभावना है जो सामाजिक रूप से समजातीय और संसक्त हों, बाहरी लोगों से पृथक् हों, जिनमें विकल्पों पर विचार करने की परंपरा न हो, और जो निर्णय लेने में असफलता का सामना कर रहे हों या जिन्हें निर्णय के लिए उच्च कीमत चुकानी पड़ती हो।
प्र. उदाहरण सहित हैसियत के ‘प्रदत्त’ और ‘उपार्जित’ रूपों को समझाइए।
उत्तर: प्रदत्त हैसियत व्यक्ति को दी जाती है, उदाहरणतः उसकी वरिष्ठता के कारण। उपार्जित हैसियत वह है जिसे व्यक्ति ने विशेषज्ञता या कठिन परिश्रम से अर्जित किया है। पुस्तक हैसियत के अंतर का उदाहरण भी देती है: क्रिकेट टीम का कप्तान अन्य सदस्यों से ऊँची हैसियत रखता है, जबकि टीम की सफलता के लिए सभी सदस्य समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
प्र. पुस्तक के अनुसार अंतःसमूह और बाह्य समूह की श्रेणियाँ ‘वास्तविक नहीं’ क्यों हैं?
उत्तर: पुस्तक कहती है कि यद्यपि इस प्रकार का संवर्गीकरण करना एक सामान्य बात है, फिर भी ये संवर्ग वास्तविक नहीं हैं और हमलोगों के द्वारा बनाए गए हैं। कुछ संस्कृतियों, जैसे भारत, में बहुविधता को सम्मान दिया जाता है: भारत की अनोखी सामासिक संस्कृति लोगों के जीवन में और उसकी कला, स्थापत्य तथा संगीत में भी परिलक्षित होती है।
प्र. पुस्तक के रस्साकशी के उदाहरण से समझाइए कि कुछ सामूहिक कार्य सामाजिक स्वैराचार को क्यों बढ़ावा देते हैं।
उत्तर: रस्साकशी जैसे कार्य में यह पहचानना संभव नहीं होता कि हर टीम सदस्य कितना बल लगा रहा है, क्योंकि परिणाम मिला दिए जाते हैं। ऐसी स्थितियाँ सदस्यों को आराम करने और ‘मुफ़्तखोर’ बनने का अवसर देती हैं, क्योंकि किसी एक व्यक्ति के अपने योगदान को अलग से देखा या मूल्यांकित नहीं किया जा सकता: जिससे व्यक्तिगत प्रयास घट जाता है।
प्र. पुस्तक द्वारा बताए गए सामाजिक स्वैराचार के किन्हीं दो कारणों को लिखिए।
उत्तर: इनमें से कोई दो: (1) सदस्य संपूर्ण कार्य के प्रति कम उत्तरदायित्व महसूस करते हैं और इसलिए कम प्रयास करते हैं; (2) अभिप्रेरणा घटती है क्योंकि सदस्यों को पता होता है कि उनके योगदान का अलग मूल्यांकन नहीं होगा; (3) समूह के निष्पादन की तुलना दूसरे समूह से नहीं की जाती; (4) सदस्यों के बीच अनुपयुक्त (या कोई नहीं) समन्वय होता है; (5) सदस्यों के लिए उसी समूह की सदस्यता आवश्यक नहीं होती, यह मात्र व्यक्तियों का एक समुच्चयन होता है।
3 4 अंक के प्रश्न
प्र. लताने के सामाजिक स्वैराचार प्रयोग का वर्णन कीजिए और उसका मुख्य निष्कर्ष बताइए।
उत्तर: लताने और उनके सहयोगियों ने छात्रों के समूहों को जितना संभव हो उतनी ज़ोर से ताली बजाने या वाहवाही करने को कहा, क्योंकि प्रयोगकर्ता यह जानने में अभिरुचि रखते थे कि लोग सामाजिक स्थितियों में कितना शोरगुल करते हैं। उन्होंने समूह का आकार बदला: व्यक्ति अकेले थे, या 2, 4 या 6 के समूह में। परिणाम दिखाते हैं कि समूह का आकार बढ़ने पर कुल शोर बढ़ा, पर प्रत्येक सहभागी द्वारा उत्पन्न शोर वास्तव में घट गया: समूह बड़ा होने पर हर व्यक्ति ने कम प्रयास किया। इससे सामाजिक स्वैराचार प्रदर्शित हुआ: सामूहिक, मिले हुए कार्य पर व्यक्ति अकेले की तुलना में कम मेहनत करते हैं।
प्र. पुस्तक के वियतनाम युद्ध के उदाहरण सहित समूहचिंतन को समझाइए।
उत्तर: इरविंग जेनिस द्वारा खोजा गया समूहचिंतन एक ऐसा प्रक्रम है जिसमें समूह की एकमत्य की चिंता कार्य-योजना के वास्तविक मूल्यांकन की अभिप्रेरणा को दबा देती है, जिससे तर्कहीन और अविवेचनात्मक निर्णय बनते हैं। इसमें सर्वसम्मति का आभास होता है: हर सदस्य मानता है कि सब सहमत हैं, और कोई असहमति व्यक्त नहीं करता क्योंकि उसे भय रहता है कि यह समूह की संसक्ति कम करेगा और वह अलोकप्रिय हो जाएगा। ऐसे समूहों में घटनाओं को नियंत्रित करने की अपनी क्षमता का अतिरंजित भाव बनता है और वे आंतरिक सामंजस्य बनाए रखने के लिए वास्तविक ख़तरे के संकेतों को नकार या न्यूनीकृत कर देते हैं। पुस्तक का उदाहरण: 1964 से 1967 तक राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन और उनके सलाहकारों ने यह सोचकर वियतनाम युद्ध बढ़ाया कि इससे उत्तरी वियतनाम शांति-वार्ता के लिए तैयार होगा, और चेतावनियों के बावजूद ये निर्णय लिए गए। इस घोर गलत-आकलन के परिणामस्वरूप 56,000 अमरीकियों तथा 10 लाख से अधिक वियतनामियों के प्राण गए, साथ ही भारी बजट घाटे भी उत्पन्न हुए।
प्र. ताजफेल के न्यूनतम समूह प्रतिमान प्रयोग का वर्णन कीजिए और अंतःसमूह व्यवहार के बारे में इसने क्या दिखाया, बताइए।
उत्तर: ताजफेल और उनके सहयोगियों को अंतःसमूह व्यवहार के लिए न्यूनतम शर्तें जानने में रुचि थी। ब्रिटिश स्कूली बच्चों ने दो चित्रकारों, वैसिली वैंकडिन्सकी और पाल क्ली, की पेंटिंग के प्रति अपनी पसंद व्यक्त की और उन्हें बताया गया कि यह निर्णयन का प्रयोग है; उन्हें ‘वैंकडिन्सकी समूह’ या ‘क्ली समूह’ में बाँटा गया, और अन्य सदस्यों की पहचान कोड संख्या से छिपाई गई। बच्चों ने केवल कोड संख्या और समूह सदस्यता के आधार पर प्राप्तकर्ताओं में धन बाँटा: अंतःसमूह सदस्य को लगभग 7 से 19 और बाह्य समूह सदस्य को लगभग 1 से 25 तक की राशि मिलती थी। यद्यपि ये समूह एक कमज़ोर कसौटी (पेंटिंग की पसंद) पर बनाए गए थे, जिनका न कोई पुराना इतिहास था न भविष्य, फिर भी परिणामों ने दिखाया कि बच्चों ने अपने ही समूह का पक्ष लिया: यह दर्शाता है कि सबसे न्यूनतम समूह परिस्थितियों में भी अंतःसमूह-पक्षपात उभर सकता है।
प्र. पुस्तक के अपने उदाहरणों सहित प्राथमिक और द्वितीयक समूह में अंतर बताइए।
उत्तर: प्राथमिक समूह पूर्व-विद्यमान निर्माण होते हैं जो प्रायः व्यक्ति को प्रदत्त होते हैं (जैसे परिवार, जाति और धर्म), जबकि द्वितीयक समूह वे हैं जिनसे व्यक्ति अपनी पसंद से जुड़ता है (जैसे किसी राजनीतिक दल की सदस्यता)। प्राथमिक समूह में मुखोन्मुख अंतःक्रिया, घनिष्ठ शारीरिक सामीप्य और उत्साहपूर्ण सांवेगिक बंधन होता है; प्राथमिक समूह व्यक्ति के प्रकार्यों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं और विकास की आरंभिक अवस्थाओं में मूल्यों एवं आदर्शों के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाते हैं। प्राथमिक समूह की सीमाएँ कम पारगम्य होती हैं: सदस्यों के पास सदस्यता चुनने का विकल्प कम होता है। द्वितीयक समूह में संबंध अधिक निर्वैयक्तिक, अप्रत्यक्ष और कम आवृत्ति वाले होते हैं, और सदस्यता को छोड़ना तथा दूसरे समूह से जुड़ना आसान होता है।
प्र. अध्याय में बताए गए समूह संरचना के चार घटकों को समझाइए।
उत्तर: (1) भूमिकाएँ किसी दी हुई स्थिति में व्यक्ति से अपेक्षित सामाजिक रूप से परिभाषित व्यवहार हैं: जैसे पुत्र या पुत्री के रूप में बड़ों का आदर करना और पढ़ाई के प्रति ज़िम्मेदार रहना। (2) प्रतिमान या मानक समूह के सदस्यों द्वारा स्थापित, समर्थित एवं प्रवर्तित व्यवहार एवं विश्वास के अपेक्षित मानदंड हैं: समूह के ‘अकथनीय नियम’। (3) हैसियत या प्रतिष्ठा दूसरों द्वारा किसी सदस्य को दी गई सापेक्ष सामाजिक स्थिति है; यह प्रदत्त (जैसे वरिष्ठता से) या उपार्जित (विशेषज्ञता/परिश्रम से) हो सकती है: जैसे क्रिकेट कप्तान की ऊँची हैसियत, भले ही सभी सदस्य समान रूप से महत्वपूर्ण हों। (4) संसक्तता सदस्यों के बीच एकता, बद्धता और परस्पर आकर्षण है, जिससे सदस्य पृथक् व्यक्तियों के बजाय एक सामाजिक इकाई के रूप में सोचना, अनुभव करना और कार्य करना शुरू करते हैं।
प्र. पुस्तक के घूस वाले उदाहरण सहित समूह ध्रुवीकरण को समझाइए और इसके होने का कारण बताइए।
उत्तर: समूह ध्रुवीकरण समूह में अंतःक्रिया और विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप समूह की प्रारंभिक स्थिति का और मज़बूत होना है: समूह अकेले व्यक्तियों की तुलना में चरम निर्णय लेने की अधिक संभावना रखते हैं। पुस्तक का उदाहरण: घूस लेते या कोई अन्य अनैतिक कार्य करते पकड़े गए कर्मचारी का दंड उसके सहयोगी तय करते हैं। वे उसे अपराध से मुक्त कर सकते हैं या सेवा-समाप्ति का निर्णय ले सकते हैं, न कि अनैतिक कार्य के अनुरूप दंड दें। इस प्रकार समूह का निर्णय कभी-कभी एक चरम पर पहुँच सकता है। इसके तीन कारण हैं: समान विचार वाले लोगों की संगति में अपने ही दृष्टिकोण के पक्ष में नए तर्क सुनना; यह महसूस करना कि साझा मत सार्वजनिक रूप से मान्य हो रहा है, एक प्रकार का ‘अनुरूपता प्रभाव’; और समान विचार वाले लोगों को अपना अंतःसमूह मानने लगना, समूह के साथ तादात्म्य स्थापित करना और अनुरूपता दिखाना, जिससे व्यक्ति के विचार और मज़बूत हो जाते हैं।
प्र. अध्याय के पहले समीक्षात्मक प्रश्न के अनुसार, औपचारिक एवं अनौपचारिक समूह तथा अंतःसमूह एवं बाह्य समूह की तुलना कीजिए।
उत्तर: औपचारिक और अनौपचारिक समूह इस बात में भिन्न होते हैं कि समूह के प्रकार्य कितनी स्पष्टता से बताए गए हैं: औपचारिक समूह में भूमिकाएँ एवं प्रकार्य स्पष्ट रूप से घोषित होते हैं, समूह विशिष्ट नियमों या विधि पर आधारित होता है, और प्रतिमानों का एक समुच्चय व्यवस्था बनाए रखने में सहायक होता है, जैसा कि विश्वविद्यालय के उदाहरण में देखा जा सकता है। अनौपचारिक समूह का निर्माण नियमों या विधि पर आधारित नहीं होता, बल्कि सदस्यों में घनिष्ठ संबंध होता है। अंतःसमूह एवं बाह्य समूह एक भिन्न प्रकार का भेद है: ‘अंतःसमूह’ स्वयं के समूह को कहते हैं, जिसके लिए ‘हमलोग’ शब्द प्रयुक्त होता है, जबकि ‘बाह्य समूह’ दूसरे समूह को कहते हैं, जिसके लिए ‘वे’ शब्द प्रयुक्त होता है। अंतःसमूह के सदस्यों को सामान्यतः समान, अनुकूल दृष्टि से और वांछनीय विशेषकों वाला माना जाता है, जबकि बाह्य समूह के सदस्यों को भिन्न रूप से और अक्सर नकारात्मक रूप से देखा जाता है, भले ही, जैसा पुस्तक स्पष्ट करती है, ये संवर्ग वास्तविक नहीं हैं और हमलोगों के द्वारा बनाए गए हैं, और कुछ संस्कृतियों, जैसे भारत, में बहुविधता को सम्मान दिया जाता है।
4 6 अंक के प्रश्न
प्र. ‘समूह’ का अर्थ, उसकी प्रमुख विशेषताएँ, और यह व्यक्तियों के मात्र एकत्रीकरण से किस प्रकार भिन्न है, पुस्तक के अपने उदाहरणों सहित विवेचना कीजिए।
उत्तर: पुस्तक समूह को ऐसे दो या दो से अधिक व्यक्तियों की एक संगठित व्यवस्था के रूप में परिभाषित करती है जो एक दूसरे से अंतःक्रिया करते हैं तथा परस्पर-निर्भर होते हैं, जिनकी समान अभिप्रेरणाएँ होती हैं, सदस्यों के बीच निर्धारित भूमिका संबंध होता है, और सदस्यों के व्यवहार को नियमित करने के लिए प्रतिमान होते हैं। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं: (1) दो या दो से अधिक व्यक्तियों की एक सामाजिक इकाई जो स्वयं को समूह से संबद्ध समझते हैं, जिससे समूह को अपनी अलग पहचान मिलती है; (2) समान अभिप्रेरणाओं और लक्ष्यों वाला समुच्चय, जो किसी लक्ष्य की दिशा में या किसी ख़तरे से दूर कार्य करता है; (3) पारस्परिक निर्भरता, जहाँ एक सदस्य का किया कार्य दूसरों के लिए परिणाम उत्पन्न करता है (जैसे क्रिकेट में फ़ील्डर का महत्वपूर्ण कैच छोड़ना पूरी टीम को प्रभावित करना); (4) संयुक्त संबंध से अपनी आवश्यकता पूरी करने वाले व्यक्ति जो एक दूसरे को भी प्रभावित करते हैं; (5) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अंतःक्रिया करने वाला एकत्रीकरण; और (6) भूमिकाओं और प्रतिमानों से संरचित अंतःक्रियाएँ, जिससे सदस्य हर बार एक जैसे कार्य करते हैं और समूह के प्रतिमानों का पालन करते हैं। पुस्तक का चित्र 7-1 फुटबाल टीम (चित्र अ) की तुलना मैच देख रहे दर्शकगण (चित्र ब) से करता है: टीम एक समूह है क्योंकि सदस्य अंतःक्रिया करते हैं, उनकी भूमिकाएँ हैं और साझा लक्ष्य है, जबकि दर्शकगण व्यक्तियों का मात्र एकत्रीकरण है जो संयोगवश (शायद फुटबाल में साझा रुचि के कारण) एक ही स्थान और समय पर उपस्थित हैं, बिना किसी पारस्परिक निर्भरता, संरचना या निर्धारित भूमिका के। इसी प्रकार, विद्यालय समारोह देखने आए लोग एक स्थान पर तो हैं पर समूह नहीं हैं, क्योंकि उनमें पारस्परिक निर्भरता, निर्धारित भूमिकाएँ, हैसियत में अंतर या एक दूसरे से प्रत्याशाएँ नहीं होतीं: जबकि परिवार, कक्षा या क्रीड़ा-समूह में ये सभी विशेषताएँ मौजूद होने के कारण वे वास्तविक समूह हैं।
प्र. समूहचिंतन की अवधारणा, उसके कारण, उसे बढ़ावा देने वाली दशाएँ, और उसे रोकने के उपाय, पुस्तक के अपने उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: इरविंग जेनिस द्वारा खोजा गया समूहचिंतन एक ऐसा प्रक्रम है जिसमें समूह की एकमत्य की चिंता कार्य-योजना के वास्तविक मूल्यांकन की अभिप्रेरणा को दबा देती है, जिससे तर्कहीन और अविवेचनात्मक निर्णय बनते हैं। इसकी विशेषता सर्वसम्मति का आभास है: हर सदस्य मानता है कि सभी सदस्य किसी विशिष्ट निर्णय या नीति पर सहमत हैं, और कोई असहमत मत व्यक्त नहीं करता क्योंकि उसे लगता है इससे समूह की संसक्ति कम होगी और वह अलोकप्रिय हो जाएगा। ऐसे समूहों में घटनाओं को नियंत्रित करने की अपनी क्षमता का एक अतिरंजित भाव बनता है, और वे समूह के आंतरिक सामंजस्य एवं सामूहिक कुशल-क्षेम को बनाए रखने के लिए वास्तविक जगत के उन संकेतों को नकार या न्यूनीकृत कर देते हैं जो योजना के लिए ख़तरे का संकेत देते हैं। समूहचिंतन उन समूहों में अधिक होने की संभावना है जो सामाजिक रूप से समजातीय, संसक्त, बाहरी लोगों से पृथक् हों, जिनमें विकल्पों पर विचार करने की परंपरा न हो, और जो निर्णय लेने में असफलता का सामना कर रहे हों या जिन्हें निर्णय के लिए उच्च कीमत चुकानी पड़ती हो। अध्याय का उदाहरण वियतनाम युद्ध का विस्तार है: 1964 से 1967 तक राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन और उनके अमरीकी सलाहकारों ने यह सोचकर युद्ध बढ़ाया कि इससे उत्तरी वियतनाम शांति-वार्ता के लिए अग्रसर होगा, और चेतावनी के बावजूद युद्ध बढ़ाने के निर्णय लिए गए: इस घोर गलत-आकलित निर्णय के परिणामस्वरूप 56,000 अमरीकियों एवं 10 लाख से अधिक वियतनामियों की जान गई और बड़े बजट घाटे उत्पन्न हुए। समूहचिंतन को रोकने के लिए पुस्तक सुझाती है: (i) समूह सदस्यों के बीच असहमति के बावजूद आलोचनात्मक चिंतन को पुरस्कृत एवं प्रोत्साहित करना, (ii) समूह को वैकल्पिक कार्य योजनाएँ प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना, (iii) समूह के निर्णयों के मूल्यांकन के लिए बाहरी विशेषज्ञों को आमंत्रित करना, और (iv) सदस्यों को अन्य विश्वासपात्र लोगों से अपने निर्णय के संबंध में प्रतिक्रिया जानने के लिए प्रोत्साहित करना।
प्र. सामाजिक स्वैराचार को समझाइए: उसका अर्थ, वह कार्य जिसमें यह होता है, इसके प्रायोगिक प्रमाण, इसके कारण, और इसे कम करने के उपाय।
उत्तर: सामाजिक स्वैराचार एक सामूहिक कार्य पर काम करते समय व्यक्तिगत प्रयास में आई कमी है, अर्थात ऐसा कार्य जिसमें परिणाम समूह के अन्य सदस्यों के साथ मिला दिए जाते हैं। पुस्तक का उदाहरण रस्साकशी है: इसमें यह पहचानना संभव नहीं होता कि टीम का कौन-सा सदस्य कितना बल लगा रहा है, इसलिए ऐसी स्थितियाँ सदस्यों को आराम करने और मुफ़्तखोर बनने का अवसर देती हैं। लताने और उनके सहयोगियों ने इसे प्रयोग से दिखाया: छात्रों को जितना संभव हो उतनी ज़ोर से ताली/वाहवाही करने को कहा गया, क्योंकि प्रयोगकर्ता यह जानने में अभिरुचि रखते थे कि लोग सामाजिक स्थितियों में कितना शोरगुल करते हैं; समूह का आकार अकेले तथा 2, 4 और 6 के बीच बदला गया। समूह का आकार बढ़ने पर कुल शोर बढ़ा, पर प्रत्येक व्यक्तिगत सहभागी द्वारा उत्पन्न शोर वास्तव में घट गया: समूह जितना बड़ा हुआ, हर व्यक्ति ने उतना ही कम प्रयास किया। पुस्तक इसके कारण बताती है: सदस्य संपूर्ण कार्य के प्रति कम उत्तरदायित्व महसूस करते हैं; अभिप्रेरणा घटती है क्योंकि सदस्यों को पता होता है कि उनके योगदान का अलग मूल्यांकन नहीं होगा; समूह के निष्पादन की तुलना दूसरे समूह से नहीं की जाती; सदस्यों के बीच अनुपयुक्त (या कोई नहीं) समन्वय होता है; और सदस्यों के लिए उसी समूह की सदस्यता आवश्यक नहीं होती, यह मात्र व्यक्तियों का एक समुच्चयन होता है। सामाजिक स्वैराचार को हर सदस्य के प्रयास को पहचानने योग्य बनाकर, सफल कार्य-निष्पादन के लिए सदस्यों को प्रतिबद्ध कर कठोर परिश्रम का दबाव बढ़ाकर, कार्य के प्रकट महत्त्व या मूल्य को बढ़ाकर, सदस्यों को यह अनुभव कराकर कि उनका व्यक्तिगत योगदान महत्वपूर्ण है, और समूह संसक्तता को प्रबल करके, जिससे सफल परिणाम की अभिप्रेरणा बढ़ती है, कम किया जा सकता है।
प्र. समूह ध्रुवीकरण को समझाइए: उसका अर्थ, पुस्तक के उदाहरण, और इसके तीन कारण।
उत्तर: समूह ध्रुवीकरण समूह में अंतःक्रिया और विचार-विमर्श के परिणामस्वरूप समूह की प्रारंभिक स्थिति का और मज़बूत होना है: पुस्तक कहती है कि समूह अकेले कार्य करने वाले व्यक्तियों की तुलना में चरम निर्णय लेने की अधिक संभावना रखते हैं। महत्वपूर्ण निर्णय, जैसे किसी गाँव में विद्यालय स्थापित करना है या नहीं, प्रायः व्यक्तियों के बजाय समूहों द्वारा लिए जाते हैं। पुस्तक का उदाहरण: घूस लेते या कोई अन्य अनैतिक कार्य करते पकड़े गए कर्मचारी का दंड उसके सहयोगी तय करते हैं; वे उसे अपराध से मुक्त कर सकते हैं या सेवा-समाप्ति का निर्णय ले सकते हैं, न कि अनैतिक कार्य के अनुरूप दंड दें। दूसरा उदाहरण मृत्युदंड से जुड़ा है: यदि व्यक्ति पहले से इसके पक्ष में है और समान विचार वाले लोगों से इस पर चर्चा करता है, तो चर्चा के बाद उसका विचार और अधिक दृढ़ हो सकता है। पुस्तक इसके तीन कारण बताती है: पहला, समान विचार वाले लोगों की संगति में व्यक्ति को अपने ही मौजूदा दृष्टिकोण के पक्ष में नए तर्क सुनने को मिलते हैं; दूसरा, यह देखना कि अन्य लोग भी वही मत रखते हैं, यह महसूस कराता है कि यह विचार जनता द्वारा वैधीकृत हो रहा है, एक प्रकार का ‘अनुरूपता प्रभाव’; और तीसरा, समान विचार वाले लोगों को देखकर व्यक्ति उन्हें अपना अंतःसमूह मानने लगता है, समूह के साथ तादात्म्य स्थापित करता है और अनुरूपता दिखाता है, जिसके परिणामस्वरूप उसके विचार और मज़बूत हो जाते हैं।
5 केस स्टडी
(क) 1 अंक समिति की पहली अनिश्चित बैठक टकमैन की किस अवस्था को सबसे अच्छी तरह दर्शाती है?
उत्तर: निर्माण या आकृतिकरण अवस्था: समूह, लक्ष्य और उसे प्राप्त करने के तरीके को लेकर अनिश्चितता होती है, साथ ही उत्साह और भय दोनों रहते हैं।
(ख) 2 अंक उस अवस्था का नाम बताइए और समझाइए जिसमें समिति तब है जब यह तय करने को लेकर तीखी असहमति चल रही है कि ज़िम्मेदारी किसकी है।
उत्तर: यह विप्लवन या झंझावात अवस्था है: लक्ष्य कैसे प्राप्त हो, समूह और उसके संसाधनों को कौन नियंत्रित करे, और कौन क्या कार्य करे, इसे लेकर अंतरा-समूह द्वंद्व होता है। यह सामान्यतः तब समाप्त होती है जब नेतृत्व का पदानुक्रम और स्पष्ट साझा दृष्टिकोण उभरता है, जैसा समिति में बाद में होता भी है।
(ग) 3 अंक अध्याय की सामाजिक स्वैराचार की अपनी व्याख्या का प्रयोग करते हुए बताइए कि 8-सदस्यीय रस्साकशी में छात्र 2-सदस्यीय दौर की तुलना में कम प्रयास क्यों कर रहे हैं।
उत्तर: यह सामाजिक स्वैराचार है: सामूहिक कार्य में सभी का प्रयास (रस्से की गति में) मिल जाने के कारण किसी एक छात्र का व्यक्तिगत योगदान अलग से पहचानना कठिन हो जाता है, इसलिए छात्र परिणाम के प्रति कम उत्तरदायित्व महसूस करते हैं और उनके प्रयास का अलग मूल्यांकन नहीं होता, ठीक जैसा पुस्तक का अपना रस्साकशी उदाहरण बताता है। यह लताने के इस निष्कर्ष से भी मेल खाता है कि समूह बड़ा होने पर प्रति-व्यक्ति प्रयास घटता है, भले ही कुल प्रयास बढ़ जाए।